भिंड मध्य प्रदेश डिजिटल डेस्क: भिंड में हाल ही में पकड़े गए हनी ट्रैप और ब्लैकमेल करने वाले गिरोह के चार सदस्यों में से एक महिला के एचआईवी पॉजीटिव होने की पुष्टि हुई है। यह जानकारी जब अवश्य शहर में फैली तो खलबली मच गई। गिरफ्तारी के बाद पुलिस महिला को रूटीन मेडिकल जांच के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंची थी। यहां सामने आया कि महिला तीन साल से एचआईवी संक्रमित है। और इलाज इसी अस्पताल में करवा रही है। इस दौरान वह इस गिरोह में शामिल होकर कई लोगों के शारीरिक संपर्क में भी आई। यह जानकारी मिलते ही क्षेत्र में खलबली मची हुई है।
महिला के एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने के बाद पुलिस ने अब उसे एंगल से भी इस मामले की जांच शुरू कर दी है और इस महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने वाले तमाम कोशों की खोजबीन कर उन्हें भी सूचित किया जा रहा है। पुलिस को महिला के मोबाइल फोन में कुछ लोगों के साथ अंतरंग फोटो व वीडियो भी मिले हैं। इसके आधार पर पुलिस ने कुछ लोगों से संपर्क भी किया है। लेकिन इनमें से अधिकतर लोग एचआईवी जांच कराने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। कुल मिलाकर, इस गिरोह द्वारा हनी ट्रैप का शिकार हुए लोग अब डर के साये में जी रहे हैं।
आपको बता दें कि कुछ समय पहले भिंड में हनी ट्रैप के एक हैरतअंगेज मामले का खुलासा हुआ था। हनीट्रैप गिरोह आर्थिक रूप से संपन्न वृद्ध पुरुषों, किसानों और व्यापारियों को निशाना बनाता था। पहले महिलाओं के माध्यम से उनसे संपर्क स्थापित किया जाता, फिर आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें बहुप्रसारित करने या दुष्कर्म के झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर लाखों रुपये की वसूली की जाती थी। यह भी सामने आया है कि शिकार बनाए गए लोगों को भरोसा दिलाने के लिए 100 रुपये के स्टांप पेपर पर समझौतेनुमा दस्तावेज तैयार कराए जाते थे, जिनमें संबंधों को आपसी सहमति से बना बताया जाता था। भविष्य में किसी प्रकार की शिकायत नहीं करने का उल्लेख किया जाता था। इन पर गवाहों के हस्ताक्षर भी कराए जाते थे।
हनीप्रेप के इस मामले में पहली शिकायत ग्राम रछेड़ी निवासी एक पीड़ित ने देहात थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि 23 मई को उन्हें एक महिला मिली, जिसने पैर में दर्द होने की बात कहकर घर छोड़ने का अनुरोध किया। वह उसे उसके घर छोड़ने गए। आरोप है कि महिला ने वहां जबरन चाय पिलाई और शारीरिक संबंध बनाए। इसका वीडियो मोबाइल से रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कराने की धमकी देकर सात लाख रुपये की मांग की। पीड़ित ने तत्काल पांच हजार रुपये दे दिए। बाद में खेत बेचकर बाकी रकम देने का दबाव बनाया जाने लगा। गिरोह में शामिल दूसरी महिला व कुछ लोग उसके गांव पहुंचे और रुपये नहीं देने पर वीडियो इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित करने तथा जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने 28 मई को गिरोह में शामिल दो महिलाओं व दो पुरुषों का पकड़ा था।
अब इस पूरे मामले में हनी ट्रेप का शिकार हुए तमाम लोग आर्थिक रूप से तो ठगे ही गए थे, लेकिन इस किलो की महिला की सच्चाई भी पॉजिटिव।रिपोर्ट की खबरें फैलने पर ऐसे तमाम लोग कह चुके हैं।हालांकि पुलिस इन लोगों से संपर्क कर इनकी जांच कराए जाने का प्रयास कर रही है, लेकिन ज्यादातर लोग सामने आना नहीं चाह रहे हैं।
भोपाल मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश सरकार ने बुधवार शाम को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 29 आईएएस के तबादले कर दिए हैं। प्रदेश शासन में मुख्य सचिव अनुराग जैन के आदेश से जारी सूची के मुताबिक कर्मवीर शर्मा को भोपाल का नया संभागायुक्त बनाया गया है। वहीं मौजूदा संभागायुक्त संजीव सिंह अब खेल एवं युवा कल्याण विभाग में सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। मुकेश चंद्र गुप्ता को जेल विभाग में प्रमुख सचिव बनाया गया है। वहीं मुख्यमंत्री के सचिव आलोक कुमार सिंह को बनाया पंजीयक महानिरीक्षक एवं अधीक्षक मुद्रांक का जिम्मा सौंपा गया है।
