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जल संसाधन की भ्रष्ट मछली फसी लोकायुक्त के जाल में

कटनी मध्यप्रदेश; मध्यप्रदेश के कटनी जिले में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाई की है। जल संसाधन विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री (एसडीओ) व्ही.ए. सिद्दकी को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते लोकायुक्त की टीम ने रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी अधिकारी ने एरियर्स की फाइल आगे बढ़ाने के बदले 50 हजार रुपये की मांग की थी। फरियादी द्वारा जब बीस हजार रुपये दिए जा रहे थे तभी लोकायुक्त की टीम ने भ्रष्टाचार की इस मछली को गिरफ्त में ले लिया।

जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई जबलपुर लोकायुक्त की 7 सदस्यीय टीम ने जल संसाधन विभाग परिसर स्थित आरोपी के शासकीय निवास पर की। टीम ने पूरी रणनीति के तहत ट्रैप बिछाया था। जैसे ही फरियादी ने 20 हजार रुपये की पहली किस्त सौंपी, पहले से मुस्तैद टीम ने दबिश देकर आरोपी को रंगेहाथ पकड़ लिया।मामला वर्ष 2011-12 से लंबित एरियर्स भुगतान से जुड़ा है। सेवानिवृत्त चौकीदार कुंवरलाल रजक सहित 9 कर्मचारियों को बकाया राशि नहीं मिलने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा था। 30 अप्रैल 2025 को न्यायालय ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए लंबित एरियर्स का भुगतान करने को कहा था। आदेश के अनुसार, रजक को लगभग 8 लाख रुपये मिलना था।

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फरियादी कुंवरलाल रजक का आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारी ने फाइल आगे बढ़ाने के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। कई दिनों तक चक्कर कटवाए गए और बिना रिश्वत के भुगतान करने से इंकार कर दिया गया।

आर्थिक संकट से जूझ रहे फरियादी ने 25 फरवरी को लोकायुक्त एसपी से शिकायत की। शिकायत की पुष्टि के बाद टीम ने योजना बनाकर ट्रैप कार्रवाई की। रकम स्वीकार करते ही आरोपी को मौके पर पकड़ लिया गया। कार्रवाई के दौरान केमिकल टेस्ट और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी कर साक्ष्य सुरक्षित किए गए हैं। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

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एमपी में स्वास्थ्य सेवाएं होंगी ठप! आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मी बड़ी हड़ताल की तैयारी में!

ग्वालियर मध्य प्रदेश: मध्यप्रदेश के 30 हज़ार आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी पिछले दो दिनों से काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं और अपनी मांगें पूरी न होने पर आगे बड़ी हड़ताल की तैयारी में हैं। ये आउटसोर्स स्वास्थ्यकर्मी प्रदेश व्यापी आंदोलन के तहत सभी जिलों में काली पट्टी बांधकर काम कर विरोध जता रहे हैं। लंबे समय से यह अपनी मांगों को लेकर सरकार से गुहार लगा रहे हैं।समय समय पर आंदोलन भी करते हैं लेकिन अभी तक इनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है और इस बार सरकार को जगाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों ने एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर ली है। पूरे प्रदेश में तीस हजार से अधिक ऐसे स्वास्थ्यकर्मी हैं और यदि यह काम बंद हड़ताल पर चले जाते हैं तो प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो सकती हैं!

आउटसोर्स कर्मचारियों का कहना है कि वो 10000 महीने की नौकरी कर रहे हैं कई कर्मचारी ऐसे हैं जो 20-20 साल से नौकरी करने के बावजूद नियमित नहीं हो पाए। हड़ताल से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगीं।  कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह की अगुआई में आज आंदोलन के तहत काली पट्टी बांधकर काम कर रहे है, हमारी मांगे नही मानी तो, आने वाले समय मे CM के नाम ज्ञापन देने के बाद आगे हड़ताल में आंदोलन बदलेगा। जिस तरह की तैयारी आउटसोर्स स्वास्थ्यकर्मियों ने कर रखी है यदि उनकी नौबत आती है तो अस्पतालों का कामकाज प्रभावित हो सकता है। और पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा सकती हैं।

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इन मांगों को लेकर हो रहा आंदोलन..

