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खाकी पर खूनी हमला, प्रेमी युगल को सुरक्षा देने वाले पुलिसकर्मियों को हाइवे पर दौड़ाकर पीटा

गुना मध्य प्रदेश: मध्यप्रदेश में अराजकता और कानून से खेलने का टशन इस तरह हावी है कि अब लोग आम जन तो क्या पुलिसकर्मियों के साथ भी बर्बरता और मारपीट करने पर उतारू हैं। लगता है कि उनमें कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है। ताजा मामला गुना से सामने आया है जहाँ पुलिसकर्मियों को आँख में मिर्ची डाल कर हाईवे तक दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया। पुलिसकर्मियों की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने घर से भागकर शादी करने वाले प्रेमी युगल को संरक्षण दिया था जो कानूनन सही भी था लेकिन लड़की के परिजन पुलिस पर आक्रोशित हो गए और कानून से खिलवाड़ करते हुए पुलिसवालों के साथ जमकर मारपीट की।

जिले के बीनागंज क्षेत्र के ग्राम पैंची में सोमवार को कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ गईं। प्रेम विवाह के एक मामले में उपजे विवाद ने इतना हिंसक रूप ले लिया कि उग्र भीड़ ने पुलिस टीम पर ही जानलेवा हमला कर दिया। उपद्रवियों ने न केवल एक आरक्षक को बंधक बनाकर उसके साथ मारपीट की, बल्कि उसे बचाने पहुंची पुलिस और एसएएफ की टीम को नेशनल हाईवे-46 पर दौड़ा-दौड़ा कर लाठी-डंडों और पत्थरों से पीटा। इस दुस्साहसिक हमले में पुलिसकर्मियों की आंखों में मिर्ची तक झोंक दी गई, जिससे कई जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के बाद दो घायल पुलिसकर्मियों को जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है।वहीं बीनागंज हाईवे पर भारी मात्रा में जिलेभर का पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। 

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पूरा मामला एक प्रेमी युगल को सुरक्षा देने से जुड़ा हुआ है। मोहम्मदपुर निवासी लोधा समाज की एक युवती मीना समाज के युवक के साथ गायब हो गई थी। उन्होंने 1 जनवरी को भागकर प्रेम विवाह कर लिया था। सोमवार को युवती के परिजन और समाज के लोग बीनागंज चौकी पहुंचे और युवती को सौंपने की मांग करने लगे। चूंकि युवती बालिग थी और उसने अपनी मर्जी से शादी की बात कहते हुए सुरक्षा की मांग की थी, इसलिए पुलिस ने उसके बयान दर्ज कर उसे वन स्टॉप सेंटर भेज दिया। इसी बात से नाराज होकर लोधा समाज के करीब आधा सैकड़ा लोग वापस लौटते समय उग्र हो गए। 

उग्र भीड़ ने पैंची के पास नेशनल हाईवे-46 पर चक्काजाम करने का प्रयास किया और लडक़े के घर में आग लगाने की धमकी देने लगे। जब एक आरक्षक ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो ग्रामीणों ने उसे पकड़कर बंधक बना लिया और मारपीट शुरू कर दी। सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी के साथ एसएएफ के आधा दर्जन जवान मौके पर पहुंचे, लेकिन वहां पहले से तैयार भीड़ ने उन पर धावा बोल दिया। एसएएफ जवान नवाब सिंह ने बताया कि हमलावरों ने अचानक आंखों में मिर्ची पाउडर झोंक दिया, जिससे जवानों को कुछ दिखाई नहीं दिया। इसी का फायदा उठाकर भीड़ ने लाठी, डंडों और पत्थरों से जवानों को लहूलुहान कर दिया। हमला इतना भीषण था कि पुलिसकर्मियों को अपनी जान बचाने के लिए हाईवे पर भागना पड़ा।

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पुलिस पर हुए इस सीधे हमले के बाद प्रशासन सख्त रुख अपना रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस अब वीडियो फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर हमलावरों की पहचान कर रही है। कानून को हाथ में लेने वाले और वर्दी पर हाथ उठाने वाले आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। लेकिन यह घटना एक बार फिर यह सवाल छोड़ गई है कि मध्य प्रदेश में जब कानून की रक्षा करने वाले पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं तो आमजन अपने सुरक्षा की कल्पना कैसे करें? और मध्य प्रदेश में कानून का खौफ लोगों के मन से खत्म क्यों होता जा रहा है?

