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हर माल 10 रुपये; मेले की जान गरीबों की शान

ग्वालियर, मध्य प्रदेश: आकर्षक रोशनी में नहाए भव्य शोरूम और आधुनिक दुकानों के बीच ग्वालियर व्यापार मेला की असली आत्मा उन छोटी-छोटी दुकानों में बसती है, जहाँ कम कीमत में जरूरत और खुशी दोनों मिल जाती हैं। यही कारण है कि श्रीमंत माधवराव सिंधिया ग्वालियर व्यापार मेला केवल वैभव का प्रदर्शन नहीं, बल्कि आमजन के जीवन से जुड़ा एक जीवंत उत्सव बनकर उभरता है।
लगभग 121 वर्षों की परंपरा को समेटे श्रीमंत माधवराव सिंधिया ग्वालियर व्यापार मेला समय के साथ बदला जरूर है। अब मेले में बड़े इलेक्ट्रॉनिक, फर्नीचर और वाहनों के शोरूम सजते हैं। लेकिन “हर माल 10 रुपये” से लेकर “हर माल 150 रुपये” वाली दुकानों की चमक आज भी उतनी ही कायम है। इन दुकानों पर उमड़ती सैलानियों की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि मेला आर्थिक रूप से सम्पन्न वर्ग के साथ-साथ सामान्य और कमजोर आय वर्ग की जरूरतों को भी समान सम्मान देता है।

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मेले में सजी “हर माल 10 रुपये” की दुकानों से सैलानी रूमाल, हेयर बैंड, रबर क्लिप, कंघे, चाय की छन्नी और बच्चों के खिलौने खरीदते नजर आते हैं। वहीं “हर माल 20 रुपये” की दुकानों पर पर्स, की-रिंग, प्लास्टिक टब, डलिया, गमले और डस्टबिन लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। इसी तरह “हर माल 50 रुपये” वाली दुकानों पर पूजा की थाली, गैस चूल्हा स्टैंड, चमचे, छलनी, टॉर्च, पानी की बोतल, टिफिन, किसनी और फ्राई पैन की खूब बिक्री हो रही है। इसके अतिरिक्त 100, 150 और 200 रुपये की दुकानों पर लोअर, गरम स्वेटर और जैकेट खरीदने वालों की भीड़ सर्दी की जरूरत और मेले की उपयोगिता दोनों को दर्शाती है।
कहना गलत नहीं होगा कि ग्वालियर व्यापार मेला केवल खरीद-बिक्री का स्थान ही नहीं, बल्कि जनजीवन की जरूरतों, लोककला की सादगी और बाजार की आत्मा का सुंदर संगम है। यहाँ हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ है और शायद यही वजह है कि यह मेला पीढ़ियों से लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए है।

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सीएम हेल्पलाइन शिकायतों में लापरवाही की सजा, 19 अधिकारियों का कटेगा 3-3 दिन का वेतन

ग्वालियर मध्य प्रदेश: सीएम हैल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज शिकायतें अटेंड न करना 19 अधिकारियों को भारी पड़ा है। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने इन सभी अधिकारियों का तीन-तीन दिन का वेतन काटने के लिये अलग-अलग आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई गत अक्टूबर माह में प्राप्त हुईं सीएम हैल्पलाइन की शिकायतों के आधार पर एल-1 स्तर के अधिकारियों के खिलाफ विधिवत नोटिस जारी कर की गई है। आपको बता दें कि जब तमाम विभागों में शिकायत का निराकरण नहीं होता है तब मजबूरन शिकायतकर्ता को सीएम हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ता है लेकिन सीएम हेल्पलाइन पर की गई शिकायतें भी वापस इन्हीं अधिकारियों के पास जाती हैं। जिसके चलते यह इनके निराकरण में लापरवाही बरतते हैं।

