भिंड मध्यप्रदेश: इस समय पूरे देश में चैत्र नवरात्र चल रहे हैं। यह भी हकीकत है कि चाहे नवरात्र हो लेकिन कन्या भ्रूण हत्या एक कलंक की तरह इन दिनों में भी चलता है। यदि मध्यप्रदेश में लिंगानुपात की बात करें तो भिंड की हालत बहुत बदतर है और यहां पर कन्या भ्रूण हत्या के मामले बहुत अधिक हैं। भिंड पर लगे इस कलंक को मिटाने के लिए भिंड जिला पंचायत अध्यक्ष कामना सिंह भदौरिया ने एक अनूठी पहल शुरू की है। नवरात्र में नौ दिन उन्होंने कक्षा 7 से 11वीं तक की छात्राओं का चयन किया है और हर दिन एक बेटी को अपनी जिला पंचायत की कुर्सी संभालने का मौका दिया है। उनका मानना है कि उनकी इस अनूठी पहल से भिंड के लिंगानुपात का जो बड़ा अंतर है, उसमें कमी आएगी।
भिंड में लिंगानुपात का अंतर बहुत ज्यादा है। और शासन के तमाम प्रयास अभी तक बहुत ज्यादा अंतर नहीं ला पाए हैं। वर्तमान में कामना सिंह भदौरिया भिंड जिला पंचायत की अध्यक्षता हैं। उन्होंने यूके से एमबीए किया है और यह बात साबित कर दी है कि एक महिला चाहे तो सफलता की कहानियाँ लिख सकती हैं, कामना सिंह भदौरिया ने नवरात्र के 9 दिन अपनी कुर्सी क्षेत्र की बेटियों को सौंप दी है। उनका कहना है कि प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्र में लड़कियों की सक्रिय भागीदारी का रुझान बढ़ा है। और उनके इस प्रयास से पूरे क्षेत्र में यह संदेश जाएगा और एक सकारात्मक बदलाव की दिशा में उनका यह प्रयास एक मिसाल बनेगा।
उनके इस अनूठे प्रयास के अंतर्गत नवरात्र के पहले दिन कक्षा 7वीं की छात्रा मानवी गुर्जर को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने का मौका मिला। दूसरे 9वीं की छात्रा अयाति शर्मा ने यह पद संभाला और तीसरे दिन कक्षा 10वीं की छात्रा विधि भधौरिया ने जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी संभालकर प्रशासनिक कार्यों की जानकारी ली। पूरा कार्य बिलकुल विधिवत तरीके से हुआ। यह छात्राएं। जब कार्यालय पहुंची तो उनका स्वागत किया गया। विधि को जल गंगा संवर्धन अभियान की जानकारी दी गई।विधि ने बिजली कंपनी के इंजीनियर नितिन डोंगरे के साथ विभागीय कार्यों की समीक्षा भी की। इस दौरान स्थानीय विधायक बन्नाबीन एवं नवीनीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने वीडियो कॉल के माध्यम से विधि से बातचीत कर उन्हें बधाई भी दी।
आपको बता दें कि कामना सिंह भदौरिया जिला पंचायत भिंड में वर्तमान में अध्यक्ष हैं। उन्होंने इंग्लैंड के लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है और वापस अपने शहर में आकर हमेशा महिलाओं के उत्थान के लिए प्रयासरत रही। उनका कहना है कि नवरात्र के अवसर पर कुछ अलग और प्रेरणादायी करने के उद्देश्य से उन्होंने यह पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य बेटियों में नेतृत्व क्षमता विकसित करना आत्मविश्वास बढ़ाना, राजनीतिक समझ पैदा करना और प्रशासन में शिक्षित महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। नौ दिन अलग अलग कक्षा की छात्राओं को बुलाने का उद्देश्य अलग अलग आयु वर्ग की बेटियों में प्रशासनिक कार्यप्रणाली की समझ बढ़ाना है। कामना सिंह भदौरिया का यह प्रयास इस समय पूरे प्रदेश में चर्चाओं में है। राकेश शुक्ला के साथ ही भिंड के प्रभारी मंत्री प्रह्लाद पटेल ने भी आयाती शर्मा से वीडियो कॉल पर बात कर उनका उत्साह बढ़ाया है। अब देखना होगा कि कामनस ने भदौरिया का यह प्रयास भिंड में लिंग अनुपात को कम करने में कितना सफल होता है?
