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ठगी का खौफनाक अंत; पूर्व आईजी ने ठगी में करोड़ों गंवाने के बाद खुद को मारी गोली

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: देश में लगातार बढ़ रहे साइबर ठगी के मामले लगातार खौफनाक होते जा रहे हैं और इसके बावजूद हमारे देश का सिस्टम ऐसी कोई मजबूत प्रणाली नहीं बना पाया है जिससे इन साइबर ठगी के मामलों पर रोक लग सके।ताजा मामला पंजाब के पटियाला का है जहां ठगी का शिकार होने के बाद एक पूर्व आईजी इतने ज्यादा अवसाद में चले गए कि उन्होंने खुद को गोली मारकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह एक अलार्मिंग घटना है।हालांकि पहले भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं जिसमें साइबर ठगी के शिकार हुए पीड़ितों ने अपनी जान दी हो लेकिन यह मामला कुछ अलग है क्योंकि ठगी का शिकार होने वाला कोई आम व्यक्ति नहीं एक पूर्व आईजी है।

पटियाला में इंडियन रिजर्व बटालियन से सेवानिवृत्त आइजी अमरसिंह चहल ने अपने घर पर गनमैन के सरकारी गन से खुद को गोली मार ली। उन्होंने आत्महत्या से पहले डीजीपी के नाम एक बार पन्नों का नोट छोड़ा है। नोट में चहल ने अपील की है के इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कर विशेष जांच दल बनाया जाए ताकि इस अंतरराज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय साइबर ठगी के नेटवर्क को बेग किया जा सके। उन्होंने अपने परिवार की सुरक्षा और कर्जदाताओं से राहत की गुहार भी लगाई है। इस नोट में उन्होंने साफ लिखा है कि जिस तरह से संगठित तरीके से यह साइबर ठगी की गई है उसमें आम आदमी पूरी तरह असहाय हो जाता है। यह जो शब्द आपने पढ़े यह एक पूर्व आईजी के शब्द हैं और आप समझ सकते हैं कि यह शब्द बता रहे हैं कि देश में साइबर ठगी का जाल कितना विस्तृत और भयावह हो चुका है।

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साइबर ठगों ने पूर्व आईजी अमरसिंह को एक प्रॉफिटेबल ग्रुप में जोड़ा। इस ग्रुप का नाम एफ सेवन सेवन सेवन डीवीएस वेल्थ इक्विटी रिसर्च ग्रुप था जिसके व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर ग्रुप थे। शुरूआत में केवल बाज़ार की जानकारी दी गई जिससे ग्रुप की गतिविधियाँ भरोसेमंद नजर आई। इसके बाद कुछ सेलेक्टेड इनवेस्टर्स को ट्रेडिंग की अनुमति दी गई और एक फर्जी डिजिटल डेशबोर्ड उपलब्ध कराया गया जिसमें रोजाना मुनाफा दिखाया जाता था। इसके बाद उन्हें आईपीओ में पैसा लगाने को कहा गया। कहा गया कि ग्रुप के जरिए आवेदन करने पर डिस्काउंट रेट पर ज्यादा अलॉटमेंट मिलेगा। इसके लिए निवेशकों से अतिरिक्त पैसा जमा कराया गया। जब तक चहल को इस पूरे मामले में ठगी का शक हुआ तब तक वह काफी रुपया गंवा चुके थे। मात्र दो महीने में ही वह अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से लेकर दस करोड़ रुपये तक इस ठगी में गंवा चुके थे। 

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पूर्व आईजी अमर सिंह चहल ने ठगी से पीड़ित होकर आत्महत्या कर ली लेकिन वह एक ज्वलंत सवाल छोड़ गये हैं कि क्या हमारा सिस्टम इतना कमजोर है। जिसमें ठगों का इतना बड़ा रैकेट पूरे देश में फैला हुआ है। हर वर्ग का व्यक्ति चाहे गरीब हो या अमीर चाहे शिक्षित हो या अशिक्षित इन ठगों का शिकार हो रहा है और हमारे देश में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है जो साइबर ठगी के इस बढ़ते हुए खतरे को रोक सके। आपको बता दें कि ज्यादातर ठगी के मामलों में पुलिस और अन्य एजेंसियों की लापरवाही के चलते घटना के बाद समय बीत जाता है और जैसे जैसे गोल्डन आर्ट्स बीतते हैं। उसके बाद इन सायब ठगों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। हमारे देश में साइबर ठगी पर की गई कार्रवाइयों के बड़े बड़े दावे तो किए जाते हैं लेकिन हकीकत में साइबर ठगी के मामले कहीं ज्यादा हैं और उनमें सफलता का प्रतिशत कहीं कम। उम्मीद की जा सकती है कि अमर सिंह चहल की आत्महत्या और उनके डीजीपी के नाम लिखे बारह।पेज के नोट के बाद शायद हमारी सरकार जागे और साइबर ठगी को रोकने के लिए कोई मजबूत सिस्टम बनाए…

अमित शाह की ग्वालियर यात्रा; चाक चौबंद तैयारी में जिम्मेदारों के फूले हाथ पांव!

ग्वालियर मध्य प्रदेश: श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती के पूरे देश की निगाहें ग्वालियर पर होंगी। उसकी वजह यह तो है ही कि अटल जी भारत रत्न हैं देश के पूर्व प्रधानमंत्री हैं लेकिन साथ इस बार उनके जयंती पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का ग्वालियर दौरा है। अमित शाह चौबीस दिसंबर को ग्वालियर आ जाएंगे।रात्रि विश्राम ग्वालियर में करेंगे और पच्चीस दिसंबर को विभिन्न कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल रहेंगे। अमित शाह के बारे में जो लोग जानते हैं उन्हें भली भांति पता है कि वह किसी भी कार्यक्रम में कहीं कोई लापरवाही या कमी बर्दाश्त नहीं करते हैं। और थोड़ी सी भी चूक दिखाई देने पर उनका सख्त अंदाज लापरवाहों के होश फाख्ता कर देता है।

शहर में जिम्मेदार अधिकारियों के हालात खराब क्यों हैं?उसकी वजह है पिछले काफी लंबे समय से शहर पूरी तरह अव्यवस्थित था। ग्वालियर की सड़कें ग्वालियर का ट्रैफिक  पूरे देश में चर्चित हो चुका है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का ग्वालियर दौरा तय होने के बाद से ही ग्वालियर में जिम्मेदार अधिकारियों ने कमर कसी और युद्ध गति से तैयारियों में जुटे हुए हैं। ग्वालियर में तमाम कार्यक्रमों में सबसे मुख्य कार्यक्रम है एमपी ग्रोथ समिट जो मेला ग्राउंड में होना है वहां तो तैयारियां चाक चौबंद कर ही ली गई लेकिन अमित शाह के दौरे में कुछ अन्य कार्यक्रम भी जुड़ते जा रहे हैं और उन क्षेत्रों में व्यवस्था को सुधारना अब ग्वालियर के जिम्मेदार अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। 

