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किसानों के लिए खुशखबरी; भूअर्जन पर सरकार देगी 4 गुना मुआवजा

भोपाल मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए कृषि भूमि के भूअर्जन पर गुणन कारक (मल्टीफिकेशन फैक्टर) को दोगुना करते हुए 2.0 कर दिया गया है। इससे अब अधिग्रहित कृषि भूमि का मुआवजा किसानों को दोगुना के स्थान पर बाजार दर से 4 गुना प्राप्त होगा। यह निर्णय संपूर्ण प्रदेश की ग्रामीण क्षेत्र की कृषि भूमि के अधिग्रहण पर लागू होगा। मंत्रि-परिषद ने नगरीय सीमा में मुआवजा गुणन कारक को यथावत एक रखा गया है। मंत्रि-परिषद ने इसके साथ सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसे अधोसंरचना निर्माण तथा विकास के कार्यों के लिए लगभग 33 हजार 985 करोड़ रूपये की स्वीकृति भी दी है।

भू-अर्जन पर बाजार दर का 4 गुना मुआवजा मिलने से किसानों को होगा जबरदस्त फायदा

मंत्रि-परिषद ने किसानों के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ‘ मध्यप्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार नियम 2015 ‘ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए गुणन कारक (Multiplication Factor) को बढ़ाकर 2.0 कर दिया गया है, जिससे किसानों को अब उनकी कृषि भूमि का बाजार दर से 4 गुना मुआवजा मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

इस निर्णय से सिंचाई परियोजनाओं, सड़क, पुल, रेलवे और बांध निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित की जाने वाली कृषि भूमि पर किसानों को अधिक राशि मिल सकेगी। इससे न केवल विकास कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि भूमि देने वाले किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी व्यापक सुधार होगा।

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उल्लेखनीय है कि इस संबंध में मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, श्री राकेश सिंह और श्री चेतन्य कुमार काश्यप की उप-समिति ने अनुशंसा की थीं। उप-समिति ने अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन करने के साथ ही विभिन्न् किसान संगठन क्रेडाई,सीआईआई और फिक्की से चर्चा के बाद यह रिपोर्ट तैयार की थी। सरकार के इस पारदर्शी और किसान-हितैषी निर्णय से प्रदेश के हजारों परिवारों को सीधा लाभ पहुँचेगा।

इन्दौख-रुदाहेड़ा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 157 करोड़ 14 लाख रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा उज्जैन जिले की इन्दौख- रुदाहेड़ा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की लागत राशि 157 करोड़ 14 लाख रूपये, सैंच्य क्षेत्र 10,800 हेक्टेयर की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया है। परियोजना से झारड़ा तहसील के 35 ग्रामों को सिंचाई सुविधा का लाभ होगा।

छिन्दवाड़ा सिंचाई काम्पलेक्स परियोजना में पुनर्वास के लिए 969 करोड़ रूपये के विशेष पुनर्वास पैकेज की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा छिन्दवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना में पुनर्वास के लिये स्वीकृत राशि 840 करोड़ 80 लाख रूपये के स्थान पर लगभग 969 करोड़ रूपये का विशेष पुनर्वास पैकेज स्वीकृति किया गया है। यह विशेष पैकेज त्वरित क्रियान्वयन व विस्थापितों के अपेक्षित सहयोग के लिए केन-बेतवा अन्तर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना के समकक्ष प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है।

छिन्दवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना के अंतर्गत छिन्दवाड़ा जिले में संगम 1 बाँध, संगम 2 बाँध, रामघाट बांध एवं पांढुर्णा जिले में बेलेंसिग रिजर्वायर (पांढुर्णा) इस प्रकार कुल 4 बांध प्रस्तावित है, जिससे छिन्दवाड़ा एवं पांढुर्णा जिलों के 1,90,500 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी । परियोजना से छिन्दवाड़ा जिले के 369 एवं पांढुर्णा जिले के 259 ग्राम इस प्रकार कुल 628 ग्राम लाभान्वित होंगे।

लोक निर्माण अंतर्गत विकास कार्यों के लिए 25,164 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण विभाग अंतर्गत विकास कार्यों के लिए 25,164 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार म..प्र. सड़क विकास निगम के माध्यम से सड़कों का निर्माण को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखे जाने और संचालन के लिए 7 हजार 212 करोड़ रूपये, ग्रामीण सडकों एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण और उन्नयन के कार्य की निरंतरता के लिए 6 हजार 150 करोड रूपये, पुलों और सड़कों के उन्नयन के लिए 1 हजार 87 करोड़ रूपये, भवनों के मरम्मत और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 765 करोड़ रूपये और वृहद पुलों का निर्माण की योजना को सोलहवें वित्त आयोग की अवधि (1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031) तक में निरंतर रखे जाने और संचालन के लिए 9 हजार 950 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।

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निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना और शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन के लिए 2,191 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत ग्राम क्षेत्रों में शासकीय विद्यालयों में कक्षा 6 वीं एवं कक्षा 9 वी में अध्ययनरत विद्यार्थियों को साइकिल प्रदाय करने से संबंधित निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर रखने के लिए 990 करोड़ रूपये और शिक्षक प्रशिक्षण संस्थाओं के वेतन भत्ते, कार्यालयीन व्यय एवं संस्थानों का सृदृढ़ीकरण से संबंधित 8 योजनाओं के संचालन के लिए 1,200 करोड़ 44 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।

निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना मध्यप्रदेश में वर्ष 2004-05 से संचालित की जा रही है। निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना अंतर्गत निर्धारित मापदण्ड अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत् विद्यार्थी जो कि शासकीय विद्यालयों में कक्षा 6 वीं एवं कक्षा 9 वी में अध्ययनरत् है, तथा वह जिस ग्राम का निवासी है उस ग्राम में शासकीय माध्यमिक / हाईस्कूल संचालित नहीं है तथा वह अध्ययन के लिए किसी अन्य ग्राम या शहर के शासकीय स्कूल में जाता है, उसे निःशुल्क साइकिल वितरण योजना अंतर्गत लाभान्वित किया जाता है।

