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डांसर की बेटी से अवैध संबंध के चलते कर दी डांसर की हत्या

सागर मध्य प्रदेश: सागर जिले की खुरई से अवैध संबंध और हत्या का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्रामीण थाना पुलिस ने लगभग दो महीने पुराने चर्चित डांसर के हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी के मृतका डांसर की बेटी से भी संबंध बन गए थे। जब इस बात का पता डांसर को चला तो दोनों के बीच विवाद हुआ और इसी दौरान आरोपी ने गला दबाकर हत्या कर दी थी। आरोपी ने शव को घर के डबल बेड मेमं छिपा दिया था और फरार हो गया था। बाद में डांसर का शव सड़ी-गली अवस्था में बरामद हुआ था। थाना प्रभारी संतोष सिंह दांगी ने खुलासा करते बताया कि महिला डांसर की हत्या करने वाले आरोपी सुरेंद्र अहिरवार (32) को गिरफ्तार कर लिया है।

 आरोपी डांसर के साथ नाच-गाने के कार्यक्रमों में जुड़ा रहता था और कार्यक्रमों की बुकिंग कराने सहित अन्य व्यवस्थाएं देखता था। पुलिस के अनुसार डांसर के बेटे और बेटी ने 11 अप्रेल को उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। परिजनों ने बताया था कि वह कुछ दिनों के लिए रिश्तेदारी में गए हुए थे और 5 अप्रेल से उनकी मां का मोबाइल बंद आ रहा था। घर लौटने पर मकान के बाहर ताला लगा मिला। पुलिस की मौजूदगी में जब घर खोला गया तो अंदर से तेज बदबू आने लगी। तलाशी के दौरान ममता का शव डबल बेड के बॉक्स में छिपा मिला, जो सड़ चुका था।

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मृतिका नाचने का काम करती थी। उसी के साथ आरोपी सुरेंद्र अहिरवार (32) निवासी सिंगपुर भी काम करता था. महिला के डांस कार्यक्रमों के लिए वह ग्राहक उपलब्ध कराता था। महिला के पति की पहले मृत्यु हो चुकी थी ऐसे में आरोपी के महिला से अवैध संबंध भी थे। इसके साथ ही आरोपी के महिला की बेटी से भी अवैध संबंध बन गए थे। इस बात की जानकारी जब महिला को हुई तो दोनों के बीच जमकर विवाद हुआ. इसी विवाद में आरोपी ने महिला का हाथ से गला दबा दिया। जिसमें महिला की मौत हो गई. इसके बाद महिला का शव डबल बेड पलंग में छिपा दिया ताकि किसी को पता नहीं चले और घर के बाहर ताला लगाकर फरार हो गया था। 1 अप्रैल को सुरेन्द्र को साथ लेकर महिला करीला गई हुई थी. 4 अप्रैल को दोनों वापस खुरई आए और 5 अप्रैल की रात को आरोपी ने घटना को अंजाम दिया।

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कोचिंग संस्थानों पर राज्य सरकार कसेगी शिकंजा, बनने जा रहा है सख्त कानून

भोपाल मध्य प्रदेश:  मध्य प्रदेश में आप पंजीकृत मनमाने तरीके से चल रहे कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर जल्द ही रोक लगने वाली है।। विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और मनमाने शुल्क पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार कोचिंग संस्थान विनियमन कानून लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून के तहत 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कोचिंग संस्थानों में प्रवेश नहीं दिया जा सकेगा। इसके साथ ही बिना पंजीयन संचालित होने वाले संस्थानों और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस कानून का प्रारूप तैयार कर लिया है और इसे 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भारत सरकार ने सभी राज्यों को कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए कानून बनाने संबंधित मॉडल का ड्राफ्ट भेजा था। उस आदेश के दो वर्ष बाद अब मध्यप्रदेश में कोचिंग नियंत्रित करने के लिए कानून बनने जा रहा है।उच्च शिक्षा विभाग ने इसका प्रारूप तैयार कर लिया है। इसमें कोचिंग संस्थानों के पंजीयन के साथ साथ कई सारे नियमों का समावेश किया जा रहा है। अभी तक मध्य प्रदेश में कोचिंग संस्थान मनमाने ढंग से चल रहे हैं। कोई मजबूत नियमावली नहीं है। फीस लेने से लेकर पढ़ाई के लिए रखे गए शिक्षकों की योग्यता, सही बैठने की व्यवस्था या सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई नियंत्रण नहीं है। हालांकि, जिला प्रशासन और अन्य विभाग कोई अनियमितता पाए जाने पर अपने हिसाब से कार्रवाई करते हैं। लेकिन कोई स्थायी नियम न होने के वजह से कई बार दुविधा की स्थिति भी बनती है।

यह नया कानून सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए मॉडल एक्ट के आधार पर तैयार किया जा रहा है। अभी तक कोचिंग संस्थानों की फीस, पढ़ाई के घंटे, शिक्षकों की नियुक्ति और अन्य व्यवस्थाओं पर कोई स्पष्ट नियंत्रण नहीं है। अलग-अलग विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई करते हैं, लेकिन पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था नहीं है। नया कानून लागू होने के बाद सभी कोचिंग संस्थानों के लिए एक जैसे नियम लागू होंगे। प्रस्तावित कानून के अनुसार किसी भी कोचिंग संस्थान को संचालन से पहले अनिवार्य रूप से पंजीयन कराना होगा। इसके लिए भवन अनुज्ञा, फायर सेफ्टी और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी होगा।