आमलेट का टुकड़ा और एआई से फोटो रीक्रिएशन ने कर दिया ब्लाइंड मर्डर का खुलासा

ग्वालियर मध्य प्रदेश : ग्वालियर पुलिस ने एक बहुत ही पेचीदा ब्लाइंड मर्डर डिकोड करने में सफलता हासिल की है। कुछ दिन पहले जब लाश मिली थी तो मर्डर और बलात्कार की पुष्टि तो हो रही थी लेकिन हत्यारे तक पहुँचने का कोई सुराग नहीं मिल रहा था। और तब पुलिस ने सबसे पहले एआई की मदद से शव के चेहरे का रीक्रिएशन किया और फोटो बनाया और फिर शव के क्षेत्र के जेब में मिले आम्लेट के टुकड़े को अहम सुराग मानते हुए पड़ताल शुरू की। पुलिस की सूझबूझ और सही दिशा में पड़ताल और इतने छोटे मामूली सबूत को मजबूत आधार बनाने का नतीजा यह रहा कि पुलिस को ब्लाइंड मर्डर का खुलासा करने में सफलता मिल गई। 

पुलिस ने पड़ताल करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, आरोपी का नाम सचिन सेन है जो मूलतः ग्वालियर का ही रहने वाला है,आरोपी सचिन सेन ने प्रेम प्रसंग के चलते महिला की हत्या कर दी थी,आरोपी महिला से प्रेम करता था लेकिन उसे शक था कि महिला किसी अन्य व्यक्ति से भी सम्बन्ध रखती है,हत्या से पहले आरोपी सचिन ने महिला सुनीता पाल के साथ एक ठेले पर अंडे खाए उसके बाद उसे भिण्ड रोड स्थित कटारे फार्म की झाड़ियों में ले जाकर दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया और बाद में सिर पर पत्थर पटक कर उसकी हत्या कर दी।

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घटना के बाद से आरोपी सचिन सेन फरार था वहीं मृतक महिला सुनीता पाल की पहचान छुपाने के लिए आरोपी सचिन ने सिर पर भारी भरकम पत्थर पटक दिया जिसमें महिला की शिनाख्त नहीं हो सकी घटना 29 दिसंबर शाम की है,घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर गोला का मंदिर थाना पुलिस पहुंची और जांच पड़ताल शुरू कर दी हालांकि महिला की शिनाख्त नहीं हो पा रही थी बाद में पुलिस ने एआई की मदद से महिला का स्कैच बनवाया उसके बाद पता चला कि महिला का नाम सुनीता पाल है जी टीकमगढ़ की रहने वाली है ग्वालियर में मजदूरी का काम करती थी।

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पुलिस  ने आरोपी की तलाश की लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले तब पुलिस को आरोपी का पता चला  पुलिस को मुखबिर सूचना मिली कि आरोपी सचिन सुबह ग्वालियर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार के पास देखा गया जो कही भागने की फिराक में था सूचना मिलते ही गोला का मंदिर पुलिस ने तुरंत घेराबंदी कर आरोपी को धर दबोचा पुलिस आरोपी से पूछताछ में जुटी है,आरोपी ने बताया कि वह महिला सुनीता पाल से प्रेम करता था और वह उससे शादी करना चाहता था लेकिन सुनीता ने उसे प्यार में धोखा दिया इसी से आहत हो उसने सुनीता पाल को मौत के घाट उतार दिया।

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राम रहीम को फिर पैरोल, 40 दिन रहेगा बाहर, लग्जरी कारों के काफिले में जेल से हुआ रवाना

डिजिटल डेस्क; बड़ी खबर: साध्वियों के यौन उत्पीड़न और उसके बाद पत्रकार की हत्या के मामलों में सजा याफ्ता राम रहीम को एक बार फिर पैरोल मिल गई है है। राम रहीम इस समय सुनारिया जेल में बंद है और वह वहां आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। इतने गंभीर मामलों में आजीवन कारावास की सजा के बावजूद वह जेल से बाहर निकलकर बिल्कुल निश्चिंत नजर आता है। हालांकि उसकी पैरोल पर पहले भी कई बार सवाल खड़े हुए हैं इसके बावजूद उसे एक बार फिर चालीस दिन की पैरोल मिली है और पैरोल के बाद जो टशन देखने को मिला वह देखकर लोग हैरान रह गए।

पहले आप यह जान लें कि यह दुर्दान्त अपराधी राम रहीम जेल में क्यों हैं। इसका असली नाम गुरमीत है। अगस्त 2017 को 2 साध्वियों के यौन शोषण केस में गुरमीत को 20 साल कैद हुई। इसके बाद 17 जनवरी 2019 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उम्र कैद हुई। वहीं, डेरा मैनेजर रणजीत सिंह के हत्या मामले में अक्टूबर 2021 में सीबीआई कोर्ट ने उसे उम्र कैद की सजा सुनाई।

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सोमवार को गुरमीत को लेने के लिए सिरसा डेरे से लग्जरी गाड़ियों का काफिला पहुंचा, जिसमें दो बुलेट प्रूफ लैंड क्रूजर, दो फार्च्यूनर और दो अन्य गाड़ियां शामिल थीं। सुबह करीब साढ़े 11 बजे वह सुनारिया जेल से सिरसा डेरे के लिए निकला। दोपहर 2:45 बजे वह सिरसा पहुंचा। इस बार डेरा मुखी 15वीं बार पैरोल या फरलो लेकर जेल से बाहर आया है। इससे पहले डेरा मुखी गुरमीत 15 अगस्त को अपना जन्मदिन मनाने के लिए जेल से बाहर आया था।