प्रदेश में उन्नत चिकित्सा सेवाओं के लिए 5,479 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद् द्वारा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग अंतर्गत प्रदेश में उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने, चिकित्सा महाविद्यालयों में उन्नयन और मण्डला में नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना के लिए 5 हजार 479 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है।

स्वीकृति अनुसार मुख्यमंत्री समग्र एवं उन्नत तृतीयक स्वास्थ्य सेवा संस्था सुदृढ़ीकरण योजना (CM CARE 2025) योजना के 5 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 3 हजार 628 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गए है। योजना के माध्यम से तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के एक सशक्त हब के रूप में शासकीय और स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों एवं निजी क्षेत्र में सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण अंतर्गत ऑन्कोलॉजी (सर्जिकल, मेडिकल एवं रेडिएशन), कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी तथा अंग प्रत्यारोपण इकाइयों की स्थापना आदि का प्रावधान किया जा रहा है। इसके लिए शासकीय निवेश के साथ-साथ निजी भागीदारों की विशेषज्ञता, नवीनतम तकनीक और पूंजी निवेश का उपयोग कर सेवाओं की उन्नत गुणवत्ता और उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

इसके साथ ही चिकित्सा महाविद्यालयो में उन्नयन के लिए 1 हजार 503 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए। स्वीकृति अनुसार इस योजना से चिकित्सा महाविद्यालयों में अगले 5 वर्षों तक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जा सकेगा।

मण्डला में नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय स्थापना के निर्माण के लिए पूर्व में स्वीकृत 249 करोड़ 63 लाख रूपये के स्थान पर 347 करोड़ 39 लाख रुपए की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। स्थल परिवर्तन के कारण तकनीकी कारणों से लागत में वृद्धि के कारण पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। मण्डला में नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना से आसपास के क्षेत्र की जनता को तृतीयक स्तर की चिकित्सा सुविधाएं सुलभता से प्राप्त होंगी।

शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में परिजन आवास की स्थापना की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के चुने हुए चिकित्सा महाविद्यालयों के परिसर में परोपकारी संस्थाओं के माध्यम से परिजन आवास स्थापित करने के लिए मंजूरी दी है। संस्थाएं ऐसे परिजन विश्राम गृह की स्थापना अपने वित्तीय संसाधनों से करेगी,जिसके लिए सरकार कोई कोई वित्तीय सहायता नहीं देगी। संस्था द्वारा सेवाओं के लिए लिया जाने वाला शुल्क का निर्धारण शासन द्वारा गठित समिति द्वारा किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था से मरीज के परिजनों को बेहतर व्यवस्था कम दरों पर मिलेंगी और मानसिक रूप से वे बेहतर स्थिति में होंगे, जिसका सीधा-सीधा लाभ अस्पताल की व्यवस्था पर पड़ेगा और व्यवस्था सुचारु होगी।

चिकित्सा महाविद्यालय से संबंधित अस्पतालों में दूर-दूर से मरीज आते हैं। इनके साथ परिजन भी आते हैं। इनमें से कई परिजन अस्पताल परिसर से बाहर ठहरने की व्यवस्था के व्यय भार को उठाने में सक्षम नहीं होने के कारण अस्पताल परिसर में हो सो जाते हैं। इससे अस्पताल परिसर की स्वच्छता व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, साथ ही परिजनों को भी ठहरने को आरामदायक स्थान नहीं मिल पाता है। इसका अप्रत्यक्ष असर अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था तथा मरीज और अस्पताल स्टॉफ के मध्य संव्यवहार पर भी पड़ता है, जिससे अस्पतालों के कार्य प्रभावित होते हैं।

छठवें राज्य वित्त आयोग के कार्यों के संपादन के लिए 15 पदों के सृजन की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद् द्वारा छठवें राज्य वित्त आयोग के कार्यों के संपादन के लिए कार्यकाल अवधि के लिए 15 पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। राज्य शासन द्वारा छठवें राज्य वित्त आयोग का गठन किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए 24 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद् द्वारा “मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तृतीय चरण को तीन वर्ष के संचालन के लिए 23 करोड़ 90 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। साथ ही लोक सेवा प्रबंधन विभाग को अग्रिम कार्यवाही तथा प्रक्रिया निर्धारण कर नियमों एवं निर्देशों को जारी कर क्रियान्वयन के लिये अधिकृत किया गया है।
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कद्दावर भाजपा नेता संजय पाठक को सुप्रीम कोर्ट से झटका, आपराधिक अवमानना में अब यह फैसला

भोपाल मध्यप्रदेश: विजय राघवगढ़ से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री संजय पाठक को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है।आपराधिक अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला दिया है। आपको बता दें कि संजय पाठक के परिवार से संबंधित माइनिंग कंपनीज के द्वारा अवैध उत्खनन किए जाने का मामला न्यायालय में विचाराधीन है और इस मामले में संजय पाठक ने हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश विशाल मिश्रा को फोन पर संपर्क किया था, जिसके चलते अब संजय पाठक पर आपराधिक अवमानना का मामला हाईकोर्ट में दर्ज किया है और इसी से राहत पाने के लिए संजय पाठक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने संजय पाठक को कोई राहत नहीं दी है।
हाईकोर्ट द्वारा आपराधिक अवमानना लगाए जाने के बाद राहत के लिए भाजपा विधायक संजय पाठक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने संजय पाठक को हाईकोर्ट जाने के लिए स्वतंत्र कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत व न्यायमूर्ति जय माल्या बागची की युगलपीठ ने अहम निर्णय दिया है कि विधायक के विरुद्ध हाईकोर्ट द्वारा दर्ज किए गए आपराधिक अवमानना के प्रकरण में हाईकोर्ट ही विचार कर सकता है। अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित की विशेष अनुमति याचिका वापस लेने की अनुमति भी दे दी है। आपको बता दें कि संजय पाठक की कंपनी द्वारा अवैध उत्खनन किए जाने का यह मामला कटनी के याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित ने ही उठाया है।

