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पर्यटन महकेगा तो विकास चहकेगा, माफिया, अपराध, रोजगार जैसी समस्याओं को विराम लगेगा

रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव कि जो थीम है वह वास्तव में क्षेत्र की क्षमताओं को चरितार्थ करती है। टाइमलेस ग्वालियर, इकोज ऑफ कल्चर, स्पिरिट ऑफ़ लिगेसी.. यह थीम अपने आप में एक पूरा पर्यटन का अध्याय समेटे हुए वक्त है के इस थीम पर एक विस्तृत आलेख जमीन पर उतरे और हकीकत बन जाए और

काफी साल पुरानी बात है जब एक वरिष्ठ आईएएस ने मुझसे कहा था इंगले साहब सब कुछ संभव है। कमी है तो केवल इच्छा शक्ति ही कागजों पर बहुत काम होते हैं लेकिन उनको धरातल पर लाने के लिए जो इच्छाशक्ति चाहिए उस इच्छा शक्ति की कमी क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों में है और साथ ही अधिकारियों में भी। उनकी उसी चर्चा के दौरान जो भी कुछ अभी स्मरण है उस आधार पर आज होने जा रहे रीजनल टूरिजम काॅनक्लेव के विषय पर चिंतन करूं तो ऐसा लगता है कि यह कंक्लेव कागज के फूल हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या इन कागज के फूल क्षेत्र को पर्यटन की खुशबू से महका पाएंगे? 

रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव कि जो थीम है वह वास्तव में क्षेत्र की क्षमताओं को चरितार्थ करती है। टाइमलेस ग्वालियर, इकोज ऑफ कल्चर, स्पिरिट ऑफ़ लिगेसी.. यह थीम अपने आप में एक पूरा पर्यटन का अध्याय समेटे हुए वक्त है के इस थीम पर एक विस्तृत आलेख जमीन पर उतरे और हकीकत बन जाए और पर्यटन के क्षेत्र में दबी हुई अपार संभावनाओं का ऐसा खजाना निकले कि क्षेत्र की तमाम समस्याओं को शून्य कर दे।

जब पर्यटन के विकास को क्षेत्र की समस्याओं से जोड़ने की बात कर रहा हूं तो आप सोच सकते हैं कि कहीं यह दिन में सपने देखने जैसी बात तो नहीं है क्योंकि समस्याएं अपनी जगह हैं पर्यटन का विकास अपनी जगह लेकिन मैं समझता हूं कि ये इस कदर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं कि आप यकीन मानिए। यदि क्षेत्र में पर्यटन का विकास होता है तो दूसरे कई समस्याओं पर स्वतः ही विराम लग जाएगा। ग्वालियर पर्यटन में समृद्ध है। ग्वालियर और इसके आस-पास के तमाम जिलों में ऐसे कई ऐतिहासिक स्थल हैं जिन्हें सही रूप से प्रसारित करने की आवश्यकता है। ग्वालियर के आस-पास के प्राकृतिक स्थल भी अपने आप में सौंदर्य समेटे हुए हैं। इन्हें भी विकसित करके पर्यटकों के लिए सहज बनाने की आवश्यकता है। 

ग्वालियर में सबसे बड़ी समस्या है पलायन युवक पढ़ लिखकर पलायन कर रहे हैं कर्नाटक जा रहे हैं गुजरात जा रहे हैं महाराष्ट्र जा रहे हैं दिल्ली एनसीआर? जा रहे हैं। कारण है कि क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं कम नजर आती है और यदि रोजगार की संभावनाएं कम हैं तो कुछ ऐसे भी युवा हैं। जो संभवत यदि बाहर नहीं जा पाए तो क्षेत्र में ही ठेकेदारी पत्थर। रेत मुरम जैसे तमाम कार्यों में जुट जाते हैं और पैसों की लालच में धीरे धीरे अवैध कामों में संलिप्त होकर माफिया।की समस्या को जन्म देते हैं। अच्छा खासा पैसा कमाकर अच्छा जीवन जीने का अधिकार सभी को है। अब जब कोई विकल्प ही नहीं तो फिर क्षेत्र के संसाधनों का। दोहन कर रेत माफिया बन पत्थर माफिया बंद शिक्षा। माफिया बंद पेट पालना इन युवाओं की मजबूरी बन जाती है। पर्यटन एक ऐसा क्षेत्र है जो इन युवाओं के लिए अपार संभावनाओं से भरा हुआ है यदि पर्यटन का क्षेत्र व्यवस्थित रूप से विकसित होता है तो इन। युवाओं को अवसर मिलेंगे और यह अनेक और अवैध कार्यों की तरफ नहीं बढ़ेंगे। 

