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माँ से प्रेम या पागलपन; माँ की लाश के साथ बेटा बेटी ने बिताए 5 दिन, रुला देने वाली हकीकत

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर से एक ऐसी खबर निकलकर आ रही है जो न केवल आपको हैरान कर देगी लेकिन यह सोचने पर भी मजबूर कर देगी कि इसे माँ के प्रति बच्चों का प्रेम कहें या पागलपन। टोपी बाजार क्षेत्र में रहने वाले एक भदौरिया परिवार में माँ उर्मिला भदौरिया जो शिक्षा विभाग से रिटायर्ड क्लर्क है उसकी मौत हो जाती है।उसके एक बेटा है अखंड भदौरिया और बेटी है।ऋतु भदौरिया मां की मौत के बाद बेटा बेटी किसी को नहीं बताते कि उनकी मां मर गई है और न खुद यह मानने को तैयार होते कि उनकी माँ मर चुकी है।वह मां के शव के साथ ही रहते हैं उससे बात करते हैं उसे खाना खिलाने की कोशिश करते हैं। लेकिन पांच दिन बीत जाने पर जब पूरे क्षेत्र में बदबू फैलती है और लोग पुलिस को शिकायत करते हैं तब जाकर इस मामले का खुलासा होता है।

एक मां के अपने बच्चों के प्रति प्रेम की यह एक ऐसी हकीकत है जो कहीं न कहीं हर उस व्यक्ति की आंखें नम कर गई जो वहां उपस्थित था। और हो सकता है कि हर उस व्यक्ति की आंखें भी नम कर जाए जो इस हकीकत को सुने या देखें। कुछ लोग कह रहे हैं कि बेटा अखंड और बेटी रितु मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं जबकि जानकारी मिली है कि बेटा बी.टेक. और बेटी बीएससी कर चुके हैं। हालांकि रिश्तेदार दोनों को मानसिक कमजोर मानकर उनका मजाक उड़ाते थे और माँ को अपने बच्चों का यह मजाक पसंद नहीं था इसलिए माँ ने पूरे रिश्तेदारों और समाज से दूरी बना ली थी। उनका वह मकान ही उनकी दुनिया थी उसी में मार रहती और अपने पेंशन से आए पैसों से अपने बच्चों का पालन पोषण कर रही थी। मां को अपने बच्चों से इतना प्रेम था कि वह अपने बच्चों की देखभाल को ही बस अपनी दुनिया मानती थी।

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इस पूरी घटना में यह परिवार समाज से पूरी तरह कट चुका था।मोहल्ले में ज्यादा किसी के यहां आना जाना नहीं था।रिश्तेदारी में बातचीत नहीं थी बस यही कारण बने कि यह परिवार एकांकी हो गया।मां के लिए बच्चे सब कुछ थे तो बच्चों के लिए मां सब कुछ थी और जब मां की मौत हुई तो शायद बच्चे इसे स्वीकार नहीं कर सके और मां के साथ भी वहीं पर सो जाते लेकिन कहीं ना कहीं बच्चों के मन में मां के प्रति अता प्रेम साफ परिलक्षित होता है क्योंकि इतनी बदबू की सौ दो सौ मीटर दूरी तक लोग सहन नहीं कर पा रहे थे उस बदबू में मां के शव के साथ दोनों बच्चे रह रहे थे।शव में कीड़े पड़ चुके थे लेकिन न जाने क्यों दोनों बच्चे यह बात किसी से नहीं कह रहे थे।

ग्वालियर की टोपी बाज़ार के जालम सिंह के बाड़े में रहने वाली माँ उर्मिला भदौरिया। अपने पति को पहले ही खो चुकी थी पूरी जिंदगी नौकरी करके उन्होंने बच्चों को पाला बच्चों को पढ़ाया लिखा। बच्चों की मानसिक कमजोरी को हराया समाज के सामने डटकर खड़ी रही और अपने बच्चों की हिम्मत बनी रही लेकिन जब उनकी सांसे थमी तो एक भयावह मौत उनको देखने को मिली कि उनके शव का विधिवत अंतिम संस्कार नहीं हुआ। कुछ लोग इसे दोनों बच्चों का मां के प्रति प्रेम कह रहे हैं।तो कुछ लापरवाही कह रहे हैं तो कुछ अभी भी इसे दोनों के पागलपन की इंतहा बता रहे हैं। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के समय 50 m दूर ही भयंकर बदबू थी। सभी पुलिसकर्मी मास्क लगाकर घर में घुसे और कमरे का दश देखकर हर किसी की आंखें नम हो गई।