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संजय पाठक के परिवार के नाम से संचालित माइनिंग।कंपनी ने अवैध उत्खनन किया है जिसके चलते 3 कंपनी पर 443 करोड का जुर्माना लगाया गया था। इस जुर्माने से बचने के लिए संजय पाठक ने हाईकोर्ट की शरण ली थी, लेकिन हाईकोर्ट से भी राहत मिलती न देख। उन्होंने इस मामले के न्यायाधीश विशाल मिश्रा से फ़ोन पर संपर्क किया था। इस बात का खुलासा तब हुआ जब विशाल मिश्रा ने स्वयं को इस मामले से अलग कर लिया औरन्यायालय प्रक्रिया में यह बात लिखित में उल्लेखित की कि उनसे संजय पाठक ने संपर्क किया है, इसलिए वे इस केस से अलग हो रहे हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने का भी निर्देश दिया था। विधायक का यह कृत्य न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने व गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला माना गया। न्यायिक कार्य में हस्तक्षेप करना आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है।हाईकोर्ट ने दो अप्रैल को याचिका का निराकरण करते हुए मामले पर संज्ञान लिया और भाजपा विधायक के विरुद्ध आपराधिक अवमानना का प्रकरण दर्ज करने का निर्देश दिया।
इस मामले में संजय पाठक जितना हाथ पैर मार रहे हैं, उतना ही वे दलदल में फंसते जा रहे हैं, पूरे मामले को पहले संजय पाठक ने प्रशासन और शासन स्तर पर खुर्दबुर्द करने की कोशिश की, लेकिन शिकायतकर्ता आशुतोष दीक्षित लगातार इस मामले में शिकायत करते रहे और जब उन्हें शासन प्रशासन से भी कार्रवाई की उम्मीद नहीं दिखी तो उन्होंने याचिका के माध्यम से न्यायालय की शरण ली। और धीरे-धीरे इस पूरे मामले के तार खुलते चले गए, औरसंजय पाठक के परिवार द्वारा संचालित तीन कंपनी पर जुर्माना लगाया गया। अब देखना होगा कि संजय पाठक ने प्रदेश सरकार को जो राजस्व का नुकसान पहुंचाया है, उसकी भरपाई के लिए राज्य सरकार कब तक सक्रिय होती है और देश की भाजपा सरकार अपने ही विधायक संजय पाठक के इस कारनामे पर कैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई करती है?

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ई रिक्शा टेंपो में लेडी चोर गैंग सक्रिय, पुलिस की दावे फेल, ऐसे करें बचाव

ग्वालियर मध्य प्रदेश: यदि आप शहर में संचालित पब्लिक ट्रांसपोर्ट टेम्पो और ई रिक्शा का प्रयोग कर रहे हैं और आप अपने साथ कीमती सामान, सोना, चांदी या मोटी रकम लिए हुए हैं तो सावधान हो जाइए क्योंकि इन ई रिक्शा और टेंपो में अचानक से लेडी थीफ सुनहरी आएगी और सुनहरी धूप के बीच आपके कीमती जेवरात को लेकर रफूचक्कर हो जाएगी। और घटना के बाद आप हाथ मलते रह जाएंगे।इसमें ग्वालियर शहर में ऐसे महिला चोर गैंग का आतंक है जो टेंपो और ई रिक्शा में बैठने वाले परिवार या महिलाओं को निशाना बनाती हैं और उनके पास से जेवर और कीमती सामान चुरा लेती हैं। पिछले कुछ समय में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं जिनको देखकर पुलिस प्रशासन भी परेशान है।

इस समय महिला चोर गैंग के सक्रिय होने की कई वजह हैं। एक दो शादियों का सीजन है। और शादियों के सीजन में ज्यादातर परिवार और महिलाएं जेवर यकीन लेकर यात्रा करते ही हैं। और दूसरा के शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के नाम पर ई रिक्शा और टेम्पो की भरमार है जिनमें ना सीसीटीवी होते हैं नहीं सुरक्षा के अन्य इंतजाम। महिला चोर इतनी शातिर हैं कि वह हाव भाव से भांप जाती हैं कि किस ई रिक्शा में ऐसा परिवार या महिला बैठ रही हैं, जिनके पास कीमती सामान है और फिर उसी में सवार हो जाती हैं और इधर उधर की बातों में लगाकर ध्यान भटका कर बैग से जेवर निकाल लेती हैं और अपना काम होते ही बीच में ही उतरकर आँखों से ओझल हो जाती है।

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ग्वालियर में पिछले तीन दिन में ही ई रिक्शा टेम्पो से होने वाली इस तरह की चोरी की तीन घटनाएँ अलग अलग क्षेत्रों में हो चुकी हैं। टेम्पो और ई रिक्शा में बहुत सटकर बैठना पड़ता है जिसके चलते आसानी से चोर महिलाएं हाथ साफ कर लेती हैं।इसको देखते हुए ग्वालियर पुलिस ने ई रिक्शा और टेंपो चालकों को समझाइश और निर्देश देने का काम भी शुरू किया है, लेकिन इसका कोई परिणाम निकलता दिखाई नहीं दे रहा है। कई मामलों में, शहर के बाजारों में दुकानों पर लगे।सीसीटीवी के माध्यम से ही महिला चोर को पकड़ने के प्रयास किए जाते हैं। लेकिन जिस तरह से लगातार यह वारदातें हो रही हैं उनके चलते पुलिस के सभी दावे फेल नजर आ रहे हैं। 

इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए आमजन को खुद ही सावधान रहने की जरूरत है। सबसे जरूरी यह है कि यदि आवश्यक न हो तो जरूरत से ज्यादा कैश कीमती सामान या जेवर लेकर सफर न करें और यदि यात्रा करना मजबूरी है ही तो इस तरह के शेयरिंग ई रिक्शा टेम्पो का प्रयोग न करते हुए अपनी व्यक्तिगत ऑटो बुक कराएं। ऑटो कर्ज के कुछ रुपए बचाने का लालच आपको लाखों का नुकसान देता है। ऑटो में संभवतः आप शेयरिंग वाहन के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित हैं। दूसरी बात जब भी आंख, कीमती सामान और जेवर लेकर सफर करें तो आसपास के लोगों की भावभंगिमा, उनके व्यवहार से उनकी हरकतों को समझने की कोशिश करें और ऐसी किसी भी स्थिति में ऐसे वाहन में न बैठे जिसमें कोई संदेह हो। इसके साथ ही जो भी कीमती सामान आप सफर के समय लेकर चल रहे हैं। उसको अपने बैग के अंदर कितना ज्यादा सुरक्षित रखें कि तीन या चार लेयर की सुरक्षा हो ताकि वहां तक पहुंचने में ज्यादा समय लगे क्योंकि जब समय ज्यादा लगता है तो चोरी की संभावना उतनी ही कम हो जाती है। आपकी सतर्कता ही बचाव है। 

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अधेड़ नेताजी का कमसिन युवती से संबंध बनाते वीडियो वायरल, कांग्रेस या भाजपा किसके नेता जी?

रीवा मध्यप्रदेश: वीडियो में नेता अपने कपड़े उतारते हैं। फिर एक युवती के साथ आपत्तिजनक हालत में हैं। पूरे घटनाक्रम को हनी ट्रैप से जोड़कर देखा जा रहा है। उनके साथ मौजूद युवती की उम्र काफी कम लग रही है। यह वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें यह आरोप लगाए गए हैं कि वीडियो में दिखाए गए अधेड़ उम्र के पुरुष भाजपा के नेता हैं और पूर्व जनपद उपाध्यक्ष हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने भी इन्हें अपना नेता मानने से इनकार कर दिया है और इन्हें कांग्रेस का नेता बता दिया है। किसी भी पार्टी के हों, लेकिन यह तय है कि यह एक नेता हैं और अपने रसूख के दम पर अय्याशी में लिप्त हैं। 
इस संबंध में अभी तक इन नेताजी का कोई बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यह जानकारी जरूर निकल कर आ रही है कि यह नेताजी किसी भी तरह के बयान से बचते नजर आ रहे हैं और कह रहे हैं कि उन्हें इस संबंध में किसी तरह की बात नहीं करनी है। वीडियो पर चर्चा तेज होने के बाद मऊगंज के भाजपा विधायक प्रदीप पटेल ने कहा कि विनोद मिश्रा कांग्रेस नेता हैं। वहीं प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि नेताजी भाजपा विधायक के करीबी हैं। नेता की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। 

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इस पूरे मामले को हनी ट्रैप से जोड़कर भी देखा जा रहा है, क्योंकि युवती ने अपनी इंस्टा आईडी से शेयर किया था स्क्रीनशॉटवीडियो में नेता के साथ जो लड़की है, उसने अपनी इंस्टा आईडी से एक स्क्रीनशॉट पोस्ट शेयर किया था। इसमें उसने फनी बैकग्राउंड म्यूजिक लगाया था। भाजपा और कांग्रेस दोनों एक-दूसरे का नेता बता रहीमऊगंज से भाजपा विधायक प्रदीप पटेल ने कहा कि विनोद मिश्रा, श्रीनिवास तिवारी के परिवार से जुड़े रहे हैं। कांग्रेस के नेता हैं। सिद्धार्थ तिवारी बीजेपी में आ गए हैं। जमीन विवाद के एक मामले में विनोद मिश्रा के पास स्टे था।उन्होंने मुझसे मदद मांगी थी। मैंने वैध दस्तावेज और स्टे ऑर्डर होने के कारण उनका सहयोग किया था। 

जहां तक मुझे जानकारी है कि विनोद मिश्रा ने अभी तक भाजपा जॉइन नहीं की है, लेकिन इस मामले में कहीं न कहीं षड्यंत्र हो सकता है। इसकी प्रशासन को गहन जांच करनी चाहिए।कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विनोद शर्मा ने कहा कि भाजपा विधायक के करीबी का जिस तरह का वीडियो सामने आया है।
यही बीजेपी का असली चाल चरित्र है। सभी जानते हैं कि संबंधित नेता भाजपा विधायक प्रदीप पटेल का खास है। वह भाजपा से ही ताल्लुक रखता है। यह किस तरह का महिला सशक्तिकरण किया जा रहा है। इस तरह के नेता संत के वेश में कालनेमि है। धर्म की बात तो केवल कैमरे के सामने करते हैं। बाकी आसाराम को भी फेल कर दिया है।

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रसूखदार व्यापारियों का फर्जीवाड़ा उजागर, करोड़ों की सरकारी भूमि हड़पने के मंसूबों पर कलेक्टर ने फेरा पानी

ग्वालियर मध्यप्रदेश: शहर के तमाम सफेद होश व्यापारी, जो बिल्डर और कॉलोनाइजर के रूप में काम कर रहे हैं। उनके लिए यह बुरी खबर है क्योंकि अपने रसूख और सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में चल रहे काले कारनामों पर अब प्रशासन सख्ती दिखाने लगा है। शहर में ऐसे कई बिल्डर हैं जिन्होंने सरकारी जमीन घेर कर कॉलोनी बनाना अपना धंधा बना रखा है। लेकिन ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान के न्यायालय ने एक ऐसा फैसला किया है, जिसमें करोड़ों रुपए की पच्चीस बीघा सरकारी जमीन को बिल्डर से मुक्त कराने का आदेश दिया है। यह बेशकीमती जमीन शहर के कथित प्रतिष्ठित व्यापारियों द्वारा कूटचित दस्तावेज के माध्यम से हड़प ली गई थी।