हर कैदी का पैरोल और फरलो का अधिकार होता है। इसके तहत कैदी को एक साल में 70 दिन की पैरोल और 21 दिन की फरलो मिलती है। लगभग 6 हजार ऐसे कैदी हैं, जिन्हें राज्य की कंपीटेंट अथॉरिटी द्वारा पैरोल और फरलो पर रिहा किया जाता है। कानूनी दायरे के अंदर ही गुरमीत को हर बार पैरोल या फरलो पर बाहर आते हैं। अब उन्हें 40 दिन की पैरोल मिली है। वह इस दौरान सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में रहेंगे।

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पुलिस मैन के बेटे ने रची खुद के अपहरण की साजिश; ऑनलाइन गेमिंग का भयावह साइड इफेक्ट

ग्वालियर मध्य प्रदेश : ऑनलाइन गेम का एडिक्शन किस तरह आज के युवाओं पर हावी है और कई नाबालिग बच्चे भी किस तरह इसका शिकार हो के अपराध के रास्ते पर चल पड़े हैं। इसके तमाम मामले कहीं न कहीं से सामने आते रहते हैं और ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला अब ग्वालियर से सामने आया है। जहां एक नाबालिग बालक ने पहले तो ऑनलाइन गेमिंग की लत के चलते लाखों रुपये गंवा दिए और फिर जब कर्ज में डूब गया तो कर्ज चुकाने के लिए खुद के ही अपहरण की साजिश रच डाली।हैरान करने वाली बात यह है कि यह नाबालिग बालक एक पुलिसकर्मी का बेटा है।

ऑनलाइन गेमिंग ने किशोर उम्र के बच्चों को जुए की ऐसी लत लगाई है कि वह अनजाने में ही लाखों के कर्जदार बन गए हैं और अपने इस कर्ज को उतारने के लिए वो टीवी और क्राइम पेट्रोल जैसे धारावाहिकों से सीख लेकर हीनियस क्राइम को गढ़ने में भी पीछे नहीं हट रहे हैं। माधौगंज थाना क्षेत्र में सामने आया है जहां पुलिस कर्मी के नाबालिग बेटे ने अपने ऊपर चढ़े आठ लाख के कर्ज को उतारने के लिए अपहरण का झूठा नाटक किया.पिता पुलिसकर्मी भिंड में पदस्थ हैं और जल्द ही रिटायर होने वाले हैं. किशोर को मालूम था कि पिता को रिटायरमेंट पर अच्छा खासा पैसा मिलने वाला है।

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नाबालिग के दिमाग में खुराफात सूझी और उसने अपने ही अपहरण का नाटक कर घर वालों को हैरत में डाल दिया. लेकिन वह नया खिलाड़ी था उसने जिस मोबाइल नंबर से अपने पिता को रैंसम कॉल करवाया था वह उसकी मां के नाम था।यही से पुलिस को शक हुआ बाद में अपनी बहन के घर यह लड़का पुलिस को दूसरे दिन सकुशल मिल गया। उसने बताया कि ब्रेजा कार में चार लोगों ने उसे अगवा किया था और उसकी मां की सिम से उसके घर वालों को फोन किया था लेकिन जब पुलिस ने मोबाइल के आईईएमआई नंबर से इस बात की तस्दीक की तो बात झूठी निकली. इसके बाद किशोर ने जहां बदमाशों द्वारा उसे घुमाए जाना बताया था वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में भी कोई ऐसी संदिग्ध गतिविधि नजर नहीं आई. कड़ाई से पूछताछ की गई तब उसने बताया कि वह ऑनलाइन गेमिंग में लाखों रुपए हार चुका था इससे उबरने के लिए उसने अपने अपहरण का नाटक रचा था।

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पूरी खबर का वीडियो यहाँ देखिए..

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नंबर वन स्मार्ट सिटी इंदौर में दूषित पानी से 8 की मौत, विकास की खाल में विनाश उजागर

इंदौर मध्य प्रदेश: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में टंकी से सप्लाई किए जाने वाले पानी के पीने से आठ लोगों की मौत हो गई। यह कोई छोटी घटना नहीं है क्योंकि यह कोई गांव नहीं है यह कोई पिछड़ा शहर नहीं है। बल्कि यह घटना देश के नंबर वन स्वच्छतम शहर स्मार्ट सिटी इंदौर की है और इसी स्मार्ट को वाटर प्लस का तमगा भी हासिल है। वाटर प्लस का मतलब अपशिष्ट जल प्रबंधन श्रेष्ठ श्रेणी का है। इस सबके बावजूद भागीरथ पूरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से नागरिक गंदा पानी सप्लाई होने की शिकायत कर रहे थे। सोमवार को हालात इतने बिगड़ गए पानी में दूषित तत्व इतने बढ़ गए कि सैकड़ों लोगों को उल्टी दस्त डायरिया होने के चलते अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।कई लोगों की हालत गंभीर हो गई और आठ लोगों की मौत हो गई और हमेशा की तरह आम जन की मौत पर प्रशासन ने जागने का काम शुरू कर दिया।

