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रेत माफिया भाजपा नेताओं पर हत्या का केस दर्ज, बड़ा सवाल; क्या चंबल में रेत माफिया पर विराम लगेगा?

मुरैना मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश का मुरैना और भिंड जिला अवैध रेत उत्खनन के लिए कुख्यात है। रेत माफिया इस कदर हावी है कि कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। अभी हाल ही में मुरैना में वर्णरक्षक, ऋषिकेश गुर्जर की हत्या रेत माफिया ने ट्रैक्टर से कुचलकर कर दी थी। इस हत्या के बाद मुरैना में हावी रेत माफिया का मुद्दा एक बार और गर्माया और सवाल उठने लगे कि नेताओं के संरक्षण में चल रहा रेत?माफिया कब तक ऐसे ही लोगों की जान लेता रहेगा? इस मामले के बाद पहली बार न केवल भाजपा नेताओं का नाम इस हत्या में सामने आया, बल्कि दो भाजपा नेताओं पर मामला भी दर्ज किया गया। और यह साफ हो गया कि सत्ताधारी भाजपा के संरक्षण में ही अवैध रेत उत्खनन का गंदा खेल चंबल में चल रहा है।

रेत परिवहन कर रही ट्रैक्टर को रोकने के प्रयास में 1 आरक्षक की मौत हो गई। मामले के तूल पकड़ने पर कार्रवाई शुरू हुई मुरैना जिले के दिमनी थाना ने ट्रैक्टर चालक पर एफआईआर दर्ज की और जब पता चला कि यह पूरा काम भाजपा नेता पवन तोमर और सोनू चौहान करवा रहे हैं, तो बाद में जब मामला तूल पकड़ा तो एफआईआर में इन दोनों के नाम भी जोड़े गए। अब दोनों भाजपा नेताओं और ट्रैक्टर चालक पर हत्या, अवैध उत्खनन, खनिज चोरी की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। लेकिन इन छुटभैये भाजपा नेताओं को कौन से भाजपा मंत्री का संरक्षण प्राप्त था जिसके चलते यह रेत माफिया सक्रिय था, इस बात का खुलासा अभी तक पुलिस नहीं कर सकी है और शायद आगे कर भी नहीं पाएगी?

दिमनी थाना क्षेत्र के रामपुर में 8 अप्रैल को बन विभाग की टीम गश्त पर थी। उसी समय अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली दिखाई दी, जिसे रोकने का प्रयास 1 विभाग की टीम ने किया। जब ट्रैक्टर नहीं रुका तो हृषिकेश गुर्जर ट्रैक्टर पर लटक गया, लेकिन ट्रैक्टर चालक ने ट्रैक्टर न रोकते हुए ट्रैक्टर ही 1 आरक्षक रेशे ऋषिकेश पर चढ़ा दिया और बेरहमी से ऋषिकेश की हत्या कर दी। ट्रैक्टर चालक का यह तरीका साफ बता रहा है कि उसको किसी का डर नहीं था या कहें कि उसके ऊपर किसी न किसी रसूखदार सत्ताधारी नेता या मंत्री का संरक्षण था। शुरुआत में पुलिस ने ट्रैक्टर चालक पर मामला दर्ज किया था तो वहीं वन विभाग ने ट्रैक्टर चालक के साथ भाजपा नेता पवन तोमर और सोनू चौहान पर प्राथमिकी दर्ज की थी। जिसके बाद पुलिस को भी अपनी एफआईआर में दोनों भाजपा नेताओं के नाम जोड़ने पड़े।

आपको बता दें कि चंबल अंचल में चंबल नदी से रेत के उत्खनन पर एनजीटी ने सख्ती से रोक लगा रखी है। इसके बावजूद यहाँ अवैध उत्खनन खुलेआम चलता है।यहाँ के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस अधिकारियों को भी पता है कि कौन कहां अवैध उत्खनन कर रहा है। पहले भी वन विभाग की एक जुझारू महिला अधिकारी उत्खनन के विरोध में कार्यवाही कर रही थी, जिसे दबंग सत्ताधारी नेता ने अपने प्रभाव के चलते जिले से बाहर फिकवा दिया था। मतलब साफ नजर आता है कि क्षेत्र में रेत माफिया की सत्ताधारी भाजपा से साठगांठ है। जिसके चलते प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी अपने हिस्से के टुकड़े लेकर खामोश बैठते हैं। और जो खामोश नहीं बैठता, उसे ऋषिकेश गुर्जर की तरह खामोश कर दिया जाता है।