ग्वालियर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के इस आदेश के बाद शहर के भूमाफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि ऐसे अन्य कई सफेदपोश कथित प्रतिष्ठित बिल्डर और कॉलोनाइजर भी हैं जो अभी तक इस प्रकार की कार्रवाई से बचे हुए हैं, लेकिन कलेक्टर की यह सख्ती यदि आगे भी जारी रहती है तो कहीं ना कहीं उनके कारनामे भी जांच के घेरे में आकर इस तरह की कार्रवाई तक पहुंच सकते हैं। इस मामले में सरकारी जमीन को गलत तरीके से काट छांटकर निजी व्यक्ति के नाम चढ़ाया गया था, फिर बिना अहम दस्तावेज के उससे खरीदकर यह बिल्डर इस जमीन का व्यावसायिक उपयोग करना चाहते थे। 

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आपको बता दें कि मेसर्स आधुनिक डेवलपर्स, क्लासिक डेवलपर्स और सुपरफाइन डेवलपर्स ने कलेक्टर न्यायालय में एक आवेदन प्रस्तुत किया था।इस आवेदन के अनुसार सर्वे क्रमांक 1616 और 1617 की भूमि से अहस्तांतरणीय शब्द को हटाने की बात कही गई थी ताकि इन कंपनी के मालिक इस जमीन का व्यावसायिक उपयोग कर सकें। कलेक्टर ने संबंधित एसडीएम को रिकॉर्ड जांचने के लिए निर्देशित किया और एसडीएम ने जांच में पाया कि यह जमीन 1962 तक सरकारी रिकॉर्ड में बीहड़ और पहाड़ के रूप में दर्ज है और 1963 में अचानक बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के ही करण सिंह पुत्र।सीताराम के नाम पर दर्ज हो गई।

किस सक्षम अधिकारी के किस आदेश के तहत किस कारण से यह जमीन करण सिंह को आवंटित की गई इसके कोई दस्तावेज नहीं मिले। एसडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर न्यायालय ने जमीन के कथित सफेद पोश मालिकों को पर्याप्त समय दिया कि वे संबंधित जमीन के दस्तावेज प्रस्तुत करें, लेकिन इन बिल्डर्स की तरफ से कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया जा सका। इस आधार पर कलेक्टर न्यायालय ने 5.403 हेक्टेयर जमीन को शासकीय घोषित कर दिया है।साथ ही एसडीएम ग्वालियर सिटी को यह निर्देश भी दिया है कि इस जमीन पर अब तक जितने भी विक्रय पत्र जारी हुए हैं।उन्हें शून्य घोषित कर विधिक कार्रवाई करे। खसरे खतौनी से निजी नाम हटाकर तुरंत मध्यप्रदेश शासन दर्ज करें। 

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ग्राम कुलेत स्थित यह 25 बीघा जमीन जिन तीन कंपनी मेसर्स आधुनिक डेवलपर्स, सुपरफाइन डेवलपर्स और क्लासिक डेवलपर्स द्वारा व्यावसायिक रूप से बेचने की जुगत लगाई जा रही थी। इन कंपनी के मालिक राजेंद्र सेठ, सुदर्शन झंवर और राजकुमार गोयल हैं जो इस जमीन को निजी बताकर व्यावसायिक रूप से बेचने की तैयारी में थे। लेकिन कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम द्वारा की गई जांच में इनका फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। जिस तरह से कलेक्ट्रेट न्यायालय में यह बिल्डर कोई सबूत पेश नहीं कर सके, उससे साफ हो गया कि गलत तरीके से सरकारी जमीन निजी नाम पर चढ़वा कर बेचने का षड्यंत्र किया जा रहा था। इस पूरे मामले ने इस हकीकत पर मुहर लगा दी है की शहर के रसूखदार बिल्डर दशकों पुराने राजस्व रिकॉर्ड में हेर फेर कर सरकारी संपत्तियों को निजी बनाकर उसकी बंदर बांट कर रहे हैं। अब देखना होगा कि ऐसे ही शहर के अन्य मामलों में कलेक्टर न्यायालय द्वारा क्या फैसला होता है और आगे प्रशासन उन सरकारी जमीनों को मुक्त कराने में किस तरह से कार्रवाई करता है?

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रेत माफिया भाजपा नेताओं पर हत्या का केस दर्ज, बड़ा सवाल; क्या चंबल में रेत माफिया पर विराम लगेगा?

मुरैना मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश का मुरैना और भिंड जिला अवैध रेत उत्खनन के लिए कुख्यात है। रेत माफिया इस कदर हावी है कि कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। अभी हाल ही में मुरैना में वर्णरक्षक, ऋषिकेश गुर्जर की हत्या रेत माफिया ने ट्रैक्टर से कुचलकर कर दी थी। इस हत्या के बाद मुरैना में हावी रेत माफिया का मुद्दा एक बार और गर्माया और सवाल उठने लगे कि नेताओं के संरक्षण में चल रहा रेत?माफिया कब तक ऐसे ही लोगों की जान लेता रहेगा? इस मामले के बाद पहली बार न केवल भाजपा नेताओं का नाम इस हत्या में सामने आया, बल्कि दो भाजपा नेताओं पर मामला भी दर्ज किया गया। और यह साफ हो गया कि सत्ताधारी भाजपा के संरक्षण में ही अवैध रेत उत्खनन का गंदा खेल चंबल में चल रहा है।

रेत परिवहन कर रही ट्रैक्टर को रोकने के प्रयास में 1 आरक्षक की मौत हो गई। मामले के तूल पकड़ने पर कार्रवाई शुरू हुई मुरैना जिले के दिमनी थाना ने ट्रैक्टर चालक पर एफआईआर दर्ज की और जब पता चला कि यह पूरा काम भाजपा नेता पवन तोमर और सोनू चौहान करवा रहे हैं, तो बाद में जब मामला तूल पकड़ा तो एफआईआर में इन दोनों के नाम भी जोड़े गए। अब दोनों भाजपा नेताओं और ट्रैक्टर चालक पर हत्या, अवैध उत्खनन, खनिज चोरी की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। लेकिन इन छुटभैये भाजपा नेताओं को कौन से भाजपा मंत्री का संरक्षण प्राप्त था जिसके चलते यह रेत माफिया सक्रिय था, इस बात का खुलासा अभी तक पुलिस नहीं कर सकी है और शायद आगे कर भी नहीं पाएगी?