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सरकार का मानना है कि कम उम्र में बच्चों पर अत्यधिक पढ़ाई और लगातार टेस्ट का दबाव मानसिक तनाव पैदा करता है। इसलिए नए कानून में 16 वर्ष से कम आयु के विद्यार्थियों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही छात्रों के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता और काउंसलिंग की व्यवस्था करना भी अनिवार्य होगा। कोचिंग संस्थानों पर आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों द्वारा शिक्षण कार्य किए जाने के चलते कई आपराधिक घटनाओं की खबरें भी कई बार सामने आई हैं। कोचिंग संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए भी नियम बनाए गए हैं। किसी भी नैतिक अपराध में दोषी व्यक्ति को अध्यापन कार्य की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा शिक्षकों का कम से कम स्नातक होना जरूरी होगा।

यदि कोचिंग संस्थान को नियंत्रित करने के लिए कानून लागू हो जाता है तो इसका सीधा लाभ छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा। छात्रों पर पड़ रहे अतिरिक्त बोझ में कमी आएगी। साथ ही कोचिंग संस्थानों पर छात्रों के साथ होने वाले लापरवाही और दुर्व्यवहार में भी कमी आएगी। साथ ही जो कोचिंग संस्थान व्यवस्थित रूप से चल रहे हैं, उन्हें भी इस नए कानून का लाभ मिलेगा क्योंकि जो कोचिंग अच्छे मापदंड पर संचालित हो रहे हैं उनके प्रति छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बढ़ेगा और वे आसानी से नए कानून के अनुसार कोचिंग संचालित कर पाएंगे, लेकिन अव्यवस्थित और आदि अधूरी तैयारियों से कोचिंग चलाने वालों के लिए यह कानून मुश्किल पैदा कर सकता है।

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हैवानियत; पड़ोसी पति पत्नी ने मासूम बच्ची के साथ की बर्बरता, हुई मौत

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर के पुरानी छावनी क्षेत्र से हैवानियत की एक ऐसी तस्वीर निकलकर आई है कि इसे अंजाम देने वाले पति पत्नी को शायद आप इंसान मानने से ही इनकार कर दें। मामला बरा गांव क्षेत्र का है, जहां एक मासूम बच्ची पर चोरी के शक में इस तरह से बर्बरता की गई की देखने और सुनने वाले के रोन्गटे खड़े हो गए। मात्र आठ साल की मासूम बच्ची के साथ वह सब कुछ किया गया जो शायद हकीकत में हुआ है इस बात पर अभी भी यकीन नहीं हो रहा। बर्बरता इस हद तक की गई की बच्ची ने अंत में दम तोड़ दिया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि ऐसी बर्बरता करने पर पड़ोस के पति पत्नी का कलेजा नहीं कांपा। मानो मानव शरीर में उनके अंदर कोई हैवान सवार हो।

पुरानी छावनी के बरा गाँव में आठ वर्षीय मासूम बच्ची खेलते खेलते, अपने पड़ोसी के घर चली गई जब पड़ोसी आमिर खान अपने घर पहुंचा तो उसे बच्ची का खेलना नागवार गुजरा और आमीन और उसकी पत्नी ने यह आरोप लगाया कि इस बच्ची ने घर से रुपया और गहने चुरा लिए हैं। यह देखते हुए पहले आमिर अपनी पत्नी के साथ इस बच्ची के घर पहुंचा, वहां पूरे घर में अपना सामान ढूंढा। कुछ पैसे मिलने पर उठा लिए वो बच्ची के साथ वापस अपने घर आया। बच्ची को रस्सी पर पलंग से बांध दिया और इसके बाद इस मैचरूम बच्ची की जमकर पिटाई की। हाथ पैर से मारने पर भी मन नहीं भरा तो पति पत्नी ने मिलकर कील लगे हुए डंडों से बच्ची की पिटाई करी जिससे बच्ची के हाथ पैर लहूलुहान हो गए।

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घटना के बाद आमिर और उसकी पत्नी अपने ऑटो में बिठाकर मासूम बच्ची को उसके घर छोड़ आए। बच्ची के पिता ने अपनी बेटी को घायल अवस्था में देखा और पूरी जानकारी ली तो उसे भी यही बताया कि तुम्हारी बेटी ने गहने और पैसे चुराए हैं। बेटी की गंभीर हालत देखकर पिता को दया आई।रात में उसने बेटी से खाने पीने का पूछा लेकिन मासूम ने कुछ नहीं खाया। इसके बाद मासूम को सुला दिया, लेकिन पिता को क्या पता था के मासूम बच्ची ऐसी सोएगी कि फिर कभी नहीं उठेंगी और सुबह जब पिता उठा और बच्ची को उठाने की कोशिश की तो बच्ची नहीं उठी। बच्ची को मृत देखकर पिता और मोहल्ले वालों ने पुलिस को सूचना दी।