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ग्वालियर महाराजवाड़ा स्थित अटल म्यूजियम 3 साल से तैयार है और उद्घाटन का इंतजार कर रहा है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि अमित शाह पच्चीस दिसंबर को इस अटल म्यूजियम का शुभारंभ भी कर सकते हैं और वह व्यक्तिगत रूप से इस स्थल पर आकर ही इसका उद्घाटन करेंगे और इसका अवलोकन करेंगे। साथ ही ग्वालियर शासकीय प्रेस बिल्डिंग में तैयार किए गए औद्योगिक म्यूजियम का भी लोकार्पण होने की संभावना है। लेकिन महाराज बाड़ी तक जाने का पहुंच मार्ग और वहां के हालात किसी से छुपे नहीं हैं। अभी कुछ ही दिन पहले मध्य प्रदेश चैंबर ऑफ़ कॉमर्स ग्वालियर के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था। यह पोस्ट ग्वालियर के जिम्मेदारों को आईना दिखाने के लिए था और तंज भरा था कि अमित शाह महाराज बाड़ा तक भी जाए और उस मार्ग के बीच में आने वाले ऊंट पुल और दौलतगंज का जिक्र भी उन्होंने किया था।

हालांकि अब उनकी यह इच्छा पूरी होती नजर आ रही है और ऐसा बताया जा रहा है कि अटल म्यूजियम का उद्घाटन अमित शाह के दौरे के कार्यक्रम में जुड़ चुका है लेकिन अब महाराज बाड़ी तक पहुंच मार्ग पर व्यवस्थाओं को चाक चौबंद करना अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती है और अधिकारी युद्ध गति से इन तैयारियों में जुटे हुए हैं लेकिन कहीं ना कहीं अधिकारियों के बीच में घबराहट भी है क्योंकि किसी भी तरह की कोई भी लापरवाही या कमी रह जाती है तो उसका दंड भी जिम्मेदार को भुगतना ही पड़ेगा। लगातार मीटिंग का दौर जारी है। ग्वालियर जिले के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट भी ग्वालियर में डेरा जमाए हुए हैं और हर तैयारी पर व्यक्तिगत रूप से नजर रखे हुए हैं। ग्वालियर संभाग आयुक्त मनोज खत्री और ग्वालियर।आईजी अरविंद सक्सेना लगातार बैठकें ले रहे हैं। तैयारियों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी के ग्वालियर में कमल सिंह का बाग शिंदे की छावनी स्थित पैतृक निवास पर भी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का भ्रमण प्रस्तावित है। इसे ध्यान में रखकर कलेक्टर रुचिका चौहान एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने सोमवार को कमल सिंह का बाग स्थित अटल जी के निवास का अवलोकन किया। उन्होंने शिंदे की छावनी से उनके निवास तक के पहुँच मार्ग व पार्किंग व्यवस्था का जायजा लिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अतिविशिष्ट अतिथियों की सुरक्षा व स्थानीय निवासियों की सुविधा को ध्यान में रखकर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दें। 

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शिंदे की छावनी स्थित अटल जी के पैतृक निवास और महाराज बाड़े तक पहुंच मार्ग की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में प्रशासन पूरी तरह जुटा हुआ है और हर संभव प्रयास कर रहा है कि इन क्षेत्रों में व्यवस्थाओं में किसी तरह की कमी न रह जाए। हर स्पॉट पर तैयारियों का जायजा वरिष्ठ अधिकारी कलेक्टर एसएसपी स्वयं ले रहे हैं और अपने अधीनस्थों को थोड़ी सी भी कमी दिखने पर निर्देशित भी कर रहे हैं। तैयारियां किस हद तक त्रुटिहीन और पूर्ण होंगी?और क्या कोई कमी तो नहीं रह जाएगी?यह तो पच्चीस दिसंबर को ही पता चलेगा…

सरकारी स्कूल में क्वालिटी एजुकेशन के दावे फेल; प्राइवेट स्कूल संख्या में कम लेकिन उनमें छात्र दो गुने

ग्वालियर मध्य प्रदेश : सरकारी स्कूल में शिक्षा का स्तर अच्छा होता है या प्राइवेट स्कूल में? यह प्रश्न सुनकर आप हंस भी सकते हैं बाल भी खींच सकते हैं और इस खबर को बेवजह मान कर छोड़ भी सकते हैं। लेकिन याद कीजिए सीएम राइज स्कूल क्यों खोले गए सीएम राइज? स्कूल खोलने से पहले तत्काल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने क्या दावे किए थे? उनका कहना था कि निजी स्कूल से बेहतर शिक्षा सरकारी स्कूल में मिलेगी। संसाधन भी बेहतर होंगे लेकिन अभी जो आंकड़े सामने निकलकर आए हैं वह चौंकाने वाले हैं। क्योंकि आज भी ज्यादातर माता पिता अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजना ही पसंद कर रहे हैं।उनका भरोसा सरकारी स्कूल पर नहीं है और सरकार द्वारा किए गए दावों पर तो कतई नहीं है।

सबसे पहले आंकड़ों से समझें कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण बेहतर शिक्षा और संसाधन देने के दावों की पोल यह आंकड़े किस तरह खोल रहे हैं। शैक्षणिक वर्ष दो हजार पच्चीस छब्बीस में ग्वालियर जिले के समस्त स्कूलों में पहली से हायर सेकेंडरी में 4 लाख 61 हजार 466 छात्रों का नामांकन हुआ है। इनमें से केंद्रीय विद्यालय में 10398 छात्र का नामांकन हुआ है। नवोदय विद्यालय में 445 छात्र का नामांकन हुआ है। राज्य सरकार के सरकारी स्कूलों में 135227 छात्र का नामांकन हुआ है। राज्य सरकार द्वारा सहायता प्राप्त स्कूल में 3350 छात्र का नामांकन हुआ है जबकि ग्वालियर के समस्त प्राइवेट स्कूल में 322510 छात्र का नामांकन हुआ है। आंकड़े साफ बता रहे हैं कि निजी स्कूल में लगभग दुगने छात्रों का नामांकन हुआ है। 

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यह हालात तब है जब पिछले कुछ सालों से सीएम राइड स्कूल के नाम पर सरकारी स्कूलों की ढपली सरकार बजा रही है। लेकिन हकीकत यह है कि सरकार के मुफ्त शिक्षा के दावों पर प्राइवेट स्कूल की मोटी फीस होते हुए भी उनकी शिक्षा का स्तर भारी पड़ रहा है। तत्कालीन शिवराज सरकार के सीएम राइज स्कूल का नाम बदलकर मोहन सरकार ने सादनी स्कूल तो कर दिया लेकिन शिक्षा का स्तर सुधारने में मोहन सरकार पूरी तरह फैल हुई है। इस बात की गवाही यह आंकड़े चीख चीख कर दे रहे हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर घटिया है।इस बात का प्रमाण यह भी है कि सरकारी स्कूलों की बेहतर सुविधाओं के लिए गाल बजाने वाले सरकार के नुमाइंदे अधिकारियों के बच्चे भी इन सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ते हैं। मतलब साफ है कि सरकार को खुश करने के लिए यह प्रशासनिक अधिकारी गाल तो सरकार के हक में बजाते हैं लेकिन मोटी फीस प्राइवेट स्कूलों की थाल में सजाते हैं। 