आउटसोर्स कर्मचारियों को बिना शर्त के संविदा में मर्ज किया जाए

आउटसोर्स कर्मचारी के लिए न्यूनतम 21000 वेतन निर्धारित किया जाए

 रेगुलर कर्मचारियों की तरह शासकीय छुट्टियों की सुविधा दी जाए ।

6आउटसोर्स कर्मचारी को भी नियमित भर्ती में 50% आरक्षण दिया जाए ।

आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों का स्वास्थ्य बीमा कराया जावे।

ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाए

आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने बताया कि 23 और 24 फरवरी को प्रदेशभर में सामूहिक हड़ताल की जाएगी। शासकीय मेडिकल कालेज जिला अस्पताल सिविल अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शहरी स्वास्थ्य केन्द्र संजीवनी क्लिनिक पोषण पुनर्वास केन्द्र सहित जहां पर भी आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी हैं वे सभी इस हड़ताल में शामिल होंगे।संघ के अध्यक्ष का यह भी कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत सेवाएं दे रहे आउटसोर्स।कर्मचारियों को बिना किसी शर्त विभाग में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी में रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए और उन्हें संविदा में मर्ज किया जाए। संघ की साफ चेतावनी है कि जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है तब तक आंदोलन चरणबद्ध तरीके से ऐसे ही जारी रहेगा।

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मसाला फैक्ट्री में ऐसी मिलावट कि देखकर जांच अधिकारियों के उड़ गए होश!

ग्वालियर मध्य प्रदेश: अंचल मिलावट के लिए इस तरह कुख्यात है कि यहाँ वह फैक्टरियाँ जिन्हें पहले कभी सील किया गया हो उनमें फिर से मिलावट का खेल चलने लगता जब तक शिकायत न पहुंचे तब तक सोता रहता है। ऐसा ही मामला अभी हाल ही में उजागर हुआ है जहां दाल बाजार में संचालित एक मसाला चक्की पर जब खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने छापा मारा तो यहाँ धनिया मिर्ची हल्दी के साथ साथ लकड़ी का बुरादा चौकर और तमाम अन्य अपशिष्ट पदार्थ दिखाई दिए जो इन मसालों में मिलाए जा रहे थे। जिस तरह से इन मसालों में मिलावट की जा रही थी वह स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है और यह मसाला चक्की।बड़े स्तर पर इस तरह के मिलावटी मसालों का निर्माण कर रही थी। 

जैसे ही बेसमेंट में स्थित इस मसाला चक्की में खाद्य सुरक्षा अधिकारी पहुंचे तो वहां साबुत हल्दी मिर्ची और धनिया के साथ-साथ ही भारी मात्रा में चौकर लकड़ी का बुरादा और रंग रखे हुए थे। वहां के कर्मचारियों ने बताया कि कल्ली इस चक्की का मालिक है जो लकड़ी के धनिया की पिसाई में मिलाकर मिलावटी मसाला तैयार करता है। टीम ने मौके पर बड़ी मात्रा में ऐसे मिलावटी सामान को पकड़ा है साथ ही मौके से तीस किलो गरम मसाला किलो धनिया तीस किलो चौकर चालीस किलो लकड़ी का बुरादा पचास किलो साबुत धनिया और अन्य सामग्री जब्त की है। यहां बिलावटी मसाला आगे न बन सके यह सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने चक्की को सील कर दिया है और इस फर्म का पंजीयन निलंबित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

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आपको बता दें कि यह क्षेत्र मिलावटी सामग्री खासकर मसालों में मिलावट के लिए हमेशा सुर्खियों में रहा है जहां तक इस चक्की की बात है।इस पर पहले भी इस तरह की कार्रवाई हो चुकी है।इसके बावजूद भी हर बार इस चक्की का संचालक बचकर निकल जाता है और फिर यही मिलावटी जहरीला मसाला बनाने का काम शुरू कर देता है। जो साहब बताता है कि कहीं न कहीं सिस्टम इतना कमजोर है के बार बार किसी न किसी नियम से खेलकर यह संचालक बच निकलता है और फिर से लोगों की मौत का सामान बनाने लगता है। यह जानकारी मिली है कि इस चक्की से मिलावटी मसाला पिस कर बोरियों में भरकर आसपास के जिलों तक सप्लाई किया जाता है।

मिलावटी मसालों से बचने का एकमात्र उपाय है कि आप खड़े मसाले लेकर घर में ही उसकी पिसाई करें और उन्हें उपयोग करें क्योंकि जिस तरह की मिलावट इस चक्की में देखी गई है वह हैरान करने वाली है। इस तरह की मिलावटी सामग्री मसालों के साथ आपके शरीर में जा रही है और कई सारी बीमारियों का कारण बन रही है। यह मिलावट कोर थोड़े से मुनाफे की लालच में आम जनता की जिंदगी के साथ स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इस एक फैक्ट्री को तो खाद्य सुरक्षा विभाग ने सील कर दिया है लेकिन सवाल यह उठता है कि शहर में ऐसी कितनी और फैक्ट्री संचालित हो रही हैं और कितने ऐसे और मिलावटखोर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं?

