ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर के कई क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था की बदतर हालत है। स्मार्ट सिटी कहे जाने वाले शहर में कई क्षेत्र तो ऐसे हैं जो कस्बे से भी घटिया नजर आते हैं और स्मार्ट सिटी के नाम पर तमाचा से प्रतीत होते हैं। शहर की घटिया सफाई व्यवस्था को लेकर ऊर्जा मंत्री पद्मन सिंह तोमर ने भी रोष व्यक्त किया है। ऊर्जा मंत्री ने शुक्रवार को उप नगर ग्वालियर बिरला नगर पुल से चंदन पुरा तक जनकल्याण समिति के सहयोग से सुपर सकर मशीन द्वारा चल रहे सीवर सफाई अभियान का निरीक्षण किया। उन्होंने सफाई कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि बारिश से पहले इस काम को हर हाल में पूर्ण किया जाए। निरीक्षण के दौरान ऊर्जा मंत्री ने कहा कि जहां-जहां नवीन सीवर लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है वहां गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि ग्वालियर की स्वच्छता को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए सीवर समस्या के समाधान के लिए “सुपर सकर” मशीन द्वारा सफाई का महाअभियान चलाया जा रहा है। इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से सफाई व्यवस्था और अधिक तेज, प्रभावी व सुदृढ़ बनेगी। ऊर्जा मंत्री ने उपनगर ग्वालियर में आ रहे बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि स्वास्थ्य, सड़क, खेलकूद, शिक्षा हर क्षेत्र में बदलाव हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर ग्वालियर स्वच्छता के मामले में नंबर एक बनाने के प्रयास करें। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि स्वच्छता, सुविधा और बेहतर जीवन स्तर बनाना हमारा संकल्प है। आपको बता दें कि ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर कई बार शहर के अलग अलग क्षेत्रों में साफ सफाई करते नजर आते हैं।वे जहां भी गुजरते हैं और उन्हें गंदगी नजर आती है, तो कई बार वे निगम अधिकारियों को निर्देशित करते हैं और कई बार स्वयं सफाई में जुट जाते हैं, लेकिन जिस तरह के हालात उनके सामने आते हैं वह साफ बताते हैं कि शहर में सफाई व्यवस्था सही नहीं है। नगर निगम के जिम्मेदारी शहर में सफाई के नाम पर खानापूर्ति करते हैं। शहर के कुछ चुनिंदा सड़कों और मार्केट को साफ करके ही पूरे शहर के साफ होने का ढोल पीटने लगते हैं। ग्वालियर विधानसभा में कई क्षेत्र में सफाई व्यवस्था सुचारू नहीं है।अब ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने सख्त निर्देश दिए हैं तो उम्मीद की जा सकती है कि इस क्षेत्र की सफाई व्यवस्था में कुछ सुधार होगा…
ग्वालियर मध्य प्रदेश: जल्द ही मानसून सक्रिय होगा और झमाझम बारिश होगी। पिछले दो साल से बारिश के मौसम में शहर के कई क्षेत्र जलमग्न हो जाते हैं।कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात हो जाते हैं और इन सब का दोषी है नगर निगम जो जल निकासी को सुव्यवस्थित करने में पूरी तरह असफल रहा है। न तो समय पर सीवर साफ होते हैं और ना ही उन नालों की सफाई होती है जिनके माध्यम से वर्षा जल शहर से बाहर निकलता है।कई क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां नालों पर स्थायी या अस्थायी अतिक्रमण है, लेकिन निगम उन पर कार्रवाई नहीं करता। पिछले दो साल से शहर के कई क्षेत्रों ने जलभराव और बाढ़ के जो हालात देखे हैं, क्या वे इस साल भी होंगे और होंगे तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी इस पर मध्यप्रदेश नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के एसीएस बड़ी बात कह गए हैं।
शुक्रवार को ग्वालियर में मीटिंग का दौर था। सुबह से शाम तक मीटिंग चलती रही। मीटिंग ले रहे थे प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे और आयुक्त संकेत भोंडवे। शहर की बदतर हालत पर कई बार एसीएस, और आयुक्त ने नाराजगी व्यक्त की और अधिकारियों को सख्त हिदायत दी। जमीनी हकीकत जानने के लिए भी ये दोनों अधिकारी नगर निगम के अधिकारियों के साथ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण के लिए निकले कई जगह पर गड़बड़ झालन नजर आया।खासकर सीवरेज और पेयजल के काम में तमाम खामियां नजर आईं। एसीएस को जीवाजीगंज स्थित नाले में गंदगी और मिट्टी नजर आई। उन्होंने इंजीनियरों से सफाई के बारे में पूछा तो पीएची के इंजीनियरों ने दस जून तक सफाई का आश्वासन दिया और इस आश्वासन के बाद एसीएस सख्त लहजे में बोले कि यदि बारिश में ग्वालियर शहर डूबा तो इंजीनियर से लेकर अधिकारियों तक एफ आई आर कराऊंगा। हालांकि निरीक्षण जीवाजीगंज, नाले का था, लेकिन उन्होंने ग्वालियर शहर के डूबने की बात कही। मतलब साफ है कि ग्वालियर में कहीं भी जलभराव और बाढ़ जैसे हालात होते हैं तो उनके अनुसार जिम्मेदार अधिकारी नपेंगे।
क्या एसीएस वास्तव में जितनी सख्ती से यह निर्देश देकर गए हैं, उतने सख्त हो पाएंगे क्योंकि दोषियों पर कार्रवाई करने के मामले में मध्य प्रदेश का इतिहास काला रहा है। या तो दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और होती भी है तो कुछ समय बाद वह पाक साफ साबित होकर पुनः किसी न किसी पद पर काबिज होकर अपने कारनामे करने लगते हैं। ग्वालियर में चेतकपुरी रोड धसकने के मामले में भी क्या हुआ? यह सब लोग जानते हैं बड़ी लंबी जद्दोजहद के बाद दो गैर जिम्मेदारों को दोषी माना गया। निलंबितन की कार्रवाई भी हुई और उसके बाद बहाली भी हो गई और दोनों वहीं काम करने लगे। अब दोनों के कारनामे इतने खास तो नहीं हैं कि हम उनके नाम यहां महिमामंडित करें। भोपाल के नब्बे डिग्री ब्रिज के दोषी इंजीनियर को भी बहाल कर दिया गया है। अब ऐसे ही अन्य तमाम मामलों की फेहरिस्त पर नजर डालें तो फिर एसीएस, कि यह सख्ती केवल हवा हवाई नजर आती है।