आपको बता दें कि ग्वालियर जिले में सरकारी स्कूलों की संख्या प्राइवेट स्कूलों से कहीं ज्यादा है। इसके बावजूद प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या कहीं अधिक है। वह साफ बता रही है कि प्रदेश सरकार पालकों को सरकारी स्कूलों की तरफ आकर्षित करने में पूरी तरह फेल हुई है और आकर्षित करें भी कैसे केवल घटिया मिड डे मील और फ्री की किताबें देखकर कोई भी पालक अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करने के लिए तो उन्हें उन सरकारी स्कूलों में नहीं भेजेगा जहां शिक्षक ही न हो और शिक्षक हो भी तो उनका पढ़ाने का तरीका राम भरोसे हो। सरकार करोड़ों रुपए बर्बाद करने के बाद भी सरकारी स्कूलों का स्तर नहीं सुधार पाई है जी सरकारी स्कूलों का स्तर सुधर जाए। इसका तरीका एक ही है कि सरकार को यह नियम लागू कर देना चाहिए कि जितने भी लोग शासकीय सेवा में हैं उनके लिए अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाना अनिवार्य होगा। यकीन मानिए कि जिस स्कूल में आईएएस और आईपीएस के बच्चे पढ़ेंगे वहां पर सुविधाएं कागजों पर नहीं हकीकत में दुरुस्त नजर आएंगी न कोई शिक्षक अनुपस्थित होने की हिमाकत करेगा ना ही लापरवाही बरतने की। क्या माननीय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव में है इच्छाशक्ति यह नियम लागू करने की?

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गागर भर ध्यान से सागर भर तनाव से पुलिसकर्मियों को मुक्त करने की नाकाम कवायद

इक्कीस दिसंबर पूरे देश नहीं बल्कि पूरी दुनिया में विश्व ध्यान दिवस के रूप में मनाया गया और ध्यान के महत्व पर जगह जगह तमाम चर्चाएं हुई। ध्यान जिसे अंग्रेजी में मेडिटेशन कहते हैं इसके माध्यम से आप अपने जीवन को तनाव मुक्त कर सकते हैं। लेकिन यह ध्यान एक या दो दिन की जाने वाली प्रक्रिया नहीं बल्कि लगातार की जाने वाली एक तपस्या है। विश्व ध्यान दिवस पर मध्य प्रदेश पुलिस ने भी एक अजीबोगरीब पहल शुरू की। सोच अच्छी है। शुरुआत अच्छी है लेकिन यह सतत नहीं होगी और सतत ना होने के चलते ही अंत में परिणाम शून्य होगी और यही वजह है कि यह पहल अजीबोगरीब है और फिजूल है।

प्रदेश के पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी कैलाश मकवाना ने यह पहल की है। उन्होंने हार्टफुलनेस सेशन शुरू किया है। इसके लिए रामकृष्ण मिशन के दाजी के साथ एक एमओयू भी भलीभांति किया गया है। हार्ट फुलनेस सेशन के लिए विशेषज्ञों को बुलाया गया। उनके द्वारा पहले अस्सी पुलिसकर्मियों को ट्रेंड कराया गया और अब यह पुलिसकर्मी साथ ही पुलिसकर्मियों को ट्रेंड करेंगे। आपको बता दें कि डीजीपी कैलाश मकवाना को हार्टफुलनेस संस्था द्वारा हार्ट फुलनेस चेंजमेकर अवार्ड दिया गया है। अवार्ड के लिए डीजीपी साहब को बधाई और जो प्रयास वह करने की कोशिश कर रहे हैं उसके लिए भी उन्हें बधाई। लेकिन क्या वह वास्तव में ऐसी कोई व्यवस्था लागू कर पाएंगे कि प्रदेश के पुलिसकर्मी तनाव मुक्त जीवन जी पाए।

मध्यप्रदेश में ज्यादातर पुलिसकर्मी तनाव और मानसिक विकार से पीड़ित हैं। इसका कारण है उनकी दिनचर्या उनके सेवा का कोई समय निर्धारित नहीं है। एकमात्र पुलिस विभाग ही है जो किसी भी राष्ट्रीय या सामाजिक त्योहार पर भी कार्य करता है। 26 जनवरी और 15 अगस्त को आपको पुलिसकर्मी कार्य करते नजर आएंगे। इसी तरह दिवाली होली हो या ईद पुलिसकर्मी आपको कार्य करते नजर आते हैं। मध्यप्रदेश में सप्ताह में फ़ाइव डेज वर्किंग लागू है लेकिन पुलिस ही एकमात्र विभाग है जहां सात दिन कार्य होता है। पुलिसकर्मी लगातार इतने लंबे समय तक काम करते हैं। कहीं न कहीं कोई न कोई आकस्मिक ड्यूटी भी आ जाती है उसे भी निभाते हैं। कई बार तो न खाने की फुर्सत होती है न सोने की और अपने खानपान और नींद पूरी न होने के चलते वह अवसाद और मानसिक रूप से विकार का शिकार हो जाते हैं। 

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आपने ज्यादातर पुलिस का एक विलेन वाला चेहरा ही देखा होगा जिसमें वह आपको वसूली करता नजर आता है। थाने जाओ तो अखर स्वभाव में बदतमीजी करता नजर आता है। लेकिन एक पुलिसकर्मी का स्वभाव ऐसा क्यों हो जाता है? यह एक चिंतन का विषय है। झुंझलाहट और आवेश एक मानसिक विकार ही है और यदि आपको भी लगातार अनवरत बिना निजी जीवन जिए कार्य करने को दिया जाए तो आपके अंदर भी इस तरह के मानसिक विकार के लक्षण दिखाई देने लगेंगे। एक पुलिसकर्मी के जो सेवा समय की व्यस्तताएं हैं वही कारण होता है जिसकी वजह से उसके स्वभाव में आपको यह सब विकार दिखाई देते हैं। हो सकता है कि एक आम आदमी मेरी बात से सहमत न हो लेकिन जो भी पुलिसकर्मी और उनके परिवारजन इस लेख को पढ़ेंगे वह इस दर्द को भलीभांति समझ सकते हैं। 

पुलिस रिफॉर्म पर कई बार कई चर्चाएं हुई हैं। पुलिसकर्मियों के ड्यूटी समय को निर्धारित करने पर भी चर्चाएं हुई हैं। पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने पर भी चर्चाएं हुई हैं लेकिन जमीनी स्तर पर यकीन मानिए अभी तक कुछ नहीं हुआ है और अभी भी जो कुछ हुआ है तो वह केबल विश्व ध्यान दिवस पर एक अजीबोगरीब शुरुआत है। क्योंकि केबल आज के दिन फोटो खिंचवाए गए हैं। आगे यह सतत जारी रहेगी।इस बात में संशय है। हालांकि विभाग का दावा है कि अब हर रविवार को दस से ग्यारह बजे हर थाने में एक ध्यान सत्र आयोजित किया जाएगा जिसमें थाने के पुलिसकर्मी ध्यान करेंगे और अपने जीवन को तनाव मुक्त बनाएंगे। लेकिन पहला प्रश्न है कि क्या हर रविवार को यह हो पाएगा और दूसरा प्रश्न है कि केवल रविवार को एक घण्टी का ध्यान क्या पर्याप्त है? और तीसरा प्रश्न क्या कोई ऐसी अन्य व्यवस्था नहीं हो सकती जिसमें पुलिसकर्मियों के सेवा समय को निर्धारित किया जाए?

