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नौकरी दिला दूंगा तुम मेरे साथ सेक्स? जब बेटी पर भी डाली गलत नजर तो महिला ने कराया मामला दर्ज

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर से एक बार फिर नौकरी दिलाने के नाम पर असमत लूटने का मामला सामने आया है। जिसमें एक शादीशुदा महिला से नौकरी दिलाने का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए और महिला का शारीरिक शोषण करता रहा। लंबे समय तक ही आरोपी ने महिला को नौकरी नहीं दिलाई। महिला के घर उसका लगातार आना जाना था। जब इस हैवान ने महिला की बारह वर्षीय बच्ची पर भी गलत नजर रखी तो महिला इस हैवान की इरादे फांप गई और थाने पहुंचकर इसके खिलाफ माफ करना दर्ज कराया। 


मामला ग्वालियर के झांसी रोड थाना क्षेत्र का है। जहां पैंतीस वर्षीय महिला अपनी दो बेटियों के साथ रहती है। महिला की शादी दो हजार सात में डबरा में हो चुकी है लेकिन पति से झगड़ा होने के कारण वह पति से अलग किराए का कमरा लेकर ग्वालियर में रह रही थी। पिछले साल महिला की मुलाकात डबरा बल्ला का डेरा निवासी दीपांशु बाथम से हुई। महिला से उसने मोबाइल नंबर ले लिया फिर महिला से उसकी बात होने लगी। महिला अकेली अपनी बेटियों के साथ रहती थी, उसे नौकरी की तलाश थी। इसी बात का फायदा उठाकर दीपांशु ने महिला को नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया, लेकिन साथ में उसकी असमत लेने की शर्त भी रख दी। आरोपी महिला के घर जाकर उससे शारीरिक संबंध बनाने लगा। लेकिन लंबे समय तक महिला को नौकरी नहीं दिलाई, केवल नौकरी दिलाने का आश्वासन देता रहा।

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27 फरवरी विराट, आरोपित दीपांशु बाथम महिला के घर आया और रात को वहीं रुक गया। रात को जब महिला सो रही थी, तब दीपांशु ने महिला की छोटी बारह वर्षीय बेटी के साथ गंदी हरकत करने की कोशिश की। बेटी जाग गई और जोर से रोने लगी।बेटी के रोने की आवाज सुनकर महिला उठी और उसने दीपांशु की हरकत का विरोध किया। लेकिन महिला के साथ शारीरिक संबंध रखने वाला दीपांशु, अब महिला की बेटी के साथ भी संबंध बनाना चाहता था और जबरदस्ती कर रहा था। महिला ने विरोध किया, लेकिन दीपांशु महिला को जान से मारने की धमकी देकर वहां से चला गया। 
इस घटना के बाद महिला ने दीपांशु बाथम से दूरी बना ली, लेकिन दीपांशु लगातार महिला को शारीरिक संबंध बनाने के लिए धमकाता रहा और आखिर में महिला ने परेशान होकर झांसी रोड थाने में जाकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज की। महिला की शिकायत के आधार पर झांसी रोड थाना पुलिस ने छेड़छाड़, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। इस पूरे मामले में नौकरी की मजबूरी में महिला लंबे समय तक शारीरिक शोषण का शिकार होती रही और आरोपी लीला को धमकाता रहा। महिला की मजबूरी का फायदा उठाकर ही आरोपी अब महिला बारह साल की बेटी पर गलत नियत रख रहा था, जो महिला को नागवार गुजरा। नौकरी के झांसे के चलते महिला आरोपी की बातों में आ गई। फिलहाल पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। 

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लावारिस शव को कचरे के ट्रॉली में ढोया, शव वाहिका व्यवस्था कचरे में?

दमोह मध्यप्रदेश: दमोह जिले के तेंदूखेड़ा में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवता शर्मसार और संवेदनशीलता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं बीते दिन बगदरी के जंगल में एक पेड़ से लटका हुआ चार-पांच दिन पूर्व का एक अज्ञात शव शुक्रवार को देखा गया सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर उसकी पहचान करने का प्रयास किया गया, लेकिन काफी खोजबीन और पूछताछ के बावजूद मृतक की पहचान नहीं हो सकी पहचान नहीं होने के कारण शव को लावारिस घोषित कर दिया गया।

शनिवार शाम नगर परिषद के कर्मचारियों द्वारा उक्त अज्ञात शव को नगर के खकरिया मार्ग पर सड़क से लगभग 40 फीट दूर वार्ड क्रमांक 9 स्थित संदीपनी विद्यालय एवं कॉलेज के पास जहां पूरे नगर का कचरा निष्पादन केंद्र है उसी जगह दफनाया गया। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में जो दृश्य सामने आया, उसने नगरवासियों को स्तब्ध कर दिया। नगर परिषद द्वारा शव को ले जाने के लिए किसी शव वाहन का उपयोग नहीं किया गया, बल्कि कचरा ढोने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर अंतिम स्थल तक पहुंचाया गया।

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हैरानी की बात यह रही कि ट्रॉली में उस समय भी कुछ कचरा मौजूद था इस घटना को जिसने भी देखा, वह आश्चर्य और दुख में पड़ गया। नगर के महाराज सिह,सुखदेव का कहना है कि चाहे शव लावारिस ही क्यों न हो, लेकिन वह भी किसी इंसान का शरीर था और उसके साथ गरिमा एवं सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए था। लोगों ने सवाल उठाए हैं कि क्या प्रशासन के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी? क्या किसी अन्य वाहन की व्यवस्था नहीं की जा सकती थी? इस घटना ने शासन-प्रशासन की व्यवस्थाओं और संवेदनशीलता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

जानकारी के अनुसार नगर परिषद के पास वर्तमान में शव वाहन उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण कर्मचारियों ने मजबूरी में कचरा ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग किया। हालांकि स्थानीय लोगों का मानना है कि संसाधनों की कमी के बावजूद मानवता और संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी इस घटना के बाद नगर में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोगों का कहना है कि यह मामला केवल एक लावारिस शव का नहीं, बल्कि इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी का है।

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अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं और इस लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है वहीं नगर के लोगों का कहना है कि नगर एवं ग्रामीणों क्षेत्रों में भी शव वाहन की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हो। वही नगर परिषद के सीएमओ प्रेम सिंह चौहान का कहना है कि मैं इस संबंध में नगर निरीक्षक से बात करता हूं मुझे इसकी जानकारी नहीं है। नगर निरीक्षक रविन्द्र बागरी ने बताया म्रतक का शव जंगल मे पेड़ से लटका हुआ मिला था म्रतक की शिनाख्त नही हो सकी है। शव को विधिवत गड्ढा खोदकर नगर पालिका द्वारा दफनाया गया है।

ग्वालियर में कितने भागीरथपुरा? मिर्जापुर सांप कांड बड़े हादसे की चेतावनी!

