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सिंधिया समर्थक दत्तीगांव ने भाजयुमो उपाध्यक्ष की नियुक्ति के विरोध में मोर्चा खोला

राजवर्धन सिंह दत्ती गांव ने शुभकामनाएं देते हुए कटाक्ष किया कि “यह शुभ संदेश नहीं है”। उन्होंने भाजपा के सिद्धांतों, दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी को स्वच्छ छवि और अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

भोपाल मध्य प्रदेश: भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा में प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर धार जिले के बदनावर विधानसभा क्षेत्र से जय सूर्या की नियुक्ति को लेकर पार्टी के अंदर सियासी तकरार बढ़ गई है। पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे “शुभ संकेत नहीं” बताया है। आपको बता दें कि राजवर्धन सिंह सिंधिया के कट्टर समर्थक माने जाते हैं और दो हजार बीस में कमलनाथ सरकार को गिराकर जब सिंधिया ने भाजपा का दामन थामा था तो राजवर्धन सिंह भी सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे। अब आप समझ सकते हैं कि राजवर्धन सिंह का यह विरोध कहीं न कहीं भाजपा की अंदरूनी कलह पर मुहर लगा रहा है।

पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने बिना नाम लिए जय सूर्या पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को युवा मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है, वह निष्क्रिय रहने के साथ-साथ आपराधिक छवि वाला व्यक्ति है। उन्होंने दावा किया कि इस व्यक्ति पर कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं और वह पिछले दो वर्षों से जिले की राजनीति से पूरी तरह गायब रहा है।दत्तीगांव ने कहा, “मैंने पार्टी को लिखित शिकायत दे दी है। इसमें उनके क्रियाकलाप, विधानसभा चुनाव में गैरमौजूदगी और आपराधिक रिकॉर्ड का जिक्र किया गया है। यदि जरूरत पड़ी तो थाने से RTI लगाकर उनके और उनके परिवार पर दर्ज प्रकरण निकलवाए जा सकते हैं।”

राजवर्धन सिंह दत्ती गांव के इस बयान के बाद मध्यप्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और यह चर्चा चलने लगी है कि भाजपा के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। आपको बता दें कि अभी हाल ही में भाजपा द्वारा मंडल में नियुक्तियों को लेकर सिंधिया समर्थकों की उपेक्षा की गई थी और ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थकों के नामों पर अड़े हुए थे। और अब भाजयुमो उपाध्यक्ष पद पर हुई नियुक्ति पर इस तरह से खुलकर सामने आने पर सिंधिया समर्थक राजवर्धन सिंह ने एक नई बहस की शुरुआत कर दी है।

राजवर्धन सिंह दत्ती गांव ने शुभकामनाएं देते हुए कटाक्ष किया कि “यह शुभ संदेश नहीं है”। उन्होंने भाजपा के सिद्धांतों, दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी को स्वच्छ छवि और अनुशासन बनाए रखना चाहिए। अब सवाल यह है कि भाजपा का उच्च नेतृत्व इस विवादित नियुक्ति पर दोबारा विचार करेगा या अंदरूनी विरोध के बावजूद फैसले पर कायम रहेगा। अब देखना होगा कि भाजपा सिंधिया समर्थक के इस नसीहत को कितनी गंभीरता से लेती है?

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Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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