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भ्रष्टाचार से परेशान पुलिसकर्मी ने खाया जहर हुई मौत, सुसाइड नोट में खोल दिया अधिकारियों का काला चिट्ठा

नीमच, मध्य प्रदेश:  शहर की पुलिस लाइन में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब वहां तैनात एक हेड कॉन्स्टेबल ने विभाग के ही बड़े अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए मौत को गले लगा लिया। कनावटी पुलिस लाइन में पदस्थ 50 वर्षीय होशियार सिंह ने रविवार दोपहर जहरीला पदार्थ गटक लिया। जहर खाने के बाद वे खुद चलकर कंट्रोल रूम पहुंचे और वहां मौजूद स्टाफ को इसकी जानकारी दी। जब तक उन्हें अस्पताल ले जाया जाता, उनकी हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत से पहले होशियार सिंह ने 4 पन्नों का एक सुसाइड नोट लिखा है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस नोट ने पुलिस महकमे के भीतर चल रहे पैसों के खेल और भ्रष्टाचार की पोल खोल कर रख दी है।

होशियार सिंह ने अपने सुसाइड नोट में रक्षित निरीक्षक (आरआई) विक्रम सिंह भदौरिया और लाइन में तैनात हेड कॉन्स्टेबल प्रणव तिवारी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि नीमच पुलिस लाइन में सब कुछ बिक रहा है। रोजनामा लिखने से लेकर ड्यूटी लगाने तक के लिए कर्मचारियों से पैसे वसूले जा रहे हैं। नोट में दर्द छलकते हुए लिखा गया है कि महोदय, पुलिस को इतना भी मत बेचो कि ईमानदार आदमी नौकरी ही न कर पाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रणव तिवारी हर कर्मचारी से पैसे लेकर ड्यूटी लगाता है। जो पैसा देता है, उसे अच्छी जगह तैनाती मिलती है और जो नहीं देता, उसे प्रताड़ित किया जाता है।

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सुसाइड नोट में इस बात का भी जिक्र है कि जब भी भ्रष्टाचार का विरोध किया जाता, तो ऊपर के अधिकारियों के नाम का डर दिखाया जाता था। होशियार सिंह ने लिखा कि प्रणव तिवारी कहता है कि वह और आरआई साहब बड़े अधिकारियों के व्यक्तिगत खर्चों का ध्यान रखते हैं, इसलिए उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। होशियार सिंह ने डीजीपी, डीआईजी और एसपी से गुहार लगाते हुए लिखा कि अगर विभाग में यही सब चलना है, तो उन्हें आत्महत्या की अनुमति दे दी जाए। उन्होंने ट्रेजरी गार्ड की नियुक्तियों में 5 से 10 हजार रुपये की अवैध वसूली की जांच करने की मांग भी की है।

होशियार सिंह पिछले पांच दिनों से छुट्टी पर थे और सोमवार को उन्हें वापस काम पर लौटना था। लेकिन सिस्टम की बेरुखी और अपने ही विभाग के लोगों की प्रताड़ना से वे इतना टूट चुके थे कि उन्होंने ड्यूटी जॉइन करने के बजाय मौत को चुनना बेहतर समझा।

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इस घटना के बाद शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। यह चर्चाएं भी हैं कि क्या सुसाइड नोट में होशियार सिंह ने जो कुछ लिखा है वही मध्य प्रदेश पुलिस की हर जगह हकीकत है। एक तरफ जहां पुलिस विभाग इस मामले में जांच की बात कह रहा है, वहीं आम जनता के बीच पुलिस की छवि को गहरा धक्का लगा है। होशियार सिंह ने अपने सुसाइड नोट में जो कुछ लिखा है उसने पुलिस विभाग के ऊपर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 

तेरा भाई मेरी बहन को भगा ले गया अब तू मेरे साथ…. पीड़ित युवती ने बताया हैरान करने वाला मामला

ग्वालियर मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश में महिला किस तरह असुरक्षित है?इसकी घटनाएं रोज आपको हर जिले में किसी न किसी तरह से देखने को मिल ही जाती हैं। कुछ मामले तो इस तरह चौंका देते हैं कि उन पर विश्वास करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसा ही एक मामला ग्वालियर में सामने आया है।जहां एक युवक ने युवती के घर में घुसकर दुष्कर्म की कोशिश की।युवक इस युवती का मौसेरा भाई है जो अपने दोस्तों के साथ युवती के घर में घुसा और उसके साथ गलत काम करने का प्रयास किया। इस पूरे मामले में हालांकि अंत में युवती बच जाती है और पुलिस को शिकायत करती है लेकिन वह पुलिस को जो जानकारी देती है वह हैरान करने वाली है।

