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मौत का हाइवे ग्वालियर भिंड चौड़ीकरण काम नहीं शुरू हो पाएगा 2026 में! जान लें कारण!

जिस तरह से नेशनल हाईवे 719 के चौड़ीकरण के काम में जिम्मेदार विभाग लेट लतीफी कर रहा है। उससे ऐसा लगता है कि विभाग के यह जिम्मेदार अधिकारी अभी और मौत का इंतजार कर रहे हैं और इनकी लेट लतीफी से हुई अन्य मौतों के लिए इन्हें ही दोषी क्यों न माना जाए।

ग्वालियर मध्य प्रदेश: लगातार हो रही मौत के चलते पूरे देश में कुख्यात ग्वालियर इटावा नेशनल हाईवे 719 चौड़ीकरण का काम अभी भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। द इंगलेज पोस्ट ने जो जानकारी जुटाई है। उसके अनुसार यह पूरा साल केवल डीपीआर और और भूमि अधिग्रहण में ही लग जाएगा। तमाम मौत और आंदोलन के बाद भी यह हाईवे कागजी कार्रवाइयों में उलझा हुआ है और इसकी फाइल एक विभाग से दूसरे विभाग में घूम रही है। पहले ये हाईवे एनएचएआई को बनाना था उसके बाद यह काम एमपीआरडीसी को दे दिया गया लेकिन अब एनएचएआई ने इस प्रोजेक्ट को फिर से अपने हाथ में ले लिया है और अब इसका निर्माण एनएचएआई द्वारा किया जाएगा। मतलब दो हजार पच्चीस तो यह निर्णय लेने में ही लग गया कि कौन सी एजेंसी इसका निर्माण कराएगी। इसके बाद भी अभी इस हाइवे के चौड़ीकरण का काम खटाई में पड़ सकता है। जो सबसे बड़ी रुकावट है उसकी जानकारी भी मिली है।

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आपको बता दें कि लगातार हो रहे हादसों और उनमें मौत को लेकर ग्वालियर इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग 719 सुर्खियों में है। पूरे देश में राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने के बड़े बड़े दावे विभाग के मंत्री नितिन गडकरी द्वारा समय समय पर किए जाते हैं। लेकिन ग्वालियर भिंड के बीच मौतों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है और लगता है कि यह जानकारी एनएचआई के जिम्मेदारों द्वारा संबंधित विभाग के संवेदनशील मंत्री नितिन गडकरी को नहीं दी जा रही है। यही कारण है कि चुटकियों में दस बीस हजार करोड़ के हाइवे बनाने का दावा करने वाले मंत्री के होते हुए भी ग्वालियर इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग का काम लटका हुआ है। अभी तक इसे बनाये जाने की डीपीआर तक तैयार नहीं हुई है। डीपीआर तैयार होने और भूमि अधिग्रहण में ही यह एक साल और निकल जाएगा और इसके बाद भी इस चौड़ीकरण में और देरी अन्य कारणों से हो सकती है।

एनएचआई प्रोजेक्ट मैनेजर उमाकांत मीणा का कहना है कि यह फाइल अब एनएचएआई के पास है। अभी इसकी डीपीआर तैयार की जा रही है। उनके अनुसार यह डीपीआर अप्रैल तक तैयार होने की संभावना है और डीपीआर के बाद में भूमि अधिग्रहण के लिए सबसे पहले सर्वे होगा। उसके बाद अधिग्रहण में क्या मुआवजा दिया जाना है वह सब तय होगा तब ही भूमि अधिग्रहण हो सकेगा। इसके चलते यह पूरा साल ऐसे ही निकल जाएगा। इसके अलावा उनका यह भी कहना है कि यदि सरकार पैसा खर्च करे तो यह कार्य समय पर शुरू हो सकता है और यदि इसका निर्माण कार्य पीपी मोड पर कराया गया तो इस प्रोजेक्ट में और देरी हो सकती है। मतलब साफ है कि मौत के हाईवे के नाम से बदनाम हो चुके इतने लोगों की मौत की वजह बन चुके इस हाइवे के चौड़ीकरण को लेकर न तो एनएचएआई गंभीर है और न ही शायद सरकार।

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आपको बता दें कि पिछले दो महीने में ही इस हाइवे पर तमाम भीषण दुर्घटनाएं हुई हैं और यहाँ दुर्घटनाओं में अभी तक पच्चीस लोगों की मौत हो चुकी है। इस हाइवे पर होने वाली भीषण दुर्घटनाओं को देखते हुए यहां के क्षेत्रीय निवासियों और ग्वालियर भिंड के लोगों ने कई बार आंदोलन तक किए है।  लगातार हो रही दुर्घटनाओं से आक्रोशित होकर पिछले साल संत समाज भूतपूर्व सैनिकों और क्षेत्रीय लोगों ने 10 दिन तक आंदोलन किया था। उस आंदोलन के बाद ऐसा लगने लगा था कि शायद सोई हुई सरकार जाग जाएगी और एनएचएआई के गैर जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं रेंगेगी और वह गंभीरता से इस प्रोजेक्ट की फाइल को आगे बढ़ाएंगे। लेकिन हैरानी की बात है कि पिछले साल आन्दोलन में दिए गए आश्वासन के बाद तक अभी ये ही तय नहीं हो सका कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण का कार्य कौन सी एजेंसी करेगी। और अब जाकर यह तय हो सका है कि एमपीआरडीसी नहीं बल्कि एनएचएआई ही इसका निर्माण कराएगी। 

जिस तरह से नेशनल हाईवे 719 के चौड़ीकरण के काम में जिम्मेदार विभाग लेट लतीफी कर रहा है। उससे ऐसा लगता है कि विभाग के यह जिम्मेदार अधिकारी अभी और मौत का इंतजार कर रहे हैं और इनकी लेट लतीफी से हुई अन्य मौतों के लिए इन्हें ही दोषी क्यों न माना जाए। यह सवाल भी अब उठने लगे हैं। इस हाईवे का काम युद्धगति से होना चाहिए क्योंकि जितना विलंब इसके निर्माण में होगा उतनी ही अन्य दुर्घटनाओं और मौतों का खतरा जब तक बना हुआ है। यदि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी तमाम जगह करने वाले दावों की तरह इस हाइवे के लिए भी दावा कर दें तो हो सकता है कि अगले एक साल में निर्माण कार्य शुरू ही नहीं बल्कि खत्म भी हो जाए। क्योंकि उनका दावा है कि एक दिन में वर्तमान स्थिति में 29 से 38 किलोमीटर हाइवे बन रहा है और उनका लक्ष्य तो यह सीमा सौ किलोमीटर हाइवे निर्माण प्रतिदिन बढ़ाने की है। अब उनका यदि यह लक्ष्य है तो फिर आप ही समझें कि यह हाईवे कितने कम समय में बन सकता है और एनएचएआई के जिम्मेदार इसमें लेट लतीफी क्यों कर रहे हैं?

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Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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