माँ अमला ऐसे ही खबरों की सुर्खियां बना प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दे डाले। कलेक्टर शिवम वर्मा ने तुरंत कार्यवाही के मरहम से मामले को शांत करने के लिए 3 अधिकारियों पर कार्रवाई कर दी जिसमें शालिग्राम शीतोले जोनल अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। योगेश जोशी सहायक यंत्री को निलंबित कर दिया गया और उपयंत्री शुभम श्रीवास्तव की तो सेवाएं ही समाप्त कर दी गई। यकीन यह सब हुआ सैकड़ों लोगों के बीमार होने के बाद आठ लोगों की मौत के बाद लेकिन क्या इन दोषियों पर इन मौतों के चलते कोई एफआईआर दर्ज हुई इस बारे में किसी जिम्मेदार के पास कोई जवाब नहीं है जबकि होना तो यह चाहिए कि जो लोग मंच पर खड़े होकर नंबर वन स्मार्ट सिटी का तमगा।लेते हुए ठहाके मारते हैं चाहे वह निगम आयुक्त हो चाहे वह स्मार्ट सिटी सीईओ हो चाहे इंदौर के महापौर हो इन सब पर भी कार्यवाही होनी चाहिए क्योंकि जवाबदेही तो इनकी भी बनती है जो कागजों पर प्रफुल्लित होती स्मार्ट।सिटी को देखते रहे जिसमें शहर के आम नागरिक स्वच्छ जल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी मोहताज हैं।

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भागीरथपुरा क्षेत्र का मंजर ऐसा था जैसे कोई महामारी फैल गई हो। और जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम हमेशा की तरह वही था कि आम मरे तो मरे हम तो किसी माननीय के चप्पल चाट कर कुर्सी पर बैठने वाले लोग हैं हमारा कोई क्या उखाड़ लेगा। क्योंकि दूषित पानी के बाद पिछले कई दिनों से लोग बीमार हो रहे थे पहली मौत 26 दिसंबर को हो चुकी थी। इसके बाद भी अधिकारी लापरवाह रहे।सोमवार को जब सैकड़ों लोग डायरिया का शिकार हुए और चौंतीस की हालत तो इतनी बिगड़ गई कि वह अस्पताल में भर्ती हो गए। इसके बाद कहीं जाकर जिम्मेदारों के बीच खलबली मची। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भागीरथपुरा क्षेत्र में सर्वे किया तो पता चला कि लगभग सभी घरों में उल्टी दस्त के मरीज हैं। निगम ने दूषित पानी की वजह जानने के लिए क्षेत्र की वॉटर सप्लाई लाइन की जांच की तो पता चला कि जिस मुख्य लाइन में पूरे भागीरथपुरा में पानी वितरित होता है उसी के ऊपर सार्वजनिक शौचालय बना हुआ है। मुख्य लाइन फूटने की वजह से देने सीधे उसमें मिलकर नागरिकों के घर तक पहुंच रहा था और इसी वजह से लोग बीमार हो रहे थे। 

नगर निगम के सर्वे में सामने आई यह खामी साहब बता रही हैं कि नंबर वन स्मार्ट सिटी में भी किस तरह की बद इंतजामी हैं जहां वाटर सप्लाई लाइन के ऊपर ही सार्वजनिक शौचालय बना दिया गया और वाटर सप्लाई लाइन लीक होती रही हो।इतने दिनों के लीख में उसे सुधारने के लिए भी जिम्मेदारों के पास व्यवस्था नहीं थी। यह वही जिम्मेदार हैं जिन्होंने स्मार्ट सिटी की फाइलों में कागजों के घोड़े दौड़ाए होंगे। पानी की सप्लाई के बेहतरीन इंतजामात के कसीदे लिख दिए होंगे। लेकिन हकीकत में भागीरथपुरा की वाटर सप्लाई लाइन लोगों को मौत पिला रही थी। सवाल यह भी उठ रहा है कि पूरे इंदौर में ऐसे कितने भागीरथपुरा क्षेत्र के वॉटर लीकेज होंगे और इसे कितने स्थान होंगे जहां से दूषित पानी लोगों के घर तक पहुंच रहा होगा लेकिन इस बारे में जिम्मेदारों के पास कोई आंकड़ा नहीं है। 

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इतना बड़ा मामला हुआ है तो उस पर अब राजनीति भी होगी। कांग्रेस इसे मुद्दा भी बनाएगी और मुद्दा क्यों न बनाए? क्योंकि इस पूरे मामले में हम आपको एक चौंकाने वाला खुलासा कर देते हैं भागीरथपुरा वह क्षेत्र है जिसका एक बड़ा हिस्सा कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र में आता है और कैलाश विजयवर्गीय वर्तमान में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री हैं और उनके नगरीय विकास मंत्री रहते हुए इंदौर का कैसा विकास हुआ है यह घटना चीख चीख कर उसके सबूत दे रही है। डबल और ट्रिपल इंजन की हामी भरने वाली सरकार किस तरह बद इंतजामी पर मंच से ठहाके मारती है और उनके चेले नीचे बैठे ताली पीटते हैं और स्मार्ट सिटी के नाम पर ऐसे शहर बना दिए जाते हैं जिसमें जनता को शुद्ध पानी तक पीने को न मिले। यह एक घटना केवल इंदौर तक सीमित नहीं है। यह सवाल खड़े कर रही हैं उन समस्त सौ स्मार्ट सिटी के व्यवस्था पर कि स्मार्ट सिटी के नाम पर अरमुखर्व रुपया भ्रष्टाचारियों की जेब में पहुंचा दिया गया है और इन शहरों के नागरिक आज भी मूलभूत सुविधाओं के नाम पर दूषित पेयजल पीने को मजबूर हैं। भागीरथपुरा तो शुरुआत हो सकता है कि अगला नंबर आपके शहर का हो….

