ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने 25 अप्रैल को आदेश जारी किया था कि जिले के समस्त स्कूलों की आठवीं तक की कक्षाएं तीस अप्रैल तक संचालित नहीं होंगी। इस आदेश के अंतर्गत सभी तरह के स्कूल शामिल हैं। चाहे वे अशासकीय हों या शासकीय। एमपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड, आईसीएसई सेंट्रल स्कूल और शासन द्वारा मान्यता प्राप्त सभी स्कूल इस आदेश के अंतर्गत आते हैं। इस आदेश के अनुसार, केवल नौवीं से बारह वीं तक की कक्षाएं ही सुबह 7:30 से दोपहर 12 बजे तक संचालित किए जाने की अनुमति थी। इस आदेश में यह नियम सत्ताईस अप्रैल से आगामी आदेश तक प्रभावी बताया गया। इस आदेश का मतलब साफ है कि किसी भी परिस्थिति में किसी भी तरह से किसी भी स्कूल में कोई भी कक्षाएं संचालित नहीं हो सकती। लेकिन यदि शिक्षा विभाग के बीआरसी का संरक्षण हो तो किस तरह खेला होता है, अब वह भी देखिए….
ग्वालियर के आनंदनगर में स्थित श्री चेतन्या टेक्नो स्कूल किस तरह खुद को प्रशासनिक आदेशों से ऊपर समझता है और किस तरह इस स्कूल की शिक्षा विभाग के साथ साठगांठ है, उसका अब हैरतेज कारनामा सुनिए। प्रशासनिक आदेश के बावजूद श्री चेतन्या टेक्नो स्कूल ने 27 अप्रैल को छोटी कक्षाओं के छोटे छोटे मासूम बच्चों को जबरदस्ती स्कूल बुलाया। लगभग ग्यारह बजे के आसपास, स्कूल से कई बच्चे स्कूल, यूनिफार्म, और बैग में स्कूल परिसर से बाहर निकलते दिखाई दिए। जब बाहर निकल रहे छोटे छोटे बच्चों के अभिभावकों से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि स्कूल संचालित हैं और बच्चों को पढ़ने के लिए बुलाया गया है। अभिभावकों कि कथन और बाहर निकलते बच्चों की पूरी वीडियोग्राफी हमारे पास उपलब्ध है।
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इस पूरे मामले में जब ग्वालियर जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी से फ़ोन पर बात कर उन्हें इस बात की जानकारी दी गई कि किस तरह श्री चेतन्या टेक्नो स्कूल ने प्रशासनिक आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए कक्षाएं संचालित की हैं, तो उन्होंने हाईकोर्ट में अर्जेंट हियरिंग में व्यस्त होने की बात कह कर बाद में इस मामले में कार्रवाई की बात की। इसके बाद जब इस पूरे घटनाक्रम के बारे में और श्री चैतन्या टेक्नो स्कूल आदेश के बावजूद खुले होने की जानकारी ग्वालियर।कलेक्टर रुचिका चौहान को दी गई तो उन्होंने इस पर कार्रवाई की बात कही। लेकिन जिस तरह शिक्षा विभाग स्कूल को समर्थन कर रहा था और धुलमुल रवैया अपना रहा था, उससे साफ नजर आ रहा था कि कहीं न कहीं शिक्षा विभाग और स्कूल के बीच में गहरी सांटगांठ है। हालांकि बाद में स्वयं फोन करके जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने जानकारी दी कि स्कूल में जांच के लिए एपीसी और बीआरसी को भेजा है। लेकिन इस जांच के बाद ही स्कूल और शिक्षा विभाग की साठगांठ पर मुहर लग गई।
एक ओर जहां हमारे पास स्कूल संचालित होने की स्कूल से बाहर निकलते बच्चों की और छात्रों के अभिभावकों के कथन की वीडियोग्राफी थी, इसके बावजूद एपीसी और बीआरसी ने स्कूल के पक्ष में गोलमोल जांच रिपोर्ट पेश कर दी। रिपोर्ट हमारे पास उपलब्ध नहीं है, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने बताया कि जांच रिपोर्ट में स्कूल ने बताया है कि कुछ बच्चे लॉकर में रखा सामान लेने आए थे, स्कूल संचालित नहीं था। शिक्षा विभाग के एपीसी और बीआरसी की यह रिपोर्ट उन तथ्यों से बिल्कुल अलग थी जो हमारे पास उपलब्ध हैं। और यह गोलमोल रिपोर्ट साफ बताती है कि शिक्षा विभाग के इन अधिकारियों का स्कूल से किसी विशेष प्रकार का गठबंधन है। और प्रशासनिक कार्रवाई से बचाने के लिए, इन अधिकारियों ने स्कूल के पक्ष में गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की है। अब इससे भी बड़ा चौंकाने वाला खुलासा आपके सामने आने वाला है।
एक ओर जहां हमारे पास स्कूल संचालित होने की स्कूल से बाहर निकलते बच्चों की और छात्रों के अभिभावकों के कथन की वीडियोग्राफी थी, इसके बावजूद एपीसी और बीआरसी ने स्कूल के पक्ष में गोलमोल जांच रिपोर्ट पेश कर दी। रिपोर्ट हमारे पास उपलब्ध नहीं है, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने बताया कि जांच रिपोर्ट में स्कूल ने बताया है कि कुछ बच्चे लॉकर में रखा सामान लेने आए थे, स्कूल संचालित नहीं था। शिक्षा विभाग के एपीसी और बीआरसी की यह रिपोर्ट उन तथ्यों से बिल्कुल अलग थी जो हमारे पास उपलब्ध हैं। और यह गोलमोल रिपोर्ट साफ बताती है कि शिक्षा विभाग के इन अधिकारियों का स्कूल से किसी विशेष प्रकार का गठबंधन है। और प्रशासनिक कार्रवाई से बचाने के लिए, इन अधिकारियों ने स्कूल के पक्ष में गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की है। अब इससे भी बड़ा चौंकाने वाला खुलासा आपके सामने आने वाला है।
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इस मामले में 28 अप्रैल को जब श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल के संचालक कीर्ति रेजा से बातचीत की गई तो उन्होंने अंग्रेजी झाड़ते हुए अपने आपको सब नियमों से ऊपर बताया। और स्कूल के संचालन की बात को पूरी तरह नकार दिया और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के संरक्षण में दंभ भरते हुए इस मामले में बात करने से इनकार करते हुए हमें ही हड़का दिया। उनकी भाषा शाह बता रही थी कि उनका रसूख़ जबरदस्त है और शिक्षा विभाग के अधिकारियों का उन पर संरक्षण है। और जो गोलमोल रिपोर्ट उन्होंने किसी प्रभाव दबाव, मैं शिक्षा विभाग के एपीसी और बीआरसी से बनवा दी है।वह उन्हें बचा लेगी, इस बात का भी उन्हें जबरदस्त गुरूर है। लेकिन अब इससे भी बड़ा चौंकाने वाला खुलासा सुनिए..
