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महिला सब इंजीनियर ने लगाया गलत संलग्निकरण का आरोप, वजह राजनीतिक दबाव या कुछ और?

मुंगेली /रायपुर छत्तीसगढ़:   छत्तीसगढ़ के डिप्टी CM अरुण साव के गृह जिले मुंगेली में महिला सब इंजीनियर के साथ अधिकारियो की प्रताड़ना का मामला सामने आया है। मुंगेली में RES विभाग की महिला सब इंजीनियर सोनल जैन ने जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पाण्डेय और अन्य अधिकारियो पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। RES विभाग मुंगेली में पदस्त महिला सब इंजीनियर सोनल जैन ने अपने फेसबुक पर कई भावुक पोस्ट लिखें है। जिसमे महिला सब इंजीनियर सोनल जैन ने नियम विरुद्ध संलग्ननिकारण और प्रताड़ित करने का भी जिक्र किया है।

द इंगलेज पोस्ट के पास सोनल जैन का एक रिकॉर्डेड वीडियो स्टेटमेंट भी है जिसमें उन्होंने बताया है कि बिना किसी आधार पर जिला पंचायत के आदेश के माध्यम से उनका संलग्निकरण जनपद पंचायत मुंगेली से RES डिवीजन ऑफिस मुंगेली कर दिया गया है। लेकिन जब महिला सब इंजीनियर ने अपने अधिकारियों से इस सम्बंध में चर्चा की तो उन्हें अधिकारियो द्वारा मौखिक रूप से बताया गया कि उनके ऊपर राजनैतिक प्रेसर है। जिसके कारण महिला सब इंजीनियर को जनपद पंचायत मुंगेली से हटाकर RES डिवीजन ऑफिस मुंगेली में संलग्न किया गया है। इस कार्यवाही का विरोध करने पर महिला सब इंजीनियर सोनल जैन को अलग अलग माध्यमों से राजनैतिक और अधिकारी वर्ग के लोगों द्वारा मैसेज एवं अन्य माध्यमों से प्रताड़ित किया जा रहा है।

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पूरे मामले में दिलचस्प बात यह है कि महिला सब इंजीनियर ने गलत संलग्निकरण की जानकारी जब RTI के माध्यम से मांगी तो महिला सब इंजीनियर सोनल जैन को विभाग की तरफ से अभी तक कोई भी जानकारी नहीं दी गई है। पूरे मामले को लेकर महिला सब इंजीनियर ने गलत संलग्निकरण और प्रताड़ना के तहत न्यायालय का रुख अपनाने की बात कही है। महिला सब इंजीनियर द्वारा सोसल मीडिया फेसबुक पर छत्तीसगढ़ शासन के संलग्निकरण आदेश की कॉपी शेयर की है। साथ ही पूरे मामले को लेकर उनके असंवैधानिक और गलत तरीके से किए गए संलग्निकरण आदेश को भी शेयर किया गया है। अब देखना ये होगा कि छत्तीसगढ़ में महिला सम्मान और महिला शासक्तिकरण की मिशाल पेश करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चहेते मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुंगेली के माटी पुत्र डिप्टी CM अरुण साव महिला सब इंजीनियर सोनल जैन क़ो प्रताड़ित करने के मामले में शासन के अतरंगी सिस्टम की सतरंगी बदनामी करवाने वाले अधिकारियो के खिलाफ क्या कार्यवाही करते है। 

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जीवाजी विश्वविद्यालय का कर्मचारी बिल्डिंग से कूदा हुई मौत, युनिवर्सिटी पर लगाए गंभीर आरोप

ग्वालियर मध्य प्रदेश: जीवाजी विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी ने सेंट्रल लाइब्रेरी की बिल्डिंग से कूदकर आत्महत्या कर ली है। यह कर्मचारी अंगज जाटव माली के रूप में काम करता था।लाइब्रेरी के कर्मचारियों ने बताया कि अंगद पिछले कुछ दिनों से तनाव में चल रहा था। हालांकि तनाव को लेकर कई वजह सामने आ रही हैं लेकिन एक कारण यह भी निकल कर आ रहा है कि उसका स्थानांतरण सेंट्रल लाइब्रेरी से दूसरे विभाग में कर दिया गया था लेकिन उस विभाग में उसे ज्वाइनिंग नहीं मिल रही थी। हालांकि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है लेकिन जीवाजी विश्वविद्यालय प्रबंधन इस बारे में कोई भी जानकारी देने से बच रहा है।