कर्मवीर शर्मा को भोपाल संभाग का संभागायुक्त बनाया गया. शीलेन्द्र सिंह रीवा संभाग के संभागायुक्त बने. संजीव सिंह खेल एंव युवा कल्याण विभाग में सचिव बने. विवेक कुमार पोरवाल को प्रमुख सचिव, खनिज साधन विभाग नियुक्त किया गया है. बाबू सिंह जामोद रीवा संभाग के कमिश्नर पद से हटाकर सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग बनाया गया है. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी केसी गुप्ता को अपने वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ कृषि उत्पादन आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. वहीं, अनिरूद्ध मुकर्जी को पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव और महानिदेशक एप्को (EPCO) का अतिरिक्त जिम्मा दिया गया है. इसके अलावा भोपाल और रीवा संभाग के कमिश्नरों के दायित्वों में भी बदलाव किया गया है।
ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब गतिमान एक्सप्रेस से उतरे एक निजी कंपनी के इंजीनियर ने जीआरपी को सूचना दी कि उसका बैग गायब हो गया है और उस बैग में ₹1000000 कैश थे। इस इंजीनियर की बात सुनकर पुलिस तुरंत अलर्ट हो गई और जांच शुरू कर दी। रेलवे स्टेशन पर लगे हुए सीसीटीवी खंगाले गए, जिसमें साफ नजर आया कि यह इंजीनियर झूठ बोल रहा है।जब यह ट्रेन से उतरा और इधर उधर चला, तब इसके हाथ में ऐसा कोई बैग नजर नहीं आया। जब पुलिस ने फिर से पूछा तब इसका कहना था कि बैग ट्रेन में छूट गया है। इस पूरे मामले में सवाल यह खड़ा होता है कि क्या इतनी बड़ी कैश रकम लेकर भारतीय रेलवे में सफर किया जा सकता है और रेलवे स्टेशन पर लगी मशीनों में यह बात क्यों नहीं उजागर हुई।
निजी कंपनी के इंजीनियर राजीव खन्ना का कहना है कि वह इस कंपनी में इंजीनियर के रूप में उड़ीसा में काम करते हैं। हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से गतिमान एक्सप्रेस की सीएट कोच के सीट नंबर 30 पर वे ग्वालियर के लिए यात्रा कर रहे थे। ट्रेन के ग्वालियर पहुंचने पर वे खुद तो ट्रेन से उतर गए लेकिन बैग उठाना भूल गए और जब ट्रेन आगे चल दी। तब उन्हें बैग की याद आई, और वे घबरा गए और तुरंत जीआरपी थाने पहुंचे और वह गायब होने की सूचना थाना पुलिस को दी। लेकिन उनके पास यह रकम क्यों थी और इतनी बड़ी रकम लेकर वह ट्रेन में यात्रा क्यों कर रहे थे, इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।
इस मामले में जीआरपी थाना टीआई दीप शिखा तोमर का कहना है कि जब इंजीनियर ने बैग गायब होने की शिकायत दर्ज की तो तुरंत सीसीटीवी खंगाले, जिसमें इंजीनियर बैग के साथ नजर नहीं आए और जब इंजीनियर ने बताया कि बैग ट्रेन में ही छूट गया है तो उनकी बताए गए सीट पर जांच करने के लिए गतिमान एक्सप्रेस में चल रहे ऑन ड्यूटी पुलिस को कर्मियों से संपर्क किया गया। पुलिसकर्मियों को बैग उसी सीट पर मिल गया, जिसे वापस ग्वालियर भेजा गया और दस लाख रुपये से भरा यह बैग इंजीनियर को लौटा दिया गया।
इस पूरे मामले में रेलवे के नियमों की बड़ी लापरवाही भी सामने आ रही है। एक्सपर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार रेलवे में कैश लेकर यात्रा करने को लेकर कोई नियम नहीं है। कितनी भी मात्रा में कैश लेकर आप यात्रा कर सकते हैं हालांकि राज्य से संबंधित नियमों के आधार पर यदि जांच में किसी यात्री पर कैश पाया जाता है तो उससे उस कैश को लेकर यात्रा करने के संबंधित दस्तावेज मांगे जाते हैं और दस्तावेज नहीं होने पर राज्य के आयकर विभाग को सूचना दी जाती है। लेकिन यहां रेलवे की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में कैश लेकर यात्रा करने पर भी कहीं कोई जांच नहीं होती। अब ऐसी स्थिति में यदि इतनी बड़ी रकम चोरी हो जाती है तो कैश लेकर यात्रा करने वाला रेलवे की सुरक्षा पर आरोप लगा सकता है।
भोपाल मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों और चिकित्सा संसाधनों का किस तरह से अकाल है और चिकित्सकीय सेवाएँ किस तरह लचर ढर्रे पर चल रही हैं, इसका प्रमाण अब है, सरकार ने स्वयं दे दिया है और यह प्रमाण है सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय के सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत निजी हाथों में सौंपा जाएगा ताकि ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हो सकें। यह निर्णय साफ दर्शाता है कि कहीं न कहीं सरकार मानती है कि निजी हाथों में सौंपने से ही स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो सकती हैं।सरकारी सिस्टम बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने में फेल हो चुका है!