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जिन 19 अधिकारियों का 3 – 3 दिन का वेतन काटने के आदेश दिए गए हैं, उनमें रीजनल मैनेजर संस्थागत वित्त प्रियंका बंसल, रवि रंजन, अफाक मंसूरी, प्रत्यूष श्रीवास्तव, अजय सिंह, देवेन्द्र पाल सिंह व शंकरानंद झा, नगर निगम के सीवर सेल के सहायक यंत्री के. सी. अग्रवाल, उप प्रबंधक विद्युत वितरण कंपनी आशीष कुमार रोशन, सहायक यंत्री विद्युत तानसेन नगर महेन्द्र सिंह कौशल, उप प्रबंधक विद्युत करहिया विपिन कुमार उइके, सहायक महाप्रबंधक संस्थागत वित्त नितेश कुमार सिन्हा, नोडल अधिकारी विक्रांत विश्वविद्यालय धीरज सेन, सहायक संपत्ति अधिकारी नगर निगम अजय जैन, मुख्य नगर पालिका अधिकारी पिछोर पियूष श्रीवास्तव, रीजनल मैनजर इण्डसंड बैंक संस्थागत वित्त सचिन गुजराती, पशु चिकित्सा अधिकारी मुरार डॉ. कृष्ण कुमार शर्मा, आंचलिक प्रबंधक संस्थागत वित्त विकास रंजन व भवन निरीक्षक स्थायी अतिक्रमण नगर निगम छाया यादव शामिल हैं।

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कलेक्टर रुचिका चौहान ने इन गैर जिम्मेदार अधिकारियों का वेतन काटने के आदेश जारी करने के साथ-साथ इन सभी को स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि भविष्य में सीएम हैल्पलाइन से संबंधित शिकायतों के निराकरण में पूरी सतर्कता बरतें व उत्तरदायित्व का निर्वहन करें। साथ ही शासन के द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का अक्षरश: पालन करते हुए निराकरण सुनिश्चित करें। आपको बता दें कि तमाम विभागों के अधिकारी सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण में लापरवाही करते हैं। अब ऐसी उम्मीद की जा रही है कि कलेक्टर रुचिका चौहान की इस सख्ती के बाद इन उन्नीस अधिकारियों के साथ साथ अन्य तमाम अधिकारी भी सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को गंभीरता से लेंगे।

सुरेश कलमाड़ी का 81 की उम्र में निधन, राजनीति और खेल जगत में शोक की लहर

नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भारतीय ओलंपिक संघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी का 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. कलमाड़ी काफी समय से बीमार थे. उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक, सामाजिक और खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई. पुणे और कांग्रेस ने अपने एक ऐसे नेता को खो दिया, जिनका प्रभाव दशकों तक शहर की राजनीति और विकास पर साफ तौर पर दिखाई देता रहा. 

जानकारी के अनुसार, सुरेश कलमाड़ी का पार्थिव शरीर मंगलवार दोपहर 2 बजे तक पुणे स्थित उनके निवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा. इसके बाद शाम 3:30 बजे वैकुंठ श्मशानभूमि में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

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आंगनवाड़ी में निकली बंपर भर्ती, ऐसे करें आवेदन

ग्वालियर मध्य प्रदेश: जिले की विभिन्न बाल विकास परियोजनाओं में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आंगनवाड़ी सहायिका के रिक्त पदों की पूर्ति के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरु होने जा रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में रिक्त पदों के आधार पर यह भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जो महिलाएं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के रूप में काम करना चाहती हैं और अपने क्षेत्र के लोगों को विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाएँ समाज हित की भावना से पहुंचाना चाहती हैं उनके लिए यह रोजगार का एक सुनहरा अवसर है। 

कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास उपासना राय से प्राप्त जानकारी के अनुसार भर्ती की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी।जिले की विभिन्न आंगनवाड़ियों में कई पद रिक्त हैं। उनकी भर्ती के लिए यह आवेदन प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसमें कुल 105 पदों पर भर्ती की जायेगी। इनमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के 40 व आंगनवाड़ी सहायिकाओं के 65 पद शामिल हैं। यह भर्ती प्रक्रिया एमपी ऑनलाईन द्वारा निर्मित चयन पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाएगी। इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी पोर्टल पर ऑनलाईन आवेदन कर सकते हैं। चयन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाईन आवेदन पत्र 10 जनवरी 2026 तक भरे जा सकते हैं। आवेदन पत्र में त्रुटि सुधार की अंतिम तिथि 12 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। 