आपको बता दें कि अभी हाल ही में जीवाजी विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कर्मचारियों के स्थानांतरण कर उनके विभाग बदले थे। अंगद जाटव भी इसी स्थानान्तरण वाली सूची में शामिल था। अंगद को लाइब्रेरी से हटा कर अन्य विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया था लेकिन उसे दूसरे विभाग में ज्वाइन भी नहीं करवाया गया था। इससे परेशान होकर शाम 4 बजे वह सेंट्रल लाइब्रेरी के भवन से कूद गया। अन्य साथी कर्मचारियों ने जब उसे नीचे घायल अवस्था में देखा तो तुरंत नजदीकी आरोग्यधाम अस्पताल पहुँचाया। उसकी गंभीर हालत देखकर उसे ट्रॉमा सेंटर भेज दिया गया जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। 

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पुलिस ने आत्महत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस पूछताछ में भी अंगद के तनाव में रहने की जानकारी सामने आई है। लेकिन इस पूरे मामले में जीवाजी विश्वविद्यालय प्रबंधन खामोश है।एक कर्मचारी के मौत के बाद प्रबंधन किसी भी तरह का जवाब नहीं दे रहा है। प्रबंधन की तरफ से न तो मौत की पुष्टि की गई है ना ही संवेदना व्यक्त की गई है। विश्वविद्यालय प्रबंधन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में विश्वविद्यालय का पक्ष नहीं रख रहा है। स्थानांतरण के बाद जॉइनिंग न देना कहीं न कहीं विश्वविद्यालय प्रबंधन की लापरवाही भी उजागर कर रहा है।

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10वी गणित की परीक्षा दे रही छात्रा को आया हार्ट अटैक हुई मौत, घटना सुनकर हर कोई हैरान!

मुरैना, मध्य प्रदेश: मध्यप्रदेश बोर्ड की 10वीं की परीक्षा मंगलवार को आयोजित की गई थी। मुरैना में गणित का पेपर दे रही एक छात्रा को परीक्षा के दौरान ही अचानक दिल का दौरा पड़ गया। उसकी हालत बिगड़ गई उसे तुरंत ग्वालियर के लिए रेफर किया गया लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। एक इतनी कम उम्र की छात्रा की हार्ट अटैक से मौत की घटना पर हर कोई हैरान है। परिजन बताते हैं कि वह पूरी तरह स्वस्थ थी और अब हार्ट अटैक के कारण को लेकर कई गंभीर आरोप परिजन लगा रहे हैं। छात्रा का शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

छात्रा के हार्ट अटैक की यह घटना बानमोर स्थित पंडित नेहरू कालेज भाग दो परीक्षा केंद्र की है। मंगलवार को गणित की परीक्षा चल रही थी। केंद्र की तीसरी मंजिल पर सोलह वर्षीय छात्रा वर्षा कुशवाह परीक्षा दे रही थी। सब कुछ सामान्य था लेकिन एक बात निकलकर आ रही है कि यह केन्द्र नकल कराए जाने को लेकर चर्चाओं में था और यही देखते हुए तहसीलदार के नेतृत्व में फ्लाइंग स्कॉट टीम परीक्षा केन्द्र पर चेकिंग करने पहुंची थी। फ्लाइंग स्कॉड की टीम ने छात्रा से भी नकल को लेकर कुछ सवाल किए थे जिनके सवाल सुनकर छात्रा घबरा गई और बेहोश होकर वहीं गिर गई। वहाँ परीक्षा आयोजकों ने जब देखा तो तुरंत केंद्र के बाहर खड़े लोगों को सूचना दी और छात्रा वर्षा के भाई सतीश और अंकुश कुशवाह उसे बामोर से ग्वालियर के लिए इलाज के लिए लेकर निकले लेकिन रास्ते में ही छात्रा वर्षा कुशवाह की मौत हो गई।

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कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने कहा, ‘छात्रा की मौत काफी दुःखद है। मैंने खुद ग्वालियर के डॉक्टरों से इस मामले में संपर्क किया है। प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर अभी सिर्फ यह सामने आया है कि छात्रा अतिकुपोषित थी। गंभीर एनीमिया से भी पीड़ित थी। इस कारण संभवतः हार्ट अटैक आया होगा। स्पष्ट कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आएगा

आपको बता दें कि वर्षा कुशवाह अपने परिवार के साथ ग्वालियर में रहती हैं। वर्षा देवेंद्र कुशवाह की पुत्री है। ग्वालियर के जखारा क्षेत्र में रहते हुए भी उन्होंने मुरैना से परीक्षा क्यों दिलवाई थी? इस बारे में कोई जानकारी निकल कर सामने नहीं आई है। परीक्षा केन्द्र पर क्या हुआ था इस बारे में भी परीक्षा केंद्र के जिम्मेदार ज्यादा जानकारी नहीं दे रहे हैं। लेकिन एक सोलह साल की बच्ची की मौत हार्ट अटैक से होना कई सवाल खड़े करती है। अभी तक युवाओं और बच्चों में हार्ट अटैक के कई मामले चर्चाओं में रहे हैं लेकिन परीक्षा के दौरान हाट अटैक आने की सम्भवतः यह पहली घटना है।