दिमनी थाना क्षेत्र के रामपुर में 8 अप्रैल को बन विभाग की टीम गश्त पर थी। उसी समय अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली दिखाई दी, जिसे रोकने का प्रयास 1 विभाग की टीम ने किया। जब ट्रैक्टर नहीं रुका तो हृषिकेश गुर्जर ट्रैक्टर पर लटक गया, लेकिन ट्रैक्टर चालक ने ट्रैक्टर न रोकते हुए ट्रैक्टर ही 1 आरक्षक रेशे ऋषिकेश पर चढ़ा दिया और बेरहमी से ऋषिकेश की हत्या कर दी। ट्रैक्टर चालक का यह तरीका साफ बता रहा है कि उसको किसी का डर नहीं था या कहें कि उसके ऊपर किसी न किसी रसूखदार सत्ताधारी नेता या मंत्री का संरक्षण था। शुरुआत में पुलिस ने ट्रैक्टर चालक पर मामला दर्ज किया था तो वहीं वन विभाग ने ट्रैक्टर चालक के साथ भाजपा नेता पवन तोमर और सोनू चौहान पर प्राथमिकी दर्ज की थी। जिसके बाद पुलिस को भी अपनी एफआईआर में दोनों भाजपा नेताओं के नाम जोड़ने पड़े।

आपको बता दें कि चंबल अंचल में चंबल नदी से रेत के उत्खनन पर एनजीटी ने सख्ती से रोक लगा रखी है। इसके बावजूद यहाँ अवैध उत्खनन खुलेआम चलता है।यहाँ के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस अधिकारियों को भी पता है कि कौन कहां अवैध उत्खनन कर रहा है। पहले भी वन विभाग की एक जुझारू महिला अधिकारी उत्खनन के विरोध में कार्यवाही कर रही थी, जिसे दबंग सत्ताधारी नेता ने अपने प्रभाव के चलते जिले से बाहर फिकवा दिया था। मतलब साफ नजर आता है कि क्षेत्र में रेत माफिया की सत्ताधारी भाजपा से साठगांठ है। जिसके चलते प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी अपने हिस्से के टुकड़े लेकर खामोश बैठते हैं। और जो खामोश नहीं बैठता, उसे ऋषिकेश गुर्जर की तरह खामोश कर दिया जाता है।

भाजपा के कद्दावर मंत्री एदल सिंह कंसाना रेत माफिया को पेट माफिया बता चुके हैं। इस तरह उन्होंने रेत माफिया को खुलेआम अवैध कारोबार का मानो सर्टिफिकेट दे दिया है। एक और भाजपा की कद्दावर नेत्री का वह बयान अब तक याद आता है पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने चंबलपुर से गुजरते हुए जब रेत का उत्खनन देखा था तो उन्होंने भी इस पर गंभीर नाराजगी जताई थी। लेकिन रेत माफिया सत्ताधारी पार्टी में इस कदर हावी है कि उमा भारती की वह नाराजगी भी कहीं रफा दफा हो गई और रेत माफिया को संरक्षण देने वाले या कहें, रेतमातरा का संचालन करने वाले सत्ताधारी पार्टी के कद्दावर मंत्रियों और नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री की आवाज भी दबा दी।

अब आप समझिए कि मुरैना के दिमनी छाना क्षेत्र में वनरक्षक ऋषिकेश गुर्जर की रेत माफिया द्वारा हत्या के मामले में इतनी कार्रवाई क्यों करनी पड़ रही है, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है और तेरह अप्रैल को इसकी सुनवाई होनी है।अब, यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो पुलिस अधिकारियों को माननीय न्यायालय के सामने जवाब देते नहीं बनता। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है और इस जवाब की तैयारी मुरैना। पुलिस और मुरैना 1 विभाग को करनी है और वही जवाब सुप्रीम कोर्ट के सामने मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से दिया जाएगा। अब, यदि इस जवाब में कोई चूक या कमी रह जाती है, तो जिम्मेदारों को माननीय सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का सामना करना पड़ सकता है। अब देखना होगा कि तेरह अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे क्या निर्देश देती है?

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चिता पर लेट मुआवजा मांगने को मजबूर महिलाएं, विकास की खौफनाक तस्वीर

पन्ना मध्यप्रदेश: देश के विकास के लिए बनाई गई योजनाएं कई बार गरीब मजदूरों के हक को कुचलकर और उनके जीवन से खिलवाड़ करके बनाई जाती हैं। इसका एक ताजा उदाहरण पन्ना में देखने को मिला केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है केन और बेतवा नदी को जोड़ना लेकिन इस नदी को जोड़ने वाली योजना में तमाम ऐसे गाँव हैं जो डूब क्षेत्र में आ जाएंगे। गांव का अस्तित्व खत्म हो जाएगा और वहां के आदिवासियों का पूरा जीवन तहस नहस हो जाएगा। इस परियोजना में डूब क्षेत्र में आने वाले पन्ना जिला के 8 गाँव के आदिवासी 6 दिन से ढोलन बांध क्षेत्र में प्रदर्शन कर रहे हैं और इस प्रदर्शन के चलते ही इस बांध क्षेत्र में काम बंद है। इन आदिवासियों की मांग है कि जिस तरह छतरपुर में विस्थापितों को साढ़े बारह लाख रुपए मुआवजा दिया गया था, उसी तरह यहाँ पर भी द्वारा सर्वे कराकर इस समस्या पर ध्यान दिया जाए।