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डीप फेक और एडिटेट फोटो वीडियो का है शिकार तो ऐसे करें शिकायत और हटवाएं फर्जी फोटो वीडियो

भोपाल मध्य प्रदेश: तकनीक के बढ़ने के साथ साथ तकनीक का दुरुपयोग भी बढ़ता जाता है और कई शातिर दिमाग के लोग इस तकनीक का उपयोग दूसरों को परेशान करने में करते हैं। आजकल डी फेक और आई के जरिए फर्जी फोटो और वीडियो बनाए जाते हैं।कई युवतियां जो सोशल मीडिया अकाउंट हैंडल करती हैं उनके फोटो और वीडियो निकालकर उन्हें तकनीक के माध्यम से एडल्ट कंटेंट में बदल दिया जाता है और इस तरह उन्हें परेशान किया जाता है। इस तरह की कई घटनाएं पिछले लंबे समय से देखने को मिल रही हैं। एआई का इस्तेमाल करके कई अश्लील फोटो बनाए गए और सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए जिनकी शिकायत साइबर हेल्पलाइन पोर्टल पर की गई और पीड़ितों को इस परेशानी से निजात भी मिली।

हर व्यक्ति जो आज सोशल मीडिया का प्रयोग कर रहा है वहां अपने वीडियो और फोटो पोस्ट कर रहा है।वह इस तरह के डीप फेक और एआई जनरेटेड कंटेंट का शिकार हो सकता है।इससे बचने के लिए आपको यह जानकारी होना चाहिए कि कहां शिकायत करना है और कैसे शिकायत करना है। इस तरह के कंटेंट की शिकायत के लिए आपको तमाम सावधानियों की जरूरत है जिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपका ऐसा कंटेंट डला हो उसकी लिंक उसका स्क्रीनशॉट आपको लेना चाहिए और पोस्ट किए गए कंटेंट का टाइम और तारीख भी नोट कर लेना चाहिए और इन सबको सुरक्षित रखकर आपको साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर सेल में शिकायत करनी चाहिए।

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यदि आपको इस तरह के कंटेंट किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखाई देते हैं तो आप उसी प्लेटफॉर्म पर भी रिपोर्ट कर सकते हैं। फेसबुक हो या इंस्टाग्राम या यूट्यूब? वह हर एक यूजर को रिपोर्ट या अब यूज करने का विकल्प भी देता है। इस तरह के किसी अश्लील कंटेंट को देखने पर आप उसकी रिपोर्ट कर सकते हैं या उसे अब यूज कर सकते हैं और यह शिकायत बता सकते हैं कि यह डीफाई से बनाए गए फोटो वीडियो हैं और यह प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी हटाते हुए भी इन कंटेंट को हटा देते हैं। कुछ अन्य माध्यम भी हैं जहां शिकायत करके आप इस तरह के कंटेंट को हटवा सकते हैं।

लेकिन यदि इस तरह के डीपफेक कंटेंट सोशल मीडिया पर वायरल करके आपको ब्लैकमेल किया जा रहा है तो आपके पास सबसे बेहतर विकल्प यही है कि आप देश के कानून का सहारा लें और देश के कानून द्वारा साइबर सिक्योरिटी की जो व्यवस्था दी गई है उसका उपयोग करें नजदीकी साइबर सेल में जाकर शिकायत दर्ज करें या आप यह शिकायत ऑनलाइन भी राष्ट्रीय साइबर अपराध के पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर कर सकते हैं। इस शिकायत में भी आपको स्क्रीनशॉट और लिंक बताना होता है। आपकी शिकायत की तथ्यों की जांच कर साइबर सेल संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफार्म को रिपोर्ट करता है और जल्द से जल्द इस तरह के कंटेंट हटाने का प्रयास करता है।

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हालांकि कई मामलों में यह सलाह दी जाती है कि आप अपने निजी फोटो और वीडियो सीमित लोगों तक ही रखें।उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल न करें लेकिन आज के सोशल मीडिया के युग में जहां हर व्यक्ति सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ में लगा है वहां यह संभव नहीं है और हर व्यक्ति अपने ज्यादा से ज्यादा वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर रहा है।ऐसी स्थिति में इन फोटो का दुरुपयोग होने और ब्लैक मेलिंग किए जाने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। लेकिन यदि आप एक जागरूक सोशल मीडिया उपयोग करता हैं तो सोशल मीडिया पर किस तरह से शिकायत करनी है यह भी आपको जानकारी होनी चाहिए और बहुत गंभीर परिस्थिति में साइबर सेल में किस तरह शिकायत करनी चाहिए यह भी प्रक्रिया आपको मालूम होनी चाहिए। जब भी आप इस तरह का कंटेंट देखें तो घबराने की बजाय सूझबूझ से काम लें और हर संभव प्लेटफॉर्म पर शिकायत करें। 

