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पूर्व सीएमएचओ मुश्किल में; करोड़ों के घोटाले की विभागीय जांच शुरू

ग्वालियर मध्यप्रदेश: ग्वालियर के पूर्व सीएमएचओ डॉ सचिन श्रीवास्तव मुश्किल में घिरते नजर आ रहे हैं। आपको बता दें कि अभी कुछ दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग ने सीएमएचओ पद से उनकी छुट्टी करते हुए उन्हें मूल पद पर भेज दिया है।लंबे समय से उन पर तमाम शिकायतें लंबित थीं और उन शिकायतों के चलते ही उन पर यह जांच गिरी। लेकिन अब उनकी मुसीबतें हैं, बढ़ती नजर आ रही है क्योंकि कई मामलों में उनकी विभागीय जांच शुरू हो गई है। विभागीय जांच के दौरान डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव को आरोप पत्र देकर उनसे जवाब भी मांगा गया है।यदि वे जवाब नहीं देते हैं, तो विभाग उनके विरुद्ध एक पक्षीय कार्रवाई कर सकता है।

पूरा मामला डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव से जुड़े तमाम विसंगतियों को लेकर है। इसमें सबसे बड़ा घोटाला अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत चयनित की गई संस्थाएं उनके भुगतान को लेकर है। सचिन श्रीवास्तव के आरोप पत्र में राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत अनुमोदित संस्थाओं के चयन, पर्यवेक्षण और भुगतान संबंधी कार्यों के दौरान डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव ने कथित तौर पर समानता, समाजसेवी संस्था से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष संबंध होने के बावजूद स्वयं को निर्णय प्रक्रिया से अलग नहीं रहा।इस तरह उन्होंने स्वयं से संबंधित संस्था को आर्थिक लाभ दिलाया। संस्था को कार्य आवंटन और वित्तीय लाभ होने दिए। इस संस्था को 2021 से 2024 तक तमाम आंखों संबंधित इलाज के लिए एक करोड़ आठ लाख रुपए का भुगतान किया गया। उनकी इस मिलीभगत से शासन को आर्थिक नुकसान हुआ।

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डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव पर एक और गंभीर आरोप यह है कि उन्होंने दो हजार चौबीस में ही शासकीय आवास आवंटित करा लिया लेकिन इसके बावजूद वह मकान किराया भत्ता लेते रहे जबकि शासकीय आवास आवंटित होने पर आवास भत्ता लेना नियम विरुद्ध है। इसके साथ ही डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव ने शासकीय आवास के लाइसेंस शुल्क और किराया राशि का समाज योजन नहीं कराया। इस तरह उन्होंने शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया। इसके साथ ही लक्ष्मी ग्रह प्रसूति गृह के कैंपस में लगी गुमती के मामले में भी डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव की गड़बड़ झाला उजागर हुई है। मनमाने तरीके से यह गुमटी लगाई गई और इसके चलते शासन को नुकसान हुआ।

इसके साथ ही डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव पर यह भी आरोप है कि क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं ग्वालियर द्वारा जो जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किए गए, उन पर इन्होंने नियमानुसार कार्रवाई नहीं की।साथ ही जांच के दौरान डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव से जो जानकारी और दस्तावेज मांगे, वह इन्होंने उपलब्ध नहीं कराए।डॉ सचिन श्रीवास्तव ने जांच में किसी भी तरह का सहयोग नहीं किया। उनके इस कृत्य को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया। इसके साथ ही आरोप पत्र में यह भी उल्लेख है कि डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव के विरुद्ध पूर्व में की गई शिकायत का निराकरण कलेक्टर ग्वालियर द्वारा करते हुए उन्हें हिदायत दी गई थी। कलेक्टर की इस हिदायत के बावजूद भी उन्होंने प्रशासनिक कार्यों और अपनी जिम्मेदारियों वो गंभीरता से नहीं लिया जिसके चलते मामले की फिर से समीक्षा और जांच आवश्यक मानी गई।

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इस तरह, यदि देखें, तो डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन पर विभागीय जांच शुरू हो गई है। उन पर एक या दो नहीं, पांच गंभीर आरोप हैं और समय रहते उन्होंने इन आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया। अब डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव के खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियंत्रण तथा अपील 196 सिक्स के तहत विभागीय जांच होगी और यदि वह इस जांच के दौरान उचित दस्तावेज और जवाब प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं तो उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। संचालनालय, लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा विभाग ने डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव पर पांच गंभीर आरोप लगाए हैं। अब देखना होगा की सचिन श्रीवास्तव इन आरोपों का जवाब दे पाते हैं या उन पर कार्रवाई होती है?

