पन्ना मध्यप्रदेश: देश के विकास के लिए बनाई गई योजनाएं कई बार गरीब मजदूरों के हक को कुचलकर और उनके जीवन से खिलवाड़ करके बनाई जाती हैं। इसका एक ताजा उदाहरण पन्ना में देखने को मिला केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है केन और बेतवा नदी को जोड़ना लेकिन इस नदी को जोड़ने वाली योजना में तमाम ऐसे गाँव हैं जो डूब क्षेत्र में आ जाएंगे। गांव का अस्तित्व खत्म हो जाएगा और वहां के आदिवासियों का पूरा जीवन तहस नहस हो जाएगा। इस परियोजना में डूब क्षेत्र में आने वाले पन्ना जिला के 8 गाँव के आदिवासी 6 दिन से ढोलन बांध क्षेत्र में प्रदर्शन कर रहे हैं और इस प्रदर्शन के चलते ही इस बांध क्षेत्र में काम बंद है। इन आदिवासियों की मांग है कि जिस तरह छतरपुर में विस्थापितों को साढ़े बारह लाख रुपए मुआवजा दिया गया था, उसी तरह यहाँ पर भी द्वारा सर्वे कराकर इस समस्या पर ध्यान दिया जाए।

आपको बता दें कि पन्ना जिले के इन आदिवासी महिला पुरुष और बच्चों के आंदोलन ने अब तीव्रता पकड़ ली है और इस आंदोलन में आदिवासी महिलाओं ने एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया है। सांकेतिक रूप से वह चिताओं पर लेटकर मुआवजे की मांग कर रही हैं।उनका कहना है की विस्थापन के बाद उनका जीवन खत्म होना ही है, इसलिए या तो उचित मुआवजा दो या हमें जला दो। प्रशासन का यह दावा है कि आदिवासियों से ज्यादा बाहरी लोग इस प्रदर्शन में जुटे हुए हैं और इन बाहरी लोगों को प्रदर्शन से दूर रखने के लिए क्षेत्र के 14 गाँव में 6 अप्रैल से धारा 100 तिरेसठ लागू कर दी गई है। कलेक्टर पार्थ जायसवाल का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की मुआवजा बढ़ाने की मांगें भू अर्जन अधिनियम के तहत पूरी नहीं की जा सकतीं।मुआवजा सरकार भी नहीं बढ़ा सकती।शिकायत पर सर्वे कर निराकरण किया जा सकता है जिसके प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारी न केवल मुआवजे की मांग कर रहे हैं, बल्कि सिस्टम पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगा रहे हैं। लगातार शिकायतें करने के बावजूद भी सुनवाई न होने पर यह प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली जा रहे थे, तभी खैरी टोल प्लाजा पर इन्हें रोक दिया गया, जिससे यह प्रदर्शनकारी वहीं नजदीक ढोहन बांध निर्माण। की जगह पर ही धरने पर बैठ गए।प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने उनके द्वारा घर घर से जुटाया गया, राशन भी छीन लिया और उनका पानी रोक दिया ताकि वे हार मानकर घर लौट जाएं। प्रदर्शनकारियों के यह आरोप गंभीर हैं और अंग्रेजों के जमाने के तानाशाह प्रशासन की याद दिलाते हैं।