युवती ने पुलिस को बताया कि युवक उसका मौसेरा भाई है और युवक उसे यह धमकी दे रहा था कि तेरा भाई मेरी बहन को भगा ले गया है। इसलिए अब तुझे मुझसे शादी करनी पड़ेगी और जब युवती ने इनकार किया तो युवक और उसके साथ आए लड़के आक्रोशित हो गए और युवती के साथ जबरदस्ती करने लगे और युवती के कपड़े तक फाड़ दिए। शोर शराबा सुनकर युवती के माता पिता बीच बचाव करने पहुँच गए तो युवकों ने उनके साथ भी मारपीट की। घर में तोड़फोड़ की युवती युवकों के चंगुल से निकलकर धक्का देते हुए भागी और पुलिस को फोन कर दिया।पुलिस के आने से पहले ही आरोपी भाग निकले।

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घटना ग्वालियर जिले के पुरानी छावनी थाना क्षेत्र के लालघाटी की है। जहां बीस वर्षीय युवती अपने माता पिता के साथ रहती हैं। वह छह फरवरी को अपने घर में काम कर रही थी उसी समय उसका मौसेरा भाई अमन और उसका एक और रिश्तेदार सुनील घर में आ गए और युवती को धमकाने लगे। युवकों की नियत साफ नहीं थी।वह किसी बड़ी घटना को अंजाम देना चाहते थे। माता पिता के बीच में आने और युवती के सूझबूझ से कोई बड़ी घटना तो नहीं हुई। लेकिन युवती ने जो जानकारी पुलिस को दी है वह यह सवाल खड़ा करती है कि क्या किसी के साथ गलत हो तो उसका बदला उसी तरह गलत करके लिया जाना चाहिए। युवती की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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साइबर फ्रॉड का बढ़ता जाल, एमपी में 638 करोड़ का फ्रॉड, पैसा गया तो वापस आना मुश्किल

भोपाल मध्य प्रदेश: जैसे जैसे तकनीक बढ़ रही है वैसे ही ठगी के तरीके भी बदल रहे हैं और साइबर फ्रॉड मैं गवाई गई रकम का आंकड़ा पिछले कुछ सालों में अप्रत्याशित रूप से बड़ा है। मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा छह सौ अड़तीस करोड़ रुपये को पार कर चुका है और यह सारी रकम 64 हजार लोगों से ठगी गई है। यहाँ सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि ठगे गए इन लोगों में से ज्यादातर लोग शिक्षित हैं। लेकिन ठगों के शातिर पैंतरे इतने प्रभावशाली हैं कि वह इन लोगों को भी अपने झांसे में ले लेते हैं। मध्य प्रदेश में भी साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। एमपी सहित सत्रह राज्यों में बैठे साइबर ठग के निशाने पर मध्य प्रदेश के लोग हैं।वह किसी न किसी हथकंडे को अपनाकर रोज़ लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।

साइबर ठगी के लिए जो हथकंडे अपनाते हैं उनमें डिजिटल अरेस्ट एपीके फ़ाइल सिम स्वेप जैसे हथकंडे आजकल ज़्यादा प्रचलन में हैं। यह साइबर ठग इतने शातिर हैं कि ठगी की रकम लेते ही वे तुरंत इसे मनी लॉन्ड्रिंग की तर्ज पर लेयरिंग करते हुए एक से दूसरे तीसरे चौथे खातों में ट्रांसफर करते चले जाते हैं जिससे कि यदि कोई शिकायत करें भी तो वह ठगी के मुख्य सरगना तक नहीं पहुंच पाए। ज्यादातर मामलों में खोता भी यही है कि पुलिस लापरवाही से ठगी के मामलों में तुरंत शिकायत दर्ज नहीं करती और इस लेटलतीफी का लाभ ठगों को मिलता है। पुलिस ज्यादातर मामलों में मुख्य सरगना तक पहुंच ही नहीं पाती और किराये पे लिए गए मासूम मजबूर को ही आरोपी बनाकर पकड़ लेती है जिनके खातों में पहली लेयर में रकम गई होती है। 

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मध्य प्रदेश की बात करें तो सभी बड़े शहर साइबर ठगों के निशाने पर हैं। राजधानी भोपाल में 64 करोड़ रुपये की ठगी 4490 लोगों से की गई है। जबकि इंदौर में तैंतालीस करोड़ की ठगी 147 लोगों से की गई है। ठगों ने छोटे कस्बों में अपने एजेंट बना रखे हैं। यह एजेंट जरूरतमंद लोगों को लालच देकर बहुत कम रकम में बैंक में उनका खाता खुलवा लेते हैं और खाते के सभी डॉक्यूमेंट अपने पास रख लेते हैं और यही डॉक्यूमेंट वह अपने सरगना को भेज देते हैं। साइबर ठगी की रकम जब इन लोगों के अकाउंट में पहुंचती है तो पुलिस इनके अकाउंट डिटेल्स के आधार पर इनके घर पर पहुंचकर इन गरीब लोगों को पकड़ लेती है। 