कैबिनेट ने फैसला लिया है कि मध्य प्रदेश के 3 जिले रीवा, गुना और देवास के लगभग 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत निजी हाथों में सौंपा जाएगा। इन 18 स्वास्थ्य केंद्रों को पीपीपी मॉडल पर डेवलप किया जाएगा, जिसके तहत डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य संसाधनों को आउटसोर्स के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। इस पायलट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यदि प्रयोग सफल रहता है, तो फिर पूरे प्रदेश में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। आपको बता दें कि वर्तमान में मध्य प्रदेश में 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिनमें से ज्यादातर उचित स्वास्थ्य सेवाएं देने में लचर साबित हो रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल का कहना है कि प्रदेश के सीएचसी में मापदंड के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों की बेहद कमी है। केवल 75 विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। इसी तरह मेडिकल ऑफिसर के 34% पद रिक्त हैं, जबकि प्रदेश की 72% जनसंख्या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर है। 30 बिस्तर की सीएससी में 41 पद की आवश्यकता होती है, आउटसोर्स के माध्यम से मानव संसाधन की व्यवस्था की जाएगी। एजेंसी का चयन खुली निविदा के माध्यम से होगा। 5 साल के लिए यह व्यवस्था लागू की जाएगी। यह जानकारी भी मिली है कि मंत्रियों ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए सुझाव दिया है कि आदिवासी क्षेत्रों से यह शुरुआत होनी चाहिए, क्योंकि वहां समस्या ज्यादा गंभीर है।
हालांकि यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने के लिए की जा रही है, लेकिन साथ में यह व्यवस्था इस बात पर भी मुहर लगा रही है कि कहीं न कहीं प्रदेश सरकार का स्वास्थ्य विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हुआ है और अब अपनी नाकामियों के चलते ही ग्रामीण क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी हाथों में देने का फैसला लिया जा रहा है। अब देखना होगा कि पायलट प्रोजेक्ट की तहत इन अठारह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर निजी एजेंसी किस तरह बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं और ग्रामीण अंचल के मरीजों को इस योजना का कितना लाभ मिलता है?
ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर के मुरार थाने में एक महिला पिछले 10-12 दिनों से थाने के चक्कर लगा लगा कर थक गई । तमाम मिन्नतों के बाद भी उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी और जब वह थाने के चक्कर लगा लगाकर पूरी तरह से हताश हो गई तो उसने आत्महत्या करने का रास्ता चुना। उसने थाना परिसर में जहर खाकर अपनी जान देने की कोशिश की। जैसे ही महिला ने थाने में जहर खाया वैसे ही पूरे थाने में हड़कंप मच गया। इस पूरे मामले में सबसे हैरानी की बात यह है कि मुरार थाने में थाना प्रभारी भी एक महिला नैना पटेल है और एक महिला दूसरे महिला की पीड़ा पर कितनी संवेदनशील हो सकती है वह हकीकत भी यह घटना बयान कर रही है।
मुरार थाने के पुलिसकर्मी पीड़ित महिला को मुरार के जिला अस्पताल ले गए जहाँ उसे प्राथमिक इलाज के बाद जयारोग्य चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। महिला को पहले नौकरी लगवाने का लालच दिया और फिर शादी का झांसा देकर उसका लगातार शारीरिक शोषण किया गया था। महिला द्वारा थाने में जहर खाने के बाद मुरार थाना पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ दुष्कर्म सहित विभिन्न गंभीर धाराओं मामला दर्ज कर लिया है। लेकिन सवाल यह खड़ा होता है कि क्या मध्य प्रदेश के थानों में अपनी सुनवाई कराने के लिए अब पीड़ितों को जहर खाना पड़ेगा? आत्महत्या का रास्ता अपनाना पड़ेगा। तब ही उनकी सुनवाई होगी अन्यथा उन्हें दुत्कार कर भगा दिया जाएगा?
भिंड की रहने वाली महिला की शादी वर्ष 2016 में हुई थी। शादी के बाद उसकी दो छोटी बच्चियां हैं। करीब 4 साल पहले पीड़िता अपनी बड़ी बेटी को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए ग्वालियर में किराये का मकान लेकर रहने आई थी। मोहल्ले में ही आरोपी गजेंद्र केवट की एक ऑनलाइन सेंटर की दुकान थी। पीड़िता अक्सर अपने बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए गजेंद्र की दुकान पर जाती थी, जिसके चलते दोनों के बीच जान-पहचान हो गई । गजेंद्र ने पीड़िता से कहा कि “तुम बच्चों के साथ अकेली रहती हो, तुम्हें पैसों की सख्त जरूरत होगी। मैं तुम्हारी एक अच्छी जगह नौकरी लगवा दूंगा।
इसी बहाने से माह मई 2024 में आरोपी नौकरी का झांसा देकर महिला के किराये के कमरे पर पहुंचा और वहां उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए।इसके बाद आरोपी लगातार नौकरी लगवाने और शादी करने का झांसा देकर महिला का शारीरिक शोषण करता रहा। 23 मई 2026 तक आरोपी ने संबंध बनाए अब शादी से मुकर गया है।सोमवार को महिला मुरार थाना पहुंची और सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए जहर खाने का प्रयास किया। जिस पर वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने तत्काल उसे रोक लिया और तत्काल मेडिकल के लिए हॉस्पिटल पहुंचाया है। पुलिस ने तत्काल आरोपी के खिलाफ नौकरी व शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का मामला दर्ज किया है। मुरार जिला चिकित्सालय के ड्यूटी डॉक्टर का कहना है कि अभी फिलहाल महिला की हालत ठीक है।
हालांकि इस समय महिला खतरे से बाहर है, जहर का असर उस पर जाता नहीं हुआ और उसकी शिकायत पर एफआईआर भी दर्ज कर ली गई है, लेकिन यह घटना मध्यप्रदेश की पुलिस व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रही है। ऐसे कितने ही पीड़ित फरियादी थाने के चक्कर लगाते होंगे और थक हारकर अन्याय सहकर ही चुपचाप अपने काम में जुट जाते होंगे। मध्यप्रदेश पुलिस का रवैया आमजन के प्रति बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं है। जहां एक ओर रसूखदारों और वीआईपी लोगों की सुनवाई बैठे बैठे हो जाती है, वहीं गरीब और सामान्य लोग अन्याय सहन करने के बाद भी थाने जाने से कतराते हैं क्योंकि थाने पर अमानवीय व्यवहार होता है, चक्कर कटाए जाते हैं और आखिर में फरियादियों को ही पीड़ित करके भगा दिया जाता है। अब हर कोई तो इस पीड़िता की तरह नहीं होता कि हताश होकर जहर खा ले, क्योंकि कई फरियादियों पर अपने परिवार की जिम्मेदारी होती है और यह जिम्मेदारी न होने देती और न मरने देती। क्या थानों में व्यवस्था आम जन हितेशी हो पाएगी?यह एक बड़ा सवाल है?