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जबलपुर मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के जबलपुर-भोपाल नेशनल हाईवे पर रेलवे ओवरब्रिज गिरने से बड़ा हादसा हो गया। यहां शाहपुरा के पास रेलवे ओवर ब्रिज का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया। NH-45 पर हुए इस हादसे के बाद ट्रैफिक जाम हो गया। गनीमत रही कि हादसे के वक्त ब्रिज के पास कोई गाड़ी खड़ी नहीं थी। जहां ओवर ब्रिज टूट कर गिरा है, उसके पास ही रेलवे क्रॉसिंग हैं। यह ब्रिज रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर ही बनाया गया है। दिसंबर महीने में इसी ब्रिज का एक और हिस्सा भी टूटकर गिरा था। एमपी की राजधानी भोपाल को जबलपुर से जोड़ने वाले एनएच-45 पर हादसे के बाद जाम के हालात बन गए। 

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लगातार ब्रिज की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे थे। इस घटना ने पीडब्ल्यूडी और मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के कामकाज की असलियत उजागर कर दी है। गौरतलब है कि भोपाल में बने 90 डिग्री ब्रिज के निर्माण को लेकर भी प्रदेश के पीडब्ल्यूडी की देशभर में किरकिरी हुई थी। अब जबलपुर का यह हादसा एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यह घटना न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रही है बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी बड़ा सवाल छोड़ गई है।

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यह ओवरब्रिज जबलपुर को भोपाल से जोड़ता है और करीब चार साल पहले ही तैयार हुआ था। बांगड़ कंपनी ने इसका निर्माण कराया था और 391 करोड़ रुपये इसकी लागत आई थी। इसका निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था और 2022 में काम पूरा हुआ था। ब्रिज का एक हिस्सा कई महीनों से क्षतिग्रस्त था, जिस कारण यातायात केवल एक हिस्से से संचालित हो रहा था। अब दूसरा हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो जाने से स्थिति गंभीर हो गई है।

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उमंग सिंघार ने लगाया भाजपा सरकार पर दो वर्ष में भी घोषणापत्र के वार पूरे न करने का आरोप

भोपाल मध्य प्रदेश: एक और जहां मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार अपने दो वर्ष पूरे होने का गुणगान कर रही है और कई उपलब्धियाँ गिना रही हैं तो वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक मीडिया हाउस से चर्चा करते हुए भाजपा के दो साल के कार्यकाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि भाजपा ने घोषणापत्र में जो वादे किए थे उन्हें दो वर्ष में भी पूरा नहीं कर पाई है। अगर प्रदेश आत्मनिर्भर और सक्षम हो रहा है तो कर्ज की आवश्यकता ही नहीं है। प्रदेश की जनता को वर्ष दो हजार सैंतालीस के सपने दिखाने की जगह आज सरकार क्या कर रही है?क्या सरकार ने रियायतें दी? ऐसे तमाम सवालों के साथ उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आगे आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा कि कागजों में योजना बना ली जाती हैं पर उनके लिए बजट रखा ही नहीं जाता। जब बजट ही नहीं रहेगा तो क्या होगा जिसकी जितनी हिस्सेदारी उसकी उतनी भागीदारी इस आधार पर सरकार बजट रखेगी तो धरातल पर योजनाएं दिखेंगी। वर्तमान सरकार पूरी तरह विफल है लेकिन उनकी विफलताएं गिनाने पर वह कांग्रेस से पूछती हैं कि पन्द्रह महीने में कांग्रेस ने क्या बदल दिया। कांग्रेस की सरकार आई थी तो किसानों की कर्जमाफी का वादा तुरंत पूरा किया था।

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जनता के मुद्दे उठाने के मामले में उमंग सिंघार ने कहा कि सदन में कम बैठकों की वजह से विपक्ष को जनता की आवाज़ उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है। हमारी पहली कोशिश यही है कि बैठकों की संख्या बढ़ाई जाए।सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बचना चाहती है। विपक्ष की बात सुनने का सरकार के पास समय नहीं है वह सिर्फ अपना बिजनेस करना चाहती है।सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर समय देना नहीं चाहती ध्यान आकर्षण और लोक महत्व के विषय विधायकों ने लगाए पर उन पर जवाब नहीं देना चाहती।

अभी हाल ही में जिस तरह से विधानसभा में अब मर्यादित शब्दों का प्रयोग हुआ उस पर उमंग सिंघार ने कहा कि लोकतंत्र के मंदिर में ऐसा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए सरकार चर्चा नहीं करना चाहती और वह भी डराकर।वह विपक्ष को नहीं देश की जनता को डराना चाहती है उसकी आवाज बंद करना चाहती है।यह प्रदेश की जनता का अपमान है।

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मौत का हाईवे, चार साल से चार लेन के इंतजार में चार हिस्सेदारों का खेल और अनगिनत मौत

