डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में मचे घमासान ने सिर्फ तेल और गैस संकट पैदा नहीं किया है, बल्कि इसका असर अब दवा जैसी जरूरी चीजों पर भी दिखने लगा है. ऊर्जा संकट की वजह से भारत की मुश्किल बढ़ रही है. भारत में गैस सप्लाई प्रभावित होने से पैरासिटामोल,विटामिन और हॉरमोंस जैसी जरूरी दवाओं के प्रोडक्शन में दिक्कत आने लगी है. अगर गैस की समस्या जल्द नहीं खत्म हुआ तो कई फार्मा कंपनियों को अगले 10 दिन में अपना प्रोडक्शन बंद करना पड़ सकता है. ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन का कहना है कि कच्चे माल की सप्लाई न होने से , शिपिंग कॉस्ट बढ़ने से, पैकेजिंग की समस्या बढ़ने से दवाओं की कीमतों में 10 से 20 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है. इस युद्ध की वजह से बुखार, डियबिटीज, इंफेक्शन, सांस की समस्या जैसी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की किल्लत हो सकती है.
ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है. जिसकी वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन टूट गई है. गैस का आयात-निर्यात बंद हो गया है. गैस संकट की वजह से भारत में LPG संकट का सामना करना पड़ रहा है. ये गैस संकट दवाओं के प्रोडक्शन को प्रभावित कर रहा है. जरूरी दवाओं के उत्पादन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. दरअसल दवाओं के प्रोडक्शन में प्रोपेन गैस इस्तेमाल होता है. फार्मा सेक्टर में प्रोपेन फ्यूल की तरह काम करता है, जिसका इस्तेमाल बॉयलर में होता है. वॉर की वजह से एलएनजी इंपोर्ट संकट में फंसा है. गुजरात, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की कई कंपनियों के पास सिर्फ अगले 10 दिन का स्टॉक बचा है. अगर ये संकट जल्द नहीं खत्म हुआ तो मुश्किल और बढ़ जाएगी।
तेल और गैस की कमी के चलते पैरासिटामोल, मेटफॉर्मिन, मेट्रोनिडाजोल, डाइक्लोफैनेक, फॉलिक एसिड और विटामिन सी जैसी दवाओं का प्रोडक्शन अटक रहा है. फार्माएक्ससिल के पूर्व चेयरमैन दिनेश दुआ की माने तो 200 के करीब दवा मैन्युफैक्चरर्स के पास अब स्टॉक नहीं बचा है और वो अगले 7 से 10 दिन में अपना प्रोडक्शन बंद कर सकते हैं. भारत वैश्विक फार्मा सप्लाई चेन का एक बड़ा सेंटर है. भारत की जेनेरिक दवाइओं का दबदबा है. जेनेरिक दवाओं में भारत की हिस्सेदारी 20 फीसदी की है. अमेरिका का सबसे बड़ा इंपोर्टर भी भारत ही है. लेकिन भारत का ये सेक्टर आयात पर निर्भर है. ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध की वजह से कच्चे सामान की किल्लत हो गई है, जिसके वजह से अब ये फार्मा सेक्टर मुश्किल में फंस गया है. दवा की तरह की डेयरी सेक्टर की भी मुश्किल बढ़ रही है. उनके पास पैकेजिंग की दिक्कत आ रही है. गैस संकट की वजह से दूध की पैकेजिंग मुश्किस हो रही है. महाराष्ट्र के डेयरी मालिकों का कहना है कि अगर गैस संकट जल्द खत्म नहीं हुआ तो उन्हें प्रोडक्शन रोकना पड़ जाएगा।
Indore fire tragedy a lesson; इंदौर के बंगाली चौराहे के पास स्थित एक कॉलोनी में बुधवार भोर में भीषण हादसा हो गया। एक मकान में इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। इस हादसे में आठ लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि 3 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। पुगलिया परिवार के घर के बाहर देर रात इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग पर लगी हुई थी। सुबह करीब 4 बजे चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे कार में आग लग गई। आग तेजी से फैलते हुए घर तक पहुंच गई और अंदर रखे गैस सिलिंडरों को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने के बाद घर में रखे सिलिंडरों में धमाके शुरू हो गए। पुलिस के अनुसार एक के बाद एक चार सिलेंडर फटे, जिससे मकान का एक हिस्सा ढह गया।