अपमान भी लें कि एसीएस एफआईआर कि जो सख्त हिदायत देकर गए हैं उस पर वे अमल भी करेंगे तो फिर तो आने वाले मानसून में नगर निगम के तमाम अधिकारी एफआईआर की धार में बह जाएंगे। पिछले दो साल किस तरह से मानसून के आते ही शहर के कई क्षेत्रों में हाहाकार मचा और किस तरह नगर निगम असहाय नजर आया और किस तरह नगर निगम के गड़बड़ कारनामों के चलते ही जलभराव हुआ। वह क्षेत्र के सभी लोगों ने देखा है और खबरों के माध्यम से पूरा प्रदेश जानते हैं। जानता है कि ग्वालियर में जलभराव और बाढ़ के हालात कितने भयावह थे। अभी मई में एसीएस ने यह सख्त हिदायत दी है कि ग्वालियर शहर डूबा तो दोषियों पर एफआईआर कराएंगे। अगले महीने जून नहीं मानसून आ सकता है और यदि मानसून कुछ धीमी रफ्तार से भी यहां पहुंचा तो जुलाई तक मानसून पूरी तरह सक्रिय होगा। मानसून सक्रिय होगा।अच्छी बारिश होती है, तो यकीन मानिए कि फिर से जलभराव होगा।
जिस तरह से एसीएस एफआईआर करने की सख्त हिदायत देकर गए हैं यदि वह धरातल पर चरितार्थ हुई तो फिर तो नगर निगम के तमाम अफसरों सहित आयुक्त भी जाएंगे, क्योंकि अब यह बात आयुक्त महोदय को भी पता है कि पिछले दो साल कई क्षेत्रों में जलभराव के विकराल हालात हुए हैं और नगर निगम जिम्मेदार हाथ पे धरे नजर आए और सबसे बड़ी हैरानी की बात अभी एक महीने बाद ही मानसून शुरू होगा, लेकिन अभी तक शहर के नाला नालियों को सफाई करने का काम भी ठीक से नहीं हुआ है और जहां तक शहर के मुख्य जल निकासी स्रोत की बात करें, जिसे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया नालक कहने पर आपत्ति दर्ज करते हैं, उसके हालात नाले से भी बदतर हैं। क्योंकि एलिवेटेड रोड के निर्माण के चलते बेसमेंट में कई फीट तक मिट्टी गिट्टी भरकर बेस तैयार किया गया है, जिसके चलते अब इसे नदी क्या नाला कहना भी अतिशयोक्ति होगा।
इसी स्वर्णरेखा नाला( केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अनुसार नदी) में एलिवेटेड निर्माण कार्य के चलते अभी हाल ही में जिस जगह पर गार्डर टूटने की घटना हुई है, वह स्थान ग्वालियर के प्रसिद्ध खेड़ापति हनुमान मंदिर के बिलकुल नजदीक हैं। पूरे एलिवेटेड रोड के निर्माण कार्य में यहीं पर यह दुर्घटना क्यों हुई। इसका इशारा तो खेड़ापति महादेव पहले ही कर चुके थे, जब मानसून के दौरान नाले से पानी की निकासी नहीं हुई और मंदिर के इतिहास में पहली बार मंदिर पर स्वयं नाले का और सीवर का गंदा पानी भर गया। उस समय खेड़ापति मंदिर परिसर में जलभराव की खबरें सुर्खियों में थी और क्षेत्रीय पार्षद सोनू त्रिपाठी ने मीडिया बाइट में स्पष्ट कहा था कि एलिवेटेड रोड के निर्माण की वजह से ही जल निकासी में बाधा उत्पन्न हुई है, जिसके चलते खेड़ापति मंदिर परिसर में जलभराव हुआ है, हालांकि शाम तक महल के दबाव में उनको अपना बयान बदलते हुए अपने लेटर पैड पर सफाई देनी पड़ी थी।
अब यह दो सालों का इतिहास बताता है कि शहर में जल निकासी के हालात भयावह हैं। पहली साल के जलभराव को लेकर दूसरी साल नगर निगम ने सबक नहीं लिया था। हालात बद से बदतर हुए थे और अब यह तीसरी साल केवल एक महीने का समय बचा है। एसीएस की सख्त हिदायत के बाद एक महीना के भीतर ही नगर निगम इतने समस्त नालों नालियों की सफाई कर जल निकासी को सुगम बना पाएगा। यह एक बड़ी चुनौती नजर आ रहा है। यानी कि आने वाले महीनों में यदि शहर में जलभराव होता है तो नगर निगम आयुक्त सहित तमाम दोषियों पर एफआईआर होगी, लेकिन क्या ऐसा होगा? शायद नहीं होगा क्योंकि एसीएस भी अपनी बात कहकर भूल जाएंगे। किस न किसी दबाव में आ जाएंगे और ग्वालियर में होए वही जो…… रच रखा? ( खाली स्थान भरो) खैर, राम भक्त खेड़ापति हनुमान जी स्वयं एलिवेटेड के नजदीक विराजमान हैं। वह यह सब कुछ देख रहे हैं, वहीं रक्षक हैं, उन्होंने पहले भी शहर की रक्षा की है और आने वाले साल के जलभराव से भी वही शहरवासियों की रक्षा करेंगे और शायद हो सकता है कि वह ज्यादा बारिश होने ही न दें और शहर वासियों के साथ साथ नगर निगम के दोषियों की भी खेड़ापति हनुमान जी कर लें!
WHO alert on hanta virus: इस समय दुनिया में हंता वायरस तेजी से फैल रहा है और इस वायरस का फैलाव तेजी से देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अलर्ट भी जारी कर दिया है। यह वायरस अब तक 12 देशों में फैल चुका है। हेग में इस वायरस की शुरुआत हुई और अभी यहां 8 केस मिले हैं, जिनमें से 5 में इसकी पुष्टि हुई है जिनमें से 3 की मौत हो चुकी है। मौत का यह रेशो चौंकाने वाला है। इस मामले में, विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडनोमो का कहना है कि जिस एमबी होडियंस लग्जरी क्रूज शिप में इस वायरस की पुष्टि हुई, वो अभी अफ्रीकी महाद्वीप के देश कैप वनडे में रुकने के बाद स्पेन के केनेरी द्वीप की ओर बढ़ रहा है। इस शिप पर और भी संदिग्ध मरीज हो सकते हैं।जहाज शनिवार को स्पेन, पहुंचेगा और स्पेन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस जहाज को वहां रुकने की अनुमति दे दी है।
आपको बता दें कि दो हजार उन्नीस में दुनिया में कोरोना वायरस की शुरुआत हुई थी और दो हजार बीस के आते आते।यह एक भयावह महामारी के रूप में पूरी दुनिया में फैल चुका था, उस समय हालात यह थे कि कई देशों में लॉकडाउन लगा था जो कई दिनों तक जारी रहा और कई देशों में कोरोना वायरस की चपेट में आने वालों की संख्या लाखों में थी और कोरोना वायरस के आतंक ने पूरी दुनिया की व्यवस्था को धराशायी कर दिया था। तमाम देश की सरकारों के कोरोना रोकने के उपाय धरे के धरे रह गए थे, तमाम रोग पाबंदियों और लॉकडाउन के बावजूद कोरोना वायरस हर जगह पहुंच गया। अभी अभी, कई लोग उन पलों को भुला भी नहीं सके हैं कि एक बार फिर एक और वायरस की दहशत कई देशों में पहुंच चुकी है।
जिस क्रूज शिप के यात्रियों में हंता वायरस की पुष्टि हुई है, वह अभी समुद्र में यात्रा कर रहा है और इसमें अभी एक सौ दस यात्री और क्रू मेंबर सवार हैं। इस शिप के सभी यात्रियों को बहुत सावधानीपूर्वक आइसोलेट करके उपचारित किया जाए तो यहां पर इस खतरे को रोका जा सकता है। फिलहाल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अमेरिका, कनाडा सहित बारह देशों को अलर्ट किया है जिसके अस्सी यात्री इस जहाज में यात्रा कर रहे थे और चौबीस से पच्चीस अप्रैल को अपने देश लौटे थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इस वायरस का मुख्य कारण चूहे हैं, चूहों से ही यह वायरस इंसानों में पहुंचता है। और जिन बारह देशों में इस शिप से अस्सी संदिग्ध यात्री उतरे हैं, अब उनकी भी तलाश कर उनकी जांच और उपचार के प्रयास इन देशों में किए जा रहे हैं।