ग्वालियर मध्य प्रदेश: मध्यप्रदेश के लिए साल दो हजार छब्बीस की शुरुआत हुई इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र के दूषित पानी कांड से। इस दूषित पानी कांड ने देश के सबसे स्वच्छ शहर माने जाने वाले इंदौर की जमकर किरकिरी की। पूरे देश में यह सवाल उठने लगे की ऊपर से खूबसूरत दिखने वाले शहर की हकीकत कितनी भयावह है इस हादसे में तेईस लोगों के मौत की खबरें भी चली। और जब जांच हुई और जिस तरह की लापरवाही नजर आई, उसने सब कुछ चौंका दिया कि किस तरह पेयजल सप्लाई वाले पाइप लाइन में सीवर का पानी मिल रहा था और यह सीवर का पानी मिलने से ही लोगों के घर में वह प्रदूषित पानी पहुंचा जिसको पीने से लोग बीमार होने लगे, सैकड़ों के संख्या में लोग अस्पताल में भर्ती हुए एक तरह से ऐसे हालात नजर आने लगे जैसे कोई महामारी फैल गई हो। इस घटना के बाद यह सवाल उठने लगे कि आपका शहर पेयजल सप्लाई में कितना सुरक्षित है? क्या आपके शहर के जिम्मेदार अधिकारी आपको शुद्ध पानी पहुंचा पा रहे हैं?चलिए ग्वालियर का हाल जान लेते हैं।

ग्वालियर में रविवार को जो कुछ हुआ वो चौंकाने वाला है। ग्वालियर का यह मिर्ज़ापुर नाम अब आपको स्मरण रहेगा। घास मंडी क्षेत्र के मिर्जापुर क्षेत्र में है वॉटर सप्लाई पंप जहां पर पानी की टंकी में पड़े मरे हुए सांप का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होता है। इस वीडियो में यह दावा किया जाता है कि वाटर पंप रूम के टंकी में मरा हुआ सांप पड़ा था और यहीं से सैकड़ों परिवारों को पानी सप्लाई होता है और यह दूषित पानी यदि लोग पीले तो लोगों को नुकसान भी हो सकता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और वहीं से कुछ मुख्य धारा के प्रतिष्ठित चैनल ने भी इस खबर को प्रमुखता से उठा लिया। खबर की हकीकत तक जाने का प्रयास ही नहीं किया। द इंगलेज पोस्ट ने मौके पर जाकर पंप संचालक बदन सिंह यादव से बातचीत की तो उन्होंने कुछ और ही खुलासा किया। उन्होंने कहा कि यहां के शरारती लड़कों ने पास पड़े कचरे के ढेर में से मरे हुए सांप को उठाया और उसे पानी की टंकी में डालकर वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। 

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जब तमाम इलेक्ट्रॉनिक चैनल्स पर यह खबर चलने लगी कि ग्वालियर में पानी की टंकी में सांप निकला है और इससे पहले मानपुर मल्टी की टंकी में भी मरी हुई मछली निकली थी, तो यह खबर पूरे प्रदेश में तेजी से फैल गई और इस खबर के बाद नगर निगम की लापरवाही पर और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था पर सवाल उठने लगे नगर निगम के अधिकारियों ने भी मौके पर जाकर हकीकत को जाना और उन लड़कों को पकड़कर उनका वीडियो बनाकर जारी करवा दिया, जिसमें वह लड़के यह कहते नजर आ रहे हैं कि वीडियो वायरल करने के उद्देश्य से उन्होंने यह वीडियो बना दिया।सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।टंकी में सांप नहीं था, सांप भूरे से उठाया था। अब यह वीडियो वायरल करके नगर निगम के जिम्मेदारों ने अपनी लापरवाही से पल्ला झाड़ लिया। और यह साबित करने का निरर्थक प्रयास किया ही पानीपूरी तरह साफ है। नगर निगम पूरी तरह पाक साफ है।

द इंगलेज पोस्ट को पंप संचालक बदन सिंह ने और भी बहुत कुछ जानकारी दी थी।उनका कहना था कि इस पंप रूम में सांप कीड़े मकोड़े आ जाते हैं क्योंकि यह रूम जर्जर हालत में है।इस रूम में ऊपर टूटी हुई तीन डली है और रूम की दीवार भी कई जगह से क्षतिग्रस्त हैं, जिसमें बड़े बड़े छेद हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इस पंप रूम के बगल में ही यह कचरे का ढेर है जिसमें गंदगी जमा होती है, दूसरी ओर सरकारी जमीन पर झाड़ियां हैं जिनकी सफाई नहीं होती और पंप रूम के नीचे से ही गंदा नाला है जिसकी भी सफाई नहीं होती।उन्होंने कहा कि यह सब गंदगी के कारण ही कीड़े मकोड़े सांप आ जाते हैं। मतलब उन्होंने स्वीकारा कि पंप रूम में सांप आते हैं। हालांकि वीडियो में दिखाया गया सांप लड़कों द्वारा ही डाला गया अब यदि यह हकीकत मान भी लें तो फिर रूम की जो वास्तविक हालत थी वह वास्तव में चौंकाने वाली थी। 

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अब सांप कांड झूठा बताने वाला वीडियो जारी करने से नगर निगम की जो पोल खुल गई उसको भी सुन लीजिए। कुछ शरारती लड़के पंप रूम के अंदर जाकर वॉटर टैंक में मरा हुआ सांप डालने में सफल हो जाते हैं और उसका वीडियो वायरल कर देते हैं। इसका मतलब है कि ग्वालियर शहर में संचालित तमाम पंप रूम असुरक्षित हैं।उनमें कोई भी अंदर जा सकता है और किसी भी तरह की शरारत कर सकता है। कोई मरा हुआ सांप डाल सकता है, तो कोई जहरीला सांप डाल सकता है, तो कोई जहर भी डाल सकता है। तो पंप रूम में यदि इस तरह असुरक्षित हैं जिसमें कोई भी शरारती लड़के घुसकर कुछ भी हरकत कर सकते हैं, तो क्या हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि हमें शुद्ध पेयजल मिलता रहेगा? क्योंकि जिस तरह से ये लड़के पंपरूम में घुसकर वीडियो बनाकर वायरल कर चुके हैं, वह साफ बता रहा है कि शहर में संचालित पंप रूम असुरक्षित हैं और असामाजिक तत्व और देश के दुश्मन इन पंपरूम का इन टंकियों का सहारा लेकर शहर में दहशत फैला सकते हैं, भयावह हालात पैदा कर सकते हैं। 

भागीरथपुरा, कांड जैसा कांड किसी शहर में न हो, हम ईश्वर से यह प्रार्थना करते हैं। लेकिन हमारे शहर में भी कई जगह पर पानी की लाइन और सीवर लाइन आसपास या एक दूसरे के ऊपर नीचे हैं जिनको हटाने के कई प्रयास भागीरथपुरा, कांड के बाद किए गए, लेकिन अभी भी पानी की मेन सप्लाई लाइन कई जगह नाले के ऊपर से निकल रही है। जब बारिश के समय नाले उफान पर होते हैं तब यह पाइप लाइन जलमग्न हो जाती है।इस पाइप लाइन में कई जगह पर लीकेज भी हैं जिनमें से पानी रिश्ता रहता है पानी रिसकर अंदर आ सकता है। इसका मतलब नाले में उफान होने पर पानी रिस कर पाइप के अंदर भी जा सकता है। ऐसे तमाम स्पॉट को चिह्नित कर जिम्मेदार अधिकारियों को समुचित प्रबंध करने चाहिए ताकि आने वाले बारिश के मौसम में इस तरह से दूषित पानी कहीं भी पेयजल सप्लाई में न मिले और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा का ख्याल रखा जा सके।