भिंड मध्यप्रदेश: लहार से भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा अपनी ही सरकार के विरोध में धरने पर बैठने को मजबूत है। इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है और चर्चा में भाजपा सरकार पर आरोप लग रहे हैं, वह हैरान करने वाले हैं। लहार में पूर्व विधायक पूर्व मंत्री कांग्रेस के डॉ गोविंद सिंह का लंबे समय से दबदबा रहा है। अम्बरीश शर्मा ने यहां से डॉक्टर गोविंद सिंह को हराकर इतिहास रचा है। अम्बरीश शर्मा विधायक तो बन गए लेकिन क्षेत्र में डॉक्टर गोविंद सिंह की पकड़ और अकड़ बिल्कुल भी कम नहीं हुई, ऐसा यहां के राजनीतिक विशेषज्ञ बताते हैं। तमाम ऐसे मामले हैं जिसमें प्रदेश सरकार डॉक्टर गोविंद सिंह के विरोध में कार्रवाई करने से बचती नजर आ रही है। ऐसे आरोप भी लग रहे हैं कि भाजपा के ही कुछ कद्दावर क्षत्रिय नेताओं का डॉ॰ गोविंद सिंह को समर्थन है। और यही सब देखते हुए अब लाहार विधायक अंबरीश शर्मा ने अपनी ही सरकार के विरोध में मोर्चा खोल दिया है।
विधायक शर्मा का कहना है कि सरकारी नापतोल में यह स्पष्ट हो चुका है कि संबंधित कोठी आम रास्ते की भूमि पर बनी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और स्थानीय न्यायालयों में भी पक्ष रखा जा चुका है, लेकिन कहीं से भी कब्जे के पक्ष में फैसला नहीं आया है और हर स्तर पर रास्ता छोड़ने की बात कही गई है। विधायक ने कहा कि अनुसूचित जाति समाज पिछले दो वर्षों से इस मुद्दे को लेकर आंदोलनरत है और जनप्रतिनिधि होने के नाते उनकी आवाज उठाना उनका दायित्व है। उन्होंने कहा कि, “जनता की समस्याओं के समाधान के लिए धरना देना पड़े तो वह भी करेंगे।”
धरने के दौरान विधायक शर्मा ने सिंध नदी की रेत खदानों को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि जिले की खदानों को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जिसमें भिंड और मेहगांव क्षेत्र की खदानें चालू हैं, लेकिन लहार की खदानें बंद होने से यहां रेत की भारी कमी बनी हुई है। इससे लोगों को मकान निर्माण में दिक्कतें आ रही हैं और रॉयल्टी के बावजूद रेत उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन इस क्षेत्र की लगातार अनदेखी कर रहा है, जिससे जनता अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रही है।
विधायक ने बिजली विभाग पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि लहार क्षेत्र में पदस्थ उप महाप्रबंधक द्वारा उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है और मनमाने बिल दिए जा रहे हैं। शिकायत लेकर जाने वाले लोगों से भी अधिकारियों का व्यवहार ठीक नहीं है। विधायक ने संबंधित महिला अधिकारी को हटाने की मांग उठाई है। विधायक शर्मा ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद राजनीति नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता को न्याय दिलाना है। उन्होंने कहा कि, “विधायक रहना या न रहना अलग बात है, लेकिन जनता की समस्याओं को उठाना उनकी प्राथमिकता है।”
डिजिटल डेस्क अहमदाबाद: नोट कमाने के लिए कुछ भी करेगा का एक और कारनामा गुजरात से निकल कर आया है। और वैसे भी गुजराती कारनामों के बारे में तो पूरा देश जानता ही है। जिन हाथों में योग की मुद्राएँ और माला होनी चाहिए थी, उन्हीं हाथों में आज 500-500 रुपये के नकली नोटों के बंडल हैं! सूरत का एक तथाकथित योग गुरु और जमीन दलाल रातोंरात अमीर बनने की ऐसी राह पर चढ़ गया कि घर के एक कोने में ही कलर प्रिंटर लगाकर ‘लक्ष्मीजी’ छापने लगा। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने जब फॉर्च्यूनर कार रोकी, तो उसके अंदर से इतनी नकदी निकली कि पुलिस गिनते-गिनते थक गई और आखिरकार बैंक से नोट गिनने की मशीन मंगवानी पड़ी। इस हाई-प्रोफाइल रैकेट में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
नकली नोट के इस कारोबार मेंमुख्य आरोपी के रूप में सूरत के कामरेज के पास ‘श्री सत्यम योग फाउंडेशन’ चलाने वाले प्रदीप जोटंगिया का नाम सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि प्रदीप योग कक्षाओं के जरिए लोगों के असाध्य रोग दूर करने का दावा करता था। हालांकि, संस्था चलाने के लिए पर्याप्त धन न मिलने पर उसने रातोंरात अमीर बनने के लिए नकली नोट छापने का रास्ता अपना लिया। सेवा के नाम पर चल रही इस एनजीओ के संचालक ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया था।