सराहनीय पहल; शहर में आयोजित होगा बैजू बावरा महोत्सव

ग्वालियर मध्य प्रदेश: गायन की ध्रुपद शैली में ग्वालियर को विषेष पहचान दिलाने वाले मध्यकालीन इतिहास के महान संगीतज्ञ बैजू बावरा के नाम से सभी परिचित हैं। उन्हीं बैजू के सम्मान में राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय द्वारा अनूठा प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत विश्वविद्यालय द्वारा प्रयास षिक्षा, साहित्य, कला व संगीत पीठ समिति के सहयोग से बैजू बावरा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। ध्रुपद गायन शैली पर केंद्रित इस संगीत महोत्सव का शुभारंभ 17 फरवरी को सुबह 10.30 बजे से विश्वविद्यालय के तानसेन सभागार में होगा, जो कि तीन दिन तक चलेगा। शुभारंभ दिवस की मुख्य अतिथि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा, बिहार की संकायाध्यक्ष प्रो. लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ रहेंगी, जो कि भारतीय ज्ञान परंपराः ध्रुपद गायन शैली का परंपरागत एवं वर्तमान स्वरूप’ विषय पर वक्तव्य देंगी। समापन दिवस के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे करेंगीl

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ग्वालियर को हमेशा से संगीत की नगरी माना जाता रहा है। यह शहर बैजू बावरा जैसे महान गायकों की कर्मभूमि भी रहा है। ऐसे में यह अनूठा महोत्सव संगीतज्ञों के साथ साथ शहरवासियों को बैजू की यादों से परिचित कराएगा।

इस तीन दिवसीय महोत्सव में देष के विख्यात संगीतज्ञ शिरकत कर, गायन की ध्रुपद व धमार शैलियों पर अपने विचार रखेंगे, जिनमें पद्मश्री प्राप्त कलाकार भी शामिल हैं। इनका विवरण इस प्रकार है-

17 फरवरी, सुबह 11 बजे से-

ध्रुपद कार्यशाला-

-विषय विशेषज्ञः पद्मश्री उस्ताद वासिफुद्दीन डागर, नई दिल्ली,

पखावज व्याख्यान सह प्रदर्शन

विषय विशेषज्ञ: पंडित मोहन श्याम शर्मा, नई दिल्ली

सांगीतिक प्रस्तुतियां, दोपहर 2 बजे से

ध्रुपद गायन: योगिनी तांबे, ग्वालियर, पखावज संगत: जगत नारायण शर्मा

ध्रुपद गायनः पद्मश्री उस्ताद वासिफुद्दीन डागर, पखावज संगति पं. मोहन श्याम शर्मा (नई दिल्ली)

18 फरवरी, सुबह 11 बजे से धमार कार्यशाला

विषय विषेषज्ञः डॉ. विषाल जैन, प्रयागराज

सांगीतिक प्रस्तुतियां, दोपहर 2 बजे से

सुरबहार वादन, डॉ श्याम रस्तोगी, पखावज संगति जगत नारायण शर्मा

ध्रुपद गायन, विषाल जैन (प्रयागराज), पखावज संगति जयवंत गायकवाड

19 फरवरी, सुबह 11 बजे से, ध्रुपद कार्यशाला

विषय विषेषज्ञः पद्मश्री पं. ऋत्विक सान्याल, वाराणसी

सांगीतिक प्रस्तुतियां, दोपहर 2 बजे से

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ध्रुपद गायन: आदित्य शर्मा, ग्वालियर, पखावज संगत: जयवंत गायकवाड़ ध्रुपद गायन: पद्मश्री पं. ऋत्विक सान्याल (वाराणसी), पखावज संगति:आदित्य दीप

प्रेसवार्ता के दौरान यह जानकारी कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे, कुलसचिव श्री अरूण सिंह चौहान ने दी। वार्ता में उनके साथ सांस्कृतिक समिति अध्यक्ष डॉ पारुल दीक्षित, पीआरओ कुलदीप पाठक भी उपस्थित रहे।

हैवानियत की हदें पार, हत्या के बाद लाश से दरिंदगी और जादू टोना, रूह कंपा देने वाली हकीकत

इंदौर मध्य प्रदेश:  प्रेम क्या है? प्रेम में सामने वाले के लिए क्या भाव होने चाहिए? अपने प्रेमिका की किस तरह देखभाल करनी चाहिए? किस तरह खयाल रखना चाहिए? प्रेम संबंध में किस तरह समर्पण की भावना होनी चाहिए? लगता है आज का युवा यह सब भूल चुका है और प्रेम एक पिशाच आत्मा के रूप में उसके ऊपर इस तरह सवार है कि वह हैवानियत की सारी हदें पार कर सकता है।इस तरह का ही एक मामला इंदौर से सामने आया है जिसमें एक प्रेमी ने अपने प्रेमिका को निर्दयता से मार डाला न केवल अपनी प्रेमिका की हत्या की बल्कि हैवानियत की सारी हदें पार कर दी हर एक घटना रोंगटेक खड़े कर देने वाली है। और यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि कोई इंसान किसी दूसरे इंसान के साथ ऐसा कैसे कर सकता है और सबसे बड़ी बात है कि जिससे आप प्रेम करते हो?उस लड़की के साथ आप ऐसा कैसे कर सकते हैं?