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जो घटना मिर्जापुर पंप रूम पर हुई है, वह नगर निगम के लिए एक सबक है।केवल वीडियो प्रसारित करके अपने पक्ष में वाहवाही लूटने की बजाय नगर निगम को प्रयास करने चाहिए कि ऐसे तमाम पंप रूम जो क्षतिग्रस्त हैं उनको मजबूती से बनाया जाए, वहां सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं। वहां साफ सफाई का प्रबंध किया जाए और ऐसी कोई भी स्थिति पैदा न हो कि वहां कोई जहरीला कीड़ा सांप बिच्छू घुस सके और यह तो कतई ना हो कि कोई शरारती तत्व पंप रूम के अंदर तक घुस सके। इस घटना से सबक लेकर नगर निगम को शहर के समस्त पंप रूम की जांच करनी चाहिए और उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। क्योंकि यदि ऐसा नहीं हुआ तो यकीन मानिए भागीरथपुरा से ज्यादा भयावह हालात हमारे शहर में हो सकते हैं।

सांदीपनि की संजीवनी; NEET JEE की तैयारी सरकारी स्कूल में, गरीब छात्रों के लिए बड़ी राहत

भोपाल मध्यप्रदेश: क्या आप एक गरीब परिवार से हैं और डॉक्टर इंजीनियर बनना चाहते हैं, लेकिन नीट और जेईई की कोचिंग की फीस नहीं भर सकते?तो यह खबर आपके लिए है, क्योंकि अब हर गरीब परिवार का बच्चा नीट और जे ई ई की तैयारी कर पाएगा और उसको महंगी फीस भी नहीं देनी होगी। शिक्षा के क्षेत्र में मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए एक अनोखी शुरुआत की है। अब स्कूल स्तर पर ही नीट और जेई की तैयारी छात्र कर सकेंगे। मध्य प्रदेश में संचालित तमाम पीएम श्री और सांदीपनी स्कूलों में नीट और जेईई कोचिंग दी जाएगी। इसकी शुरुआत इसी साल से होगी, जिसमें नवीं से बारह वीं तक के विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। यह शुरुआत होते ही उन गरीब परिवार के बच्चों के सपनों को उड़ान मिलेगी जो महंगी कोचिंग ज्वॉइन न करने के चलते अपने सपनों को कहीं न कहीं दबा देते हैं। 

मध्यप्रदेश सरकार पीएम श्री और सांदिपनी स्कूल में कॉम्पिटिटिव अवेयरनेस और फाउंडेशन मॉडल के रूप में यह शुरूआत करने जा रही है। सरकारी स्कूलों में सबसे बड़ी समस्या कॉम्पिटिटिव एटमॉस्फियर की होती है। अधिकांश छात्र नीट और जेईई के बारे में सोचते तो हैं, लेकिन उन्हें उस स्तर के प्रतियोगिता की जानकारी नहीं होती, ना ही विषय का गहन ज्ञान होता। वर्तमान में, मध्यप्रदेश सरकार जो फाउंडेशन मॉडल शुरू कर रही है वह छात्रों को नीट और जेई के लिए रुचि विकसित करेगा और उनको विषय की स्पष्टता से रूबरू कराएगा। अभी फिलहाल नीट और जेईई की कोचिंग शुरू नहीं की जाएगी, लेकिन सूत्रों की मानें तो आगामी समय में स्कूल परिसर में ही नीट जेईई में रुचि रखने वाले छात्रों को विधिवत कोचिंग भी दी जाएगी। 

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प्रदेश सरकार के इस योजना की शुरुआत कक्षा नौवीं से होगी और यहां विज्ञान और गणित आधारित एप्टीट्यूड टेस्ट लेकर यह समझा जाएगा कि क्या छात्रों की नीति और जेईई में रुचि है और रुचि है, तो उनकी विषय में पकड़ कितनी है। बच्चों की बुनियाद कितनी मजबूत है। छात्रों को एमसीसी क्यू आधार पर टेस्ट दिए जाएंगे, उन्हें सॉल्व करने का तरीका समझाया जाएगा। 11वीं और 12वीं में मॉडल प्रश्नपत्र पूरी तरह नीट और जेई पर केंद्रित ही दिए जाएंगे। पढ़ाई को नीट और जेई एग्जाम के पैटर्न के अनुसार डिज़ाइन किया जाएगा। विद्यार्थियों के रुचि के आधार पर अतिरिक्त कक्षाएं भी लगाई जाएंगी। इस योजना में अभी फिलहाल उन स्कूल को शामिल किया जाएगा जहां स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब उपलब्ध है।इन सभी आधुनिक सुविधाओं का उपयोग करते हुए, यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। वर्तमान में प्रदेश में सुपर हंड्रेड योजना भी चल रही है, जिसमें टॉप परफॉर्मर सौ बच्चों को नीट और जेई की तैयारी कराई जाती है। लेकिन वर्तमान में की जा रही नई व्यवस्था इससे अलग होगी। नई व्यवस्था में नवीं क्लास से ही बच्चों मैं नीट और जेईई के प्रति जागरूकता पैदा की जाएगी। बच्चों को विषय की जानकारी दी जाएगी। करियर काउंसलिंग के माध्यम से उनका डॉक्टर और इंजीनियर बनने का मार्गदर्शन किया जाएगा। उनको विषय में मजबूत फाउंडेशन देने का प्रयास किया जाएगा। 

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अभी यह योजना पायलट प्रोजेक्ट की तरह शुरू की जाएगी और उसके आधार पर ही आगे विस्तृत तैयारी की जाएगी। इसके बाद अलग अलग चरणों में शामदीपनी, स्कूलों में इसे जोड़ा जाएगा।आईआईटी, एनआईटी और मेडिकल कॉलेज की विद्यार्थियों को मेंटर के रूप में भी इस योजना में जोड़े जाने पर विचार चल रहा है। आने वाले समय में छात्रों की रुचि को देखते हुए और छात्रों की संख्या को देखते हुए विस्तृत विषयवार कोचिंग भी छात्रों को प्रदान की जाएगी। इस साल से फाउंडेशन शुरू होगा और आने वाले कुछ समय में पूरी तैयारी गरीब छात्र सांदिपनी और पीएमसी स्कूल में कर सकेंगे। यह योजना उन गरीब परिवार के बच्चों के लिए मील का पत्थर साबित होगी, जो महंगी फीस न दे पाने के कारण नीट और जेईई की तैयारी नहीं कर पाते।

निगम की सफाई व्यवस्था की ऊर्जा मंत्री ने खोली पोल, दिए सख्त निर्देश

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर के कई क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था की बदतर हालत है। स्मार्ट सिटी कहे जाने वाले शहर में कई क्षेत्र तो ऐसे हैं जो कस्बे से भी घटिया नजर आते हैं और स्मार्ट सिटी के नाम पर तमाचा से प्रतीत होते हैं। शहर की घटिया सफाई व्यवस्था को लेकर ऊर्जा मंत्री पद्मन सिंह तोमर ने भी रोष व्यक्त किया है। ऊर्जा मंत्री ने शुक्रवार को उप नगर ग्वालियर बिरला नगर पुल से चंदन पुरा तक जनकल्याण समिति के सहयोग से सुपर सकर मशीन द्वारा चल रहे सीवर सफाई अभियान का निरीक्षण किया। उन्होंने सफाई कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि बारिश से पहले इस काम को हर हाल में पूर्ण किया जाए। निरीक्षण के दौरान ऊर्जा मंत्री ने कहा कि जहां-जहां नवीन सीवर लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है वहां गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