आरोपियों ने अपना अपराध कबूल करते हुए पुलिस को बड़ी अजीबोगरीब कहानी सुनाई है कि वे आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे। खास तौर पर प्रदीप जोटंगिया को अपनी संस्था चलाने और मरीजों के लिए सुविधाए खड़ी करने के लिए पैसों की जरूरत थी। दूसरी ओर जमीन दलाल मुकेश ठुम्मर भी आर्थिक संकट में था, इसलिए इस गिरोह ने मिलकर शॉर्टकट अपनाया। असली जैसी दिखने वाली नकली नोटें छापकर बाजार में चलाने का उनका इरादा था, ताकि वे अपनी आर्थिक जरूरतें और लग्जरी लाइफस्टाइल पूरी कर सकें।
पुलिस जांच में सामने आया कि नकली नोटों का यह कारखाना पिछले तीन महीनों से सूरत के सरथाणा इलाके में स्थित कृष्णा रो-हाउस में धड़ल्ले से चल रहा था। आरोपी मुकेश ठुम्मर ने अपने दो मंजिला मकान में ही कलर प्रिंटर, कटर मशीन और खास तरह का कागज लाकर नकली नोट छापने शुरू कर दिए थे। उसने चीन से ऐसे विशेष कागज मंगवाए थे, जो असली नोटों जैसे दिखाई देते थे। इसके बाद उन्हीं कागजों पर प्रिंटिंग कर नकली करेंसी तैयार की जाती थी। हैरानी की बात यह है कि उसके मकान की पहली मंजिल पर किरायेदार रहते थे, फिर भी किसी को भनक न लगे, इस तरह यह गिरोह दिन-रात 500 रुपये के नोट छापने में जुटा रहता था।
आरोपी सूरत से अपनी लग्जरी फॉर्च्यूनर कार (GJ-05-RS-5252) में करोड़ों रुपये के नकली नोट भरकर ग्राहकों की तलाश में अहमदाबाद आए थे। कार के अंदर काले रंग के बैग और सफेद थैलों में 500 रुपये के नोटों के लगभग 440 बंडल व्यवस्थित तरीके से पैक किए गए थे। हालांकि, क्राइम ब्रांच ने तकनीकी निगरानी और मानव खुफिया सूचना की मदद से इस कार को पकड़ लिया। अंदर तलाशी लेने पर पुलिस अधिकारी भी एक पल के लिए दंग रह गए। इस गिरोह में हर सदस्य को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कोई कागज की व्यवस्था करता था, तो कोई ग्राहक ढूंढ़ने का काम करता था। महिला आरोपी आरती बेन की भी इस रैकेट में सक्रिय भूमिका होने का खुलासा पुलिस जांच में हुआ है।
ग्वालियर भोपाल मध्य प्रदेश: कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है. उनको अगली सुनवाई तक स्टे मिल गया है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी. मुकेश मल्होत्रा की तरफ से विवेक तन्खा ने की पैरवी की. लेकिन सुप्रीम कोर्ट की तरफ से यह भी बताया गया है कि उन्हें विधायक के तौर पर मिलने वाले भत्ते और पेंशन नहीं मिलेंगे. इसके अलावा वह राज्यसभा चुनाव में वोट भी नहीं डाल पाएंगे.
विजयपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनावों के परिणामों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि मुकेश मल्होत्रा ने कुछ आपराधिक मामलों का उल्लेख नहीं किया था। इस याचिका पर हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए विधायक कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को शून्य घोषित करते हुए, फैसले में रामनिवास रावत को विधायक घोषित करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद कांग्रेस नेता मुकेश मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को शून्य घोषित कर जहां रामनिवास रावत को विधायक घोषित करने का फैसला सुनाया था। इसके बाद मुकेश मल्होत्रा ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए समय मांगा था। इसके बाद हाईकोर्ट ने मल्होत्रा की अपील स्वीकार की और उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए 15 दिन का समय दिया था। आज 19 मार्च को मुकेश मल्होत्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया है। जिसके बाद मुकेश मल्होत्रा विधायक बने रहेंगे।
मुकेश मल्होत्रा के केस में ऐसा फैसला आया है, जिसमें उन्हें भी राज्यसभा चुनाव में वोट डालने का मौका नहीं मिल पाएगा. ऐसे में कांग्रेस के पास वोट डालने के लिए सिर्फ 63 विधायक ही बचे हैं. अगर इनमें से 6 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी, तो कांग्रेस के लिए राज्यसभा की सीट जीत पाना मुश्किल होगा। फैसला अब मोगेश मल्होत्रा के पक्ष में तो है क्योंकि उन्हें विधायिका वापस मिल गई है, लेकिन उन्हें विधायक होने के अधिकार नहीं दिए गए हैं और इसका खामियाजा आने वाले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को हो सकता है।