भाजपा के कद्दावर मंत्री एदल सिंह कंसाना रेत माफिया को पेट माफिया बता चुके हैं। इस तरह उन्होंने रेत माफिया को खुलेआम अवैध कारोबार का मानो सर्टिफिकेट दे दिया है। एक और भाजपा की कद्दावर नेत्री का वह बयान अब तक याद आता है पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने चंबलपुर से गुजरते हुए जब रेत का उत्खनन देखा था तो उन्होंने भी इस पर गंभीर नाराजगी जताई थी। लेकिन रेत माफिया सत्ताधारी पार्टी में इस कदर हावी है कि उमा भारती की वह नाराजगी भी कहीं रफा दफा हो गई और रेत माफिया को संरक्षण देने वाले या कहें, रेतमातरा का संचालन करने वाले सत्ताधारी पार्टी के कद्दावर मंत्रियों और नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री की आवाज भी दबा दी।

अब आप समझिए कि मुरैना के दिमनी छाना क्षेत्र में वनरक्षक ऋषिकेश गुर्जर की रेत माफिया द्वारा हत्या के मामले में इतनी कार्रवाई क्यों करनी पड़ रही है, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है और तेरह अप्रैल को इसकी सुनवाई होनी है।अब, यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो पुलिस अधिकारियों को माननीय न्यायालय के सामने जवाब देते नहीं बनता। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है और इस जवाब की तैयारी मुरैना। पुलिस और मुरैना 1 विभाग को करनी है और वही जवाब सुप्रीम कोर्ट के सामने मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से दिया जाएगा। अब, यदि इस जवाब में कोई चूक या कमी रह जाती है, तो जिम्मेदारों को माननीय सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का सामना करना पड़ सकता है। अब देखना होगा कि तेरह अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे क्या निर्देश देती है?

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चिता पर लेट मुआवजा मांगने को मजबूर महिलाएं, विकास की खौफनाक तस्वीर

पन्ना मध्यप्रदेश: देश के विकास के लिए बनाई गई योजनाएं कई बार गरीब मजदूरों के हक को कुचलकर और उनके जीवन से खिलवाड़ करके बनाई जाती हैं। इसका एक ताजा उदाहरण पन्ना में देखने को मिला केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है केन और बेतवा नदी को जोड़ना लेकिन इस नदी को जोड़ने वाली योजना में तमाम ऐसे गाँव हैं जो डूब क्षेत्र में आ जाएंगे। गांव का अस्तित्व खत्म हो जाएगा और वहां के आदिवासियों का पूरा जीवन तहस नहस हो जाएगा। इस परियोजना में डूब क्षेत्र में आने वाले पन्ना जिला के 8 गाँव के आदिवासी 6 दिन से ढोलन बांध क्षेत्र में प्रदर्शन कर रहे हैं और इस प्रदर्शन के चलते ही इस बांध क्षेत्र में काम बंद है। इन आदिवासियों की मांग है कि जिस तरह छतरपुर में विस्थापितों को साढ़े बारह लाख रुपए मुआवजा दिया गया था, उसी तरह यहाँ पर भी द्वारा सर्वे कराकर इस समस्या पर ध्यान दिया जाए।

आपको बता दें कि पन्ना जिले के इन आदिवासी महिला पुरुष और बच्चों के आंदोलन ने अब तीव्रता पकड़ ली है और इस आंदोलन में आदिवासी महिलाओं ने एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया है। सांकेतिक रूप से वह चिताओं पर लेटकर मुआवजे की मांग कर रही हैं।उनका कहना है की विस्थापन के बाद उनका जीवन खत्म होना ही है, इसलिए या तो उचित मुआवजा दो या हमें जला दो। प्रशासन का यह दावा है कि आदिवासियों से ज्यादा बाहरी लोग इस प्रदर्शन में जुटे हुए हैं और इन बाहरी लोगों को प्रदर्शन से दूर रखने के लिए क्षेत्र के 14 गाँव में 6 अप्रैल से धारा 100 तिरेसठ लागू कर दी गई है। कलेक्टर पार्थ जायसवाल का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की मुआवजा बढ़ाने की मांगें भू अर्जन अधिनियम के तहत पूरी नहीं की जा सकतीं।मुआवजा सरकार भी नहीं बढ़ा सकती।शिकायत पर सर्वे कर निराकरण किया जा सकता है जिसके प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रदर्शनकारी न केवल मुआवजे की मांग कर रहे हैं, बल्कि सिस्टम पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगा रहे हैं। लगातार शिकायतें करने के बावजूद भी सुनवाई न होने पर यह प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली जा रहे थे, तभी खैरी टोल प्लाजा पर इन्हें रोक दिया गया, जिससे यह प्रदर्शनकारी वहीं नजदीक ढोहन बांध निर्माण। की जगह पर ही धरने पर बैठ गए।प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने उनके द्वारा घर घर से जुटाया गया, राशन भी छीन लिया और उनका पानी रोक दिया ताकि वे हार मानकर घर लौट जाएं। प्रदर्शनकारियों के यह आरोप गंभीर हैं और अंग्रेजों के जमाने के तानाशाह प्रशासन की याद दिलाते हैं। 