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यह घटना एक और तो एक माँ और उसके दो बच्चों की कहानी है लेकिन दूसरी ओर यह हमारे उस समाज की भी कहानी है जो तकनीक की दौड़ में सामाजिक समरसता के मामले में कंगाल हो चुका है। एक परिवार सबसे अलग थलग होकर एकांकी जीवन कई सालों से बिता रहा था लेकिन

कथित समाज जो आस पड़ोस रिश्तेदारों और पहचान वालों से मिलकर बनता है वह संवेदनशील हो चुका था उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि एकांकी जीवन जी रहा। यह परिवार अवसाद में चला जाएगा। इनकी मानसिक हालत और खराब हो जाएगी क्योंकि यदि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर है तो उसका साथ देकर उसके साथ घुल मिलकर उसको मजबूती प्रदान की जा सकती है।लेकिन इस पूरे मामले में यह हकीकत भी सामने आ रही है कि हमारा सामाजिक ढांचा पूरी तरह बिखर चुका है। क्योंकि रोज यदि अड़ोस पड़ोस का आना जाना इनके घर होता तो इस मां की मौत के बाद इसका अंत इतना दर्दनाक न होता?????

खबर का अगला भाग कुछ ही घंटों में…

उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने दिया इस्तीफा, अचानक इस्तीफे से हर कोई हैरान

भोपाल मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश की सियासी गलियारों से एक बड़ी हलचल पैदा करने वाली खबर सामने आ रही है। विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष पद से कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि वह परिवार और क्षेत्र की जनता को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे थे। जिसके कारण पद का त्याग किया है। जिसके बाद कांग्रेस पार्टी में खलबली में मच गई। हालांकि, हेमंत कटारे की ओर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। 

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अटेर विधायक हेमंत कटारे ने पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा है कि संगठन इस पद की जिम्मेदारी किसी और दे, वह पूरा सहयोग प्रदान करेंगे। इस पद के लिए मुझे योग्य समझा गया। इसके लिए मैं हमेशा पार्टी का आभारी रहूंगा। आज अटेर विधायक हेमंत कटारे की वैवाहिक वर्षगांठ है। वह विधानसभा में करीब 4 बजे के आसपास मौजूद थे। इसके बाद वह अचानक बाहर आ गए। कटारे के इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में पार्टी संगठन में बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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आपको बता दें कि इस समय मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है और बजट सत्र के दौरान ही अभी कल ही कैलाश विजयवर्गीय संसदीय कार्यमंत्री द्वारा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के लिए अपशब्द कहे गए थे औकात में रहने की बात तक कही गई थी जिसके बाद आज पूरे प्रदेश में कांग्रेस ने कैलाश विजयवर्गीय के पुतले जलाते हुए उग्र प्रदर्शन किया था। जब विधानसभा में सत्र चल रहा हो उस बीच अचानक से उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का यह इस्तीफा कई सवाल खड़े कर रहा है। और इस्तीफे को लेकर मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर चल पड़ा है। 

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टाइगर की मौत का मामला गर्माया, डीएफओ की बढी मुश्किलें

भोपाल मध्य प्रदेश: नौरादेही टाइगर रिजर्व में कान्हा से लाए गए बाघ की मौत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। मामले में लापरवाही के आरोपों के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख ने टाइगर रिजर्व के डीएफओ रजनीश कुमार सिंह को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। वहीं वन विभाग ने बाघ की मौत की प्रारंभिक वजह टेरिटोरियल फाइट (क्षेत्रीय संघर्ष) बताई है। जानकारी के अनुसार 15 फरवरी की शाम को नौरादेही टाइगर रिजर्व में एक बाघ मृत अवस्था में मिला था। यह बाघ करीब एक माह पहले कान्हा टाइगर रिजर्व से यहां लाया गया था। 18-19 जनवरी की दरमियानी रात बाघ को रेडियो कॉलर लगाकर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया था। तब से उसकी नियमित मॉनीटरिंग की जा रही थी।

बताया गया कि बाघ की लोकेशन लगातार दो दिनों तक एक ही स्थान पर स्थिर बनी रही। रेडियो कॉलर से मिलने वाले स्टैटिक अलर्ट के आधार पर वन अमले ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जहां बाघ मृत पाया गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कराया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट में बाघ की मौत का कारण टेरिटोरियल फाइट बताया गया है, यानी क्षेत्र में वर्चस्व की लड़ाई के दौरान दूसरे बाघ से संघर्ष में उसकी जान गई।