इस घटना के बाद हर कोई अचंभित है, हैरान है और हर व्यक्ति के मन में यह सवाल उठ रहा है कि इस भयावह हादसे का कारण क्या रहा होगा? तो आइए हम उन कारणों की भी गहन जांच करते हैं और साथ में यह उपाय ढूंढने का भी प्रयास करते हैं कि आने वाले समय में आपके घर में ऐसे हादसे न हो। हकीकत यह है कि हादसा जब होगा तो होगा ही, लेकिन यदि आपके कुछ उपाय मजबूत हो तो हादसा इतना भयावह न हो।इसे रोकने का प्रयास तो किया ही जा सकता है क्योंकि इस घटना में कई ऐसी छोटी लापरवाही सामने आई है जिसकी वजह से यह हादसा हुआ है या इस हादसे की प्रचंडता बढ़ी है।
जिस तरह की खबरें सामने आ रही हैं, वह बताती हैं कि बुगलिया परिवार ने अपनी इलेक्ट्रिक कार टाटा पंच रात में चार्जिंग के लिए लगाई थी और रात को चार्जिंग पर कार लगा के सो गए थे। यह एक प्रकार की लापरवाही है। रात में कार फुल चार्ज होने के बाद ओवरहीटिंग के चलते शॉर्ट सर्किट हो सकता है। कभी भी इस तरह से अपने इलेक्ट्रिक वाहन को रात में चार्ज पर लगाकर न सोएं। यह लापरवाही जिस तरह उगलिया परिवार के लिए जानलेवा साबित हुई है, उसी तरह आपके किसी परिवार के लिए भी जानलेवा साबित हो सकें। कार को या इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज पर लगाकर नहीं छोड़ना है। यह सावधानी आपको किसी भी दुर्घटना से बचा सकती है।
इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज करते समय जिस सॉकेट का और बोर्ड का प्रयोग किया गया था, संभवतः वह अच्छी हालत में नहीं था। वहां शॉर्ट सर्किट होने से तुरंत मेन मीटर पर आग पहुंच गई थी, जो पूरे मोहल्ले की सप्लाई वाले खंभे तक पहुंची। यह घटना साफ बताती है कि कहीं न कहीं इलेक्ट्रिक कार को जहां चार्जिंग के लिए लगाया गया था, वह बिल्कुल मेन लाइन के और मीटर के नजदीक था और वहां पर प्लग सॉकेट एयरलाइन सही हालत में नहीं थी। यदि आप के घर में कोई इलेक्ट्रिक सप्लाई या प्वाइंट खराब है तो उन्हें तुरंत सही करवा लें। यदि वहां से चिनगारी निकलने की कोई भी घटना हो रही हो तो उसे हल्के में ना लें।
इस पूरी घटना में एक बात यह भी निकल कर आई है कि फुगलिया परिवार जिस मकान में रह रहा था उसमें उन्होंने डिजिटल लॉक लगाए हुए थे।शॉर्ट सर्किट के बाद जब पावर सप्लाई बंद हुई तो डिजिटल लॉक ने काम करना बंद कर दिया और यही कारण रहा कि घर के लोग सुबह चार बजे आग की घटना देखकर जाग तो गए, लेकिन उन्हें घर से बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला।उनकी यह छोटी सी सुविधा, जिसमें उन्होंने डिजिटल लॉक प्रयोग किए थे, वह उनके लिए जानलेवा साबित हुई। यह घटना बताती है कि यदि घर में मैनुअल लॉक होते तो घर के लोग उन्हें खोलकर तुरंत बाहर निकल सकते थे। ज्यादा तकनीक के भरोसे रहना भी आपके लिए जानलेवा हो सकता है।
हम आजकल सुरक्षा को देखते हुए ऐसे घर बनाते हैं जिसमें निकासी का कोई दूसरा रास्ता नहीं होता।ज्यादातर घरों में चारों तरफ से बड़ी बड़ी ग्रिल्स लगा दी जाती हैं।चोरी और सुरक्षा के मद्देनजर घर को इतना खुफिया बनाया जाता है कि कोई उसमें घुस न सके और यह जरूरी भी है, लेकिन घर के निर्माण के समय यह बात भी ध्यान रखना चाहिए कि कोई बाहर से अंदर न आए, लेकिन किसी विषम परिस्थिति में घर के अंदर से बाहर जाने के लिए वैकल्पिक रास्ते हो। घर के निर्माण के समय इस बात का ध्यान नहीं रखा जाता बगलिया। परिवार के इस घर में बालकनी भी पूरी तरह पैक थी और घर में एक मेन गेट के अलावा कोई और निकासी का रास्ता नहीं था। घर का अत्यधिक पैग्ड और सुरक्षित होना भी इस घटना में कहीं न कहीं अधिक मौत का कारण बना है।