पर्यटन का विकास क्षेत्र की एक बहुत बड़ी आवश्यकता है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो लंबे समय तक है। प्रगति कर आने वाले समय में पूरे अंचल को आर्थिक रूप से समृद्ध बना सकता है। लेकिन सवाल यही उठता है कि क्या पर्यटन के विकास की यह बातें केवल इस? रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव तक सीमित रह। जाएँगी या वास्तव में इन्हें धरातल पर लाने की इच्छा शक्ति भी उन। लोगों में है जो यहां मंच से बड़ी बड़ी बातें कर रहे हैं और कागजों पर बड़े बड़े प्रोजेक्ट्स बना रहे हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सबसे बड़ी आवश्यकताएं जो क्षेत्र की जरूरत है उनकी ओर जमीनी स्तर पर काम करने की आवश्यकता है। क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की आवश्यकता है जिसमें रहने के लिए अच्छे होटल्स अच्छी सुविधाएं बहुत जरूरी है। आज यदि कहीं पांच सौ वीआईपी बीस शहर में आ जाते हैं तो अच्छे होटल्स उपलब्ध नहीं हो पाते हैं।

पर्यटन स्थल को कितना भी अच्छा बना लें। लेकिन यदि उन सुदूर क्षेत्रों तक या बड़े शहरों के मुख्यालय तक भी यदि कनेक्टिविटी की समस्या है तो पर्यटक पर्यटन स्थल पर पहुंच ही नहीं पाएंगे हम बात करें। तो ग्वालियर और आस-पास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी एक बड़ी समस्या है। बाहर से ग्वालियर तक पर्यटक आए उसके लिए। कनेक्टिविटी और मजबूत की जानी चाहिए। हालांकि तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयास से ग्वालियर में एक बेहतरीन हवाई अड्डा तो बन गया लेकिन अभी भी यहाँ पर फ्लाइट्स। का क्राइसिस है। तमाम शहरों से डायरेक्ट फ्लाइट्स नहीं है फ्लाइट्स? की संख्या कम है। दूसरा रेलवे स्टेशन का निर्माण कार्य कछुआ। गति से चल रहा है। कई क्षेत्रों से यहां पर ट्रेन की कनेक्टिविटी भी एक समस्या है। इसके बाद सबसे बड़ी समस्या आती है। रोड कनेक्टिविटी की पूरे क्षेत्र में रोड इतने जर्जर हालात में हैं और कई सुदूर क्षेत्रों में तो रोड बहुत ही है। आगमन्य है। इसके चलते पर्यटकों ऐसे पर्यटन स्थलों पर पहुंचना मुश्किल है ग्वालियर मुरैना भिंड शिवपुर शिवपुरी छतरपुर ऐसा पूरा एक। क्षेत्र है जहां के पर्यटन स्थलों को जोड़ते हुए सड़कों का एक बेहतरीन जाल बुने जाने की आवश्यकता है। साथ ही पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एक विशेष एजेंसी की स्थापना भी की जाए। जिनका कार्य केवल पर्यटकों को सुरक्षित माहौल देना और किसी भी विषम परिस्थिति में पर्यटकों के पास पहुंचकर उन्हें सुरक्षा प्रदान करना हो। 

पर्यटन मैं अत्यंत संभावनाओं के बावजूद इस क्षेत्र के पर्यटन स्थल वीरान हैं सुनसान हैं अब रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के रूप में एक रोशनी की किरण दिखाई दे रही है लेकिन प्रयास यह किया जाना चाहिए कि इस कॉन्क्लेव में न केवल गंभीर चर्चा हो लेकिन जल्द से जल्द इसे जमींपों का उतारकर हकीकत में। ग्वालियर चंबल अंचल को देश के अग्रणी टूरिस्ट। क्षेत्र के रूप में पहचान दिलाई जाए और यहां पर लाखों टूरिस्ट आए इसके लिए समुचित व्यवस्था की जाए। 

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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