भोपाल मध्यप्रदेश: क्या आप एक गरीब परिवार से हैं और डॉक्टर इंजीनियर बनना चाहते हैं, लेकिन नीट और जेईई की कोचिंग की फीस नहीं भर सकते?तो यह खबर आपके लिए है, क्योंकि अब हर गरीब परिवार का बच्चा नीट और जे ई ई की तैयारी कर पाएगा और उसको महंगी फीस भी नहीं देनी होगी। शिक्षा के क्षेत्र में मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए एक अनोखी शुरुआत की है। अब स्कूल स्तर पर ही नीट और जेई की तैयारी छात्र कर सकेंगे। मध्य प्रदेश में संचालित तमाम पीएम श्री और सांदीपनी स्कूलों में नीट और जेईई कोचिंग दी जाएगी। इसकी शुरुआत इसी साल से होगी, जिसमें नवीं से बारह वीं तक के विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। यह शुरुआत होते ही उन गरीब परिवार के बच्चों के सपनों को उड़ान मिलेगी जो महंगी कोचिंग ज्वॉइन न करने के चलते अपने सपनों को कहीं न कहीं दबा देते हैं।
मध्यप्रदेश सरकार पीएम श्री और सांदिपनी स्कूल में कॉम्पिटिटिव अवेयरनेस और फाउंडेशन मॉडल के रूप में यह शुरूआत करने जा रही है। सरकारी स्कूलों में सबसे बड़ी समस्या कॉम्पिटिटिव एटमॉस्फियर की होती है। अधिकांश छात्र नीट और जेईई के बारे में सोचते तो हैं, लेकिन उन्हें उस स्तर के प्रतियोगिता की जानकारी नहीं होती, ना ही विषय का गहन ज्ञान होता। वर्तमान में, मध्यप्रदेश सरकार जो फाउंडेशन मॉडल शुरू कर रही है वह छात्रों को नीट और जेई के लिए रुचि विकसित करेगा और उनको विषय की स्पष्टता से रूबरू कराएगा। अभी फिलहाल नीट और जेईई की कोचिंग शुरू नहीं की जाएगी, लेकिन सूत्रों की मानें तो आगामी समय में स्कूल परिसर में ही नीट जेईई में रुचि रखने वाले छात्रों को विधिवत कोचिंग भी दी जाएगी।

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प्रदेश सरकार के इस योजना की शुरुआत कक्षा नौवीं से होगी और यहां विज्ञान और गणित आधारित एप्टीट्यूड टेस्ट लेकर यह समझा जाएगा कि क्या छात्रों की नीति और जेईई में रुचि है और रुचि है, तो उनकी विषय में पकड़ कितनी है। बच्चों की बुनियाद कितनी मजबूत है। छात्रों को एमसीसी क्यू आधार पर टेस्ट दिए जाएंगे, उन्हें सॉल्व करने का तरीका समझाया जाएगा। 11वीं और 12वीं में मॉडल प्रश्नपत्र पूरी तरह नीट और जेई पर केंद्रित ही दिए जाएंगे। पढ़ाई को नीट और जेई एग्जाम के पैटर्न के अनुसार डिज़ाइन किया जाएगा। विद्यार्थियों के रुचि के आधार पर अतिरिक्त कक्षाएं भी लगाई जाएंगी। इस योजना में अभी फिलहाल उन स्कूल को शामिल किया जाएगा जहां स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब उपलब्ध है।इन सभी आधुनिक सुविधाओं का उपयोग करते हुए, यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। वर्तमान में प्रदेश में सुपर हंड्रेड योजना भी चल रही है, जिसमें टॉप परफॉर्मर सौ बच्चों को नीट और जेई की तैयारी कराई जाती है। लेकिन वर्तमान में की जा रही नई व्यवस्था इससे अलग होगी। नई व्यवस्था में नवीं क्लास से ही बच्चों मैं नीट और जेईई के प्रति जागरूकता पैदा की जाएगी। बच्चों को विषय की जानकारी दी जाएगी। करियर काउंसलिंग के माध्यम से उनका डॉक्टर और इंजीनियर बनने का मार्गदर्शन किया जाएगा। उनको विषय में मजबूत फाउंडेशन देने का प्रयास किया जाएगा।
अभी यह योजना पायलट प्रोजेक्ट की तरह शुरू की जाएगी और उसके आधार पर ही आगे विस्तृत तैयारी की जाएगी। इसके बाद अलग अलग चरणों में शामदीपनी, स्कूलों में इसे जोड़ा जाएगा।आईआईटी, एनआईटी और मेडिकल कॉलेज की विद्यार्थियों को मेंटर के रूप में भी इस योजना में जोड़े जाने पर विचार चल रहा है। आने वाले समय में छात्रों की रुचि को देखते हुए और छात्रों की संख्या को देखते हुए विस्तृत विषयवार कोचिंग भी छात्रों को प्रदान की जाएगी। इस साल से फाउंडेशन शुरू होगा और आने वाले कुछ समय में पूरी तैयारी गरीब छात्र सांदिपनी और पीएमसी स्कूल में कर सकेंगे। यह योजना उन गरीब परिवार के बच्चों के लिए मील का पत्थर साबित होगी, जो महंगी फीस न दे पाने के कारण नीट और जेईई की तैयारी नहीं कर पाते।