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ऊर्जा मंत्री ने कहा कि ग्वालियर की स्वच्छता को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए सीवर समस्या के समाधान के लिए “सुपर सकर” मशीन द्वारा सफाई का महाअभियान चलाया जा रहा है। इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से सफाई व्यवस्था और अधिक तेज, प्रभावी व सुदृढ़ बनेगी। ऊर्जा मंत्री ने उपनगर ग्वालियर में आ रहे बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि स्वास्थ्य, सड़क, खेलकूद, शिक्षा हर क्षेत्र में बदलाव हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर ग्वालियर स्वच्छता के मामले में नंबर एक बनाने के प्रयास करें। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि स्वच्छता, सुविधा और बेहतर जीवन स्तर बनाना हमारा संकल्प है।
आपको बता दें कि ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर कई बार शहर के अलग अलग क्षेत्रों में साफ सफाई करते नजर आते हैं।वे जहां भी गुजरते हैं और उन्हें गंदगी नजर आती है, तो कई बार वे निगम अधिकारियों को निर्देशित करते हैं और कई बार स्वयं सफाई में जुट जाते हैं, लेकिन जिस तरह के हालात उनके सामने आते हैं वह साफ बताते हैं कि शहर में सफाई व्यवस्था सही नहीं है। नगर निगम के जिम्मेदारी शहर में सफाई के नाम पर खानापूर्ति करते हैं। शहर के कुछ चुनिंदा सड़कों और मार्केट को साफ करके ही पूरे शहर के साफ होने का ढोल पीटने लगते हैं। ग्वालियर विधानसभा में कई क्षेत्र में सफाई व्यवस्था सुचारू नहीं है।अब ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने सख्त निर्देश दिए हैं तो उम्मीद की जा सकती है कि इस क्षेत्र की सफाई व्यवस्था में कुछ सुधार होगा…

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निगम आयुक्त सहित कई इंजीनियर व अधिकारियों पर जुलाई में होगी एफआईआर क्योंकि???

ग्वालियर मध्य प्रदेश: जल्द ही मानसून सक्रिय होगा और झमाझम बारिश होगी। पिछले दो साल से बारिश के मौसम में शहर के कई क्षेत्र जलमग्न हो जाते हैं।कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात हो जाते हैं और इन सब का दोषी है नगर निगम जो जल निकासी को सुव्यवस्थित करने में पूरी तरह असफल रहा है। न तो समय पर सीवर साफ होते हैं और ना ही उन नालों की सफाई होती है जिनके माध्यम से वर्षा जल शहर से बाहर निकलता है।कई क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां नालों पर स्थायी या अस्थायी अतिक्रमण है, लेकिन निगम उन पर कार्रवाई नहीं करता। पिछले दो साल से शहर के कई क्षेत्रों ने जलभराव और बाढ़ के जो हालात देखे हैं, क्या वे इस साल भी होंगे और होंगे तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी इस पर मध्यप्रदेश नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के एसीएस बड़ी बात कह गए हैं।

शुक्रवार को ग्वालियर में मीटिंग का दौर था। सुबह से शाम तक मीटिंग चलती रही। मीटिंग ले रहे थे प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे और आयुक्त संकेत भोंडवे। शहर की बदतर हालत पर कई बार एसीएस, और आयुक्त ने नाराजगी व्यक्त की और अधिकारियों को सख्त हिदायत दी। जमीनी हकीकत जानने के लिए भी ये दोनों अधिकारी नगर निगम के अधिकारियों के साथ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण के लिए निकले कई जगह पर गड़बड़ झालन नजर आया।खासकर सीवरेज और पेयजल के काम में तमाम खामियां नजर आईं। एसीएस को जीवाजीगंज स्थित नाले में गंदगी और मिट्टी नजर आई। उन्होंने इंजीनियरों से सफाई के बारे में पूछा तो पीएची के इंजीनियरों ने दस जून तक सफाई का आश्वासन दिया और इस आश्वासन के बाद एसीएस सख्त लहजे में बोले कि यदि बारिश में ग्वालियर शहर डूबा तो इंजीनियर से लेकर अधिकारियों तक एफ आई आर कराऊंगा। हालांकि निरीक्षण जीवाजीगंज, नाले का था, लेकिन उन्होंने ग्वालियर शहर के डूबने की बात कही। मतलब साफ है कि ग्वालियर में कहीं भी जलभराव और बाढ़ जैसे हालात होते हैं तो उनके अनुसार जिम्मेदार अधिकारी नपेंगे। 

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क्या एसीएस वास्तव में जितनी सख्ती से यह निर्देश देकर गए हैं, उतने सख्त हो पाएंगे क्योंकि दोषियों पर कार्रवाई करने के मामले में मध्य प्रदेश का इतिहास काला रहा है। या तो दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और होती भी है तो कुछ समय बाद वह पाक साफ साबित होकर पुनः किसी न किसी पद पर काबिज होकर अपने कारनामे करने लगते हैं। ग्वालियर में चेतकपुरी रोड धसकने के मामले में भी क्या हुआ? यह सब लोग जानते हैं बड़ी लंबी जद्दोजहद के बाद दो गैर जिम्मेदारों को दोषी माना गया। निलंबितन की कार्रवाई भी हुई और उसके बाद बहाली भी हो गई और दोनों वहीं काम करने लगे। अब दोनों के कारनामे इतने खास तो नहीं हैं कि हम उनके नाम यहां महिमामंडित करें। भोपाल के नब्बे डिग्री ब्रिज के दोषी इंजीनियर को भी बहाल कर दिया गया है। अब ऐसे ही अन्य तमाम मामलों की फेहरिस्त पर नजर डालें तो फिर एसीएस, कि यह सख्ती केवल हवा हवाई नजर आती है। 

अपमान भी लें कि एसीएस एफआईआर कि जो सख्त हिदायत देकर गए हैं उस पर वे अमल भी करेंगे तो फिर तो आने वाले मानसून में नगर निगम के तमाम अधिकारी एफआईआर की धार में बह जाएंगे। पिछले दो साल किस तरह से मानसून के आते ही शहर के कई क्षेत्रों में हाहाकार मचा और किस तरह नगर निगम असहाय नजर आया और किस तरह नगर निगम के गड़बड़ कारनामों के चलते ही जलभराव हुआ। वह क्षेत्र के सभी लोगों ने देखा है और खबरों के माध्यम से पूरा प्रदेश जानते हैं। जानता है कि ग्वालियर में जलभराव और बाढ़ के हालात कितने भयावह थे। अभी मई में एसीएस ने यह सख्त हिदायत दी है कि ग्वालियर शहर डूबा तो दोषियों पर एफआईआर कराएंगे। अगले महीने जून नहीं मानसून आ सकता है और यदि मानसून कुछ धीमी रफ्तार से भी यहां पहुंचा तो जुलाई तक मानसून पूरी तरह सक्रिय होगा। मानसून सक्रिय होगा।अच्छी बारिश होती है, तो यकीन मानिए कि फिर से जलभराव होगा। 