इंदौर के द्वारकापुरी इलाके में 24 वर्षीय MBA छात्रा का शव उसके क्लासमेट और कथित प्रेमी के किराए के कमरे से मिला, जिसके बाद पूरा मामला सनसनीखेज रूप ले लिया। लड़की अपने प्रेमी के साथ इस कमरे में मिलने आया करती थी। कुछ दिन से कमरा बंद था। कमरे को पूरी तरह पैक किया गया था जिससे अंदर मृत लड़की लाश की बदबू भी बाहर न जा पाया। कुछ दिन बाद जब शक हुआ तब पड़ोसियों ने पुलिस को बुलाया और पुलिस ने जब कमरा खोला तो वहां के दृश्य देखकर पुलिस हैरान थी। एक नग्न लाश लड़की की पड़ी हुई थी और उसकी स्थिति देखकर लग रहा था कि उसके साथ हैवानियत की सारी हदें पार की गई हैं।

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इस घिनौने घटना के मुख्य आरोपी पीयूष धनोतिया को पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है और हत्या के पीछे के कारणों की जांच कर रही है। मुख्य संदिग्ध पीयूष धनोतिया घटना के बाद इंदौर से भाग गया था। तकनीकी ट्रैकिंग, कॉल डिटेल और पुलिस के संयुक्त प्रयास से उसे मुंबई के अंधेरी इलाके से हिरासत में लिया गया। पुलिस को इस हत्यारे तक पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा क्योंकि हर एक साक्ष्य साफ इशारा कर रहे थे कि इस युवक ने इंसानियत की सारी हदें पार कर दी हैं। लेकिन शायद पुलिस को भी यकीन नहीं था कि जब युवक पकड़ा जाएगा और पूछताछ की जाएगी तो ऐसे खुलासे सामने आएँगे जो पुलिस ने भी कभी नहीं सुने होंगे। 

जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी ने पीड़िता को मारने से पहले उसके साथ संबंध बनाए थे। साथ ही इसके लिए उसने सेक्स पावर बढ़ाने वाली टैबलेट भी लिया था। लंबे समय से वह उस लड़की के साथ सम्बन्ध में था। उसे शक था कि लड़की किसी और के साथ भी रिलेशन में है। इस शक में उसने हैवानियत के साथ लड़की से सम्बन्ध बनाये और फिर उसकी हत्या कर दी। मारने के बाद वह बाजार से शराब ले आया। पीने के बाद फिर पीड़िता के साथ गलत किया। साथ ही कुकर्म भी किया था। और उसकी लाश के साथ हर तरह की हैवानियत की। इसके बाद मुंबई भाग गया। वहां जाकर उसकी याद आने लगी। इसके बाद पीयूष धनोतिया ने यूट्यूब पर यह सर्च किया कि आत्मा से बात कैसे करें। उसने मुंबई में टोना टोटका भी किया। मतलब साफ था कि इस लड़के के प्यार में सनक ज्यादा थी।मरने के बाद भी अपनी प्रेमिका को टोना टोटका करके पाना चाहता था। 

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पूछताछ के दौरान वहां मौजूद महिला एसआई उसकी हैवानियत सुनकर टूट गई। वह रोनी लगी। पीयूष को शक था कि प्रेमिका किसी और से भी बात करती है। साथ ही वह पीयूष पर शादी के लिए दबाव बना रही थी लेकिन आरोपी इसके  लिए तैयार नहीं था। उसके घर के लोग शादी के लिए तैयार नहीं थे। गिरफ्तार होने के बाद पीयूष धनोतिया ने कहा है कि उसे अपने पिता से नहीं मिलना है। यह पूरी घटना एक ऐसी हकीकत है जिसपे विश्वास करना मुश्किल है लेकिन जब यह लड़का खुद ही पूरी घटना अपनी जुबानी बता रहा तो यह भी नहीं कहा जा सकता कि ऐसा नहीं हुआ होगा लेकिन जिस तरह की अमानवीयता और हैमानियत इसने दिखायी न कहीं यह सवाल खड़ा कर रही है प्रेम तो सुन्दर होता है।समर्पण का भाव लिए होता है फिर इस युवक के मन में अपने प्रेमिका के प्रति ऐसी हैवानियत केवल एक मनोविकार ही माना जा सकता है। 