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नियुक्ति से संबंधित नियम, निर्देश, शर्ते, आवेदन का प्रारूप, शैक्षणिक योग्यता एवं अन्य आवश्यक अर्हताओं की विस्तृत जानकारी चयन पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है। विभाग द्वारा अभ्यथियों से अपील की गई है कि आवेदन करने से पूर्व सभी दिशा- निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा यह यह भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी एवं ऑनलाईन माध्यम से की जा रही है, जिससे पात्र महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। विस्तृत जानकारी के संबंध में कलेक्ट्रेट स्थित जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला-बाल विकास के कार्यालय में भी संपर्क किया जा सकता है। 

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कागजों में अमृत हकीकत में जहर, शुद्ध जल न मिलने से हर साल 4 लाख मौतें

डिजिटल डेस्क; शुद्ध जल अभियान; इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौत ने पूरे देश को झंझोर के रख दिया है और अब यह सवाल खड़ा हो रहा जो पानी हमें सप्लाई में दिया जा रहा है क्या वह शुद्ध है? कहीं ऐसा तो नहीं कि आप भी अपने शहर में अशुद्ध और खतरनाक पानी पी रहे हों। यदि आप भी पेयजल से संबंधित हकीकत जानना चाहते हैं तो यह खबर अंत तक जरूर पढ़ लें। कड़वी हकीकत यह है कि आज तक कई राज्यों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति उनके कार्यों की प्राथमिकता में नहीं है। इसी के चलते लापरवाही से पेयजल आपूर्ति की जाती है और कोई भी कमी पेशी होने पर उसे हल्के में लिया जाता है।

शुद्ध जल प्रदान करने के लिए जो बजट दिया जाता है उसके आंकड़े अब आपको चौंका देंगे। आंकड़े आपको इसलिए नहीं चौंकाएंगे कि बजट कम है बल्कि इसलिए चौंकाएंगे कि बजट होते हुए भी सरकारों ने काम ही नहीं किया। शुद्ध पेयजल की आपूर्ति व सीवर लाइन के लिए स्वीकृत 1.93 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं में से केवल 44 हजार करोड़ के काम पूरे हो पाए हैं जबकि अमृत (अटल नवीनीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन) की अवधि इसी साल मार्च में खत्म हो रही है।

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सीवर और पेयजल लाइन की खराब प्लानिंग व डिजायन, जल संचयन के अपर्याप्त प्रबंधन और शुद्धीकरण के लिए इंतजाम व निगरानी के अभाव ने ऐसी स्थिति खड़ी कर दी है कि कोई भी शहर ऐसा नहीं जहां कुछ आबादी तक अशुद्ध जल न पहुंचता हो। शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के कान में घंटी तब बजती है, जब मौतें होती हैं। इंदौर में भी यही हुआ है। अब डेढ़ दर्जन मौतों के बाद जिम्मेदार लकीर पीट रहे हैं और सबसे दुखद पहलू यह है कि इतने गंभीर मुद्दे पर भी जमीनी स्तर पर मजबूत योजना न बनते हुए राजनीति शुरू हो गई है। यह हालात उस इंदौर के रहे जिसे कागजों पर नंबर वन स्मार्ट सिटी बना दिया गया और वहां भी पेयजल सप्लाई के हालात जब इतने बदतर हैं तो आपके शहर में हालात क्या होंगे आप अंदाजा लगा सकते हैं। 

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खाकी पर खूनी हमला, प्रेमी युगल को सुरक्षा देने वाले पुलिसकर्मियों को हाइवे पर दौड़ाकर पीटा