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जिस तरह से एसीएस एफआईआर करने की सख्त हिदायत देकर गए हैं यदि वह धरातल पर चरितार्थ हुई तो फिर तो नगर निगम के तमाम अफसरों सहित आयुक्त भी जाएंगे, क्योंकि अब यह बात आयुक्त महोदय को भी पता है कि पिछले दो साल कई क्षेत्रों में जलभराव के विकराल हालात हुए हैं और नगर निगम जिम्मेदार हाथ पे धरे नजर आए और सबसे बड़ी हैरानी की बात अभी एक महीने बाद ही मानसून शुरू होगा, लेकिन अभी तक शहर के नाला नालियों को सफाई करने का काम भी ठीक से नहीं हुआ है और जहां तक शहर के मुख्य जल निकासी स्रोत की बात करें, जिसे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया नालक कहने पर आपत्ति दर्ज करते हैं, उसके हालात नाले से भी बदतर हैं। क्योंकि एलिवेटेड रोड के निर्माण के चलते बेसमेंट में कई फीट तक मिट्टी गिट्टी भरकर बेस तैयार किया गया है, जिसके चलते अब इसे नदी क्या नाला कहना भी अतिशयोक्ति होगा। 

इसी स्वर्णरेखा नाला( केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अनुसार नदी) में एलिवेटेड निर्माण कार्य के चलते अभी हाल ही में जिस जगह पर गार्डर टूटने की घटना हुई है, वह स्थान ग्वालियर के प्रसिद्ध खेड़ापति हनुमान मंदिर के बिलकुल नजदीक हैं। पूरे एलिवेटेड रोड के निर्माण कार्य में यहीं पर यह दुर्घटना क्यों हुई। इसका इशारा तो खेड़ापति महादेव पहले ही कर चुके थे, जब मानसून के दौरान नाले से पानी की निकासी नहीं हुई और मंदिर के इतिहास में पहली बार मंदिर पर स्वयं नाले का और सीवर का गंदा पानी भर गया। उस समय खेड़ापति मंदिर परिसर में जलभराव की खबरें सुर्खियों में थी और क्षेत्रीय पार्षद सोनू त्रिपाठी ने मीडिया बाइट में स्पष्ट कहा था कि एलिवेटेड रोड के निर्माण की वजह से ही जल निकासी में बाधा उत्पन्न हुई है, जिसके चलते खेड़ापति मंदिर परिसर में जलभराव हुआ है, हालांकि शाम तक महल के दबाव में उनको अपना बयान बदलते हुए अपने लेटर पैड पर सफाई देनी पड़ी थी। 

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अब यह दो सालों का इतिहास बताता है कि शहर में जल निकासी के हालात भयावह हैं। पहली साल के जलभराव को लेकर दूसरी साल नगर निगम ने सबक नहीं लिया था। हालात बद से बदतर हुए थे और अब यह तीसरी साल केवल एक महीने का समय बचा है। एसीएस की सख्त हिदायत के बाद एक महीना के भीतर ही नगर निगम इतने समस्त नालों नालियों की सफाई कर जल निकासी को सुगम बना पाएगा। यह एक बड़ी चुनौती नजर आ रहा है। यानी कि आने वाले महीनों में यदि शहर में जलभराव होता है तो नगर निगम आयुक्त सहित तमाम दोषियों पर एफआईआर होगी, लेकिन क्या ऐसा होगा? शायद नहीं होगा क्योंकि एसीएस भी अपनी बात कहकर भूल जाएंगे। किस न किसी दबाव में आ जाएंगे और ग्वालियर में होए वही जो…… रच रखा? ( खाली स्थान भरो) खैर, राम भक्त खेड़ापति हनुमान जी स्वयं एलिवेटेड के नजदीक विराजमान हैं। वह यह सब कुछ देख रहे हैं, वहीं रक्षक हैं, उन्होंने पहले भी शहर की रक्षा की है और आने वाले साल के जलभराव से भी वही शहरवासियों की रक्षा करेंगे और शायद हो सकता है कि वह ज्यादा बारिश होने ही न दें और शहर वासियों के साथ साथ नगर निगम के दोषियों की भी खेड़ापति हनुमान जी कर लें!

WHO alert; कोरोना से खतरनाक वायरस हंता तेजी से फैल रहा, अब क्या होगा?

WHO alert on hanta virus: इस समय दुनिया में हंता वायरस तेजी से फैल रहा है और इस वायरस का फैलाव तेजी से देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अलर्ट भी जारी कर दिया है। यह वायरस अब तक 12 देशों में फैल चुका है। हेग में इस वायरस की शुरुआत हुई और अभी यहां 8 केस मिले हैं, जिनमें से 5 में इसकी पुष्टि हुई है जिनमें से 3 की मौत हो चुकी है। मौत का यह रेशो चौंकाने वाला है। इस मामले में, विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडनोमो का कहना है कि जिस एमबी होडियंस लग्जरी क्रूज शिप में इस वायरस की पुष्टि हुई, वो अभी अफ्रीकी महाद्वीप के देश कैप वनडे में रुकने के बाद स्पेन के केनेरी द्वीप की ओर बढ़ रहा है। इस शिप पर और भी संदिग्ध मरीज हो सकते हैं।जहाज शनिवार को स्पेन, पहुंचेगा और स्पेन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस जहाज को वहां रुकने की अनुमति दे दी है।

आपको बता दें कि दो हजार उन्नीस में दुनिया में कोरोना वायरस की शुरुआत हुई थी और दो हजार बीस के आते आते।यह एक भयावह महामारी के रूप में पूरी दुनिया में फैल चुका था, उस समय हालात यह थे कि कई देशों में लॉकडाउन लगा था जो कई दिनों तक जारी रहा और कई देशों में कोरोना वायरस की चपेट में आने वालों की संख्या लाखों में थी और कोरोना वायरस के आतंक ने पूरी दुनिया की व्यवस्था को धराशायी कर दिया था। तमाम देश की सरकारों के कोरोना रोकने के उपाय धरे के धरे रह गए थे, तमाम रोग पाबंदियों और लॉकडाउन के बावजूद कोरोना वायरस हर जगह पहुंच गया। अभी अभी, कई लोग उन पलों को भुला भी नहीं सके हैं कि एक बार फिर एक और वायरस की दहशत कई देशों में पहुंच चुकी है।

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जिस क्रूज शिप के यात्रियों में हंता वायरस की पुष्टि हुई है, वह अभी समुद्र में यात्रा कर रहा है और इसमें अभी एक सौ दस यात्री और क्रू मेंबर सवार हैं। इस शिप के सभी यात्रियों को बहुत सावधानीपूर्वक आइसोलेट करके उपचारित किया जाए तो यहां पर इस खतरे को रोका जा सकता है। फिलहाल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अमेरिका, कनाडा सहित बारह देशों को अलर्ट किया है जिसके अस्सी यात्री इस जहाज में यात्रा कर रहे थे और चौबीस से पच्चीस अप्रैल को अपने देश लौटे थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इस वायरस का मुख्य कारण चूहे हैं, चूहों से ही यह वायरस इंसानों में पहुंचता है। और जिन बारह देशों में इस शिप से अस्सी संदिग्ध यात्री उतरे हैं, अब उनकी भी तलाश कर उनकी जांच और उपचार के प्रयास इन देशों में किए जा रहे हैं।