अभी हाल ही में ग्वालियर के बालाबाई के बाजार में लगी आग में आग भयंकर भड़की थी और कई घंटों तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका था, लेकिन इस दौरान छत के रास्ते से लोग निकलकर बगल के घर से सुरक्षित बच गए थे। ग्वालियर में जिस तरह से छत से बचकर निकलने का सुरक्षित विकल्प था, संभवतः पगलिया परिवार के घर में उनके छत से निकलने का भी विकल्प नहीं रहा होगा, जिसके चलते वे लोग घर में फंस गए। संभवतः यह प्रयास हमेशा होना चाहिए कि आपके घर से छत से अंदर आने का रास्ता सुरक्षित हो, लेकिन बाहर जाने का विकल्प हमेशा आपके परिवार के हर सदस्य के पहुंच में होना चाहिए ताकि विषम परिस्थितियों में वह छत के मार्ग से स्वयं का बचाव कर सके।
पगलिया परिवार के घर में जिस समय आग लगी वह सुबह का समय था, संभवतः यह कारण भी रहा होगा कि आग लगने के बाद काफी देर तक फैल गई होगी।उसके बाद पता चला होगा क्योंकि पुगलैया परिवार उसके आसपास के लोग गहरी नींद में सो रहे होंगे।घटना का सुबह के समय होना भी एक कारण हो सकता है जिसकी वजह से परिवार को पड़ोसियों की और प्रशासनिक मदद देर से मिली। क्योंकि घटना ऐसे समय होती है जब लोगों की निगाह में आ जाए तो लोगों की मदद से घटना की इंटेंसिटी को कम किया जा सकता है।
यह जानकारी भी सामने आ रही है के पुगलिया परिवार के घर में कई गैस सिलेंडर रखे हुए थे।गैस सिलेंडर या इस तरह की तमाम चीजों का घर में होना जो आग को और विकराल कर सकते हैं।यह भी आज के समय में एक समस्या बन चुकी है।कई घरों में इस तरह का इंटीरियर और फर्नीचर लगाया जाता है जो तुरंत आग पकड़ लेता है या आग को और भड़काता है और घर में ऐसे तमाम अन्य साधन भी उपयोग किए जाते हैं जैसे एयर कंडीशनर एलपीजी सिलेंडर और अन्य जो आग को भड़काने का काम करते हैं। इस तरह की तमाम चीजें भी आजकल आग की घटनाओं में भयावह परिणाम दे रही हैं।प्रयास यह करना चाहिए कि घर के इंटीरियर के समय ऐसी सामग्री प्रयोग किया जाए जो फायर रजिस्टेंस हो।
इंदौर में पुगलिया परिवार के साथ हुई घटना दुखद है। एक साथ एक ही परिवार में आठ लोगों की मौत होना और तीन लोगों का गंभीर रूप से अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होना पूरे परिवार और रिश्तेदारों के लिए अत्यंत दुखद घटना है और उन्हें इस घटना से बाहर निकलने में महीनों लग जाएंगे, लेकिन यह घटना एक सबक हो सकती है।इस घटना को कुछ दिनों में भूलने के बजाय, इस घटना से यह सीख लेने की जरूरत है कि हम अपने घर को किस तरह इस तरह की विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार कर सकते हैं। हम अपने घर में ऐसे क्या परिवर्तन कर सकते हैं जिससे ऐसी कोई घटना न हो और हो भी तो उससे बचने के विकल्प हमारे पास हों।
रीवा, मध्य प्रदेश: विंध्य क्षेत्र के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब Rewa Airport से सीधे रायपुर छत्तीसगढ़ के लिए नई हवाई सेवा की शुरुआत हो गई। पहली फ्लाइट ने मंगलवार को रीवा एयरपोर्ट से उड़ान भरकर विंध्य को छत्तीसगढ़ से सीधे जोड़ दिया। इस नई हवाई कनेक्टिविटी से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। दरअसल विंध्य और रीवा क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में नौकरी और व्यवसाय के सिलसिले में रहते हैं। अब तक उन्हें रेल मार्ग से करीब 14 से 15 घंटे की लंबी यात्रा करनी पड़ती थी, लेकिन इस हवाई सेवा के शुरू होने के बाद वही सफर महज लगभग एक घंटे में पूरा हो सकेगा।
नई हवाई सेवा से विंध्य क्षेत्र के व्यापार, पर्यटन और आवागमन को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। क्षेत्र के लोगों में इस नई कनेक्टिविटी को लेकर खासा उत्साह देखा गया। पहली उड़ान के यात्रियों और स्थानीय लोगों ने इसे विंध्य और रीवा के लिए बड़ी सौगात बताया। आपको बता दें कि पिछले कुछ सालों में हवाई सेवाओं में मध्यप्रदेश विकास की ओर अग्रसर है। कई नए शहरों में हवाई सेवाओं का विस्तार किया गया है। रीवा भी उन्हीं में से एक है।