गुना मध्य प्रदेश: मध्यप्रदेश में अराजकता और कानून से खेलने का टशन इस तरह हावी है कि अब लोग आम जन तो क्या पुलिसकर्मियों के साथ भी बर्बरता और मारपीट करने पर उतारू हैं। लगता है कि उनमें कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है। ताजा मामला गुना से सामने आया है जहाँ पुलिसकर्मियों को आँख में मिर्ची डाल कर हाईवे तक दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया। पुलिसकर्मियों की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने घर से भागकर शादी करने वाले प्रेमी युगल को संरक्षण दिया था जो कानूनन सही भी था लेकिन लड़की के परिजन पुलिस पर आक्रोशित हो गए और कानून से खिलवाड़ करते हुए पुलिसवालों के साथ जमकर मारपीट की।

जिले के बीनागंज क्षेत्र के ग्राम पैंची में सोमवार को कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ गईं। प्रेम विवाह के एक मामले में उपजे विवाद ने इतना हिंसक रूप ले लिया कि उग्र भीड़ ने पुलिस टीम पर ही जानलेवा हमला कर दिया। उपद्रवियों ने न केवल एक आरक्षक को बंधक बनाकर उसके साथ मारपीट की, बल्कि उसे बचाने पहुंची पुलिस और एसएएफ की टीम को नेशनल हाईवे-46 पर दौड़ा-दौड़ा कर लाठी-डंडों और पत्थरों से पीटा। इस दुस्साहसिक हमले में पुलिसकर्मियों की आंखों में मिर्ची तक झोंक दी गई, जिससे कई जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के बाद दो घायल पुलिसकर्मियों को जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है।वहीं बीनागंज हाईवे पर भारी मात्रा में जिलेभर का पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। 

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पूरा मामला एक प्रेमी युगल को सुरक्षा देने से जुड़ा हुआ है। मोहम्मदपुर निवासी लोधा समाज की एक युवती मीना समाज के युवक के साथ गायब हो गई थी। उन्होंने 1 जनवरी को भागकर प्रेम विवाह कर लिया था। सोमवार को युवती के परिजन और समाज के लोग बीनागंज चौकी पहुंचे और युवती को सौंपने की मांग करने लगे। चूंकि युवती बालिग थी और उसने अपनी मर्जी से शादी की बात कहते हुए सुरक्षा की मांग की थी, इसलिए पुलिस ने उसके बयान दर्ज कर उसे वन स्टॉप सेंटर भेज दिया। इसी बात से नाराज होकर लोधा समाज के करीब आधा सैकड़ा लोग वापस लौटते समय उग्र हो गए। 

उग्र भीड़ ने पैंची के पास नेशनल हाईवे-46 पर चक्काजाम करने का प्रयास किया और लडक़े के घर में आग लगाने की धमकी देने लगे। जब एक आरक्षक ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो ग्रामीणों ने उसे पकड़कर बंधक बना लिया और मारपीट शुरू कर दी। सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी के साथ एसएएफ के आधा दर्जन जवान मौके पर पहुंचे, लेकिन वहां पहले से तैयार भीड़ ने उन पर धावा बोल दिया। एसएएफ जवान नवाब सिंह ने बताया कि हमलावरों ने अचानक आंखों में मिर्ची पाउडर झोंक दिया, जिससे जवानों को कुछ दिखाई नहीं दिया। इसी का फायदा उठाकर भीड़ ने लाठी, डंडों और पत्थरों से जवानों को लहूलुहान कर दिया। हमला इतना भीषण था कि पुलिसकर्मियों को अपनी जान बचाने के लिए हाईवे पर भागना पड़ा।

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पुलिस पर हुए इस सीधे हमले के बाद प्रशासन सख्त रुख अपना रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस अब वीडियो फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर हमलावरों की पहचान कर रही है। कानून को हाथ में लेने वाले और वर्दी पर हाथ उठाने वाले आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। लेकिन यह घटना एक बार फिर यह सवाल छोड़ गई है कि मध्य प्रदेश में जब कानून की रक्षा करने वाले पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं तो आमजन अपने सुरक्षा की कल्पना कैसे करें? और मध्य प्रदेश में कानून का खौफ लोगों के मन से खत्म क्यों होता जा रहा है?