प्रदेश में बढ़ रही ठगी के मामलों में ज्यादातर मामलों में रकम वापस मिलना मुश्किल हो जाता है वो इसका प्रमुख कारण पुलिस की शिथिलता है। ठगी के मामलों में रकम छोटी होने पर न तो शिकायत करता बहुत प्रयास करता है न ही छोटी मोटी ठगी की शिकायतों में पुलिस दिलचस्पी लेती है। जब ठगी की रकम बड़ी हो या ठगी किसी प्रभावशील व्यक्ति के साथ हुई हो तब ही त्वरित कार्यवाही देखने को मिलती है। आंकड़ों की मानें तो मध्यप्रदेश के आम लोगों को प्रतिदिन पांच हजार से ऊपर कॉल अलग ठगों के गैंग द्वारा किए जाते हैं।इनमें से लगभग 175 लोग प्रतिदिन ठगों का शिकार बन रहे हैं। यह आंकड़े बताते हैं के हर पच्चीस वां व्यक्ति ठगी का शिकार बन जाता है। मध्यप्रदेश के लोगों द्वारा ठगी जाने वाली रकम भी 1.75करोड़ रुपए प्रतिदिन है। 

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साइबर ठगी में ज्यादातर मामलों में डूबा हुआ पैसा वापस आना मुश्किल होता है। इसलिए साइबर ठगी से बचने का एकमात्र उपाय आपकी स्वयं की सावधानी है।सबसे पहली बात तो है कि आप किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा ही न करें। एपी के फाइल चाहे किसी भी नजदीकी परिचित व्यक्ति द्वारा भेजी गई हो लेकिन उसको कभी नहीं खोले। पब्लिक इंटरनेट सेवा में अपने मोबाइल में बैंकिंग का प्रयोग कभी न करें। किसी भी तरह की लिंक को न दबाएं इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया पर इनवेस्टमेंट की लुभावनी स्कीमों के लालच में न पड़े। ठगी से बचने में सबसे कारगर केवल दो अस्त्र आपके पास हैं।वह अपने डर पर काबू रखना और अपने लालच पर काबू रखना क्योंकि ठगी के ज्यादातर मामलों में आपका डर या आपका लालच ही ठगी की वजह बनता है। 

बिलौआ में अवैध खनन, खनिज विभाग का गजब खेल

ग्वालियर: बिलौआ में जिला प्रशासन एवं खनिज विभाग की टीम ने छापामार कार्रवाई की। इस दौरान उन्हें अलग-अलग स्थानों पर 80 डंपर अवैध बोल्डर मिला, जिसे जब्त किया गया। जांच के दौरान विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर जांच के निर्देश दिए गए। साथ ही जांच होने तक यथास्थिति काम बंद करने के भी निर्देश खदान संचालक को दिए गए हैं.कलेक्टर रूचिका चौहान ने बिलौआ क्षेत्र में हो रहे अवैध उत्खनन की जांच के लिए डिप्टी कलेक्टर अनिल राघव के नेतृत्व में खनिज विभाग की टीम को मौके पर भेजा था। आपको बता दें कि लंबे समय से बिलौआ क्षेत्र में अवैध उत्खनन होता रहा है।इसके लिए जिम्मेदार खनिज विभाग कागजों पर लीपापोती करता है लेकिन मौके की हकीकत से हमेशा आंख मूंद लेता है।

टीम ने बिलौआ में अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर जांच की। जांच के दौरान उन्हें वहां पर 80 डंपर अवैध बोल्डर के मिले। खनिज विभाग की टीम ने बोल्डर को जब्त किया। एक स्थान पर जांच के दौरान विवाद की स्थिति बन गई। विवाद को देखते हुए डिप्टी कलेक्टर अनिल राघव ने तत्काल वहां पर काम को बंद करा दिया और जांच के आदेश दिए। जांच पूरी होने तक खदान संचालक को काम को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान राजस्व,हल्का पटवारी एवं खनिज अधिकारी व पुलिस बल मौजूद रहा।