मानवता को दहला देने वाले इस पूरे मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मासूम बच्ची के हत्यारे आमीन को गिरफ्तार कर लिया है और उसके पत्नी को पकड़ने के लिए भी दबिश दे रही है। बच्ची के शव का जब पोस्टमार्टम किया तो उसमें मौत की वजह न्यूरोलॉजिकल। शॉक बताई गई डॉक्टर्स का कहना है कि ऐसी स्थिति में मस्तिष्क और मेरूदंडू के बीच संपर्क बाधित हो जाता है। यह अत्यंत आपातकालीन चिकित्सकीय स्थिति है। ऐसी स्थिति में, तंत्रिका तंत्र पूरी तरह से प्रभावित होने के चलते पीड़ित को बचाना मुश्किल हो होता है। मासूम को बहुत ज्यादा पीड़ा देकर पीटा गया, जिसकी वजह से यह स्थिति बनी।

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इस घटना की खबर के बाद पूरा बड़ा गांव दहशत में है। हर कोई यही चर्चा कर रहा है की कोई आदमी इतना निर्दय कैसे हो सकता है कि एक मासूम बच्ची को इतनी बेरहमी से मारे कि उसकी मौत हो जाए। आमीन और उसकी पत्नी ने जो चोरी का आरोप लगाया है, उसके बारे में भी कुछ स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। पड़ोस के लोगों का कहना है के आमीन के घर में अमरूद के पेड़ भी लगे हैं जिसकी वजह से बच्चे वहां तक चले जाते हैं लेकिन आमिर के कमरों में ताला लगा रहता है। छोटे बच्चे ताला तोड़कर चोरी नहीं कर सकते हैं। इस पूरे घटना ने और इस घटना में हुई बर्बरता ने मानवता को झंझोर कर रख दिया है।

रिश्वतखोर महिला पटवारी पति संग रंगे हाथों पकड़ी गई

ग्वालियर मध्यप्रदेश: लोकायुक्त पुलिस ने ग्वालियर में शुक्रवार शाम तहसील तानसेन के हल्का गूंधारा में पदस्थ महिला पटवारी रेखा शाक्य को किसान से रिश्वत की दूसरी किस्त लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पटवारी जमीन के सीमांकन और नामांतरण (दाखिल-खारिज) की फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर रिश्वत की मांग कर रही थी। लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही संबंधित विभाग को भ्रष्ट पटवारी पर कार्रवाई के लिए लिखा है। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक निरंजन शर्मा ने बताया कि सिरसौद मुरार निवासी मंशाराम ने 16 जून 2026 को लोकायुक्त कार्यालय ग्वालियर में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इसी लिखित शिकायत पर जांच करने के बाद लोकायुक्त ने संबंधित पटवारी पर कार्रवाई की है। 

उन्होंने बताया था कि ग्राम गूंधारा में उसकी बहन गुड्डी की जमीन का सीमांकन होना था। उसकी पत्नी सावित्रीबाई के नाम पर जमीन का नामांतरण होना था। इस कार्य को करने के एवज में हल्का पटवारी रेखा शाक्य पत्नी कृष्णकांत शाक्य लगातार चक्कर कटवा रही थी और 15,000 रुपए की रिश्वत मांग रही थी। शुक्रवार को तय रणनीति के मुताबिक, लोकायुक्त की टीम ने बताए गए घटना स्थल पर दबिश दी। और पटवारी और उसके पति को रंगे हाथों पकड़ लिया। आपको बता दें कि नामांकन बटांकन के तमाम मामले राजस्व विभाग में लंबित हैं और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होते हुए भी इन लंबित मामलों को निपटाने का प्रयास नहीं चलता। इसके चलते ही पटवारियों के हौसले बुलंद हो जाते हैं और वह रिश्वतखोरी का खेल शुरू कर देते हैं। 

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उपनगर मुरार स्थित पूनम माथुर के मकान की तीसरी मंजिल पर बने एक कमरे में जैसे ही पीड़ित मंशाराम ने पटवारी रेखा शाक्य को रिश्वत की अगली किस्त के 5,000 रुपए थमाए, वैसे ही आसपास सादे कपड़ों में तैनात लोकायुक्त की टीम ने उसे दबोच लिया।जब पटवारी के हाथ केमिकल युक्त पानी से धुलवाए गए, तो उनका रंग गुलाबी हो गया, जो इस बात का पक्का वैज्ञानिक सबूत है कि नोटों को आरोपी ने ही छुआ था। लोकायुक्त ने आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 7 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। 

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मुरैना मध्य प्रदेश: मुरैना से बैंक सुरक्षा की लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आ रहा है जो बता रहा है के सत्ता पक्ष में रसूख रखने वालों के लिए बैंक के नियम भी बौने होते हैं। मामला भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर से जुड़ा हुआ है। जो अपने निर्धारित कार्यक्रम के लिए मुरैना पहुंचे थे, कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले ही नेताजी को लघु शंका ( सूसू) लग जाती है और प्रेशर इतना होता है कि वे सह नहीं पाते और वहां एक बैंक रात में ही खुलवा देते हैं, जिससे वे बैंक के अंदर साफ सुथरे शौचालय में सूसू कर सकें। अब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग तरह तरह के कमेंट कर रहे हैं।