1.58 Cr fraud; महिला को डिजिटल अरेस्ट कर 33 दिन तक बनाया बंधक

ग्वालियर मध्यप्रदेश: ग्वालियर से एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट कर ठगी का एक हैरतअंगेज सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक रिटायर्ड बुजुर्ग महिला से ₹1.58 करोड़ की ठगी की गई है। इस महिला को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसे होने का डर दिखाया गया और इस डर के आधार पर इसको 33 दिन तक बंधक बनाया गया और समय समय पर इस महिला से तमाम खातों में पैसा ट्रांसफर कराया गया। इस महिला ने तमाम एफडी तुड़वाकर, इन ठगों को पैसा दिया। डिजिटल अरेस्ट के तमाम बड़े मामलों की कड़ी में अब यह एक और मामला जुड़ गया है, हालांकि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पाटणकर का बाड़ा में मीनाक्षी नाखरे रहती हैं, जो स्वास्थ्य विभाग से लैब टेक्नीशियन के पद से सेवानिवृत्त हैं। वर्तमान में, उनकी आयु उनहत्तर वर्ष है। वह घर पर थी, अपना सामान कार्य कर रही थी तभी अचानक दस मई को उनके पास एक वीडियो कॉल आया और वीडियो कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को दूरसंचार विभाग का अधिकारी अशोक गुप्ता बताया। उसने महिला का नाम, मोबाइल नंबर अन्य जानकारियां दी और बताया कि आपका फलाफला खाता, मनी लॉन्ड्रिंग और गैरकानूनी गतिविधियों में उपयोग किया जा रहा है। आपके इस खाते से छह करोड़ अस्सी लाख का अवैध ट्रांजेक्शन हुआ है।इसकी पूरी जानकारी हमारे पास है। जब महिला ने इन सब बातों से इनकार किया, तो उस दूरसंचार विभाग के कथित अधिकारी ने दिल्ली पुलिस के एक आईपीएस को भी वीडियो कॉल पर जोर दिया।

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 पीड़ित महिला मीनाक्षी ने देखा कि सामने वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने हुई एक आदमी है जो खुद को आईपीएस सुनील कुमार गौतम बता रहा है। इस व्यक्ति ने मीनाक्षी को बताया की एक बैंक मैनेजर की गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हुई है और इस गिरफ्तारी के दौरान ही मीनाक्षी के नाम की पासबुक बरामद हुई है और उस खाते से अवैध लेनदेन हुआ है और उस लेनदेन का कमीशन अड़सठ लाख रुपए मीनाक्षी को मिला है। इस लंबी बातों में मीनाक्षी नाथरे ठगों की बातों में आ गई और डर गई। बस इसी डर का फायदा उठाते हुए साइबर ठगों ने मीनाक्षी को गिरफ्तारी से बचने के लिए जांच में सहयोग की सलाह दी और प्राथमिक जांच में हिस्सा बनाते हुए उनसे कहा कि आपके खाते की जो पूंजी है वह हमारे विभाग के खाते में ट्रांसफर करें, उसकी जांच होगी और जांच के बाद आपकी राशि वापस कर दी जाएगी।

ठगों के झांसे में आकर मीनाक्षी ने बैंक में रखी कैश रकम के साथ-साथ अपनी 4 एफडी तुड़वाकर भी ठगों को पैसा दिया। उन्होंने आरटीजीएस के माध्यम से इन ठगों को एक करोड़ सत्तावन लाख नब्बे हजार रुपए दिए। तैंतीस दिन में पूरी रकम देने के बावजूद भी मीनाक्षी इन ठगों के डर के साए में रही और जब ठगों ने देखा कि अब इस महिला के पास कुछ नहीं है तो ग्यारह जून को महिला को बताया कि जांच पूरी हो गई है, अठारह जून को मीनाक्षी को क्लीन चिट मिल जाएगी।डॉक्यूमेंट डाक से उनके घर पहुंच जाएंगे और उनका पैसा भी वापस पहुंच जाएगा। लेकिन अठारह जून से पहले ही सोलह जून को सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए। 

महिला मामले की पड़ताल के लिए नई दिल्ली के उसी बारह खंबा थाने पहुंची जहां से जांच की बात उसे बताई गई थी, लेकिन वहां जाकर पता चला कि वहां ऐसा कोई मामला ही नहीं चल रहा है। तब उसे पता चला कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी है। साइबर ठगों ने उसे डिजिटल अरेस्ट कर उसकी जिंदगी भर की जमा पूंजी को चपत लगा दी है। महिला बाप बस लौटी और ग्वालियर आकर महिला ने इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज की है। इस मामले में ग्वालियर एसएसपी धर्मबीर सिंह का कहना है कि मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है, जिन खातों में राशि भेजी गई है, उन्हें होल्ड कराया जा रहा है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।

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द इंगलेज पोस्ट का यह दायित्व है कि वह अपने पाठकों को न केवल सूचना दे, बल्कि जागरूक भी करे। इस तरह के साइबर फ्रॉड से बचने के लिए एक और मात्र एक उपाय है और वह है अपने डर को काबू में रखना। इस तरह के डिजिटल अरेस्ट के मामलों में वही व्यक्ति ठगी का शिकार होता है जो इन ठगों से डर जाता है और डर के कारण उनकी बातों में आ जाता है।इस तरह के कोई भी कॉल आने पर आपको उनसे बात नहीं करनी चाहिए। जिस तरह का वह डर दिखाते हैं उसमें उनसे क्रॉस क्वेश्चन पूछना चाहिए। भारतीय न्याय व्यवस्था में डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं है। यह बात हमेशा आप अपने दिमाग में रखें और ऐसे किसी मामले में फोन आने पर आप नजदीकी पुलिस स्टेशन पहुंचकर पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दें। यकीन मानिए यदि आप नहीं डरेंगे तो साइबर ठगों का शिकार नहीं होंगे।