ग्वालियर भिंड मध्य प्रदेश: ऐसे हाईवे की हकीकत जहां पर अक्सर मौत की खबरें आती हैं और खबरों के बाद 4 दिन तक घमासान होता है। हम बात कर रहे हैं ग्वालियर भिंड राष्ट्रीय राजमार्ग 719 की। शनिवार सुबह लगभग चार बजे इसी हाईवे पर एक भीषण हादसा छीमक गाँव के पास होता है जिसमें एक बस और यात्रियों से भरी बैन आमने सामने से टकरा जाती हैं। टक्कर इतनी भीषण होती है की वैन के परखच्चे उड़ जाते हैं। इस भीषण हादसे में पांच लोगों की मौत होती है और छह लोग घायल हो जाते हैं। इन हादसों के पीछे का एक बड़ा कारण यह है कि यह हाईवे अब तक चार लेन नहीं हो सका है जबकि चार साल से इस हाइवे के चार लेन होने की फाइल कहीं धूल खा रही है और इस चार पाँच छह के खेल में अनगिनत लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।

यह देश के उन कुछ मौत के हाइवे में से एक है जहां मौत के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग 719 पर पिछले 50 दिनों में 25 लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग घायल हो चुके हैं। अभी हाल ही में इकतीस जनवरी को भी इस हाईवे पर एक भीषण हादसा हुआ था जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। यह मौत का हाईवे है। यहाँ कभी भी आप मौत का सामना कर सकते हैं और इसका कारण यह है कि इस हाईवे पर ट्रैफिक लोड ज्यादा है और हाईवे बहुत सकरा है। हाइवे को फोरलेन में परिवर्तित किए जाने की मांग लंबे समय से उठ रही है और जब भी मांग उठती है तो कुछ दिनों के लिए इसकी फाइल इधर से उधर घूमा दी जाती है और जनप्रतिनिधि बड़े वादे करके आश्वासन दे के जनता के आक्रोश को शांत कर देते हैं। चार साल से चार लेन के लिए अटकी यह मांग चार दिन तक आक्रोश में बदलने के बाद किसी चारदीवारी में कैद कर दी जाती है।

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शनिवार को भीषण हादसा हुआ। पांच लोगों की मौत हुई। और एक बार फिर इस रोड के चौड़ीकरण की मांग उठने लगी। इस रोड के चौड़ीकरण को लेकर भिंड और ग्वालियर के आम नागरिकों के साथ-साथ संत समाज भी उग्र आंदोलन कर चुका है। संत समाज के कालिदास महाराज ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि यदि चौड़ीकरण का कार्य जल्द शुरू नहीं हुआ तो फिर से आंदोलन किया जाएगा। विरोध और आक्रोश कितना भी हो लेकिन हमारी चुनी गई सरकार इतनी निरंकुश हो चुकी है कि उसे कोई फर्क पड़ता नहीं है। आए दिन इस हाईवे पर एक्सीडेंट होते हैं। छोटे मोटे एक्सीडेंट की तो अब यहां बात ही नहीं होती केवल वह एक्सीडेंट जो भीषण हो जिसमें कुछ लोगों की मौत हो वही खबरों में आता है उसी की चर्चा होती है। 

मौत के इस हाईवे के पीछे की लापरवाही और यहां होने वाली मौत का दोषी हर वह व्यक्ति है जो इस हाइवे के चौड़ीकरण के काम में रोड़ा अटका रहा है चाहे वह कोई जिम्मेदार अधिकारी हो चाहे कहीं वो जनप्रतिनिधि हो। और सबसे बड़ा दोषी है नितिन गडकरी जो कई बार हाई वे निर्माण के लिए बड़ी बड़ी बातें करते नज़र आते हैं। हजार दो हजार दस हजार करोड़ की बात ऐसे करते हैं जैसे पैसा अपनी जेब से दे रहे हो। उनकी बड़ी बड़ी घोषणाओं और उनकी दूरदर्शिता की जद में अभी तक ग्वालियर भिंड हाइवे क्यों नहीं आ पाया? या आने के बाद भी वह यहां काम क्यों नहीं शुरू करा पाए यह प्रश्न कहीं न कहीं अपना जवाब ढूंढ रहा है। 

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शनिवार को पांच मौतें एक बार फिर हो चुकी हैं और कुछ नहीं कहा जा सकता कि कुछ दिन बीते और फिर से एक भीषण हादसे की खबर आ जाए। 4 साल से इस हाईवे को फोरलेन करने की मांग उठ रही है। कई आंदोलन हो चुके हैं लेकिन फाइल कहीं न कहीं फंसी हुई है। अब यह फाइल जिसकी वजह से भी फंसी है और जिस वजह से भी यह भीषण हादसे हो रहे हैं उन सबके पीछे उन लोगों को दोषी माना जाना चाहिए जिनकी वजह से इस हाइवे के फोर लेन होने में देरी हो रही है जिन्होंने अपने हिस्सेदारी के चक्कर में इस फाइल को कहीं अटका रखा है। 

