डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: अगर आपको डायबिटीज है और आपके डॉक्टर्स आपको नॉर्मल टेस्ट में शुगर लेवल न आने पर एचबीए1सी टेस्ट की सलाह देते हैं। तो सावधान हो जाइए क्योंकि यह टेस्ट गुमराह करने वाला है। हालिया रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत जैसे देश में यह परीक्षण हर बार सही नतीजे ही देगा। यह बात तय नहीं है इसके सम्बन्ध में एक जर्नल द लेसनल हेल्थ साउथ ईस्ट एशिया में प्रकाशित किया गया है। इस जर्नल में भारत के डायबिटीज और इस टेस्ट की प्रामाणिकता पर बड़े सवाल खड़े किए गए हैं। जबकि भारत में ज्यादातर डॉक्टर्स इसी टेस्ट के नतीजे के आधार पर व्यक्ति को मधुमेह का मरीज मानकर उसको दवाइयां देना शुरू कर देते हैं।
इस रिसर्च जर्नल में बताया गया है कि भारत जैसे देश जहाँ खून की कमी और कुछ आनुवांशिक सख्त बीमारियाँ ज्यादा पाई जाती हैं। यह फैक्टर इस टेस्ट के रिपोर्ट में बदलाव कर सकते हैं। इसी के चलते कभी डायबिटीज का पता लगाने में 4 साल तक की देरी हो सकती है। इसका खामियाजा खासकर महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भुगतना पड़ सकता है। भारतीयों के रक्त संबंधित यह समस्या है। इस टेस्ट के निर्णय को प्रभावित करती हैं। और इस रिपोर्ट में साफ बताया गया है के भारतीय परिस्थितियों में इस टेस्ट द्वारा दिए गए आंकड़ों को मानक नहीं माना जा सकता।
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HbA1c (ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन) टेस्ट एक रक्त परीक्षण है जो पिछले 2 से 3 महीनों के औसत ब्लड शुगर (ग्लूकोज) के स्तर को मापता है। यह टेस्ट बताता है कि लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन से कितनी शुगर जुड़ी है, जिससे डायबिटीज के निदान और नियंत्रण का सही पता चलता है। यह सामान्य ब्लड शुगर टेस्ट (जो सिर्फ उस समय की शुगर बताता है) की तुलना में अधिक सटीक जानकारी देता है।
HbA1c टेस्ट के बारे में मुख्य जानकारी:
उद्देश्य: मुख्य रूप से टाइप 2 मधुमेह के निदान, प्रीडायबिटीज (पूर्व-मधुमेह) की जांच और मधुमेह रोगियों में शुगर के स्तर पर निगरानी रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
परिणाम (प्रतिशत में):
सामान्य: 5.7% से कम।
प्रीडायबिटीज: 5.7% से 6.4%।
मधुमेह (Diabetes): 6.5% या उससे अधिक।
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इस रिसर्च जर्नल में यह सलाह दी गई है कि यदि आपको डायबिटीज के लक्षण परिलक्षित हो तो केवल इस एक टेस्ट एचबीए वन सी पर निर्भर न रहे बल्कि अन्य विकल्प के रूप में उपलब्ध टेस्ट भी करा लें। डॉक्टर्स मरीज की जरूरत के अनुसार ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट शुगर चेक होम और अन्य टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं। कई अस्पतालों में कंटिन्यूअस शुगर लेवल चैकिंग मॉनिटर्स भी उपलब्ध रहते हैं। ऐसे तमाम विकल्पों का उपयोग करने के बाद यदि शुगर का लेवल आता है तो फिर इस व्यक्ति को डायबिटिक माना जा सकता है। कई तरह की जांचों को मिलाकर देखने का तरीका यह सुनिश्चित करने के लिए ज्यादा भरोसेमंद है कि मरीज को डायबिटीज हैं या नहीं।
