डिजिटल डेस्क; शुद्ध जल अभियान; इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौत ने पूरे देश को झंझोर के रख दिया है और अब यह सवाल खड़ा हो रहा जो पानी हमें सप्लाई में दिया जा रहा है क्या वह शुद्ध है? कहीं ऐसा तो नहीं कि आप भी अपने शहर में अशुद्ध और खतरनाक पानी पी रहे हों। यदि आप भी पेयजल से संबंधित हकीकत जानना चाहते हैं तो यह खबर अंत तक जरूर पढ़ लें। कड़वी हकीकत यह है कि आज तक कई राज्यों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति उनके कार्यों की प्राथमिकता में नहीं है। इसी के चलते लापरवाही से पेयजल आपूर्ति की जाती है और कोई भी कमी पेशी होने पर उसे हल्के में लिया जाता है।
शुद्ध जल प्रदान करने के लिए जो बजट दिया जाता है उसके आंकड़े अब आपको चौंका देंगे। आंकड़े आपको इसलिए नहीं चौंकाएंगे कि बजट कम है बल्कि इसलिए चौंकाएंगे कि बजट होते हुए भी सरकारों ने काम ही नहीं किया। शुद्ध पेयजल की आपूर्ति व सीवर लाइन के लिए स्वीकृत 1.93 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं में से केवल 44 हजार करोड़ के काम पूरे हो पाए हैं जबकि अमृत (अटल नवीनीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन) की अवधि इसी साल मार्च में खत्म हो रही है।
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सीवर और पेयजल लाइन की खराब प्लानिंग व डिजायन, जल संचयन के अपर्याप्त प्रबंधन और शुद्धीकरण के लिए इंतजाम व निगरानी के अभाव ने ऐसी स्थिति खड़ी कर दी है कि कोई भी शहर ऐसा नहीं जहां कुछ आबादी तक अशुद्ध जल न पहुंचता हो। शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के कान में घंटी तब बजती है, जब मौतें होती हैं। इंदौर में भी यही हुआ है। अब डेढ़ दर्जन मौतों के बाद जिम्मेदार लकीर पीट रहे हैं और सबसे दुखद पहलू यह है कि इतने गंभीर मुद्दे पर भी जमीनी स्तर पर मजबूत योजना न बनते हुए राजनीति शुरू हो गई है। यह हालात उस इंदौर के रहे जिसे कागजों पर नंबर वन स्मार्ट सिटी बना दिया गया और वहां भी पेयजल सप्लाई के हालात जब इतने बदतर हैं तो आपके शहर में हालात क्या होंगे आप अंदाजा लगा सकते हैं।
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