खबर ये नहीं कि एंबुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया। खबर यह है कि प्रदेश सरकार की एयर एंबुलेंस योजना खोखली साबित हुई

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर के गजराज मेडिकल कालेज में एमबीबीएस के बाद इंटरन करने आए छात्र की हालत अचानक बिगड़ी उसको सीवियर हार्ट अटैक आया। हालत इतनी खराब हुई कि उसे तुरंत वेंटिलेटर का सपोर्ट देना पड़ा और ग्वालियर के प्रतिष्ठित कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर पुलिस रस्तोगी अपनी टीम के साथ उसकी निगरानी में लगे रहे। यहां उसकी हालत नहीं सुधर रही थी इसलिए निर्णय लिया गया कि उसे एयर एंबुलेंस से तुरंत दिल्ली ले जाने का निर्णय हुआ लेकिन जब एयर एंबुलेंस बुलाई गई तो शासन के सारे दावों की पोल खुल गई। एंबुलेंस घंटों इंतजार के बाद भी आई नहीं। तब रात दस बजे ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया और छात्र को दिल्ली तक सड़क मार्ग से एंबुलेंस से ले जाने का निर्णय लिया गया।

आज तमाम खबरों को देखा तो उसमें ग्रीन कॉरिडोर बनाने की वाहवाही तो प्रमुखता से छपी है लेकिन शासन की एयर एंबुलेंस योजना किस तरह खोखली है और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध नहीं होती है उसकी हकीकत एक बार फिर सामने आ चुकी है। एयर एंबुलेंस की सेवा तत्काल उपलब्ध होने की बजाय यदि घंटों इंतजार करना पड़े तो कोई एयर एंबुलेंस की सुविधा लेगा ही क्यों और इस मामले में एयर एंबुलेंस का इंतजार करने में ही काफी घंटे बर्बाद हो गए ओकी। एयर एंबुलेंस का इंतजार करते करते सुबह से शाम हो गई। खबरों में छपा है कि रात तक एयर एंबुलेंस नहीं आ सकी। मैं एयर एंबुलेंस लैंड नहीं हो सकी और तब जाकर आपात स्थिति में रात को दस बजे क्रीम कॉरिडोर बनाया गया और जेएएस से पुरानी छावनी तक की दूरी बीस मिनट में तय की गई।

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छात्र की हालत बिगड़ रही थी इसलिए एयर एंबुलेंस से उसे दिल्ली ले जाना था। एयर एंबुलेंस की उपलब्ध न होने पर रात को 9:30 बजे ट्रैफिक पुलिस को सूचना दी गई और महज 1/2 घंटे में ही सारे इंतजाम कर लिए गए और तुरंत ही जय आरोग्य अस्पताल से  एंबुलेंस को निकालकर पुरानी छावनी हाईवे तक बिना ट्रैफिक रुकावट के बीस मिनट में पहुंचा दिया गया।उसके बाद एंबुलेंस दिल्ली के लिए रवाना हो गई। निस्संदेह प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस द्वारा बरती गई तत्परता से ग्रीन कॉरिडोर बनाने में मदद मिली और बहुत कम समय में यह एंबुलेंस पुरानी छावनी पहुंच गई। अन्यथा यह सफर तय करने में हमारे प्रदेश की घटिया एंबुलेंस को एक घंटे से अधिक समय लगता है। यह मेरा स्वयं का अनुभव है।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह आई के हार्ट अटैक के मरीज एमबीबीएस इंटर शैलेंद्र के माता पिता को न तो मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा था और न मध्य प्रदेश की एंबुलेंस पर जानकारी यह मिली है कि शैलेन्द्र का इलाज ग्वालियर के कार्डियोलॉजी विभाग में भली भांति चल रहा था लेकिन जब उनके माता पिता दिल्ली से आए तो उन्होंने यहां की सुविधाओं पर भरोसा न जताते हुए अपने बेटे को दिल्ली ले जाने का निर्णय लिया। उन्होंने दिल्ली अपोलो में पहले से ही बात कर रखी थी।उन्होंने अपने बेटे को दिल्ली ले जाने के लिए यहां की एंबुलेंस तक पर भरोसा नहीं किया। इसलिए पहले से ही अपोलो में बात करने के चलते अपोलो से ही वेल इक्युप्ड और विशेषज्ञ डॉक्टर्स की टीम के साथ एंबुलेंस ग्वालियर आई थी। और इसी एंबुलेंस के लिए ग्वालियर में ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। 