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हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने शिकायत में कहा कि रेडियो कॉलर लगे बाघ का मृत पाया जाना और विभागीय प्रेस नोट कई संदेह पैदा करता है। दुबे के अनुसार रेडियो कॉलर हर आठ घंटे में स्टैटिक अलर्ट भेजता है, जो यह संकेत देता है कि बाघ की गतिविधि रुक गई है। ऐसे में दो दिनों तक एक ही जगह लोकेशन मिलने के बावजूद तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष हुआ था तो उसकी आवाज या हलचल निगरानी टीम को क्यों सुनाई नहीं दी? क्या मॉनीटरिंग व्यवस्था में चूक हुई? संघर्ष में शामिल दूसरा बाघ वर्तमान में कहां है और क्या वह अन्य बाघों के लिए खतरा बन सकता है? दुबे ने यह आशंका भी जताई कि यदि निगरानी में लापरवाही हुई है तो क्षेत्र में मौजूद अन्य 3-4 रेडियो कॉलर लगे बाघों की सुरक्षा भी जोखिम में हो सकती है।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर पर संज्ञान लिया गया है और डीएफओ से तीन दिन में विस्तृत जवाब मांगा गया है। अब सबकी नजर विभागीय जांच पर टिकी है कि क्या यह वास्तव में प्राकृतिक टेरिटोरियल फाइट का मामला है या मॉनीटरिंग में हुई किसी चूक का परिणाम। वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि रेडियो कॉलर से लैस बाघों की निगरानी में किसी भी प्रकार की ढिलाई भविष्य में बड़े खतरे का कारण बन सकती है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो पाएगी।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मान्यता होगी रद्द! यूपी विधानसभा में उठी मांग

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी का मामला भी गरमाया। सपा विधायक सचिन यादव ने अभी हाल ही में हुए एआई सबमिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी प्रकरण पर चर्चा करते हुए यूनिवर्सिटी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है की यूनिवर्सिटी ने देश की छवि धूमिल की है। चीन के प्रोडक्ट को अपना बताकर देश के आत्मनिर्भर भारत के सपने को चकनाचूर किया है। विधानसभा में सत्र के दौरान उन्होंने गलगुटिया यूनिवर्सिटी पर तमाम गंभीर आरोप लगाए हैं और साथ ही सख्त कार्रवाई की मांग की है। 

विधायक सचिन यादव का कहना था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद इक्यावन ए में कहा गया है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सत्यनिष्ठा राष्ट्रीय कर्तव्य है। लेकिन हमारी विधानसभा में लगातार प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के बिल आते हैं और उन्हें मान्यता देकर उन्हें बढ़ाने का काम किया जाता है। यह कोई पॉलिटिकल मुद्दा नहीं है यह यह सदन के सम्मान का प्रदेश की निष्ठा का सवाल है। इस तरह की यूनिवर्सिटी बन जाती हैं तो विश्व के मंच पर देश के मंच पर हमारे प्रदेश का नाम बदनाम करती हैं ऐसी यूनिवर्सिटी की जांच होनी चाहिए। और उन पर कार्यवाही भी होनी चाहिए।हमने इसी देश में इसी प्रदेश में आत्मनिर्भर होने का सपना देखा है। उस पर इस सदन में चर्चा हुई।मेक इन इंडिया का सपना देखा।उस पर इस सदन में चर्चा हुई।स्टार्टअप का सपना देखा उस पर इस सदन में चर्चा हुई। गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक चीन के प्रोडक्ट को अपना बताकर इन सब सपनों का चकनाचोर किया है और नौजवानों के टैलेंट से खिलवाड़ किया है।

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विधायक सचिन यादव यहीं नहीं रुके।उन्होंने उपमुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि जब मैंने कहा था कि यूनिवर्सिटी में रिसर्च होनी चाहिए तो उन्होंने कहा था कि रिसर्च की जरूरत नहीं है और अब जब किस तरह की यूनिवर्सिटी बनेंगी जहां रिसर्च नहीं होगी। और यूनिवर्सिटी बाहर के प्रोडक्ट को अपना बताएंगे तो हमारा प्रदेश कैसे आगे बढ़ेगा। बिना वेरिफिकेशन के एक चीन का प्रोडक्ट एआई सबमिट में कैसे पहुंचा यह सरकार की भी जिम्मेदारी है। तंज करते हुए उन्होंने कहा कि फोटो शूट कराने की बजाय उन्हें वेरिफिकेशन करना चाहिए था की एआई सबमिट में जो प्रोडक्ट पहुंच रहे हैं यह जो यूनिवर्सिटी पहुंच रही हैं।क्या वास्तव में वह रिसर्च करके अपने प्रोडक्ट बना रही हैं? और इसकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। मै सरकार से अनुरोध करता हूं कि इस विषय की जांच हो और यूनिवर्सिटी पर सख्त कार्रवाई हो ताकि आगे कोई यूनिवर्सिटी ऐसा नहीं कर पाए। 