जिस लग्जरी क्रूशिप में हंता वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है, इसके क्रू में दो भारतीय भी शामिल हैं लेकिन वे अभी भारत आएंगे या स्पेन में ही जांच कर उपचारित होंगे। यह देखना होगा। लेकिन भारत में हंता वायरस का इतिहास रहा है। भारत में सबसे पहले तमिलनाडु के वेल्लोर में 1964 में एक छछुंदर में हंता वायरस मिला था। और सन् दो हजार में इंसानों में भी हंता वायरस की पुष्टि हुई थी। 2008 में तमिलनाडु में हुए एक शोध में 28 मरीजों में इस वायरस के प्रति एंटीबॉडीज मिले थे। ये लोग गोदामों में काम करते थे और चूहों के संपर्क में रहते थे। 

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छोटी छोटी सावधानी रखकर आप प्रेम को इस वायरस के प्रकोप से बचा सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यह वायरस चूहों और गिलहरियों में पाया जाता है। इस वायरस के साथ एक अच्छी बात अभी तक यह निकल कर आई है कि यह इंसानों से इंसानों में नहीं फैलता। लेकिन जो वायरस इस लग्जरी क्रूज में फैला है वह इसका दक्षिण अमेरिकी वेरिएंट एंडीज है। शिप से उतरे पांच मरीजों में इस वेरिएंट की पुष्टि हुई है और यह वेरिएंट इंसान से इंसान में फैलने की क्षमता रखता है। यह वायरस भी कोरोना की तरह ही शरीर को नुकसान पहुंचाता है।शुरू के कुछ दिन तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द और थकान के लक्षण दिखते हैं।उसके बाद फेफड़ों पर अटैक होता है, सांस लेने में दिक्कत होती है और फेफड़ों में पानी भर जाता है। 

वर्तमान स्थिति में, भारत में अभी एक भी सक्रिय केस देखने को नहीं मिला है। फिर भी, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अलर्ट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और लापरवाह बरतना बहुत ज़रूरी है। इस पूरे मामले में जब यह तय हो चुका है कि सबसे अधिक संभावना हंता वायरस की चूहों से इंसान में आने की होती है, तो बेहतर है कि चूहों से स्वयं का बचाव करें, चूहों के मल मूत्र को हाथ से न छूएं। घर में साफ सफाई रखें, हर संभव प्रयास करें के चूहे आपके घर में न आएं।। 

महिला जेलर को हुआ कैदी से प्यार, उम्र कैद की सजा खत्म होते ही शादी की कैद!

सतना मध्यप्रदेश: महिला जेलर को जेल में ही बंद एक कैदी से प्यार हो जाए और प्यार भी इस कदर की महिला जेलर। इंतजार करें कि कब सजा खत्म हो और उम्र कैद से मुक्त कर इसके कैदी को शादी की कैद से नवाजे। जी हां, यह कोई फिल्मी कहानी नहीं।यह हकीकत है, और यह हकीकत है मध्य प्रदेश के सतना केंद्रीय जेल की, जहां से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसने समाज और सिस्टम दोनों को चर्चा का विषय दे दिया है। सतना केंद्रीय जेल में तैनात सहायक जेल अधीक्षक फिरोजा खातून को हत्या की सजा काट रहे धर्मेंद्र सिंह से प्यार हो गया। धर्मेंद्र ने 14 साल जेल में बिताए। अच्छे आचरण को देखते हुए शासन ने चार वर्ष पहले उसकी रिहाई कर दी थी। जेल में रहने और रिहा होने के बाद धर्मेंद्र और फिरोजा की मुलाकातें होती रहीं। पिछले दिनों फिरोजा ने हिंदू रीति-रिवाज से धर्मेंद्र के साथ विवाह कर लिया। 

जब दोनों ने शादी का फैसला किया तो फिरोजा के परिवार ने इस रिश्ते को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया और शादी से दूरी बना ली। ऐसे में सांप्रदायिक सौहार्द और मानवीय संवेदनाओं की एक नई मिसाल पेश की गई। सतना में विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर माता-पिता के रूप में फिरोजा का कन्यादान किया। अब यह विवाह हिंदू मुस्लिम एकता की भी एक मिसाल बन चुका है। लेकिन एक महिला जेलर का कैदी से प्यार हो जाने का यह किस्सा जमकर चर्चाओं में है। 

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छतरपुर जिले के चंदला में तत्कालीन नगर परिषद उपाध्यक्ष कृष्ण दत्त दीक्षित की वर्ष 2007 में हत्या हो गई थी। हत्या के मामले में धर्मेंद्र सिंह को सजा सुनाई गई थी। तब वह 20 वर्ष का था। उसे सतना केंद्रीय जेल में रखा गया, जहां सहायक जेल अधीक्षक के रूप में फिरोजा खातून की तैनाती है। धर्मेंद्र जेल में रहने के दौरान फिरोजा के काम में हाथ बंटाता था। इसी दौरान दोनों की दोस्ती हुई, जो प्यार में बदल गई। अच्छे आचरण को देखते हुए शासन ने जब चार वर्ष पहले धर्मेंद्र को रिहा कर दिया, तब भी उनकी मुलाकातें होती रहीं। दोनों ने शादी करने का निर्णय लिया। परिवार और समाज की परवाह किए बिना हिंदू रीति-रिवाज से पांच मई को छतरपुर में विवाह कर लिया।

अभी तक आपने तमाम प्रेम कहानी सुनी होंगी, लेकिन एक आदमी जो उम्रकैद की सजा के लिए जेल गया हो उसे जेल में पूरे जीवन साथ निभाने वाली सौगात मिल जाए। यह हकीकत चौंकाने वाली है जब धर्मेंद्र सिंह जेल पहुँचा होगा।तब उसे जिंदगी से कोई आस नहीं रही होगी। लेकिन जेल में उसका व्यवहार अच्छा रहा और उसके इसी व्यवहार पर महिला जेलर फिरोजा खातून आकर्षित हुई। और धर्मेंद्र सिंह की जिंदगी बदल गई फिरोजा खातून न केवल धर्मेंद्र से प्रेम किया, बल्कि उसकी रिहाई का इंतजार भी किया और रिहाई के बाद अब उसके साथ विवाह बंधन में बंध चुकी है। यह घटना हमें यह सबक देती है कि समय का इंतजार कीजिये।न जाने कब, किस मोड़ पर समय ने हमारे लिए कुछ बेहतर सजो कर रखा हो।

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जनगणना का प्रथम चरण एक मई से, इन 34 बिंदुओं पर भरी जाएगी ऑनलाइन जानकारी

ग्वालियर मध्य प्रदेश: विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक कार्यों में शामिल भारत की जनगणना की तैयारियां ग्वालियर जिले में भी पूर्ण हो गई हैं। ग्वालियर जिले में भी जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत 01 मई से प्रथम चरण की जनगणना का काम शुरू होगा। प्रथम चरण में 01 से 30 मई तक मकान सूचीकरण एवं मकान गणना का कार्य किया जायेगा। कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट में संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर जनगणना के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कलेक्टर श्रीमती चौहान ने कहा कि देश में पहली बार डिजिटल रूप से जनगणना होने जा रही है। इसलिये जनगणना के लिये तैनात किए गए प्रगणकों की सभी संख्याओं का समाधान करें, जिससे वे सही-सही जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर भर सकें। उन्होंने कहा कि सभी चार्ज अधिकारी अपने-अपने प्रगणक व सुपरवाइजर के सतत संपर्क में रहें और प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट गूगल मीट के जरिए उनसे संवाद कर शंकाओं का समाधान करें। साथ ही दिशा-निर्देशों की जानकारी दें। उन्होंने कहा एचएलबीसी पोर्टल पर किसी भी प्रकार की ओवरलेपिंग नहीं होना चाहिए तथा सभी प्रविष्टियां पूर्ण एवं सटीक भरी जाएं। एचएलबीसी पोर्टल पर दर्शायी गई सीमाओं में विसंगति होने पर वास्तविक भौगोलिक सीमाओं के आधार पर एचएलबी (हाउसलिस्टिंग ब्लॉक) का निर्धारण किया जाए।