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यहां अवैध उत्खनन का मामला अब ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह के संज्ञान में भी आया है. सांसद ने कहा पूरी जानकारी पता लगाएंगे और कोई भी दोषी,अपराधी, माफिया हो उसे बक्शा नहीं जाएगा। ऐसे ही दावे और वादे पहले भी कई बार हो चुके हैं लेकिन इसके बावजूद बिलउआ अवैध खनन के मामले में बदनाम रहा है।सबसे बड़ी बात है कि खनिज विभाग सब कुछ जानते हुए भी हमेशा अपनी मौन सहमति इस अवैध खनन को देता रहा है।

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NEET2026 exam date: 3 मई को परीक्षा, 8 मार्च तक कर सकते हैं आवेदन

नई दिल्ली डिजिटल डेस्क: देश के सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस (NEET UG 2026) का नोटिफिकेशन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने रविवार को जारी कर दिया है. इसके अनुसार परीक्षा तारीख और रजिस्ट्रेशन शुरू होने की घोषणा की गई है. परीक्षा 3 मई 2026 रविवार को आयोजित की जाएगी. परीक्षा बीते साल की तरह 180 मिनट यानी 3 घंटे की होगी.
नोटिफिकेशन के अनुसार दोपहर 2 बजे से 5 के बीच आयोजित होगी. इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन रविवार 8 फरवरी से ही शुरू कर दिए गए हैं. यह रजिस्ट्रेशन 8 मार्च 2026 रात 9 बजे तक होंगे. वहीं, ऑनलाइन आवेदन भी की फीस भी देर रात 11:50 तक जमा कराई जा सकेगी. ऑनलाइन आवेदन में हुई गलतियों का सुधार के लिए 10 से 12 मार्च 2026 के बीच का समय दिया गया है. कैंडिडेट परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन नीट यूजी 2026 की वेबसाइट पर कर सकते हैं.

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परीक्षा शुल्क जनरल कैटेगरी के विद्यार्थियों के लिए 1700 रुपए रखा गया है, जबकि ईडब्ल्यूएस व ओबीसी कैटेगरी के लिए 1600 रुपए रखा गया है. वहीं, एससी-एसटी विद्यार्थियों के लिए यह फीस 1000 रुपए है. ऑनलाइन आवेदन के दौरान जीएसटी अतिरिक्त विद्यार्थियों को देना होगा. भारत के बाहर परीक्षा केंद्र लेने वाले विद्यार्थियों के लिए फीस 9500 रुपए रखी गई है. विद्यार्थी अपनी रजिस्ट्रेशन फीस को ऑनलाइन इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट-क्रेडिट कार्ड और यूपीआई के जरिए जमा कर सकेंगे.
एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया कि परीक्षा दोपहर 2 से 5 बजे तक आयोजित होगी. वहीं, परीक्षा केंद्र की घोषणा एडमिट कार्ड के साथ की जाएगी. एडवांस सिटी इनफॉरमेशन स्लिप के जरिए परीक्षा शहरों की घोषणा आयोजित की जाएगी. इस बार भी 13 लैंग्वेज हिंदी, अंग्रेजी, असमिया, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगू व उर्दू में परीक्षा आयोजित होगी.

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इस परीक्षा के जरिए मेडिकल (MBBS), नर्सिंग, डेंटल, वेटरिनरी एंड एनिमल हसबेंडरी कॉलेज में प्रवेश मिलेगा. इसके साथ आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्धा एडमिशन मिलेगा. एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया कि बीते सालों में 22 से 24 लाख तक भी विद्यार्थी इस परीक्षा में आवेदन कर चुके हैं और परीक्षा देने वाले 21 से 23 लाख लाख तक परीक्षा भी दे चुके हैं. सबसे ज्यादा आवेदन का आंकड़ा साल 2024 में 24 लाख से ऊपर था और 23.33 लाख तक परीक्षा भी दे चुके हैं.

1600 कुत्तों को जहरीला इंजेक्शन देकर मारा, मामला सुनकर हर कोई हैरान

डिजिटल डेस्क हैदराबाद: आंध्र प्रदेश के जिन गांवों में कुत्ते दिन रात भौंक भोगकर लोगों को परेशान करते थे और साथ ही उनको चेतावनी भी देते थे उन गांव में अब एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है कि इन कुत्तों को जेहर देकर मार दिया गया है। आंध्र प्रदेश के छह जिलों के बारह से ज़्यादा गांव पूरी तरह से कुत्ताविहीन हो चुके हैं क्योंकि यहां पर अब तक सोलह सौ कुत्तों को मारे जाने का दावा किया जा रहा है। शुरूआत में एक हाथ गांव से इस तरह की घटना आई थी और मारे गए कुत्तों की संख्या कम थी लेकिन अब लगातार इस तरह के मामले बढ़ रहे हैं और कुत्तों से मुक्ति पाने के लिए कई गांवों में कुत्तों को मार दिया गया है।