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विधायक पंकज ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश में स्थित है।इसलिए इस पर निगरानी की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार की है। यह विषय केवल विश्वविद्यालय से नहीं बल्कि देश की गरिमा वैज्ञानिक क्षमताओं से जुड़ा हुआ है। एक यूनिवर्सिटी जो पैसे कमाने का अड्डा है वह हमारे बच्चों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न नहीं लगा सकती। संविधान का अनुच्छेद इक्कीस ए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व राज्य पर डालता है। सरकार यह चाहती है कि हमारे बच्चे तकनीकी शिक्षा अर्जित करके विश्व में हमारे देश का नाम रोशन करें। देश की प्रतिष्ठा को धूमिल करने इस मामले में विधायकों ने यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द करने तक की मांग रख दी।

आपको बता दें कि हाल ही में दिल्ली में आयोजित यही सबमिट में तमाम यूनिवर्सिटी ने अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट में बने प्रोडक्ट्स का प्रदर्शन किया था और गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक रोबोट डॉग का प्रदर्शन किया था जिसे वहां की प्रोफेसर नेहा सिंह ने गलगोटिया का प्रोडक्ट बता दिया था लेकिन इसके बाद चीन की मीडिया ने इस बात की आलोचना की थी कि चीन में बने रॉबर्ट डॉग को भारत की यूनिवर्सिटी ने अपना बताया है और मामला जब तूल पकड़ा तो यूनिवर्सिटी ने अपनी गलती बताने की बजाय तरह तरह के कुत्तर खुद को सही साबित करने की कोशिश की लेकिन मामला इतना बढ़ गया कि यूनिवर्सिटी के साथ साथ केंद्र सरकार और एआई सबमिट की छवि पर सवाल उठने लगे। तब आयोजकों ने केंद्र सरकार के निर्देश पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एआई समिट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। वेलकोटिया यूनिवर्सिटीज की जब से सोशल मीडिया पर जमकर किरकिरी हो रही है। लेकिन अभी तक गलगोटिया यूनिवर्सिटी के तरफ से खुद की गलती मानने वाला कोई बयान नहीं आया है।

अब विधानसभा में गलगुटिया यूनिवर्सिटी पर सख्त कार्रवाई की मांग उठी है लेकिन सरकार इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती है? अगलगोटिया यूनिवर्सिटी पर क्या कार्रवाई करती है इस बात को लेकर अभी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 

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मोटा माल देकर कुर्सी पर बैठे मोटे साहब का मोटा खेल

ग्वालियर मध्य प्रदेश: इस तरह की चर्चाएं आजकल जोरों पर हैं कि कई अधिकारी ऊपर स्तर पर सेटिंग करके कुर्सियां हथिया रहे हैं। यह बात उस समय सही लगती है जब वरिष्ठता क्रम को दरकिनार करते हुए कई जगह पर कनिष्ठ को अयोग्य को और पुराने विवादित अधिकारी को भी किसी विभाग का मुखिया बना दिया जाए। लेकिन आजकल यह प्रक्रिया सामान्य हो चुकी है और पूरे मध्यप्रदेश में कई जगह पर कई विभागों में यह देखा जाता है। ग्वालियर में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। अब हम न तो साहब बताएंगे और न विभाग। लेकिन आप सब समझ जाएंगे। क्योंकि समझने वाले समझ गए हो जो ना समझे वो????

एक मोटे साहब को अपने विभाग का मुखिया बनने का इतना शौक कि वह अपने से संबंधित हर व्यक्ति से कहा कर देते कि कैसे भी में मुखिया बन जाऊं कहीं कितना भी पैसा देना पड़े और आप यकीन मानिए कि इस बात के साक्ष्य भी रिकॉर्डिंग के रूप में उपलब्ध हैं। मोटे साहब जानते हैं कि उनके इस विभाग के मुखिया का पद मोटी कमाई का पद है और यदि वह ऊपर तक सेटिंग करके कुछ माल खर्च कर भी लेंगे तो उतना माल तो वो कुछ ही दिनों में कमा ही लेंगे और बाकी शायद उनकी कमाई के टारगेट इतने हैं कि सात पीढ़ियों के लिए जोड लेने की कहावत शायद उन पर चरितार्थ होती है क्योंकि उनके विभाग के अंदर के ही लोग और उनके विभाग से संबंधित कार्य वाले लोग अब यह कहने लगे हैं कि साहब बहुत लूट रहे हैं हर बात में मोटी रकम मांग रहे हैं। 

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विभाग ऐसा है कि सीधे जनता की सुविधाओं से जुड़ा हुआ है लेकिन जनता को कुछ मिले या न मिले। मोटे साहब का साफ कहना है कि उनको एक मोटा हिस्सा चाहिए। बाकी कुछ भी करें। और यहां सबसे बड़ी बात यह है कि मोटे साहब अपनी छवि को सुधारने के लिए तमाम कार्रवाइयाँ करते नजर आते हैं।लेकिन उनके कार्यवाही के पीछे भी यही बात निकल कर सामने आ रही है कि जहां से हिस्सेदारी नहीं आ रही वहां मोट साहब डंडा चला देते हैं और उनके डंडे। का आतंक इस तरह व्याप्त हो जाता है कि जिन पर कार्रवाई नहीं हुई है वे भी शरणागत हो जाते हैं। 

विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में आपत्ति जता चुके हैं कि उनको छोड़ नियम। विरुद्ध मोटे साहब को मुखिया बना दिया गया है लेकिन यहां मोटा माल चलता है। वहां योग्यता वरिष्ठता और अनुभव कहीं मायने नहीं रखता। और हां यदि किसी जांच एजेंसी में जांच हो भी रही हो तो भी संबंधित मंत्रालय और भोपाल में बैठे आला ऑफिसर खामोश रहते हैं क्योंकि जो मोटा माल विभाग के मुखिया बनने के बाद मोटे साहब के द्वारा वहां तक पहुंच रहा है। वह मुंह में जमे उस दही के समान हैं जो उन्हें खामोश रहने पर मजबूर कर रहा है। लेकिन फिर भी विभाग में परेशान कुछ लोग यह आस लगाए बैठे हैं के देश के कानून के घर में देर है लेकिन अंधेर नहीं और एक न एक दिन तो मोटे साहब के छोटे मोटे सारी कारनामे खुलेंगे। लेकिन वो दिन कब आएगा? यह किसी को नहीं पता…

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चलते मैच में मधुमक्खियों का हमला, अंपायर की हुई मौत कई खिलाड़ी घायल

कानपुर उत्तर प्रदेश: मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत के बाद अब मधुमक्खियों के काटने से एक और मौत हो गई है। पिछले कुछ समय में मधुमक्खियों के जानलेवा हमलों की खबरें अचानक से बढ़ गई हैं। कई जगह पर इस तरह के हमलों की घटना देखी गई हैं जिसमें या तो लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं या किसी ना किसी की मौत भी हुई है। अब एक ऐसा ही मामला क्रिकेट के मैदान से निकल कर आया है जहां क्रिकेट चल रहा था। दोनों टीमें खेल रही थीं। इसी बीच अचानक ग्राउंड। पर मधुमक्खियों का बड़ा जत्था हमला कर देता है। मधुमक्खियों से बचने के लिए खिलाड़ी इधर उधर भागते हैं लेकिन इसी बीच कुछ खिलाड़ियों और एक अंपायर को मधुमक्खियाँ बुरी तरह घेर लेती है और इस हादसे में अंपायर की मौत तक हो जाती है।

यह हैरान करने वाली घटना कानपुर में क्रिकेट मैच के दौरान हुई। इस घटना ने खेल जगत को झकझोर कर रख दिया। कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन (KCA) के वरिष्ठ अंपायर मानिक गुप्ता की मधुमक्खियों के हमले के बाद मौत हो गई। 65 वर्षीय गुप्ता केडीएमए लीग के मैच में अंपायरिंग कर रहे थे, तभी शुक्लागंज के सप्रू मैदान पर मधुमक्खियों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया। इस अप्रत्याशित हादसे में कई खिलाड़ी और अंपायर घायल हुए, जबकि मानिक गुप्ता को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस घटना के बाद कानपुर के क्रिकेट जगत में शो की लहर है। हर कोई स्तब्ध है कि अचानक से यह घटना कैसे हो गई।

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यह घटना बुधवार को वाइएमसीसी और पैरामाउंट के बीच खेले जा रहे केडीएमए लीग मुकाबले के दौरान हुई। शुक्लागंज स्थित सप्रू मैदान में खेल जारी था, तभी मधुमक्खियों का एक बड़ा झुंड मैदान में आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सफेद कपड़े पहने अंपायर मधुमक्खियों के निशाने पर आ गए। करीब 10 मिनट तक झुंड मैदान में मंडराता रहा और कई खिलाड़ियों व अंपायरों को डंक मारे गए। अफरा-तफरी के बीच खेल रोकना पड़ा और सभी ने किसी तरह खुद को बचाने की कोशिश की। गंभीर रूप से घायल मानिक गुप्ता को पहले शुक्लागंज के दो निजी अस्पतालों में ले जाया गया। वहां से उनकी हालत नाजुक देखते हुए उन्हें एलएलआर अस्पताल रेफर किया गया। बाद में हृदय रोग संस्थान ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, मधुमक्खी के डंक से शरीर में तेज एलर्जिक रिएक्शन हुआ जिससे हृदय गति और रक्तचाप अचानक बढ़ गया। यह स्थिति जानलेवा साबित हुई।