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विदेशी महिला से दतिया के जंगल में हुए गैंगरेप के मामले में हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने विदेशी महिला पर्यटक से दतिया के जंगलों में गैंगरेप करने वाले आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया है. गैंगरेप के आरोपी उम्र कैद की सजा काट रहे हैं.उन्होंने अपनी सजा को निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।हाई कोर्ट ने कहा कि यह मामला गंभीर प्रकृति का है यह पीड़िता के शरीर पर नहीं बल्कि उसके मन मस्तिष्क और आत्मा पर गहरा आघात है. यह अपराध उस समय और भी ज्यादा घिनौना हो जाता है जब एक विदेशी महिला यहां की संस्कृति को जानने समझने के लिए भारत आई हो।

आपको बता दें कि दतिया में हुए इस घटना ने पूरे क्षेत्र को देश में शर्मसार कर दिया था। यह वही समय था जब दिल्ली में निर्म कांड जैसी घटना भी हुई थी। यदि देखा जाए तो यह घटना भी दिल्ली के निर्भया कांड से किसी भी मायने में कम गंभीर नहीं है और इस मामले में तो पीड़ित एक विदेशी महिला थी जिसके वजह से देश की छवि अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भी धूमिल हुई जिस तरह से महिला के साथ गलत कृत्य किया गया और उसके पति के साथ भी मारपीट की गई। इस घटना ने देश की छवि को धूमिल किया था।

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मार्च 2013 में स्विस दंपति साइकिल से भारत यात्रा पर निकले थे.15 मार्च को वो दतिया पहुंचे और यहां झारिया गांव के जंगल में टेंट लगाकर रात्रि विश्राम करने लगे. इस दौरान रात में सात आठ बदमाश वहां आ धमके। उन्होंने पति को बंधक बनाकर विदेशी महिला से दुष्कर्म किया, उनका कीमती सामान भी लूट ले गए. बाद में इस सिलसिले में आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया. उनके खिलाफ गैंगरेप लूट और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था. अधीनस्थ न्यायालय ने छह आरोपियों रामप्रीत ऋषि भूरा बृजेश और विष्णु को उम्र कैद की सजा से दंडित किया था।

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एंटीबायोटिक के अनाधुंध प्रयोग पर लगेगी रोक, आईसीएमआर सख्त नियमों की तैयारी में

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: एंटीबायोटिक के अनाधुन तरीके से बढ़ते हुए उपयोग पर अब आईसीएमआर सख्त निर्णय लेने वाला है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) ने देश में एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताई है। इस पर लगाम लगाने के लिए संस्थान सख्त दिशानिर्देश लाने जा रहा है। आइसीएमआर के महानिदेशक डा. राजीव बहल ने कोलकाता में एक कार्यक्रम में कहा कि एम्पिरिकल प्रोटोकाल (प्रयोगसिद्ध नियमावली) लागू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत संक्रमण के प्रकार के अनुसार एंटीबायोटिक के इस्तेमाल के स्पष्ट निर्देश होंगे।

कोलकाता के बेलेघाटा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फार रिसर्च इन बैक्टीरियल इंफेक्शंस (एनआइआरबीआइ) में ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी (ओआरटी) के जनक और पद्म विभूषण से सम्मानित डा दिलीप महालनाबिस की प्रतिमा के अनावरण के मौके पर आइसीएमआर के महानिदेशक ने कहा कि इस दिशानिर्देश के अंतर्गत डाक्टरों को वैज्ञानिक मार्गदर्शन किया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि किन परिस्थितियों में और कितने समय तक एंटीबायोटिक दवा दी जानी चाहिए।

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कब और किन परिस्थितियों में एंटीबायोटिक बदली जानी चाहिए। डा. बहल ने कहा कि जरूरत पडऩे पर डाक्टरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। किसी भी बीमारी के परीक्षण से पहले डाक्टरों को स्वयं आकलन करना होगा कि मरीज को वास्तव में एंटीबायोटिक की आवश्यकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि किसी भी बीमारी की टेस्ट रिपोर्ट आने से पहले मरीजों को एंटीबायोटिक देने से बचना चाहिए। आपको बता दें कि ज्यादातर मामलों में मरीज मेडिकल स्टोर से ही सीधे एंटीबायोटिक खरीद लेता है।कौन सी एंटीबायोटिक कितनी मात्रा में दी जानी चाहिए?यह जानकारी मेडिकल स्टोर वाले को नहीं होती और इस तरह से एंटीबायोटिक का गलत डोस मरीज में पहुंचता है और रजिस्टेंस पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है।

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आपको बता दें कि लंबे समय से यह देखा गया है कि कई मरीजों पर एंटीबायोटिक का असर नहीं हो रहा, जिसका मुख्य कारण इनका बेवजह सेवन है। दवा दुकानों पर बिना डाक्टर की पर्ची के एंटीबायोटिक दवा दिए जाने की प्रवृत्ति भी चिंताजनक है। आइसीएमआर के महानिदेशक ने हाल में निपाह संक्रमण की रोकथाम में बंगाल सरकार की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के साथ समन्वय कर प्रभावी ढंग से काम कर रही है।

