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कोचिंग संस्थानों पर राज्य सरकार कसेगी शिकंजा, बनने जा रहा है सख्त कानून

अभी तक कोचिंग संस्थानों की फीस, पढ़ाई के घंटे, शिक्षकों की नियुक्ति और अन्य व्यवस्थाओं पर कोई स्पष्ट नियंत्रण नहीं है। अलग-अलग विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई करते हैं, लेकिन पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था नहीं है। नया कानून लागू होने के बाद सभी कोचिंग संस्थानों के लिए एक जैसे नियम लागू होंगे। 

भोपाल मध्य प्रदेश:  मध्य प्रदेश में आप पंजीकृत मनमाने तरीके से चल रहे कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर जल्द ही रोक लगने वाली है।। विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और मनमाने शुल्क पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार कोचिंग संस्थान विनियमन कानून लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून के तहत 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कोचिंग संस्थानों में प्रवेश नहीं दिया जा सकेगा। इसके साथ ही बिना पंजीयन संचालित होने वाले संस्थानों और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस कानून का प्रारूप तैयार कर लिया है और इसे 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भारत सरकार ने सभी राज्यों को कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए कानून बनाने संबंधित मॉडल का ड्राफ्ट भेजा था। उस आदेश के दो वर्ष बाद अब मध्यप्रदेश में कोचिंग नियंत्रित करने के लिए कानून बनने जा रहा है।उच्च शिक्षा विभाग ने इसका प्रारूप तैयार कर लिया है। इसमें कोचिंग संस्थानों के पंजीयन के साथ साथ कई सारे नियमों का समावेश किया जा रहा है। अभी तक मध्य प्रदेश में कोचिंग संस्थान मनमाने ढंग से चल रहे हैं। कोई मजबूत नियमावली नहीं है। फीस लेने से लेकर पढ़ाई के लिए रखे गए शिक्षकों की योग्यता, सही बैठने की व्यवस्था या सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई नियंत्रण नहीं है। हालांकि, जिला प्रशासन और अन्य विभाग कोई अनियमितता पाए जाने पर अपने हिसाब से कार्रवाई करते हैं। लेकिन कोई स्थायी नियम न होने के वजह से कई बार दुविधा की स्थिति भी बनती है।

यह नया कानून सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए मॉडल एक्ट के आधार पर तैयार किया जा रहा है। अभी तक कोचिंग संस्थानों की फीस, पढ़ाई के घंटे, शिक्षकों की नियुक्ति और अन्य व्यवस्थाओं पर कोई स्पष्ट नियंत्रण नहीं है। अलग-अलग विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई करते हैं, लेकिन पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था नहीं है। नया कानून लागू होने के बाद सभी कोचिंग संस्थानों के लिए एक जैसे नियम लागू होंगे। प्रस्तावित कानून के अनुसार किसी भी कोचिंग संस्थान को संचालन से पहले अनिवार्य रूप से पंजीयन कराना होगा। इसके लिए भवन अनुज्ञा, फायर सेफ्टी और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी होगा।

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सरकार का मानना है कि कम उम्र में बच्चों पर अत्यधिक पढ़ाई और लगातार टेस्ट का दबाव मानसिक तनाव पैदा करता है। इसलिए नए कानून में 16 वर्ष से कम आयु के विद्यार्थियों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही छात्रों के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता और काउंसलिंग की व्यवस्था करना भी अनिवार्य होगा। कोचिंग संस्थानों पर आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों द्वारा शिक्षण कार्य किए जाने के चलते कई आपराधिक घटनाओं की खबरें भी कई बार सामने आई हैं। कोचिंग संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए भी नियम बनाए गए हैं। किसी भी नैतिक अपराध में दोषी व्यक्ति को अध्यापन कार्य की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा शिक्षकों का कम से कम स्नातक होना जरूरी होगा।

यदि कोचिंग संस्थान को नियंत्रित करने के लिए कानून लागू हो जाता है तो इसका सीधा लाभ छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा। छात्रों पर पड़ रहे अतिरिक्त बोझ में कमी आएगी। साथ ही कोचिंग संस्थानों पर छात्रों के साथ होने वाले लापरवाही और दुर्व्यवहार में भी कमी आएगी। साथ ही जो कोचिंग संस्थान व्यवस्थित रूप से चल रहे हैं, उन्हें भी इस नए कानून का लाभ मिलेगा क्योंकि जो कोचिंग अच्छे मापदंड पर संचालित हो रहे हैं उनके प्रति छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बढ़ेगा और वे आसानी से नए कानून के अनुसार कोचिंग संचालित कर पाएंगे, लेकिन अव्यवस्थित और आदि अधूरी तैयारियों से कोचिंग चलाने वालों के लिए यह कानून मुश्किल पैदा कर सकता है।

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Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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