ग्वालियर भिंड मध्य प्रदेश: ऐसे हाईवे की हकीकत जहां पर अक्सर मौत की खबरें आती हैं और खबरों के बाद 4 दिन तक घमासान होता है। हम बात कर रहे हैं ग्वालियर भिंड राष्ट्रीय राजमार्ग 719 की। शनिवार सुबह लगभग चार बजे इसी हाईवे पर एक भीषण हादसा छीमक गाँव के पास होता है जिसमें एक बस और यात्रियों से भरी बैन आमने सामने से टकरा जाती हैं। टक्कर इतनी भीषण होती है की वैन के परखच्चे उड़ जाते हैं। इस भीषण हादसे में पांच लोगों की मौत होती है और छह लोग घायल हो जाते हैं। इन हादसों के पीछे का एक बड़ा कारण यह है कि यह हाईवे अब तक चार लेन नहीं हो सका है जबकि चार साल से इस हाइवे के चार लेन होने की फाइल कहीं धूल खा रही है और इस चार पाँच छह के खेल में अनगिनत लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
यह देश के उन कुछ मौत के हाइवे में से एक है जहां मौत के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग 719 पर पिछले 50 दिनों में 25 लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग घायल हो चुके हैं। अभी हाल ही में इकतीस जनवरी को भी इस हाईवे पर एक भीषण हादसा हुआ था जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। यह मौत का हाईवे है। यहाँ कभी भी आप मौत का सामना कर सकते हैं और इसका कारण यह है कि इस हाईवे पर ट्रैफिक लोड ज्यादा है और हाईवे बहुत सकरा है। हाइवे को फोरलेन में परिवर्तित किए जाने की मांग लंबे समय से उठ रही है और जब भी मांग उठती है तो कुछ दिनों के लिए इसकी फाइल इधर से उधर घूमा दी जाती है और जनप्रतिनिधि बड़े वादे करके आश्वासन दे के जनता के आक्रोश को शांत कर देते हैं। चार साल से चार लेन के लिए अटकी यह मांग चार दिन तक आक्रोश में बदलने के बाद किसी चारदीवारी में कैद कर दी जाती है।
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शनिवार को भीषण हादसा हुआ। पांच लोगों की मौत हुई। और एक बार फिर इस रोड के चौड़ीकरण की मांग उठने लगी। इस रोड के चौड़ीकरण को लेकर भिंड और ग्वालियर के आम नागरिकों के साथ-साथ संत समाज भी उग्र आंदोलन कर चुका है। संत समाज के कालिदास महाराज ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि यदि चौड़ीकरण का कार्य जल्द शुरू नहीं हुआ तो फिर से आंदोलन किया जाएगा। विरोध और आक्रोश कितना भी हो लेकिन हमारी चुनी गई सरकार इतनी निरंकुश हो चुकी है कि उसे कोई फर्क पड़ता नहीं है। आए दिन इस हाईवे पर एक्सीडेंट होते हैं। छोटे मोटे एक्सीडेंट की तो अब यहां बात ही नहीं होती केवल वह एक्सीडेंट जो भीषण हो जिसमें कुछ लोगों की मौत हो वही खबरों में आता है उसी की चर्चा होती है।
मौत के इस हाईवे के पीछे की लापरवाही और यहां होने वाली मौत का दोषी हर वह व्यक्ति है जो इस हाइवे के चौड़ीकरण के काम में रोड़ा अटका रहा है चाहे वह कोई जिम्मेदार अधिकारी हो चाहे कहीं वो जनप्रतिनिधि हो। और सबसे बड़ा दोषी है नितिन गडकरी जो कई बार हाई वे निर्माण के लिए बड़ी बड़ी बातें करते नज़र आते हैं। हजार दो हजार दस हजार करोड़ की बात ऐसे करते हैं जैसे पैसा अपनी जेब से दे रहे हो। उनकी बड़ी बड़ी घोषणाओं और उनकी दूरदर्शिता की जद में अभी तक ग्वालियर भिंड हाइवे क्यों नहीं आ पाया? या आने के बाद भी वह यहां काम क्यों नहीं शुरू करा पाए यह प्रश्न कहीं न कहीं अपना जवाब ढूंढ रहा है।
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शनिवार को पांच मौतें एक बार फिर हो चुकी हैं और कुछ नहीं कहा जा सकता कि कुछ दिन बीते और फिर से एक भीषण हादसे की खबर आ जाए। 4 साल से इस हाईवे को फोरलेन करने की मांग उठ रही है। कई आंदोलन हो चुके हैं लेकिन फाइल कहीं न कहीं फंसी हुई है। अब यह फाइल जिसकी वजह से भी फंसी है और जिस वजह से भी यह भीषण हादसे हो रहे हैं उन सबके पीछे उन लोगों को दोषी माना जाना चाहिए जिनकी वजह से इस हाइवे के फोर लेन होने में देरी हो रही है जिन्होंने अपने हिस्सेदारी के चक्कर में इस फाइल को कहीं अटका रखा है।