सिंधिया समर्थक दत्तीगांव ने भाजयुमो उपाध्यक्ष की नियुक्ति के विरोध में मोर्चा खोला

भोपाल मध्य प्रदेश: भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा में प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर धार जिले के बदनावर विधानसभा क्षेत्र से जय सूर्या की नियुक्ति को लेकर पार्टी के अंदर सियासी तकरार बढ़ गई है। पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे “शुभ संकेत नहीं” बताया है। आपको बता दें कि राजवर्धन सिंह सिंधिया के कट्टर समर्थक माने जाते हैं और दो हजार बीस में कमलनाथ सरकार को गिराकर जब सिंधिया ने भाजपा का दामन थामा था तो राजवर्धन सिंह भी सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे। अब आप समझ सकते हैं कि राजवर्धन सिंह का यह विरोध कहीं न कहीं भाजपा की अंदरूनी कलह पर मुहर लगा रहा है।

पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने बिना नाम लिए जय सूर्या पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को युवा मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है, वह निष्क्रिय रहने के साथ-साथ आपराधिक छवि वाला व्यक्ति है। उन्होंने दावा किया कि इस व्यक्ति पर कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं और वह पिछले दो वर्षों से जिले की राजनीति से पूरी तरह गायब रहा है।दत्तीगांव ने कहा, “मैंने पार्टी को लिखित शिकायत दे दी है। इसमें उनके क्रियाकलाप, विधानसभा चुनाव में गैरमौजूदगी और आपराधिक रिकॉर्ड का जिक्र किया गया है। यदि जरूरत पड़ी तो थाने से RTI लगाकर उनके और उनके परिवार पर दर्ज प्रकरण निकलवाए जा सकते हैं।”

राजवर्धन सिंह दत्ती गांव के इस बयान के बाद मध्यप्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और यह चर्चा चलने लगी है कि भाजपा के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। आपको बता दें कि अभी हाल ही में भाजपा द्वारा मंडल में नियुक्तियों को लेकर सिंधिया समर्थकों की उपेक्षा की गई थी और ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थकों के नामों पर अड़े हुए थे। और अब भाजयुमो उपाध्यक्ष पद पर हुई नियुक्ति पर इस तरह से खुलकर सामने आने पर सिंधिया समर्थक राजवर्धन सिंह ने एक नई बहस की शुरुआत कर दी है।

राजवर्धन सिंह दत्ती गांव ने शुभकामनाएं देते हुए कटाक्ष किया कि “यह शुभ संदेश नहीं है”। उन्होंने भाजपा के सिद्धांतों, दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी को स्वच्छ छवि और अनुशासन बनाए रखना चाहिए। अब सवाल यह है कि भाजपा का उच्च नेतृत्व इस विवादित नियुक्ति पर दोबारा विचार करेगा या अंदरूनी विरोध के बावजूद फैसले पर कायम रहेगा। अब देखना होगा कि भाजपा सिंधिया समर्थक के इस नसीहत को कितनी गंभीरता से लेती है?