आमलेट का टुकड़ा और एआई से फोटो रीक्रिएशन ने कर दिया ब्लाइंड मर्डर का खुलासा

ग्वालियर मध्य प्रदेश : ग्वालियर पुलिस ने एक बहुत ही पेचीदा ब्लाइंड मर्डर डिकोड करने में सफलता हासिल की है। कुछ दिन पहले जब लाश मिली थी तो मर्डर और बलात्कार की पुष्टि तो हो रही थी लेकिन हत्यारे तक पहुँचने का कोई सुराग नहीं मिल रहा था। और तब पुलिस ने सबसे पहले एआई की मदद से शव के चेहरे का रीक्रिएशन किया और फोटो बनाया और फिर शव के क्षेत्र के जेब में मिले आम्लेट के टुकड़े को अहम सुराग मानते हुए पड़ताल शुरू की। पुलिस की सूझबूझ और सही दिशा में पड़ताल और इतने छोटे मामूली सबूत को मजबूत आधार बनाने का नतीजा यह रहा कि पुलिस को ब्लाइंड मर्डर का खुलासा करने में सफलता मिल गई। 

पुलिस ने पड़ताल करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, आरोपी का नाम सचिन सेन है जो मूलतः ग्वालियर का ही रहने वाला है,आरोपी सचिन सेन ने प्रेम प्रसंग के चलते महिला की हत्या कर दी थी,आरोपी महिला से प्रेम करता था लेकिन उसे शक था कि महिला किसी अन्य व्यक्ति से भी सम्बन्ध रखती है,हत्या से पहले आरोपी सचिन ने महिला सुनीता पाल के साथ एक ठेले पर अंडे खाए उसके बाद उसे भिण्ड रोड स्थित कटारे फार्म की झाड़ियों में ले जाकर दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया और बाद में सिर पर पत्थर पटक कर उसकी हत्या कर दी।

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घटना के बाद से आरोपी सचिन सेन फरार था वहीं मृतक महिला सुनीता पाल की पहचान छुपाने के लिए आरोपी सचिन ने सिर पर भारी भरकम पत्थर पटक दिया जिसमें महिला की शिनाख्त नहीं हो सकी घटना 29 दिसंबर शाम की है,घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर गोला का मंदिर थाना पुलिस पहुंची और जांच पड़ताल शुरू कर दी हालांकि महिला की शिनाख्त नहीं हो पा रही थी बाद में पुलिस ने एआई की मदद से महिला का स्कैच बनवाया उसके बाद पता चला कि महिला का नाम सुनीता पाल है जी टीकमगढ़ की रहने वाली है ग्वालियर में मजदूरी का काम करती थी।

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पुलिस  ने आरोपी की तलाश की लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले तब पुलिस को आरोपी का पता चला  पुलिस को मुखबिर सूचना मिली कि आरोपी सचिन सुबह ग्वालियर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार के पास देखा गया जो कही भागने की फिराक में था सूचना मिलते ही गोला का मंदिर पुलिस ने तुरंत घेराबंदी कर आरोपी को धर दबोचा पुलिस आरोपी से पूछताछ में जुटी है,आरोपी ने बताया कि वह महिला सुनीता पाल से प्रेम करता था और वह उससे शादी करना चाहता था लेकिन सुनीता ने उसे प्यार में धोखा दिया इसी से आहत हो उसने सुनीता पाल को मौत के घाट उतार दिया।

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राम रहीम को फिर पैरोल, 40 दिन रहेगा बाहर, लग्जरी कारों के काफिले में जेल से हुआ रवाना

डिजिटल डेस्क; बड़ी खबर: साध्वियों के यौन उत्पीड़न और उसके बाद पत्रकार की हत्या के मामलों में सजा याफ्ता राम रहीम को एक बार फिर पैरोल मिल गई है है। राम रहीम इस समय सुनारिया जेल में बंद है और वह वहां आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। इतने गंभीर मामलों में आजीवन कारावास की सजा के बावजूद वह जेल से बाहर निकलकर बिल्कुल निश्चिंत नजर आता है। हालांकि उसकी पैरोल पर पहले भी कई बार सवाल खड़े हुए हैं इसके बावजूद उसे एक बार फिर चालीस दिन की पैरोल मिली है और पैरोल के बाद जो टशन देखने को मिला वह देखकर लोग हैरान रह गए।