नई दिल्ली क्रिकेट खेल खबर: श्रीलंका के विरुद्ध भारत के मैच में वह सब कुछ हुआ जो नहीं होना था। आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) 2026 में बल्ले से तहलका मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. इंडिया-ए और श्रीलंका-ए के बीच 15 जून (सोमवार) को दांबुला में खेले गए त्रिकोणीय सीरीज के मुकाबले में 15 वर्षीय बल्लेबाज का गुस्सा मैदान पर फूट पड़ा. सुपर ओवर में मिली हार के बाद वैभव की श्रीलंकाई खिलाड़ियों के साथ तीखी नोकझोंक हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की तक पहुंच गई।
आने वाली सीरीज से पहले वैभव सूर्यवंशी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।हालांकि अभी तक कोई फैसला नहीं आया है, लेकिन उनके ऊपर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। जब वह आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे की तैयारी कर रहे हैं. वैभव के आयरलैंड दौरे पर इंटरनेशनल डेब्यू करने की संभावना है, लेकिन इस विवाद ने उनकी शानदार क्रिकेटिंग उपलब्धियों के बीच एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। जिस तरह से पूरा घटनाक्रम हुआ है वह साफ दर्शाता है कि वैभव सूर्यवंशी अपरिपक्व हैं, बल्ले से जरूर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनके व्यवहार में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो मापदंड होने चाहिए उसकी कमी है।
इंडिया-ए vs श्रीलंका-ए मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और नतीजा सुपर ओवर में निकला. श्रीलंका-ए ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सुपर ओवर में 16 रन बना। यानी इंडिया-ए को जीत के लिए 17 रन चाहिए थे, लेकिन टीम सिर्फ 9 रन ही बना सकी. वैभव सूर्यवंशी ने सुपर ओवर में सिर्फ तीन गेंदों का सामना किया और एक चौके की मदद से 6 रन बनाए, लेकिन वो इंडिया-ए को जीत नहीं दिला सके। जीत के बाद श्रीलंकाई खिलाड़ी मैदान पर जश्न मनाने लगे, जबकि भारतीय खिलाड़ी निराश नजर आए. इसी दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच कुछ कहा-सुनी हुई। श्रीलंका-ए के तेज गेंदबाज कुगाथास मथुलन की किसी टिप्पणी के बाद वैभव सूर्यवंशी का पारा चढ़ गया।
टीवी कैमरों में कैद हुए दृश्य में वैभव सूर्यवंशी काफी गुस्से में दिखाई दिए. ऐसा नजर आया कि उन्होंन श्रीलंकाई खिलाड़ी को धक्का दिया, जिसके बाद सामने वाला खिलाड़ी भी उनकी ओर बढ़ा. कुछ पल के लिए माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया. स्थिति को बिगड़ता देख श्रीलंका के अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज निरोशन डिकवेला तुरंत बीच-बचाव के लिए पहुंचे. उन्होंने दोनों खिलाड़ियों को अलग किया और मामला शांत कराया. अगर डिकवेला समय रहते हस्तक्षेप नहीं करते तो विवाद और बढ़ सकता था। हालांकि, जिस हद तक बात विवाद घटनाक्रम में दिखाई दे रहा है, वह भी गंभीर है।
वैभव सूर्यवंशी का गुस्सा सिर्फ मैच खत्म होने के बाद ही नहीं दिखा. इससे पहले सुपर ओवर के दौरान एक गेंद को नो-बॉल करार दिए जाने पर भी इंडिया-ए खेमे में नाराजगी थी. कप्तान तिलक वर्मा अंपायर के फैसले से असहमत दिखे थे, उसी दौरान वैभव भी अंपायर के पास पहुंच गए और उनसे बहस करते नजर आए. हालात ऐसे बन गए कि टीम के मुख्य कोच हृषिकेश कानितकर को हस्तक्षेप कर वैभव को वहां से हटाना पड़ा। अभी तक मैच रेफरी प्रदीप जयप्रकाशदारन की ओर से कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है। अगर जांच में यह पाया जाता है कि वैभव सूर्यवंशी ने किसी खिलाड़ी के साथ अनुचित शारीरिक संपर्क किया है, तो उन पर जुर्माना या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। आईसीसी आचार संहिता के अनुच्छेद 2.12 के अनुसार किसी खिलाड़ी, अंपायर या अन्य व्यक्ति के साथ जानबूझकर या लापरवाही से किया गया अनुचित शारीरिक संपर्क नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर से एक बार फिर नौकरी दिलाने के नाम पर असमत लूटने का मामला सामने आया है। जिसमें एक शादीशुदा महिला से नौकरी दिलाने का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए और महिला का शारीरिक शोषण करता रहा। लंबे समय तक ही आरोपी ने महिला को नौकरी नहीं दिलाई। महिला के घर उसका लगातार आना जाना था। जब इस हैवान ने महिला की बारह वर्षीय बच्ची पर भी गलत नजर रखी तो महिला इस हैवान की इरादे फांप गई और थाने पहुंचकर इसके खिलाफ माफ करना दर्ज कराया।