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साथ ही देश में पहली बार स्व-गणना का अवसर भी लोगों को दिया गया है। जिसके तहत कोई भी व्यक्ति एसई वेब पोर्टल के माध्यम से निर्धारित प्रपत्र में जनगणना संबंधी 34 बिंदुओं में अपनी जानकारी स्वयं भर सकेंगे। जनगणना की तैयारियों के सिलसिले में मंगलवार को कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान की अध्यक्षता में बाल भवन में जिला जनगणना समन्वय समिति की बैठक आयोजित हुई। साथ ही जनगणना कार्य में संलग्न किए गए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के समस्त चार्ज व सहचार्ज अधिकारियों (तहसीलदार व नायब तहसीलदार इत्यादि) को प्रशिक्षित किया गया।
कलेक्टर श्रीमती चौहान ने अधिकारियों से कहा कि पूरी गंभीरता व मुस्तैदी के साथ इस संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम को ध्यान में रखकर प्रगणक गमछा, पानी व ओआरएस इत्यादि लेकर साथ में जाएं। जनगणना संबंधी जानकारी स्मार्ट फोन के जरिए अपलोड करने में प्रगणकगण, वॉलेन्टियर्स या अपने परिजन की मदद ले सकते हैं।
बैठक में नगर निगम आयुक्त एवं ग्वालियर शहर के प्रमुख जनगणना अधिकारी श्री संघ प्रिय, जिला जनगणना अधिकारी श्री अनिल बनवारिया व अपर आयुक्त नगर निगम श्री मुनीष सिकरवार सहित जनगणना के लिये तैनात किए गए चार्ज अधिकारी मौजूद थे।

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प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना 

कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान ने बताया कि भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत ग्वालियर जिले में भी दो चरणों में जनगणना होगी। प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) कार्य मध्यप्रदेश में 01 मई से 30 मई 2026 तक किया जायेगा। इस चरण का उद्देश्य द्वितीय चरण अर्थात जनसंख्या गणना के लिये मास्टर फ्रेम तैयार करना है। जनगणना के द्वितीय चरण का काम फरवरी 2027 में होगा। देश के बर्फीले क्षेत्रों में सितम्बर 2026 में द्वितीय चरण की गणना होगी। 

जिलेवासियों से की अपील बेझिझक दें सही-सही जानकारी, पूरी तरह रहेगी गोपनीय

कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान ने जिलेवासियों से भी अपील की कि जनगणना के लिये आने वाले प्रगणकों को बेझिझक सही-सही जानकारी दें। आपके द्वारा दी गई जानकारी पूर्णत: गोपनीय रहेगी। साथ ही ऐसा स्पष्ट प्रावधान है कि आपके द्वारा दी गई जानकारी का उपयोग साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं होगा। कलेक्टर ने कहा कि जनगणना के आंकड़े कल्याणकारी योजनाओं, संसाधनों के वितरण तथा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन कार्य के लिये आधार बनते हैं। 

पूरी तरह संवैधानिक है जनगणना का कार्य

जनगणना का कार्य पूरी तरह संवैधानिक है। भारतीय संविधान में 32 बार जनगणना का उल्लेख आया है। साथ ही संविधान के अनुच्छेद-246, जनगणना अधिनियम 1948 व जनगणना नियम 1990 के तहत जनगणना का कार्य किया जा रहा है। ज्ञात हो भारत की जनगणना अपनी समृद्ध परंपरा के कारण विश्व की सर्वश्रेष्ठ जनगणनाओं में से एक मानी जाती है। भारत में प्रथम जनगणना वर्ष 1872 में देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग हुई थी। वर्ष 1881 में पहली बार सम्पूर्ण देश में एक साथ जनगणना कराई गई। इसके बाद हर 10 वर्ष के अंतराल से वर्ष 2011 तक जनगणना होती रही। कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2021 में नियमित कार्यक्रम के अनुसार नहीं हो सकी। अब भारत की जनगणना – 2027 होने जा रही है। वर्ष 1872 से अब तक की यह 16वी तथा स्वतंत्रता के बाद की 8वी जनगणना होने जा रही है। 

प्रगणक करेंगे डाटा संग्रहण व स्व-गणना का सत्यापन, डाटा की बहुस्तरीय जाँच होगी

जनगणना कार्यक्रम के तहत प्रगणक घर-घर जाकर “Census 2027-HLO” मोबाइल एप का उपयोग कर डिजिटल डाटा संग्रह करेंगे। साथ ही लोगों द्वारा पोर्टल पर स्व-गणना के तहत भरी गई जानकारी का सत्यापन भी करेंगे। दोनों तरह से प्राप्त डाटा की बहुस्तरीय जाँच होगी। पहले यह कार्य पर्यवेक्षकों द्वारा किया जायेगा। साथ ही चार्ज अधिकारी भी मैदान में जाकर पुन: सत्यापन कर त्रुटियां ठीक करायेंगे। 

जनगणना के प्रथम चरण में 34 बिंदुओं की जानकारी संकलित होगी

जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकान गणना का काम किया जायेगा। जिसमें 34 बिंदुओं में जानकारी संकलित होगी। इसमें भवन व मकान नम्बर सहित मकान की स्थिति, परिवार क्रमांक, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग, मकान किराए का है अथवा स्वयं का, कमरों की संख्या, परिवार के विवाहित दम्पत्तियों की संख्या, पेयजल के मुख्य स्त्रोत, पेयजल स्त्रोतों की उपलब्धता, प्रकाश का मुख्य स्त्रोत, शौचालय की सुगमता, शौचालय का प्रकार, गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था, परिसर के अंदर स्नान की सुविधा, रसोई घर व एलपीजी-पीएनजी कनेक्शन, खाना पकाने के लिये प्रयुक्त मुख्य ईंधन, रेडियो/ट्रांजिस्टर व टेलीविजन की उपलब्धता, इंटरनेट सुविधा, लेपटॉप/कम्प्यूटर की उपलब्धता, टेलीफोन, मोबाइल फोन व स्मार्ट फोन इत्यादि की उपलब्धता, साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, मोपेड, कार, जीप व वैन, परिवार द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले अनाज, मसलन चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का व अन्य खाद्यान्न एवं मोबाइल फोन इत्यादि जानकारी शामिल है। 

