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चलते मैच में मधुमक्खियों का हमला, अंपायर की हुई मौत कई खिलाड़ी घायल

कानपुर उत्तर प्रदेश: मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत के बाद अब मधुमक्खियों के काटने से एक और मौत हो गई है। पिछले कुछ समय में मधुमक्खियों के जानलेवा हमलों की खबरें अचानक से बढ़ गई हैं। कई जगह पर इस तरह के हमलों की घटना देखी गई हैं जिसमें या तो लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं या किसी ना किसी की मौत भी हुई है। अब एक ऐसा ही मामला क्रिकेट के मैदान से निकल कर आया है जहां क्रिकेट चल रहा था। दोनों टीमें खेल रही थीं। इसी बीच अचानक ग्राउंड। पर मधुमक्खियों का बड़ा जत्था हमला कर देता है। मधुमक्खियों से बचने के लिए खिलाड़ी इधर उधर भागते हैं लेकिन इसी बीच कुछ खिलाड़ियों और एक अंपायर को मधुमक्खियाँ बुरी तरह घेर लेती है और इस हादसे में अंपायर की मौत तक हो जाती है।

यह हैरान करने वाली घटना कानपुर में क्रिकेट मैच के दौरान हुई। इस घटना ने खेल जगत को झकझोर कर रख दिया। कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन (KCA) के वरिष्ठ अंपायर मानिक गुप्ता की मधुमक्खियों के हमले के बाद मौत हो गई। 65 वर्षीय गुप्ता केडीएमए लीग के मैच में अंपायरिंग कर रहे थे, तभी शुक्लागंज के सप्रू मैदान पर मधुमक्खियों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया। इस अप्रत्याशित हादसे में कई खिलाड़ी और अंपायर घायल हुए, जबकि मानिक गुप्ता को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस घटना के बाद कानपुर के क्रिकेट जगत में शो की लहर है। हर कोई स्तब्ध है कि अचानक से यह घटना कैसे हो गई।

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यह घटना बुधवार को वाइएमसीसी और पैरामाउंट के बीच खेले जा रहे केडीएमए लीग मुकाबले के दौरान हुई। शुक्लागंज स्थित सप्रू मैदान में खेल जारी था, तभी मधुमक्खियों का एक बड़ा झुंड मैदान में आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सफेद कपड़े पहने अंपायर मधुमक्खियों के निशाने पर आ गए। करीब 10 मिनट तक झुंड मैदान में मंडराता रहा और कई खिलाड़ियों व अंपायरों को डंक मारे गए। अफरा-तफरी के बीच खेल रोकना पड़ा और सभी ने किसी तरह खुद को बचाने की कोशिश की। गंभीर रूप से घायल मानिक गुप्ता को पहले शुक्लागंज के दो निजी अस्पतालों में ले जाया गया। वहां से उनकी हालत नाजुक देखते हुए उन्हें एलएलआर अस्पताल रेफर किया गया। बाद में हृदय रोग संस्थान ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, मधुमक्खी के डंक से शरीर में तेज एलर्जिक रिएक्शन हुआ जिससे हृदय गति और रक्तचाप अचानक बढ़ गया। यह स्थिति जानलेवा साबित हुई।

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फीलखाना निवासी मानिक गुप्ता पिछले 30 वर्षों से केसीए अंपायरिंग पैनल का हिस्सा थे। उन्होंने स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर अनेक मुकाबलों में अंपायरिंग की थी। खेल के प्रति उनका समर्पण और निष्पक्षता उन्हें खिलाड़ियों और अधिकारियों के बीच सम्मान दिलाती थी। घटना के बाद केसीए चेयरमैन डॉ. संजय कपूर ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि गुप्ता खेल के लिए समर्पित और अनुभवी अंपायर थे। केसीए परिवार इस कठिन समय में उनके परिवार के साथ खड़ा है और हर संभव सहायता प्रदान करेगा।