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एक पुलिसकर्मी कितने तनाव में कार्य करता है? यह आप उन खबरों से समझ सकते हैं जो समय समय पर सुर्खियां बनती हैं। कहीं न कहीं कोई पुलिसकर्मी आत्महत्या कर लेता है।कहीं न कहीं कोई पुलिसकर्मी अपने साथी को पीट देता है।कहीं ना कहीं कोई पुलिसकर्मी सड़क पर उद्दंडता कर बैठता है। इन सब का कारण यही है कि तनावग्रस्त पुलिसकर्मी का अपने मन पर नियंत्रण नहीं होता है और कई बार तनाव इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि वह इसके चलते स्वयं की जीवनलीला समाप्त कर लेता है हालांकि मेरे पास स्पष्ट आंकड़े नहीं हैं लेकिन पिछले कुछ सालों में पुलिसकर्मियों द्वारा किए जाने वाले आत्महत्या के मामलों में इजाफा हुआ है। कारण केवल एक है वह अनियमित दिनचर्या जो पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल रही है।

विश्व ध्यान दिवस पर पुलिसकर्मियों के संबंध में डीजीपी कैलाश मकवाना ने जो विचार रखे हैं उन्हें ध्यान से समझिए। उनका कहना है कि बहुत तनावपूर्ण परिस्थितियों में पुलिसकर्मी दिमाग पर नियंत्रण नहीं रख पाता। आउट ऑफ़ प्रिकॉशन रिएक्ट कर देता है जैसा कि कहा जाता है। पानी शांत होगा तो नीचे तल में कंकड़ पत्थर। अंदर की सुंदरता आप देख सकेंगे उसी तरीके से जब तक मन को स्थिर नहीं करेंगे बेहतर निर्णय लेने की स्थिति में अपने आप को नहीं रख सकेंगे इसलिए मैंने यह प्रयास किया कि पुलिस फोर्स को ध्यान से जोड़ा जाए।वह इससे मन पर नियंत्रण रख पाएंगे। शारीरिक और मानसिक रूप से उनकी प्रोफेशनल व पर्सनल लाइफ में भी बेहतर तरीके से सामंजस्य बैठा पाएंगे।

जो कुछ डीजीपी कैलाश मकवाना ने कहा उससे सहमत होने में कोई संशय नहीं होना चाहिए। निस्संदेह उनकी सोच सराहनीय है। लेकिन साल में एक घंटे के ध्यान यह महीने में एक घंटे के सप्ताह में एक घंटे के ध्यान की जगह यदि पुलिसकर्मियों के सेवा समय से संबंधित कोई बड़ा प्रयास किया जाए तो संभवतः उनका जीवन तनाव मुक्त हो सकता है। यह एक दिन का प्रयास आगे लगातार जारी रहेगा। इस बात में संशय है क्योंकि रविवार को ही जो ध्यान का समय दस से ग्यारह निर्धारित किया गया है उसी समय कोई माननीय वीआईपी आ धमकेगा और फिर यह ध्यान सत्रों तक सिमट कर रह जाएगा। दिनभर के तनावपूर्ण सेवा काल के बाद अब हर थाने पर एक काम का तनाव और बढ़ जाएगा कि उसे अब ध्यान सत्र को भी कागजों पर जीवित रखना पड़ेगा। आइए इंतजार करते हैं अगले विश्व ध्यान दिवस 21 दिसंबर 2026 का…

फूफा ने 13 साल की भतीजी को बनाया हवस का शिकार

ग्वालियर मध्य प्रदेश: फूफा नाराज ही नहीं होते फूफा नालायक भी होते हैं और इतने नालायक होते हैं कि शायद आप सुनकर होश खो दें। ग्वालियर में एक फूफा ने ऐसा गंदा काम कर दिया कि उसने फूफा होने का सारा मान सम्मान ही खो डाला। फूफा ने अपनी ही 13 साल की नाबालिग भतीजी के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया है। फूफा ने घर के अंदर भतीजी को अकेला देख उसके साथ दुष्कर्म की वारदात की फिर डरा धमका कर उसका शोषण करता रहा। घटना गोला का मंदिर थाना क्षेत्र की है।

यह पूरा खेल फूफा काफी लंबे समय से चला रहा था और फूफा को भी लग रहा था कि शायद खुलासा नहीं होगा लेकिन जब बेटी को मां ने तकलीफ में देखा तब इस घटना का खुलासा हुआ। मां को पीड़िता ने अपनी पूरी तकलीफ सुनाई।उसने फूफा के हर कुरकर्म का चिट्ठा खोलकर रख दिया। तभी मां ने बेटी के साथ थाने पहुंचकर शिकायत की। वही पुलिस ने आरोपी फूफा के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हमारी बेटियां कहां सुरक्षित हैं किस पर भरोसा करें जब फूफा जैसा पवित्र रिश्ता भी अपने मन में ऐसी गंदगी रखता हो।

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ग्वालियर के गोला का मंदिर थाना क्षेत्र की रहने वाली 13 साल की नाबालिग 7वी क्लास की छात्रा है और वह अपनी मां और बहन के साथ किराए के मकान में रहती है। छात्रा की मां नगर निगम में सफाई करने का काम करती है। छात्र ने अपनी मां के साथ थाने पहुंचकर पुलिस से शिकायत करते हुए बताया कि पड़ोस में रहने वाला उसका रिश्तेदार फूफा विशाल बाल्मिक उस पर अक्सर गंदी नियत रखता है। 5 महीने पहले रात 11 बजे वह घर पर अकेली थी मां और उसकी बहन दवाई लेने के लिए डॉक्टर के यहां गई हुई थी। जब वहां कमरे में सो रही थी तभी उसका फूफा विशाल कमरे में घुस आया और उसके कपड़े उतारने लगा जिससे उसकी नींद खुल गई जब वह चिल्लाई तो उसके फूफा ने उसका मुंह दबाकर बंद कर दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। फिर धमकी दी कि अगर किसी को कुछ बताया तो उसे ब्लेट से काटकर जान से मार देगा और भाग निकला।