जिले में लगभग 6 हजार अधिकारी-कर्मचारी करेंगे जनगणना

ग्वालियर जिले में कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान के नेतृत्व में लगभग 6 हजार अधिकारी-कर्मचारी जनगणना-2027 के कार्य को अंजाम देंगे। इनमें लगभग 5 हजार प्रगणक व 829 पर्यवेक्षक, 41 चार्ज अधिकारी, 42 फील्ड ट्रेनर्स, 4 मास्टर ट्रेनर्स व 9 जिला स्तरीय अधिकारी शामिल हैं। शहरी क्षेत्र में नगर निगम आयुक्त प्रमुख जनगणना अधिकारी का दायित्व निभा रहे हैं। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत के सीईओ यह जिम्मेदारी निभायेंगे। प्रथम चरण में प्रगणक घर-घर जाकर मकान सूचीकरण व मकानों की गणना का कार्य करेंगे। साथ ही लोगों द्वारा स्वत: ही मोबाइल एप पर 34 बिंदुओं में भरी गई जानकारी की जांच कर सत्यापन भी करेंगे। ज्ञात हो जनगणना – 2027 के लिये ग्वालियर जिले में जिन्हें प्रशासनिक इकाई माना गया है, उनमें 10 तहसील, 10 नगर व 589 गाँव शामिल हैं।

श्री चेतन्या स्कूल का रसूख शिक्षा विभाग पर भारी, जांच में गोलमाल का बड़ा खेल

ग्वालियर मध्य प्रदेश: जिला शिक्षा विभाग ग्वालियर अपनी कार्यशैली को लेकर एक बार फिर चर्चाओं में हैं। शासन प्रशासन के तमाम आदेश और नियमों को ताक पर रखकर कई बार निजी स्कूल अपनी मनमानी करते नजर आते हैं और इसके बावजूद भी जिला शिक्षा विभाग इस तरह आंखें मूंदे बैठा रहता है कि मानो इन निजी स्कूलों को मौन सहमति दे रखी हो।ऐसा ही मामला श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल का है। जिसने सारे नियम कायदे ताक पर रखे हुए हैं और इसके बावजूद भी शिक्षा विभाग स्कूल पर किसी तरह की भी कार्रवाई करने में सक्षम नजर नहीं आ रहा है।
आपको बता दें कि भीषण गर्मी को देखते हुए ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर जिला शिक्षा विभाग ने सत्ताईस अप्रैल से तीस अप्रैल तक आठवीं कक्षा तक के स्कूल बंद किए जाने का आदेश जारी किया था, लेकिन इस आदेश को दरकिनार करते हुए श्री चेतन्य टेकने स्कूल आनंद नगर सत्ताईस अप्रैल को संचालित हो रहा था, जिसकी जानकारी तुरंत जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी को दी गई थी। इसके बाद हरिओम चतुर्वेदी ने खानापूर्ति के लिए एपीसी और बीआरसी को जांच के लिए स्कूल भेजा था। लेकिन आज तीस तारीख तक जांच का खेल जारी है और जिला शिक्षा विभाग स्कूल पर कार्रवाई से बचता नजर आ रहा है या कहें तो स्कूल को संरक्षण देता नजर आ रहा है।

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जिला शिक्षा अधिकारी से आज जब इस बारे में जानकारी लेनी चाहिए तो दिन में कई बार उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने के बावजूद उन्होंने फोन नहीं उठाया। इस वजह से यह जानकारी नहीं मिल सकी कि श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल पर की गई जांच का क्या निष्कर्ष निकला और शिक्षा विभाग स्कूल पर क्या कार्रवाई कर रहा है। आपको बता दें कि स्कूल की जांच की प्रथम रिपोर्ट को नकारने की बात जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने अट्ठाईस अप्रैल को हमसे मोबाइल पर चर्चा के दौरान की थी और साथ में उन्होंने यह भी कहा था कि जाँच में उन्हें स्वयं संतोषजनक बिंदु नहीं नहीं दिखा रहे हैं, इसलिए उन्होंने जांच के लिए टीम को भेजा है। अट्ठाईस अप्रैल को जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी कार्रवाई को लेकर काफी सकारात्मक नजर आ रहे थे। और जिस तरह के वीडियो हमने उन्हें भेजे थे उससे वे सहमत थे कि स्कूल संचालित हुआ है और छोटे छात्रों की कक्षाएं लगी हैं। 

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अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि पहली जांच सही नहीं थी तो जिला शिक्षा विभाग की टीम ने किस दबाव में स्कूल के पक्ष में जांच रिपोर्ट पेश की? दूसरा सवाल यह भी उठ रहा है कि अभी तक दूसरी जांच की गई है या नहीं?तीसरा सवाल यह भी उठ रहा है कि जब जिला शिक्षा अधिकारी स्वयं इस जांच से संतुष्ट नहीं थे। तो उन्होंने जांच अधिकारियों को क्या कोई कारण बताओ नोटिस दिया या उनसे कोई स्पष्टीकरण मांगा? जिस तरह से जिला शिक्षा विभाग निजी स्कूल के रसूख के आगे दबता नजर आ रहा है, वह साफ बता रहा है कि जांच के नाम पर केवल टालमटोली का खेल चल रहा है।
यहां सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन ने ही स्कूल बंद किए जाने का आदेश जारी किया था और जिला शिक्षा विभाग अपने ही आदेश का पालन कराने में असफल साबित हुआ है।जब ऐसे आदेशों का पालन होना ही नहीं होता तो ऐसे आदेश निकाले क्यों जाते हैं? इस तरह से आदेशों की अवहेलना होने से कहीं ना कहीं जिला प्रशासन की किरकिरी होती है। साथ ही संबंधित स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावकों के मन में यह डर भी व्याप्त होता है कि स्कूल में कुछ भी गड़बड़ हो रहे लेकिन उसकी शिकायत शिक्षा विभाग या प्रशासन से करने का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि स्कूल का रसूख तो इतना है कि प्रशासन के आदेश की अवहेलना यह स्कूल खुलेआम करता है तो किसी आम अभिभावक की शिकायत से होगा ही क्या?

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स्कूल बंद किए जाने के आदेश के बाद भी श्री चेतन्य टेक्नो स्कूल की संचालित कक्षाएं कहीं न कहीं शिक्षा विभाग को कठघरे में खड़ी कर रही हैं। शिक्षा विभाग के पास तमाम पुख्ता साक्ष्य भेजने के बावजूद भी शिक्षा विभाग जिस तरह कार्रवाई करने से बच रहा है, वह शिक्षा विभाग और इस निजी स्कूल के बीच में बड़ी सांठगांठ का संशय पैदा कर रहा है। साथ ही इस बात पर भी मुहर लगा रहा है कि जिला शिक्षा विभाग किसी न किसी प्रभाव या दबाव में निजी स्कूलों को संरक्षण देते रहते हैं, यही कारण है कि जिला प्रशासन के तमाम तावों के बावजूद कई स्कूल ऊंची कीमत पर स्कूल की किताबें और कॉपियां बेच लेते हैं और शिक्षा विभाग खामोशी से सब कुछ देखता रहता है। संभवतः आम अभिभावकों को भी शिक्षा विभाग और निजी स्कूल के इस साठगांठ का पता होता है, इसलिए ज्यादातर अभिभावक शिकायत तक नहीं करते हैं और संभवतः ऐसा ही चेतन्या टेक्नो स्कूल के मामले में भी हुआ है कि धूप में अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए मजबूर अभिभावकों में से ज्यादातर स्कूल के रसूख के आगे और शिक्षा विभाग की मिलीभगत के चलते खामोश हैं। शिक्षा विभाग की निष्पक्ष जांच के इंतजार में…