गुना मध्यप्रदेश: गुना कलेक्टर किशोर कान्याल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। गुना विधायक पन्नालाल शाक्य ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं और उनको नाकारा तथा कागजों में काम करने वाला तक कह डाला। सबसे बड़ी बात है कि यह बयान उन्होंने किसी केबिन में नहीं बल्कि एक मंच से सार्वजनिक तौर पर दिया है। आपको बता दें कि गुना कलेक्टर किशोर कान्याल इससे पहले भी सुर्खियों में रह चुके हैं। लेकिन अब भाजपा विधायक द्वारा ही उनके ऊपर की गई यह टिप्पणी एसएमएस सुर्खियों में है।
गुना विधायक पन्नालाल शाह के गुना के मानस भवन में आयोजित विक्रमोत्सव कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे। गुना कलेक्टर किशोर कान्याल भी वहीं मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान ही गुनिया नदी के अतिक्रमण को हटाने की योजना पर कलेक्टर की कार्यशैली पर विधायक जी ने तंज कस दिया। मंच से ही आमजन को संबोधित करते हुए विधायक पन्नालाल शाक्य ने किशोर कान्याल को नाकारा और कागजों में काम करने वाला कलेक्टर बता दिया। उन्होंने कहा कि कागजों में काम करने से कुछ नहीं होगा, जमीन पर परिणाम दिखने चाहिए। आगे पन्नालाल ने कहा की गुनिया नदी का काम आसान नहीं है और इस पर बाहरी दबाव भी आएंगे। अगर यह काम पूरा कर पाए तभी गुना के विकास में योगदान माना जाएगा।
जिस समय विधायक पन्नालाल शाक्य यह बात कह रहे थे गुना कलेक्टर किशोर कान्याल वहीं मौजूद थे और चुपचाप अपने पर लगे आरोप सुनते रहे लेकिन वहां उपस्थित अन्य अधिकारी उस समय असहज नजर आए। विधायक पन्नालाल शाक्य ने मानस भवन का जिक्र करते हुए पूर्व कलेक्टर रमाकांत मिश्रा की तारीफ की और वर्तमान कलेक्टर किशोर कान्याल से तुलना करते हुए तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, आप जैसे नाकारा अफसर आते जाते रहेंगे।साथ ही विधायक ने लोगों को नसीहत दी कि कमियों पर सिर्फ हंगामा करने के बजाय सहनशीलता भी जरूरी है। साथ ही विधायक ने प्रशासन को सख्ती बरतने की बात कहते हुए कहा कि बिना तारना के आदमी समझता नहीं है।
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में मचे घमासान ने सिर्फ तेल और गैस संकट पैदा नहीं किया है, बल्कि इसका असर अब दवा जैसी जरूरी चीजों पर भी दिखने लगा है. ऊर्जा संकट की वजह से भारत की मुश्किल बढ़ रही है. भारत में गैस सप्लाई प्रभावित होने से पैरासिटामोल,विटामिन और हॉरमोंस जैसी जरूरी दवाओं के प्रोडक्शन में दिक्कत आने लगी है. अगर गैस की समस्या जल्द नहीं खत्म हुआ तो कई फार्मा कंपनियों को अगले 10 दिन में अपना प्रोडक्शन बंद करना पड़ सकता है. ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन का कहना है कि कच्चे माल की सप्लाई न होने से , शिपिंग कॉस्ट बढ़ने से, पैकेजिंग की समस्या बढ़ने से दवाओं की कीमतों में 10 से 20 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है. इस युद्ध की वजह से बुखार, डियबिटीज, इंफेक्शन, सांस की समस्या जैसी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की किल्लत हो सकती है.
ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है. जिसकी वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन टूट गई है. गैस का आयात-निर्यात बंद हो गया है. गैस संकट की वजह से भारत में LPG संकट का सामना करना पड़ रहा है. ये गैस संकट दवाओं के प्रोडक्शन को प्रभावित कर रहा है. जरूरी दवाओं के उत्पादन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. दरअसल दवाओं के प्रोडक्शन में प्रोपेन गैस इस्तेमाल होता है. फार्मा सेक्टर में प्रोपेन फ्यूल की तरह काम करता है, जिसका इस्तेमाल बॉयलर में होता है. वॉर की वजह से एलएनजी इंपोर्ट संकट में फंसा है. गुजरात, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की कई कंपनियों के पास सिर्फ अगले 10 दिन का स्टॉक बचा है. अगर ये संकट जल्द नहीं खत्म हुआ तो मुश्किल और बढ़ जाएगी।