लखनऊ अग्निकांड में 15 की मौत; वजह यह 15 खामियां 

लखनऊ उत्तर प्रदेश डिजिटल डेस्क: लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड के बाद कार्रवाई की खानापूर्ति शुरू हो चुकी है। और यह खानापूर्ति केवल लखनऊ में ही नहीं, देश के तमाम शहरों में शुरू हुई है। ऐसे तमाम भवनों की जांच पड़ताल शुरू हो गई है, जो संबंधित नगरीय निकाय के नियमों के अनुसार संचालित नहीं हो रहे हैं। लेकिन यह भी हकीकत है की सांप निकल जाने पर लाठी पीटने की मानसिक बीमारी से हमारे जिम्मेदार बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। कुछ दिन तक जांच पड़ताल की कार्रवाई होगी। अपनी जेबें भरी जाएंगी और फिर इस घटना को भुला दिया जाएगा। क्योंकि ऐसी एक घटना कुछ ही दिन पहले 3 जून को दिल्ली के एक होटल में भी हुई थी, उस समय भी तमाम कार्रवाई के कागजी घोड़े दौड़ाए गए थे। जो दिल्ली सहित देश के तमाम शहरों में दौड़े थे।

हालात तो लगभग सभी शहरों के एक जैसे हैं जहां खामियां और लापरवाहीयां कागजों में खानापूर्ति करके दबा दी जाती है। बात ग्वालियर की करें तो यहां शहर के थाटीपुर मुरार लक्ष्मीबाई कॉलोनी सिटी सेन्टर, हजीरा, तानसेन नगर, विनयनगर, डीडी नगर गोले का मंदिर रॉक्सी जैसे क्षेत्र में सैकड़ों कोचिंग संचालित हैं। इसमें से तमाम कोचिंग घरेलू भवनों में ही संचालित हो रही है। लेकिन जानकारी मिली है कि केवल तीन कोचिंग पर ही फायर एनओसी है। यह हालत तब है, जब तीन जून को दिल्ली होटल में हुए अग्निकांड के बाद भी ग्वालियर के नगर निगम के जिम्मेदारों ने कार्रवाई के कागजी घोड़े दौड़ाए थे। लेकिन ज्यादातर कार्रवाई शायद अपनी जेब भरने तक सिमट कर रह गई।

केवल कोचिंग संस्थान ही नहीं, शहर में संचालित तमाम व्यावसायिक गतिविधियों राम भरोसे चल रही हैं। ऐसे तमाम व्यावसायिक संस्थान हैं, चाहे होटल हों, चाहे बैंक हों, चाहे अस्पताल हों। अग्नि सुरक्षा के नियम ताक पर रखकर कई व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। लेकिन नगर निगम घल्लू घारा करके कागजों पर कई संस्थानों को तो अनुमति तक दे देता है और जो बिना अनुमति के भी चल रही है, वे बिना जिम्मेदारों की कृपा यह संरक्षण के चल रही हों, यह भी संभव प्रतीत नहीं होता। यकीन मानिए। ऐसे तमाम भवनों में आपकी जान जोखिम में है क्योंकि सुरक्षा मानक के साथ कागजों पर खिलवाड़ किया जाता है। अग्नि सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। 

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लखनऊ के पास इलाके अलीगंज में 1 3 मंजिला इमारत मैं। यह अग्निकांड हुआ है। यह अग्निकांड एसी में शॉर्ट्स सर्किट के चलते हुआ है। मरने वालों में ज्यादातर लोग दम घुटने की वजह से मरे हैं। मरने वालों में कोचिंग के शिक्षक, कर्मचारी और छात्र शामिल हैं। यह भवन आवासीय क्षेत्र अलीगंज में है। सर्किट से लगी आग कुछ ही मिनटों में पूरे बिल्डिंग में फैल गई। पहली और दूसरी मंजिल पर गेमिंग जोन कोचिंग और एनिमेशन सेन्टर था, जहां के छात्र उन्हीं मंजिल पर फंस गए, कुछ छात्रों ने आगे बालकनी में आकर केबल के सहारे नीचे उतरकर अपनी जान बचाई। घटना इतनी भयावह थी कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में अपना भाषण बीच में ही छोड़कर लखनऊ ट्रॉमा सेन्टर पीड़ितों को देखने पहुंच गए। 