मोदी की मेट्रो इस शहर में साइकिल से स्लो, धमाल से ज्यादा मजेदार कॉमेडी

भोपाल मध्य प्रदेश: भोपाल में अभी हाल ही में शुरू की गई मेट्रो साइकल से भी स्लो चलती है।जी हां साइकिल से भी स्लो और इतनी स्लो की थोड़ा बहुत नहीं दुगने और तिगुने समय का अंतर है। और यह हम कह रहे हैं दैनिक भास्कर डिजिटल की उस खबर के अनुसार जिसमें उन्होंने रियलिटी चेक किया है। उनके एक रिपोर्टर ने मेट्रो में बैठकर और दूसरे ने साइकिल पर बैठकर दो किलोमीटर की दूरी मेट्रो से तय की तो उसमें सात मिनट लगे जबकि साइकिल से वही दूरी तीन मिनट में पूरी कर ली गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी हाल ही में इसी साल बीस दिसंबर को वर्चुअली भोपाल मेट्रो के पहले चरण (ऑरेंज लाइन के सुभाष नगर से AIIMS तक के खंड) का उद्घाटन किया, जिसके बाद 21 दिसंबर 2025 से यात्रियों के लिए वाणिज्यिक सेवाएं शुरू हुईं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी इस मौके पर मौजूद रहकर मेट्रो को हरी झंडी दिखाई थी। 

भोपाल मेट्रो की फुल स्पीड 90Km प्रतिघंटा तक है। जब ट्रायल हुए, तब इसी रफ्तार से मेट्रो ट्रैक पर दौड़ाई गई थी, लेकिन वर्तमान में यह 20 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से ही चल रही है। इसकी मुख्य वजह कम दूरी पर मेट्रो स्टेशन बनाए जाना है। ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाषनगर से एम्स तक कुल 8 में से एक भी स्टेशन ऐसा नहीं है, जिसकी दूरी 1 किमी भी हो। ऐसे में मेट्रो की स्पीड ही नहीं बढ़ पाती। अब सवाल यह उठता है कि यदि स्टेशन के बीच की दूरी ही इसका कारण है तो फिर इसका समाधान क्या है और यदि यही तकनीकी कारण है तो फिर मेट्रो बनाये जाने से पहले इस पर समाधान क्यों नहीं किया गया और यदि इसका समाधान हो ही नहीं सकता तो फिर मेट्रो का शहर के नागरिकों को फायदा ही क्या? 

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सुबह 10.50 बजे सुभाषनगर स्टेशन से सुबह 10.55 बजे मेट्रो की शुरुआत का शेड्यूल है, जो 11.02 बजे डीबी मॉल स्टेशन पहुंचती है। इसलिए भास्कर की एक टीम सुबह 10.50 बजे डीबी मॉल स्टेशन पर पहुंच गई। टिकट काउंटर पर पहुंचे और 2 टिकट लिए। फिर उस हिस्से में पहुंचे, जहां से मेट्रो में सफर शुरू होता है। ठीक 11.02 बजे मेट्रो स्टेशन पर पहुंच गई। मेट्रो चली और अगला स्टेशन एमपी नगर आया, जिसे 1 किमी की दूरी तय करने में 4 मिनट लगे। इसके बाद अगला स्टेशन रानी कमलापति आया। जहां ठीक 11.09 बजे मेट्रो रुकी। 2 किमी का सफर 7 मिनट में पूरा हुआ, जबकि टिकट लेने से लेकर सफर तक में 19 मिनट बीत चुके थे। अब रानी कमलापति स्टेशन से बाहर निकलने की बारी थी। चूंकि, ज्यादा भीड़ नहीं थी। इसलिए 3 मिनट में बाहर निकल गए। इस तरह मेट्रो में सफर, स्टेशन आने-जाने में कुल 22 मिनट का वक्त लग गया।

दैनिक भास्कर ने टाइमलाइन के साथ पूरा मेट्रो और साइकिल द्वारा तय की गई पूरी यात्रा का वर्णन किया और बाकायदा इसकी वीडियोग्राफी भी की है। दिल्ली मेट्रो इस बात के लिए जानी जाती है कि वह कम समय में और किफायती दामों पर आपको यात्रा सुविधा उपलब्ध कराती है। यही वजह है कि दिल्ली के आम और खास इस समय मेट्रो का उपयोग करते हैं। लेकिन इसके विपरीत आप भोपाल मेट्रो में आइए स्लो गति से घूमने का आनंद लीजिए।यदि घूमने के लिए आए हैं तो ही इसमें बैठिए।लेकिन यदि आपको कम समय में कहीं पहुंचना है तो बेहतर है कि साइकिल ले लीजिए और कम समय में अपनी मंजिल पर पहुँचिए। 

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सीएम ऑफिस कर्मचारी बनकर डिप्टी कलेक्टर से तीन लाख की ठगी

