मुरैना मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश का मुरैना और भिंड जिला अवैध रेत उत्खनन के लिए कुख्यात है। रेत माफिया इस कदर हावी है कि कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। अभी हाल ही में मुरैना में वर्णरक्षक, ऋषिकेश गुर्जर की हत्या रेत माफिया ने ट्रैक्टर से कुचलकर कर दी थी। इस हत्या के बाद मुरैना में हावी रेत माफिया का मुद्दा एक बार और गर्माया और सवाल उठने लगे कि नेताओं के संरक्षण में चल रहा रेत?माफिया कब तक ऐसे ही लोगों की जान लेता रहेगा? इस मामले के बाद पहली बार न केवल भाजपा नेताओं का नाम इस हत्या में सामने आया, बल्कि दो भाजपा नेताओं पर मामला भी दर्ज किया गया। और यह साफ हो गया कि सत्ताधारी भाजपा के संरक्षण में ही अवैध रेत उत्खनन का गंदा खेल चंबल में चल रहा है।
रेत परिवहन कर रही ट्रैक्टर को रोकने के प्रयास में 1 आरक्षक की मौत हो गई। मामले के तूल पकड़ने पर कार्रवाई शुरू हुई मुरैना जिले के दिमनी थाना ने ट्रैक्टर चालक पर एफआईआर दर्ज की और जब पता चला कि यह पूरा काम भाजपा नेता पवन तोमर और सोनू चौहान करवा रहे हैं, तो बाद में जब मामला तूल पकड़ा तो एफआईआर में इन दोनों के नाम भी जोड़े गए। अब दोनों भाजपा नेताओं और ट्रैक्टर चालक पर हत्या, अवैध उत्खनन, खनिज चोरी की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। लेकिन इन छुटभैये भाजपा नेताओं को कौन से भाजपा मंत्री का संरक्षण प्राप्त था जिसके चलते यह रेत माफिया सक्रिय था, इस बात का खुलासा अभी तक पुलिस नहीं कर सकी है और शायद आगे कर भी नहीं पाएगी?

दिमनी थाना क्षेत्र के रामपुर में 8 अप्रैल को बन विभाग की टीम गश्त पर थी। उसी समय अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली दिखाई दी, जिसे रोकने का प्रयास 1 विभाग की टीम ने किया। जब ट्रैक्टर नहीं रुका तो हृषिकेश गुर्जर ट्रैक्टर पर लटक गया, लेकिन ट्रैक्टर चालक ने ट्रैक्टर न रोकते हुए ट्रैक्टर ही 1 आरक्षक रेशे ऋषिकेश पर चढ़ा दिया और बेरहमी से ऋषिकेश की हत्या कर दी। ट्रैक्टर चालक का यह तरीका साफ बता रहा है कि उसको किसी का डर नहीं था या कहें कि उसके ऊपर किसी न किसी रसूखदार सत्ताधारी नेता या मंत्री का संरक्षण था। शुरुआत में पुलिस ने ट्रैक्टर चालक पर मामला दर्ज किया था तो वहीं वन विभाग ने ट्रैक्टर चालक के साथ भाजपा नेता पवन तोमर और सोनू चौहान पर प्राथमिकी दर्ज की थी। जिसके बाद पुलिस को भी अपनी एफआईआर में दोनों भाजपा नेताओं के नाम जोड़ने पड़े।
आपको बता दें कि चंबल अंचल में चंबल नदी से रेत के उत्खनन पर एनजीटी ने सख्ती से रोक लगा रखी है। इसके बावजूद यहाँ अवैध उत्खनन खुलेआम चलता है।यहाँ के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस अधिकारियों को भी पता है कि कौन कहां अवैध उत्खनन कर रहा है। पहले भी वन विभाग की एक जुझारू महिला अधिकारी उत्खनन के विरोध में कार्यवाही कर रही थी, जिसे दबंग सत्ताधारी नेता ने अपने प्रभाव के चलते जिले से बाहर फिकवा दिया था। मतलब साफ नजर आता है कि क्षेत्र में रेत माफिया की सत्ताधारी भाजपा से साठगांठ है। जिसके चलते प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी अपने हिस्से के टुकड़े लेकर खामोश बैठते हैं। और जो खामोश नहीं बैठता, उसे ऋषिकेश गुर्जर की तरह खामोश कर दिया जाता है।

भाजपा के कद्दावर मंत्री एदल सिंह कंसाना रेत माफिया को पेट माफिया बता चुके हैं। इस तरह उन्होंने रेत माफिया को खुलेआम अवैध कारोबार का मानो सर्टिफिकेट दे दिया है। एक और भाजपा की कद्दावर नेत्री का वह बयान अब तक याद आता है पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने चंबलपुर से गुजरते हुए जब रेत का उत्खनन देखा था तो उन्होंने भी इस पर गंभीर नाराजगी जताई थी। लेकिन रेत माफिया सत्ताधारी पार्टी में इस कदर हावी है कि उमा भारती की वह नाराजगी भी कहीं रफा दफा हो गई और रेत माफिया को संरक्षण देने वाले या कहें, रेतमातरा का संचालन करने वाले सत्ताधारी पार्टी के कद्दावर मंत्रियों और नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री की आवाज भी दबा दी।
अब आप समझिए कि मुरैना के दिमनी छाना क्षेत्र में वनरक्षक ऋषिकेश गुर्जर की रेत माफिया द्वारा हत्या के मामले में इतनी कार्रवाई क्यों करनी पड़ रही है, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है और तेरह अप्रैल को इसकी सुनवाई होनी है।अब, यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो पुलिस अधिकारियों को माननीय न्यायालय के सामने जवाब देते नहीं बनता। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है और इस जवाब की तैयारी मुरैना। पुलिस और मुरैना 1 विभाग को करनी है और वही जवाब सुप्रीम कोर्ट के सामने मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से दिया जाएगा। अब, यदि इस जवाब में कोई चूक या कमी रह जाती है, तो जिम्मेदारों को माननीय सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का सामना करना पड़ सकता है। अब देखना होगा कि तेरह अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे क्या निर्देश देती है?
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