ऐसी क्या खामियां और लापरवाही रही जिसके चलते इतना बड़ा भीषण कांड हो गया, चाहे बात तीन जून को हुए दिल्ली के होटल के अग्निकांड की करें चाहे बाईस जून को लखनऊ में हुए इस अग्निकांड की। चाहे आपके शहर में आने वाले दिनों में होने वाले अग्निकांड की हर जगह खामियां और लापरवाहीयां लगभग समान है। इस पूरे मामले में आवासीय क्षेत्र में इस भवन में व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन जिम्मेदारों की एक बड़ी खामी उजागर कर रहा है। जिस भवन में आग लगी उसका नक्शा पास करने वाले भी कटघरे में है। इस भवन में सीढ़ियां पहले मंजिल तक ही थी ऊपर जाने के लिए लिफ्ट का प्रयोग होता था। अग्निकांड में लिफ्ट बंद हो गई और सीढ़ियां न होने के कारण लोग ऊपर फंस गए। इस भवन को फायर सेफ्टी एनओसी नहीं मिली थी, फिर भी यहाँ व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन हो रहा थ। 2016 मैं इस भवन को अवैध बताते हुए इसे नोटिस दिया गया था, लेकिन दस साल में भी कोई कार्रवाई जिम्मेदारों ने नहीं की थी। गर्मियों में एसी में शॉर्ट सर्किट की घटनाएं बढ़ी हैं। इसका कारण एसी की सर्विस में लापरवाही बरतना या एसी को लगातार कई घंटों तक लो टेंपरेचर पर चलाना, जिससे कंप्रेसर पर और कॉइल पर ज्यादा दबाव पड़ता है जिसके चलते एसी ब्लास्ट होते हैं। इस भवन में तमाम फर्नीचर, लकड़ी एवं अन्य ज्वलनशील सामग्री होने के चलते आग और तेजी से भड़की। इस भवन में निकासी का केवल एक ही रास्ता था। कोई भी इमरजेंसी एग्जिट नहीं था जिसके चलते अंदर फंसे लोग सुरक्षित बाहर नहीं निकल सके। तमाम अग्निकांड की तरह इस अग्निकांड के बाद भी अग्निशमन दस्ता तुरंत नहीं पहुँचा। इस देरी के चलते भी आग पूरे बिल्डिंग में फैल गई। जिस यूपी में हर जगह बुलडोजर चलता है, यदि इस भवन की पिछली और बगल की दीवार तोड़ने के लिए भी बुलडोजर तुरंत पहुंचकर दिवाल तोड़ देता तो लोग सुरक्षा बाहर निकल सकते थे। कुछ पुलिसकर्मी हथौड़े से दीवार तोड़ते नजर आ रहे हैं। लेकिन हथौड़े से दीवार तोड़ने में बहुत देर हो चुकी थी और उस टूटी हुई दीवार से किसी को भी जिंदा बाहर नहीं निकाला जा सकता, बल्कि मृत शरीरों को बाहर निकाला गया। 

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आप जिस शहर में रहते हैं आप या आपके परिजन जिस व्यावसायिक संस्थान अस्पताल होटल कोचिंग में जाते हैं, वहां किस तरह की खामियां हैं? यदि वह देखकर आप खुद खामोश हैं, आप आवाज नहीं उठाते हैं, तो कहीं न कहीं इस तरह की अग्नि कांड की घटनाओं के दोषी आप भी हैं। जो लोग अनुमति देने और नियम बना के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे हैं, यकीन मानिए उनकी जिम्मेदारी केवल फाइलों पर खानापूर्ति करने तक सीमित हो चुकी है। ज्यादा कुछ हो तो ऐसी घटनाओं के बाद जेब भरने की कार्रवाई शुरू हो जाती है, लेकिन यदि आप इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति अपने शहर में नहीं चाहते तो जरूरत है। क्या आप खुद जागरुक बने और ऐसी किसी भी खामी और लापरवाही पर सिस्टम को चेताएँ सूचित करें और जब तक व्यवस्था न सुधरें, आवाज उठाते रहें। यकीन मानिए।यदि जिम्मेदार सोए हुए हैं, तो उनको जगाने की जवाबदेही हर एक आम व्यक्ति की है औरेदी आप चाहते हैं कि अगला आदमी कांड आपके साथ न हो तो यह जवाबदेही जरूर निभाएं।

मोबाइल पर गंदी फिल्म देखने के शौकीन चाचा ने नौ साल की भतीजी से किया दुष्कर्म

मुरैना मध्यप्रदेश: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक बड़ी घटना सामने आ रही है, जहां चाचा ने अपनी 9 साल की नाबालिग को अपनी हवस का शिकार बना लिया। हालांकि, नाबालिग मासूम भतीजी ने घटना के बाद पूरी आपबीती अपनी मां को सुना दी और मां ने भी तुरंत पुलिस को सूचना दे दी। हालांकि दुष्कर्मी चाचा फरार होने की फिराक में था, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बेटियां अपनों के बीच में ज्यादा असुरक्षित हैं?

घटना फोर्स क्षेत्र की है। मासूम पीड़िता के माता पिता खेत में काम करते हैं और वह भी अपने माता पिता का हाथ बटाती है। घटना 18 जून की सुबह 6 बजे की है जब यह मासूम अपने माता पिता के साथ खेत पर मूंग काट रही थी। माँ ने 9 बजे बेटी से कहा कि घर जाकर साफ सफाई कर लें, जब बेटी घर पहुंची और झाड़ू पोंछा करने लगी। उस समय इसका दरिंदा चाचा मोबाइल पर गंदी फिल्में देख रहा था। गंदी फिल्में देखकर इस चाचा की नीयत अपनी मासूम भतीजी पर ही खराब हो गई और इसने अपनी भतीजी को अपने हवस का शिकार बनाने की योजना बना ली।