पेनिट्रेशन नहीं तो रेप नहीं; हाईकोर्ट जज ने दिया बलात्कार पर यह फैसला

छत्तीसगढ़ डिजिटल डेस्क: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में  कहा कि ‘अगर घटना के दौरान पेनिट्रेशन नहीं हुआ तो इसे रेप नहीं, बल्कि रेप की कोशिश माना जाएगा।’ बीते सोमवार को यह फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने आरोपी की सात साल की सजा घटाकर साढ़े तीन साल कर दी। अपने इस फैसले से पहले कोर्ट ने पीड़िता के मेडिकल रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने एक अपील में यह निर्णय पारित किया। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने 16 फरवरी के आदेश में कहा, ‘इस अदालत ने माना कि दुष्कर्म सिद्ध करने के लिए ‘पेनिट्रेशन’का प्रमाण आवश्यक है, भले ही वह आंशिक ही क्यों न हो। प्रस्तुत मामले में उपलब्ध साक्ष्यों से पूर्ण बलात्कार सिद्ध नहीं होता, लेकिन आरोपी द्वारा बलात्कार का प्रयास किया जाना अवश्य सिद्ध होता है।’धमतरी जिले की निवासी पीड़िता 21 मई 2004 को जब घर पर अकेली थी तब आरोपी उसे बहाने से अपने घर ले गया और उससे कथित तौर पर दुष्कर्म किया। बाद में उसे कमरे में बंद कर उसके हाथ-पैर बांध दिए। इस घटना के संबंध में थाना अर्जुनी में मामला दर्ज कराया गया।

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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 19 गवाहों से सवाल जवाब किये। पीड़िता ने अपने बयान में आरोपी द्वारा जबरन यौन संबंध बनाने की बात कही, हालांकि जिरह में उसने ‘पेनिट्रेशन’ को लेकर विरोधाभासी बयान दिया। उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 21 जनवरी 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसे 16 फरवरी को सुनाया गया। फैसले के अनुसार उच्च न्यायालय ने पूरे मामले में साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए पाया कि पीड़िता के बयान में ‘पेनिट्रेशन’ को लेकर स्पष्टता नहीं है। न्यायालय ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों से दुष्कर्म सिद्ध नहीं होता, लेकिन आरोपी द्वारा दुष्कर्म का प्रयास किया जाना जरूर सिद्ध होता है।

उच्च न्यायालय ने गोंड को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(1) और 511 के तहत दोषी ठहराया, न कि केवल धारा 376 के तहत, और उसे तीन साल छह महीने के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, धारा 342 के तहत छह महीने की सजा भी बरकरार रखी गई। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि आरोपी द्वारा पूर्व में काटी गई सजा का समायोजन किया जाएगा। अदालत ने आरोपी की जमानत रद्द कर दी और उसे निर्देश दिया कि वह दो माह के भीतर अधीनस्थ अदालत में आत्मसमर्पण करे, वरना उसकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई की जाएगी। 

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एसबीआई योनो एप कराया डाउनलोड, और हो गई 10 लाख की ऑनलाइन ठगी

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ऑनलाइन फ्रॉड के मामले शहर में थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। एयरफोर्स से रिटायर्ड वारंट ऑफिसर के साथ ठगी हुई है। ठग ने खुद को SBI की हेड ब्रांच का अधिकारी बताकर भरोसा दिलाया कि उसे उनका लाइफ सर्टिफिकेट बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। बातचीत के दौरान उसने उन्हें YONO ऐप डाउनलोड करवाया और चालाकी से पिन नंबर पूछ लिया। इसके बाद उनके खाते से 9.87 लाख रुपए निकाल लिए गए। पीड़ित ने हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

घटना 30 दिसंबर 2025 थाना गोले का मंदिर क्षेत्र की है, एयरफोर्स से रिटायर्ड वारंट ऑफिसर 79 वर्षीय घनश्याम दत्त शुक्ल के मोबाइल पर कॉल आया। और कथित कॉलर ने पीड़ित के मोबाइल में YONO ऐप डाउनलोड करवाया। जब पीड़ित ने शक जताया कि कहीं धोखाधड़ी तो नहीं होगी, तो उसने भरोसा दिलाया कि वह सिर्फ सेवा के लिए कॉल कर रहा है।

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बस यही रिटायर्ड ऑफिसर से चूक हो गई और बातों में उलझाकर ठग ने पिन नंबर हासिल कर लिया और चार किश्तों में खाते से 9 लाख 87 हजार रुपए निकाल लिए। ठगी का शिकार होने के बाद 1 जनवरी 2026 को पीड़ित का मोबाइल भी चोरी हो गया। बाद में जब वह बैंक पहुंचे तो फ्रॉड का पता चला। बैंक से जानकारी लेने के बाद उन्होंने हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर गोला का मंदिर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार हेल्पलाइन पर ई-जीरो एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसके बाद मामला उनके पास आया है और अब इसकी जांच की जा रही है।

