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देश में जरूरी दवाओं की होगी किल्लत! इज़राइल ईरान युद्ध का एक और इफेक्ट!

गैस संकट की वजह से भारत में LPG संकट का सामना करना पड़ रहा है. ये गैस संकट दवाओं के प्रोडक्शन को प्रभावित कर रहा है. जरूरी दवाओं के उत्पादन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में मचे घमासान ने सिर्फ तेल और गैस संकट पैदा नहीं किया है, बल्कि इसका असर अब दवा जैसी जरूरी चीजों पर भी दिखने लगा है. ऊर्जा संकट की वजह से भारत की मुश्किल बढ़ रही है. भारत में गैस सप्लाई प्रभावित होने से पैरासिटामोल,विटामिन और हॉरमोंस जैसी जरूरी दवाओं के प्रोडक्शन में दिक्कत आने लगी है. अगर गैस की समस्या जल्द नहीं खत्म हुआ तो कई फार्मा कंपनियों को अगले 10 दिन में अपना प्रोडक्शन बंद करना पड़ सकता है. ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन का कहना है कि कच्चे माल की सप्लाई न होने से , शिपिंग कॉस्ट बढ़ने से, पैकेजिंग की समस्या बढ़ने से दवाओं की कीमतों में 10 से 20 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है. इस युद्ध की वजह से बुखार, डियबिटीज, इंफेक्शन, सांस की समस्या जैसी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की किल्लत हो सकती है.

ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है. जिसकी वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन टूट गई है. गैस का आयात-निर्यात बंद हो गया है. गैस संकट की वजह से भारत में LPG संकट का सामना करना पड़ रहा है. ये गैस संकट दवाओं के प्रोडक्शन को प्रभावित कर रहा है. जरूरी दवाओं के उत्पादन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. दरअसल दवाओं के प्रोडक्शन में प्रोपेन गैस इस्तेमाल होता है. फार्मा सेक्टर में प्रोपेन फ्यूल की तरह काम करता है, जिसका इस्तेमाल बॉयलर में होता है. वॉर की वजह से एलएनजी इंपोर्ट संकट में फंसा है. गुजरात, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की कई कंपनियों के पास सिर्फ अगले 10 दिन का स्टॉक बचा है. अगर ये संकट जल्द नहीं खत्म हुआ तो मुश्किल और बढ़ जाएगी।

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तेल और गैस की कमी के चलते पैरासिटामोल, मेटफॉर्मिन, मेट्रोनिडाजोल, डाइक्लोफैनेक, फॉलिक एसिड और विटामिन सी जैसी दवाओं का प्रोडक्शन अटक रहा है. फार्माएक्ससिल के पूर्व चेयरमैन दिनेश दुआ की माने तो 200 के करीब दवा मैन्युफैक्चरर्स के पास अब स्टॉक नहीं बचा है और वो अगले 7 से 10 दिन में अपना प्रोडक्शन बंद कर सकते हैं. भारत वैश्विक फार्मा सप्लाई चेन का एक बड़ा सेंटर है. भारत की जेनेरिक दवाइओं का दबदबा है. जेनेरिक दवाओं में भारत की हिस्सेदारी 20 फीसदी की है. अमेरिका का सबसे बड़ा इंपोर्टर भी भारत ही है. लेकिन भारत का ये सेक्टर आयात पर निर्भर है. ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध की वजह से कच्चे सामान की किल्लत हो गई है, जिसके वजह से अब ये फार्मा सेक्टर मुश्किल में फंस गया है. दवा की तरह की डेयरी सेक्टर की भी मुश्किल बढ़ रही है. उनके पास पैकेजिंग की दिक्कत आ रही है. गैस संकट की वजह से दूध की पैकेजिंग मुश्किस हो रही है. महाराष्ट्र के डेयरी मालिकों का कहना है कि अगर गैस संकट जल्द खत्म नहीं हुआ तो उन्हें प्रोडक्शन रोकना पड़ जाएगा।

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Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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