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अब मध्यप्रदेश में एयर एंबुलेंस की हकीकत जान लीजिए। मध्य प्रदेश के पांच जिलों में ही जरूरतमंदों को एयर एंबुलेंस सेवा का लाभ मिला। पीएम श्री एयर एंबुलेंस सेवा के तहत प्रदेश में कुल 127 रोगियों को लाभान्वित किया गया, इनमें से सर्वाधिक 44 रोगी उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के गृह जिले रीवा के हैं। इसी तरह जबलपुर 21, भोपाल 14, छतरपुर 11 और ग्वालियर के पांच रोगी लाभान्वित हुए हैं। वहीं, 32 जिलों में इस सुविधा का उपयोग ही नहीं किया गया। यह आंकड़े साफ बता रहे हैं कि जिस उद्देश्य से जिंदाों के साथ एयर एंबुलेंस शुरू की गई थी वह अब तक दूर की कोड़ी साबित हुए हैं। 

राज्य सरकार ने गंभीर मरीजों को आपात चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जून 2024 में पीएम श्री हवाई एंबुलेंस सेवा शुरू की थी। लेकिन जमीनी स्तर पर यह सेवा अपेक्षित लाभ नहीं दे पा रही। कुछ मरीजों को तीन से चार दिन तक एयर एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा। जबकि, अनुबंध के अनुसार निर्धारित हेलीकाप्टर और फिक्स्ड-विंग फ्लाइंग आइसीयू को प्रदेश में ही 24 घंटे, सातों दिन उपलब्ध रहना था। राज्य सरकार ने इस सेवा के लिए विमानन कंपनी फ्लाय ओला से अनुबंध किया है, जिसे प्रति मरीज औसतन 40 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है।

अनुबंध के अनुसार विगत वर्ष में फिक्स्ड विंग एयर एम्बुलेंस कुल 720 घंटे में से 25 प्रतिशत घंटे का ही उपयोग किया। सरकार का दावा है कि योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार से यह उपयोगिता इस वर्ष बढ़कर 57 प्रतिशत हुई है। इसी तरह हेली एंबुलेंस के कुल 480 घंटे में से केवल सात प्रतिशत घंटे ही उपयोग हो पाए। इस वर्ष उपयोगिता बढ़कर 22 प्रतिशत हुई है। योजना की शुरुआत से जनवरी 2026 तक विमान कंपनियों से 1,200 घंटे उड़ान का अनुबंध था लेकिन 204 यानी 17 प्रतिशत घंटे का ही उपयोग हुआ। इन्हीं सब कारणों के चलते एयर एंबुलेंस सेवा की प्रभावशीलता पर कई बार सवाल उठे हैं। और यही सवाल आज ग्वालियर में एमबीबीएस इंटर्न को एयर एंबुलेंस न मिलने पर उठना वाजिब है।

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ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर के शासकीय गजरा राजा मेडिकल कालेज में इंटर्नशिप कर रहे एक पच्चीस वर्षीय छात्र को शुक्रवार देर रात सीवियर हार्ट अटैक आ गया। समय रहते डॉक्टर्स ने उनका इलाज शुरू कर दिया है लेकिन अभी वह वेंडीलेटर सपोर्ट पर हैं और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। हालत में सुधार के बारे में अभी डॉक्टर्स ने कोई जानकारी नहीं दी है। इतनी कम उम्र में सीवियर हार्ट अटैक की वजह क्या रही इस बारे में भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। छात्र दिल्ली का रहने वाला है और एमबीबीएस करने के बाद इंटर्नशिप के लिए जीआरएमसी ग्वालियर में है।

छात्र शैलेन्द्र को शुक्रवार रात 1130 बजे अचानक कंधे के ऊपर दर्द हुआ और सीने में मदद हुआ। शुरुआत में लापरवाही बरतते हुए उसने इसे सामान्य दर्द समझा लेकिन जब दर्द बढ़ा तो वह खुद ही न्यूरो सर्जरी विभाग पहुँच गया। वहां पहुंचते ही बेहोश हो गया। डॉक्टर्स ने जांच के बाद पाया कि इस छात्र को सीवियर हार्ट अटैक आया है और तुरंत उसे इलाज दिया गया हालत गंभीर होने के चलते छात्र को वेंटिलेटर पर रखा गया। गलजा राजा मेडिकल कालेज के कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ पुनीत रस्तोगी जूनियर डॉक्टर्स के साथ छात्र शैलेंद्र का इलाज कर रहे हैं।छात्र की स्थिति पर पूरी तरह निगरानी रखी हुई है।

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मेडिकल कालेज से मिली जानकारी के अनुसार वैसे तो छात्र पूरी तरह स्वस्थ हैं। लेकिन कुछ समय पूर्व दिल्ली में हुए एक हादसे में छात्र की माँ की मौत हो गई थी। इसके बाद से ही वह तनाव की स्थिति में था। यह तनाव की स्थिति भी छात्र के सीवियर हार्ट अटैक की वजह हो सकती है लेकिन अभी तक इस हार्ट अटैक की प्रमाणिक वजह डॉक्टर्स ने नहीं बताई है। छात्र अभी वेंटिलेटर पर हैं। छात्र की स्थिति नाजुक बनी हुई है। छात्र की स्वास्थ्य स्थिति पर सभी डॉक्टर्स निगरानी रखे हुए हैं। घटना की जानकारी छात्र के परिजनों को दे दी गई है।