जिस लग्जरी क्रूशिप में हंता वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है, इसके क्रू में दो भारतीय भी शामिल हैं लेकिन वे अभी भारत आएंगे या स्पेन में ही जांच कर उपचारित होंगे। यह देखना होगा। लेकिन भारत में हंता वायरस का इतिहास रहा है। भारत में सबसे पहले तमिलनाडु के वेल्लोर में 1964 में एक छछुंदर में हंता वायरस मिला था। और सन् दो हजार में इंसानों में भी हंता वायरस की पुष्टि हुई थी। 2008 में तमिलनाडु में हुए एक शोध में 28 मरीजों में इस वायरस के प्रति एंटीबॉडीज मिले थे। ये लोग गोदामों में काम करते थे और चूहों के संपर्क में रहते थे।
छोटी छोटी सावधानी रखकर आप प्रेम को इस वायरस के प्रकोप से बचा सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यह वायरस चूहों और गिलहरियों में पाया जाता है। इस वायरस के साथ एक अच्छी बात अभी तक यह निकल कर आई है कि यह इंसानों से इंसानों में नहीं फैलता। लेकिन जो वायरस इस लग्जरी क्रूज में फैला है वह इसका दक्षिण अमेरिकी वेरिएंट एंडीज है। शिप से उतरे पांच मरीजों में इस वेरिएंट की पुष्टि हुई है और यह वेरिएंट इंसान से इंसान में फैलने की क्षमता रखता है। यह वायरस भी कोरोना की तरह ही शरीर को नुकसान पहुंचाता है।शुरू के कुछ दिन तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द और थकान के लक्षण दिखते हैं।उसके बाद फेफड़ों पर अटैक होता है, सांस लेने में दिक्कत होती है और फेफड़ों में पानी भर जाता है।
वर्तमान स्थिति में, भारत में अभी एक भी सक्रिय केस देखने को नहीं मिला है। फिर भी, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अलर्ट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और लापरवाह बरतना बहुत ज़रूरी है। इस पूरे मामले में जब यह तय हो चुका है कि सबसे अधिक संभावना हंता वायरस की चूहों से इंसान में आने की होती है, तो बेहतर है कि चूहों से स्वयं का बचाव करें, चूहों के मल मूत्र को हाथ से न छूएं। घर में साफ सफाई रखें, हर संभव प्रयास करें के चूहे आपके घर में न आएं।।
सतना मध्यप्रदेश: महिला जेलर को जेल में ही बंद एक कैदी से प्यार हो जाए और प्यार भी इस कदर की महिला जेलर। इंतजार करें कि कब सजा खत्म हो और उम्र कैद से मुक्त कर इसके कैदी को शादी की कैद से नवाजे। जी हां, यह कोई फिल्मी कहानी नहीं।यह हकीकत है, और यह हकीकत है मध्य प्रदेश के सतना केंद्रीय जेल की, जहां से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसने समाज और सिस्टम दोनों को चर्चा का विषय दे दिया है। सतना केंद्रीय जेल में तैनात सहायक जेल अधीक्षक फिरोजा खातून को हत्या की सजा काट रहे धर्मेंद्र सिंह से प्यार हो गया। धर्मेंद्र ने 14 साल जेल में बिताए। अच्छे आचरण को देखते हुए शासन ने चार वर्ष पहले उसकी रिहाई कर दी थी। जेल में रहने और रिहा होने के बाद धर्मेंद्र और फिरोजा की मुलाकातें होती रहीं। पिछले दिनों फिरोजा ने हिंदू रीति-रिवाज से धर्मेंद्र के साथ विवाह कर लिया।
जब दोनों ने शादी का फैसला किया तो फिरोजा के परिवार ने इस रिश्ते को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया और शादी से दूरी बना ली। ऐसे में सांप्रदायिक सौहार्द और मानवीय संवेदनाओं की एक नई मिसाल पेश की गई। सतना में विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर माता-पिता के रूप में फिरोजा का कन्यादान किया। अब यह विवाह हिंदू मुस्लिम एकता की भी एक मिसाल बन चुका है। लेकिन एक महिला जेलर का कैदी से प्यार हो जाने का यह किस्सा जमकर चर्चाओं में है।
छतरपुर जिले के चंदला में तत्कालीन नगर परिषद उपाध्यक्ष कृष्ण दत्त दीक्षित की वर्ष 2007 में हत्या हो गई थी। हत्या के मामले में धर्मेंद्र सिंह को सजा सुनाई गई थी। तब वह 20 वर्ष का था। उसे सतना केंद्रीय जेल में रखा गया, जहां सहायक जेल अधीक्षक के रूप में फिरोजा खातून की तैनाती है। धर्मेंद्र जेल में रहने के दौरान फिरोजा के काम में हाथ बंटाता था। इसी दौरान दोनों की दोस्ती हुई, जो प्यार में बदल गई। अच्छे आचरण को देखते हुए शासन ने जब चार वर्ष पहले धर्मेंद्र को रिहा कर दिया, तब भी उनकी मुलाकातें होती रहीं। दोनों ने शादी करने का निर्णय लिया। परिवार और समाज की परवाह किए बिना हिंदू रीति-रिवाज से पांच मई को छतरपुर में विवाह कर लिया।
अभी तक आपने तमाम प्रेम कहानी सुनी होंगी, लेकिन एक आदमी जो उम्रकैद की सजा के लिए जेल गया हो उसे जेल में पूरे जीवन साथ निभाने वाली सौगात मिल जाए। यह हकीकत चौंकाने वाली है जब धर्मेंद्र सिंह जेल पहुँचा होगा।तब उसे जिंदगी से कोई आस नहीं रही होगी। लेकिन जेल में उसका व्यवहार अच्छा रहा और उसके इसी व्यवहार पर महिला जेलर फिरोजा खातून आकर्षित हुई। और धर्मेंद्र सिंह की जिंदगी बदल गई फिरोजा खातून न केवल धर्मेंद्र से प्रेम किया, बल्कि उसकी रिहाई का इंतजार भी किया और रिहाई के बाद अब उसके साथ विवाह बंधन में बंध चुकी है। यह घटना हमें यह सबक देती है कि समय का इंतजार कीजिये।न जाने कब, किस मोड़ पर समय ने हमारे लिए कुछ बेहतर सजो कर रखा हो।
ग्वालियर मध्य प्रदेश: विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक कार्यों में शामिल भारत की जनगणना की तैयारियां ग्वालियर जिले में भी पूर्ण हो गई हैं। ग्वालियर जिले में भी जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत 01 मई से प्रथम चरण की जनगणना का काम शुरू होगा। प्रथम चरण में 01 से 30 मई तक मकान सूचीकरण एवं मकान गणना का कार्य किया जायेगा। कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट में संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर जनगणना के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कलेक्टर श्रीमती चौहान ने कहा कि देश में पहली बार डिजिटल रूप से जनगणना होने जा रही है। इसलिये जनगणना के लिये तैनात किए गए प्रगणकों की सभी संख्याओं का समाधान करें, जिससे वे सही-सही जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर भर सकें। उन्होंने कहा कि सभी चार्ज अधिकारी अपने-अपने प्रगणक व सुपरवाइजर के सतत संपर्क में रहें और प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट गूगल मीट के जरिए उनसे संवाद कर शंकाओं का समाधान करें। साथ ही दिशा-निर्देशों की जानकारी दें। उन्होंने कहा एचएलबीसी पोर्टल पर किसी भी प्रकार की ओवरलेपिंग नहीं होना चाहिए तथा सभी प्रविष्टियां पूर्ण एवं सटीक भरी जाएं। एचएलबीसी पोर्टल पर दर्शायी गई सीमाओं में विसंगति होने पर वास्तविक भौगोलिक सीमाओं के आधार पर एचएलबी (हाउसलिस्टिंग ब्लॉक) का निर्धारण किया जाए।