डायबिटीज जांचने वाले एचबीए1सी टेस्ट में गोलमाल, जान लीजिए क्यों नहीं है भरोसेमंद

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: अगर आपको डायबिटीज है और आपके डॉक्टर्स आपको नॉर्मल टेस्ट में शुगर लेवल न आने पर एचबीए1सी टेस्ट की सलाह देते हैं। तो सावधान हो जाइए क्योंकि यह टेस्ट गुमराह करने वाला है। हालिया रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत जैसे देश में यह परीक्षण हर बार सही नतीजे ही देगा। यह बात तय नहीं है इसके सम्बन्ध में एक जर्नल द लेसनल हेल्थ साउथ ईस्ट एशिया में प्रकाशित किया गया है। इस जर्नल में भारत के डायबिटीज और इस टेस्ट की प्रामाणिकता पर बड़े सवाल खड़े किए गए हैं। जबकि भारत में ज्यादातर डॉक्टर्स इसी टेस्ट के नतीजे के आधार पर व्यक्ति को मधुमेह का मरीज मानकर उसको दवाइयां देना शुरू कर देते हैं।

इस रिसर्च जर्नल में बताया गया है कि भारत जैसे देश जहाँ खून की कमी और कुछ आनुवांशिक सख्त बीमारियाँ ज्यादा पाई जाती हैं। यह फैक्टर इस टेस्ट के रिपोर्ट में बदलाव कर सकते हैं। इसी के चलते कभी डायबिटीज का पता लगाने में 4 साल तक की देरी हो सकती है। इसका खामियाजा खासकर महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भुगतना पड़ सकता है। भारतीयों के रक्त संबंधित यह समस्या है। इस टेस्ट के निर्णय को प्रभावित करती हैं। और इस रिपोर्ट में साफ बताया गया है के भारतीय परिस्थितियों में इस टेस्ट द्वारा दिए गए आंकड़ों को मानक नहीं माना जा सकता।

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HbA1c (ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन) टेस्ट एक रक्त परीक्षण है जो पिछले 2 से 3 महीनों के औसत ब्लड शुगर (ग्लूकोज) के स्तर को मापता है। यह टेस्ट बताता है कि लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन से कितनी शुगर जुड़ी है, जिससे डायबिटीज के निदान और नियंत्रण का सही पता चलता है। यह सामान्य ब्लड शुगर टेस्ट (जो सिर्फ उस समय की शुगर बताता है) की तुलना में अधिक सटीक जानकारी देता है।
HbA1c टेस्ट के बारे में मुख्य जानकारी:
उद्देश्य: मुख्य रूप से टाइप 2 मधुमेह के निदान, प्रीडायबिटीज (पूर्व-मधुमेह) की जांच और मधुमेह रोगियों में शुगर के स्तर पर निगरानी रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
परिणाम (प्रतिशत में):
सामान्य: 5.7% से कम।
प्रीडायबिटीज: 5.7% से 6.4%।
मधुमेह (Diabetes): 6.5% या उससे अधिक।

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इस रिसर्च जर्नल में यह सलाह दी गई है कि यदि आपको डायबिटीज के लक्षण परिलक्षित हो तो केवल इस एक टेस्ट एचबीए वन सी पर निर्भर न रहे बल्कि अन्य विकल्प के रूप में उपलब्ध टेस्ट भी करा लें। डॉक्टर्स मरीज की जरूरत के अनुसार ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट शुगर चेक होम और अन्य टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं। कई अस्पतालों में कंटिन्यूअस शुगर लेवल चैकिंग मॉनिटर्स भी उपलब्ध रहते हैं। ऐसे तमाम विकल्पों का उपयोग करने के बाद यदि शुगर का लेवल आता है तो फिर इस व्यक्ति को डायबिटिक माना जा सकता है। कई तरह की जांचों को मिलाकर देखने का तरीका यह सुनिश्चित करने के लिए ज्यादा भरोसेमंद है कि मरीज को डायबिटीज हैं या नहीं।

फिल्म नहीं हकीकत है पत्नी ने डेढ़ करोड़ लेकर पति उसकी प्रेमिका को सौंप दिया

भोपाल मध्य प्रदेश: फिल्मों में आपने देखा होगा कि किस तरीके से लप ट्रायंगल की कहानियों में कहीं हीरो अपने प्रेम को त्याग कर दूसरे को दे देता है तो कहीं हीरोइन अपना प्रेमी किसी दूसरे को सौंप देती है फिल्मों में ड्रामा होता है और ड्रामा जितना ज्यादा हो फिल्म चलने की संभावना उतनी अधिक होती है इसलिए फिल्मों में ऐसी काल्पनिक घटनाएँ गढ़ी जाती हैं। लेकिन यह काल्पनिक घटनाएं आज के कलियुग में हकीकत बनने लगी हैं और इसे कलियुग नहीं धनयुग कहें तो बेहतर होगा क्योंकि यहां धन के लिए सब कुछ हो सकता है।ऐसा ही एक महिला ने भोपाल में किया है जिसने अपने शादीशुदा जीवन में उसके पति के जीवन में आई प्रेमिका को ही अपने पति को सौंप दिया और उसके बदले में डेढ़ करोड़ रुपया लिया। यह सुनकर हो सकता है कि आपको कोई फिल्म की कहानी याद आ रही हो लेकिन यह फिल्म नहीं हकीकत है।