ग्वालियर मध्य प्रदेश: जब भी कोई ठगी का शिकार शिकायत करने थाने पहुंचता है और थाने में पुलिसकर्मियों द्वारा उससे कहा जाता है कि क्या पढ़े लिखे नहीं हो?कैसे बातों में आ गए तो ऐसे आम ठगे हुए पीड़ित देख लें कि अब ठगी का शिकार सरकारी पदों पर रहने वाले बड़े बड़े शिक्षित अधिकारी भी होने लगे हैं। अभी कुछ दिन पहले हरियाणा के एक पूर्व आईजी का करोड़ों रुपए के ठगी का शिकार होने का मामला सुर्खियों में था जिसके बाद उन्होंने आत्महत्या तक कर ली थी।अब ग्वालियर में भी एक ऐसा ही ठगी का मामला सामने आ रहा है जहां एक एसडीएम को ठगी का शिकार बनाया गया है। हालांकि पीड़ित एसडीएम है इसके चलते तुरंत एफआईआर दर्ज करके कार्यवाही शुरू कर दी गई है।

मामला ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र का है जहां डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर रहते हैं। उनका कहना है कि एक ठग ने खुद को मुख्यमंत्री कार्यालय का कर्मचारी बताया और उनके ऊपर चल रही विभागीय जांच में सजा कम कराने का झांसा देकर उनसे अपने खातों में समय समय पर रकम लेते हुए कुल दो लाख पंचानबे हजार रुपए ठग लिए। आपको बता दें कि डिप्टी कलेक्टर अरविंद सिंह माहौर कुछ महीने पहले पूरे देश में सुर्खियों में थे क्योंकि यह एक मां बेटी को फोन पर धमका रहे थे जिसका वीडियो वायरल हुआ था और उसके बाद इन्हें निलंबित करके इन पर विभागीय जांच बिठा दी गई थी। और उसी मामले को रफा दफा करने की लालच में डिप्टी कलेक्टर साहब अब ठगों का शिकार बन गए।

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पूरे मामले में डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर का कहना है कि कुछ दिन पूर्व एक अनजान नंबर से उनके पास कॉल आया था जो उन्होंने रिसीव नहीं किया था और इसके बाद उनके कलेक्टर ने उन्हें कहा कि सीएम पोर्टल से उनके पास फ़ोन आ रहा है तो वह फ़ोन रिसीव क्यों नहीं कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने फ़ोन रिसीव किया जिस पर ट्रूकॉलर पर सीएम पोर्टल लिखा हुआ था।कॉल करने वाले ने खुद को सीएम ऑफिस का कर्मचारी बताया और विभागीय जांच की कार्रवाई में सजा कम करवाने का भरोसा दिलाया लेकिन इसके साथ इस काम के लिए पैसे की भी मांग की। डिप्टी कलेक्टर साहब तो मामले में फंसे ही हुए थे और उन्हें भी मामले को रफा दफा करके पाक साफ होने का लालच था। इसी लालच के चलते वह ठग के झांसे में आ गए। 

डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर का कहना है कि उन्नीस सितंबर से एक अक्टूबर के बीच उन्होंने इस ठग के खातों में कुल दो लाख 95 हजार रुपये जमा किए। इसके बाद भी यह ठग लगातार पैसों की मांग करता रहा।तब अरविंद माहौर को शक हुआ कि कहीं यह व्यक्ति उन्हें बेवकूफ तो नहीं बना रहा। यह देखते हुए उन्होंने अभी हाल ही में डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई ई एफआईआर माध्यम का उपयोग किया और एफआईआर दर्ज करा दी और अभी हाल ही में यह एफआईआर थाटीपुर थाने में कायमी के लिए पहुंची है। और जब डिप्टी कलेक्टर साहब थाने में एफआईआर पर हस्ताक्षर करने पहुंचे। तब इस मामले का खुलासा हुआ कि विभागीय जांच को रफा दफा करने की लालच में डिप्टी कलेक्टर साहब ठगी का शिकार हो चुके हैं। 

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चिकन फिश विवाद में थाने में दो पक्षों में घमासान; पुलिसिया गुंडई पड़ी भारी टीआई सहित पांच लाइन अटैच

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर के गोले का मंदिर क्षेत्र में नॉनवेज में चिकन और फिश बदल जाने को लेकर ग्राहक और दुकानदार में विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्ष थाने पहुंच गए और थाने पहुंचे तो मामला और गरमा गया।ग्राहक पक्ष के तरफ से आए हुए वकीलों ने जब कानून का पाठ पढ़ाने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें भी पुलिसिया डंडे से सबक दे दिया। चिकन और फिश का यह विवाद इतना बढ़ गया कि घंटों तक थाने में घमासान होता रहा। दोनों में से कोई पक्ष झुकने को तैयार नहीं था और ग्राहक ने तो पुलिस पे भी दुकानदार के पक्ष में होने का आरोप तक लगा दिया। ग्राहक पक्ष में वकील थे और जब पूरा बार असोसिएशन थाने पहुंच गया तो पुलिस के आला अधिकारियों को कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी सहित पांच पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच करना पड़ा।