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सिंधिया का समर्थकों संग सड़क पर फोटो; संदेश कुछ गहरा है?

jyotiraditya scindhia news: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अभी हाल ही में ग्वालियर दौरे पर थे, जहां भाजपा के नवीन कार्यालय के भूमि पूजन के बाद सिंधिया अपने समर्थकों के साथ निर्माणाधीन एलिवेटेड कॉरिडोर पर पहुंचे। वहां पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने कट्टर समर्थक प्रद्युमन सिंह तोमर, मोहन सिंह राठौर और तुलसी सिलावट के साथ सड़क पर बैठकर एक फोटो खिंचवाई, जो इस समय जमकर वायरल हो रही है और लोग इस फोटो पर तरह तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इस फोटो में कुछ न कुछ गहरा संदेश नजर आ रहा है। यह संदेश बहुत गहरा है, इसलिए यह एक कोई सामान्य फोटो नहीं, यह वह फोटो है जो इतिहास रच सकता है और भविष्य बदल सकता है। 

आपको बता दें कि जब मध्यप्रदेश में लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस की सरकार आई थी और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे, तो कमलनाथ से मतभेद के चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सड़क पर उतरने तक की बात कह दी थी और उस समय ज्योतिरादित्य सिंधिया की सड़क पर उतरने की बात को कमलनाथ सरकार ने हल्के में लिया था और उसका नतीजा यह हुआ कि ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी पूरी फौज के साथ कांग्रेस छोड़ भाजपा में आ गए। और मध्यप्रदेश में भाजपा जहां मजबूत हुई तो कांग्रेस पूरी तरह कमजोर हो गई। ज्योतिरादित्य सिंधिया इस सेना में एक बात बहुत खास है के तमाम सैनिक और स्पेशलार मजबूती से सिंधिया के साथ खड़े रहते हैं और जहां पाला बदलने की उम्मीद है ना के बराबर होती हैं। जो समर्थक सिंधिया के साथ भाजपा में आए थे वह आज भी खुद को भाजपाई की बजाय सिंधिया समर्थक कहते हैं। 

ज्योतिरादित्य सिंधिया का अपने समर्थकों के साथ सड़क पर बैठा यह फोटो बहुत कुछ बयां कर रहा है। अभी हाल ही में भाजपा में नियुक्तियों को लेकर और निगम मंडलों के अध्यक्ष की नियुक्तियों को लेकर भाजपा की अंदरूनी कलह किसी से छुपी नहीं है। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने खुलकर कहा कि सिंधिया की वजह से ही मंडल में नियुक्ति की सूची अटकी हुई है। ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने छह समर्थकों को कहीं न कहीं सेट कराने की बात पर अड़े हुए हैं, जिनमें मुन्नालाल गोयल, इमरती देवी जैसे प्रमुख नाम हैं। यह बात भाजपा भली भांति जानती है कि सिंधिया झुकते नहीं हैं, चाहे उन्हें सड़क पर उतरना पड़े। जिस तरह से सिंधिया ने अपने समर्थकों के साथ सड़क पर बैठकर फोटो खिंचवाई है और यह फोटो वायरल हो रही है।इस फोटो को देखकर यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि यह कहीं ना कहीं भाजपा को एक अप्रत्यक्ष चेतावनी है। 

भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा में प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर धार जिले के बदनावर विधानसभा क्षेत्र से जय सूर्या की नियुक्ति को लेकर पार्टी के अंदर सियासी तकरार बढ़ गई है। पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे “शुभ संकेत नहीं” बताया है। राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने शुभकामनाएं देते हुए कटाक्ष किया कि “यह शुभ संदेश नहीं है”। उन्होंने भाजपा के सिद्धांतों, दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी को स्वच्छ छवि और अनुशासन बनाए रखना चाहिए। अब सवाल यह है कि भाजपा का उच्च नेतृत्व इस विवादित नियुक्ति पर दोबारा विचार करेगा या अंदरूनी विरोध के बावजूद फैसले पर कायम रहेगा। आपको बता दें कि डट्टी गांव सिंधिया के कट्टर समर्थक हैं और दो हजार बीस में कमलनाथ की सरकार छोड़कर वे भी सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हुए थे। 

राजवर्धन सिंह दत्ती गांव का यह उदाहरण इसलिए दे रहा हूं कि सिंधिया के जो भी समर्थक मध्यप्रदेश में जहां भी सक्रिय हैं, वह भाजपा को दूसरे दर्जे पर रखते हैं और सिंधिया को न केवल प्रथम पायदान पर रखते हैं, बल्कि सिंधिया को ही अपना इष्ट और पूज्य मानते हैं। और यही समर्थक सिंधिया की सबसे बड़ी ताकत है और जब समर्थक इतने कट्टर हों और सिंधिया के लिए किसी भी बात बढ़ने को तैयार हो, तो फिर यदि सिंधिया भी तमाम नियुक्तियों में अपने समर्थकों को लाभ दिलाना चाहते हैं, तो निश्चित ही वह ऐसे समर्थकों के लिए किसी भी हद तक अड़ सकते हैं। अपने समर्थकों के साथ सड़क पर बैठकर फोटो खिंचाकर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साफ संदेश दे दिया है और शायद इस फोटो में यही संदेश छुपा है कि उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है। अब देखना होगा कि यह फोटो अपेक्षित परिणाम सिंधिया खेमे को दे पाने में कितना सफल होता है?

