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लखनऊ अग्निकांड में 15 की मौत; वजह यह 15 खामियां 

शहर में संचालित तमाम व्यावसायिक गतिविधियों राम भरोसे चल रही हैं। ऐसे तमाम व्यावसायिक संस्थान हैं, चाहे होटल हों, चाहे बैंक हों, चाहे अस्पताल हों। अग्नि सुरक्षा के नियम ताक पर रखकर कई व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। लेकिन नगर निगम घल्लू घारा करके कागजों पर कई संस्थानों को तो अनुमति तक दे देता है और जो बिना अनुमति के भी चल रही है,

लखनऊ उत्तर प्रदेश डिजिटल डेस्क: लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड के बाद कार्रवाई की खानापूर्ति शुरू हो चुकी है। और यह खानापूर्ति केवल लखनऊ में ही नहीं, देश के तमाम शहरों में शुरू हुई है। ऐसे तमाम भवनों की जांच पड़ताल शुरू हो गई है, जो संबंधित नगरीय निकाय के नियमों के अनुसार संचालित नहीं हो रहे हैं। लेकिन यह भी हकीकत है की सांप निकल जाने पर लाठी पीटने की मानसिक बीमारी से हमारे जिम्मेदार बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। कुछ दिन तक जांच पड़ताल की कार्रवाई होगी। अपनी जेबें भरी जाएंगी और फिर इस घटना को भुला दिया जाएगा। क्योंकि ऐसी एक घटना कुछ ही दिन पहले 3 जून को दिल्ली के एक होटल में भी हुई थी, उस समय भी तमाम कार्रवाई के कागजी घोड़े दौड़ाए गए थे। जो दिल्ली सहित देश के तमाम शहरों में दौड़े थे।

हालात तो लगभग सभी शहरों के एक जैसे हैं जहां खामियां और लापरवाहीयां कागजों में खानापूर्ति करके दबा दी जाती है। बात ग्वालियर की करें तो यहां शहर के थाटीपुर मुरार लक्ष्मीबाई कॉलोनी सिटी सेन्टर, हजीरा, तानसेन नगर, विनयनगर, डीडी नगर गोले का मंदिर रॉक्सी जैसे क्षेत्र में सैकड़ों कोचिंग संचालित हैं। इसमें से तमाम कोचिंग घरेलू भवनों में ही संचालित हो रही है। लेकिन जानकारी मिली है कि केवल तीन कोचिंग पर ही फायर एनओसी है। यह हालत तब है, जब तीन जून को दिल्ली होटल में हुए अग्निकांड के बाद भी ग्वालियर के नगर निगम के जिम्मेदारों ने कार्रवाई के कागजी घोड़े दौड़ाए थे। लेकिन ज्यादातर कार्रवाई शायद अपनी जेब भरने तक सिमट कर रह गई।

केवल कोचिंग संस्थान ही नहीं, शहर में संचालित तमाम व्यावसायिक गतिविधियों राम भरोसे चल रही हैं। ऐसे तमाम व्यावसायिक संस्थान हैं, चाहे होटल हों, चाहे बैंक हों, चाहे अस्पताल हों। अग्नि सुरक्षा के नियम ताक पर रखकर कई व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। लेकिन नगर निगम घल्लू घारा करके कागजों पर कई संस्थानों को तो अनुमति तक दे देता है और जो बिना अनुमति के भी चल रही है, वे बिना जिम्मेदारों की कृपा यह संरक्षण के चल रही हों, यह भी संभव प्रतीत नहीं होता। यकीन मानिए। ऐसे तमाम भवनों में आपकी जान जोखिम में है क्योंकि सुरक्षा मानक के साथ कागजों पर खिलवाड़ किया जाता है। अग्नि सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। 

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लखनऊ के पास इलाके अलीगंज में 1 3 मंजिला इमारत मैं। यह अग्निकांड हुआ है। यह अग्निकांड एसी में शॉर्ट्स सर्किट के चलते हुआ है। मरने वालों में ज्यादातर लोग दम घुटने की वजह से मरे हैं। मरने वालों में कोचिंग के शिक्षक, कर्मचारी और छात्र शामिल हैं। यह भवन आवासीय क्षेत्र अलीगंज में है। सर्किट से लगी आग कुछ ही मिनटों में पूरे बिल्डिंग में फैल गई। पहली और दूसरी मंजिल पर गेमिंग जोन कोचिंग और एनिमेशन सेन्टर था, जहां के छात्र उन्हीं मंजिल पर फंस गए, कुछ छात्रों ने आगे बालकनी में आकर केबल के सहारे नीचे उतरकर अपनी जान बचाई। घटना इतनी भयावह थी कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में अपना भाषण बीच में ही छोड़कर लखनऊ ट्रॉमा सेन्टर पीड़ितों को देखने पहुंच गए। 