पहले आप यह जान लें कि यह दुर्दान्त अपराधी राम रहीम जेल में क्यों हैं। इसका असली नाम गुरमीत है। अगस्त 2017 को 2 साध्वियों के यौन शोषण केस में गुरमीत को 20 साल कैद हुई। इसके बाद 17 जनवरी 2019 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उम्र कैद हुई। वहीं, डेरा मैनेजर रणजीत सिंह के हत्या मामले में अक्टूबर 2021 में सीबीआई कोर्ट ने उसे उम्र कैद की सजा सुनाई।

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सोमवार को गुरमीत को लेने के लिए सिरसा डेरे से लग्जरी गाड़ियों का काफिला पहुंचा, जिसमें दो बुलेट प्रूफ लैंड क्रूजर, दो फार्च्यूनर और दो अन्य गाड़ियां शामिल थीं। सुबह करीब साढ़े 11 बजे वह सुनारिया जेल से सिरसा डेरे के लिए निकला। दोपहर 2:45 बजे वह सिरसा पहुंचा। इस बार डेरा मुखी 15वीं बार पैरोल या फरलो लेकर जेल से बाहर आया है। इससे पहले डेरा मुखी गुरमीत 15 अगस्त को अपना जन्मदिन मनाने के लिए जेल से बाहर आया था।

हर कैदी का पैरोल और फरलो का अधिकार होता है। इसके तहत कैदी को एक साल में 70 दिन की पैरोल और 21 दिन की फरलो मिलती है। लगभग 6 हजार ऐसे कैदी हैं, जिन्हें राज्य की कंपीटेंट अथॉरिटी द्वारा पैरोल और फरलो पर रिहा किया जाता है। कानूनी दायरे के अंदर ही गुरमीत को हर बार पैरोल या फरलो पर बाहर आते हैं। अब उन्हें 40 दिन की पैरोल मिली है। वह इस दौरान सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में रहेंगे।

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पुलिस मैन के बेटे ने रची खुद के अपहरण की साजिश; ऑनलाइन गेमिंग का भयावह साइड इफेक्ट

ग्वालियर मध्य प्रदेश : ऑनलाइन गेम का एडिक्शन किस तरह आज के युवाओं पर हावी है और कई नाबालिग बच्चे भी किस तरह इसका शिकार हो के अपराध के रास्ते पर चल पड़े हैं। इसके तमाम मामले कहीं न कहीं से सामने आते रहते हैं और ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला अब ग्वालियर से सामने आया है। जहां एक नाबालिग बालक ने पहले तो ऑनलाइन गेमिंग की लत के चलते लाखों रुपये गंवा दिए और फिर जब कर्ज में डूब गया तो कर्ज चुकाने के लिए खुद के ही अपहरण की साजिश रच डाली।हैरान करने वाली बात यह है कि यह नाबालिग बालक एक पुलिसकर्मी का बेटा है।

ऑनलाइन गेमिंग ने किशोर उम्र के बच्चों को जुए की ऐसी लत लगाई है कि वह अनजाने में ही लाखों के कर्जदार बन गए हैं और अपने इस कर्ज को उतारने के लिए वो टीवी और क्राइम पेट्रोल जैसे धारावाहिकों से सीख लेकर हीनियस क्राइम को गढ़ने में भी पीछे नहीं हट रहे हैं। माधौगंज थाना क्षेत्र में सामने आया है जहां पुलिस कर्मी के नाबालिग बेटे ने अपने ऊपर चढ़े आठ लाख के कर्ज को उतारने के लिए अपहरण का झूठा नाटक किया.पिता पुलिसकर्मी भिंड में पदस्थ हैं और जल्द ही रिटायर होने वाले हैं. किशोर को मालूम था कि पिता को रिटायरमेंट पर अच्छा खासा पैसा मिलने वाला है।