आपको बता दें कि पन्ना जिले के इन आदिवासी महिला पुरुष और बच्चों के आंदोलन ने अब तीव्रता पकड़ ली है और इस आंदोलन में आदिवासी महिलाओं ने एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया है। सांकेतिक रूप से वह चिताओं पर लेटकर मुआवजे की मांग कर रही हैं।उनका कहना है की विस्थापन के बाद उनका जीवन खत्म होना ही है, इसलिए या तो उचित मुआवजा दो या हमें जला दो। प्रशासन का यह दावा है कि आदिवासियों से ज्यादा बाहरी लोग इस प्रदर्शन में जुटे हुए हैं और इन बाहरी लोगों को प्रदर्शन से दूर रखने के लिए क्षेत्र के 14 गाँव में 6 अप्रैल से धारा 100 तिरेसठ लागू कर दी गई है। कलेक्टर पार्थ जायसवाल का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की मुआवजा बढ़ाने की मांगें भू अर्जन अधिनियम के तहत पूरी नहीं की जा सकतीं।मुआवजा सरकार भी नहीं बढ़ा सकती।शिकायत पर सर्वे कर निराकरण किया जा सकता है जिसके प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रदर्शनकारी न केवल मुआवजे की मांग कर रहे हैं, बल्कि सिस्टम पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगा रहे हैं। लगातार शिकायतें करने के बावजूद भी सुनवाई न होने पर यह प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली जा रहे थे, तभी खैरी टोल प्लाजा पर इन्हें रोक दिया गया, जिससे यह प्रदर्शनकारी वहीं नजदीक ढोहन बांध निर्माण। की जगह पर ही धरने पर बैठ गए।प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने उनके द्वारा घर घर से जुटाया गया, राशन भी छीन लिया और उनका पानी रोक दिया ताकि वे हार मानकर घर लौट जाएं। प्रदर्शनकारियों के यह आरोप गंभीर हैं और अंग्रेजों के जमाने के तानाशाह प्रशासन की याद दिलाते हैं। 

सिंधिया समर्थक दत्तीगांव ने भाजयुमो उपाध्यक्ष की नियुक्ति के विरोध में मोर्चा खोला

भोपाल मध्य प्रदेश: भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा में प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर धार जिले के बदनावर विधानसभा क्षेत्र से जय सूर्या की नियुक्ति को लेकर पार्टी के अंदर सियासी तकरार बढ़ गई है। पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे “शुभ संकेत नहीं” बताया है। आपको बता दें कि राजवर्धन सिंह सिंधिया के कट्टर समर्थक माने जाते हैं और दो हजार बीस में कमलनाथ सरकार को गिराकर जब सिंधिया ने भाजपा का दामन थामा था तो राजवर्धन सिंह भी सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे। अब आप समझ सकते हैं कि राजवर्धन सिंह का यह विरोध कहीं न कहीं भाजपा की अंदरूनी कलह पर मुहर लगा रहा है।

पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने बिना नाम लिए जय सूर्या पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को युवा मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है, वह निष्क्रिय रहने के साथ-साथ आपराधिक छवि वाला व्यक्ति है। उन्होंने दावा किया कि इस व्यक्ति पर कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं और वह पिछले दो वर्षों से जिले की राजनीति से पूरी तरह गायब रहा है।दत्तीगांव ने कहा, “मैंने पार्टी को लिखित शिकायत दे दी है। इसमें उनके क्रियाकलाप, विधानसभा चुनाव में गैरमौजूदगी और आपराधिक रिकॉर्ड का जिक्र किया गया है। यदि जरूरत पड़ी तो थाने से RTI लगाकर उनके और उनके परिवार पर दर्ज प्रकरण निकलवाए जा सकते हैं।”

राजवर्धन सिंह दत्ती गांव के इस बयान के बाद मध्यप्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और यह चर्चा चलने लगी है कि भाजपा के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। आपको बता दें कि अभी हाल ही में भाजपा द्वारा मंडल में नियुक्तियों को लेकर सिंधिया समर्थकों की उपेक्षा की गई थी और ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थकों के नामों पर अड़े हुए थे। और अब भाजयुमो उपाध्यक्ष पद पर हुई नियुक्ति पर इस तरह से खुलकर सामने आने पर सिंधिया समर्थक राजवर्धन सिंह ने एक नई बहस की शुरुआत कर दी है।

राजवर्धन सिंह दत्ती गांव ने शुभकामनाएं देते हुए कटाक्ष किया कि “यह शुभ संदेश नहीं है”। उन्होंने भाजपा के सिद्धांतों, दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी को स्वच्छ छवि और अनुशासन बनाए रखना चाहिए। अब सवाल यह है कि भाजपा का उच्च नेतृत्व इस विवादित नियुक्ति पर दोबारा विचार करेगा या अंदरूनी विरोध के बावजूद फैसले पर कायम रहेगा। अब देखना होगा कि भाजपा सिंधिया समर्थक के इस नसीहत को कितनी गंभीरता से लेती है?

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सिंधिया का समर्थकों संग सड़क पर फोटो; संदेश कुछ गहरा है?

jyotiraditya scindhia news: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अभी हाल ही में ग्वालियर दौरे पर थे, जहां भाजपा के नवीन कार्यालय के भूमि पूजन के बाद सिंधिया अपने समर्थकों के साथ निर्माणाधीन एलिवेटेड कॉरिडोर पर पहुंचे। वहां पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने कट्टर समर्थक प्रद्युमन सिंह तोमर, मोहन सिंह राठौर और तुलसी सिलावट के साथ सड़क पर बैठकर एक फोटो खिंचवाई, जो इस समय जमकर वायरल हो रही है और लोग इस फोटो पर तरह तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इस फोटो में कुछ न कुछ गहरा संदेश नजर आ रहा है। यह संदेश बहुत गहरा है, इसलिए यह एक कोई सामान्य फोटो नहीं, यह वह फोटो है जो इतिहास रच सकता है और भविष्य बदल सकता है। 