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फीलखाना निवासी मानिक गुप्ता पिछले 30 वर्षों से केसीए अंपायरिंग पैनल का हिस्सा थे। उन्होंने स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर अनेक मुकाबलों में अंपायरिंग की थी। खेल के प्रति उनका समर्पण और निष्पक्षता उन्हें खिलाड़ियों और अधिकारियों के बीच सम्मान दिलाती थी। घटना के बाद केसीए चेयरमैन डॉ. संजय कपूर ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि गुप्ता खेल के लिए समर्पित और अनुभवी अंपायर थे। केसीए परिवार इस कठिन समय में उनके परिवार के साथ खड़ा है और हर संभव सहायता प्रदान करेगा।

पेनिट्रेशन नहीं तो रेप नहीं; हाईकोर्ट जज ने दिया बलात्कार पर यह फैसला

छत्तीसगढ़ डिजिटल डेस्क: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में  कहा कि ‘अगर घटना के दौरान पेनिट्रेशन नहीं हुआ तो इसे रेप नहीं, बल्कि रेप की कोशिश माना जाएगा।’ बीते सोमवार को यह फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने आरोपी की सात साल की सजा घटाकर साढ़े तीन साल कर दी। अपने इस फैसले से पहले कोर्ट ने पीड़िता के मेडिकल रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने एक अपील में यह निर्णय पारित किया। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने 16 फरवरी के आदेश में कहा, ‘इस अदालत ने माना कि दुष्कर्म सिद्ध करने के लिए ‘पेनिट्रेशन’का प्रमाण आवश्यक है, भले ही वह आंशिक ही क्यों न हो। प्रस्तुत मामले में उपलब्ध साक्ष्यों से पूर्ण बलात्कार सिद्ध नहीं होता, लेकिन आरोपी द्वारा बलात्कार का प्रयास किया जाना अवश्य सिद्ध होता है।’धमतरी जिले की निवासी पीड़िता 21 मई 2004 को जब घर पर अकेली थी तब आरोपी उसे बहाने से अपने घर ले गया और उससे कथित तौर पर दुष्कर्म किया। बाद में उसे कमरे में बंद कर उसके हाथ-पैर बांध दिए। इस घटना के संबंध में थाना अर्जुनी में मामला दर्ज कराया गया।

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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 19 गवाहों से सवाल जवाब किये। पीड़िता ने अपने बयान में आरोपी द्वारा जबरन यौन संबंध बनाने की बात कही, हालांकि जिरह में उसने ‘पेनिट्रेशन’ को लेकर विरोधाभासी बयान दिया। उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 21 जनवरी 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसे 16 फरवरी को सुनाया गया। फैसले के अनुसार उच्च न्यायालय ने पूरे मामले में साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए पाया कि पीड़िता के बयान में ‘पेनिट्रेशन’ को लेकर स्पष्टता नहीं है। न्यायालय ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों से दुष्कर्म सिद्ध नहीं होता, लेकिन आरोपी द्वारा दुष्कर्म का प्रयास किया जाना जरूर सिद्ध होता है।

उच्च न्यायालय ने गोंड को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(1) और 511 के तहत दोषी ठहराया, न कि केवल धारा 376 के तहत, और उसे तीन साल छह महीने के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, धारा 342 के तहत छह महीने की सजा भी बरकरार रखी गई। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि आरोपी द्वारा पूर्व में काटी गई सजा का समायोजन किया जाएगा। अदालत ने आरोपी की जमानत रद्द कर दी और उसे निर्देश दिया कि वह दो माह के भीतर अधीनस्थ अदालत में आत्मसमर्पण करे, वरना उसकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई की जाएगी। 

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एसबीआई योनो एप कराया डाउनलोड, और हो गई 10 लाख की ऑनलाइन ठगी

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ऑनलाइन फ्रॉड के मामले शहर में थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। एयरफोर्स से रिटायर्ड वारंट ऑफिसर के साथ ठगी हुई है। ठग ने खुद को SBI की हेड ब्रांच का अधिकारी बताकर भरोसा दिलाया कि उसे उनका लाइफ सर्टिफिकेट बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। बातचीत के दौरान उसने उन्हें YONO ऐप डाउनलोड करवाया और चालाकी से पिन नंबर पूछ लिया। इसके बाद उनके खाते से 9.87 लाख रुपए निकाल लिए गए। पीड़ित ने हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

घटना 30 दिसंबर 2025 थाना गोले का मंदिर क्षेत्र की है, एयरफोर्स से रिटायर्ड वारंट ऑफिसर 79 वर्षीय घनश्याम दत्त शुक्ल के मोबाइल पर कॉल आया। और कथित कॉलर ने पीड़ित के मोबाइल में YONO ऐप डाउनलोड करवाया। जब पीड़ित ने शक जताया कि कहीं धोखाधड़ी तो नहीं होगी, तो उसने भरोसा दिलाया कि वह सिर्फ सेवा के लिए कॉल कर रहा है।