आपको बता दें कि इस समय पूरे देश में ही कुत्तों के काटने से होने वाली घटनाओं को लेकर बहस छिड़ी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी मध्यस्थता कर के काटने के मामलों पर गंभीर टिप्पणी करते हुए निर्देशित किया है। कई जगह पर कुत्तों को रेबीज मुक्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं तो कई जगह कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाए जा रहे हैं जिससे कि आवारा कुत्तों से आम जन को सुरक्षित रखा जा सके। इन सभी के बीच हैदराबाद के इन जिलों में कुत्तों से सुरक्षा के लिए कुत्तों को ही मार देने का जो तरीका अपनाया गया है वह हैरान करने वाला है और इसकी चर्चा हर तरफ हो रही है।

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गाँव में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ रही थीं। इसे देखते हुए सरपंच चुनाव में यह मुद्दा बड़े रूप में उठने लगा और कई जनप्रतिनिधियों ने कुत्ता मुक्त गाँव बनाने का वादा तक अपने मतदाताओं को कर दिया और ऐसा वादा करने के बाद कई गाँव पूरी तरह से कुत्ताविहीन हो गए। वहाँ एक भी कुत्ता देखने को नहीं मिला और बाद में गाँव के बाहर ही सामूहिक क्रब मिली और यह देखा गया कि कुत्तों को मार कर वहाँ दफना दिया गया है। आंध्र प्रदेश में सरपंच चुनाव को देखते हुए कुत्ता मुक्त बनाने का जो यह तरीका अपनाया गया उसकी चर्चाएँ सब तरफ हो रही हैं।

क्रूरता निवारण सहायक स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के एक पदाधिकारी मुदावत प्रीति ने यह बताया कि जहरीले इंजेक्शन का दुरुपयोग इंसानों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है। पुलिस ने सभी कुत्तों के शव बरामद नहीं किए हैं जो बरामद किए हैं। वास्तविक संख्या से कम हैं इस संगठन ने राज्य सरकार से कुत्तों की हत्या के इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस घटना के बाद यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि नेता सरपंच का चुनाव जीतने के लिए कितने निर्दयी हो सकते हैं?

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कलेक्टरों की रिश्वतखोरी पर मंत्री जी की मुहर! अफसरशाही में भ्रष्टाचारी पर मंत्री जी का बयान चौंकाने वाला

भोपाल मध्य प्रदेश: आजकल मध्य प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा अपने बयानों को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। राजस्व मंत्री हैं। जिले में पटवारी से लेकर कलेक्टर तक राजस्व अधिकारी ही कहे जाते हैं और राजस्व अधिकारियों पर समय समय पर रिश्वतखोरी के आरोप लगते रहते हैं।लेकिन अब तो मंत्रीजी ने स्वयं मान लिया है कि उनके विभाग में रिश्वतखोरी चल रही है और छोटे मोटे अधिकारी नहीं।उन्होंने तो कलेक्टर के पैसे लेने की बात को भी स्वीकार लिया है। मंत्रीजी सरल सहज छवि के व्यक्ति हैं साफगोई से बात करते हैं लेकिन उनकी यह साफगोई शायद अब अफसरों को रास न आए।

राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा से जब कलेक्टरों के पैसे लेने वाले बयान पर प्रश्न किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि कहीं न कहीं थोड़ा बहुत तो हर जगह होता है लेकिन जो रिश्वत लेता है वह राष्ट्र दो ही है चाहे वह कोई भी हो मैं कहीं भी जाता हूँ गड़बड़ी पर कार्रवाई होती है कई बार कलेक्टर।पहले ही बोल देते हैं कि गलती सलती होगी तो ठीक कर लेंगे साहब। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा राजगढ़ में थे और मीडिया से रूबरू हो रहे थे और उस समय उन्होंने अफसरशाही में फैली रिश्वतखोरी को लेकर यह सनसनीखेज बयान दे डाला।

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राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने साफगोई से स्वीकार किया कि अफसरशाही में भ्रष्टाचार मौजूद हैं और इस पर सख्त कार्रवाई की जरूरत भी उन्होंने बताई। उनका साफ कहना है कि बेईमानी किसी पद से नहीं जुड़ी होती बल्कि व्यक्ति की आदत बन जाती है। चाहे किसी को मंत्री बना दिया जाए तहसीलदार बना दिया जाए या मजदूरी करने भेज दिया जाए बेईमान व्यक्ति अपनी आदत नहीं बदलता। साथ में मंत्री जी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने कई तहसीलदारों को निलंबित किया है क्योंकि उनके सामने इन तहसीलदारों की गंभीर शिकायतें आई थीं। 