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जब बहुत ज्यादा हालत बिगड़ने पर पीड़िता ठीक से चल नहीं पा रही थी तभी उसकी मां ने उससे पूछा तो उसने आरोपी के डर के चलते झूठ बोल दिया कि वहां गिर गई थी। छात्रा के डर जाने पर आरोपी के हौसले और बुलंद हो गए और इसी तरह उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। 16 दिसंबर 2025 की दोपहर जब वह स्कूल से घर आ रही थी तभी रास्ते में उसको फूफा विशाल मिला। फिर वह उसे यात्री वाहन टेम्पो में बिठाकर अपने घर लेकर पहुंचा। जहां उसके साथ फिर से दुष्कर्म किया और उसकी अश्लील वीडियो भी बना ली। जिससे वहां फिर से चुप रही। 18 दिसंबर 2025 को जब उसकी तबीयत बिगड़ी तो उसकी मां ने उससे पूछताछ की तब उसने रोते हुए मां को फूफा की गंदी करतूत के बारे में बताया। इस बात का खुलासा होने के बाद तत्काल इसकी मां उससे लेकर पुलिस थाने पहुंची और बेटी के साथ हुई घटना की शिकायत की। वहीं पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, पास्को एक्ट और अन्य धाराओं में मामला दर्ज करने के बाद उसे उसके घर से धर दबोच कर गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस अब आरोपी को जेल भेजने की कार्रवाई में जुट गई है।

निगम परिषद में हंगामा स्थगन और करोड़ों की बर्बादी, जनसमस्या जस की तस और जनप्रतिनिधि मस्त

ग्वालियर मध्य प्रदेश:  ग्वालियर नगर निगम के कारनामे ग्वालियर की जनता भली भांति जानती है लेकिन आज हम आपको आपके चुने हुए पार्षदों का ऐसा कारनामा बताने जा रहे हैं.. जिसको सुनकर ये पार्षद भले ही चुल्लू भर पानी में न डूब मरें लेकिन आपको लगेगा कि इनको वोट देने से अच्छा है कि अपना वोट कहीं चुल्लू भर पानी में फेंक देते… जनकार्य की बात हो तो निगम के अधिकारी निगम के वित्तीय संकट की दुहाई देते हैं.. जनता सीवर सड़क और पानी की मूलभूत समस्याओं के लिए जद्दोजहद कर रही है। जर्जर हालत में सड़कें हैं गंदे पानी की समस्या है। कहीं पर भी उफान और सड़ांध मारते देखे जा सकते हैं। निगम के पास जनकार्यों के लिए पैसों का टोटा है लेकिन परिषद की बैठकों में पैसा लुटाने से इन्हें किसी ने नहीं रोका है। 

शहरवासियों ने पूरे शहर में घटिया सड़कों का दर्द झेला है लेकिन उस पर परिषद में कभी गंभीर चर्चा और निर्णय नहीं हुए शहर में सीवर की समस्या तो खत्म होने का नाम ही नहीं लेती। गंदे पानी की बोतलें लेकर कुछ पार्षद पार्षद में तमाशा करते नजर जरूर आते हैं लेकिन समस्या का समाधान जनता को मिला हो ऐसा नहीं हो पाया। स्ट्रीट लाइट का मुद्दा हमेशा गर्माया लेकिन नतीजा हमेशा की तरह शून्य नजर आया। इन सबके बावजूद ग्वालियर नगर निगम परिषद काम के नाम पर बार बार स्थगित हो जाती है वही परिषद जिसे चलाने के लिए आपके चुने हुए यह पार्षद बीते तीन साल में करोड़ों उड़ा चुके है। यह पार्षद निगम में हंगामा करते हैं। निगम के काम में अटकलें लगाते हैं पक्ष विपक्ष पर आरोप प्रत्यारोप करते हैं.. और जनता की गाड़ी कमाई के टैक्स से मिठाई हलवा खाकर हाथ पोंछकर दांत दिखाते हुए घर चल देते हैं। 

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28 अक्टूबर 2022 से लेकर अब तक निगम में पार्षदों की शहर की समस्याओं को लेकर 80 बैठक हुई है। जिसमें 70 फीसदी हंगामे की भेंट चढ़ गयी। आप एक बैठक का खर्च सुनेंगे… चौक जाएंगे, क्योंकि 66 पार्षदों की एक बैठक पर एक दिन में डेढ़ से पौने दो लाख रुपए तक खर्च आता है। साल 2022 में नवंबर से दिसंबर महीने में 4 बैठक हुई। एक साधारण सभा की बैठक, 2 बैठक हंगामे के कारण स्थगित हुई। उसके बाद एक विशेष सम्मेलन बुलाया गया। – साल 2023 में 24 बैठक हुई। 5 विशेष अभियाचित सम्मेलन बुलाए गए। 12 बैठक हंगामे के कारण स्थगित हुई। 4 बैठक हंगामे के कारण स्थगित हुई। बजट सत्र हुआ, जिसमें जमकर हंगामा हुआ। – साल 2024 में 28 बैठक बुलाई गयी। 10 विशेष अभियाचित सम्मेलन बुलाए गए। 9 विशेष सम्मेलन बुलाए गए। बजट सत्र हुआ, जिसमें जमकर हंगामा हुआ। – साल 2025 में 23 बैठक बुलाई गयी। 11 बैठक हंगामे के कारण स्थगित हुई। 6 बैठकों में बजट संशोधन हुए। 

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आंकड़े साफ बता रहे हैं कि पार्षदों ने 70 फीसदी बैठकों में हंगामा किया है। निगम अध्यक्ष कहते है…. बहुत से पार्षद ऐसे है, जो पहली बार चुनकर आये है, उन्हें पता नही होता है…जिसके कारण वो उन मुद्दों को उठाते है, बहस करते है। जिसके कारण बैठक स्थगित करनी पड़ती है। एक बैठक पर डेढ़ से पौने दो लाख रुपए तक खर्च आता है। इसमें पार्षदों के नाश्ते से लेकर, उनका मानदेय 450 रूपए जुड़ा रहता है। लेकिन ये बैठके, सिर्फ ओर सिर्फ हंगामे के कारण स्थगित हो रही है। 

जनता देख लें कि उनके चुने हुए पार्षद किस तरह उनके दिए हुए टैक्स के पैसों से मौज करते हैं और परिषद भी नहीं चलने देते। जनहित के कार्य भी नहीं होने देते। तो अब यह पार्षद आपके क्षेत्र में आए तो आप इनसे यह जरूर पूछें कि आपके वोट से परिषद में पहुंचे हैं। आपके टैक्स से मौज कर रहे हैं। तो फिर परिषद को चलने क्यों नहीं दे रहे.. और यदि आपका पार्षद आपको जवाब नहीं दे तो आने वाले निगम चुनाव में अपने वोट से उसको जवाब देने की तैयारी जरूर कर लें… 

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41 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटेंगे मध्य प्रदेश में