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अपनी बीबी का पोर्न वीडियो ही कर दिया वायरल, व्यूज की चाहत की चौंकाने वाली हकीकत

रीवा मध्य प्रदेश: सोशल मीडिया पर वायरल होने का पागलपन आजकल कुछ लोगों पर इस तरह सवार है कि वह किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।आप इंस्टाग्राम पर लड़कियों द्वारा डाले गए तमाम अश्लील वीडियो देख सकते हैं जिसमें वह सारी हदें पार कर जाती हैं। लेकिन अब एक युवक का ऐसा मामला सामने आ रहा है जिसने व्यूस पाने की और ज्यादा वायरल होने की चाह में अपने पत्नी के साथ बनाए गए अंतरंग संबंधों को कैमरे में कैद कर इंटरनेट मीडिया पर अपलोड कर दिया। और यह सब उसने सोच समझकर एक प्लानिंग के तहत किया और करने के बाद उसे इसका कोई पछतावा भी नहीं है। 

पुलिस जांच में इस पूरे मामले में जो खुलासे हो रहे हैं वह किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। आरोपी पति लंबे समय से अश्लील साइट्स देखने का आदी था और खुद को पोर्न इंडस्ट्री का स्टार समझने लगा था। इसी सनक में उसने पत्नी के साथ निजी पलों का वीडियो रिकॉर्ड किया। जब पत्नी ने वीडियो वायरल होने पर विरोध किया तो पति ने बिना किसी पछतावे के कहा कि उसने यह सब जानबूझकर किया है ताकि लोग उसे पहचानें और वह पॉपुलर हो जाए। मतलब वायरल होने कि ऐसी सनक कि इस सनक में उसने खुद के साथ साथ अपने पत्नी की इज्जत भी दांव पर लगा दी। 

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पीड़िता के परिवार ने इस पूरे मामले में दहेज का एंगल भी जोड़ दिया है और आरोप लगाया है कि इस घिनौनी करतूत के पीछे सिर्फ सनक नहीं बल्कि दहेज का लालच भी था। 10 मई को हुई शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष 3 लाख रुपये की मांग कर रहा था। 1 लाख रुपये बकाया होने के कारण आरोपी अक्सर विवाद करता था। आरोप है कि दहेज की रकम न मिलने पर उसने अपनी पत्नी से बदला लेने के लिए उसका वीडियो सार्वजनिक कर दिया और उसे कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा।

वीडियो वायरल होने के बाद जब रिश्तेदारों और गांव वालों तक यह बात पहुंची तो सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर दौड़ गई। यूजर्स ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उसने मेरी जिंदगी तबाह कर दी। वह वीडियो मेरे परिचितों को भी भेजता रहा। मैं अब समाज का सामना कैसे करूं? इंटरनेट यूजर्स इसे सिर्फ साइबर क्राइम नहीं बल्कि एक महिला की गरिमा की हत्या मान रहे हैं। रीवा के समान थाना क्षेत्र में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर ली है। पता चला है कि वह मुंबई फरार हो गया है। सीएसपी राजीव पाठक के मुताबिक पुलिस की एक टीम मुंबई भेजी जा रही है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस ने इस मामले में आईटी एक्ट और दुष्कर्म व धमकी की धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।

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रीवा से निकल कर आई यह घटना हैरान तो करती ही है। साथ में यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या आजकल पारिवारिक मूल्य और सामाजिक नीतियाँ इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि एक पुरुष इस बात का भी लिहाज नहीं कर रहा है कि वह अपनी ही पत्नी की आबरू इस तरह नीलाम कर दे। शायद हमारे कुछ पौराणिक कथाओं जैसे महाभारत में भी इस तरह की एक घटना का वर्णन है कि किस तरह खुद की जीत की सनक में पांडव अपनी पत्नी को भी दांव पर लगा देते हैं। लेकिन शायद ये कथाएं हमें यह सबक देने के लिए है कि इस तरह की घटनाओं का अंत क्या होता है और एक सभ्य समाज में इनका कोई स्थान नहीं है।

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मौसम में बदलाव के साथ बढ़ती हैं बीमारियां! क्या हैं कारण कैसे करें बचाव