श्री चैतन्य स्कूल के संचालक से बातचीत के बाद जब जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी से फोन पर चर्चा की गई, तो उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि एपीसी और बीआरसी ने गलत रिपोर्ट बनाई है और उन्होंने अधिकारियों को फिर से स्कूल भेजकर गहन जांच के लिए निर्देशित किया है और साथ ही कहा है कि छात्रों और अभिभावकों के कथन के साथ पूरी रिपोर्ट पुनः बनाएं और पेश करें। साथ ही उन्होंने हमें आश्वस्त किया कि आज की रिपोर्ट आने पर स्कूल की मान्यता ही रद्द कर देते हैं। हरिओम चतुर्वेदी सख्त लहजे में नजर आए और उन्होंने यह भी कहा कि मैं स्वयं सक्षम हूं।स्कूल पर कार्रवाई के लिए और ज्यादा आवश्यक हुआ तो माननीय कलेक्टर महोदय से कार्रवाई करवा देंगे। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि उनके अधिकारियों द्वारा बनाई गई पहली रिपोर्ट गलत है और स्कूल नियम विरुद्ध संचालित था।
श्री चैतन्य स्कूल के संचालक से बातचीत के बाद जब जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी से फोन पर चर्चा की गई, तो उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि एपीसी और बीआरसी ने गलत रिपोर्ट बनाई है और उन्होंने अधिकारियों को फिर से स्कूल भेजकर गहन जांच के लिए निर्देशित किया है और साथ ही कहा है कि छात्रों और अभिभावकों के कथन के साथ पूरी रिपोर्ट पुनः बनाएं और पेश करें। साथ ही उन्होंने हमें आश्वस्त किया कि आज की रिपोर्ट आने पर स्कूल की मान्यता ही रद्द कर देते हैं। हरिओम चतुर्वेदी सख्त लहजे में नजर आए और उन्होंने यह भी कहा कि मैं स्वयं सक्षम हूं।स्कूल पर कार्रवाई के लिए और ज्यादा आवश्यक हुआ तो माननीय कलेक्टर महोदय से कार्रवाई करवा देंगे। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि उनके अधिकारियों द्वारा बनाई गई पहली रिपोर्ट गलत है और स्कूल नियम विरुद्ध संचालित था।
यह भी देखें https://youtu.be/VqCGbovzoqo?si=yopROny1htvCBtG8
यह पूरा मामला शिक्षा विभाग के उन जमीनी अधिकारियों के कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करता है, जो प्रशासन के आदेश के बाद आपदा में अवसर का मौका ढूंढते हैं और इस तरह संचालित स्कूलों की शिकायत आने पर वहां पर जाकर सांठगांठ कर लेते हैं। शहर में संचालित न जाने कितने स्कूलों के साथ यही हुआ होगा कि स्कूल संचालित होंगे और प्रशासनिक आदेश का दबाव में न जाने किस तरह की साठ गांठ हुई होगी, लेकिन श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल के मामले में जानकारी जिला पंचायत सीईओ सोजान सिंह रावत, जिला कलेक्टर रुचिका चौहान तक मीडिया के माध्यम से पहुंचने के कारण अब शिक्षा विभाग पशोपेश में है कि करें तो क्या करें। लेकिन जिला प्रशासन के निर्देश पर जारी स्कूल बंद रहने के आदेश की किस तरह धज्जियां उड़ाई गईं और शिकायत के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने किस तरह मामले की लीपापोती की यह साफ बताता है कि प्रशासनिक आदेश को न केवल श्री चेतन्या टेक्नो स्कूल ने ठेंगा दिखाया, बल्कि शिक्षा विभाग के जमीनी अधिकारियों ने भी मामले में लीपापोती की। पहली गलत रिपोर्ट पेश करने के बाद अब दूसरी रिपोर्ट में क्या बदलाव होता है? यह देखना दिलचस्प होगा और पहली गलत रिपोर्ट बनाने वाले शिक्षा विभाग के एपीसी और बीआरसी पर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन कोई कार्रवाई करता है, यह उन्हें आगे फिर इसी तरह की साठगांठ की छूट देता है।यह भी एक बड़ा सवाल है?