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भतीजी जब झाड़ू लगा ही रही थी, चाचा मुंह दबाकर उसे कमरे में ले गया और भतीजी को हवस का शिकार बनाया। इसके बाद उसे धमकी भी दी कि माता पिता को कुछ बताया तो सबको मार देगा। इस घटना के बाद 9 साल की मासूम सदमे में चली गई। धीरे-धीरे उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, लेकिन दूसरे दिन जब मासूम को गुप्तांग से खून निकलने लगा तो उसे इलाज के लिए मां अस्पताल ले गई। जब अस्पताल में डॉक्टर ने मासूम से पूछा कि उसके साथ क्या हुआ है, तब मां के सामने ही मासूम ने पूरी आपबीती सुनाई। इसके बाद इस घटना की सूचना पुलिस को दी गई।

पुलिस ने सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।अस्पताल पहुंचकर मासूम बच्ची के बयान लिए और आरोपी चाचा पर दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और जान से मारने की धमकी की तमाम धाराओं का मामला दर्ज कर लिया। घटना का खुलासा हो जाने पर आरोपी चाचा घर से भाग गया। लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसके मोबाइल को तुरंत ट्रैकिंग पर लगा दिया और लोकेशन मिलते ही आरोपी चाचा को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन मुरैना में हुई इस घटना ने एक बार फिर रिश्तों को शर्मसार कर दिया है, जहां सगे चाचा ने अपनी नौ साल की मांसूम बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाया है। क्या हमारी बेटियां कहीं पर भी सुरक्षित नहीं हैं?

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नाबालिग भाई की दरिंदगी; बड़े भाई, भाभी और भतीजे की क्रूरता से हत्या

गोरखपुर उत्तर प्रदेश डिजिटल डेस्क: एक नाबालिग छोटे भाई पर सनक इस तरह सवार हुई तो उसने अपने बड़े भाई, भावी और भतीजे का बेरहमी से कत्ल कर दिया। मामला गोरखपुर के बांसगांव थाना इलाके का है जहां रविवार देर रात हुई एक भयावह घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक 16 वर्षीय किशोर ने कथित तौर पर अपने बड़े भाई, भाभी और तीन वर्षीय भतीजे की धारदार हथियार से निर्मम हत्या कर दी। इस वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित कई आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी।

जिस किसी ने भी इस खौफनाक घटना के बारे में सुना, वह हैरान रह गया। एक छोटा भाई इतनी बर्बरता से अपने बड़े भाई के परिवार का कत्ल कैसे कर सकता है?यही सवाल हर जुबान पर था। अमित गुप्ता, उनकी पत्नी रंजना गुप्ता और उनके तीन वर्षीय पुत्र रेयान गुप्ता तीनों घर के एक कमरे में सो रहे थे, तभी आरोपी छोटे भाई ने सोते समय उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस क्रूर वारदात में तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही मृतक के पिता ने तत्काल पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने आरोपी 16 वर्षीय किशोर को भी हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। वारदात में इस्तेमाल किया गया हथियार भी उसके पास से बरामद कर लिया गया है।

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घटना के पीछे पारिवारिक विवाद की बात कही जा रही है। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके। मृतक अमित गुप्ता के पिता द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर बांसगांव थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है और मामले में आगे की जांच जारी है। इस घटना ने एक बार फिर पारिवारिक कलह के गंभीर परिणामों को उजागर किया है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की इस निर्मम हत्या से पूरे गांव में मातम का माहौल है। सोमवार की सुबह जब घटना की जानकारी फैली तो बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। लोगों में घटना को लेकर गहरा आक्रोश भी देखा जा रहा है।

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हर्ष फायर से रोका तो युवक ने मार दी गोली, साले के फलदान में जीजा के टोकने से नाराज था युवक

ग्वालियर मध्य प्रदेश: साले के फलदान समारोह में शामिल होने पहुंचे जीजा को समारोह में देसी कट्टे से हर्ष फायरिंग कर रहे एक युवक को रोकना महंगा पड़ गया। युवक को इस तरह की रोकटोक इतनी नागवार गुजरी कि आरोपी युवक ने जीजा पर ही गोली चला दी। गोली सीधे जीजा के सीने में लगी, हालांकि तुरंत उपचार के लिए जीजा को अस्पताल ले जाया गया और अभी उनकी हालत खतरे से बाहर है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ग्वालियर चंबल अंचल में हर्ष फायर की घटनाएं रुक नहीं रही हैं और हर्ष फायर करने वाले लोगों के मन में कानून का कोई दर्द नहीं है। 

मामला ग्वालियर का है भगवती कलोनी मुरार के रहने वाला फरियादी धीरेंद्र सिंह राणा 20 जून शाम को अपनी पत्नी बच्चों के साथ अपने रिश्ते के साले आशू राणा के लगन- फलदान कार्यक्रम में शामिल होने बिजौली थाना क्षेत्र के ग्राम दुहिया में पहुंचा था.. रात करीब 11:30 बजे के आसपास दुहिया गांव का ही युवक अजीत राणा भी कार्यक्रम में शामिल होने आया और आते ही अपनी कमर से देसी कट्टा निकालकर हवाई फायरिंग करने लगा तो धीरेंद्र ने अजित को हवाई फायर करने के लिए मना किया और समझाया भी की कार्यक्रम में काफी मेहमान है किसी को गोली लग सकती है।