मामला ग्वालियर के झांसी रोड थाना क्षेत्र का है। जहां पैंतीस वर्षीय महिला अपनी दो बेटियों के साथ रहती है। महिला की शादी दो हजार सात में डबरा में हो चुकी है लेकिन पति से झगड़ा होने के कारण वह पति से अलग किराए का कमरा लेकर ग्वालियर में रह रही थी। पिछले साल महिला की मुलाकात डबरा बल्ला का डेरा निवासी दीपांशु बाथम से हुई। महिला से उसने मोबाइल नंबर ले लिया फिर महिला से उसकी बात होने लगी। महिला अकेली अपनी बेटियों के साथ रहती थी, उसे नौकरी की तलाश थी। इसी बात का फायदा उठाकर दीपांशु ने महिला को नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया, लेकिन साथ में उसकी असमत लेने की शर्त भी रख दी। आरोपी महिला के घर जाकर उससे शारीरिक संबंध बनाने लगा। लेकिन लंबे समय तक महिला को नौकरी नहीं दिलाई, केवल नौकरी दिलाने का आश्वासन देता रहा।
27 फरवरी विराट, आरोपित दीपांशु बाथम महिला के घर आया और रात को वहीं रुक गया। रात को जब महिला सो रही थी, तब दीपांशु ने महिला की छोटी बारह वर्षीय बेटी के साथ गंदी हरकत करने की कोशिश की। बेटी जाग गई और जोर से रोने लगी।बेटी के रोने की आवाज सुनकर महिला उठी और उसने दीपांशु की हरकत का विरोध किया। लेकिन महिला के साथ शारीरिक संबंध रखने वाला दीपांशु, अब महिला की बेटी के साथ भी संबंध बनाना चाहता था और जबरदस्ती कर रहा था। महिला ने विरोध किया, लेकिन दीपांशु महिला को जान से मारने की धमकी देकर वहां से चला गया। इस घटना के बाद महिला ने दीपांशु बाथम से दूरी बना ली, लेकिन दीपांशु लगातार महिला को शारीरिक संबंध बनाने के लिए धमकाता रहा और आखिर में महिला ने परेशान होकर झांसी रोड थाने में जाकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज की। महिला की शिकायत के आधार पर झांसी रोड थाना पुलिस ने छेड़छाड़, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। इस पूरे मामले में नौकरी की मजबूरी में महिला लंबे समय तक शारीरिक शोषण का शिकार होती रही और आरोपी लीला को धमकाता रहा। महिला की मजबूरी का फायदा उठाकर ही आरोपी अब महिला बारह साल की बेटी पर गलत नियत रख रहा था, जो महिला को नागवार गुजरा। नौकरी के झांसे के चलते महिला आरोपी की बातों में आ गई। फिलहाल पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
दमोह मध्यप्रदेश: दमोह जिले के तेंदूखेड़ा में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवता शर्मसार और संवेदनशीलता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं बीते दिन बगदरी के जंगल में एक पेड़ से लटका हुआ चार-पांच दिन पूर्व का एक अज्ञात शव शुक्रवार को देखा गया सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर उसकी पहचान करने का प्रयास किया गया, लेकिन काफी खोजबीन और पूछताछ के बावजूद मृतक की पहचान नहीं हो सकी पहचान नहीं होने के कारण शव को लावारिस घोषित कर दिया गया।
शनिवार शाम नगर परिषद के कर्मचारियों द्वारा उक्त अज्ञात शव को नगर के खकरिया मार्ग पर सड़क से लगभग 40 फीट दूर वार्ड क्रमांक 9 स्थित संदीपनी विद्यालय एवं कॉलेज के पास जहां पूरे नगर का कचरा निष्पादन केंद्र है उसी जगह दफनाया गया। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में जो दृश्य सामने आया, उसने नगरवासियों को स्तब्ध कर दिया। नगर परिषद द्वारा शव को ले जाने के लिए किसी शव वाहन का उपयोग नहीं किया गया, बल्कि कचरा ढोने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर अंतिम स्थल तक पहुंचाया गया।