साथ ही देश में पहली बार स्व-गणना का अवसर भी लोगों को दिया गया है। जिसके तहत कोई भी व्यक्ति एसई वेब पोर्टल के माध्यम से निर्धारित प्रपत्र में जनगणना संबंधी 34 बिंदुओं में अपनी जानकारी स्वयं भर सकेंगे। जनगणना की तैयारियों के सिलसिले में मंगलवार को कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान की अध्यक्षता में बाल भवन में जिला जनगणना समन्वय समिति की बैठक आयोजित हुई। साथ ही जनगणना कार्य में संलग्न किए गए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के समस्त चार्ज व सहचार्ज अधिकारियों (तहसीलदार व नायब तहसीलदार इत्यादि) को प्रशिक्षित किया गया। कलेक्टर श्रीमती चौहान ने अधिकारियों से कहा कि पूरी गंभीरता व मुस्तैदी के साथ इस संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम को ध्यान में रखकर प्रगणक गमछा, पानी व ओआरएस इत्यादि लेकर साथ में जाएं। जनगणना संबंधी जानकारी स्मार्ट फोन के जरिए अपलोड करने में प्रगणकगण, वॉलेन्टियर्स या अपने परिजन की मदद ले सकते हैं। बैठक में नगर निगम आयुक्त एवं ग्वालियर शहर के प्रमुख जनगणना अधिकारी श्री संघ प्रिय, जिला जनगणना अधिकारी श्री अनिल बनवारिया व अपर आयुक्त नगर निगम श्री मुनीष सिकरवार सहित जनगणना के लिये तैनात किए गए चार्ज अधिकारी मौजूद थे।
प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना
कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान ने बताया कि भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत ग्वालियर जिले में भी दो चरणों में जनगणना होगी। प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) कार्य मध्यप्रदेश में 01 मई से 30 मई 2026 तक किया जायेगा। इस चरण का उद्देश्य द्वितीय चरण अर्थात जनसंख्या गणना के लिये मास्टर फ्रेम तैयार करना है। जनगणना के द्वितीय चरण का काम फरवरी 2027 में होगा। देश के बर्फीले क्षेत्रों में सितम्बर 2026 में द्वितीय चरण की गणना होगी।
जिलेवासियों से की अपील बेझिझक दें सही-सही जानकारी, पूरी तरह रहेगी गोपनीय
कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान ने जिलेवासियों से भी अपील की कि जनगणना के लिये आने वाले प्रगणकों को बेझिझक सही-सही जानकारी दें। आपके द्वारा दी गई जानकारी पूर्णत: गोपनीय रहेगी। साथ ही ऐसा स्पष्ट प्रावधान है कि आपके द्वारा दी गई जानकारी का उपयोग साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं होगा। कलेक्टर ने कहा कि जनगणना के आंकड़े कल्याणकारी योजनाओं, संसाधनों के वितरण तथा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन कार्य के लिये आधार बनते हैं।
पूरी तरह संवैधानिक है जनगणना का कार्य
जनगणना का कार्य पूरी तरह संवैधानिक है। भारतीय संविधान में 32 बार जनगणना का उल्लेख आया है। साथ ही संविधान के अनुच्छेद-246, जनगणना अधिनियम 1948 व जनगणना नियम 1990 के तहत जनगणना का कार्य किया जा रहा है। ज्ञात हो भारत की जनगणना अपनी समृद्ध परंपरा के कारण विश्व की सर्वश्रेष्ठ जनगणनाओं में से एक मानी जाती है। भारत में प्रथम जनगणना वर्ष 1872 में देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग हुई थी। वर्ष 1881 में पहली बार सम्पूर्ण देश में एक साथ जनगणना कराई गई। इसके बाद हर 10 वर्ष के अंतराल से वर्ष 2011 तक जनगणना होती रही। कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2021 में नियमित कार्यक्रम के अनुसार नहीं हो सकी। अब भारत की जनगणना – 2027 होने जा रही है। वर्ष 1872 से अब तक की यह 16वी तथा स्वतंत्रता के बाद की 8वी जनगणना होने जा रही है।
प्रगणक करेंगे डाटा संग्रहण व स्व-गणना का सत्यापन, डाटा की बहुस्तरीय जाँच होगी
जनगणना कार्यक्रम के तहत प्रगणक घर-घर जाकर “Census 2027-HLO” मोबाइल एप का उपयोग कर डिजिटल डाटा संग्रह करेंगे। साथ ही लोगों द्वारा पोर्टल पर स्व-गणना के तहत भरी गई जानकारी का सत्यापन भी करेंगे। दोनों तरह से प्राप्त डाटा की बहुस्तरीय जाँच होगी। पहले यह कार्य पर्यवेक्षकों द्वारा किया जायेगा। साथ ही चार्ज अधिकारी भी मैदान में जाकर पुन: सत्यापन कर त्रुटियां ठीक करायेंगे।
जनगणना के प्रथम चरण में 34 बिंदुओं की जानकारी संकलित होगी
जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकान गणना का काम किया जायेगा। जिसमें 34 बिंदुओं में जानकारी संकलित होगी। इसमें भवन व मकान नम्बर सहित मकान की स्थिति, परिवार क्रमांक, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग, मकान किराए का है अथवा स्वयं का, कमरों की संख्या, परिवार के विवाहित दम्पत्तियों की संख्या, पेयजल के मुख्य स्त्रोत, पेयजल स्त्रोतों की उपलब्धता, प्रकाश का मुख्य स्त्रोत, शौचालय की सुगमता, शौचालय का प्रकार, गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था, परिसर के अंदर स्नान की सुविधा, रसोई घर व एलपीजी-पीएनजी कनेक्शन, खाना पकाने के लिये प्रयुक्त मुख्य ईंधन, रेडियो/ट्रांजिस्टर व टेलीविजन की उपलब्धता, इंटरनेट सुविधा, लेपटॉप/कम्प्यूटर की उपलब्धता, टेलीफोन, मोबाइल फोन व स्मार्ट फोन इत्यादि की उपलब्धता, साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, मोपेड, कार, जीप व वैन, परिवार द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले अनाज, मसलन चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का व अन्य खाद्यान्न एवं मोबाइल फोन इत्यादि जानकारी शामिल है।
जिले में लगभग 6 हजार अधिकारी-कर्मचारी करेंगे जनगणना