इस सेवा का शुभारंभ केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने वर्चुअल माध्यम से किया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला भी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने इस ऐतिहासिक अवसर पर पहली उड़ान में यात्री के रूप में भी सफर किया। नई हवाई सेवा शुरू होने से विंध्य क्षेत्र के लोगों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का नया विकल्प मिल गया है, जिससे क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
भोपाल मध्य प्रदेश: अपने बेतुके और विवादित बयानों से हमेशा सुर्खियां बटोरने वाली भ्रष्ट तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। हालांकि मुश्किलों में आने के तमाम कारनामे तो वे हमेशा करती रही हैं लेकिन एक ऐसा घोटाला उन्होंने किया जिसके चलते अब उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। यह वही बहुचर्चित तहसीलदार हैं जिन्होंने सबसे पहले कौन बनेगा करोड़पति में इनाम राशि जीतकर सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन उसके बाद उन्हें सुर्खियां बटोरने की ऐसी लत लगी कि वे सोशल मीडिया पर अनावश्यक अनर्गल टिप्पणियाँ करने लगीं।
अमिता सिंह तोमर वर्तमान में श्योपुर में तहसीलदार हैं और श्योपुर में रहते हुए ही उन्होंने ऐसा कारनामा किया जिसके चलते वह मुश्किलों में फंस गई। हालाँकि उन्होंने इन मुश्किलों से बचने के लिए न्यायालय की शरण ली, लेकिन कहीं पर भी उन्हें राहत नहीं मिली और वह बढ़ते बढ़ते माननीय सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें राहत नहीं दी है। और अब ऐसा बताया जा रहा है के उन्हें कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। अनाप शनाप टिप्पणी करने वाली बेतुके बयान देने वाली और गड़बड़ झारा करने वाली इस तहसीलदार ने ऐसा क्या किया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इनको राहत नहीं दी।आइए समझते हैं।
मामला श्योपुर का ही है। 2021 का है। आपको जानकारी होगी के पूरे ग्वालियर। चंबल अंचल में भीषण बाढ़ उस वर्ष आई थी और बाढ़ के बाद मध्यप्रदेश शासन ने तमाम हितग्राहियों को राहत राशि की घोषणा की थी। उस समय भ्रष्ट तहसीलदार कंट्रोवर्सी क्वीन अमिताभ सिंह तोमर श्योपुर जिले के तहसील बड़ौदा में तहसीलदार थीं। इस तहसील में भी 794 हितग्राहियों को राहत राशि दी जानी थी, लेकिन अमिता सिंह तोमर ने बड़ा खेल कर दिया और 2.57 करोड़ की राहत राशि फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दी। करोड़ों का यह गबन जब खुला तो वरिष्ठ अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
बाढ़ पीड़ितों की राहत राशि में हुए करोड़ों रुपए के गबन के इस मामले में भ्रष्ट तत्कालीन बड़ौदा तहसीलदार अमिताभ सिंह तोमर पर मामला दर्ज हुआ था और वह जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने उनकी अग्रिम याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। इस आदेश से स्पष्ट होता है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने भी जमानत से इनकार किया है, तो अब भ्रष्टाचार के इस मामले में अमिता सिंह गिरफ्तार हो सकती है। देखना होगा कि मध्यप्रदेश की कथित कर्मठ पुलिस अब अमिता सिंह को कब तक गिरफ्तार कर पाती है।
2.57 करोड़ की राशि बाढ़ पीड़ितों को न देते हुए तहसीलदार के साथ तमाम अन्य लोगों ने बंदरबांट कर ली थी। कुल 110 लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया गया है। इसमें अमिता सिंह तोमर का भी नाम शामिल है। बड़ौदा, वीरपुर विजयपुर में तहसीलदार के रूप में कार्य कर चुकी हैं। अपने पालतू कुत्ते की समाधि बनाकर उन्होंने सुर्खियों में रहने की अपनी ललक का परिचय दिया था। इसी प्रकार कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री प्रियंका गांधी पर भी अशोभनीय टिप्पणी कर कर कंट्रोवर्सी क्वीन अमिता सिंह ने सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन अब ऐसा लगता है कि अमिताभ सिंह का सुर्खियों का घड़ा भर चुका है और भ्रष्टाचार का भी!