बुधवार को मुरैना में भाजपा युवा मोर्चा का कार्यक्रम था, जिसमें भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर को शामिल होना था। वे मुरैना पहुंचते हैं। उनके साथ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के बड़े पुत्र देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर और कई अन्य नेता भी थे। कार्यक्रम जीवाजीगंज स्थित गर्ग सेवा सदन में था। युवा संवाद के नाम से आयोजित कार्यक्रम में ट्रेलर को युवाओं को संबोधित करना था। कार्यक्रम पूरी तरह तैयार था। कार्यक्रम स्थल पर जब टेलर का काफिला पहुंचा तो कार्यक्रम स्थल से कुछ ही मीटर पहले काफिला रुक जाता है। जहां काफिला रुकता है वहां व्यावसायिक एवं औद्योगिक सहकारी बैंक का दरवाजा होता है। कुछ ही देर में बैंक का मेन गेट सुरंग के सभी गेटों के ताले खोल दिए जाते हैं। भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर कुछ अन्य लोगों के साथ बैंक के अंदर घुस जाते हैं और लगभग दस मिनट के बाद बैंक से बाहर निकलते हैं। यह घटना सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में दिखाई दे रही है।

इस घटना के बारे में जब बाद में आयोजकों से पूछा गया तब यह जानकारी मिली कि नेताजी को सूसू लगी थी। और इसी वजह से नेताजी के लिए बैंक के ताले खोले गए और वे बैंक के अंदर गए। यह जानकारी भी सामने आई है की बैंक के ताले संचालक मंडल की अध्यक्ष गीता गोयल के पति, वह भाजपा नेता अनिल अल्ली के मौखिक निर्देश पर खोले गए। जब सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा और बैंक के जिम्मेदार लोगों से भी इस घटना के बारे में पूछा गया तो बैंक प्रबंधक अर्जुन सिंह परिवार ने घटना पर बिल्कुल भी गंभीरता न लेते हुए कहा कि बैंक की गैलरी को खुलवाया गया था।बैंक के अंदर कोई नहीं गया। लेकिन इस पूरे मामले में बैंक की सुरक्षा से किस तरह खिलवाड़ किया गया, इस बारे में कोई जिम्मेदार कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

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यहां सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है ही जीवाजीगंज स्थित जिस गर्भ सेवा सदन में युवा समूह संवाद कार्यक्रम था, वह महज इस बैंक से कुछ दूरी पर है। इस गर्व सेवा सदन में होटल जैसी सभी सुविधाएं हैं।अच्छे कमरे हैं और साफ सुथरे टॉयलेट हैं। इस स्थान पर किसी भी तरह की कोई भी सुविधाओं का अभाव नहीं है। आवेदी गर्भ सेवा सदन कार्यक्रम स्थल पर सभी सुविधाएं हैं और यह कार्यक्रम स्थल कुछ ही दूरी पर था तो फिर नेताजी लघु शंका के लिए वहां तक क्यों नहीं पहुंचे? ऐसा क्या प्रेशर था कि आधी रात को बैंक के ताले खुलवाने पड़े।

इस पूरे मामले में जहां भाजपा के जिम्मेदार इधर उधर के जवाब देते हुए बचते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं बैंक के जिम्मेदार अधिकारी भी गोल मोल जवाब दे रहे हैं, लेकिन क्या ऐसा कोई नियम है?के नियत समय के बाद रात में बैंक के दरवाजे खोले जाएं।यदि खोले जाएं तो किन परिस्थितियों में खोले जाते हैं। क्या इस तरह सत्ताधारी पार्टी के किसी नेता के लिए रात में बैंक के ताले खोलना नियम विरुद्ध नहीं है? 

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ग्वालियर में गैंगवार! 15 मिनिट तक दो गुटों में फायरिंग से दहशत

ग्वालियर मध्यप्रदेश: ग्वालियर में बीच सड़क ताबड़तोड़ फायरिंग से दहशत फैल गई। मामला सिरोल क्षेत्र का है जहां रात 11 बजे पूरा क्षेत्र फायरिंग की गूंज से दहल उठा दो। गुट एक दूसरे पर आमने सामने से रुक रुककर फायरिंग करते रहे। पन्द्रह मिनट के दौरान बीस से ज्यादा राउंड फायर हुए। फायरिंग में दहशत के हालात यह थे कि आसपास के दुकानदार शटर गिराकर भाग खड़े हुए। हालांकि, पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की और एक गिरोह के आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है और दूसरे गिरोह के आरोपितों की तलाश की जा रही है।

मामला बुधवार रात ग्यारह बजे सिरोल क्षेत्र का है, जहां दो गुटों में चल रहा जमीन विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों आमने सामने आकर खुलेआम गोलीबारी करने लगे। पुलिस ने जानकारी दी है कि थाटीपुर छात्र में रहने वाले गौरव दीक्षित और राजा यादव पहले साझेदारी में जमीन का कारोबार करते थे। फिर व्यापार को लेकर ही दोनों में विवाद हो गया। दोनों में इतना विवाद बढ़ गया। ही लगातार दोनों में झगड़े होने लगे और किसी जमीन के विवाद को लेकर ही दोनों में झगड़ा चल रहा था, जिसको लेकर राजा यादव ने गौरव दीक्षित को चुनौती दी थी। 

इस पूरे मामले में बुधवार को गौरव दीक्षित ने चुनौती देते हुए राज यादव को बुलाया और वह अपने कई साथियों के साथ 5 6 लग्जरी गाड़ियां लेकर हुरावली पहुंच गया और वहां राजा यादव को टारगेट करते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। राजा यादव भी इस घटना के लिए तैयार बैठा था। उसके साथियों पर भी बंदूकें थीं। राजा यादव की तरफ से भी गोलियां चलने लगी। दोनों गिरोह की तरफ से पन्द्रह मिनट तक रुक रुक कर गोलियां चलती रहीं। और इसके बाद दोनों पक्ष के लोग मौके से फरार हो गए। लोगों द्वारा सूचना दिए जाने पर पुलिस वहां पहुंची। घटना गंभीर थी, इसलिए एसएसपी धर्मबीर सिंह ने खुद ही मोर्चा संभाला और तत्काल ही मामले में कार्रवाई शुरू कर दी।