ग्वालियर जिले में कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान के नेतृत्व में लगभग 6 हजार अधिकारी-कर्मचारी जनगणना-2027 के कार्य को अंजाम देंगे। इनमें लगभग 5 हजार प्रगणक व 829 पर्यवेक्षक, 41 चार्ज अधिकारी, 42 फील्ड ट्रेनर्स, 4 मास्टर ट्रेनर्स व 9 जिला स्तरीय अधिकारी शामिल हैं। शहरी क्षेत्र में नगर निगम आयुक्त प्रमुख जनगणना अधिकारी का दायित्व निभा रहे हैं। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत के सीईओ यह जिम्मेदारी निभायेंगे। प्रथम चरण में प्रगणक घर-घर जाकर मकान सूचीकरण व मकानों की गणना का कार्य करेंगे। साथ ही लोगों द्वारा स्वत: ही मोबाइल एप पर 34 बिंदुओं में भरी गई जानकारी की जांच कर सत्यापन भी करेंगे। ज्ञात हो जनगणना – 2027 के लिये ग्वालियर जिले में जिन्हें प्रशासनिक इकाई माना गया है, उनमें 10 तहसील, 10 नगर व 589 गाँव शामिल हैं।
ग्वालियर मध्य प्रदेश: जिला शिक्षा विभाग ग्वालियर अपनी कार्यशैली को लेकर एक बार फिर चर्चाओं में हैं। शासन प्रशासन के तमाम आदेश और नियमों को ताक पर रखकर कई बार निजी स्कूल अपनी मनमानी करते नजर आते हैं और इसके बावजूद भी जिला शिक्षा विभाग इस तरह आंखें मूंदे बैठा रहता है कि मानो इन निजी स्कूलों को मौन सहमति दे रखी हो।ऐसा ही मामला श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल का है। जिसने सारे नियम कायदे ताक पर रखे हुए हैं और इसके बावजूद भी शिक्षा विभाग स्कूल पर किसी तरह की भी कार्रवाई करने में सक्षम नजर नहीं आ रहा है। आपको बता दें कि भीषण गर्मी को देखते हुए ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर जिला शिक्षा विभाग ने सत्ताईस अप्रैल से तीस अप्रैल तक आठवीं कक्षा तक के स्कूल बंद किए जाने का आदेश जारी किया था, लेकिन इस आदेश को दरकिनार करते हुए श्री चेतन्य टेकने स्कूल आनंद नगर सत्ताईस अप्रैल को संचालित हो रहा था, जिसकी जानकारी तुरंत जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी को दी गई थी। इसके बाद हरिओम चतुर्वेदी ने खानापूर्ति के लिए एपीसी और बीआरसी को जांच के लिए स्कूल भेजा था। लेकिन आज तीस तारीख तक जांच का खेल जारी है और जिला शिक्षा विभाग स्कूल पर कार्रवाई से बचता नजर आ रहा है या कहें तो स्कूल को संरक्षण देता नजर आ रहा है।
जिला शिक्षा अधिकारी से आज जब इस बारे में जानकारी लेनी चाहिए तो दिन में कई बार उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने के बावजूद उन्होंने फोन नहीं उठाया। इस वजह से यह जानकारी नहीं मिल सकी कि श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल पर की गई जांच का क्या निष्कर्ष निकला और शिक्षा विभाग स्कूल पर क्या कार्रवाई कर रहा है। आपको बता दें कि स्कूल की जांच की प्रथम रिपोर्ट को नकारने की बात जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने अट्ठाईस अप्रैल को हमसे मोबाइल पर चर्चा के दौरान की थी और साथ में उन्होंने यह भी कहा था कि जाँच में उन्हें स्वयं संतोषजनक बिंदु नहीं नहीं दिखा रहे हैं, इसलिए उन्होंने जांच के लिए टीम को भेजा है। अट्ठाईस अप्रैल को जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी कार्रवाई को लेकर काफी सकारात्मक नजर आ रहे थे। और जिस तरह के वीडियो हमने उन्हें भेजे थे उससे वे सहमत थे कि स्कूल संचालित हुआ है और छोटे छात्रों की कक्षाएं लगी हैं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि पहली जांच सही नहीं थी तो जिला शिक्षा विभाग की टीम ने किस दबाव में स्कूल के पक्ष में जांच रिपोर्ट पेश की? दूसरा सवाल यह भी उठ रहा है कि अभी तक दूसरी जांच की गई है या नहीं?तीसरा सवाल यह भी उठ रहा है कि जब जिला शिक्षा अधिकारी स्वयं इस जांच से संतुष्ट नहीं थे। तो उन्होंने जांच अधिकारियों को क्या कोई कारण बताओ नोटिस दिया या उनसे कोई स्पष्टीकरण मांगा? जिस तरह से जिला शिक्षा विभाग निजी स्कूल के रसूख के आगे दबता नजर आ रहा है, वह साफ बता रहा है कि जांच के नाम पर केवल टालमटोली का खेल चल रहा है। यहां सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन ने ही स्कूल बंद किए जाने का आदेश जारी किया था और जिला शिक्षा विभाग अपने ही आदेश का पालन कराने में असफल साबित हुआ है।जब ऐसे आदेशों का पालन होना ही नहीं होता तो ऐसे आदेश निकाले क्यों जाते हैं? इस तरह से आदेशों की अवहेलना होने से कहीं ना कहीं जिला प्रशासन की किरकिरी होती है। साथ ही संबंधित स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावकों के मन में यह डर भी व्याप्त होता है कि स्कूल में कुछ भी गड़बड़ हो रहे लेकिन उसकी शिकायत शिक्षा विभाग या प्रशासन से करने का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि स्कूल का रसूख तो इतना है कि प्रशासन के आदेश की अवहेलना यह स्कूल खुलेआम करता है तो किसी आम अभिभावक की शिकायत से होगा ही क्या?
स्कूल बंद किए जाने के आदेश के बाद भी श्री चेतन्य टेक्नो स्कूल की संचालित कक्षाएं कहीं न कहीं शिक्षा विभाग को कठघरे में खड़ी कर रही हैं। शिक्षा विभाग के पास तमाम पुख्ता साक्ष्य भेजने के बावजूद भी शिक्षा विभाग जिस तरह कार्रवाई करने से बच रहा है, वह शिक्षा विभाग और इस निजी स्कूल के बीच में बड़ी सांठगांठ का संशय पैदा कर रहा है। साथ ही इस बात पर भी मुहर लगा रहा है कि जिला शिक्षा विभाग किसी न किसी प्रभाव या दबाव में निजी स्कूलों को संरक्षण देते रहते हैं, यही कारण है कि जिला प्रशासन के तमाम तावों के बावजूद कई स्कूल ऊंची कीमत पर स्कूल की किताबें और कॉपियां बेच लेते हैं और शिक्षा विभाग खामोशी से सब कुछ देखता रहता है। संभवतः आम अभिभावकों को भी शिक्षा विभाग और निजी स्कूल के इस साठगांठ का पता होता है, इसलिए ज्यादातर अभिभावक शिकायत तक नहीं करते हैं और संभवतः ऐसा ही चेतन्या टेक्नो स्कूल के मामले में भी हुआ है कि धूप में अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए मजबूर अभिभावकों में से ज्यादातर स्कूल के रसूख के आगे और शिक्षा विभाग की मिलीभगत के चलते खामोश हैं। शिक्षा विभाग की निष्पक्ष जांच के इंतजार में…
ग्वालियर मध्यप्रदेश: सीएम हैल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज शिकायतें अटेंड न करना 14 अधिकारियों को भारी पड़ने जा रहा है, कलेक्टर रुचिका चौहान ने इन सभी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इनमें 13 अधिकारी एल-1 स्तर के व एक अधिकारी एल-2 स्तर का शामिल है। नोटिस का जबाव सभी को कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इन अधिकारियों द्वारा शिकायतों के निराकरण के लिये समय-सीमा में कार्रवाई नहीं की। इस कारण शिकायतें बिना किसी कार्रवाई के उच्च स्तर पर प्रेषित हो गई हैं। इससे शिकायतों के निराकरण में अनावश्यक देरी हुई है।