तेल और गैस की कमी के चलते पैरासिटामोल, मेटफॉर्मिन, मेट्रोनिडाजोल, डाइक्लोफैनेक, फॉलिक एसिड और विटामिन सी जैसी दवाओं का प्रोडक्शन अटक रहा है. फार्माएक्ससिल के पूर्व चेयरमैन दिनेश दुआ की माने तो 200 के करीब दवा मैन्युफैक्चरर्स के पास अब स्टॉक नहीं बचा है और वो अगले 7 से 10 दिन में अपना प्रोडक्शन बंद कर सकते हैं. भारत वैश्विक फार्मा सप्लाई चेन का एक बड़ा सेंटर है. भारत की जेनेरिक दवाइओं का दबदबा है. जेनेरिक दवाओं में भारत की हिस्सेदारी 20 फीसदी की है. अमेरिका का सबसे बड़ा इंपोर्टर भी भारत ही है. लेकिन भारत का ये सेक्टर आयात पर निर्भर है. ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध की वजह से कच्चे सामान की किल्लत हो गई है, जिसके वजह से अब ये फार्मा सेक्टर मुश्किल में फंस गया है. दवा की तरह की डेयरी सेक्टर की भी मुश्किल बढ़ रही है. उनके पास पैकेजिंग की दिक्कत आ रही है. गैस संकट की वजह से दूध की पैकेजिंग मुश्किस हो रही है. महाराष्ट्र के डेयरी मालिकों का कहना है कि अगर गैस संकट जल्द खत्म नहीं हुआ तो उन्हें प्रोडक्शन रोकना पड़ जाएगा।
Indore fire tragedy a lesson; इंदौर के बंगाली चौराहे के पास स्थित एक कॉलोनी में बुधवार भोर में भीषण हादसा हो गया। एक मकान में इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। इस हादसे में आठ लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि 3 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। पुगलिया परिवार के घर के बाहर देर रात इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग पर लगी हुई थी। सुबह करीब 4 बजे चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे कार में आग लग गई। आग तेजी से फैलते हुए घर तक पहुंच गई और अंदर रखे गैस सिलिंडरों को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने के बाद घर में रखे सिलिंडरों में धमाके शुरू हो गए। पुलिस के अनुसार एक के बाद एक चार सिलेंडर फटे, जिससे मकान का एक हिस्सा ढह गया।
इस घटना के बाद हर कोई अचंभित है, हैरान है और हर व्यक्ति के मन में यह सवाल उठ रहा है कि इस भयावह हादसे का कारण क्या रहा होगा? तो आइए हम उन कारणों की भी गहन जांच करते हैं और साथ में यह उपाय ढूंढने का भी प्रयास करते हैं कि आने वाले समय में आपके घर में ऐसे हादसे न हो। हकीकत यह है कि हादसा जब होगा तो होगा ही, लेकिन यदि आपके कुछ उपाय मजबूत हो तो हादसा इतना भयावह न हो।इसे रोकने का प्रयास तो किया ही जा सकता है क्योंकि इस घटना में कई ऐसी छोटी लापरवाही सामने आई है जिसकी वजह से यह हादसा हुआ है या इस हादसे की प्रचंडता बढ़ी है।
जिस तरह की खबरें सामने आ रही हैं, वह बताती हैं कि बुगलिया परिवार ने अपनी इलेक्ट्रिक कार टाटा पंच रात में चार्जिंग के लिए लगाई थी और रात को चार्जिंग पर कार लगा के सो गए थे। यह एक प्रकार की लापरवाही है। रात में कार फुल चार्ज होने के बाद ओवरहीटिंग के चलते शॉर्ट सर्किट हो सकता है। कभी भी इस तरह से अपने इलेक्ट्रिक वाहन को रात में चार्ज पर लगाकर न सोएं। यह लापरवाही जिस तरह उगलिया परिवार के लिए जानलेवा साबित हुई है, उसी तरह आपके किसी परिवार के लिए भी जानलेवा साबित हो सकें। कार को या इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज पर लगाकर नहीं छोड़ना है। यह सावधानी आपको किसी भी दुर्घटना से बचा सकती है।
इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज करते समय जिस सॉकेट का और बोर्ड का प्रयोग किया गया था, संभवतः वह अच्छी हालत में नहीं था। वहां शॉर्ट सर्किट होने से तुरंत मेन मीटर पर आग पहुंच गई थी, जो पूरे मोहल्ले की सप्लाई वाले खंभे तक पहुंची। यह घटना साफ बताती है कि कहीं न कहीं इलेक्ट्रिक कार को जहां चार्जिंग के लिए लगाया गया था, वह बिल्कुल मेन लाइन के और मीटर के नजदीक था और वहां पर प्लग सॉकेट एयरलाइन सही हालत में नहीं थी। यदि आप के घर में कोई इलेक्ट्रिक सप्लाई या प्वाइंट खराब है तो उन्हें तुरंत सही करवा लें। यदि वहां से चिनगारी निकलने की कोई भी घटना हो रही हो तो उसे हल्के में ना लें।
इस पूरी घटना में एक बात यह भी निकल कर आई है कि फुगलिया परिवार जिस मकान में रह रहा था उसमें उन्होंने डिजिटल लॉक लगाए हुए थे।शॉर्ट सर्किट के बाद जब पावर सप्लाई बंद हुई तो डिजिटल लॉक ने काम करना बंद कर दिया और यही कारण रहा कि घर के लोग सुबह चार बजे आग की घटना देखकर जाग तो गए, लेकिन उन्हें घर से बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला।उनकी यह छोटी सी सुविधा, जिसमें उन्होंने डिजिटल लॉक प्रयोग किए थे, वह उनके लिए जानलेवा साबित हुई। यह घटना बताती है कि यदि घर में मैनुअल लॉक होते तो घर के लोग उन्हें खोलकर तुरंत बाहर निकल सकते थे। ज्यादा तकनीक के भरोसे रहना भी आपके लिए जानलेवा हो सकता है।