ग्वालियर मध्य प्रदेश: लगातार हो रही मौत के चलते पूरे देश में कुख्यात ग्वालियर इटावा नेशनल हाईवे 719 चौड़ीकरण का काम अभी भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। द इंगलेज पोस्ट ने जो जानकारी जुटाई है। उसके अनुसार यह पूरा साल केवल डीपीआर और और भूमि अधिग्रहण में ही लग जाएगा। तमाम मौत और आंदोलन के बाद भी यह हाईवे कागजी कार्रवाइयों में उलझा हुआ है और इसकी फाइल एक विभाग से दूसरे विभाग में घूम रही है। पहले ये हाईवे एनएचएआई को बनाना था उसके बाद यह काम एमपीआरडीसी को दे दिया गया लेकिन अब एनएचएआई ने इस प्रोजेक्ट को फिर से अपने हाथ में ले लिया है और अब इसका निर्माण एनएचएआई द्वारा किया जाएगा। मतलब दो हजार पच्चीस तो यह निर्णय लेने में ही लग गया कि कौन सी एजेंसी इसका निर्माण कराएगी। इसके बाद भी अभी इस हाइवे के चौड़ीकरण का काम खटाई में पड़ सकता है। जो सबसे बड़ी रुकावट है उसकी जानकारी भी मिली है।
आपको बता दें कि लगातार हो रहे हादसों और उनमें मौत को लेकर ग्वालियर इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग 719 सुर्खियों में है। पूरे देश में राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने के बड़े बड़े दावे विभाग के मंत्री नितिन गडकरी द्वारा समय समय पर किए जाते हैं। लेकिन ग्वालियर भिंड के बीच मौतों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है और लगता है कि यह जानकारी एनएचआई के जिम्मेदारों द्वारा संबंधित विभाग के संवेदनशील मंत्री नितिन गडकरी को नहीं दी जा रही है। यही कारण है कि चुटकियों में दस बीस हजार करोड़ के हाइवे बनाने का दावा करने वाले मंत्री के होते हुए भी ग्वालियर इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग का काम लटका हुआ है। अभी तक इसे बनाये जाने की डीपीआर तक तैयार नहीं हुई है। डीपीआर तैयार होने और भूमि अधिग्रहण में ही यह एक साल और निकल जाएगा और इसके बाद भी इस चौड़ीकरण में और देरी अन्य कारणों से हो सकती है।
एनएचआई प्रोजेक्ट मैनेजर उमाकांत मीणा का कहना है कि यह फाइल अब एनएचएआई के पास है। अभी इसकी डीपीआर तैयार की जा रही है। उनके अनुसार यह डीपीआर अप्रैल तक तैयार होने की संभावना है और डीपीआर के बाद में भूमि अधिग्रहण के लिए सबसे पहले सर्वे होगा। उसके बाद अधिग्रहण में क्या मुआवजा दिया जाना है वह सब तय होगा तब ही भूमि अधिग्रहण हो सकेगा। इसके चलते यह पूरा साल ऐसे ही निकल जाएगा। इसके अलावा उनका यह भी कहना है कि यदि सरकार पैसा खर्च करे तो यह कार्य समय पर शुरू हो सकता है और यदि इसका निर्माण कार्य पीपी मोड पर कराया गया तो इस प्रोजेक्ट में और देरी हो सकती है। मतलब साफ है कि मौत के हाईवे के नाम से बदनाम हो चुके इतने लोगों की मौत की वजह बन चुके इस हाइवे के चौड़ीकरण को लेकर न तो एनएचएआई गंभीर है और न ही शायद सरकार।
आपको बता दें कि पिछले दो महीने में ही इस हाइवे पर तमाम भीषण दुर्घटनाएं हुई हैं और यहाँ दुर्घटनाओं में अभी तक पच्चीस लोगों की मौत हो चुकी है। इस हाइवे पर होने वाली भीषण दुर्घटनाओं को देखते हुए यहां के क्षेत्रीय निवासियों और ग्वालियर भिंड के लोगों ने कई बार आंदोलन तक किए है। लगातार हो रही दुर्घटनाओं से आक्रोशित होकर पिछले साल संत समाज भूतपूर्व सैनिकों और क्षेत्रीय लोगों ने 10 दिन तक आंदोलन किया था। उस आंदोलन के बाद ऐसा लगने लगा था कि शायद सोई हुई सरकार जाग जाएगी और एनएचएआई के गैर जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं रेंगेगी और वह गंभीरता से इस प्रोजेक्ट की फाइल को आगे बढ़ाएंगे। लेकिन हैरानी की बात है कि पिछले साल आन्दोलन में दिए गए आश्वासन के बाद तक अभी ये ही तय नहीं हो सका कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण का कार्य कौन सी एजेंसी करेगी। और अब जाकर यह तय हो सका है कि एमपीआरडीसी नहीं बल्कि एनएचएआई ही इसका निर्माण कराएगी।
जिस तरह से नेशनल हाईवे 719 के चौड़ीकरण के काम में जिम्मेदार विभाग लेट लतीफी कर रहा है। उससे ऐसा लगता है कि विभाग के यह जिम्मेदार अधिकारी अभी और मौत का इंतजार कर रहे हैं और इनकी लेट लतीफी से हुई अन्य मौतों के लिए इन्हें ही दोषी क्यों न माना जाए। यह सवाल भी अब उठने लगे हैं। इस हाईवे का काम युद्धगति से होना चाहिए क्योंकि जितना विलंब इसके निर्माण में होगा उतनी ही अन्य दुर्घटनाओं और मौतों का खतरा जब तक बना हुआ है। यदि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी तमाम जगह करने वाले दावों की तरह इस हाइवे के लिए भी दावा कर दें तो हो सकता है कि अगले एक साल में निर्माण कार्य शुरू ही नहीं बल्कि खत्म भी हो जाए। क्योंकि उनका दावा है कि एक दिन में वर्तमान स्थिति में 29 से 38 किलोमीटर हाइवे बन रहा है और उनका लक्ष्य तो यह सीमा सौ किलोमीटर हाइवे निर्माण प्रतिदिन बढ़ाने की है। अब उनका यदि यह लक्ष्य है तो फिर आप ही समझें कि यह हाईवे कितने कम समय में बन सकता है और एनएचएआई के जिम्मेदार इसमें लेट लतीफी क्यों कर रहे हैं?