कलेक्टर रुचिका चौहान ने जिन अधिकारियों को सीएम हैल्पलाइन में दर्ज शिकायतों का निराकरण न करने के कारण जिन एल-1 स्तर के अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं, उनमें विद्युत वितरण कंपनी के उप प्रबंधक उटीला प्रिंस कुमार वैश्य, सहायक यंत्री सुनील कुमार गुप्ता, प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी मुरार रविन्द्र सिंह कुशवाह, सहायक आपूर्ति अधिकारी सौरभ जैन, सहायक संपत्ति अधिकारी ग्रामीण शैलेन्द्र चौहान, सहायक संपत्ति अधिकारी जोन-17 देवेन्द्र बुधौलिया, प्रभारी नायब तहसीलदार सांखनी शिवदयाल शर्मा, सहायक प्राध्यापक राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय डॉ. श्याम सस्तोगी, सहायक आयुक्त वाणिज्यकर अभिषेक खरे, रीजनल मैनेजर कोटक महिन्द्रा बैंक आफाक मंसूरी, रीजनल मैनेजर देवेन्द्र पाल सिंह, रीजनल मैनेजर इंडियन ओवरसीज बैंक शंकरानंद झा व भवन निरीक्षक बृजेश राजपूत शामिल हैं।
इसी तरह एल-2 स्तर के अधिकारी कार्यपालन यंत्री पेयजल नगर निगम संजीव गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। रुचिका चौहान ने इन सभी को स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि भविष्य में सीएम हैल्पलाइन से संबंधित शिकायतों के निराकरण में पूरी सतर्कता बरतें व उत्तरदायित्व का निर्वहन करें। साथ ही शासन के द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का अक्षरश: पालन करते हुए निराकरण सुनिश्चित करें।
ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने 25 अप्रैल को आदेश जारी किया था कि जिले के समस्त स्कूलों की आठवीं तक की कक्षाएं तीस अप्रैल तक संचालित नहीं होंगी। इस आदेश के अंतर्गत सभी तरह के स्कूल शामिल हैं। चाहे वे अशासकीय हों या शासकीय। एमपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड, आईसीएसई सेंट्रल स्कूल और शासन द्वारा मान्यता प्राप्त सभी स्कूल इस आदेश के अंतर्गत आते हैं। इस आदेश के अनुसार, केवल नौवीं से बारह वीं तक की कक्षाएं ही सुबह 7:30 से दोपहर 12 बजे तक संचालित किए जाने की अनुमति थी। इस आदेश में यह नियम सत्ताईस अप्रैल से आगामी आदेश तक प्रभावी बताया गया। इस आदेश का मतलब साफ है कि किसी भी परिस्थिति में किसी भी तरह से किसी भी स्कूल में कोई भी कक्षाएं संचालित नहीं हो सकती। लेकिन यदि शिक्षा विभाग के बीआरसी का संरक्षण हो तो किस तरह खेला होता है, अब वह भी देखिए….
ग्वालियर के आनंदनगर में स्थित श्री चेतन्या टेक्नो स्कूल किस तरह खुद को प्रशासनिक आदेशों से ऊपर समझता है और किस तरह इस स्कूल की शिक्षा विभाग के साथ साठगांठ है, उसका अब हैरतेज कारनामा सुनिए। प्रशासनिक आदेश के बावजूद श्री चेतन्या टेक्नो स्कूल ने 27 अप्रैल को छोटी कक्षाओं के छोटे छोटे मासूम बच्चों को जबरदस्ती स्कूल बुलाया। लगभग ग्यारह बजे के आसपास, स्कूल से कई बच्चे स्कूल, यूनिफार्म, और बैग में स्कूल परिसर से बाहर निकलते दिखाई दिए। जब बाहर निकल रहे छोटे छोटे बच्चों के अभिभावकों से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि स्कूल संचालित हैं और बच्चों को पढ़ने के लिए बुलाया गया है। अभिभावकों कि कथन और बाहर निकलते बच्चों की पूरी वीडियोग्राफी हमारे पास उपलब्ध है।
इस पूरे मामले में जब ग्वालियर जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी से फ़ोन पर बात कर उन्हें इस बात की जानकारी दी गई कि किस तरह श्री चेतन्या टेक्नो स्कूल ने प्रशासनिक आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए कक्षाएं संचालित की हैं, तो उन्होंने हाईकोर्ट में अर्जेंट हियरिंग में व्यस्त होने की बात कह कर बाद में इस मामले में कार्रवाई की बात की। इसके बाद जब इस पूरे घटनाक्रम के बारे में और श्री चैतन्या टेक्नो स्कूल आदेश के बावजूद खुले होने की जानकारी ग्वालियर।कलेक्टर रुचिका चौहान को दी गई तो उन्होंने इस पर कार्रवाई की बात कही। लेकिन जिस तरह शिक्षा विभाग स्कूल को समर्थन कर रहा था और धुलमुल रवैया अपना रहा था, उससे साफ नजर आ रहा था कि कहीं न कहीं शिक्षा विभाग और स्कूल के बीच में गहरी सांटगांठ है। हालांकि बाद में स्वयं फोन करके जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने जानकारी दी कि स्कूल में जांच के लिए एपीसी और बीआरसी को भेजा है। लेकिन इस जांच के बाद ही स्कूल और शिक्षा विभाग की साठगांठ पर मुहर लग गई। एक ओर जहां हमारे पास स्कूल संचालित होने की स्कूल से बाहर निकलते बच्चों की और छात्रों के अभिभावकों के कथन की वीडियोग्राफी थी, इसके बावजूद एपीसी और बीआरसी ने स्कूल के पक्ष में गोलमोल जांच रिपोर्ट पेश कर दी। रिपोर्ट हमारे पास उपलब्ध नहीं है, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने बताया कि जांच रिपोर्ट में स्कूल ने बताया है कि कुछ बच्चे लॉकर में रखा सामान लेने आए थे, स्कूल संचालित नहीं था। शिक्षा विभाग के एपीसी और बीआरसी की यह रिपोर्ट उन तथ्यों से बिल्कुल अलग थी जो हमारे पास उपलब्ध हैं। और यह गोलमोल रिपोर्ट साफ बताती है कि शिक्षा विभाग के इन अधिकारियों का स्कूल से किसी विशेष प्रकार का गठबंधन है। और प्रशासनिक कार्रवाई से बचाने के लिए, इन अधिकारियों ने स्कूल के पक्ष में गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की है। अब इससे भी बड़ा चौंकाने वाला खुलासा आपके सामने आने वाला है।