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10वी की छात्रा ने रिजल्ट से पहले तनाव में की आत्महत्या

इन्दौर मध्य प्रदेश: इंदौर के विजयनगर थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां 10वीं के परीक्षा परिणाम से आहत एक 17 वर्षीय छात्रा ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा के दबाव और मानसिक तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना विजय नगर थाना क्षेत्र के प्रकाश चंद्र सेठी नगर में रहने वाली 17 वर्षीय पलक, पिता जितेंद्र कश्यप ने अपने घर में ही आत्मघाती कदम उठा लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि छात्रा ने हाल ही में 10वीं कक्षा की परीक्षा दी थी और रिजल्ट को लेकर वह काफी तनाव में थी। परीक्षा के बाद से ही चले आ रहे दबाव को वह झेल नहीं पाई। वह परिजनों ने भी उसकी मानसिक स्थिति पर ध्यान नहीं दिया और यह लापरवाही परिजनों को भारी पड़ गई।

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परिजनों के मुताबिक, पलक पढ़ाई में अच्छी थी और उससे अच्छे परिणाम की उम्मीद भी की जा रही थी। लेकिन जैसे ही परीक्षा परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आया, वह मानसिक रूप से टूट गई। इसी तनाव में आकर उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया। एक दसवीं क्लास की छात्रा द्वारा इतना बड़ा कदम उठाए जाने की घटना के बाद अब पूरे परिजन और पड़ोसी अचंभित हैं।

घटना की सूचना मिलते ही विजयनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस मामले की जांच कर रही है और परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। फिलहाल इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है। फिर भी, पुलिस सभी एंगल से मामले की जांच कर रही है। लेकिन परिणाम से पहले ही छात्रा द्वारा आत्महत्या का कदम उठाना कई सवाल खड़े कर रहा है।

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एमपी के इस जिले में पेट्रोल डीजल खत्म, स्टॉक खत्म के लगे पोस्टर

दमोह मध्य प्रदेश: दमोह जिले में पेट्रोल और डीजल की कमी से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर सहित जिले के 20 से अधिक पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का स्टॉक लगभग खत्म हो गया है, जिससे वाहन चालकों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों से मध्यप्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल पंप पर भीड़ देखी जा रही है। ऐसा बताया जा रहा था कि यह भीड़ पेट्रोल, डीजल खत्म हो जाने की अफवाह की वजह से है। लेकिन दमोह में तो हकीकत में पेट्रोल डीजल की किल्लत शुरू हो गई है।

जेल विभाग के पेट्रोल पंप पर भी बड़ी संख्या में लोग अपनी गाड़ियां लेकर पहुंचे थे। सहायक जेल अधीक्ष ने बताया कि उनके पास अभी पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन यदि लोग अफवाहों के चलते इसी प्रकार भीड़ में आते रहे तो उनके यहां भी स्टॉक खत्म हो सकता है। वहीं दूसरी ओर पुलिस विभाग का पेट्रोल पंप बुधवार रात से ही बंद है, क्योंकि वहां डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति खत्म हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, शाम तक टैंकर आने पर आपूर्ति फिर से शुरू होने की उम्मीद है।

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जानकारी के अनुसार दमोह शहर के टंडन पेट्रोल पंप, कन्हैया पेट्रोल पंप, जेल पेट्रोल पंप, पुलिस पेट्रोल पंप सहित नरसिंहगढ़ क्षेत्र के तीन पेट्रोल पंपों पर ईंधन का स्टॉक समाप्त हो गया है। इसके अलावा रामा राम पेट्रोल पंप, नायरा पेट्रोल पंप, मां वैष्णव पेट्रोल पंप (मुक्तिधाम चौराहा), साहू तिगड़ा के आगे स्थित पेट्रोल पंप और सिंगपुर पेट्रोल पंप समेत कई अन्य पेट्रोल पंपों पर भी पेट्रोल-डीजल उपलब्ध नहीं है।