हम आजकल सुरक्षा को देखते हुए ऐसे घर बनाते हैं जिसमें निकासी का कोई दूसरा रास्ता नहीं होता।ज्यादातर घरों में चारों तरफ से बड़ी बड़ी ग्रिल्स लगा दी जाती हैं।चोरी और सुरक्षा के मद्देनजर घर को इतना खुफिया बनाया जाता है कि कोई उसमें घुस न सके और यह जरूरी भी है, लेकिन घर के निर्माण के समय यह बात भी ध्यान रखना चाहिए कि कोई बाहर से अंदर न आए, लेकिन किसी विषम परिस्थिति में घर के अंदर से बाहर जाने के लिए वैकल्पिक रास्ते हो। घर के निर्माण के समय इस बात का ध्यान नहीं रखा जाता बगलिया। परिवार के इस घर में बालकनी भी पूरी तरह पैक थी और घर में एक मेन गेट के अलावा कोई और निकासी का रास्ता नहीं था। घर का अत्यधिक पैग्ड और सुरक्षित होना भी इस घटना में कहीं न कहीं अधिक मौत का कारण बना है।
अभी हाल ही में ग्वालियर के बालाबाई के बाजार में लगी आग में आग भयंकर भड़की थी और कई घंटों तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका था, लेकिन इस दौरान छत के रास्ते से लोग निकलकर बगल के घर से सुरक्षित बच गए थे। ग्वालियर में जिस तरह से छत से बचकर निकलने का सुरक्षित विकल्प था, संभवतः पगलिया परिवार के घर में उनके छत से निकलने का भी विकल्प नहीं रहा होगा, जिसके चलते वे लोग घर में फंस गए। संभवतः यह प्रयास हमेशा होना चाहिए कि आपके घर से छत से अंदर आने का रास्ता सुरक्षित हो, लेकिन बाहर जाने का विकल्प हमेशा आपके परिवार के हर सदस्य के पहुंच में होना चाहिए ताकि विषम परिस्थितियों में वह छत के मार्ग से स्वयं का बचाव कर सके।
पगलिया परिवार के घर में जिस समय आग लगी वह सुबह का समय था, संभवतः यह कारण भी रहा होगा कि आग लगने के बाद काफी देर तक फैल गई होगी।उसके बाद पता चला होगा क्योंकि पुगलैया परिवार उसके आसपास के लोग गहरी नींद में सो रहे होंगे।घटना का सुबह के समय होना भी एक कारण हो सकता है जिसकी वजह से परिवार को पड़ोसियों की और प्रशासनिक मदद देर से मिली। क्योंकि घटना ऐसे समय होती है जब लोगों की निगाह में आ जाए तो लोगों की मदद से घटना की इंटेंसिटी को कम किया जा सकता है।
यह जानकारी भी सामने आ रही है के पुगलिया परिवार के घर में कई गैस सिलेंडर रखे हुए थे।गैस सिलेंडर या इस तरह की तमाम चीजों का घर में होना जो आग को और विकराल कर सकते हैं।यह भी आज के समय में एक समस्या बन चुकी है।कई घरों में इस तरह का इंटीरियर और फर्नीचर लगाया जाता है जो तुरंत आग पकड़ लेता है या आग को और भड़काता है और घर में ऐसे तमाम अन्य साधन भी उपयोग किए जाते हैं जैसे एयर कंडीशनर एलपीजी सिलेंडर और अन्य जो आग को भड़काने का काम करते हैं। इस तरह की तमाम चीजें भी आजकल आग की घटनाओं में भयावह परिणाम दे रही हैं।प्रयास यह करना चाहिए कि घर के इंटीरियर के समय ऐसी सामग्री प्रयोग किया जाए जो फायर रजिस्टेंस हो।
इंदौर में पुगलिया परिवार के साथ हुई घटना दुखद है। एक साथ एक ही परिवार में आठ लोगों की मौत होना और तीन लोगों का गंभीर रूप से अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होना पूरे परिवार और रिश्तेदारों के लिए अत्यंत दुखद घटना है और उन्हें इस घटना से बाहर निकलने में महीनों लग जाएंगे, लेकिन यह घटना एक सबक हो सकती है।इस घटना को कुछ दिनों में भूलने के बजाय, इस घटना से यह सीख लेने की जरूरत है कि हम अपने घर को किस तरह इस तरह की विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार कर सकते हैं। हम अपने घर में ऐसे क्या परिवर्तन कर सकते हैं जिससे ऐसी कोई घटना न हो और हो भी तो उससे बचने के विकल्प हमारे पास हों।
रीवा, मध्य प्रदेश: विंध्य क्षेत्र के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब Rewa Airport से सीधे रायपुर छत्तीसगढ़ के लिए नई हवाई सेवा की शुरुआत हो गई। पहली फ्लाइट ने मंगलवार को रीवा एयरपोर्ट से उड़ान भरकर विंध्य को छत्तीसगढ़ से सीधे जोड़ दिया। इस नई हवाई कनेक्टिविटी से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। दरअसल विंध्य और रीवा क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में नौकरी और व्यवसाय के सिलसिले में रहते हैं। अब तक उन्हें रेल मार्ग से करीब 14 से 15 घंटे की लंबी यात्रा करनी पड़ती थी, लेकिन इस हवाई सेवा के शुरू होने के बाद वही सफर महज लगभग एक घंटे में पूरा हो सकेगा।
