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कैलाश खैर पर लगे भीड़ को भड़काने के आरोप! ग्वालियर को बदनाम कर माल लेकर चलता बना!

कैलाश खेर ने पहले तो खुद ही आह्वान करके श्रोताओं को मंच के पास बुलाया और जब अधिक संख्या में भीड़ वहां पहुंच गई तो मंच से अनर्गल बयानबाजी की। हालांकि कुछ समय के लिए गाना बजाना रुका रहा और श्रोता भी अपना संयम अपनाते हुए पीछे लौट गए

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर गौरव दिवस पर यदि कोई ग्वालियर की गरिमा को तार तार कर दे तो उसे क्या सजा मिलनी चाहिए? यदि ग्वालियर गौरव दिवस पर एक व्यक्ति को गौरव बढ़ाने के लिए बुलाया जाए और वो स्वयं ही अपनी हरकतें करने के बाद ग्वालियर को बदनाम कर जाए तो ऐसे शख्स को क्या सजा मिलनी चाहिएह यदि शख्स कोई आम व्यक्ति होता तो शायद तमाम तरह की सजाओं की लंबी फेहरिस्त लगा दी जाती। लेकिन यहाँ इस मामले में ग्वालियर को बदनाम करने वाला क्या ए खास व्यक्ति है एक प्रसिद्ध गवइया है। नाम है कैलाश खेर जो सूफी गायकी के लिए प्रख्यात है।

प्रदेश में इस समय चर्चा है कि कैलाश खैर को ग्वालियर में अच्छे श्रोता नहीं मिले। श्रोताओं से निराशा मिली। हर कोई श्रोताओं को ग्वालियर के नागरिकों को कोसता नजर आ रहा है लेकिन पूरे मामले की हकीकत कुछ और है और राष्ट्रीय मीडिया पर जो कुछ चल रहा है वह हकीकत से कहीं परे नजर आ रहा है। जो विजुअल वायरल हो रहे हैं उससे पूर्व के विजुअल भी देखे जाने चाहिए। वायरल में दिखाई दे रहा है कि श्रोतागण बैरिकेट को लाते हुए मंच के पास पहुंच रहे हैं और जब वे मंच के बहुत नजदीक पहुंच जाते हैं तो कैलाश खैर उन्हें गरियाता हुआ और जानवर गिरी तक के शब्द प्रयोग करता हुआ नजर आ रहा है। और यही वीडियो पूरे देश में वायरल है और ग्वालियर को बदनाम कर रहा है और यकीन मानिए इस बदनामी का दंश ग्वालियर बहुत लंबे समय तक भुगतने वाला है।

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पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म दिवस ग्वालियर गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि अटल जी ने पूरे देश में ही नहीं पूरे विश्व में ग्वालियर को गौरवान्वित किया है। इसी गौरव दिवस का मान बढ़ाने के लिए सूफी गायक कैलाश खैर को मोटी रकम देकर बुलाया गया था। इसी दौरान कैलाश खेर ने मंच की श्रोताओं से दूरी ज्यादा होने की बात कर दी और श्रोताओं के मंच के नजदीक होने की अपील कर दी। यदि मंच से श्रोताओं की दूरी ज्यादा थी तो यह बात कैलाश।खैर को कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही व्यवस्थापकों को बतानी चाहिए थी। और व्यवस्था को बदलना चाहिए था लेकिन कार्यक्रम शुरू होने के बाद बीच कार्यक्रम में उन्होंने जिस तरह से यह बात कही यह एक तरह का भड़काऊ बयान है और उनके इस भड़काऊ बयान के बाद गंभीर हादसा हो सकता था।

ग्वालियर के सुसंस्कृत श्रोतागण शांति से गायकी का आनंद ले रहे थे। वे बहुत उम्मीद के साथ कड़कती ठंड में मेला ग्राउंड के उस स्थल पर पहुँचे थे जहाँ वह स्वर लहरियां उठने वाली थीं जो ग्वालियर का सम्मान बढ़ाने के लिए गीत गाती लेकिन जो मुख ग्वालियर का गौरव बढ़ाने के लिए ग्वालियर में बुलाया गया था वह ग्वालियर को गरियाते हुए नजर आया। जिस तरह से उन्होंने भीड़ को उकसाया भीड़ मंच की तरफ भागी उस दौरान बैरिकेट्स गिर सकते थे अफरा तफरी मच सकती थी भगदड़ मच सकती थी। तमाम पुरानी भगदड़ की घटनाओं से साल 2025 भरा पड़ा है और ग्वालियर में भी उसी तरह की घटना हो सकती थी और इसकी एकमात्र वजह होती कैलाश। खैर का वह भड़काऊ बयान जिसने श्रोताओं को आंदोलित कर दिया मंच की ओर भागने के लिए। क्या इस मामले में इस संभावना को देखते हुए कैलाश खेर पर मामला दर्ज नहीं होना चाहिए?

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कैलाश खेर ने पहले तो खुद ही आह्वान करके श्रोताओं को मंच के पास बुलाया और जब अधिक संख्या में भीड़ वहां पहुंच गई तो मंच से अनर्गल बयानबाजी की। हालांकि कुछ समय के लिए गाना बजाना रुका रहा और श्रोता भी अपना संयम अपनाते हुए पीछे लौट गए और शो फिर से शुरू हो गया। श्रोताओं ने न तो किसी तरह से किसी इंस्ट्रूमेंट से कोई छेड़छाड़ की न ही कोई तोड़फोड़ की न ही कैलाश खेर उनके टीम के किसी व्यक्ति के साथ कोई अभद्रता की। फिर भी ग्वालियर के श्रोताओं पर जानवर गिरी होने के साथ साथ तमाम तरह के आरोप आज राष्ट्रीय मीडिया में लग रहे हैं। यदि इस तरह से संगीत प्रेमियों को अपशब्द कहे जाएंगे तो क्या वह आने वाले समय में इन गवइयों के गाने सुनने जाएँगे? सवाल यह भी उठ रहा है कि जब कैलाश खेर के कार्यक्रम में ग्वालियर के नागरिकों की इस तरह बदनामी हो रही है। ग्वालियर को बदनाम किया जा रहा है तो क्या बड़े कलाकार ग्वालियर में प्रस्तुति देने आएंगे? यह तो कैलाश खैर से पूछिए कि क्या उनको फिर से मोटी रकम मिलेगी तो क्या वह फिर से ग्वालियर में आएंगे और जवाब आप जानते ही होंगे….

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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