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खुलेआम इस तरह गोलीबारी की घटना को पुलिस भी एक चुनौती की तरह ले रही है। दोनों गुटों ने खुलेआम फायरिंग कर शहर की कानून व्यवस्था को चुनौती दी है। इस पूरे मामले में पुलिस रात भर सर्चिंग करती रही है। ऐसा बताया जा रहा है।एक पक्ष के आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और दूसरे पक्ष के लिए जगह जगह नाकेबंदी कर दी गई है और रात भर कई जगह दबिश दी गई है। हालांकि पुलिस जल्द ही सभी आधार आरोपियों को पकड़ने का दावा कर रही है, लेकिन इस तरह दो गुटों में खुलेआम फायरिंग की घटना यह भी दर्शाती है कि बदमाशों में पुलिस का खौफ नहीं है।

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RENEET 21 जून को; ग्वालियर के 25 परीक्षा केन्द्रों पर, प्रशासन ने की सख्त तैयारी

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर में 21 जून को होने जा रही नीट परीक्षा की सभी तैयारियाँ लगभग पूर्ण हो गईं हैं। परीक्षा के निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री धर्मवीर सिंह ने गुरुवार को संयुक्त रूप से ग्वालियर में बनाए गए विभिन्न परीक्षा केन्द्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान संयुक्त कलेक्टर एवं नीट परीक्षा के जिला नोडल अधिकारी श्री विनोद सिंह भी उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने परीक्षा कक्षों, प्रवेश एवं निकास व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंध, सीसीटीवी, पेयजल, विद्युत, स्वच्छता, बैठने की व्यवस्था तथा अभ्यर्थियों के सुगम प्रवेश सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने केन्द्राध्यक्षों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि परीक्षा का आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी पारदर्शिता एवं गोपनीयता के साथ कराया जाए।
कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने निर्देश दिए कि सभी परीक्षा केन्द्रों पर पर्याप्त संख्या में आवश्यक अमला तैनात रहे तथा किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को निर्धारित समय से पूर्व परीक्षा केन्द्र पर प्रवेश दिलाने, पहचान सत्यापन, सुरक्षा जांच एवं अन्य व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।


वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री धर्मवीर सिंह ने सभी परीक्षा केन्द्रों पर सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। साथ ही परीक्षा केन्द्रों के आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ यातायात प्रबंधन भी प्रभावी ढंग से किया जाएगा ।
उल्लेखनीय है कि 21 जून को ग्वालियर में 25 परीक्षा केन्द्रों पर नीट-2026 का आयोजन किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा परीक्षा के सफल एवं निर्विघ्न संचालन के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं सुरक्षा व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं।
इस बार सरकारी वाहनों में बैंक से संबंधित परीक्षा केन्द्र तक प्रश्न पत्र के बॉक्स कड़ी सुरक्षा के बीच में ले जाए जायेंगे। सरकारी वाहन में सीआरपीएफ व पुलिस बल, सीएस व अन्य संबंधित अधिकारी रहेंगे। प्रश्न-पत्र बॉक्स परिवहन की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जायेगी।
परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षार्थियों, इनविजलेटर व अन्य स्टाफ को मोबाइल फोन, बैग एवं किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाने की अनुमति नहीं होगी। अभ्यर्थी केवल पारदर्शी पानी की बोतल अपने साथ ले जा सकेंगे। साथ ही एडमिट कार्ड एवं एडमिट कार्ड में उल्लेखित आईडी कार्ड, पासपोर्ट साईज के दो एवं पोस्टकार्ड साइज के एक फोटो को ले जाने की अनुमति रहेगी।
नीट परीक्षा 21 जून 2026 को दोपहर 2 बजे से अपरान्ह 5.15 बजे तक होगी। परीक्षार्थियों को प्रात: 11 बजे से अपरान्ह 1.30 बजे तक परीक्षा केन्द्र परिसर में प्रवेश की अनुमति होगी। अपरान्ह 1.30 बजे के बाद परीक्षा केन्द्र पर प्रवेश पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया जायेगा। प्रत्येक परीक्षार्थी को प्रवेश देने से पहले बारीकी से जांच की जायेगी। महिला व पुरुष परीक्षार्थियों के लिये अलग-अलग जांच (फ्रिस्किंग) की व्यवस्था रहेगी। जांच के बाद सभी की बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज करनी होगी।

विकास और संस्कृति का संतुलन ही सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला : राष्ट्रपति मुर्मु

भोपाल मध्य प्रदेश: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि समाज का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति में आत्म विश्वास, आत्म सम्मान, जागरूकता और दायित्व बोध का विकास हो। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि जनजातीय समाज आत्म सम्मान के साथ जीवन जीने वाला समाज है और उसकी यही विशेषता उसे विशिष्ट बनाती है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति का अनुभव कराती है तथा सकारात्मक सोच को जीवन के उच्च आदर्शों से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु बैतूल में आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन को संबोधित कर रही थी। विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। शाश्वत विकास वही है जो हमारी जड़ों को मजबूत बनाते हुए भविष्य की संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करे।

राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव है जब देश का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़ जाएंगी। हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत सुरक्षित और अक्षुण्ण रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित इस प्रकार के सम्मेलन जनजातीय समाज के आध्यात्मिक उत्थान, सामाजिक जागरूकता और समग्र विकास के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने मध्यप्रदेश शासन की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा जनजातीय कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से सिकल सेल एनीमिया का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में इस बीमारी की संभावना अधिक पायी जाती है और इसके उन्मूलन के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से जनजातीय समाज का स्वास्थ्य स्तर और बेहतर होगा।

राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मू ने कहा कि मध्यप्रदेश का बैतूल जिला अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक चेतना के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखता है। यहां के जनजातीय समुदायों ने अपनी परंपराओं, लोकज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा है। सामूहिकता, सहयोग, सरलता, ईमानदारी और आध्यात्मिकता जैसे उच्च जीवन मूल्यों का जीवंत स्वरूप बैतूल की जनजातीय संस्कृति में दिखाई देता है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण के लक्ष्य पर केंद्रित इस महासम्मेलन में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए ब्रह्मकुमारी संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन केवल बैतूल या मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश और समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्वास व्यक्त किया कि महासम्मेलन में तैयार होने वाली कार्य योजनाएं जनजातीय समाज को राष्ट्र की प्रगति का सशक्त भागीदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान ने मातृशक्ति को केंद्र में रखकर अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है। संस्थान की आंतरिक शुचिता, मानवीय गरिमा, सेवा भावना तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में आंतरिक शुचिता और आध्यात्मिक मूल्यों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। इन्हीं मूल्यों के आधार पर समाज में समतापरक आचरण, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना विकसित होती है। वर्तमान समय में जब विश्व तनाव, संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है, तब ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है।

राष्ट्रपति श्री मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय की जीवन शैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिक मूल्यों और प्रकृति के निकट रही है। जनजातीय समाज, जिसे आदिवासी समाज भी कहा जाता है, सृष्टि के आरंभ से ही धरती के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन व्यतीत करता आया है। यह समाज सुख, शांति, आनंद और प्रेम के साथ जीवन बिताना जानता है तथा हिंसा से दूर रहता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज प्रकृति ही नहीं, बल्कि पंचतत्वों—धरती, आकाश, वायु, जल, सूर्य और चंद्रमा को पूजनीय मानता है। इनके लिए किसी विशेष मंदिर या पूजा स्थल की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि पूरी प्रकृति ही उनके लिए आराधना का केंद्र है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि धरती, जल और वायु के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जनजातीय समाज प्रकृति को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसका संरक्षण करता है। वे धरती को क्षति नहीं पहुंचाते, जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं करते और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार करते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज किसी भी संसाधन के उपयोग से पहले प्रकृति को नमन करता है, यही कारण है कि उनकी जीवनशैली पर्यावरण संरक्षण का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करती है। आज जब पेड़-पौधों, नदियों और समुद्रों के संरक्षण की आवश्यकता पूरी दुनिया महसूस कर रही है, तब जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकती है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु द्वारा कलश एवं ध्वज को ब्रह्मकुमारी बहनों को प्रदान कर अध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण महासम्मेलन का शुभारंभ किया। महासम्मेलन में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु और राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल सहित अन्य अतिथियों का राजयोगिनी मंजू दीदी द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।

राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने महासम्मेलन परिसर में बैतूल जिले की सांस्कृतिक झलक और विकास योजनाओं पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने जनजातीय समाज द्वारा प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की सराहना की। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और विदेशी कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग भूमि की उर्वरता को नष्ट कर रहा है तथा इसके कारण अनेक प्रकार की बीमारियां भी बढ़ रही हैं। प्राकृतिक खेती भारत की मूल परंपरा रही है और आज देश पुनः उसी दिशा में लौट रहा है। प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह मन, शरीर और आध्यात्मिक चेतना को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान लंबे समय से जनजातीय समाज के साथ मिलकर प्राकृतिक जीवन शैली और प्रकृति संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहा है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि तेजी से बदलते वर्तमान दौर में जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल सशक्तिकरण से जोड़ना आवश्यक है, जिससे वे आधुनिक संसाधनों का लाभ उठा सकें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उनकी सांस्कृतिक पहचान, परंपराएं और आध्यात्मिक विरासत सुरक्षित बनी रहे।

राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान पिछले कई दशकों से बैतूल और आसपास के क्षेत्रों में आध्यात्मिक जागरण, नैतिक मूल्यों के प्रसार, नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण, युवा विकास और सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। ध्यान और आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से संस्थान ने हजारों लोगों के जीवन में शांति, संतुलन और नई आशा का संचार किया है। जनजातीय समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देने में संस्थान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जब सेवा और अध्यात्म का संगम होता है, तब समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है। यह महासम्मेलन उसी संगम का सशक्त उदाहरण है और समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी नागरिकों से वर्ष @2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए अधिक प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, आध्यात्मिक चेतना और मानव कल्याण ही समावेशी एवं विकसित भारत की आधारशिला बनेंगे।

आध्यात्मिक जागृति जनजातीय समाज के सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम : राज्यपाल श्री पटेल