भोपाल मध्य प्रदेश: पूरे देश में इस समय एसआईआर विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य चल रहा है जिसके तहत मतदाता सूची का शुद्धीकरण किया जा रहा है।मध्यप्रदेश में एसआइआर का प्रथम चरण पूरा हो चुका है और जो मतगणना पत्रक जमा हो चुके हैं उसके आधार पर 23 दिसंबर को प्रारंभिक मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। ऐसा बताया जा रहा है कि पूरे प्रदेश में इस सूची में इकतालीस लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। किन के नाम हटाए गए हैं इसकी हकीकत तो अब तेईस दिसंबर के बाद ही जनता के सामने आएगी। लेकिन लाखों लोगों के नाम हटने की आशंका के बीच तरह तरह की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

चुनाव आयोग का इस मामले में कहना है कि एसआईआर का काम मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए किया गया है। ऐसे कई मतदाता सूची में थे दो वास्तव में हैं ही नहीं या तो मृत हो चुके हैं या उनकी दोहरी प्रविष्टि है और ऐसी कई विसंगतियों को दूर करने के लिए यह अभियान चलाया गया है और ऐसे मतदाता जो अब मृत हैं या दोहरी प्रविष्टी है या कहीं और चले गए हैं। ऐसे तमाम मतदाता मैपिंग में नहीं आ पाए हैं और भौतिक परीक्षण के आधार पर ही यह शुद्धीकरण किया गया है। इस शुद्धिकरण में 8.40 लाख मतदाता मृत ढाई लाख मतदाता दोहरी प्रविष्टि, 8.40 मतदाता अनुपस्थित और बाईस लाख पचास हजार से अधिक मतदाता स्थानांतरण वाली श्रेणी में हैं। वहीं नौ लाख लोगों की तो मैपिंग ही नहीं हो पाई है क्योंकि या तो इन्होंने गणना पत्रक जमा ही नहीं किए गए हैं और किए भी हैं तो आवश्यक जानकारी नहीं दी है। 

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आपको बता दें कि मतदाताओं की सुविधा को देखते हुए चुनाव आयोग ने एसआइआर की समयावधि दो बार बढ़ाई थी। इसके बावजूद भी कई मतदाताओं ने सही जानकारी बीएलओ को उपलब्ध नहीं कराई। जिन 900000 मतदाताओं की गणना पत्रक अधूरे जमा हैं और जिनकी मैपिंग नहीं हुई है अब उन्हें नोटिस जारी होंगे। ऐसे तमाम मतदाता हैं जिन्होंने केवल हस्ताक्षर करके प्रारूप बीएलओ को दे दिया है। तेईस दिसंबर को जो मतदाता सूची जारी की जाएगी यदि किसी मतदाता का नाम उसमें नहीं है तो वह फार्म छह भरकर नाम सूची में शामिल कराने के लिए दावा कर सकते हैं। इसके लिए इन मतदाताओं को बाईस जनवरी दो हजार छब्बीस तक की समय सीमा दी गई है। 

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अमृत योजना के घटिया काम में अब मौत का आगाज़; डंपर से बुजुर्ग की मौत

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर के बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के अर्णव ग्रीन सिटी टाउनशिप में एक गिट्टी से भरे डंपर के पलटने से बुजुर्ग की दर्दनाक मौत हो गई। अभी हाल ही में क्षेत्र में अमृत योजना के तहत पाइप लाइन डाली गई थी और इस पाइपलाइन का आधा अधूरा घटिया काम इस हादसे की वजह बना। बुजुर्ग को मौका तक नहीं मिला और उसी जगह पर वह गिट्टी से भरे डंपर के नीचे दब गया क्षेत्रवासी अब कह रहे हैं कि यह हादसा नहीं हत्या है और इसके दोषी नगर निगम के अधिकारी और अमृत योजना के ठेकेदार हैं। अमृत योजना के तहत डाली गई लाइन का घटिया निर्माण हमेशा से चर्चाओं में रहा है लेकिन किसी जिम्मेदार पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

मृतक बुजुर्ग गिरजा 90 वर्ष के थे। वह मूलतः भरतपुर राजस्थान के रहने वाले हैं। उनके नाती ने बहुड़ापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत अर्णव ग्रीन सिटी में मकान बनाया था और वह अपने नाती के साथ रहते थे। ठंड का समय है। दोपहर 1 बजे के लगभग बुजुर्ग घर के बाहर धूप सेंक रहे थे उसी वक्त डंपर वहां से गुजरा। मोड़ पर जैसे ही डंपर मुड़ा वहां पहले से खुदी हुई अमृत योजना पाइपलाइन की कच्ची सड़क में डंपर का पिछला पहिया फंस गया। जैसे ही पिछला पहिया फंसा डंपर का बैलेंस बिगड़ा और वह बुजुर्ग के मकान की तरफ ही लुड़क गया बुजुर्ग ने जगह से उठकर भागने की कोशिश की। लेकिन बुजुर्ग को मौका ही नहीं मिला और पूरा डंपर उसके ऊपर जा गिरा।साथ ही डंपर की गिट्टियां भरभराकर उसके ऊपर गिर गई। हालांकि घटना के बाद परिजन तुरंत बुजुर्ग को अस्पताल ले गए जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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बुजुर्ग की मौत के बाद क्षेत्रवासियों में आक्रोश है। वह इस घटना का जिम्मेदार नगर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों को बता रहे हैं। ऐसे कई हादसे पहले भी हो चुके हैं जिसके बारे में जिम्मेदार अधिकारियों को पता है कि किस तरह अमृत योजना का निर्माण नियमानुसार न होकर नियम विरुद्ध और आधा अधूरा चल रहा है। कहीं पर भी खुदाई के बाद अमृत योजना की लाइन में ठीक से भराव नहीं किया जाता। यह पहला हादसा नहीं है जब अमृत योजना के किए गए गड्ढों में कोई डंपर ट्रक फंसा हो। इससे पहले भी कई हादसे हो चुके हैं लेकिन गनीमत रही कि उन हादसों में कोई मौत नहीं हुई और मौत न होने के वजह से ही शायद जिम्मेदारों की नींद नहीं खुली और वह अभी भी ठेकेदारों के साथ जुगलबंदी करते हुए मदमस्त हैं। सवाल यह उठता है कि क्या इस बुजुर्ग की मौत के बाद जिम्मेदारों का जमीर जागेगा?