इस मामले में 28 अप्रैल को जब श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल के संचालक कीर्ति रेजा से बातचीत की गई तो उन्होंने अंग्रेजी झाड़ते हुए अपने आपको सब नियमों से ऊपर बताया। और स्कूल के संचालन की बात को पूरी तरह नकार दिया और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के संरक्षण में दंभ भरते हुए इस मामले में बात करने से इनकार करते हुए हमें ही हड़का दिया। उनकी भाषा शाह बता रही थी कि उनका रसूख़ जबरदस्त है और शिक्षा विभाग के अधिकारियों का उन पर संरक्षण है। और जो गोलमोल रिपोर्ट उन्होंने किसी प्रभाव दबाव, मैं शिक्षा विभाग के एपीसी और बीआरसी से बनवा दी है।वह उन्हें बचा लेगी, इस बात का भी उन्हें जबरदस्त गुरूर है। लेकिन अब इससे भी बड़ा चौंकाने वाला खुलासा सुनिए.. श्री चैतन्य स्कूल के संचालक से बातचीत के बाद जब जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी से फोन पर चर्चा की गई, तो उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि एपीसी और बीआरसी ने गलत रिपोर्ट बनाई है और उन्होंने अधिकारियों को फिर से स्कूल भेजकर गहन जांच के लिए निर्देशित किया है और साथ ही कहा है कि छात्रों और अभिभावकों के कथन के साथ पूरी रिपोर्ट पुनः बनाएं और पेश करें। साथ ही उन्होंने हमें आश्वस्त किया कि आज की रिपोर्ट आने पर स्कूल की मान्यता ही रद्द कर देते हैं। हरिओम चतुर्वेदी सख्त लहजे में नजर आए और उन्होंने यह भी कहा कि मैं स्वयं सक्षम हूं।स्कूल पर कार्रवाई के लिए और ज्यादा आवश्यक हुआ तो माननीय कलेक्टर महोदय से कार्रवाई करवा देंगे। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि उनके अधिकारियों द्वारा बनाई गई पहली रिपोर्ट गलत है और स्कूल नियम विरुद्ध संचालित था।
यह पूरा मामला शिक्षा विभाग के उन जमीनी अधिकारियों के कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करता है, जो प्रशासन के आदेश के बाद आपदा में अवसर का मौका ढूंढते हैं और इस तरह संचालित स्कूलों की शिकायत आने पर वहां पर जाकर सांठगांठ कर लेते हैं। शहर में संचालित न जाने कितने स्कूलों के साथ यही हुआ होगा कि स्कूल संचालित होंगे और प्रशासनिक आदेश का दबाव में न जाने किस तरह की साठ गांठ हुई होगी, लेकिन श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल के मामले में जानकारी जिला पंचायत सीईओ सोजान सिंह रावत, जिला कलेक्टर रुचिका चौहान तक मीडिया के माध्यम से पहुंचने के कारण अब शिक्षा विभाग पशोपेश में है कि करें तो क्या करें। लेकिन जिला प्रशासन के निर्देश पर जारी स्कूल बंद रहने के आदेश की किस तरह धज्जियां उड़ाई गईं और शिकायत के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने किस तरह मामले की लीपापोती की यह साफ बताता है कि प्रशासनिक आदेश को न केवल श्री चेतन्या टेक्नो स्कूल ने ठेंगा दिखाया, बल्कि शिक्षा विभाग के जमीनी अधिकारियों ने भी मामले में लीपापोती की। पहली गलत रिपोर्ट पेश करने के बाद अब दूसरी रिपोर्ट में क्या बदलाव होता है? यह देखना दिलचस्प होगा और पहली गलत रिपोर्ट बनाने वाले शिक्षा विभाग के एपीसी और बीआरसी पर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन कोई कार्रवाई करता है, यह उन्हें आगे फिर इसी तरह की साठगांठ की छूट देता है।यह भी एक बड़ा सवाल है?
ग्वालियर मध्यप्रदेश: ग्वालियर स्थित गजराराजा मेडिकल कॉलेज एक बार फिर उस समय चर्चाओं में आ गया, जब यहां छात्रों के अलग गुटों में मारपीट का मामला इतना बढ़ गया कि छात्रों के शर्त तक फूट गए और अनुशासन की ऐसी धज्जियां उड़ी के उच्च शिक्षा के लिए आए। यह छात्र सड़क के गुंडे मवाली की तरह नजर आए और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए एक दूसरे पर जमकर हमला किया।मामला इतना ज्यादा गंभीर और संवेदनशील था कि मारपीट की इस घटना के बाद कॉलेज प्रबंधन को सख्त कदम उठाने पड़े और पांच छात्रों को निलंबित कर दिया।
जानकारी के अनुसार विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब एमबीबीएस 2025 बैच की छात्रा पर कुछ अन्य छात्रों ने अभद्र टिप्पणी कर दी। इसी बैच के अन्य छात्रों सोनू शर्मा, वेदांत असाती, तरुण कुमार संभ्रांत और ध्रुव पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने छात्रा पर अभद्र टिप्पणियां की और जब छात्रा के समर्थन में श्रेयांश गुप्ता ने इसका विरोध किया तो इन छात्रों ने आक्रोशित होकर मारपीट शुरू कर दी। यदि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन तत्परता दिखाता, तो यह मामला उसी समय शांत हो सकता था, लेकिन उस समय इस घटना पर किसी ने भी अंकुश लगाने का प्रयास नहीं किया। और इस घटना के बाद कॉलेज परिसर गुंडागर्दी का अड्डा बन गया।
जैसे ही क्लास खत्म हुई तो यह आरोपी छात्र कॉलेज के बाहर घात लगाकर खड़े हो गए और जब श्रेयांश बाहर निकला तो उसे घेर लिया, उसके साथ गाली गलौच और मारपीट शुरू कर दी।यही नहीं, छात्र इतने आक्रोशित थे कि उन्होंने लोहे की रोड से सांश का सिर फोड़ दिया। कॉलेज कैंपस में ही यह उपद्रव चलता रहा। लेकिन इसके बावजूद, वहां इसे रोकने वाला कोई जिम्मेदार नहीं था। जब श्रेयांश लहूलुहान हालत में कॉलेज कैंपस में पड़ा था, तो इसी बैच के अर्पित और कुछ अन्य छात्र श्रेयांश को ट्रॉमा सेंटर ले गए और उसका उपचार कराया। इस समय तक इस घटना की जानकारी मीडिया तक पहुंच चुकी थी और जब मामले में तूल पकड़ा तब अनुशासन हीनता पर डीन ने कार्रवाई के निर्देश दिए।
गजरा राजा मेडिकल कॉलेज डीन आरकेएस धाकड़ परिसर पहुंचे और परिसर में अनुशासनहीनता करने वाले पांचों आरोपी छात्र ध्रुव रोकड़े, संभ्रांत, वेदांत साथी तरुण कुमार और सोनू शर्मा को आगामी आदेश तक समस्त शैक्षणिक गतिविधियों से निलंबित कर दिया। आपको बता दें कि यह पहला मामला नहीं है जब इस मेडिकल कॉलेज परिसर में इस तरह के झगड़े हुए हों। यहां अक्सर छोटी छोटी बात पर भी बड़े झगड़े हो जाते हैं और बड़े झगड़े के बाद इस तरह की कार्रवाई की जाती है। और कुछ महीने के लिए, फिर सब कुछ भुला दिया जाता है। सवाल यह उठता है कि कैंपस में इस तरह की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती कि जब झगड़े की शुरुआत हो तभी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर मामले को शांत करा दें, ताकि हमारे आने वाले डॉक्टर्स अपनी पढ़ाई में व्यस्त रहें और इस तरह की अनैतिक गतिविधियों से दूर रहें। इस तरह की घटनाओं से इन उपद्रवी छात्रों के साथ उन छात्रों की पढ़ाई पर भी प्रभाव पड़ता है जो इन सभी गतिविधियों से दूर रहते हैं।
ग्वालियर मध्यप्रदेश: शहर में ट्रैफिक की हालत दिन पर दिन बदतर होती जा रही है। शहर में संभवतः ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां जाम की स्थिति दिन में एक न एक बार नहीं बनती हो और जो हॉट स्पॉर्ट हैं वहां के हालात तो ऐसे हैं कि वहां से निकलने में कितना समय लगेगा, इसका अंदाजा भी वहां से निकलने वाले वाहन चालक नहीं लगा सकते। शहर में जिस तरह से हर जगह जाम की स्थिति बन जाती है और ऐसे जाम वाले प्वाइंट लगातार बढ़ते जा रहे हैं, उसमें एक और प्रशासन, पुलिस और नगर निगम दोषी है तो वहीं शहर के आमजन का दोष भी कुछ कम नहीं है।