राजस्व मंत्री ने आगे अपने ही विभाग के समस्त राजस्व अधिकारियों को कटघरे में कड़ा किया। उन्होंने कलेक्टर तक को नसीहत दे डाली। उनका कहना है कि कुछ कलेक्टर यह कहकर जिम्मेदारी टाल देते हैं कि थोड़ी बहुत गलती सुधार दी जाएगी लेकिन वे इस सोच के पक्ष में नहीं हैं। मंत्री जी ने अफसरों से ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति के साथ काम करने की अपील की है। खुद को उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि सादगी से जीवन जीते हैं और निजी लाभ लेने की सोच कभी नहीं रखते। मंत्री जी निश्चित ही सादगी जीते हैं लेकिन मंत्री जी के आसपास रहने वाले लोग भी।क्या इसी सादगी और ईमानदारी से अपना जीवन बिता रहे हैं और क्या मंत्रीजी ने जो नसीहत अपने राजस्व अधिकारियों को दी है उस पर कोई अधिकारी अमल करेगा? यह सवाल हमेशा उत्तर ढूंढता रहेगा…..

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माधव के मेला पर मोहन की वक्र दृष्टि, चमकता उज्जैन, उजड़ता ग्वालियर मेला

ग्वालियर व्यापार मेला जिसका पूरा नाम श्रीमंत कैलाशवासी माधवराव सिंधिया व्यापार मेला है। नाम यह इसलिए है क्योंकि यह मेला सिंधिया परिवार द्वारा ही शुरू किया गया। माधव राव सिंधिया प्रथम जिन्हें माधव महाराज के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपने शासन काल में क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए और पशुओं के क्रय विक्रय के लिए एक पशु मेले के रूप में इसकी शुरुआत सौ से भी अधिक वर्ष पूर्व 1905 में की थी। तब से वर्ष दर वर्ष यह मेला अपनी भव्यता की ओर बढ़ने लगा। और इस मेले को राष्ट्रीय पहचान देने का कार्य किया कैलाश वासी श्रीमंत माधव राव सिंधिया ने। जिन्होंने अन्य राज्यों के व्यापारियों को भी यहां आकर व्यापार करने के लिए आमंत्रित किया और साथ ही ग्वालियर व्यापार मेला में ऑटोमोबाइल सेक्टर के क्षेत्र में एक क्रान्तिकारी कदम उठाते हुए यहां से बेचे जाने वाली सभी वाहनों पर रोड टैक्स में पचास प्रतिशत का छूट ग्राहकों को लाभ के रूप में देने की शुरुआत की। इसके साथ ही ग्वालियर व्यापार मेला ने एक इतिहास रच दिया और वह देश का एकमात्र ऐसा मेला बन गया जहां इस तरह का लाभ वाहन खरीदने पर ग्राहकों को मिलता रहा।

लेकिन दिग्विजय सिंह के शासन के अंत के साथ ही वर्ष दो हजार तीन से ग्वालियर मेले का संक्रमण काल भी शुरू हो गया। धीरे धीरे मेला सिकुड़ने लगा और मध्य प्रदेश में काबिज हुई भाजपा सरकार ने ग्वालियर मेला में वाहनों के क्रय विक्रय पर दी जाने वाली रोड टैक्स छूट को खत्म कर दिया।हर साल तमाम प्रयास किए गए लेकिन मध्यप्रदेश शासन ने इस मेले को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया मानो कि उनकी मंशा यही हो कि किसी भी तरीके से इस मेले को खत्म कर देना है इसका वैभव खत्म कर देना है। और यही कारण रहा कि जब तक भाजपा का शासन रहा तब तक ग्वालियर व्यापार मेला में यह छूट नहीं मिली और बीच में जैसे ही पन्द्रह महीने के लिए कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी इस मेले को वैभव दिलाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ग्वालियर मेला के उद्घाटन करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने यहां पचास पर्सेंट रोड टैक्स छूट वाहनों पर फिर से देने की घोषणा कर दी। और ग्वालियर व्यापार मेला ने फिर से नए कीर्तिमान स्थापित करना शुरू कर दिया। 