हैरानी की बात यह रही कि ट्रॉली में उस समय भी कुछ कचरा मौजूद था इस घटना को जिसने भी देखा, वह आश्चर्य और दुख में पड़ गया। नगर के महाराज सिह,सुखदेव का कहना है कि चाहे शव लावारिस ही क्यों न हो, लेकिन वह भी किसी इंसान का शरीर था और उसके साथ गरिमा एवं सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए था। लोगों ने सवाल उठाए हैं कि क्या प्रशासन के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी? क्या किसी अन्य वाहन की व्यवस्था नहीं की जा सकती थी? इस घटना ने शासन-प्रशासन की व्यवस्थाओं और संवेदनशीलता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
जानकारी के अनुसार नगर परिषद के पास वर्तमान में शव वाहन उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण कर्मचारियों ने मजबूरी में कचरा ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग किया। हालांकि स्थानीय लोगों का मानना है कि संसाधनों की कमी के बावजूद मानवता और संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी इस घटना के बाद नगर में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोगों का कहना है कि यह मामला केवल एक लावारिस शव का नहीं, बल्कि इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी का है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं और इस लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है वहीं नगर के लोगों का कहना है कि नगर एवं ग्रामीणों क्षेत्रों में भी शव वाहन की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हो। वही नगर परिषद के सीएमओ प्रेम सिंह चौहान का कहना है कि मैं इस संबंध में नगर निरीक्षक से बात करता हूं मुझे इसकी जानकारी नहीं है। नगर निरीक्षक रविन्द्र बागरी ने बताया म्रतक का शव जंगल मे पेड़ से लटका हुआ मिला था म्रतक की शिनाख्त नही हो सकी है। शव को विधिवत गड्ढा खोदकर नगर पालिका द्वारा दफनाया गया है।
ग्वालियर मध्य प्रदेश: मध्यप्रदेश के लिए साल दो हजार छब्बीस की शुरुआत हुई इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र के दूषित पानी कांड से। इस दूषित पानी कांड ने देश के सबसे स्वच्छ शहर माने जाने वाले इंदौर की जमकर किरकिरी की। पूरे देश में यह सवाल उठने लगे की ऊपर से खूबसूरत दिखने वाले शहर की हकीकत कितनी भयावह है इस हादसे में तेईस लोगों के मौत की खबरें भी चली। और जब जांच हुई और जिस तरह की लापरवाही नजर आई, उसने सब कुछ चौंका दिया कि किस तरह पेयजल सप्लाई वाले पाइप लाइन में सीवर का पानी मिल रहा था और यह सीवर का पानी मिलने से ही लोगों के घर में वह प्रदूषित पानी पहुंचा जिसको पीने से लोग बीमार होने लगे, सैकड़ों के संख्या में लोग अस्पताल में भर्ती हुए एक तरह से ऐसे हालात नजर आने लगे जैसे कोई महामारी फैल गई हो। इस घटना के बाद यह सवाल उठने लगे कि आपका शहर पेयजल सप्लाई में कितना सुरक्षित है? क्या आपके शहर के जिम्मेदार अधिकारी आपको शुद्ध पानी पहुंचा पा रहे हैं?चलिए ग्वालियर का हाल जान लेते हैं।
ग्वालियर में रविवार को जो कुछ हुआ वो चौंकाने वाला है। ग्वालियर का यह मिर्ज़ापुर नाम अब आपको स्मरण रहेगा। घास मंडी क्षेत्र के मिर्जापुर क्षेत्र में है वॉटर सप्लाई पंप जहां पर पानी की टंकी में पड़े मरे हुए सांप का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होता है। इस वीडियो में यह दावा किया जाता है कि वाटर पंप रूम के टंकी में मरा हुआ सांप पड़ा था और यहीं से सैकड़ों परिवारों को पानी सप्लाई होता है और यह दूषित पानी यदि लोग पीले तो लोगों को नुकसान भी हो सकता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और वहीं से कुछ मुख्य धारा के प्रतिष्ठित चैनल ने भी इस खबर को प्रमुखता से उठा लिया। खबर की हकीकत तक जाने का प्रयास ही नहीं किया। द इंगलेज पोस्ट ने मौके पर जाकर पंप संचालक बदन सिंह यादव से बातचीत की तो उन्होंने कुछ और ही खुलासा किया। उन्होंने कहा कि यहां के शरारती लड़कों ने पास पड़े कचरे के ढेर में से मरे हुए सांप को उठाया और उसे पानी की टंकी में डालकर वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।