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बस यही रिटायर्ड ऑफिसर से चूक हो गई और बातों में उलझाकर ठग ने पिन नंबर हासिल कर लिया और चार किश्तों में खाते से 9 लाख 87 हजार रुपए निकाल लिए। ठगी का शिकार होने के बाद 1 जनवरी 2026 को पीड़ित का मोबाइल भी चोरी हो गया। बाद में जब वह बैंक पहुंचे तो फ्रॉड का पता चला। बैंक से जानकारी लेने के बाद उन्होंने हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर गोला का मंदिर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार हेल्पलाइन पर ई-जीरो एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसके बाद मामला उनके पास आया है और अब इसकी जांच की जा रही है।

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अपनी बीबी का पोर्न वीडियो ही कर दिया वायरल, व्यूज की चाहत की चौंकाने वाली हकीकत

रीवा मध्य प्रदेश: सोशल मीडिया पर वायरल होने का पागलपन आजकल कुछ लोगों पर इस तरह सवार है कि वह किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।आप इंस्टाग्राम पर लड़कियों द्वारा डाले गए तमाम अश्लील वीडियो देख सकते हैं जिसमें वह सारी हदें पार कर जाती हैं। लेकिन अब एक युवक का ऐसा मामला सामने आ रहा है जिसने व्यूस पाने की और ज्यादा वायरल होने की चाह में अपने पत्नी के साथ बनाए गए अंतरंग संबंधों को कैमरे में कैद कर इंटरनेट मीडिया पर अपलोड कर दिया। और यह सब उसने सोच समझकर एक प्लानिंग के तहत किया और करने के बाद उसे इसका कोई पछतावा भी नहीं है। 

पुलिस जांच में इस पूरे मामले में जो खुलासे हो रहे हैं वह किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। आरोपी पति लंबे समय से अश्लील साइट्स देखने का आदी था और खुद को पोर्न इंडस्ट्री का स्टार समझने लगा था। इसी सनक में उसने पत्नी के साथ निजी पलों का वीडियो रिकॉर्ड किया। जब पत्नी ने वीडियो वायरल होने पर विरोध किया तो पति ने बिना किसी पछतावे के कहा कि उसने यह सब जानबूझकर किया है ताकि लोग उसे पहचानें और वह पॉपुलर हो जाए। मतलब वायरल होने कि ऐसी सनक कि इस सनक में उसने खुद के साथ साथ अपने पत्नी की इज्जत भी दांव पर लगा दी। 

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पीड़िता के परिवार ने इस पूरे मामले में दहेज का एंगल भी जोड़ दिया है और आरोप लगाया है कि इस घिनौनी करतूत के पीछे सिर्फ सनक नहीं बल्कि दहेज का लालच भी था। 10 मई को हुई शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष 3 लाख रुपये की मांग कर रहा था। 1 लाख रुपये बकाया होने के कारण आरोपी अक्सर विवाद करता था। आरोप है कि दहेज की रकम न मिलने पर उसने अपनी पत्नी से बदला लेने के लिए उसका वीडियो सार्वजनिक कर दिया और उसे कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा।

वीडियो वायरल होने के बाद जब रिश्तेदारों और गांव वालों तक यह बात पहुंची तो सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर दौड़ गई। यूजर्स ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उसने मेरी जिंदगी तबाह कर दी। वह वीडियो मेरे परिचितों को भी भेजता रहा। मैं अब समाज का सामना कैसे करूं? इंटरनेट यूजर्स इसे सिर्फ साइबर क्राइम नहीं बल्कि एक महिला की गरिमा की हत्या मान रहे हैं। रीवा के समान थाना क्षेत्र में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर ली है। पता चला है कि वह मुंबई फरार हो गया है। सीएसपी राजीव पाठक के मुताबिक पुलिस की एक टीम मुंबई भेजी जा रही है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस ने इस मामले में आईटी एक्ट और दुष्कर्म व धमकी की धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।

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रीवा से निकल कर आई यह घटना हैरान तो करती ही है। साथ में यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या आजकल पारिवारिक मूल्य और सामाजिक नीतियाँ इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि एक पुरुष इस बात का भी लिहाज नहीं कर रहा है कि वह अपनी ही पत्नी की आबरू इस तरह नीलाम कर दे। शायद हमारे कुछ पौराणिक कथाओं जैसे महाभारत में भी इस तरह की एक घटना का वर्णन है कि किस तरह खुद की जीत की सनक में पांडव अपनी पत्नी को भी दांव पर लगा देते हैं। लेकिन शायद ये कथाएं हमें यह सबक देने के लिए है कि इस तरह की घटनाओं का अंत क्या होता है और एक सभ्य समाज में इनका कोई स्थान नहीं है।

