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करेरा का चेतन खबरों की रेस का चेतक, मात्र दस साल में बने इंडिया न्यूज़ के स्टेट ब्यूरो हेड

स्कूल में जब चेतन पांचवीं क्लास में पढ़ते थे तब उन्हें मॉनिटर बनाया गया था और मॉनिटर बनने के दौरान ही सबसे पहली बार उन्होंने स्कूल की व्यवस्थाओं को सुधारने का प्रण लिया। वह चेतन सेठ के जीवन में पहला पल था जब चेतन सेठ के मन में सिस्टम को सुधारने की भावना जागृत हुई

भोपाल मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के छोटे से कस्बे करेरा के एक छोटे स्कूल में पढ़ने वाला छोटा सा बच्चा चेतन खबरों के रेस का चेतक बनकर ऐसा दौड़ा कि मात्र दस साल के अपने कार्यकाल में ही एक राष्ट्रीय चैनल के मुख्यालय में इनपुट हेड और अब उसी चैनल में मध्य प्रदेश का स्टेट ब्यूरो हेड बनकर यह साबित कर दिया कि सफलता का केबल एक मूलमंत्र है और वह है लगातार काम को करते रहना और खुद को बेहतर बनाते जाना। हम बात कर रहे हैं इंडिया न्यूज़ के हाल ही में बनाए गए स्टेट ब्यूरो हेड चेतन सेठ की जो करेरा में तंगहाली में जीवन संघर्ष के बावजूद हार न मानते हुए आगे बढ़ते गए और आज उन्होंने सफलता की एक गाथा लिख दी है।

चेतन सेठ ने द इंगलेज़ पोस्ट को बताया कि अपने जीवन में वह दो लोगों को अपना गुरु मानते हैं। एक हैं उनके जीजाजी और दूसरे हैं इंडिया न्यूज़ के नेशनल हेड मनोज मनु। चेतन सेठ का कहना है कि अपने संघर्ष के दौरान जब वे दिल्ली पहुंचे तब उन्होंने सबसे पहले भारत न्यूज़ टीवी डिजिटल चैनल ज्वाइन किया था। वही उनकी पत्रकारिता के क्षेत्र में शुरुआत थी लेकिन शुरुआत में ही उन्होंने बहुत कुछ सीखा और इसके बाद सहारा टीवी में इंटरव्यू दिया। सहारा टीवी के कार्यालय में और स्टूडियो में उन्होंने मनोज मनु को रिपोर्टिंग करते हुए बेबाकी से अपनी बात रखते हुए देखा और चेतन सेठ उनसे इतना प्रभावित हुए कि ठान लिया कि अब मुझे इनके जैसा ही बनना है हालांकि उस समय चेतन सेठ को सहारा टीवी ज्वाइन करने का मौका नहीं मिला और वे वहां से निराश लौट आए।

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दिल्ली में चेतन सेठ पहुँचे तो पढ़ाई करने थे लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वे वहां पढ़ाई न कर सके और मोबाइल के शाॅप पर काम करने लगे जहां पर उन्हें शोषण का शिकार भी होना पड़ा और पूरे महीने काम करने पर मात्र चार हजार रुपए मिले। उनका संघर्ष जारी रहा। घर से पर्याप्त मात्रा में पैसा नहीं आता था तो केवल दिन में एक वक्त एक पराठा खाकर पूरा दिन गुजारते थे और संघर्ष करते रहते थे। लेकिन उन्होंने अपने संघर्ष के सामने कभी घुटने नहीं टेके और लगातार प्रयास करते रहे और अपने संघर्ष से ही सीखते रहे। दिल्ली में संघर्ष के दौरान कभी कभी उन्हें भूखे भी रहना पड़ता था। सिस्टम को सुधारने का एक अलग ही जुनून उनमें स्कूल के समय से था और उसी दिशा में प्रयास करने के लिए वह पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करके देश और समाज के लिए समर्पित भाव से सेवाएं देना चाहते थे। उनके जुनून की भूख ने उनके पेट की भूख को हमेशा परास्त किया और विपरीत परिस्थितियों में भी वह अपने आप को साबित करते रहे। 