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लेकिन अजित ने उल्टा धीरेंद्र को ही धमकाते हुए कहा कि तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे रोकने की और अजीत ने जान से मारने की नीयत से देसी कट्टे से धीरेंद्र पर फायर कर दिया जिसमें गोली धीरेंद्र सीने में दाहिनी तरफ जा लगी.. घटना की सूचना मिलते ही थाना बिजौली पुलिस भी मौके पर पहुंची.. वहीं धीरेंद्र को निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है.. आरोपी अजीत के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है फिलहाल आरोपी फरार बताया जा रहा है पुलिस का दावा है जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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डांसर की बेटी से अवैध संबंध के चलते कर दी डांसर की हत्या

सागर मध्य प्रदेश: सागर जिले की खुरई से अवैध संबंध और हत्या का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्रामीण थाना पुलिस ने लगभग दो महीने पुराने चर्चित डांसर के हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी के मृतका डांसर की बेटी से भी संबंध बन गए थे। जब इस बात का पता डांसर को चला तो दोनों के बीच विवाद हुआ और इसी दौरान आरोपी ने गला दबाकर हत्या कर दी थी। आरोपी ने शव को घर के डबल बेड मेमं छिपा दिया था और फरार हो गया था। बाद में डांसर का शव सड़ी-गली अवस्था में बरामद हुआ था। थाना प्रभारी संतोष सिंह दांगी ने खुलासा करते बताया कि महिला डांसर की हत्या करने वाले आरोपी सुरेंद्र अहिरवार (32) को गिरफ्तार कर लिया है।

 आरोपी डांसर के साथ नाच-गाने के कार्यक्रमों में जुड़ा रहता था और कार्यक्रमों की बुकिंग कराने सहित अन्य व्यवस्थाएं देखता था। पुलिस के अनुसार डांसर के बेटे और बेटी ने 11 अप्रेल को उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। परिजनों ने बताया था कि वह कुछ दिनों के लिए रिश्तेदारी में गए हुए थे और 5 अप्रेल से उनकी मां का मोबाइल बंद आ रहा था। घर लौटने पर मकान के बाहर ताला लगा मिला। पुलिस की मौजूदगी में जब घर खोला गया तो अंदर से तेज बदबू आने लगी। तलाशी के दौरान ममता का शव डबल बेड के बॉक्स में छिपा मिला, जो सड़ चुका था।

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मृतिका नाचने का काम करती थी। उसी के साथ आरोपी सुरेंद्र अहिरवार (32) निवासी सिंगपुर भी काम करता था. महिला के डांस कार्यक्रमों के लिए वह ग्राहक उपलब्ध कराता था। महिला के पति की पहले मृत्यु हो चुकी थी ऐसे में आरोपी के महिला से अवैध संबंध भी थे। इसके साथ ही आरोपी के महिला की बेटी से भी अवैध संबंध बन गए थे। इस बात की जानकारी जब महिला को हुई तो दोनों के बीच जमकर विवाद हुआ. इसी विवाद में आरोपी ने महिला का हाथ से गला दबा दिया। जिसमें महिला की मौत हो गई. इसके बाद महिला का शव डबल बेड पलंग में छिपा दिया ताकि किसी को पता नहीं चले और घर के बाहर ताला लगाकर फरार हो गया था। 1 अप्रैल को सुरेन्द्र को साथ लेकर महिला करीला गई हुई थी. 4 अप्रैल को दोनों वापस खुरई आए और 5 अप्रैल की रात को आरोपी ने घटना को अंजाम दिया।

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कोचिंग संस्थानों पर राज्य सरकार कसेगी शिकंजा, बनने जा रहा है सख्त कानून

भोपाल मध्य प्रदेश:  मध्य प्रदेश में आप पंजीकृत मनमाने तरीके से चल रहे कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर जल्द ही रोक लगने वाली है।। विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और मनमाने शुल्क पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार कोचिंग संस्थान विनियमन कानून लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून के तहत 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कोचिंग संस्थानों में प्रवेश नहीं दिया जा सकेगा। इसके साथ ही बिना पंजीयन संचालित होने वाले संस्थानों और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस कानून का प्रारूप तैयार कर लिया है और इसे 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भारत सरकार ने सभी राज्यों को कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए कानून बनाने संबंधित मॉडल का ड्राफ्ट भेजा था। उस आदेश के दो वर्ष बाद अब मध्यप्रदेश में कोचिंग नियंत्रित करने के लिए कानून बनने जा रहा है।उच्च शिक्षा विभाग ने इसका प्रारूप तैयार कर लिया है। इसमें कोचिंग संस्थानों के पंजीयन के साथ साथ कई सारे नियमों का समावेश किया जा रहा है। अभी तक मध्य प्रदेश में कोचिंग संस्थान मनमाने ढंग से चल रहे हैं। कोई मजबूत नियमावली नहीं है। फीस लेने से लेकर पढ़ाई के लिए रखे गए शिक्षकों की योग्यता, सही बैठने की व्यवस्था या सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई नियंत्रण नहीं है। हालांकि, जिला प्रशासन और अन्य विभाग कोई अनियमितता पाए जाने पर अपने हिसाब से कार्रवाई करते हैं। लेकिन कोई स्थायी नियम न होने के वजह से कई बार दुविधा की स्थिति भी बनती है।