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मौसम में बदलाव के साथ बढ़ती हैं बीमारियां! क्या हैं कारण कैसे करें बचाव

डिजिटल डेस्क हेल्थ अपडेट: आप हमेशा देखते होंगे कि जब मौसम में बदलाव होता है तो बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है और हर घर में कोई न कोई वायरल इन्फेक्शन की जकड़ में नजर आता है। क्या कारण है कि मौसम बदलते ही यह बीमारियाँ बढ़ती हैं और कैसे इनसे बचा जा सकता है यह जानने के लिए आप इस पूरे आर्टिकल को आखिरी तक पढ़ें। आजकल मौसम में बदलाव के साथ कड़ाके की सर्दी कम होने लगती है और अचानक खांसी-जुकाम और सांस की बीमारियों की बाढ़ सी आ गई है। अस्पतालों में वायरल इन्फेक्शन के मरीज ज्यादा संख्या में पहुंच रहे हैं। इन बीमारियों के सिम्टम्स ने अपना पैटर्न भी बदला है। 

जब भी मौसम में बदलाव होता है तो जिन्हें मौसमी बीमारी कहते हैं उनके मरीजों में इजाफा होता है। यह कोई इत्तेफाक नहीं है। जब तापमान में उतार-चढ़ाव होता है, तो अक्सर हमारी इम्युनिटी कमजोर पड़ जाती है और हम आसानी से बीमार पड़ने लगते हैं, लेकिन इसका असली कारण सिर्फ ठंड नहीं, बल्कि हवा का सूखापन और हमारे फेफड़ों की नमी का कम होना है। एक और मौसम बदलने पर जहां हमारी इम्यूनिटी कमजोर पड़ जाती है तो वहीं मौसम बदलने पर जब एक मॉडरेट तापमान की स्थिति बनती है तो वह स्थिति कई वायरस और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल होती है और उस सामान्य तापमान में वह ज्यादा सक्रिय होते हैं और ज्यादा प्रभावशाली भी हो जाते हैं। 

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सर्दियों के दौरान हमारी इम्युनिटी अक्सर कम हो जाती है। ठंडी हवा और सूखापन हमारी सांस की नली की नमी को छीन लेते हैं। आमतौर पर, हमारे वायुमार्ग में एक सुरक्षात्मक तरल होता है जो वायरस और बैक्टीरिया को फंसाकर बाहर निकालने में मदद करता है, लेकिन सर्दियों में, विशेष रूप से हीटर और ब्लोअर के इस्तेमाल से, यह प्रोटैक्टिव बैरियर ड्राई हो जाता है। नतीजतन, वायरस और बैक्टीरिया आसानी से साफ नहीं हो पाते और सांस की नली में लंबे समय तक टिके रहते हैं, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, कई तरह के रेस्पाईटरी वायरस ठंड में ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं और आसानी से फैलते हैं। ठंड के कारण लोग बंद कमरों में एक-साथ ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे भी संक्रमण एक-दूसरे में तेजी से फैलता है।

मौसम के इस बदलाव का असर हर किसी पर एक जैसा नहीं होता। डॉक्टर बताते हैं कि इस दौरान कुछ खास लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत पड़ती है:

  • 10 साल से कम उम्र के बच्चे: क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ होता है।
  • 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग: बढ़ती उम्र के साथ उनकी इम्युनिटी कम हो जाती है और डायबिटीज या दिल की बीमारी जैसी अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
  • सांस के मरीज: जिन्हें पहले से अस्थमा, COPD या फेफड़ों की कोई पुरानी बीमारी है, उनके लिए मामूली संक्रमण भी गंभीर रूप ले सकता है।

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मौसम बदलते समय शरीर कुछ संकेत देता है जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अगर आपको लगातार खांसी आ रही हो, बहुत ज्यादा बलगम बन रहा हो, लगातार छींकें आ रही हों, सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में जकड़न महसूस हो या असामान्य थकान लगे, तो सतर्क हो जाएं। अगर खांसी-जुकाम के लक्षण उम्मीद से ज्यादा समय तक रहें या ठीक होने के बजाय बिगड़ने लगें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। मौसम के बदलाव के साथ यह बीमारियां होना आजकल सामान्य हो गया है। इसका मुख्य कारण हमारी इम्यूनिटी का कमजोर होना ही है। लेकिन इन मौसमी बीमारियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।यदि लंबे समय तक सिम्टम्स दिखाई दें तो चिकित्सकीय परामर्श से ही दवाओं का सेवन करना चाहिए। 

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