डिजिटल डेस्क हेल्थ अपडेट: आप हमेशा देखते होंगे कि जब मौसम में बदलाव होता है तो बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है और हर घर में कोई न कोई वायरल इन्फेक्शन की जकड़ में नजर आता है। क्या कारण है कि मौसम बदलते ही यह बीमारियाँ बढ़ती हैं और कैसे इनसे बचा जा सकता है यह जानने के लिए आप इस पूरे आर्टिकल को आखिरी तक पढ़ें। आजकल मौसम में बदलाव के साथ कड़ाके की सर्दी कम होने लगती है और अचानक खांसी-जुकाम और सांस की बीमारियों की बाढ़ सी आ गई है। अस्पतालों में वायरल इन्फेक्शन के मरीज ज्यादा संख्या में पहुंच रहे हैं। इन बीमारियों के सिम्टम्स ने अपना पैटर्न भी बदला है। 

जब भी मौसम में बदलाव होता है तो जिन्हें मौसमी बीमारी कहते हैं उनके मरीजों में इजाफा होता है। यह कोई इत्तेफाक नहीं है। जब तापमान में उतार-चढ़ाव होता है, तो अक्सर हमारी इम्युनिटी कमजोर पड़ जाती है और हम आसानी से बीमार पड़ने लगते हैं, लेकिन इसका असली कारण सिर्फ ठंड नहीं, बल्कि हवा का सूखापन और हमारे फेफड़ों की नमी का कम होना है। एक और मौसम बदलने पर जहां हमारी इम्यूनिटी कमजोर पड़ जाती है तो वहीं मौसम बदलने पर जब एक मॉडरेट तापमान की स्थिति बनती है तो वह स्थिति कई वायरस और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल होती है और उस सामान्य तापमान में वह ज्यादा सक्रिय होते हैं और ज्यादा प्रभावशाली भी हो जाते हैं। 

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सर्दियों के दौरान हमारी इम्युनिटी अक्सर कम हो जाती है। ठंडी हवा और सूखापन हमारी सांस की नली की नमी को छीन लेते हैं। आमतौर पर, हमारे वायुमार्ग में एक सुरक्षात्मक तरल होता है जो वायरस और बैक्टीरिया को फंसाकर बाहर निकालने में मदद करता है, लेकिन सर्दियों में, विशेष रूप से हीटर और ब्लोअर के इस्तेमाल से, यह प्रोटैक्टिव बैरियर ड्राई हो जाता है। नतीजतन, वायरस और बैक्टीरिया आसानी से साफ नहीं हो पाते और सांस की नली में लंबे समय तक टिके रहते हैं, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, कई तरह के रेस्पाईटरी वायरस ठंड में ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं और आसानी से फैलते हैं। ठंड के कारण लोग बंद कमरों में एक-साथ ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे भी संक्रमण एक-दूसरे में तेजी से फैलता है।

मौसम के इस बदलाव का असर हर किसी पर एक जैसा नहीं होता। डॉक्टर बताते हैं कि इस दौरान कुछ खास लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत पड़ती है:

  • 10 साल से कम उम्र के बच्चे: क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ होता है।
  • 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग: बढ़ती उम्र के साथ उनकी इम्युनिटी कम हो जाती है और डायबिटीज या दिल की बीमारी जैसी अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
  • सांस के मरीज: जिन्हें पहले से अस्थमा, COPD या फेफड़ों की कोई पुरानी बीमारी है, उनके लिए मामूली संक्रमण भी गंभीर रूप ले सकता है।

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मौसम बदलते समय शरीर कुछ संकेत देता है जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अगर आपको लगातार खांसी आ रही हो, बहुत ज्यादा बलगम बन रहा हो, लगातार छींकें आ रही हों, सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में जकड़न महसूस हो या असामान्य थकान लगे, तो सतर्क हो जाएं। अगर खांसी-जुकाम के लक्षण उम्मीद से ज्यादा समय तक रहें या ठीक होने के बजाय बिगड़ने लगें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। मौसम के बदलाव के साथ यह बीमारियां होना आजकल सामान्य हो गया है। इसका मुख्य कारण हमारी इम्यूनिटी का कमजोर होना ही है। लेकिन इन मौसमी बीमारियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।यदि लंबे समय तक सिम्टम्स दिखाई दें तो चिकित्सकीय परामर्श से ही दवाओं का सेवन करना चाहिए। 

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जल संसाधन की भ्रष्ट मछली फसी लोकायुक्त के जाल में

कटनी मध्यप्रदेश; मध्यप्रदेश के कटनी जिले में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाई की है। जल संसाधन विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री (एसडीओ) व्ही.ए. सिद्दकी को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते लोकायुक्त की टीम ने रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी अधिकारी ने एरियर्स की फाइल आगे बढ़ाने के बदले 50 हजार रुपये की मांग की थी। फरियादी द्वारा जब बीस हजार रुपये दिए जा रहे थे तभी लोकायुक्त की टीम ने भ्रष्टाचार की इस मछली को गिरफ्त में ले लिया।

जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई जबलपुर लोकायुक्त की 7 सदस्यीय टीम ने जल संसाधन विभाग परिसर स्थित आरोपी के शासकीय निवास पर की। टीम ने पूरी रणनीति के तहत ट्रैप बिछाया था। जैसे ही फरियादी ने 20 हजार रुपये की पहली किस्त सौंपी, पहले से मुस्तैद टीम ने दबिश देकर आरोपी को रंगेहाथ पकड़ लिया।मामला वर्ष 2011-12 से लंबित एरियर्स भुगतान से जुड़ा है। सेवानिवृत्त चौकीदार कुंवरलाल रजक सहित 9 कर्मचारियों को बकाया राशि नहीं मिलने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा था। 30 अप्रैल 2025 को न्यायालय ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए लंबित एरियर्स का भुगतान करने को कहा था। आदेश के अनुसार, रजक को लगभग 8 लाख रुपये मिलना था।

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फरियादी कुंवरलाल रजक का आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारी ने फाइल आगे बढ़ाने के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। कई दिनों तक चक्कर कटवाए गए और बिना रिश्वत के भुगतान करने से इंकार कर दिया गया।

आर्थिक संकट से जूझ रहे फरियादी ने 25 फरवरी को लोकायुक्त एसपी से शिकायत की। शिकायत की पुष्टि के बाद टीम ने योजना बनाकर ट्रैप कार्रवाई की। रकम स्वीकार करते ही आरोपी को मौके पर पकड़ लिया गया। कार्रवाई के दौरान केमिकल टेस्ट और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी कर साक्ष्य सुरक्षित किए गए हैं। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

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एमपी में स्वास्थ्य सेवाएं होंगी ठप! आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मी बड़ी हड़ताल की तैयारी में!

ग्वालियर मध्य प्रदेश: मध्यप्रदेश के 30 हज़ार आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी पिछले दो दिनों से काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं और अपनी मांगें पूरी न होने पर आगे बड़ी हड़ताल की तैयारी में हैं। ये आउटसोर्स स्वास्थ्यकर्मी प्रदेश व्यापी आंदोलन के तहत सभी जिलों में काली पट्टी बांधकर काम कर विरोध जता रहे हैं। लंबे समय से यह अपनी मांगों को लेकर सरकार से गुहार लगा रहे हैं।समय समय पर आंदोलन भी करते हैं लेकिन अभी तक इनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है और इस बार सरकार को जगाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों ने एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर ली है। पूरे प्रदेश में तीस हजार से अधिक ऐसे स्वास्थ्यकर्मी हैं और यदि यह काम बंद हड़ताल पर चले जाते हैं तो प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो सकती हैं!

आउटसोर्स कर्मचारियों का कहना है कि वो 10000 महीने की नौकरी कर रहे हैं कई कर्मचारी ऐसे हैं जो 20-20 साल से नौकरी करने के बावजूद नियमित नहीं हो पाए। हड़ताल से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगीं।  कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह की अगुआई में आज आंदोलन के तहत काली पट्टी बांधकर काम कर रहे है, हमारी मांगे नही मानी तो, आने वाले समय मे CM के नाम ज्ञापन देने के बाद आगे हड़ताल में आंदोलन बदलेगा। जिस तरह की तैयारी आउटसोर्स स्वास्थ्यकर्मियों ने कर रखी है यदि उनकी नौबत आती है तो अस्पतालों का कामकाज प्रभावित हो सकता है। और पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा सकती हैं।

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इन मांगों को लेकर हो रहा आंदोलन..