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक मूल्यों के माध्यम से समाज को उन्नत, संस्कारित एवं सम्मानपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने इस भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन के लिए प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए संस्था के सभी भाई-बहनों को शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि उनका प्रजापिता ब्रह्मकुमारी संस्था से वर्ष 1995 से आत्मीय जुड़ाव रहा है। नवसारी में उनके निवास के सामने स्थित ब्रह्मकुमारी केंद्र से लेकर माउंट आबू, गांधीनगर सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में उन्हें सहभागी बनने का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा आध्यात्मिक जागरण के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य सराहनीय एवं अनुकरणीय है।

राज्यपाल श्री पटेल ने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर कहा कि प्रतिदिन कुछ समय ध्यान एवं मेडिटेशन के लिए निकालने से मन को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक संतुलन प्राप्त होता है। ऐसे आध्यात्मिक अभ्यास व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और सद्भाव का संचार करते हैं तथा समाज को भी सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का जीवन संघर्ष और कर्तव्य निष्ठा का अनुपम उदाहरण : केंद्रीय मंत्री श्री उइके

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उईके ने कहा कि ओडिशा के एक छोटे से जनजातीय गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाली राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु भारतीय लोकतंत्र की शक्ति, संविधान की महानता और सामाजिक समरसता की जीवंत मिसाल हैं। केंद्रीय मंत्री श्री उइके ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का जीवन संघर्ष, समर्पण, सेवा और कर्तव्य निष्ठा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने अपनी कर्मठता, धैर्य और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के बल पर न केवल सर्वोच्च संवैधानिक पद को सुशोभित किया है, अपितु देश की प्रत्येक बेटी, जनजातीय समाज और आम नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के बैतूल आगमन से जिले का प्रत्येक जनजातीय परिवार स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उनका नेतृत्व सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और राष्ट्र निर्माण के प्रति सभी को प्रेरित करता है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु के आगमन पर अनहद संगीत महाविद्यालय बैतूल की 7 सदस्यीय कलाकारों द्वारा आकर्षक और मनमोहक स्वागत नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, ब्रह्मकुमारी संस्थान से राजयोगिनी शैलजा दीदी, राजयोगिनी मंजू दीदी, राजयोगी डॉ बी के नथमल जी उपस्थित हैं।

ग्वालियर में भीषण हादसा; डंपरों में आमने सामने भिड़ंत भड़की आग दोनों ड्राइवर जिंदा जले

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर के बेहट क्षेत्र में दो डंपर आमने सामने से टकरा गए। टक्कर इतनी भयावह है ही दम पर आग लग गई। दोनों डंपर जलकर खाक हो गए और यह आग पास के ही मकान था और वहां बंधे भेड़, बकरी भैंसें भी जल गईं। इस भीषण हादसे में दोनों डंपर के ड्राइवर सीट और स्टीयरिंग के बीच फंस गए। उन्होंने बचाने के लिए बहुत गुहार लगाई, लेकिन उसी जगह पर दोनों जिंदा जल गए। आग शांत होने पर दोनों के अवशेष ही उस जगह पर मिले। घटना मंगलवार बुधवार की दरमियानी रात बारह बजे की है। बचाव दल ने भी जो खौफनाक मंजर देखा उसको देखकर हैरान रह गए।

ग्वालियर के बेहट थाना क्षेत्र में रेत के डंपरों की आवाजाही आम बात है, उसी क्रम में एक डंपर रेत लेने के लिए दतिया की ओर जा रहा था जिसे चालक जितेंद्र गुर्जर चला रहा था। उसी समय, एक दूसरा डंपर रेत भरकर ग्वालियर की ओर आ रहा था, जिसे सुरेंद्र चला रहा था, रात का वक्त था। अचानक न जाने क्या हुआ ही दोनों डंपर आमने सामने आ गए सुरेंद्र का डंपर सामने से आ रहे जितेंद्र के डंपर में जा घुसा। दोनों डंपर के टकराते ही डीजल टैंक फट गया और दोनों में आग भड़क गई।आग ने हाल ही भयावह रूप ले लिया और दोनों डंपर धू धू करके जलने लगे। किसी को भी कुछ भी सोचने का मौका ही नहीं मिला। 

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जिस जगह पर यह घटना हुई, वहां सड़क किनारे ही एक ग्रामीण धर्मबीर सिंह कुशवाह परिवार सहित रहते हैं। उनके परिवार में कुल पैंतीस सदस्य हैं। पूरा परिवार रात को सो रहा था। सभी लोग घर के अंदर थे। धर्मवीर के पिता बाल किशन और बुआ भगवती आंगन में सो रहे थीं, वहीं भैंसें और बकरी भी बंधी हुई थी और अठारह क्विंटल गेहूं भी रखा हुआ था। धर्मबीर सिंह का कहना है की रात लगभग 12 बजे तेज धमाके की आवाज़ आई। सड़क पर डंपर जल रहे थे और आग उनके आंगन तक फैल चुकी थी। उन्होंने खूंटे निकालकर भैंस बकरियों को खोला, उनके पिता और बुआ आग से घिरे हुए थे। उन्हें बचाया और साथ ही घर के पीछे की दीवार तोड़ी और सभी लोगों को पीछे खेत के रास्ते से सुरक्षित घटनास्थल से दूर भगाया। यदि समय रहते, वे सूझबूझ से सबको बाहर नहीं निकालते, तो और बड़ा हादसा हो सकता था।