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10 साल से दबा एआरटीओ भर्ती घोटाला एक बार फिर सवालों के घेरे में

ग्वालियर मध्य प्रदेश: अपनी गर्व झाले और नियमबद्ध कारनामों के लिए पहचान रखने वाले मध्यप्रदेश परिवहन विभाग का एक कारनामा एक बार फिर सुर्खियों में हालांकि मामला दस साल पुराना है और काफी लंबे समय से दबाए रखा गया था लेकिन अब कैग ने अपनी रिपोर्ट में इस अनियमितता पर सवाल उठाए हैं। मामला दो हजार चौदह में एआरटीओ की तेरह पदों पर भर्ती से जुड़ा हुआ है। जब इन तेरह पदों पर एक बार की जगह दो बार भर्ती कर दी गई और कुल छब्बीस अभ्यर्थियों को सेलेक्ट किया गया लेकिन जब दूसरी बार भर्ती किए गए तेरह एआरटीओ को पोस्टिंग नहीं मिली और वह कोर्ट पहुंचे तब मामले का खुलासा हुआ।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग की रिपोर्ट में परिवहन विभाग की एआरटीओ भर्ती प्रक्रिया के मामले में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि ए आरटीओ के 13 पदों के लिए भेजी गई मांग को विभाग ने गलती से दूसरी बार भेज दिया था और इस गलती के बाद इसे सुधारने की बजाय भुला दिया गया। विभाग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इस वजह से तेरह पदों के लिए कुल छब्बीस अभ्यर्थियों का चयन हो गया और बाद में चयनित तेरह अभ्यर्थियों को पोस्टिंग नहीं मिल पाई।

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कैग की रिपोर्ट में बताया गया है की दो हजार चौदह में तेरह पदों के लिए मांग भेजी थी जिस पर परीक्षा कराकर अगस्त दो हजार सोलह में तेरह अभ्यर्थियों के भर्ती की अनुशंसा की गई और दिसंबर दो हजार सोलह में उन्हें नियुक्तियां दे दी गई लेकिन दो हजार चौदह सितंबर में इन्हीं पदों के लिए फिर से मांग भेजी थी जिस पर फिर से परीक्षा दिसंबर दो हजार चौदह में आयोजित हुई और तेरह अभ्यर्थियों के भर्ती की अनुशंसा फिर से कर दी गई। इस गड़बड़ का पता चलने के बाद विभाग ने दस साल तक मामला दबाए रखा। जब दूसरे सूची के अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिली तो मामला न्यायालय पहुंचा और शासन ने पदोन्नति के उन्नीस पदों में से समायोजन कर इन तेरह अभ्यर्थियों में से नौ अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी।

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केग की रिपोर्ट में बताया गया है यह एक गंभीर चूक है। यह आंतरिक नियंत्रण की विफलता है और इसमें जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है। यह मामला परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है जहां एक ही पदों पर दो बार भर्ती प्रक्रिया कर दी गई। साथ ही परिवहन विभाग के अधिकारियों ने इस गड़बड़ को सुधारने की बजाय दस साल तक दबाकर रखा। हालांकि इस मामले में अभी तक किसी दोषी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है जबकि शासन को पूरी तरह से इस मामले की जानकारी है।अब देखना होगा कि कैग रिपोर्ट के बाद इस मामले में दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है?

जयप्रकाश राजोरिया मुश्किल में, भ्रष्टाचार के मामले में लोकायुक्त में हुई शिकायत

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय और भारतीय यात्रा प्रबंधन संस्थान में सिक्योरिटी गार्ड उपलब्ध कराने वाली संस्था सर्विस सिक्योरिटी एजेंसी द्वारा वित्तीय अनियमितता किए जाने और नियम विरुद्ध दस साल से टेंडर लेने के मामले में जीवाजी विश्वविद्यालय भारतीय यात्रा प्रबंधन संस्थान शर्मा सर्विस सिक्योरिटी एजेंसी के संचालक जयप्रकाश साजोरिया लक्ष्मी शर्मा व अन्य के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दस साल से नियमों को ताक में रखते हुए शर्मा सर्विस सिक्योरिटी एजेंसी को गलत तरीके से लाभ दिया गया है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि 2015 से 2025 तक उक्त संस्थानों में सुरक्षा का ठेका एक ही एजेंसी शर्मा सर्विस सिक्योरिटी एजेंसी को दिया गया है। इस मामले में जीवाजी विश्वविद्यालय के जिम्मेदारों की बड़ी लापरवाही वह अनियमितता भी नजर आ रही है।

