रतलाम मध्यप्रदेश: रतलाम में बोधी इंटरनेशनल स्कूल में आठवीं कक्षा के छात्र द्वारा तीसरी मंजिल से छलांग लगाने की घटना ने पूरे प्रदेश को झंझकोर कर रख दिया है और यह सोचने पर भी मजबूर कर दिया कि क्या स्कूल में अनुशासन के नाम पर क्रूरता बरती जा रही है? रतलाम के स्कूल का यह मामला तूल पकड़ चुका है, शुक्रवार को आदिवासी छात्र संगठनों ने स्कूल का घेराव करते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, संगठन के कार्यकर्ता स्कूल के मुख्य गेट पर धरने पर बैठे और प्रिंसिपल डॉली चौहान के खिलाफ नारेबाजी करते रहे, उनकी प्रमुख माँग है, स्कूल की मान्यता तत्काल रद्द की जाए और प्रिंसिपल के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो।
घटना 28 नवंबर की है, जब कक्षा आठवीं का छात्र स्कूल की तीसरी मंजिल से अचानक कूद गया। गंभीर रूप से घायल छात्र को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने मामले में लीपापोती करने की कोशिश की सच छिपाने की कोशिश की लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का एक और CCTV वीडियो भी सामने आया है, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया है। वीडियो में दिख रहा है कि छात्र को प्रिंसिपल के कक्ष में बुलाया गया जहाँ उस छात्र को जमकर डांटा फटकारा गया। उसकी बेइज्जती की गई। वह बार बार सॉरी बोलता रहा उसने लगभग पैंतालीस बार सॉरी बोला लेकिन उसकी एक न चली और अनुशासन के नाम पर प्रिंसिपल उससे क्रूरता करती रही।
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आदिवासी छात्र संगठनों का आरोप है कि इसी मानसिक दबाव के कारण बच्चे ने इतना बड़ा और खौफनाक कदम उठाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक बच्चे का मामला नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था के भीतर मौजूद समस्याओं का संकेत है, अगर स्कूल और प्रिंसिपल पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा। आपको बता दें कि प्रदेश के कई स्कूलों में छात्रों के साथ ज्यादती और क्रूरता के मामले समय समय पर सामने आते रहते हैं लेकिन रतलाम से सामने आया यह मामला एक दुर्लभ मामला प्रतीत होता है।
रतलाम के इस स्कूल में बच्चे के साथ अनुशासन के नाम पर की गई यह क्रूरता पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है। क्या स्कूलों में बच्चों के साथ व्यवहार की निगरानी पर्याप्त है? क्या अनुशासन के नाम पर मानसिक दबाव की सीमा तय होनी चाहिए? फिलहाल, मामला गरम है और पूरे जिले की नज़र इस पर टिकी हुई है। क्या किसी शिक्षक को इतना निर्दय भी होना चाहिए कि बच्चा बार बार सौरी बोल रहा है लेकिन उसके सॉरी को न सुनते हुए उसको अनदेखा करते हुए उसको लगातार धमकाया जा रहा है और 1 8 साल के मासूम बालक पर उस धमकी का यह प्रभाव पड़ता है कि डर के मारे वह अपनी जान देने के लिए छत से ही कूद पड़ता है। यह घटना यह सवाल भी खड़े कर रही है कि मोटी फीस वसूलने वाले यह निजी स्कूल क्या आपके बच्चे के लिए सुरक्षित हैं?
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