अमृत योजना का निर्माण कार्य जब से शहर में शुरू हुआ यह लोगों के लिए जेहर बन चुकी है।कई क्षेत्रों में जब अमृत योजना के लिए सड़कें खोदी गई तो महीनों तक उनका भराव नहीं किया गया और वहां के क्षेत्रवासी अमृत योजना का दंश झेलते रहे अमृत योजना में इतनी घटिया पाइपलाइन डाली गई है जो आए दिन फूटती रहती है और फिर वहां पर उसकी रिपेयरिंग के लिए गड्ढे खोदे जाते हैं। अमृत योजना के तहत डाली गई पाइपलाइन। मैं कम प्रेशर से पानी सप्लाई किया जाता है।प्रेशर बढ़ाने पर पाइप लाइन प्रेशर सहन नहीं करती और फूट जाती हैं और प्रेशर कम होने पर कई क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंचता। पानी का प्रेशर इतना कम है कि पहली मंजिल पर पानी चढ़ाने के लिए भी टिल्लू पंप का प्रयोग करना पड़ता है। 

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अमृत योजना का काम करने वाले ठेकेदार अभी तक लापरवाही का ठेकेदार था। अव्यवस्था का ठेकेदार था। आधे अधूरे काम का ठेकेदार था लेकिन अब वह मौत का ठेकेदार भी बन चुका है। उसकी लापरवाही के चलते अब आमजन जान भी गंवा रहे हैं और ऐसे ठेकेदारों को इस तरह मौत का लाइसेंस।नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने दिया है। अब सवाल यह उठता है कि इन मौत के ठेकेदारों पर कोई कार्रवाई होगी या ये जो मौत का सिलसिला शुरू हुआ है यह आगे इसी तरह चलता रहेगा?

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अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट-2025; 30 मिनट अमित शाह का मंत्र और 50 हजार हितग्राहियों का लक्ष्य

ग्वालियर मध्यप्रदेश: ग्वालियर में 25 दिसंबर को आयोजित होने जा रही “अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट-2025” की तैयारिया तेज हो गई हैं। प्रदेश सरकार के साथ साथ प्रदेश उद्योग विभाग और ग्वालियर जिला प्रशासन लगातार तैयारियों पर नजर रखे हुए है। नगर निगम पच्चीस दिसंबर तक कार्यक्रम स्थल की सभी तैयारियां पूर्ण कर लेगा। ग्वालियर पुलिस भी सुरक्षा को लेकर मुस्तैद है। राज्य शासन के औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा यह समिट आयोजित की जा रही है जिसमें देश के गृहमंत्री अमित शाह और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की तैयारी के लिए उधोग विभाग के आयुक्त दीलिप कुमार ने गुरूवार को वीडियो कॉन्फेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में अधिकारियों को “अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट” में एमएसएमई विभाग की तैयारियों को लेकर दिशा – निर्देश दिए।

बैठक में उधोग विभाग के आयुक्त श्री दीलिप कुमार ने निर्देश दिए हैं कि विभाग की सफलताओं एवं योजनाओं से जुडी प्रदर्शनी लगाई जाए। जिससे आमजनों को विभाग की जानकारी मिल सके और वह इसका लाभ लें सकें। समिट में सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम विभाग की 2500 वर्गफीट एरिया में प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इस प्रदर्शन में एक जिला एक उत्पाद योजना को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही ग्वालियर के सेण्ड स्टोन, बदरवास के जेकेटस, छतरपुर के फर्नीचर आदि को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही पेपरमेसी क्रापफट, स्टार्टअपस को भी प्रदर्शनी में शामिल किया जाएगा। समिट में सफल उद्यमियों की कहानियों का प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही स्वरोजगार योजनाओं के हितग्रहियों को ऋण वितरण पत्र एवं सांकेतिक चेक प्रदान किए जाएंगे।

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इस कार्यक्रम में 650 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है जिसमें से 130 अतिथियों का सम्मान भी किया जाएगा। कार्यक्रम में पचास हजार हितग्राहियों को लाने का लक्ष्य रखा गया है जिसमें से चालीस हजार हितग्राही ग्वालियर के बाकी अन्य दस हजार अन्य जिलों के होंगे। प्रदेश स्तर के इस कार्यक्रम में लाभार्थियों की संख्या एक लाख होने का अनुमान है। एमएसएमई से संबधित विभिन्न जिलों के 5000 उद्यमियों को इस कार्यक्रम में शामिल होने का लक्ष्य विभाग को दिया गया है। इसके साथ ही विभिन्न जिलों में प्रस्तावित औधोगिक क्षेत्रों एमएसएमई इकाईयों का भूमिपूजन, शिलान्यास एवं लोकार्पण भी अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेशभर के 248 भू-खण्डों का आश्रय पत्र उद्यमियों को सौंपा जाएगा। 

इस कार्यक्रम के चार प्रमुख स्तंभ रहेंगे जिसमें से पहला स्तंभ निवेश उपलब्धियों का होगा जिसमें ग्लोबल इन्वेस्टर समिट एवं अन्य राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय निवेश योजनाओं के माध्यम से प्राप्त दो लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों का भूमिपूजन।दस हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण औद्योगिक इकाइयों का भूमि आवंटन और आशय पत्र का वितरण किया जाएगा। दूसरे स्तंभ में रोजगार सृजन रहेगा। इसमें रोजगार सफलता की दीवार एक प्रमुख आकर्षण के रूप में स्थापित की जाएगी जिसके माध्यम से औद्योगिक इकाइयों लाभार्थियों एवं युवाओं से जुड़ी वास्तविक प्रेरणादायी और परिवर्तनकारी कहानियों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी जो आने वाले लाभार्थियों को प्रेरित करेगी। 

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तीसरा स्तंभ औद्योगिक सुधार एवं नवाचार का रहेगा जिसमें औद्योगिक क्षेत्र का शुभारंभ एक क्लिक प्रोत्साहन वितरण प्रणाली की शुरुआत नए औद्योगिक क्लस्टरों एवं प्लग एंड प्ले इकाइयों का उद्घाटन किया जाएगा। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाओं का लोकार्पण भी किया जाएगा जिन्हें पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों के आधार पर संकलित किया गया है और इनकी प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाएगा। चौथे स्तंभ में जिला स्तर पर औद्योगिक विकास एवं रोजगार सजन को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अंतर्गत नई औद्योगिक इकाइयों को सम्मानित किया जाएगा। रोजगार प्राप्त युवाओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे तथा जिला स्तर पर भूमि आवंटन एवं औद्योगिक विस्तार से संबंधित महत्वपूर्ण घोषणाएं की जाएंगी। कार्यक्रम स्थल पर अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर एक विशेष स्मृति प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। 

आपको बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न ग्वालियर की धरती के पुत्र स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती 25 दिसंबर के उपलक्ष्य में ग्वालियर के मेला मैदान पर अभ्युदय मध्य प्रदेश ग्रोथ समिट का यह आयोजन होने जा रहा है। यह आयोजन मध्य प्रदेश की औद्योगिक आर्थिक एवं निवेश प्रगति का व्यापक प्रदर्शन करने के साथ-साथ अटल जीके विकासवादी विचारों दूरदर्शी नेतृत्व एवं राष्ट्र निर्माण के संकल्प को भी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। 

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एपस्टिन सेक्स स्कैंडल फ़ाइल; दुनिया का सबसे बड़ा सेक्स स्कैंडल, अमरीका के दिग्गजों के खुलेंगे राज!