ईंधन की कमी के कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग पेट्रोल पंपों पर पहुंचने के बाद खाली हाथ लौट रहे हैं। वहीं पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि सप्लाई में देरी के कारण यह स्थिति बनी है। नई खेप आने के बाद ही स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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पंजाब का आप विधायक एमपी से गिरफ्तार, रेप के मामले में 7 महीने से था फरार

शिवपुरी मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश से देश की राजनीति की एक बड़ी खबर निकल कर आ रही है। खबर पंजाब के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा से जुड़ी हुई है, जिन्हें एमपी से गिरफ्तार किया गया है। वे करीब 7 माह से फरार चल रहे थे। एक रेप केस में पुलिस उनकी तलाश में जुटी थी। एक महिला ने उन पर यौन शोषण, धमकाने और अश्लील सामग्री भेजने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत की थी। इसके बाद से ही आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा गायब हो गए। बुधवार को उन्हें एमपी के शिवपुरी से पकड़ा गया है। जानकारी के अनुसार पंजाब पुलिस ने विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा को एक कार में पकड़ा। उन्हें गिरफ्तार कर पंजाब ले जाया गया है।

हरमीतसिंह पठानमाजरा सनौर के विधायक हैं। वे आम आदमी पार्टी से पहली बार विधायक बने हैं। पठानमाजरा के खिलाफ पिछले साल 1 सितंबर को पटियाला के सिविल लाइंस पुलिस थाने में दुष्कर्म का केस दर्ज कराया गया था। ज़ीरकपुर की एक महिला ने यह शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस में केस दर्ज होने की भनक लगते ही विधायक हरमीतसिंह पठानमाजरा फरार हो गए। पंजाब पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए हरियाणा के करनाल पहुंची थी तो पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया और गोलियां भी चलाई गईं।

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पटियाला पुलिस को सूचना मिली कि विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा एमपी में हैं। वे अपने कुछ साथियों के साथ कार से कहीं जा रहे हैं। सूचना मिलते ही पटियाला पुलिस सक्रिय हुई और शिवपुरी के पास से विधायक हरमीतसिंह पठानमाजरा को गिरफ्तार कर लिया। 6 महीने से फरार चल रहे विधायक को दो साल पुराने रेप केस में पटियाला पुलिस ने आखिरकार दबोच लिया। विधायक हरमीत पठानमाजरा को ग्वालियर-शिवपुरी बायपास से गिरफ्तार किया गया है। वे अपने समर्थकों के साथ सफेद रंग की स्कॉर्पियो से कहीं जा रहे थे। पुलिस उन्हें लेकर पटियाला चली गई है।

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AC कोच के टॉयलेट में सांप की खबर से मचा हड़कंप, जांच में निकली अफवाह

कटनी मध्य पदेश: कटनी मुड़वारा रेलवे स्टेशन पर मंगलवार देर रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक्सप्रेस ट्रेन के एसी कोच के टॉयलेट में सांप होने की खबर फैल गई। सूचना मिलते ही यात्रियों में डर का माहौल बन गया। बताया जा रहा है कि ट्रेन नंबर 12549 दुर्ग-उधमपुर एक्सप्रेस के एसी कोच के टॉयलेट में सांप दिखने की सूचना यात्रियों को मिली। इसके बाद घबराए यात्रियों ने एहतियात के तौर पर टॉयलेट का दरवाजा रस्सी से बांध दिया, ताकि कोई भी यात्री अंदर न जा सके। जैसे ही ट्रेन कटनी मुड़वारा स्टेशन पहुंची, पहले से सतर्क आरपीएफ और जी आर पी सर्प विशेषज्ञों की टीम मौके पर मौजूद थी।

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टीम ने तुरंत एसी कोच के टॉयलेट का दरवाजा खुलवाकर सघन जांच शुरू की। करीब से जांच करने पर टॉयलेट या बोगी में कहीं भी सांप नहीं मिला। पूरी ट्रेन की बारीकी से तलाशी लेने के बाद भी कोई सांप नहीं दिखाई दिया।“सांप की सूचना मिलने पर तुरंत सर्प विशेषज्ञ को बुलाया गया था। बोगी की पूरी तरह जांच की गई, लेकिन कहीं भी सांप नहीं मिला। इसके बाद ट्रेन को सुरक्षित आगे रवाना कर दिया गया। जिसके बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। हालांकि, इस घटना ने कुछ देर के लिए ट्रेन में दहशत का माहौल जरूर बना दिया।