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नाबालिग के दिमाग में खुराफात सूझी और उसने अपने ही अपहरण का नाटक कर घर वालों को हैरत में डाल दिया. लेकिन वह नया खिलाड़ी था उसने जिस मोबाइल नंबर से अपने पिता को रैंसम कॉल करवाया था वह उसकी मां के नाम था।यही से पुलिस को शक हुआ बाद में अपनी बहन के घर यह लड़का पुलिस को दूसरे दिन सकुशल मिल गया। उसने बताया कि ब्रेजा कार में चार लोगों ने उसे अगवा किया था और उसकी मां की सिम से उसके घर वालों को फोन किया था लेकिन जब पुलिस ने मोबाइल के आईईएमआई नंबर से इस बात की तस्दीक की तो बात झूठी निकली. इसके बाद किशोर ने जहां बदमाशों द्वारा उसे घुमाए जाना बताया था वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में भी कोई ऐसी संदिग्ध गतिविधि नजर नहीं आई. कड़ाई से पूछताछ की गई तब उसने बताया कि वह ऑनलाइन गेमिंग में लाखों रुपए हार चुका था इससे उबरने के लिए उसने अपने अपहरण का नाटक रचा था।

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पूरी खबर का वीडियो यहाँ देखिए..

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नंबर वन स्मार्ट सिटी इंदौर में दूषित पानी से 8 की मौत, विकास की खाल में विनाश उजागर

इंदौर मध्य प्रदेश: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में टंकी से सप्लाई किए जाने वाले पानी के पीने से आठ लोगों की मौत हो गई। यह कोई छोटी घटना नहीं है क्योंकि यह कोई गांव नहीं है यह कोई पिछड़ा शहर नहीं है। बल्कि यह घटना देश के नंबर वन स्वच्छतम शहर स्मार्ट सिटी इंदौर की है और इसी स्मार्ट को वाटर प्लस का तमगा भी हासिल है। वाटर प्लस का मतलब अपशिष्ट जल प्रबंधन श्रेष्ठ श्रेणी का है। इस सबके बावजूद भागीरथ पूरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से नागरिक गंदा पानी सप्लाई होने की शिकायत कर रहे थे। सोमवार को हालात इतने बिगड़ गए पानी में दूषित तत्व इतने बढ़ गए कि सैकड़ों लोगों को उल्टी दस्त डायरिया होने के चलते अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।कई लोगों की हालत गंभीर हो गई और आठ लोगों की मौत हो गई और हमेशा की तरह आम जन की मौत पर प्रशासन ने जागने का काम शुरू कर दिया।

माँ अमला ऐसे ही खबरों की सुर्खियां बना प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दे डाले। कलेक्टर शिवम वर्मा ने तुरंत कार्यवाही के मरहम से मामले को शांत करने के लिए 3 अधिकारियों पर कार्रवाई कर दी जिसमें शालिग्राम शीतोले जोनल अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। योगेश जोशी सहायक यंत्री को निलंबित कर दिया गया और उपयंत्री शुभम श्रीवास्तव की तो सेवाएं ही समाप्त कर दी गई। यकीन यह सब हुआ सैकड़ों लोगों के बीमार होने के बाद आठ लोगों की मौत के बाद लेकिन क्या इन दोषियों पर इन मौतों के चलते कोई एफआईआर दर्ज हुई इस बारे में किसी जिम्मेदार के पास कोई जवाब नहीं है जबकि होना तो यह चाहिए कि जो लोग मंच पर खड़े होकर नंबर वन स्मार्ट सिटी का तमगा।लेते हुए ठहाके मारते हैं चाहे वह निगम आयुक्त हो चाहे वह स्मार्ट सिटी सीईओ हो चाहे इंदौर के महापौर हो इन सब पर भी कार्यवाही होनी चाहिए क्योंकि जवाबदेही तो इनकी भी बनती है जो कागजों पर प्रफुल्लित होती स्मार्ट।सिटी को देखते रहे जिसमें शहर के आम नागरिक स्वच्छ जल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी मोहताज हैं।