आउटसोर्स कर्मचारियों को बिना शर्त के संविदा में मर्ज किया जाए

आउटसोर्स कर्मचारी के लिए न्यूनतम 21000 वेतन निर्धारित किया जाए

 रेगुलर कर्मचारियों की तरह शासकीय छुट्टियों की सुविधा दी जाए ।

6आउटसोर्स कर्मचारी को भी नियमित भर्ती में 50% आरक्षण दिया जाए ।

आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों का स्वास्थ्य बीमा कराया जावे।

ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाए

आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने बताया कि 23 और 24 फरवरी को प्रदेशभर में सामूहिक हड़ताल की जाएगी। शासकीय मेडिकल कालेज जिला अस्पताल सिविल अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शहरी स्वास्थ्य केन्द्र संजीवनी क्लिनिक पोषण पुनर्वास केन्द्र सहित जहां पर भी आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी हैं वे सभी इस हड़ताल में शामिल होंगे।संघ के अध्यक्ष का यह भी कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत सेवाएं दे रहे आउटसोर्स।कर्मचारियों को बिना किसी शर्त विभाग में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी में रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए और उन्हें संविदा में मर्ज किया जाए। संघ की साफ चेतावनी है कि जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है तब तक आंदोलन चरणबद्ध तरीके से ऐसे ही जारी रहेगा।

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मसाला फैक्ट्री में ऐसी मिलावट कि देखकर जांच अधिकारियों के उड़ गए होश!

ग्वालियर मध्य प्रदेश: अंचल मिलावट के लिए इस तरह कुख्यात है कि यहाँ वह फैक्टरियाँ जिन्हें पहले कभी सील किया गया हो उनमें फिर से मिलावट का खेल चलने लगता जब तक शिकायत न पहुंचे तब तक सोता रहता है। ऐसा ही मामला अभी हाल ही में उजागर हुआ है जहां दाल बाजार में संचालित एक मसाला चक्की पर जब खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने छापा मारा तो यहाँ धनिया मिर्ची हल्दी के साथ साथ लकड़ी का बुरादा चौकर और तमाम अन्य अपशिष्ट पदार्थ दिखाई दिए जो इन मसालों में मिलाए जा रहे थे। जिस तरह से इन मसालों में मिलावट की जा रही थी वह स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है और यह मसाला चक्की।बड़े स्तर पर इस तरह के मिलावटी मसालों का निर्माण कर रही थी। 

जैसे ही बेसमेंट में स्थित इस मसाला चक्की में खाद्य सुरक्षा अधिकारी पहुंचे तो वहां साबुत हल्दी मिर्ची और धनिया के साथ-साथ ही भारी मात्रा में चौकर लकड़ी का बुरादा और रंग रखे हुए थे। वहां के कर्मचारियों ने बताया कि कल्ली इस चक्की का मालिक है जो लकड़ी के धनिया की पिसाई में मिलाकर मिलावटी मसाला तैयार करता है। टीम ने मौके पर बड़ी मात्रा में ऐसे मिलावटी सामान को पकड़ा है साथ ही मौके से तीस किलो गरम मसाला किलो धनिया तीस किलो चौकर चालीस किलो लकड़ी का बुरादा पचास किलो साबुत धनिया और अन्य सामग्री जब्त की है। यहां बिलावटी मसाला आगे न बन सके यह सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने चक्की को सील कर दिया है और इस फर्म का पंजीयन निलंबित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

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आपको बता दें कि यह क्षेत्र मिलावटी सामग्री खासकर मसालों में मिलावट के लिए हमेशा सुर्खियों में रहा है जहां तक इस चक्की की बात है।इस पर पहले भी इस तरह की कार्रवाई हो चुकी है।इसके बावजूद भी हर बार इस चक्की का संचालक बचकर निकल जाता है और फिर यही मिलावटी जहरीला मसाला बनाने का काम शुरू कर देता है। जो साहब बताता है कि कहीं न कहीं सिस्टम इतना कमजोर है के बार बार किसी न किसी नियम से खेलकर यह संचालक बच निकलता है और फिर से लोगों की मौत का सामान बनाने लगता है। यह जानकारी मिली है कि इस चक्की से मिलावटी मसाला पिस कर बोरियों में भरकर आसपास के जिलों तक सप्लाई किया जाता है।

मिलावटी मसालों से बचने का एकमात्र उपाय है कि आप खड़े मसाले लेकर घर में ही उसकी पिसाई करें और उन्हें उपयोग करें क्योंकि जिस तरह की मिलावट इस चक्की में देखी गई है वह हैरान करने वाली है। इस तरह की मिलावटी सामग्री मसालों के साथ आपके शरीर में जा रही है और कई सारी बीमारियों का कारण बन रही है। यह मिलावट कोर थोड़े से मुनाफे की लालच में आम जनता की जिंदगी के साथ स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इस एक फैक्ट्री को तो खाद्य सुरक्षा विभाग ने सील कर दिया है लेकिन सवाल यह उठता है कि शहर में ऐसी कितनी और फैक्ट्री संचालित हो रही हैं और कितने ऐसे और मिलावटखोर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं?