मुंगेली /रायपुर छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के डिप्टी CM अरुण साव के गृह जिले मुंगेली में महिला सब इंजीनियर के साथ अधिकारियो की प्रताड़ना का मामला सामने आया है। मुंगेली में RES विभाग की महिला सब इंजीनियर सोनल जैन ने जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पाण्डेय और अन्य अधिकारियो पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। RES विभाग मुंगेली में पदस्त महिला सब इंजीनियर सोनल जैन ने अपने फेसबुक पर कई भावुक पोस्ट लिखें है। जिसमे महिला सब इंजीनियर सोनल जैन ने नियम विरुद्ध संलग्ननिकारण और प्रताड़ित करने का भी जिक्र किया है।
द इंगलेज पोस्ट के पास सोनल जैन का एक रिकॉर्डेड वीडियो स्टेटमेंट भी है जिसमें उन्होंने बताया है कि बिना किसी आधार पर जिला पंचायत के आदेश के माध्यम से उनका संलग्निकरण जनपद पंचायत मुंगेली से RES डिवीजन ऑफिस मुंगेली कर दिया गया है। लेकिन जब महिला सब इंजीनियर ने अपने अधिकारियों से इस सम्बंध में चर्चा की तो उन्हें अधिकारियो द्वारा मौखिक रूप से बताया गया कि उनके ऊपर राजनैतिक प्रेसर है। जिसके कारण महिला सब इंजीनियर को जनपद पंचायत मुंगेली से हटाकर RES डिवीजन ऑफिस मुंगेली में संलग्न किया गया है। इस कार्यवाही का विरोध करने पर महिला सब इंजीनियर सोनल जैन को अलग अलग माध्यमों से राजनैतिक और अधिकारी वर्ग के लोगों द्वारा मैसेज एवं अन्य माध्यमों से प्रताड़ित किया जा रहा है।
पूरे मामले में दिलचस्प बात यह है कि महिला सब इंजीनियर ने गलत संलग्निकरण की जानकारी जब RTI के माध्यम से मांगी तो महिला सब इंजीनियर सोनल जैन को विभाग की तरफ से अभी तक कोई भी जानकारी नहीं दी गई है। पूरे मामले को लेकर महिला सब इंजीनियर ने गलत संलग्निकरण और प्रताड़ना के तहत न्यायालय का रुख अपनाने की बात कही है। महिला सब इंजीनियर द्वारा सोसल मीडिया फेसबुक पर छत्तीसगढ़ शासन के संलग्निकरण आदेश की कॉपी शेयर की है। साथ ही पूरे मामले को लेकर उनके असंवैधानिक और गलत तरीके से किए गए संलग्निकरण आदेश को भी शेयर किया गया है। अब देखना ये होगा कि छत्तीसगढ़ में महिला सम्मान और महिला शासक्तिकरण की मिशाल पेश करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चहेते मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुंगेली के माटी पुत्र डिप्टी CM अरुण साव महिला सब इंजीनियर सोनल जैन क़ो प्रताड़ित करने के मामले में शासन के अतरंगी सिस्टम की सतरंगी बदनामी करवाने वाले अधिकारियो के खिलाफ क्या कार्यवाही करते है।
ग्वालियर मध्य प्रदेश: जीवाजी विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी ने सेंट्रल लाइब्रेरी की बिल्डिंग से कूदकर आत्महत्या कर ली है। यह कर्मचारी अंगज जाटव माली के रूप में काम करता था।लाइब्रेरी के कर्मचारियों ने बताया कि अंगद पिछले कुछ दिनों से तनाव में चल रहा था। हालांकि तनाव को लेकर कई वजह सामने आ रही हैं लेकिन एक कारण यह भी निकल कर आ रहा है कि उसका स्थानांतरण सेंट्रल लाइब्रेरी से दूसरे विभाग में कर दिया गया था लेकिन उस विभाग में उसे ज्वाइनिंग नहीं मिल रही थी। हालांकि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है लेकिन जीवाजी विश्वविद्यालय प्रबंधन इस बारे में कोई भी जानकारी देने से बच रहा है।
आपको बता दें कि अभी हाल ही में जीवाजी विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कर्मचारियों के स्थानांतरण कर उनके विभाग बदले थे। अंगद जाटव भी इसी स्थानान्तरण वाली सूची में शामिल था। अंगद को लाइब्रेरी से हटा कर अन्य विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया था लेकिन उसे दूसरे विभाग में ज्वाइन भी नहीं करवाया गया था। इससे परेशान होकर शाम 4 बजे वह सेंट्रल लाइब्रेरी के भवन से कूद गया। अन्य साथी कर्मचारियों ने जब उसे नीचे घायल अवस्था में देखा तो तुरंत नजदीकी आरोग्यधाम अस्पताल पहुँचाया। उसकी गंभीर हालत देखकर उसे ट्रॉमा सेंटर भेज दिया गया जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने आत्महत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस पूछताछ में भी अंगद के तनाव में रहने की जानकारी सामने आई है। लेकिन इस पूरे मामले में जीवाजी विश्वविद्यालय प्रबंधन खामोश है।