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पूरी घटना के बाद चर्चा यह भी चल रही है कि शायद शाम था ही नहीं और किसी ने अफवाह फैलाई है। इसी बीच जिस व्यक्ति ने एसी कोच के टॉयलेट में सांप देखा था, वह किसी के सामने नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से लोगों में हड़कंप मचा था, उसको देखकर लगता था कि वास्तव में किसी ने सांप नहीं देखा, लेकिन आखिरी में पूरी गहन जांच के बाद जब कहीं साँप नहीं दिखाई दिया तो कुछ लोग यह मानकर चल रहे हैं कि सांप शायद निकल कर पटरियों से बाहर चला गया होगा। या कुछ लोग यह भी चर्चा कर रहे हैं कि शायद किसी व्यक्ति ने अफवाह फैलाई हो।

25 साल की पड़ोसन के लिए डॉक्टर ने की पत्नी की हत्या, माचिस की तीली ने खोला राज!

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सागर मध्य प्रदेश: सागर जिले में डॉक्टर की पत्नी की कार में जलने से मौत हादसा नहीं, हत्या थी। पुलिस जाचं में यह साफ हो गया है। आरोपी पति डॉ. नीलेश पटेल ने 38 वर्षीय पत्नी सीमा कुर्मी को गला दबाकर मारा और फिर इसे हादसा दिखाने के लिए कार में आग लगा दी। आरोपी डॉक्टर के 25 साल की लड़की से अवैध संबध थे, जिसे लेकर ही उसने पत्नी को मौत के घाट उतार दिया। मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने डॉ. नीलेश पटेल को मुख्य आरोपी बनाते हुए उसके दो सहयोगियों को भी गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस की पूछताछ में आरोपी पति डॉ. नीलेश पटेल कबूल किया कि उसका पड़ोस में रहने वाली 25 साल की युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इस अवैध संबंध की जानकारी उसकी पत्नी सीमा को लग गई थी, जिसके बाद से दोनों के बीच लगातार विवाद हो रहे थे। इससे परेशान होकर उसने पत्नी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। पुलिस के अनुसार, 20 मार्च शुक्रवार की रात डॉ. नीलेश ने पहले पत्नी सीमा का गला दबाकर हत्या की. जिसे छिपाने के लिए उसने हादसे का रूप देने के लिए सोची-समझी साजिश रची।

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इसके बाद डॉ. नीलेश पटेल ने पुलिस को सचूना दी कि उसकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई और सीएनजी किट में विस्फोट होने से उसमें आग लग गई। हादसे में उसकी पत्नी की मौत हो गई। हालांकि, पुलिस को शुरुआत से ही इस कहानी पर संदेह था। मौके का निरीक्षण और फॉरेंसिक जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने पुलिस की शंका को और गहरा कर दिया।

पुलिस की जांच में सामने आया कि कार की अपेक्षा मृतका का शव अधिक बुरी तरह जला था, जो सामान्य दुर्घटना के मामलों से मेल नहीं खाता था। इसके साथ ही पुलिस को बारीकी से जांच करने पर माचिस और तीली भी घटनास्थल पर मिली। और कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए यहीं से पुलिस जब आगे बढ़ी तो यह स्पष्ट हो गया कि कार में आग बाद में लगी है।पहले मृतका के शरीर को जलाया गया है। इसके अलावा आरोपी लगातार अपना बयान बदल रहा था। साथ ही, सीमा के परिजनों ने भी नीलेश पर शक जताया था। उन्होंने भी पुलिस से कहा था कि डॉ. नीलेश का किसी महिला के साथ अवैध संबंध है, जिसके चलते उन्हें बेटी की हत्या का शक है। और पुलिस की जांच के बाद यह शक हकीकत में बदल गया। और पुलिस ने जब सख्ती से पूछताछ की तो आरोपी ने पत्नी की हत्या का राज उगल दिया।

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एसएएफ के पुराने क्वॉर्टर में आरक्षक ही चलवा रहे थे जुए का अड्डा