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भागीरथपुरा क्षेत्र का मंजर ऐसा था जैसे कोई महामारी फैल गई हो। और जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम हमेशा की तरह वही था कि आम मरे तो मरे हम तो किसी माननीय के चप्पल चाट कर कुर्सी पर बैठने वाले लोग हैं हमारा कोई क्या उखाड़ लेगा। क्योंकि दूषित पानी के बाद पिछले कई दिनों से लोग बीमार हो रहे थे पहली मौत 26 दिसंबर को हो चुकी थी। इसके बाद भी अधिकारी लापरवाह रहे।सोमवार को जब सैकड़ों लोग डायरिया का शिकार हुए और चौंतीस की हालत तो इतनी बिगड़ गई कि वह अस्पताल में भर्ती हो गए। इसके बाद कहीं जाकर जिम्मेदारों के बीच खलबली मची। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भागीरथपुरा क्षेत्र में सर्वे किया तो पता चला कि लगभग सभी घरों में उल्टी दस्त के मरीज हैं। निगम ने दूषित पानी की वजह जानने के लिए क्षेत्र की वॉटर सप्लाई लाइन की जांच की तो पता चला कि जिस मुख्य लाइन में पूरे भागीरथपुरा में पानी वितरित होता है उसी के ऊपर सार्वजनिक शौचालय बना हुआ है। मुख्य लाइन फूटने की वजह से देने सीधे उसमें मिलकर नागरिकों के घर तक पहुंच रहा था और इसी वजह से लोग बीमार हो रहे थे। 

नगर निगम के सर्वे में सामने आई यह खामी साहब बता रही हैं कि नंबर वन स्मार्ट सिटी में भी किस तरह की बद इंतजामी हैं जहां वाटर सप्लाई लाइन के ऊपर ही सार्वजनिक शौचालय बना दिया गया और वाटर सप्लाई लाइन लीक होती रही हो।इतने दिनों के लीख में उसे सुधारने के लिए भी जिम्मेदारों के पास व्यवस्था नहीं थी। यह वही जिम्मेदार हैं जिन्होंने स्मार्ट सिटी की फाइलों में कागजों के घोड़े दौड़ाए होंगे। पानी की सप्लाई के बेहतरीन इंतजामात के कसीदे लिख दिए होंगे। लेकिन हकीकत में भागीरथपुरा की वाटर सप्लाई लाइन लोगों को मौत पिला रही थी। सवाल यह भी उठ रहा है कि पूरे इंदौर में ऐसे कितने भागीरथपुरा क्षेत्र के वॉटर लीकेज होंगे और इसे कितने स्थान होंगे जहां से दूषित पानी लोगों के घर तक पहुंच रहा होगा लेकिन इस बारे में जिम्मेदारों के पास कोई आंकड़ा नहीं है। 

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इतना बड़ा मामला हुआ है तो उस पर अब राजनीति भी होगी। कांग्रेस इसे मुद्दा भी बनाएगी और मुद्दा क्यों न बनाए? क्योंकि इस पूरे मामले में हम आपको एक चौंकाने वाला खुलासा कर देते हैं भागीरथपुरा वह क्षेत्र है जिसका एक बड़ा हिस्सा कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र में आता है और कैलाश विजयवर्गीय वर्तमान में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री हैं और उनके नगरीय विकास मंत्री रहते हुए इंदौर का कैसा विकास हुआ है यह घटना चीख चीख कर उसके सबूत दे रही है। डबल और ट्रिपल इंजन की हामी भरने वाली सरकार किस तरह बद इंतजामी पर मंच से ठहाके मारती है और उनके चेले नीचे बैठे ताली पीटते हैं और स्मार्ट सिटी के नाम पर ऐसे शहर बना दिए जाते हैं जिसमें जनता को शुद्ध पानी तक पीने को न मिले। यह एक घटना केवल इंदौर तक सीमित नहीं है। यह सवाल खड़े कर रही हैं उन समस्त सौ स्मार्ट सिटी के व्यवस्था पर कि स्मार्ट सिटी के नाम पर अरमुखर्व रुपया भ्रष्टाचारियों की जेब में पहुंचा दिया गया है और इन शहरों के नागरिक आज भी मूलभूत सुविधाओं के नाम पर दूषित पेयजल पीने को मजबूर हैं। भागीरथपुरा तो शुरुआत हो सकता है कि अगला नंबर आपके शहर का हो….