यह नया कानून सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए मॉडल एक्ट के आधार पर तैयार किया जा रहा है। अभी तक कोचिंग संस्थानों की फीस, पढ़ाई के घंटे, शिक्षकों की नियुक्ति और अन्य व्यवस्थाओं पर कोई स्पष्ट नियंत्रण नहीं है। अलग-अलग विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई करते हैं, लेकिन पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था नहीं है। नया कानून लागू होने के बाद सभी कोचिंग संस्थानों के लिए एक जैसे नियम लागू होंगे। प्रस्तावित कानून के अनुसार किसी भी कोचिंग संस्थान को संचालन से पहले अनिवार्य रूप से पंजीयन कराना होगा। इसके लिए भवन अनुज्ञा, फायर सेफ्टी और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी होगा।

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सरकार का मानना है कि कम उम्र में बच्चों पर अत्यधिक पढ़ाई और लगातार टेस्ट का दबाव मानसिक तनाव पैदा करता है। इसलिए नए कानून में 16 वर्ष से कम आयु के विद्यार्थियों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही छात्रों के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता और काउंसलिंग की व्यवस्था करना भी अनिवार्य होगा। कोचिंग संस्थानों पर आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों द्वारा शिक्षण कार्य किए जाने के चलते कई आपराधिक घटनाओं की खबरें भी कई बार सामने आई हैं। कोचिंग संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए भी नियम बनाए गए हैं। किसी भी नैतिक अपराध में दोषी व्यक्ति को अध्यापन कार्य की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा शिक्षकों का कम से कम स्नातक होना जरूरी होगा।

यदि कोचिंग संस्थान को नियंत्रित करने के लिए कानून लागू हो जाता है तो इसका सीधा लाभ छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा। छात्रों पर पड़ रहे अतिरिक्त बोझ में कमी आएगी। साथ ही कोचिंग संस्थानों पर छात्रों के साथ होने वाले लापरवाही और दुर्व्यवहार में भी कमी आएगी। साथ ही जो कोचिंग संस्थान व्यवस्थित रूप से चल रहे हैं, उन्हें भी इस नए कानून का लाभ मिलेगा क्योंकि जो कोचिंग अच्छे मापदंड पर संचालित हो रहे हैं उनके प्रति छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बढ़ेगा और वे आसानी से नए कानून के अनुसार कोचिंग संचालित कर पाएंगे, लेकिन अव्यवस्थित और आदि अधूरी तैयारियों से कोचिंग चलाने वालों के लिए यह कानून मुश्किल पैदा कर सकता है।

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हैवानियत; पड़ोसी पति पत्नी ने मासूम बच्ची के साथ की बर्बरता, हुई मौत

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर के पुरानी छावनी क्षेत्र से हैवानियत की एक ऐसी तस्वीर निकलकर आई है कि इसे अंजाम देने वाले पति पत्नी को शायद आप इंसान मानने से ही इनकार कर दें। मामला बरा गांव क्षेत्र का है, जहां एक मासूम बच्ची पर चोरी के शक में इस तरह से बर्बरता की गई की देखने और सुनने वाले के रोन्गटे खड़े हो गए। मात्र आठ साल की मासूम बच्ची के साथ वह सब कुछ किया गया जो शायद हकीकत में हुआ है इस बात पर अभी भी यकीन नहीं हो रहा। बर्बरता इस हद तक की गई की बच्ची ने अंत में दम तोड़ दिया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि ऐसी बर्बरता करने पर पड़ोस के पति पत्नी का कलेजा नहीं कांपा। मानो मानव शरीर में उनके अंदर कोई हैवान सवार हो।

पुरानी छावनी के बरा गाँव में आठ वर्षीय मासूम बच्ची खेलते खेलते, अपने पड़ोसी के घर चली गई जब पड़ोसी आमिर खान अपने घर पहुंचा तो उसे बच्ची का खेलना नागवार गुजरा और आमीन और उसकी पत्नी ने यह आरोप लगाया कि इस बच्ची ने घर से रुपया और गहने चुरा लिए हैं। यह देखते हुए पहले आमिर अपनी पत्नी के साथ इस बच्ची के घर पहुंचा, वहां पूरे घर में अपना सामान ढूंढा। कुछ पैसे मिलने पर उठा लिए वो बच्ची के साथ वापस अपने घर आया। बच्ची को रस्सी पर पलंग से बांध दिया और इसके बाद इस मैचरूम बच्ची की जमकर पिटाई की। हाथ पैर से मारने पर भी मन नहीं भरा तो पति पत्नी ने मिलकर कील लगे हुए डंडों से बच्ची की पिटाई करी जिससे बच्ची के हाथ पैर लहूलुहान हो गए।