स्कूल में जब वे पांचवीं क्लास में पढ़ते थे तब उन्हें मॉनिटर बनाया गया था और मॉनिटर बनने के दौरान ही सबसे पहली बार उन्होंने स्कूल की व्यवस्थाओं को सुधारने का प्रण लिया। वह चेतन सेठ के जीवन में पहला पल था जब चेतन सेठ के मन में सिस्टम को सुधारने की भावना जागृत हुई और इसी भावना के साथ वे आगे बढ़ते गए और जब वह युवा हुए तो उनको एहसास हुआ कि सिस्टम को सुधारने के लिए पत्रकारिता ही एक विकल्प है हालांकि पत्रकार बनने के बाद भी उनके संघर्ष जारी रहे और कई बार तो उन पर जानलेवा हमला तक हुआ। ग्वालियर में किस तरीके से उन्होंने जान जोखिम में डालकर पत्रकारिता की यह बात किसी से छुपी नहीं है। भोपाल में भी मंत्री विश्वास सारंग और उनके गार्ड द्वारा किस तरह चेतन सेठ से बदतीमीजी की गई और उन्हें धमकियां दी गई।यह बात भी उस समय खूब सुर्खियों में रही थी। 

चेतन सेठ के अंदर एक सबसे अच्छा गुण यह है कि वे अपने वरिष्ठ जनों का सम्मान करते हैं। जिस मनोज मनु को देखकर उन्हें एक अच्छा पत्रकार बनने की प्रेरणा मिली थी। उन्हीं का जब फ़ोन ग्वालियर में चेतन सेठ के पास आता है। तब उन्हीं के मार्गदर्शन में चेतन सेठ सहारा टीवी ज्वाइन करते हैं। इसके बाद तो मनोज मनु का अनुसरण करते हुए वे पत्रकारिता के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए नित्य नए इतिहास लिखने की राह पर आगे बढ़ते चले जाते हैं। जब मनोज मनु सहारा टीवी छोड़कर इंडिया न्यूज़ में आते हैं तो चेतन भी इंडिया न्यूज़ में आ जाते हैं। वे इंडिया न्यूज़ में ग्वालियर ब्यूरो के रूप में कार्य करते हैं। इसके बाद वे भोपाल ब्यूरो के रूप में कार्य करते हैं। अपने गुरु मनोज मनु के मार्गदर्शन में उन्हें इंडिया न्यूज़ में नेशनल इनपुट हेड के रूप में दिल्ली में कार्य करने का एक बार फिर मौका मिलता है। इसके बाद वे अपने कार्यक्षेत्र मध्य प्रदेश में आना चाहते हैं और पुनः भोपाल आ जाते हैं और तब से लगातार भोपाल में इंडिया न्यूज़ में ही मनोज मनु के मार्गदर्शन में कार्यरत हैं। 

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चेतन सेठ ने द इंगलेज पोस्ट को बताया कि दो हजार सोलह में पहली बार उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा था। और 2025 खत्म होते होते वे एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय चैनल इंडिया न्यूज में स्टेट ब्यूरो हेड बनाए गए हैं। इस उपलब्धि का श्रेय वह दो लोगों को देते हैं। प्रथम उनके जीजाजी जिन्होंने चेतन को आगे बढ़ने में हमेशा मदद की आर्थिक रूप से भी जो सहयोग हो सका चेतन को किया। और दूसरा मनोज मनु जो हमेशा चेतन को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। चेतन सेठ अपने गुरु मनोज मनु का सम्मान करते हुए कहते हैं कि जैसे जैसे मनोज मनु सर आगे बढ़ेंगे वैसे ही मै उनका अनुसरण करूंगा यदि वे पत्रकारिता में रहेंगे तो मैं भी रहूंगा और जिस दिन वे कहेंगे तो मैं पत्रकारिता छोड़ भी दूंगा। यह उनका गुरु के प्रति समर्पण का भाव है जो आज के युवाओं में बहुत कम देखने को मिलता है। इस भावना के साथ चेतन सेठ आने वाले युवा पत्रकारों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। 

यू तो ग्वालियर चंबल क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर तमाम प्रतिष्ठित पत्रकार दिए हैं लेकिन पिछले कुछ समय में जिस तरह से युवा पीढ़ी पत्रकारिता के क्षेत्र में आकर यहीं पर सिमटकर रह गई थी वह एक चिंता का विषय बन रही थी। इसी बीच मात्र 10 सालों की अल्प अवधि में चेतन सेठ ने इंडिया न्यूज़ के स्टेट ब्यूरो हेड के पद को प्राप्त करके पूरे अंचल का नाम रोशन किया है। और पूरे देश में यह लोहा मनवा दिया है कि ग्वालियर में युवा पत्रकारों में भी प्रतिभा की कमी नहीं है। चेतन सेठ की इस उपलब्धि पर आज पूरा अंचल गौरवान्वित महसूस कर रहा है। 

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