नई हवाई सेवा से विंध्य क्षेत्र के व्यापार, पर्यटन और आवागमन को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। क्षेत्र के लोगों में इस नई कनेक्टिविटी को लेकर खासा उत्साह देखा गया। पहली उड़ान के यात्रियों और स्थानीय लोगों ने इसे विंध्य और रीवा के लिए बड़ी सौगात बताया। आपको बता दें कि पिछले कुछ सालों में हवाई सेवाओं में मध्यप्रदेश विकास की ओर अग्रसर है। कई नए शहरों में हवाई सेवाओं का विस्तार किया गया है। रीवा भी उन्हीं में से एक है।
इस सेवा का शुभारंभ केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने वर्चुअल माध्यम से किया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला भी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने इस ऐतिहासिक अवसर पर पहली उड़ान में यात्री के रूप में भी सफर किया। नई हवाई सेवा शुरू होने से विंध्य क्षेत्र के लोगों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का नया विकल्प मिल गया है, जिससे क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
भोपाल मध्य प्रदेश: अपने बेतुके और विवादित बयानों से हमेशा सुर्खियां बटोरने वाली भ्रष्ट तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। हालांकि मुश्किलों में आने के तमाम कारनामे तो वे हमेशा करती रही हैं लेकिन एक ऐसा घोटाला उन्होंने किया जिसके चलते अब उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। यह वही बहुचर्चित तहसीलदार हैं जिन्होंने सबसे पहले कौन बनेगा करोड़पति में इनाम राशि जीतकर सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन उसके बाद उन्हें सुर्खियां बटोरने की ऐसी लत लगी कि वे सोशल मीडिया पर अनावश्यक अनर्गल टिप्पणियाँ करने लगीं।
अमिता सिंह तोमर वर्तमान में श्योपुर में तहसीलदार हैं और श्योपुर में रहते हुए ही उन्होंने ऐसा कारनामा किया जिसके चलते वह मुश्किलों में फंस गई। हालाँकि उन्होंने इन मुश्किलों से बचने के लिए न्यायालय की शरण ली, लेकिन कहीं पर भी उन्हें राहत नहीं मिली और वह बढ़ते बढ़ते माननीय सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें राहत नहीं दी है। और अब ऐसा बताया जा रहा है के उन्हें कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। अनाप शनाप टिप्पणी करने वाली बेतुके बयान देने वाली और गड़बड़ झारा करने वाली इस तहसीलदार ने ऐसा क्या किया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इनको राहत नहीं दी।आइए समझते हैं।
मामला श्योपुर का ही है। 2021 का है। आपको जानकारी होगी के पूरे ग्वालियर। चंबल अंचल में भीषण बाढ़ उस वर्ष आई थी और बाढ़ के बाद मध्यप्रदेश शासन ने तमाम हितग्राहियों को राहत राशि की घोषणा की थी। उस समय भ्रष्ट तहसीलदार कंट्रोवर्सी क्वीन अमिताभ सिंह तोमर श्योपुर जिले के तहसील बड़ौदा में तहसीलदार थीं। इस तहसील में भी 794 हितग्राहियों को राहत राशि दी जानी थी, लेकिन अमिता सिंह तोमर ने बड़ा खेल कर दिया और 2.57 करोड़ की राहत राशि फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दी। करोड़ों का यह गबन जब खुला तो वरिष्ठ अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
बाढ़ पीड़ितों की राहत राशि में हुए करोड़ों रुपए के गबन के इस मामले में भ्रष्ट तत्कालीन बड़ौदा तहसीलदार अमिताभ सिंह तोमर पर मामला दर्ज हुआ था और वह जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने उनकी अग्रिम याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। इस आदेश से स्पष्ट होता है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने भी जमानत से इनकार किया है, तो अब भ्रष्टाचार के इस मामले में अमिता सिंह गिरफ्तार हो सकती है। देखना होगा कि मध्यप्रदेश की कथित कर्मठ पुलिस अब अमिता सिंह को कब तक गिरफ्तार कर पाती है।
2.57 करोड़ की राशि बाढ़ पीड़ितों को न देते हुए तहसीलदार के साथ तमाम अन्य लोगों ने बंदरबांट कर ली थी। कुल 110 लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया गया है। इसमें अमिता सिंह तोमर का भी नाम शामिल है। बड़ौदा, वीरपुर विजयपुर में तहसीलदार के रूप में कार्य कर चुकी हैं। अपने पालतू कुत्ते की समाधि बनाकर उन्होंने सुर्खियों में रहने की अपनी ललक का परिचय दिया था। इसी प्रकार कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री प्रियंका गांधी पर भी अशोभनीय टिप्पणी कर कर कंट्रोवर्सी क्वीन अमिता सिंह ने सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन अब ऐसा लगता है कि अमिताभ सिंह का सुर्खियों का घड़ा भर चुका है और भ्रष्टाचार का भी!