घटना के दौरान थाने पहुंचे सत्यम भदौरिया ने मीडिया को बताया कि वह सोनू चौहान की दुकान पर मछली खाने गए थे। उन्होंने मछली का ऑर्डर दिया था लेकिन दुकानदार ने जबरदस्ती चिकन परोस दिया और बदल भी नहीं रहा था। इसके बाद दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया।जब सत्यम भदौरिया और उनके भाई जो पेशे से वकील हैं थाने पहुंचे तो थाने में दूसरा पक्ष भी पहुंच गया। थाने के अंदर भी दोनों पक्षों में जमकर घमासान हुआ और पुलिस ने भी कोई कमी कानून अपने हाथ में लेने में नहीं छोड़ी। ग्राहक पक्ष के लोगों को एक कमरे में बंद करके उनकी जमकर कुटाई कर दीवालों में वकील भी था इसलिए कुछ समय बाद ही उसकी सूचना पर बार असोसिएशन भी थाने पहुंच गया। 9 बजे शुरू हुआ विवाद रात के तीन बजे तक चलता रहा। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन पाठक ने द इंगलेज पोस्ट को बताया कि एसएसपी धर्मबीर सिंह ने थाना प्रभारी गोले का मंदिर हरेंद्र शर्मा सहित पांच लोगों को लाइन अटैच कर दिया है लेकिन हमारी मांग पांचों पर एफआईआर किए जाने की है।

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इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि जब दो पक्षों में विवाद के बाद पक्ष थाने पहुंचे थे तो पुलिस को सूझबूझ अपनाते हुए कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करनी थी। लेकिन पुलिस ने दुकानदार का पक्ष लेने का प्रयास किया जिसके चलते ग्राहक पक्ष आक्रोशित हो गया और उनके साथ में वकील होने की वजह से भी वह अपने हक और कानून का पाठ पुलिस थाने को पढ़ाने लगे। ऐसा बताया जा रहा है कि पुलिस को वकीलों द्वारा कानून की सीख दिया जाना नागवार गुजरा जिसके चलते कुछ पुलिसकर्मियों ने आपा खो दिया। इस पूरे मामले में गंभीर बात यह रही कि थाने में टीआई हरेंद्र शर्मा भी मौजूद थे। उनकी मौजूदगी में भी थाने में यह हालात बने रहे और इसे हल करने की बजाय वह भी मारपीट में शामिल हो गए। 

एक दुकान पर मछली से मुर्गा बदलने का यह विवाद इतना बढ़ गया कि कई लोगों को मारपीट का शिकार होना पड़ा। दोनों पक्षों में कई लोगों को चोट आई और पुलिस ने स्थिति को सुधारने के बजाय और बिगाड़ दिया और अंत में पांच पुलिसकर्मियों को भी लाइन अटैच होना पड़ा। पवन पाठक का कहना है कि पुलिस की बर्बरता लगातार बढ़ती जा रही है और यदि वकील के साथ इस तरह व्यवहार पुलिस करती है तो इन थानों में आम आदमी के साथ क्या होता होगा साथ ही उन्होंने थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया। पवन पाठक का साफ कहना है कि वकीलों के साथ यह दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इन पुलिसकर्मियों पर एफआईआर की मांग की गई है। आला अधिकारियों ने दो दिन का समय मांगा है। यदि दो दिन में एफआईआर नहीं होती तो बार आगे की कार्रवाई के लिए विचार करेगा। 

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कैलाश खैर पर लगे भीड़ को भड़काने के आरोप! ग्वालियर को बदनाम कर माल लेकर चलता बना!

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर गौरव दिवस पर यदि कोई ग्वालियर की गरिमा को तार तार कर दे तो उसे क्या सजा मिलनी चाहिए? यदि ग्वालियर गौरव दिवस पर एक व्यक्ति को गौरव बढ़ाने के लिए बुलाया जाए और वो स्वयं ही अपनी हरकतें करने के बाद ग्वालियर को बदनाम कर जाए तो ऐसे शख्स को क्या सजा मिलनी चाहिएह यदि शख्स कोई आम व्यक्ति होता तो शायद तमाम तरह की सजाओं की लंबी फेहरिस्त लगा दी जाती। लेकिन यहाँ इस मामले में ग्वालियर को बदनाम करने वाला क्या ए खास व्यक्ति है एक प्रसिद्ध गवइया है। नाम है कैलाश खेर जो सूफी गायकी के लिए प्रख्यात है।

प्रदेश में इस समय चर्चा है कि कैलाश खैर को ग्वालियर में अच्छे श्रोता नहीं मिले। श्रोताओं से निराशा मिली। हर कोई श्रोताओं को ग्वालियर के नागरिकों को कोसता नजर आ रहा है लेकिन पूरे मामले की हकीकत कुछ और है और राष्ट्रीय मीडिया पर जो कुछ चल रहा है वह हकीकत से कहीं परे नजर आ रहा है। जो विजुअल वायरल हो रहे हैं उससे पूर्व के विजुअल भी देखे जाने चाहिए। वायरल में दिखाई दे रहा है कि श्रोतागण बैरिकेट को लाते हुए मंच के पास पहुंच रहे हैं और जब वे मंच के बहुत नजदीक पहुंच जाते हैं तो कैलाश खैर उन्हें गरियाता हुआ और जानवर गिरी तक के शब्द प्रयोग करता हुआ नजर आ रहा है। और यही वीडियो पूरे देश में वायरल है और ग्वालियर को बदनाम कर रहा है और यकीन मानिए इस बदनामी का दंश ग्वालियर बहुत लंबे समय तक भुगतने वाला है।