एक कर्मचारी के मौत के बाद प्रबंधन किसी भी तरह का जवाब नहीं दे रहा है। प्रबंधन की तरफ से न तो मौत की पुष्टि की गई है ना ही संवेदना व्यक्त की गई है। विश्वविद्यालय प्रबंधन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में विश्वविद्यालय का पक्ष नहीं रख रहा है। स्थानांतरण के बाद जॉइनिंग न देना कहीं न कहीं विश्वविद्यालय प्रबंधन की लापरवाही भी उजागर कर रहा है।
मुरैना, मध्य प्रदेश: मध्यप्रदेश बोर्ड की 10वीं की परीक्षा मंगलवार को आयोजित की गई थी। मुरैना में गणित का पेपर दे रही एक छात्रा को परीक्षा के दौरान ही अचानक दिल का दौरा पड़ गया। उसकी हालत बिगड़ गई उसे तुरंत ग्वालियर के लिए रेफर किया गया लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। एक इतनी कम उम्र की छात्रा की हार्ट अटैक से मौत की घटना पर हर कोई हैरान है। परिजन बताते हैं कि वह पूरी तरह स्वस्थ थी और अब हार्ट अटैक के कारण को लेकर कई गंभीर आरोप परिजन लगा रहे हैं। छात्रा का शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
छात्रा के हार्ट अटैक की यह घटना बानमोर स्थित पंडित नेहरू कालेज भाग दो परीक्षा केंद्र की है। मंगलवार को गणित की परीक्षा चल रही थी। केंद्र की तीसरी मंजिल पर सोलह वर्षीय छात्रा वर्षा कुशवाह परीक्षा दे रही थी। सब कुछ सामान्य था लेकिन एक बात निकलकर आ रही है कि यह केन्द्र नकल कराए जाने को लेकर चर्चाओं में था और यही देखते हुए तहसीलदार के नेतृत्व में फ्लाइंग स्कॉट टीम परीक्षा केन्द्र पर चेकिंग करने पहुंची थी। फ्लाइंग स्कॉड की टीम ने छात्रा से भी नकल को लेकर कुछ सवाल किए थे जिनके सवाल सुनकर छात्रा घबरा गई और बेहोश होकर वहीं गिर गई। वहाँ परीक्षा आयोजकों ने जब देखा तो तुरंत केंद्र के बाहर खड़े लोगों को सूचना दी और छात्रा वर्षा के भाई सतीश और अंकुश कुशवाह उसे बामोर से ग्वालियर के लिए इलाज के लिए लेकर निकले लेकिन रास्ते में ही छात्रा वर्षा कुशवाह की मौत हो गई।
कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने कहा, ‘छात्रा की मौत काफी दुःखद है। मैंने खुद ग्वालियर के डॉक्टरों से इस मामले में संपर्क किया है। प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर अभी सिर्फ यह सामने आया है कि छात्रा अतिकुपोषित थी। गंभीर एनीमिया से भी पीड़ित थी। इस कारण संभवतः हार्ट अटैक आया होगा। स्पष्ट कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आएगा
आपको बता दें कि वर्षा कुशवाह अपने परिवार के साथ ग्वालियर में रहती हैं। वर्षा देवेंद्र कुशवाह की पुत्री है। ग्वालियर के जखारा क्षेत्र में रहते हुए भी उन्होंने मुरैना से परीक्षा क्यों दिलवाई थी? इस बारे में कोई जानकारी निकल कर सामने नहीं आई है। परीक्षा केन्द्र पर क्या हुआ था इस बारे में भी परीक्षा केंद्र के जिम्मेदार ज्यादा जानकारी नहीं दे रहे हैं। लेकिन एक सोलह साल की बच्ची की मौत हार्ट अटैक से होना कई सवाल खड़े करती है। अभी तक युवाओं और बच्चों में हार्ट अटैक के कई मामले चर्चाओं में रहे हैं लेकिन परीक्षा के दौरान हाट अटैक आने की सम्भवतः यह पहली घटना है।