छह पन्नों की लिखित शिकायत में शिकायतकर्ता का आरोप है कि 2015 से 2025 तक जीवाजी विश्वविद्यालय के विभिन्न कुलपति और कुलसचिव और भारतीय यात्रा प्रबंधन संस्थान के कुलपति ने शर्मा सर्विस सिक्योरिटी एजेंसी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है। जीवाजी विश्वविद्यालय में पिछले कई सालों से मैनपावर और सिक्योरिटी व्यवस्था सवालों के घेरे में रहती है। इसमें नियमों का और सुरक्षा अधिनियम एक्ट 2005 का कोई पालन नहीं किया गया है। मनमाने तरीके से राजनीतिक दबाव के चलते जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलपति कुलसचिव द्वारा 2015 से 2025 तक उक्त शर्मा एजेंसी को सुरक्षा कार्य दिया गया है। हर वर्ष टेंडर प्रक्रिया होनी चाहिए लेकिन इस मामले में टेंडर प्रक्रिया नहीं निकाली गई और शर्मा सर्विस को लाभ दिया गया। 

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आपको बता दें कि शर्मा सर्विस सिक्योरिटी एजेंसी लंबे समय से सुरक्षा गार्ड और मैन पावर देने का काम कर रही है। जिसका कार्यालय मोहनपुर थाटीपुर क्षेत्र में है और इसके संचालक वर्तमान ग्वालियर जिला भाजपा अध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया लक्ष्मी शर्मा एवं अन्य हैं। पिछले दस साल से इसी एजेंसी को किस तरह से जीवाजी विश्वविद्यालय और भारतीय यात्रा प्रबंधन संस्थान में कार्य मिल रहा है और लोकायुक्त में की गई शिकायत के संबंध में जानकारी लेने के लिए जयप्रकाश राजोरिया का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया। उन्होंने फोन उठाकर किसी कार्यक्रम में व्यस्त होने की बात कहकर फोन काट दिया। इस मामले में शिकायतकर्ता जयप्रकाश मौर्य से बात की तो उनका साफ कहना है की बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और यदि लोकायुक्त इसकी सही तरीके से जांच करता है तो काफी बड़े मात्रा में भ्रष्टाचार उजागर होगा।

आपको बता दें कि समय समय पर समाचार पत्रों में भी जीवाजी विश्वविद्यालय में एक ही एजेंसी को सुरक्षा ठेका दिए जाने पर खबरें छपती हैं और सवाल खड़े होते हैं। लेकिन इसके बाद भी कोई बदलाव नहीं होता है। शिकायतकर्ता जयप्रकाश मौर्य ने भी तमाम खबरों को साक्ष्य के रूप में लोकायुक्त में की गई शिकायत के साथ प्रस्तुत किया है। साथ ही अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। शिकायतकर्ता ने शर्मा सर्विस सिक्योरिटी एजेंसी को बार बार एक्सटेंशन दिए जाने को गंभीर मामला बताया। शिकायतकर्ता का कहना है कि सुरक्षा का ठेका टेंडर प्रक्रिया के द्वारा दिया जाता है और इसमें कई अन्य एजेंसियां भी रुचि दिखाती हैं। किंतु विश्वविद्यालय द्वारा पिछले कई सालों से कोई टेंडर प्रक्रिया या टेंडर संबंधित विज्ञप्ति प्रकाशित नहीं कराई गई है। शर्मा सर्विस सिक्योरिटी एजेंसी को नियम विरुद्ध ठेका दिए जाने से साथ ही शासन को आर्थिक हानि हुई है। 

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शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन पत्र में कई गंभीर आरोप शर्मा सर्विस सिक्योरिटी एजेंसी और इनके संचालक वर्तमान भाजपा ग्वालियर जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया पर लगाए हैं। कई तरह की अनियमितताओं की बात की है। शिकायतकर्ता जयप्रकाश मौर्य शर्मा सुरक्षा एजेंसी के इस मामले को करोड़ों रुपए का घोटाला बता रहे हैं। उनका साफ कहना है कि जिस तरह से दस वर्षों से शर्मा सर्विस सिक्योरिटी। एजेंसी को ही मैनपावर और सिक्योरिटी का काम दिया गया है उसमें कहीं न कहीं राजनीतिक दबाव है। साथ ही शिकायत करने के बाद उनके पास भी कई तरह के फोन आ रहे हैं यह आरोप भी उन्होंने लगाया है। हालांकि जीवाजी विश्वविद्यालय में लगाई गई मैनपावर और सिक्योरिटी एजेंसी की तमाम खबरें लंबे समय से प्रकाशित होती हैं जो कई तरह की अनियमितताओं की ओर इशारा करती हैं लेकिन इसके बावजूद अभी तक न तो जीवाजी विश्वविद्यालय ने और न ही राज्य शासन ने इस मामले में कोई कदम उठाया है। अब देखना होगा कि शिकायतकर्ता की शिकायत को लोकायत कितनी गंभीरता से लेता है।