अमूमन रोज ही किसी न किसी क्षेत्र से किसी न किसी आम नागरिक का फोन आता है कि मेरे क्षेत्र में ट्रैफिक की व्यवस्था बहुत खराब है।जाम लगा रहता है।आप आकर खबर बनाएं। ऐसा ही एक फोन परसों मुरार क्षेत्र से आया उस क्षेत्र में रहने वाले एक व्यापारी ने मुझे बताया कि सात नंबर चौराहे पर बहुत बुरी हालत है।दो बजे का समय है तमाम वाहनों के साथ कई स्कूल बसें जाम में फंसी हुई हैं और रोज यही हालत होती है। आप यहां आकर खबर बनाए।इस स्थिति को सुधारें। यकीन मानिए कि जब कोई व्यक्ति एक पत्रकार को फोन करता है की स्थिति सुधारो, तो हंसी भी आती है और आश्चर्य भी होता है।
खैर, जब इन सज्जन को मैंने कहा कि जाम के क्या क्या कारण हैं। और जब उनको मैंने बताया कि दुकानदार अपना सामान दुकान से 4 ft आगे रखते हैं, फिर उसके आगे अपना वाहन खड़ा करते हैं। उसके आगे कोई ठेला खड़ा हो जाता है और किस तरह पचास फीट की रोड भी पन्द्रह फीट की रह जाती है। और फिर उनसे पूछा, क्या आप बताएं कि यदि पन्द्रह फीट की बची हुई रोड पर ट्रैफिक जाम हो रहा है तो इसमें आप जैसे आम नागरिक कितने दोषी हैं? उन्होंने रूखा सा जवाब दिया, चलिए कोई बात नहीं। बस यही जवाब समस्या है कि हम स्वयं के अधिकार तो चाहते हैं, लेकिन हमारी कर्तव्य क्या है? एक आम नागरिक की तरह, शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए हमारे स्वयं के कर्तव्य किस तरह स्थिति को काफी हद तक सुधार सकते हैं। इस पर चर्चा करते ही लोग बगलें झांकने लगते हैं।
शहर में यदि ट्रैफिक व्यवस्था सुधारनी है तो आमजन को भी स्वयं की जवाबदेही तय करनी होगी। 1 2 शहर में सड़कों पर अतिक्रमण करना और कहीं पर भी बेतरतीब तरीके से अपने वाहन खड़े कर देना। ट्रैफिक जाम की समस्या को बढ़ाते हैं तो वहीं यकीन मानिए कई सारे वाहन चालक जो लाखों की गाड़ी लेकर खुद को सभ्य और पढ़ा लिखा बताते हुए रोप से वाहन में यात्रा करते हैं उनमें से कई लोगों में ट्रैफिक सेंस शून्य होता है ना?उन्हें लेफ्ट खाली रखने या उपयोग करने का सही सली का पता होता है। और ना ही एक पंक्ति में एक एक के पीछे एक चलकर ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने का। कुछ दिन पूर्व की ही बात है जब जडेरुआ बांध नहरवाली रोड पर केवल एक सज्जन की गलत तरीके से ओवरटेक करके दूसरी तरफ वाहन फंसा देने के चलते ट्रैफिक जाम हुआ।
आम नागरिक ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।यह ग्वालियर शहर की हकीकत है।लेकिन वहीं दूसरी ओर जो जिम्मेदार कुर्सी पर बैठे हैं, उनका दोष भी कम नहीं है। यदि तमाम व्यस्त बाजारों में दुकानदार कई फुट आगे तक सामान रख देते हैं तो ऐसा नहीं है कि उनका यह कारनामा नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को नहीं पता है, लेकिन यह जानकारी भी सामने आ रही है कि कुछ पैसों की लालच में नगर निगम के कर्मचारी ऐसे स्थानों पर कार्रवाई नहीं करते और जब मामला पूरी तरह बिगड़ जाता है।तो कार्रवाई के नाम पर सबका सामान उठाकर दुर्व्यवहार किया जाता है। क्या इस मामले में ऐसा नहीं हो सकता कि सबसे पहले समझाइश देकर प्रयास किया जाए और जब कोई व्यक्ति बार बार गलती करे तो उस पर अच्छा खासा जुर्माना लगाया जाए।
शहर की जर्जर खस्ता हाल सड़कें भी कहीं न कहीं ट्रैफिक जाम का कारण है। जब सड़कें ही जर्जर होती हैं तो वहां से वाहन चालकों का निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार जर्जर सड़क पर कोई गाड़ी फंस जाने से उसके पीछे अन्य वाहनों की कतार लग जाती है। और कई सड़कों पर गड्ढों से बचने के लिए वाहन चालक इधर उधर बचाने की कोशिश करते हैं जिसके चलते आमने सामने से वाहन फंस जाते हैं। ग्वालियर में बदतर सड़कें कई क्षेत्रों में ट्रैफिक व्यवस्था को बिगाड़ रही हैं। जहां सड़कों पर जरूरत है वहां डिवाइडर भी नहीं है, कई जगह पर सड़क पर सही ट्रैफिक सूचक नहीं होते हैं। शहर में सही अच्छी क्वालिटी की सड़कें और सही ट्रैफिक सूचना सूचकों के साथ लगी हों तो ट्रैफिक जाम से कुछ हद तक निजात मिल सकती है।
ग्वालियर में ट्रैफिक जाम का एक और बड़ा कारण सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशी हैं। शहर के कई क्षेत्रों में बीच सड़क पर ही मवेशी या तो खड़े रहते हैं या बैठे रहते हैं। जिन सड़कों पर भी मवेशियों का जमावड़ा रहता है वहां से वाहन निकालने में वाहन चालक को खासी मशक्कत करनी पड़ती है और कई बार तो मवेशियों के चलते ही ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है।ऐसे आवारा मवेशियों पर कोई भी मजबूत कार्रवाई करने के लिए प्रशासन और नगर निगम अब तक असफल रहा है। कई जगह पर तो सांड जब आपस में बीस सड़क पर लड़ते हैं तो लंबे समय तक ट्रैफिक थम जाता है क्योंकि साड़ों की लड़ाई के बीच में से निकलने का रिस्क कोई वाहन चालक नहीं लेता है।
कहीं न कहीं ट्रैफिक जाम के लिए व्यवस्था में बैठे जिम्मेदार दोषी हैं तो उतना ही दोषी आमजन भी हैं। यदि दोनों तरफ से सार्थक प्रयास किए जाएं तो ग्वालियर शहर को इस तरह लग रहे ट्रैफिक जाम से निजात मिल सकता है। इस अव्यवस्थित ट्रैफिक के चलते कई लोगों का समय बर्बाद होता है, जो दूरी दस मिनट में कवर की जा सकती है, उसे कवर करने के लिए तीस मिनट का समय लगता है और कई बार तो यदि जाम बहुत ज्यादा हो तो एक घंटा भी निकल जाता है। प्रतिज्ञा भी इस पूरी समस्या को जब शहर भर में वाहन चलाकर जांच की तो एक हैरान करने वाली बात मुझे दिखाई दी कि गूगल पर जिस रूट पर भी आप चलते हैं और गूगल पर जहां भी मार्ग पर रेड इंडिकेशन होता है वहां आपको भयंकर ट्रैफिक ज़रूर दिखाई देता है। और यहां येलो इंडिकेशन होता है वहां वाहन खिसक खिसक कर चलते हैं यह भी दिखाई देता है। यह उदाहरण इसलिए दे रहा हूं कि यह कौतूहल का विषय है। ग्वालियर शहर में कहाँ कब ट्रैफिक जाम होगा? यह जानकारी गूगल सटीक तरीके से देता है। जब गूगल इतना सब कर सकता है तो फिर ट्रैफिक जाम से आजादी पाने के लिए हम छोटे छोटे प्रयास क्यों नहीं कर सकते?