जबलपुर मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के जबलपुर-भोपाल नेशनल हाईवे पर रेलवे ओवरब्रिज गिरने से बड़ा हादसा हो गया। यहां शाहपुरा के पास रेलवे ओवर ब्रिज का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया। NH-45 पर हुए इस हादसे के बाद ट्रैफिक जाम हो गया। गनीमत रही कि हादसे के वक्त ब्रिज के पास कोई गाड़ी खड़ी नहीं थी। जहां ओवर ब्रिज टूट कर गिरा है, उसके पास ही रेलवे क्रॉसिंग हैं। यह ब्रिज रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर ही बनाया गया है। दिसंबर महीने में इसी ब्रिज का एक और हिस्सा भी टूटकर गिरा था। एमपी की राजधानी भोपाल को जबलपुर से जोड़ने वाले एनएच-45 पर हादसे के बाद जाम के हालात बन गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लगातार ब्रिज की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे थे। इस घटना ने पीडब्ल्यूडी और मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के कामकाज की असलियत उजागर कर दी है। गौरतलब है कि भोपाल में बने 90 डिग्री ब्रिज के निर्माण को लेकर भी प्रदेश के पीडब्ल्यूडी की देशभर में किरकिरी हुई थी। अब जबलपुर का यह हादसा एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यह घटना न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रही है बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी बड़ा सवाल छोड़ गई है।
यह ओवरब्रिज जबलपुर को भोपाल से जोड़ता है और करीब चार साल पहले ही तैयार हुआ था। बांगड़ कंपनी ने इसका निर्माण कराया था और 391 करोड़ रुपये इसकी लागत आई थी। इसका निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था और 2022 में काम पूरा हुआ था। ब्रिज का एक हिस्सा कई महीनों से क्षतिग्रस्त था, जिस कारण यातायात केवल एक हिस्से से संचालित हो रहा था। अब दूसरा हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो जाने से स्थिति गंभीर हो गई है।
भोपाल मध्य प्रदेश: एक और जहां मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार अपने दो वर्ष पूरे होने का गुणगान कर रही है और कई उपलब्धियाँ गिना रही हैं तो वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक मीडिया हाउस से चर्चा करते हुए भाजपा के दो साल के कार्यकाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि भाजपा ने घोषणापत्र में जो वादे किए थे उन्हें दो वर्ष में भी पूरा नहीं कर पाई है। अगर प्रदेश आत्मनिर्भर और सक्षम हो रहा है तो कर्ज की आवश्यकता ही नहीं है। प्रदेश की जनता को वर्ष दो हजार सैंतालीस के सपने दिखाने की जगह आज सरकार क्या कर रही है?क्या सरकार ने रियायतें दी? ऐसे तमाम सवालों के साथ उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आगे आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा कि कागजों में योजना बना ली जाती हैं पर उनके लिए बजट रखा ही नहीं जाता। जब बजट ही नहीं रहेगा तो क्या होगा जिसकी जितनी हिस्सेदारी उसकी उतनी भागीदारी इस आधार पर सरकार बजट रखेगी तो धरातल पर योजनाएं दिखेंगी। वर्तमान सरकार पूरी तरह विफल है लेकिन उनकी विफलताएं गिनाने पर वह कांग्रेस से पूछती हैं कि पन्द्रह महीने में कांग्रेस ने क्या बदल दिया। कांग्रेस की सरकार आई थी तो किसानों की कर्जमाफी का वादा तुरंत पूरा किया था।
जनता के मुद्दे उठाने के मामले में उमंग सिंघार ने कहा कि सदन में कम बैठकों की वजह से विपक्ष को जनता की आवाज़ उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है। हमारी पहली कोशिश यही है कि बैठकों की संख्या बढ़ाई जाए।सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बचना चाहती है। विपक्ष की बात सुनने का सरकार के पास समय नहीं है वह सिर्फ अपना बिजनेस करना चाहती है।सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर समय देना नहीं चाहती ध्यान आकर्षण और लोक महत्व के विषय विधायकों ने लगाए पर उन पर जवाब नहीं देना चाहती।
अभी हाल ही में जिस तरह से विधानसभा में अब मर्यादित शब्दों का प्रयोग हुआ उस पर उमंग सिंघार ने कहा कि लोकतंत्र के मंदिर में ऐसा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए सरकार चर्चा नहीं करना चाहती और वह भी डराकर।वह विपक्ष को नहीं देश की जनता को डराना चाहती है उसकी आवाज बंद करना चाहती है।यह प्रदेश की जनता का अपमान है।