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इसके बाद मध्यप्रदेश में तख्ता पलट हुआ और भाजपा फिर से शासन में आ गई लेकिन इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया भी भाजपा में शामिल थे और जब आगे मेले का आयोजन हुआ तो ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयास से ग्वालियर मेला को हर साल रोड टैक्स में यह छूट फिर से मिलने लगी। पिछले विधानसभा चुनाव फिर से भाजपा के जीतने पर डॉ॰ मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया गया। डॉ मोहन यादव जब ग्वालियर मेला पहुंचे और उनको यह जानकारी मिली कि ग्वालियर मेला भव्य है उसकी एक ऐतिहासिक पहचान है और पूरे देश में उसे इस बात के लिए जाना जाता है कि वह एकमात्र ऐसा मेला है जहां वाहनों पर पचास पर्सेंट की रोड टैक्स छूट दी जाती है। तो उन्होंने ग्वालियर मेला को यह छूट दिए जाने के साथ साथ उज्जैन मेला को भी यह छूट देने की घोषणा कर दी। इस तरह उन्होंने जो पहचान ग्वालियर मेला की थी वही पहचान उज्जैन मेला को भी दिला दी। 

तभी से ऐसे कयास लगाए जाने लगे थे कि ग्वालियर व्यापार मेला जिसका पूरा नाम श्रीमंत कैलाशवासी माधव राव सिंधिया व्यापार मेला है को डॉक्टर मोहन यादव का ग्रहण लगने लगा और यह बात हर साल उस समय अब देखने को मिलती है जब ग्वालियर का मेला सज जाता है और ग्वालियर के ऑटोमोबाइल सेक्टर के व्यापारी वाहनों पर मिलने वाली रोड टैक्स छूट का इंतजार करते रहते हैं। आपको बता दें कि ग्वालियर का मेला बीस दिसंबर से शुरू होता है जबकि उसका उद्घाटन करते करते जनवरी आ जाती है। हालांकि इस वर्ष केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आगमन पर पच्चीस दिसंबर को ही मेले का उद्घाटन कर दिया गया था जबकि मेला की तैयारी अधूरी थी और वाहनों पर मिलने वाले टैक्स छूट की घोषणा भी नहीं हुई थी। 

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अभी हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट बैठक में ग्वालियर और उज्जैन मेला के लिए वाहनों पर रोड टैक्स के छूट की घोषणा एक साथ की गई है। लेकिन इस घोषणा में यह साफ नजर आ रहा है कि उज्जैन मेला आयोजित होने से पहले ही छूट की घोषणा से वहां सभी कार्य व्यवस्थित होंगे जबकि ग्वालियर व्यापार मेला में लगभग एक महीने तक व्यापारी संशय की स्थिति में रहे। यदि मेला उद्घाटन तिथि से भी लें जो 25 दिसंबर रही तो अब तक लगभग 19 दिन हो चुके हैं और इस घोषणा के बाद यह लागू भी दो दिन बाद होगी। इसका मतलब कि ग्वालियर मेला उद्घाटन के इक्कीस दिन बाद ग्वालियर में ऑटोमोबाइल विक्रेताओं को और इस क्षेत्र के ग्राहकों को वाहनों पर पचास पर्सेंट रोड टैक्स छूट का लाभ मिलेगा जबकि उज्जैन मेला में यह लाभ पहले दिन से ही मिलेगा। 

डॉ मोहन यादव ने पहले तो उज्जैन मेला को भी यह छूट देकर ग्वालियर मेला की जो एकमात्र पहचान थी उसे छील दिया और अब हर वर्ष उनकी कैबिनेट द्वारा यहां दी जाने वाली छूट में लेट लतीफी जिस तरह से की जाती है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि वह ग्वालियर मेला का महत्व कम करके उज्जैन मेला।का महत्व बढ़ाना चाहते हैं। ग्वालियर के व्यापारियों और यहां के नागरिकों को इस बात से कोई गुरेज नहीं होगा कि उज्जैन मेला भी आगे बढ़े लेकिन जिस तरह से ग्वालियर मेला पर सरकार की वक्र दृष्टि है और यहां का मेला घोषणाओं की लेट लतीफी से अपना वैभव खो रहा है।वह कहीं न कहीं एक चिंता का विषय है। ज्योतिरादित्य सिंधिया केन्द्र में मंत्री हैं और उनका अपना एक प्रभाव और दबाव है जिसके चलते देर से ही सही लेकिन ग्वालियर मेला के लिए रोड टैक्स छूट की घोषणा हो जाती है। अन्यथा तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश में भाजपा सरकार ने पहले जिस तरह से मेले को लगभग खत्म सा कर दिया था अभी भी शायद उनका यही प्रयास रहता है और डॉक्टर मोहन यादव जिस तरह से हर साल इस छूट में लेट लतीफी करते हैं। वह साफ बताता है कि मुख्यमंत्री का ध्यान ग्वालियर मेले को दरकिनार करते हुए उज्जैन मेले पर अधिक है। 