जब तमाम इलेक्ट्रॉनिक चैनल्स पर यह खबर चलने लगी कि ग्वालियर में पानी की टंकी में सांप निकला है और इससे पहले मानपुर मल्टी की टंकी में भी मरी हुई मछली निकली थी, तो यह खबर पूरे प्रदेश में तेजी से फैल गई और इस खबर के बाद नगर निगम की लापरवाही पर और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था पर सवाल उठने लगे नगर निगम के अधिकारियों ने भी मौके पर जाकर हकीकत को जाना और उन लड़कों को पकड़कर उनका वीडियो बनाकर जारी करवा दिया, जिसमें वह लड़के यह कहते नजर आ रहे हैं कि वीडियो वायरल करने के उद्देश्य से उन्होंने यह वीडियो बना दिया।सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।टंकी में सांप नहीं था, सांप भूरे से उठाया था। अब यह वीडियो वायरल करके नगर निगम के जिम्मेदारों ने अपनी लापरवाही से पल्ला झाड़ लिया। और यह साबित करने का निरर्थक प्रयास किया ही पानीपूरी तरह साफ है। नगर निगम पूरी तरह पाक साफ है।
द इंगलेज पोस्ट को पंप संचालक बदन सिंह ने और भी बहुत कुछ जानकारी दी थी।उनका कहना था कि इस पंप रूम में सांप कीड़े मकोड़े आ जाते हैं क्योंकि यह रूम जर्जर हालत में है।इस रूम में ऊपर टूटी हुई तीन डली है और रूम की दीवार भी कई जगह से क्षतिग्रस्त हैं, जिसमें बड़े बड़े छेद हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इस पंप रूम के बगल में ही यह कचरे का ढेर है जिसमें गंदगी जमा होती है, दूसरी ओर सरकारी जमीन पर झाड़ियां हैं जिनकी सफाई नहीं होती और पंप रूम के नीचे से ही गंदा नाला है जिसकी भी सफाई नहीं होती।उन्होंने कहा कि यह सब गंदगी के कारण ही कीड़े मकोड़े सांप आ जाते हैं। मतलब उन्होंने स्वीकारा कि पंप रूम में सांप आते हैं। हालांकि वीडियो में दिखाया गया सांप लड़कों द्वारा ही डाला गया अब यदि यह हकीकत मान भी लें तो फिर रूम की जो वास्तविक हालत थी वह वास्तव में चौंकाने वाली थी।
अब सांप कांड झूठा बताने वाला वीडियो जारी करने से नगर निगम की जो पोल खुल गई उसको भी सुन लीजिए। कुछ शरारती लड़के पंप रूम के अंदर जाकर वॉटर टैंक में मरा हुआ सांप डालने में सफल हो जाते हैं और उसका वीडियो वायरल कर देते हैं। इसका मतलब है कि ग्वालियर शहर में संचालित तमाम पंप रूम असुरक्षित हैं।उनमें कोई भी अंदर जा सकता है और किसी भी तरह की शरारत कर सकता है। कोई मरा हुआ सांप डाल सकता है, तो कोई जहरीला सांप डाल सकता है, तो कोई जहर भी डाल सकता है। तो पंप रूम में यदि इस तरह असुरक्षित हैं जिसमें कोई भी शरारती लड़के घुसकर कुछ भी हरकत कर सकते हैं, तो क्या हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि हमें शुद्ध पेयजल मिलता रहेगा? क्योंकि जिस तरह से ये लड़के पंपरूम में घुसकर वीडियो बनाकर वायरल कर चुके हैं, वह साफ बता रहा है कि शहर में संचालित पंप रूम असुरक्षित हैं और असामाजिक तत्व और देश के दुश्मन इन पंपरूम का इन टंकियों का सहारा लेकर शहर में दहशत फैला सकते हैं, भयावह हालात पैदा कर सकते हैं।
भागीरथपुरा, कांड जैसा कांड किसी शहर में न हो, हम ईश्वर से यह प्रार्थना करते हैं। लेकिन हमारे शहर में भी कई जगह पर पानी की लाइन और सीवर लाइन आसपास या एक दूसरे के ऊपर नीचे हैं जिनको हटाने के कई प्रयास भागीरथपुरा, कांड के बाद किए गए, लेकिन अभी भी पानी की मेन सप्लाई लाइन कई जगह नाले के ऊपर से निकल रही है। जब बारिश के समय नाले उफान पर होते हैं तब यह पाइप लाइन जलमग्न हो जाती है।इस पाइप लाइन में कई जगह पर लीकेज भी हैं जिनमें से पानी रिश्ता रहता है पानी रिसकर अंदर आ सकता है। इसका मतलब नाले में उफान होने पर पानी रिस कर पाइप के अंदर भी जा सकता है। ऐसे तमाम स्पॉट को चिह्नित कर जिम्मेदार अधिकारियों को समुचित प्रबंध करने चाहिए ताकि आने वाले बारिश के मौसम में इस तरह से दूषित पानी कहीं भी पेयजल सप्लाई में न मिले और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा का ख्याल रखा जा सके।
जो घटना मिर्जापुर पंप रूम पर हुई है, वह नगर निगम के लिए एक सबक है।केवल वीडियो प्रसारित करके अपने पक्ष में वाहवाही लूटने की बजाय नगर निगम को प्रयास करने चाहिए कि ऐसे तमाम पंप रूम जो क्षतिग्रस्त हैं उनको मजबूती से बनाया जाए, वहां सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं। वहां साफ सफाई का प्रबंध किया जाए और ऐसी कोई भी स्थिति पैदा न हो कि वहां कोई जहरीला कीड़ा सांप बिच्छू घुस सके और यह तो कतई ना हो कि कोई शरारती तत्व पंप रूम के अंदर तक घुस सके। इस घटना से सबक लेकर नगर निगम को शहर के समस्त पंप रूम की जांच करनी चाहिए और उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। क्योंकि यदि ऐसा नहीं हुआ तो यकीन मानिए भागीरथपुरा से ज्यादा भयावह हालात हमारे शहर में हो सकते हैं।