ग्वालियर मध्य प्रदेश: वर्दी को बदनाम करने वाले तमाम घटनाएं आपने सुनी होंगी, अब ऐसी ही एक हैरान करने वाली घटना ग्वालियर से सामने आ रही है, जहां वर्दी के रोग के आड़ में सरकारी क्वार्टर में ही दो आरक्षक जुए का अड्डा संचालित कर रहे थे। वे इतने बेखौफ थे कि खुलेआम जुए का अड्डा चला रहे थे और इस अड्डे पर आए जुआरियों को रौब के साथ दंभ भरते हुए विश्वास दिलाते थे कि यहां मजे से खेलो यहां कोई नहीं आ सकता, पुलिस भी नहीं आ सकती। और वर्दी की आड़ में वर्दी की गरिमा को तार तार करते हुए, इन दो आरक्षकों ने कानून का तमाशा बना दिया।

मामला ग्वालियर की एसएएफ बटालियन का है। लंबे समय से ग्वालियर एसपी धर्मवीर सिंह यादव को सूचना मिल रही थी कि एसएएफ की चौदहवीं बटालियन के पुरानी सरकारी आवास में जुए का अड्डा चल रहा है। और यहां रोज धड़ल्ले से जुआ चलता है और यह अड्डा कोई और नहीं बल्कि एसएएफ के दो आरक्षक ही संचालित कर रहे हैं। एसपी ग्वालियर ने क्राइम ब्रांच को मामला देकर पूरी तफ्तीश करवाई और पुख्ता सबूत मिलने पर दबिश की तैयारी की।

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एसपी ग्वालियर के निर्देश पर क्राइम ब्रांच की टीम और कम्पू थाना पुलिस ने जब संयुक्त रूप से एसएएफ के पुराने क्वार्टर पर दबिश दी तो वहां भगदड़ मच गई, लेकिन पुलिस ने पीछा कर सभी जुआरियों को पकड़ लिया। केवल एक युवक भागने में कामयाब रहा। यह जुए का अड्डा एसएएफ का आरक्षक धीरेंद्र सिंह चौहान संचालित करवा रहा था और एक और आरक्षक मलखान सिंह इसका साथ दे रहा था। पुलिस ने इन दोनों आरक्षकों के साथ दस जुआरियों को गिरफ्तार किया है।कार्रवाई होने के बाद इन दोनों आरक्षकों को निलंबित कर दिया गया है।

पकड़े गए आरक्षकों के बारे में वहां जुआ खेल रहे लोगों ने पुलिस को बताया की लंबे समय से वहाँ जुआ खेल रहे हैं। धीरेंद्र सिंह चौहान यह अड्डा चलाता है।उसने एक व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा है जहां से वह लोगों को जोड़ता है।कमीशन के रूप में वह हर दिन पाँच हज़ार रुपये कमाता है। वहां जुआ खेलने आने वाले लोगों को आरक्षक विश्वास दिलाता था कि यह जगह सुरक्षित है, यहां कोई नहीं आ सकता।पुलिस भी नहीं आ सकती।बेखौफ होकर यहां जुआ खेलो।

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पुलिस कार्रवाई में कुल दस लोगों को पकड़ा गया है। दूसरी बटालियन के आरक्षक धीरेंद्र सिंह चौहान को ₹25000 के साथ 13वीं बटालियन के आरक्षक मलकहन सिंह को ₹35000 के साथ पुरुषोत्तम कुमार घासमंडी को ₹40000 के साथ अशोक कुशवाह, सैनिक कॉलोनी को ₹30000 के साथ सत्येंद्र गुप्ता महलगांव को ₹35000 के साथ राजेश गुप्ता महलगांव को ₹30000 के साथ सुनील तोमर सैनिक कॉलोनी बीस हजार रुपए के साथ राहुल यादव हाथियापौर, अठारह हजार रुपए के साथ भूरा सिंह सागरताल को तीस हजार रुपये के साथ और सचिन बदनापुरा को सैंतीस हजार रुपये के साथ गिरफ्तार किया गया है।

वर्दी की आड़ में कानून से खेलने का शौक इन दोनों आरक्षकों को अब भारी पड़ गया है।दोनों को गिरफ्तार तो किया ही है साथ में दोनों की नौकरी भी चली गई है। दोनों को निलंबित किया गया है और अब दोनों पर विभागीय जांच भी बिठाई गई है।पुलिस ने इस कार्यवाही में दस लोगों से नो मोबाइल फोन बरामद किए हैं और साथ ही लगभग तीन लाख रुपए कैश बरामद किया है।

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