ग्वालियर मध्य प्रदेश: लगातार हो रही मौत के चलते पूरे देश में कुख्यात ग्वालियर इटावा नेशनल हाईवे 719 चौड़ीकरण का काम अभी भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। द इंगलेज पोस्ट ने जो जानकारी जुटाई है। उसके अनुसार यह पूरा साल केवल डीपीआर और और भूमि अधिग्रहण में ही लग जाएगा। तमाम मौत और आंदोलन के बाद भी यह हाईवे कागजी कार्रवाइयों में उलझा हुआ है और इसकी फाइल एक विभाग से दूसरे विभाग में घूम रही है। पहले ये हाईवे एनएचएआई को बनाना था उसके बाद यह काम एमपीआरडीसी को दे दिया गया लेकिन अब एनएचएआई ने इस प्रोजेक्ट को फिर से अपने हाथ में ले लिया है और अब इसका निर्माण एनएचएआई द्वारा किया जाएगा। मतलब दो हजार पच्चीस तो यह निर्णय लेने में ही लग गया कि कौन सी एजेंसी इसका निर्माण कराएगी। इसके बाद भी अभी इस हाइवे के चौड़ीकरण का काम खटाई में पड़ सकता है। जो सबसे बड़ी रुकावट है उसकी जानकारी भी मिली है।
आपको बता दें कि लगातार हो रहे हादसों और उनमें मौत को लेकर ग्वालियर इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग 719 सुर्खियों में है। पूरे देश में राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने के बड़े बड़े दावे विभाग के मंत्री नितिन गडकरी द्वारा समय समय पर किए जाते हैं। लेकिन ग्वालियर भिंड के बीच मौतों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है और लगता है कि यह जानकारी एनएचआई के जिम्मेदारों द्वारा संबंधित विभाग के संवेदनशील मंत्री नितिन गडकरी को नहीं दी जा रही है। यही कारण है कि चुटकियों में दस बीस हजार करोड़ के हाइवे बनाने का दावा करने वाले मंत्री के होते हुए भी ग्वालियर इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग का काम लटका हुआ है। अभी तक इसे बनाये जाने की डीपीआर तक तैयार नहीं हुई है। डीपीआर तैयार होने और भूमि अधिग्रहण में ही यह एक साल और निकल जाएगा और इसके बाद भी इस चौड़ीकरण में और देरी अन्य कारणों से हो सकती है।
एनएचआई प्रोजेक्ट मैनेजर उमाकांत मीणा का कहना है कि यह फाइल अब एनएचएआई के पास है। अभी इसकी डीपीआर तैयार की जा रही है। उनके अनुसार यह डीपीआर अप्रैल तक तैयार होने की संभावना है और डीपीआर के बाद में भूमि अधिग्रहण के लिए सबसे पहले सर्वे होगा। उसके बाद अधिग्रहण में क्या मुआवजा दिया जाना है वह सब तय होगा तब ही भूमि अधिग्रहण हो सकेगा। इसके चलते यह पूरा साल ऐसे ही निकल जाएगा। इसके अलावा उनका यह भी कहना है कि यदि सरकार पैसा खर्च करे तो यह कार्य समय पर शुरू हो सकता है और यदि इसका निर्माण कार्य पीपी मोड पर कराया गया तो इस प्रोजेक्ट में और देरी हो सकती है। मतलब साफ है कि मौत के हाईवे के नाम से बदनाम हो चुके इतने लोगों की मौत की वजह बन चुके इस हाइवे के चौड़ीकरण को लेकर न तो एनएचएआई गंभीर है और न ही शायद सरकार।
आपको बता दें कि पिछले दो महीने में ही इस हाइवे पर तमाम भीषण दुर्घटनाएं हुई हैं और यहाँ दुर्घटनाओं में अभी तक पच्चीस लोगों की मौत हो चुकी है। इस हाइवे पर होने वाली भीषण दुर्घटनाओं को देखते हुए यहां के क्षेत्रीय निवासियों और ग्वालियर भिंड के लोगों ने कई बार आंदोलन तक किए है। लगातार हो रही दुर्घटनाओं से आक्रोशित होकर पिछले साल संत समाज भूतपूर्व सैनिकों और क्षेत्रीय लोगों ने 10 दिन तक आंदोलन किया था। उस आंदोलन के बाद ऐसा लगने लगा था कि शायद सोई हुई सरकार जाग जाएगी और एनएचएआई के गैर जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं रेंगेगी और वह गंभीरता से इस प्रोजेक्ट की फाइल को आगे बढ़ाएंगे। लेकिन हैरानी की बात है कि पिछले साल आन्दोलन में दिए गए आश्वासन के बाद तक अभी ये ही तय नहीं हो सका कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण का कार्य कौन सी एजेंसी करेगी। और अब जाकर यह तय हो सका है कि एमपीआरडीसी नहीं बल्कि एनएचएआई ही इसका निर्माण कराएगी।
जिस तरह से नेशनल हाईवे 719 के चौड़ीकरण के काम में जिम्मेदार विभाग लेट लतीफी कर रहा है। उससे ऐसा लगता है कि विभाग के यह जिम्मेदार अधिकारी अभी और मौत का इंतजार कर रहे हैं और इनकी लेट लतीफी से हुई अन्य मौतों के लिए इन्हें ही दोषी क्यों न माना जाए। यह सवाल भी अब उठने लगे हैं। इस हाईवे का काम युद्धगति से होना चाहिए क्योंकि जितना विलंब इसके निर्माण में होगा उतनी ही अन्य दुर्घटनाओं और मौतों का खतरा जब तक बना हुआ है। यदि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी तमाम जगह करने वाले दावों की तरह इस हाइवे के लिए भी दावा कर दें तो हो सकता है कि अगले एक साल में निर्माण कार्य शुरू ही नहीं बल्कि खत्म भी हो जाए। क्योंकि उनका दावा है कि एक दिन में वर्तमान स्थिति में 29 से 38 किलोमीटर हाइवे बन रहा है और उनका लक्ष्य तो यह सीमा सौ किलोमीटर हाइवे निर्माण प्रतिदिन बढ़ाने की है। अब उनका यदि यह लक्ष्य है तो फिर आप ही समझें कि यह हाईवे कितने कम समय में बन सकता है और एनएचएआई के जिम्मेदार इसमें लेट लतीफी क्यों कर रहे हैं?