ग्वालियर मध्यप्रदेश: ग्वालियर स्थित गजराराजा मेडिकल कॉलेज एक बार फिर उस समय चर्चाओं में आ गया, जब यहां छात्रों के अलग गुटों में मारपीट का मामला इतना बढ़ गया कि छात्रों के शर्त तक फूट गए और अनुशासन की ऐसी धज्जियां उड़ी के उच्च शिक्षा के लिए आए। यह छात्र सड़क के गुंडे मवाली की तरह नजर आए और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए एक दूसरे पर जमकर हमला किया।मामला इतना ज्यादा गंभीर और संवेदनशील था कि मारपीट की इस घटना के बाद कॉलेज प्रबंधन को सख्त कदम उठाने पड़े और पांच छात्रों को निलंबित कर दिया।
जानकारी के अनुसार विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब एमबीबीएस 2025 बैच की छात्रा पर कुछ अन्य छात्रों ने अभद्र टिप्पणी कर दी। इसी बैच के अन्य छात्रों सोनू शर्मा, वेदांत असाती, तरुण कुमार संभ्रांत और ध्रुव पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने छात्रा पर अभद्र टिप्पणियां की और जब छात्रा के समर्थन में श्रेयांश गुप्ता ने इसका विरोध किया तो इन छात्रों ने आक्रोशित होकर मारपीट शुरू कर दी। यदि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन तत्परता दिखाता, तो यह मामला उसी समय शांत हो सकता था, लेकिन उस समय इस घटना पर किसी ने भी अंकुश लगाने का प्रयास नहीं किया। और इस घटना के बाद कॉलेज परिसर गुंडागर्दी का अड्डा बन गया।
यह भी पढ़ें एक तरफ खुदाई दूसरी ओर ट्रैफिक नियमों से जुदाई, ग्वालियर क्यों बना जाम नगर?

जैसे ही क्लास खत्म हुई तो यह आरोपी छात्र कॉलेज के बाहर घात लगाकर खड़े हो गए और जब श्रेयांश बाहर निकला तो उसे घेर लिया, उसके साथ गाली गलौच और मारपीट शुरू कर दी।यही नहीं, छात्र इतने आक्रोशित थे कि उन्होंने लोहे की रोड से सांश का सिर फोड़ दिया। कॉलेज कैंपस में ही यह उपद्रव चलता रहा। लेकिन इसके बावजूद, वहां इसे रोकने वाला कोई जिम्मेदार नहीं था। जब श्रेयांश लहूलुहान हालत में कॉलेज कैंपस में पड़ा था, तो इसी बैच के अर्पित और कुछ अन्य छात्र श्रेयांश को ट्रॉमा सेंटर ले गए और उसका उपचार कराया। इस समय तक इस घटना की जानकारी मीडिया तक पहुंच चुकी थी और जब मामले में तूल पकड़ा तब अनुशासन हीनता पर डीन ने कार्रवाई के निर्देश दिए।
गजरा राजा मेडिकल कॉलेज डीन आरकेएस धाकड़ परिसर पहुंचे और परिसर में अनुशासनहीनता करने वाले पांचों आरोपी छात्र ध्रुव रोकड़े, संभ्रांत, वेदांत साथी तरुण कुमार और सोनू शर्मा को आगामी आदेश तक समस्त शैक्षणिक गतिविधियों से निलंबित कर दिया। आपको बता दें कि यह पहला मामला नहीं है जब इस मेडिकल कॉलेज परिसर में इस तरह के झगड़े हुए हों। यहां अक्सर छोटी छोटी बात पर भी बड़े झगड़े हो जाते हैं और बड़े झगड़े के बाद इस तरह की कार्रवाई की जाती है। और कुछ महीने के लिए, फिर सब कुछ भुला दिया जाता है। सवाल यह उठता है कि कैंपस में इस तरह की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती कि जब झगड़े की शुरुआत हो तभी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर मामले को शांत करा दें, ताकि हमारे आने वाले डॉक्टर्स अपनी पढ़ाई में व्यस्त रहें और इस तरह की अनैतिक गतिविधियों से दूर रहें। इस तरह की घटनाओं से इन उपद्रवी छात्रों के साथ उन छात्रों की पढ़ाई पर भी प्रभाव पड़ता है जो इन सभी गतिविधियों से दूर रहते हैं।
यह भी पढ़ेंसिंधिया का समर्थकों संग सड़क पर फोटो; संदेश कुछ गहरा है?