इस भयावह अग्नि कांड में दोनों डंपर जलकर पूरी तरह खाक हो गए। सुबह जब बचाव दल ने मौके पर मुआयना किया तो दोनों ड्राइवर जितेंद्र और सुरेंद्र की हड्डियां और कुछ अवशेष ही घटनास्थल पर बरामद हुए। आगजनी के बाद के हालात देखकर हर कोई हैरान था। घटना स्थल ग्रामीण क्षेत्र में होने के कारण फायर ब्रिगेड भी काफी देरी से वहां पहुंची थी, लेकिन फायर ब्रिगेड पहुंचने से पहले ही दोनों ड्राइवर जलकर खाक हो गए थे। हालांकि पास में रहने वाला परिवार सुरक्षित दूर चला गया था। इस घटना के कारणों की जांच की जानी चाहिए।संभवतः डंपर ड्राइवर ओवर टाइम डंपर चलाने के चलते थके हुए होंगे।उनकी नींद पूरी नहीं हुई होगी, यह भी एक कारण इस घटना का हो सकता है।

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रेलवे की लापरवाही; ट्रेन का टाइम नहीं किया अपडेट, छूटी ट्रेन भड़के यात्री

ग्वालियर मध्य प्रदेश: लगातार हो रही लापरवाही के बावजूद भी भारतीय रेलवे में सुधार की संभावनाएं नजर नहीं आ रही हैं। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर एक बार फिर एक नहीं, एक साथ दो अलग अलग ट्रेनों में बड़ी लापरवाही देखने को मिली, जिसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ा और रेलवे ने अपनी फूल जल सफाई देकर पल्ला झाड़ दिया। इंदौर सूबेदारगंज ट्रेन क्रमांक, जीरो, 4170 टिकट और वेबसाइट पर दर्ज समय से 2 घंटे पहले आ गई जिसके चलते तमाम यात्रियों की ट्रेन छूट गई वहीं ट्रेन क्रमांक 20424 पातालकोट एक्सप्रेस में सेकेंड एसी का कोच ही नहीं लगाया, जिससे यात्रियों को परेशान होना पड़ा और वे आक्रोशित हो गए।

बुधवार को ट्रेन। क्रमांक 04170 इंदौर, सूबेदारगंज 11:10 पर ग्वालियर रेलवे स्टेशन पहुंची और वहां से चली गई लेकिन इस ट्रेन के यात्री 1 बजे के बाद स्टेशन पहुंचे क्योंकि उन्होंने जो टिकिट बुक किए थे, उन पर ट्रेन की टाइमिंग एक बचकर 25 मिनट दर्ज थी। आईआरसीटीसी की वेबसाइट और ऐप पर भी ट्रेन का यही टाइम दर्जा रहा था जिसको देखते हुए यात्री एक बचकर पच्चीस मिनट की ट्रेन को पकड़ने के लिए रेलवे स्टेशन पर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें वहां जाकर पता चला कि उनकी ट्रेन तो दो घंटे पहले ही निकल चुकी है क्योंकि उसका समय बदला गया है। जिन यात्रियों को इस ट्रेन में सफर करना था, वे भीषण गर्मी में घंटों परेशान होते रहे और उन्होंने रेलवे स्टेशन पर हंगामा कर दिया। इस मामले में रेलवे के जिम्मेदारों का कहना था की आईआरसीटीसी और रेलवे के बीच समन्वय की कमी से यह चूक हुई है। जब यात्रियों ने घंटों हंगामा किया तब झांसी मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों ने चर्चा कर पीड़ित यात्रियों को टिकट कार रिफंड वापस कराया। लेकिन रेलवे की इस लापरवाही के चलते तमाम यात्री यात्रा नहीं कर सके।

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फिरोजपुर से सिवनी जा रही ट्रेन क्रमांक दो 20424 पातालकोट एक्सप्रेस में सेकेंड एसी कोच नहीं लगाया गया। जिन यात्रियों ने ऐसी सेकेंड में सीट रिजर्व कराई थी जब वे ट्रेन तक पहुंचे तो उन्हें यह कोच नजर ही नहीं आया और उन्हें बताया गया ही एसी का 3rd कोच आपके लिए लगाया गया है। ऐसी सेकेंड की जगह यात्रियों को एसी थर्ड में यात्रा करनी पड़ी, जिसे देखकर यात्री आक्रोशित हुए। यात्रियों ने टीटीई से इस बात की शिकायत की और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी अपनी आपत्ति दर्ज की। रेलवे की लापरवाही के चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

जहां एक ओर देश की सरकार और देश के रेल मंत्री रेलवे में सुविधाओं के बेहतरी की बात करते हैं, तकनीक के प्रयोग की बात करते हैं इन सब तकनीक का प्रयोग करने के बावजूद रेलवे द्वारा इस तरह के चूक होना कहीं न कहीं बड़ी लापरवाही दर्शाता है। कोच के बदले जाने के मामले में फिर भी यह समझा जा सकता है कि अंतिम समय में किसी कोच में खराबी आने से उसे बदल दिया गया हो और एसी सेकेंड की जगह एसी 3rd लगा दिया गया हो, लेकिन जिस तरह से इंदौर सूबेदारगंज ट्रेन का टाइम ही टिकट पर और आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर अपडेट नहीं किया गया। वह रेलवे की बड़ी चूक और लापरवाही को उजागर करता है। ऐसी ही लापरवाही जापान जैसे विकसित देश में हुई होती तो रेलवे को करोड़ों का हर्जाना देना होता। 

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