भोपाल मध्यप्रदेश: क्या आप एक गरीब परिवार से हैं और डॉक्टर इंजीनियर बनना चाहते हैं, लेकिन नीट और जेईई की कोचिंग की फीस नहीं भर सकते?तो यह खबर आपके लिए है, क्योंकि अब हर गरीब परिवार का बच्चा नीट और जे ई ई की तैयारी कर पाएगा और उसको महंगी फीस भी नहीं देनी होगी। शिक्षा के क्षेत्र में मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए एक अनोखी शुरुआत की है। अब स्कूल स्तर पर ही नीट और जेई की तैयारी छात्र कर सकेंगे। मध्य प्रदेश में संचालित तमाम पीएम श्री और सांदीपनी स्कूलों में नीट और जेईई कोचिंग दी जाएगी। इसकी शुरुआत इसी साल से होगी, जिसमें नवीं से बारह वीं तक के विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। यह शुरुआत होते ही उन गरीब परिवार के बच्चों के सपनों को उड़ान मिलेगी जो महंगी कोचिंग ज्वॉइन न करने के चलते अपने सपनों को कहीं न कहीं दबा देते हैं।
मध्यप्रदेश सरकार पीएम श्री और सांदिपनी स्कूल में कॉम्पिटिटिव अवेयरनेस और फाउंडेशन मॉडल के रूप में यह शुरूआत करने जा रही है। सरकारी स्कूलों में सबसे बड़ी समस्या कॉम्पिटिटिव एटमॉस्फियर की होती है। अधिकांश छात्र नीट और जेईई के बारे में सोचते तो हैं, लेकिन उन्हें उस स्तर के प्रतियोगिता की जानकारी नहीं होती, ना ही विषय का गहन ज्ञान होता। वर्तमान में, मध्यप्रदेश सरकार जो फाउंडेशन मॉडल शुरू कर रही है वह छात्रों को नीट और जेई के लिए रुचि विकसित करेगा और उनको विषय की स्पष्टता से रूबरू कराएगा। अभी फिलहाल नीट और जेईई की कोचिंग शुरू नहीं की जाएगी, लेकिन सूत्रों की मानें तो आगामी समय में स्कूल परिसर में ही नीट जेईई में रुचि रखने वाले छात्रों को विधिवत कोचिंग भी दी जाएगी।
प्रदेश सरकार के इस योजना की शुरुआत कक्षा नौवीं से होगी और यहां विज्ञान और गणित आधारित एप्टीट्यूड टेस्ट लेकर यह समझा जाएगा कि क्या छात्रों की नीति और जेईई में रुचि है और रुचि है, तो उनकी विषय में पकड़ कितनी है। बच्चों की बुनियाद कितनी मजबूत है। छात्रों को एमसीसी क्यू आधार पर टेस्ट दिए जाएंगे, उन्हें सॉल्व करने का तरीका समझाया जाएगा। 11वीं और 12वीं में मॉडल प्रश्नपत्र पूरी तरह नीट और जेई पर केंद्रित ही दिए जाएंगे। पढ़ाई को नीट और जेई एग्जाम के पैटर्न के अनुसार डिज़ाइन किया जाएगा। विद्यार्थियों के रुचि के आधार पर अतिरिक्त कक्षाएं भी लगाई जाएंगी। इस योजना में अभी फिलहाल उन स्कूल को शामिल किया जाएगा जहां स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब उपलब्ध है।इन सभी आधुनिक सुविधाओं का उपयोग करते हुए, यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। वर्तमान में प्रदेश में सुपर हंड्रेड योजना भी चल रही है, जिसमें टॉप परफॉर्मर सौ बच्चों को नीट और जेई की तैयारी कराई जाती है। लेकिन वर्तमान में की जा रही नई व्यवस्था इससे अलग होगी। नई व्यवस्था में नवीं क्लास से ही बच्चों मैं नीट और जेईई के प्रति जागरूकता पैदा की जाएगी। बच्चों को विषय की जानकारी दी जाएगी। करियर काउंसलिंग के माध्यम से उनका डॉक्टर और इंजीनियर बनने का मार्गदर्शन किया जाएगा। उनको विषय में मजबूत फाउंडेशन देने का प्रयास किया जाएगा।
अभी यह योजना पायलट प्रोजेक्ट की तरह शुरू की जाएगी और उसके आधार पर ही आगे विस्तृत तैयारी की जाएगी। इसके बाद अलग अलग चरणों में शामदीपनी, स्कूलों में इसे जोड़ा जाएगा।आईआईटी, एनआईटी और मेडिकल कॉलेज की विद्यार्थियों को मेंटर के रूप में भी इस योजना में जोड़े जाने पर विचार चल रहा है। आने वाले समय में छात्रों की रुचि को देखते हुए और छात्रों की संख्या को देखते हुए विस्तृत विषयवार कोचिंग भी छात्रों को प्रदान की जाएगी। इस साल से फाउंडेशन शुरू होगा और आने वाले कुछ समय में पूरी तैयारी गरीब छात्र सांदिपनी और पीएमसी स्कूल में कर सकेंगे। यह योजना उन गरीब परिवार के बच्चों के लिए मील का पत्थर साबित होगी, जो महंगी फीस न दे पाने के कारण नीट और जेईई की तैयारी नहीं कर पाते।