एक और रेल हादसा… छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में गेवरा रोड-बिलासपुर मार्ग पर मेमू पैसेंजर ट्रेन खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई, इस हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत हुई है और 20 घायल बताए जा रहे हैं. हादसे की वजह ‘सिग्नल ओवरशूट’ बताई गई है। यह इस साल का पांचवां बड़ा रेल हादसा के बाद फिर सवाल उठने लगे हैं कि देश में रेल हादसों का यह सिलसिला कब रुकेगा…
मुंब्रा में 9 जून 2025 को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस की ओर जाने वाली दो लोकल ट्रेनें एक शॉर्प कर्व पर एक-दूसरे को पार कर रही थीं। तभी ट्रेन के डिब्बों के पायदान पर खड़े कुछ यात्रियों का ‘बाहर निकला हुआ’ बैग दूसरी ट्रेन के लोगों के बैग या शरीर से टकरा गया था। इसके दौरान कुछ यात्री अचानक पटरी पर गिर पड़े थे। 4 यात्रियों की मौत हो गई थी।
बिहार के कटिहार बरौनी रेल खंड पर काढागोला और सेमापुर के बीच 20 जून को हुआ था। जब अवध असम अक्सप्रेस और रेलवे ट्रॉली के बीच भीषण टक्कर हो गई थी। हादसे में एक ट्रॉलीमैन की मौत हो गई थी तो वहीं 4 रेलकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

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ओडिशा के कटक जिले में इस साल मार्च महीने में बड़ा ट्रेन हादसा हुआ था, जब बेंगलुरू-कामाख्या एसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस के 11 कोच पटरी से उतर गए थे। इस हादसे में एक शख्स की मौत हो गई थी और 7 यात्री घायल हो गए थे।
झारखंड के साहेबगंज जिले में 1 अप्रैल, 2025 की सुबह दो मालगाड़ियों की टक्कर में दो लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे में चार लोग घायल भी हुए थे। हादसा सुबह के 3 बजे हुआ था, जब मालगाड़ियां कहलगांव से फरक्का के बीच जा रही थीं।
एक रेल हादसा झारखंड में हुआ था, जब 3 जुलाई 2025 को साहिबगंज जिले के बरहड़वा प्रखंड में एक मालगाड़ी की 14 बोगियां बिना लोको पायलट के तेज रफ्तार से दौड़ती हुई दूसरी मालगाड़ी से टकरा गई थीं। टक्कर इतनी तेज थी कि 14 बोगियां पटरी से उतरकर नीचे गिर गईं थीं। सभी बोगियों में गिट्टी लोड थी।
भारतीय रेलवे सुरक्षा के तमाम दावे करता है। सुरक्षा कवच तकनीक की बात की जा रही है लेकिन यदि हम अन्य विकसित देशों की तुलना में बात करें तो भारत रेल हादसों के मामले में बहुत आगे है.. क्या इस बार भी बिलासपुर रेल हादसे के बाद जांच होगी और कुछ ही दिनों में हम हादसे को भूल जाएँगे या रेल हादसों से निपटने के लिए कोई मजबूत व्यवस्था बनाएंगे…
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