भोपाल के कुटुम्ब न्यायालय में इसी तरह का एक अजीबोगरीब मामला आया जहाँ पत्नी खुद चाहती थी के पति उसकी प्रेमिका के साथ रहे और उसने अपने पति का सौदा लगभग ₹15000000 में किया। पत्नी ने एक डुप्लेक्स मांगा ₹2700000 नकद लिए और अपने पति को प्रेमिका के साथ रहने की इजाजत दे दी। यह पूरा मामला घंटों की काउंसलिंग के बाद सुलझा और तीनों पक्ष इस बात पर राजी हुए। प्रेमिका भी खुश थी कि उसे प्रेमी मिल रहा था और पत्नी भी खुश थी कि उसे पैसा मिल रहा था लेकिन क्या वह पुरुष खुश था या नहीं। इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। 

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इस कहानी के किरदार असली हैं लेकिन हम आपको उनकी पहचान नहीं बताएंगे लेकिन इस फिल्म की कहानी काफी हद तक 1997 आई राज कंवर निर्देशित फिल्म जुदाई से मिलती जुलती है। इस फिल्म में अनिल कपूर पति की भूमिका में हैं और श्रीदेवी उनकी पत्नी हैं। अनिल कपूर जिस कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं उसके मालिक की बेटी का दिल अनिल कपूर पर आ जाता है और वह किसी भी कीमत पर अनिल कपूर को पाने का प्रयास करती है।अनिल कपूर की पत्नी श्रीदेवी लालची होती है उसे हाईफाई लाइफ चाहिए होती है। इसलिए प्रेमिका उर्मिला पत्नी से उसके पति अनिल कपूर को खरीदने का एक सौदा करती हैं। और इसके आगे क्या कुछ हुआ?वह आप मेरी फिल्म देखी हो तो आप जानते ही हैं।

बिल्कुल इस फिल्म की तर्ज पर ही भोपाल में यह घटना घटी जहां पति एक सरकारी कार्यालय में काम करते हैं और उनका प्रेम अपने ही विभाग की एक महिला अधिकारी से हो जाता है। धीरे धीरे नजदीकियां बढ़ती हैं और घर से दूरी बढ़ती जाती है। इस हकीकत की कहानी में भी इस पुरुष के दो बेटियाँ हैं। लेकिन यहां पर कुटुंब न्यायालय में शिकायत बड़ी बेटी ने दर्ज कराई थी क्योंकि वह घर के अशांति से परेशान थी। जब कुटुंब न्यायालय ने पति पत्नी को काउंसलिंग के लिए बुलाया तो पति ने अपने सहकर्मी से संबंधों को स्वीकार किया और इच्छा जताई कि वह न तो पत्नी को तलाक देना चाहता है और न ही प्रेमिका को छोड़ना। शुरुआत में तो कुटुंब न्यायालय भी इस बात को लेकर अचंभित हुआ लेकिन काउंसलिंग के द्वारा निष्कर्ष निकालने का प्रयास किया। 

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कई बार की काउंसलिंग के बाद पत्नी ने खुद की और बेटियों की आर्थिक सुरक्षा की मांग को रखते हुए घर कैश और तमाम शर्तें रखीं और पति की प्रेमिका ने इसे स्वीकार कर लिया और प्रेमिका अधिकारी थी और वह भी चाहती थी कि पत्नी की माँग कोई गलत नहीं है इसलिए पूरे मामले का समझौता डेढ़ करोड़ में करना तय हुआ। एक तरफ तो इस तरह का लिया गया समझौता। यह सवाल खड़े करता है कि क्या सामाजिक रूप से यह सही है लेकिन दूसरी ओर यह एक ज्वलंत उदाहरण इस बात का भी है कि यदि खुशी खुशी सामंजस्य बिठाकर किसी वैवाहिक और आंतरवैवाहिक मामले का निष्कर्ष निकाला जा सकता है तो फिर इसमें गलत ही क्या है? हर व्यक्ति की राय अलग हो सकती है लेकिन यदि इस पूरे समझौते के बाद पति पत्नी और वो खुश हैं तो फिर किसी तीसरे के कोई प्रश्न उठाने का कोई मतलब ही नहीं रह जाता…