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डीप फेक और एडिटेट फोटो वीडियो का है शिकार तो ऐसे करें शिकायत और हटवाएं फर्जी फोटो वीडियो

भोपाल मध्य प्रदेश: तकनीक के बढ़ने के साथ साथ तकनीक का दुरुपयोग भी बढ़ता जाता है और कई शातिर दिमाग के लोग इस तकनीक का उपयोग दूसरों को परेशान करने में करते हैं। आजकल डी फेक और आई के जरिए फर्जी फोटो और वीडियो बनाए जाते हैं।कई युवतियां जो सोशल मीडिया अकाउंट हैंडल करती हैं उनके फोटो और वीडियो निकालकर उन्हें तकनीक के माध्यम से एडल्ट कंटेंट में बदल दिया जाता है और इस तरह उन्हें परेशान किया जाता है। इस तरह की कई घटनाएं पिछले लंबे समय से देखने को मिल रही हैं। एआई का इस्तेमाल करके कई अश्लील फोटो बनाए गए और सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए जिनकी शिकायत साइबर हेल्पलाइन पोर्टल पर की गई और पीड़ितों को इस परेशानी से निजात भी मिली।

हर व्यक्ति जो आज सोशल मीडिया का प्रयोग कर रहा है वहां अपने वीडियो और फोटो पोस्ट कर रहा है।वह इस तरह के डीप फेक और एआई जनरेटेड कंटेंट का शिकार हो सकता है।इससे बचने के लिए आपको यह जानकारी होना चाहिए कि कहां शिकायत करना है और कैसे शिकायत करना है। इस तरह के कंटेंट की शिकायत के लिए आपको तमाम सावधानियों की जरूरत है जिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपका ऐसा कंटेंट डला हो उसकी लिंक उसका स्क्रीनशॉट आपको लेना चाहिए और पोस्ट किए गए कंटेंट का टाइम और तारीख भी नोट कर लेना चाहिए और इन सबको सुरक्षित रखकर आपको साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर सेल में शिकायत करनी चाहिए।

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यदि आपको इस तरह के कंटेंट किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखाई देते हैं तो आप उसी प्लेटफॉर्म पर भी रिपोर्ट कर सकते हैं। फेसबुक हो या इंस्टाग्राम या यूट्यूब? वह हर एक यूजर को रिपोर्ट या अब यूज करने का विकल्प भी देता है। इस तरह के किसी अश्लील कंटेंट को देखने पर आप उसकी रिपोर्ट कर सकते हैं या उसे अब यूज कर सकते हैं और यह शिकायत बता सकते हैं कि यह डीफाई से बनाए गए फोटो वीडियो हैं और यह प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी हटाते हुए भी इन कंटेंट को हटा देते हैं। कुछ अन्य माध्यम भी हैं जहां शिकायत करके आप इस तरह के कंटेंट को हटवा सकते हैं।

लेकिन यदि इस तरह के डीपफेक कंटेंट सोशल मीडिया पर वायरल करके आपको ब्लैकमेल किया जा रहा है तो आपके पास सबसे बेहतर विकल्प यही है कि आप देश के कानून का सहारा लें और देश के कानून द्वारा साइबर सिक्योरिटी की जो व्यवस्था दी गई है उसका उपयोग करें नजदीकी साइबर सेल में जाकर शिकायत दर्ज करें या आप यह शिकायत ऑनलाइन भी राष्ट्रीय साइबर अपराध के पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर कर सकते हैं। इस शिकायत में भी आपको स्क्रीनशॉट और लिंक बताना होता है। आपकी शिकायत की तथ्यों की जांच कर साइबर सेल संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफार्म को रिपोर्ट करता है और जल्द से जल्द इस तरह के कंटेंट हटाने का प्रयास करता है।

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हालांकि कई मामलों में यह सलाह दी जाती है कि आप अपने निजी फोटो और वीडियो सीमित लोगों तक ही रखें।उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल न करें लेकिन आज के सोशल मीडिया के युग में जहां हर व्यक्ति सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ में लगा है वहां यह संभव नहीं है और हर व्यक्ति अपने ज्यादा से ज्यादा वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर रहा है।ऐसी स्थिति में इन फोटो का दुरुपयोग होने और ब्लैक मेलिंग किए जाने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। लेकिन यदि आप एक जागरूक सोशल मीडिया उपयोग करता हैं तो सोशल मीडिया पर किस तरह से शिकायत करनी है यह भी आपको जानकारी होनी चाहिए और बहुत गंभीर परिस्थिति में साइबर सेल में किस तरह शिकायत करनी चाहिए यह भी प्रक्रिया आपको मालूम होनी चाहिए। जब भी आप इस तरह का कंटेंट देखें तो घबराने की बजाय सूझबूझ से काम लें और हर संभव प्लेटफॉर्म पर शिकायत करें। 