डिजिटल डेस्क: सेक्स स्कैंडल की खबर वैसे ही पूरे देश में जंगल की आग की तरह फैल जाती है लेकिन यदि सेक्स स्कैंडल दुनिया का सबसे बड़ा स्कैंडल हो और उसके तार अमेरिका के बड़े सफेद पोशों से जुड़े हो तो फिर आप समझ सकते हैं कि मामला कितना चौंकाने वाला होगा और अमेरिका से जुड़े होने के कारण ही इस मामले की चर्चा दुनिया में हर जगह हो रही है। ऐसा बताया जा रहा है कि इस फाइल के उजागर होते ही अमेरिका के तमाम सफेद पोशों के काले चेहरे उजागर हो जायेंगे। अब देखना होगा कि जितनी चर्चा एपस्टिन सेक्स स्कैंडल फाइल की हो रही है। क्या हकीकत में उसने वही राज छुपा रखे हैं।

अमेरिका में जेफ्री एपस्टीन केस एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है। ट्रम्प प्रशासन 19 दिसंबर को एपस्टीन से जुड़े दशकों पुराने सरकारी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने जा रहा है। इन रिकॉर्ड्स में ईमेल, तस्वीरें, कानूनी दस्तावेज़ और अन्य संवेदनशील फाइलें शामिल होंगी। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के अनुसार यह एक “बहुत बड़ा आर्काइव” है, जिसमें हजारों से लेकर लाखों पेज तक के दस्तावेज़ हो सकते हैं। इनका मकसद एपस्टीन के कथित सेक्स ट्रैफिकिंग नेटवर्क की पूरी सच्चाई को जनता के सामने लाना है। और एक लोकतांत्रिक देश में जनता के सामने यह सच्चाई आनी भी चाहिए कि उनके द्वारा चुने गए नुमाइंदे मंच से जो बातें करते हैं उनका खुद का जीवन उससे कहीं अलग होता है। अमरीका दुनिया का सबसे पुराना लोकतांत्रिक देश है। और अमेरिका की जनता के साथ ही देश के अन्य लोकतांत्रिक देशों की जनता भी खुलासे का इंतजार कर रही है।

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एपस्टिन फाइल है क्या जिसकी चर्चा इस समय पूरी दुनिया में हो रही है और आज उन्नीस दिसंबर को इस फाइल के लाखों पन्ने जनता के सामने आने वाले हैं? आइए समझते हैं कि क्या है।यह पूरा मामला। जेफ्री एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और उन्हें प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाने के गंभीर आरोप थे। आरोप है कि इस नेटवर्क में दुनिया के कई ताकतवर राजनेता, उद्योगपति और सेलिब्रिटी शामिल थे। हालांकि अब तक किसी भी व्यक्ति को केवल तस्वीरों या दस्तावेज़ों के आधार पर दोषी साबित नहीं किया गया है, लेकिन इन खुलासों ने वैश्विक राजनीति और कॉरपोरेट जगत में हलचल मचा दी है। एपस्टीन केस की जड़ें साल 2005 में जाती हैं। फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि एपस्टीन ने उसकी बेटी को अपने आलीशान घर में ‘मसाज’ के बहाने बुलाया और वहां उस पर यौन संबंध बनाने का दबाव डाला। लड़की के घर लौटकर सच बताने के बाद उसके माता-पिता ने तुरंत पुलिस का दरवाजा खटखटाया। यह एपस्टीन के खिलाफ दर्ज पहली आधिकारिक शिकायत थी।

12 दिसंबर को इस पूरे मामले की शुरुआत हुई जब एपस्टीन की संपत्ति से जुड़ी 19 तस्वीरें सार्वजनिक की गईं। इन तस्वीरों में नौ बड़ी हस्तियों को एपस्टीन के साथ देखा गया है। इनमें मौजूदा और पूर्व अमेरिकी नेताओं से लेकर अरबपति और मशहूर हस्तियां शामिल हैं। इन नामों में डोनाल्ड ट्रम्प, पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स, ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू, ट्रम्प के पूर्व सलाहकार स्टीव बैनन, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष लैरी समर्स, फिल्म निर्माता वुडी एलन, बिजनेसमैन रिचर्ड ब्रैनसन और मशहूर वकील एलन डर्शोविट्ज शामिल हैं। ये तस्वीरें किसी के खिलाफ सीधे अपराध साबित नहीं करतीं, लेकिन इनके कारण गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर इसी तरह के आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए महीनों तक जांच की और इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू हुई। जांच में पता चला कि एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में बेहद आलीशान विला थे, जहां वह हाई-प्रोफाइल पार्टियां आयोजित करता था। इन पार्टियों में राजनीति, बिजनेस और मनोरंजन जगत की कई बड़ी हस्तियां शामिल होती थीं। एपस्टीन अपने निजी जेट, जिसे ‘लोलिता एक्सप्रेस’ कहा जाता था, से कम उम्र की लड़कियों को लाया करता था। उन पर पैसों, गहनों और धमकियों के जरिए दबाव डाला जाता था। इस पूरे नेटवर्क में उसकी गर्लफ्रेंड और सहयोगी गिस्लीन मैक्सवेल भी शामिल थी।

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इन फाइलों के सार्वजनिक होने का रास्ता अमेरिकी संसद से होकर निकला। पिछले महीने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों, हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स और सीनेट ने एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज़ों को सार्वजनिक करने वाला एक्ट भारी बहुमत से पास किया। हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स में यह बिल 427-1 के अंतर से पास हुआ, जबकि सीनेट ने इसे सर्वसम्मति से मंजूरी दी। संसद से पास होने के बाद यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास गया। कानूनी रूप से ट्रंप के पास इस बिल पर हस्ताक्षर न करने या वीटो लगाने का विकल्प था, लेकिन दोनों सदनों में मिले भारी समर्थन के कारण उनका वीटो भी प्रभावी नहीं होता। संसद दो-तिहाई बहुमत से उसे ओवरराइड कर सकती थी। इसी वजह से राष्ट्रपति ट्रम्प को 19 नवंबर को इस बिल पर हस्ताक्षर करने पड़े। कानून के मुताबिक, इसके बाद 30 दिनों के भीतर न्याय विभाग को एपस्टीन से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करनी थीं, जिसकी समय-सीमा 18 दिसंबर को पूरी हो रही है।

जिस तरह अमेरिका सबसे पुराना लोकतांत्रिक देश है उसी तरह भारत भी इस समय दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। भारतीय राजनीतिक गलियारों में भी हो रही हैं। आइए समझते हैं कि भारत से इस सेक्स स्कैंडल का क्या कनेक्शन है। अब तक किसी भारतीय नागरिक, नेता या उद्योगपति का नाम आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है। हालांकि भारतीय नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया है कि फाइलों में कुछ भारतीय मंत्रियों, पूर्व मंत्रियों और मौजूदा सांसदों के नाम हो सकते हैं। अमेरिकी न्याय विभाग ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है, लेकिन चूंकि एपस्टीन के संबंध अमेरिका के बाहर के देशों से भी बताए जाते हैं, इसलिए पूरी दुनिया की नजर इन दस्तावेज़ों पर टिकी हुई है। 

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