ऐसी क्या खामियां और लापरवाही रही जिसके चलते इतना बड़ा भीषण कांड हो गया, चाहे बात तीन जून को हुए दिल्ली के होटल के अग्निकांड की करें चाहे बाईस जून को लखनऊ में हुए इस अग्निकांड की। चाहे आपके शहर में आने वाले दिनों में होने वाले अग्निकांड की हर जगह खामियां और लापरवाहीयां लगभग समान है। इस पूरे मामले में आवासीय क्षेत्र में इस भवन में व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन जिम्मेदारों की एक बड़ी खामी उजागर कर रहा है। जिस भवन में आग लगी उसका नक्शा पास करने वाले भी कटघरे में है। इस भवन में सीढ़ियां पहले मंजिल तक ही थी ऊपर जाने के लिए लिफ्ट का प्रयोग होता था। अग्निकांड में लिफ्ट बंद हो गई और सीढ़ियां न होने के कारण लोग ऊपर फंस गए। इस भवन को फायर सेफ्टी एनओसी नहीं मिली थी, फिर भी यहाँ व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन हो रहा थ। 2016 मैं इस भवन को अवैध बताते हुए इसे नोटिस दिया गया था, लेकिन दस साल में भी कोई कार्रवाई जिम्मेदारों ने नहीं की थी। गर्मियों में एसी में शॉर्ट सर्किट की घटनाएं बढ़ी हैं। इसका कारण एसी की सर्विस में लापरवाही बरतना या एसी को लगातार कई घंटों तक लो टेंपरेचर पर चलाना, जिससे कंप्रेसर पर और कॉइल पर ज्यादा दबाव पड़ता है जिसके चलते एसी ब्लास्ट होते हैं। इस भवन में तमाम फर्नीचर, लकड़ी एवं अन्य ज्वलनशील सामग्री होने के चलते आग और तेजी से भड़की। इस भवन में निकासी का केवल एक ही रास्ता था। कोई भी इमरजेंसी एग्जिट नहीं था जिसके चलते अंदर फंसे लोग सुरक्षित बाहर नहीं निकल सके। तमाम अग्निकांड की तरह इस अग्निकांड के बाद भी अग्निशमन दस्ता तुरंत नहीं पहुँचा। इस देरी के चलते भी आग पूरे बिल्डिंग में फैल गई। जिस यूपी में हर जगह बुलडोजर चलता है, यदि इस भवन की पिछली और बगल की दीवार तोड़ने के लिए भी बुलडोजर तुरंत पहुंचकर दिवाल तोड़ देता तो लोग सुरक्षा बाहर निकल सकते थे। कुछ पुलिसकर्मी हथौड़े से दीवार तोड़ते नजर आ रहे हैं। लेकिन हथौड़े से दीवार तोड़ने में बहुत देर हो चुकी थी और उस टूटी हुई दीवार से किसी को भी जिंदा बाहर नहीं निकाला जा सकता, बल्कि मृत शरीरों को बाहर निकाला गया। 

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आप जिस शहर में रहते हैं आप या आपके परिजन जिस व्यावसायिक संस्थान अस्पताल होटल कोचिंग में जाते हैं, वहां किस तरह की खामियां हैं? यदि वह देखकर आप खुद खामोश हैं, आप आवाज नहीं उठाते हैं, तो कहीं न कहीं इस तरह की अग्नि कांड की घटनाओं के दोषी आप भी हैं। जो लोग अनुमति देने और नियम बना के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे हैं, यकीन मानिए उनकी जिम्मेदारी केवल फाइलों पर खानापूर्ति करने तक सीमित हो चुकी है। ज्यादा कुछ हो तो ऐसी घटनाओं के बाद जेब भरने की कार्रवाई शुरू हो जाती है, लेकिन यदि आप इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति अपने शहर में नहीं चाहते तो जरूरत है। क्या आप खुद जागरुक बने और ऐसी किसी भी खामी और लापरवाही पर सिस्टम को चेताएँ सूचित करें और जब तक व्यवस्था न सुधरें, आवाज उठाते रहें। यकीन मानिए।यदि जिम्मेदार सोए हुए हैं, तो उनको जगाने की जवाबदेही हर एक आम व्यक्ति की है औरेदी आप चाहते हैं कि अगला आदमी कांड आपके साथ न हो तो यह जवाबदेही जरूर निभाएं।

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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