संपादक गजेंद्र इंगले द्वारा विशेष आलेख

गर्लफ्रेंड को ले गया होटल, सेक्स के बाद हत्या का हैरान करने वाला मामला

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: गाजियाबाद में एक प्रेमी ने होटल में प्रेमिका की हत्या कर दी। इसके बाद रातभर शव के पास बैठा रहा। इसके बाद सुबह जब वह कमरे से भागने की फिराक में था तो होटल स्टाफ ने रोक लिया और पुलिस को मामले की सूचना दे दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान सेवा नगर, नंदग्राम निवासी प्रवीण कुमार के रूप में हुई है। जबकि मृत महिला की पहचान कोटगांव कॉलोनी निवासी 35 साल की आरती के रूप में हुई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी प्रवीण और मृतक आरती तीन साल से रिलेशन में थे। वह एक-दूसरे से प्यार करते थे।

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पुलिस सूत्रों का कहना है कि घटना दस जनवरी की रात की है। प्रवीण आरती को लेकर गाजियाबाद के एक होटल में पहुंचा था, जहां उसने एक कमरा बुक कराया और आरती के साथ रात में वहीं रुका था। इस दौरान आरती और प्रवीण ने होटल के कमरे में साथ बैठकर शराब पी। इसी बीच किसी बात को लेकर दोनों के बीच झगड़ा हो गया। यह झगड़ा इतना बढ़ा कि प्रवीण ने आरती का मुंह और गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद रातभर आरती के शव के पास बैठा रहा। पुलिस ने जब प्रवीण का मेडिकल कराया तो उसके चेहरे पर खरोंच के निशान मिले। इससे पता चलता है कि मौत से पहले आरती ने बचने का पूरा प्रयास किया था।

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टीचर्स के लिए गुड न्यूज; बढ़ेगी सैलरी मिलेगा ढाई साल का एरियर भी

भोपाल मध्य प्रदेश: इस मकर संक्रांति पर सबसे बड़ी गुड न्यूज मध्य प्रदेश के उन शिक्षकों के लिए आ रही है जो प्राइमरी और मिडिल स्कूल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने शिक्षकों के चौथे क्रमोन्नति का लाभ देने का खाका तैयार कर लिया है और इसका फैसला भी ले लिया गया है। इस फैसले का फायदा उन शिक्षकों को होगा जिन्होंने 35 साल की नौकरी पूरी कर ली है। पूरे प्रदेश में ऐसे करीब एक लाख बाईस हजार के लगभग शिक्षक हैं जिन्हें यह लाभ मिलेगा।सैलरी में तो बढ़ोतरी होगी ही साथ में प्रदेश सरकार ने ढाई साल का एरियर महंगाई भत्ता देने की घोषणा भी कर दी है। प्रदेश सरकार क्या यह फैसला मकर संक्रांति पर शिक्षकों के परिवार में खुशियां लाने वाला है।

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आपको बता दें कि लंबे समय से इस फैसले का इंतजार हो रहा था।प्रदेश सरकार ने पांच साल के अंतराल के बाद यह निर्णय लिया है। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी 35 साल की सेवा पूरी करने पर प्राचार्य और व्याख्याताओं को चौथा क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ दिया था। तभी से सहायक शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षक भी चौथे क्रमोन्नति वेतनमान की मांग कर थे। लंबे इंतजार के बाद कई शिक्षक मायूस भी हो चुके थे लेकिन इसी बीच प्रदेश सरकार ने मकर संक्रांति पर उनके लिए इस खुशखबरी का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना को मंजूरी दे दी गई है।इसके लिए 322.34 करोड़ रुपए भी स्वीकृत किए गए हैं। 

जिन शिक्षकों की पैंतीस साल की सेवा जुलाई दो हजार तेईस से पहले पूरी हो चुकी है उन्हें तब से अब तक का पूरा बकाया एरियर मिलेगा।उन्हें एक लाख बीस हजार से एक लाख अस्सी हजार रुपए तक मिलने की संभावना बताई जा रही है।इसी तरह जिनकी पैंतीस साल की सेवा दो हजार तेईस से दो हजार छब्बीस के पी पूरी होगी उन्हें पूरी सेवा अवधि होने की तारीख से एरियर मिलेगा। वेतन में जो वृद्धि की गई है यह वेतन वृद्धि एक जुलाई दो हजार तेईस से लागू मानी जाएगी। जो शिक्षक इस अवधि में रिटायर हो चुके हैं उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा या नहीं।इसमें स्थिति साफ नहीं की गई है लेकिन यदि उन्हें इस एरियर का लाभ नहीं भी मिलता है तो संभवतः उन्हें पेंशन में इसका लाभ दिया जा सकता है। 

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