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ठगी का खौफनाक अंत; पूर्व आईजी ने ठगी में करोड़ों गंवाने के बाद खुद को मारी गोली

पूर्व आईजी अमर सिंह चहल ने ठगी से पीड़ित होकर आत्महत्या कर ली लेकिन वह एक ज्वलंत सवाल छोड़ गये हैं कि क्या हमारा सिस्टम इतना कमजोर है। जिसमें ठगों का इतना बड़ा रैकेट पूरे देश में फैला हुआ है।

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: देश में लगातार बढ़ रहे साइबर ठगी के मामले लगातार खौफनाक होते जा रहे हैं और इसके बावजूद हमारे देश का सिस्टम ऐसी कोई मजबूत प्रणाली नहीं बना पाया है जिससे इन साइबर ठगी के मामलों पर रोक लग सके।ताजा मामला पंजाब के पटियाला का है जहां ठगी का शिकार होने के बाद एक पूर्व आईजी इतने ज्यादा अवसाद में चले गए कि उन्होंने खुद को गोली मारकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह एक अलार्मिंग घटना है।हालांकि पहले भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं जिसमें साइबर ठगी के शिकार हुए पीड़ितों ने अपनी जान दी हो लेकिन यह मामला कुछ अलग है क्योंकि ठगी का शिकार होने वाला कोई आम व्यक्ति नहीं एक पूर्व आईजी है।

पटियाला में इंडियन रिजर्व बटालियन से सेवानिवृत्त आइजी अमरसिंह चहल ने अपने घर पर गनमैन के सरकारी गन से खुद को गोली मार ली। उन्होंने आत्महत्या से पहले डीजीपी के नाम एक बार पन्नों का नोट छोड़ा है। नोट में चहल ने अपील की है के इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कर विशेष जांच दल बनाया जाए ताकि इस अंतरराज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय साइबर ठगी के नेटवर्क को बेग किया जा सके। उन्होंने अपने परिवार की सुरक्षा और कर्जदाताओं से राहत की गुहार भी लगाई है। इस नोट में उन्होंने साफ लिखा है कि जिस तरह से संगठित तरीके से यह साइबर ठगी की गई है उसमें आम आदमी पूरी तरह असहाय हो जाता है। यह जो शब्द आपने पढ़े यह एक पूर्व आईजी के शब्द हैं और आप समझ सकते हैं कि यह शब्द बता रहे हैं कि देश में साइबर ठगी का जाल कितना विस्तृत और भयावह हो चुका है।

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साइबर ठगों ने पूर्व आईजी अमरसिंह को एक प्रॉफिटेबल ग्रुप में जोड़ा। इस ग्रुप का नाम एफ सेवन सेवन सेवन डीवीएस वेल्थ इक्विटी रिसर्च ग्रुप था जिसके व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर ग्रुप थे। शुरूआत में केवल बाज़ार की जानकारी दी गई जिससे ग्रुप की गतिविधियाँ भरोसेमंद नजर आई। इसके बाद कुछ सेलेक्टेड इनवेस्टर्स को ट्रेडिंग की अनुमति दी गई और एक फर्जी डिजिटल डेशबोर्ड उपलब्ध कराया गया जिसमें रोजाना मुनाफा दिखाया जाता था। इसके बाद उन्हें आईपीओ में पैसा लगाने को कहा गया। कहा गया कि ग्रुप के जरिए आवेदन करने पर डिस्काउंट रेट पर ज्यादा अलॉटमेंट मिलेगा। इसके लिए निवेशकों से अतिरिक्त पैसा जमा कराया गया। जब तक चहल को इस पूरे मामले में ठगी का शक हुआ तब तक वह काफी रुपया गंवा चुके थे। मात्र दो महीने में ही वह अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से लेकर दस करोड़ रुपये तक इस ठगी में गंवा चुके थे। 

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पूर्व आईजी अमर सिंह चहल ने ठगी से पीड़ित होकर आत्महत्या कर ली लेकिन वह एक ज्वलंत सवाल छोड़ गये हैं कि क्या हमारा सिस्टम इतना कमजोर है। जिसमें ठगों का इतना बड़ा रैकेट पूरे देश में फैला हुआ है। हर वर्ग का व्यक्ति चाहे गरीब हो या अमीर चाहे शिक्षित हो या अशिक्षित इन ठगों का शिकार हो रहा है और हमारे देश में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है जो साइबर ठगी के इस बढ़ते हुए खतरे को रोक सके। आपको बता दें कि ज्यादातर ठगी के मामलों में पुलिस और अन्य एजेंसियों की लापरवाही के चलते घटना के बाद समय बीत जाता है और जैसे जैसे गोल्डन आर्ट्स बीतते हैं। उसके बाद इन सायब ठगों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। हमारे देश में साइबर ठगी पर की गई कार्रवाइयों के बड़े बड़े दावे तो किए जाते हैं लेकिन हकीकत में साइबर ठगी के मामले कहीं ज्यादा हैं और उनमें सफलता का प्रतिशत कहीं कम। उम्मीद की जा सकती है कि अमर सिंह चहल की आत्महत्या और उनके डीजीपी के नाम लिखे बारह।पेज के नोट के बाद शायद हमारी सरकार जागे और साइबर ठगी को रोकने के लिए कोई मजबूत सिस्टम बनाए…

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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