सराहनीय पहल; शहर में आयोजित होगा बैजू बावरा महोत्सव

ग्वालियर मध्य प्रदेश: गायन की ध्रुपद शैली में ग्वालियर को विषेष पहचान दिलाने वाले मध्यकालीन इतिहास के महान संगीतज्ञ बैजू बावरा के नाम से सभी परिचित हैं। उन्हीं बैजू के सम्मान में राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय द्वारा अनूठा प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत विश्वविद्यालय द्वारा प्रयास षिक्षा, साहित्य, कला व संगीत पीठ समिति के सहयोग से बैजू बावरा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। ध्रुपद गायन शैली पर केंद्रित इस संगीत महोत्सव का शुभारंभ 17 फरवरी को सुबह 10.30 बजे से विश्वविद्यालय के तानसेन सभागार में होगा, जो कि तीन दिन तक चलेगा। शुभारंभ दिवस की मुख्य अतिथि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा, बिहार की संकायाध्यक्ष प्रो. लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ रहेंगी, जो कि भारतीय ज्ञान परंपराः ध्रुपद गायन शैली का परंपरागत एवं वर्तमान स्वरूप’ विषय पर वक्तव्य देंगी। समापन दिवस के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे करेंगीl

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ग्वालियर को हमेशा से संगीत की नगरी माना जाता रहा है। यह शहर बैजू बावरा जैसे महान गायकों की कर्मभूमि भी रहा है। ऐसे में यह अनूठा महोत्सव संगीतज्ञों के साथ साथ शहरवासियों को बैजू की यादों से परिचित कराएगा।

इस तीन दिवसीय महोत्सव में देष के विख्यात संगीतज्ञ शिरकत कर, गायन की ध्रुपद व धमार शैलियों पर अपने विचार रखेंगे, जिनमें पद्मश्री प्राप्त कलाकार भी शामिल हैं। इनका विवरण इस प्रकार है-

17 फरवरी, सुबह 11 बजे से-

ध्रुपद कार्यशाला-

-विषय विशेषज्ञः पद्मश्री उस्ताद वासिफुद्दीन डागर, नई दिल्ली,

पखावज व्याख्यान सह प्रदर्शन

विषय विशेषज्ञ: पंडित मोहन श्याम शर्मा, नई दिल्ली

सांगीतिक प्रस्तुतियां, दोपहर 2 बजे से

ध्रुपद गायन: योगिनी तांबे, ग्वालियर, पखावज संगत: जगत नारायण शर्मा

ध्रुपद गायनः पद्मश्री उस्ताद वासिफुद्दीन डागर, पखावज संगति पं. मोहन श्याम शर्मा (नई दिल्ली)

18 फरवरी, सुबह 11 बजे से धमार कार्यशाला

विषय विषेषज्ञः डॉ. विषाल जैन, प्रयागराज

सांगीतिक प्रस्तुतियां, दोपहर 2 बजे से

सुरबहार वादन, डॉ श्याम रस्तोगी, पखावज संगति जगत नारायण शर्मा

ध्रुपद गायन, विषाल जैन (प्रयागराज), पखावज संगति जयवंत गायकवाड

19 फरवरी, सुबह 11 बजे से, ध्रुपद कार्यशाला

विषय विषेषज्ञः पद्मश्री पं. ऋत्विक सान्याल, वाराणसी

सांगीतिक प्रस्तुतियां, दोपहर 2 बजे से

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ध्रुपद गायन: आदित्य शर्मा, ग्वालियर, पखावज संगत: जयवंत गायकवाड़ ध्रुपद गायन: पद्मश्री पं. ऋत्विक सान्याल (वाराणसी), पखावज संगति:आदित्य दीप

प्रेसवार्ता के दौरान यह जानकारी कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे, कुलसचिव श्री अरूण सिंह चौहान ने दी। वार्ता में उनके साथ सांस्कृतिक समिति अध्यक्ष डॉ पारुल दीक्षित, पीआरओ कुलदीप पाठक भी उपस्थित रहे।