आपको बता दें कि जब मध्यप्रदेश में लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस की सरकार आई थी और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे, तो कमलनाथ से मतभेद के चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सड़क पर उतरने तक की बात कह दी थी और उस समय ज्योतिरादित्य सिंधिया की सड़क पर उतरने की बात को कमलनाथ सरकार ने हल्के में लिया था और उसका नतीजा यह हुआ कि ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी पूरी फौज के साथ कांग्रेस छोड़ भाजपा में आ गए। और मध्यप्रदेश में भाजपा जहां मजबूत हुई तो कांग्रेस पूरी तरह कमजोर हो गई। ज्योतिरादित्य सिंधिया इस सेना में एक बात बहुत खास है के तमाम सैनिक और स्पेशलार मजबूती से सिंधिया के साथ खड़े रहते हैं और जहां पाला बदलने की उम्मीद है ना के बराबर होती हैं। जो समर्थक सिंधिया के साथ भाजपा में आए थे वह आज भी खुद को भाजपाई की बजाय सिंधिया समर्थक कहते हैं। 

ज्योतिरादित्य सिंधिया का अपने समर्थकों के साथ सड़क पर बैठा यह फोटो बहुत कुछ बयां कर रहा है। अभी हाल ही में भाजपा में नियुक्तियों को लेकर और निगम मंडलों के अध्यक्ष की नियुक्तियों को लेकर भाजपा की अंदरूनी कलह किसी से छुपी नहीं है। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने खुलकर कहा कि सिंधिया की वजह से ही मंडल में नियुक्ति की सूची अटकी हुई है। ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने छह समर्थकों को कहीं न कहीं सेट कराने की बात पर अड़े हुए हैं, जिनमें मुन्नालाल गोयल, इमरती देवी जैसे प्रमुख नाम हैं। यह बात भाजपा भली भांति जानती है कि सिंधिया झुकते नहीं हैं, चाहे उन्हें सड़क पर उतरना पड़े। जिस तरह से सिंधिया ने अपने समर्थकों के साथ सड़क पर बैठकर फोटो खिंचवाई है और यह फोटो वायरल हो रही है।इस फोटो को देखकर यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि यह कहीं ना कहीं भाजपा को एक अप्रत्यक्ष चेतावनी है। 

भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा में प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर धार जिले के बदनावर विधानसभा क्षेत्र से जय सूर्या की नियुक्ति को लेकर पार्टी के अंदर सियासी तकरार बढ़ गई है। पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे “शुभ संकेत नहीं” बताया है। राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने शुभकामनाएं देते हुए कटाक्ष किया कि “यह शुभ संदेश नहीं है”। उन्होंने भाजपा के सिद्धांतों, दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी को स्वच्छ छवि और अनुशासन बनाए रखना चाहिए। अब सवाल यह है कि भाजपा का उच्च नेतृत्व इस विवादित नियुक्ति पर दोबारा विचार करेगा या अंदरूनी विरोध के बावजूद फैसले पर कायम रहेगा। आपको बता दें कि डट्टी गांव सिंधिया के कट्टर समर्थक हैं और दो हजार बीस में कमलनाथ की सरकार छोड़कर वे भी सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हुए थे। 

राजवर्धन सिंह दत्ती गांव का यह उदाहरण इसलिए दे रहा हूं कि सिंधिया के जो भी समर्थक मध्यप्रदेश में जहां भी सक्रिय हैं, वह भाजपा को दूसरे दर्जे पर रखते हैं और सिंधिया को न केवल प्रथम पायदान पर रखते हैं, बल्कि सिंधिया को ही अपना इष्ट और पूज्य मानते हैं। और यही समर्थक सिंधिया की सबसे बड़ी ताकत है और जब समर्थक इतने कट्टर हों और सिंधिया के लिए किसी भी बात बढ़ने को तैयार हो, तो फिर यदि सिंधिया भी तमाम नियुक्तियों में अपने समर्थकों को लाभ दिलाना चाहते हैं, तो निश्चित ही वह ऐसे समर्थकों के लिए किसी भी हद तक अड़ सकते हैं। अपने समर्थकों के साथ सड़क पर बैठकर फोटो खिंचाकर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साफ संदेश दे दिया है और शायद इस फोटो में यही संदेश छुपा है कि उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है। अब देखना होगा कि यह फोटो अपेक्षित परिणाम सिंधिया खेमे को दे पाने में कितना सफल होता है?

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10वी की छात्रा ने रिजल्ट से पहले तनाव में की आत्महत्या

इन्दौर मध्य प्रदेश: इंदौर के विजयनगर थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां 10वीं के परीक्षा परिणाम से आहत एक 17 वर्षीय छात्रा ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा के दबाव और मानसिक तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना विजय नगर थाना क्षेत्र के प्रकाश चंद्र सेठी नगर में रहने वाली 17 वर्षीय पलक, पिता जितेंद्र कश्यप ने अपने घर में ही आत्मघाती कदम उठा लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि छात्रा ने हाल ही में 10वीं कक्षा की परीक्षा दी थी और रिजल्ट को लेकर वह काफी तनाव में थी। परीक्षा के बाद से ही चले आ रहे दबाव को वह झेल नहीं पाई। वह परिजनों ने भी उसकी मानसिक स्थिति पर ध्यान नहीं दिया और यह लापरवाही परिजनों को भारी पड़ गई।

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परिजनों के मुताबिक, पलक पढ़ाई में अच्छी थी और उससे अच्छे परिणाम की उम्मीद भी की जा रही थी। लेकिन जैसे ही परीक्षा परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आया, वह मानसिक रूप से टूट गई। इसी तनाव में आकर उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया। एक दसवीं क्लास की छात्रा द्वारा इतना बड़ा कदम उठाए जाने की घटना के बाद अब पूरे परिजन और पड़ोसी अचंभित हैं।

घटना की सूचना मिलते ही विजयनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस मामले की जांच कर रही है और परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। फिलहाल इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है। फिर भी, पुलिस सभी एंगल से मामले की जांच कर रही है। लेकिन परिणाम से पहले ही छात्रा द्वारा आत्महत्या का कदम उठाना कई सवाल खड़े कर रहा है।

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