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घटना के बाद आमिर और उसकी पत्नी अपने ऑटो में बिठाकर मासूम बच्ची को उसके घर छोड़ आए। बच्ची के पिता ने अपनी बेटी को घायल अवस्था में देखा और पूरी जानकारी ली तो उसे भी यही बताया कि तुम्हारी बेटी ने गहने और पैसे चुराए हैं। बेटी की गंभीर हालत देखकर पिता को दया आई।रात में उसने बेटी से खाने पीने का पूछा लेकिन मासूम ने कुछ नहीं खाया। इसके बाद मासूम को सुला दिया, लेकिन पिता को क्या पता था के मासूम बच्ची ऐसी सोएगी कि फिर कभी नहीं उठेंगी और सुबह जब पिता उठा और बच्ची को उठाने की कोशिश की तो बच्ची नहीं उठी। बच्ची को मृत देखकर पिता और मोहल्ले वालों ने पुलिस को सूचना दी।

मानवता को दहला देने वाले इस पूरे मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मासूम बच्ची के हत्यारे आमीन को गिरफ्तार कर लिया है और उसके पत्नी को पकड़ने के लिए भी दबिश दे रही है। बच्ची के शव का जब पोस्टमार्टम किया तो उसमें मौत की वजह न्यूरोलॉजिकल। शॉक बताई गई डॉक्टर्स का कहना है कि ऐसी स्थिति में मस्तिष्क और मेरूदंडू के बीच संपर्क बाधित हो जाता है। यह अत्यंत आपातकालीन चिकित्सकीय स्थिति है। ऐसी स्थिति में, तंत्रिका तंत्र पूरी तरह से प्रभावित होने के चलते पीड़ित को बचाना मुश्किल हो होता है। मासूम को बहुत ज्यादा पीड़ा देकर पीटा गया, जिसकी वजह से यह स्थिति बनी।

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इस घटना की खबर के बाद पूरा बड़ा गांव दहशत में है। हर कोई यही चर्चा कर रहा है की कोई आदमी इतना निर्दय कैसे हो सकता है कि एक मासूम बच्ची को इतनी बेरहमी से मारे कि उसकी मौत हो जाए। आमीन और उसकी पत्नी ने जो चोरी का आरोप लगाया है, उसके बारे में भी कुछ स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। पड़ोस के लोगों का कहना है के आमीन के घर में अमरूद के पेड़ भी लगे हैं जिसकी वजह से बच्चे वहां तक चले जाते हैं लेकिन आमिर के कमरों में ताला लगा रहता है। छोटे बच्चे ताला तोड़कर चोरी नहीं कर सकते हैं। इस पूरे घटना ने और इस घटना में हुई बर्बरता ने मानवता को झंझोर कर रख दिया है।

रिश्वतखोर महिला पटवारी पति संग रंगे हाथों पकड़ी गई

ग्वालियर मध्यप्रदेश: लोकायुक्त पुलिस ने ग्वालियर में शुक्रवार शाम तहसील तानसेन के हल्का गूंधारा में पदस्थ महिला पटवारी रेखा शाक्य को किसान से रिश्वत की दूसरी किस्त लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पटवारी जमीन के सीमांकन और नामांतरण (दाखिल-खारिज) की फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर रिश्वत की मांग कर रही थी। लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही संबंधित विभाग को भ्रष्ट पटवारी पर कार्रवाई के लिए लिखा है। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक निरंजन शर्मा ने बताया कि सिरसौद मुरार निवासी मंशाराम ने 16 जून 2026 को लोकायुक्त कार्यालय ग्वालियर में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इसी लिखित शिकायत पर जांच करने के बाद लोकायुक्त ने संबंधित पटवारी पर कार्रवाई की है। 

उन्होंने बताया था कि ग्राम गूंधारा में उसकी बहन गुड्डी की जमीन का सीमांकन होना था। उसकी पत्नी सावित्रीबाई के नाम पर जमीन का नामांतरण होना था। इस कार्य को करने के एवज में हल्का पटवारी रेखा शाक्य पत्नी कृष्णकांत शाक्य लगातार चक्कर कटवा रही थी और 15,000 रुपए की रिश्वत मांग रही थी। शुक्रवार को तय रणनीति के मुताबिक, लोकायुक्त की टीम ने बताए गए घटना स्थल पर दबिश दी। और पटवारी और उसके पति को रंगे हाथों पकड़ लिया। आपको बता दें कि नामांकन बटांकन के तमाम मामले राजस्व विभाग में लंबित हैं और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होते हुए भी इन लंबित मामलों को निपटाने का प्रयास नहीं चलता। इसके चलते ही पटवारियों के हौसले बुलंद हो जाते हैं और वह रिश्वतखोरी का खेल शुरू कर देते हैं। 

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उपनगर मुरार स्थित पूनम माथुर के मकान की तीसरी मंजिल पर बने एक कमरे में जैसे ही पीड़ित मंशाराम ने पटवारी रेखा शाक्य को रिश्वत की अगली किस्त के 5,000 रुपए थमाए, वैसे ही आसपास सादे कपड़ों में तैनात लोकायुक्त की टीम ने उसे दबोच लिया।जब पटवारी के हाथ केमिकल युक्त पानी से धुलवाए गए, तो उनका रंग गुलाबी हो गया, जो इस बात का पक्का वैज्ञानिक सबूत है कि नोटों को आरोपी ने ही छुआ था। लोकायुक्त ने आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 7 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। 

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