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पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म दिवस ग्वालियर गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि अटल जी ने पूरे देश में ही नहीं पूरे विश्व में ग्वालियर को गौरवान्वित किया है। इसी गौरव दिवस का मान बढ़ाने के लिए सूफी गायक कैलाश खैर को मोटी रकम देकर बुलाया गया था। इसी दौरान कैलाश खेर ने मंच की श्रोताओं से दूरी ज्यादा होने की बात कर दी और श्रोताओं के मंच के नजदीक होने की अपील कर दी। यदि मंच से श्रोताओं की दूरी ज्यादा थी तो यह बात कैलाश।खैर को कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही व्यवस्थापकों को बतानी चाहिए थी। और व्यवस्था को बदलना चाहिए था लेकिन कार्यक्रम शुरू होने के बाद बीच कार्यक्रम में उन्होंने जिस तरह से यह बात कही यह एक तरह का भड़काऊ बयान है और उनके इस भड़काऊ बयान के बाद गंभीर हादसा हो सकता था।

ग्वालियर के सुसंस्कृत श्रोतागण शांति से गायकी का आनंद ले रहे थे। वे बहुत उम्मीद के साथ कड़कती ठंड में मेला ग्राउंड के उस स्थल पर पहुँचे थे जहाँ वह स्वर लहरियां उठने वाली थीं जो ग्वालियर का सम्मान बढ़ाने के लिए गीत गाती लेकिन जो मुख ग्वालियर का गौरव बढ़ाने के लिए ग्वालियर में बुलाया गया था वह ग्वालियर को गरियाते हुए नजर आया। जिस तरह से उन्होंने भीड़ को उकसाया भीड़ मंच की तरफ भागी उस दौरान बैरिकेट्स गिर सकते थे अफरा तफरी मच सकती थी भगदड़ मच सकती थी। तमाम पुरानी भगदड़ की घटनाओं से साल 2025 भरा पड़ा है और ग्वालियर में भी उसी तरह की घटना हो सकती थी और इसकी एकमात्र वजह होती कैलाश। खैर का वह भड़काऊ बयान जिसने श्रोताओं को आंदोलित कर दिया मंच की ओर भागने के लिए। क्या इस मामले में इस संभावना को देखते हुए कैलाश खेर पर मामला दर्ज नहीं होना चाहिए?

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कैलाश खेर ने पहले तो खुद ही आह्वान करके श्रोताओं को मंच के पास बुलाया और जब अधिक संख्या में भीड़ वहां पहुंच गई तो मंच से अनर्गल बयानबाजी की। हालांकि कुछ समय के लिए गाना बजाना रुका रहा और श्रोता भी अपना संयम अपनाते हुए पीछे लौट गए और शो फिर से शुरू हो गया। श्रोताओं ने न तो किसी तरह से किसी इंस्ट्रूमेंट से कोई छेड़छाड़ की न ही कोई तोड़फोड़ की न ही कैलाश खेर उनके टीम के किसी व्यक्ति के साथ कोई अभद्रता की। फिर भी ग्वालियर के श्रोताओं पर जानवर गिरी होने के साथ साथ तमाम तरह के आरोप आज राष्ट्रीय मीडिया में लग रहे हैं। यदि इस तरह से संगीत प्रेमियों को अपशब्द कहे जाएंगे तो क्या वह आने वाले समय में इन गवइयों के गाने सुनने जाएँगे? सवाल यह भी उठ रहा है कि जब कैलाश खेर के कार्यक्रम में ग्वालियर के नागरिकों की इस तरह बदनामी हो रही है। ग्वालियर को बदनाम किया जा रहा है तो क्या बड़े कलाकार ग्वालियर में प्रस्तुति देने आएंगे? यह तो कैलाश खैर से पूछिए कि क्या उनको फिर से मोटी रकम मिलेगी तो क्या वह फिर से ग्वालियर में आएंगे और जवाब आप जानते ही होंगे….

सवर्ण बनाम दलित विवाद बढ़ता देख प्रशासन हुआ सतर्क! लगाई धारा 163

ग्वालियर मध्य प्रदेश: लंबे समय से ग्वालियर में सवर्ण और दलितों के बीच में टकराव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन के आधे अधूरे प्रयासों के चलते यह टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।अभी हाल ही में शिवपुरी में मंच से एक दलित नेता ने मनुस्मति जला दी और तमाम शब्द कहे और इसके बाद ग्वालियर में भी डॉ अंबेडकर की फोटो को जलाने की घटना हुई। शुक्रवार को भी दोपहर में एक युवा वकील ने अंबेडकर के पुतले को आकाशवाणी चौराहे पर जलाने का प्रयास किया और उसी समय दलित नेता भी वहां पहुंच गए। दलित और सवर्ण नेताओं के बीच टकराव की स्थिति बनी।हालांकि भारी पुलिस बल मौके पर समय रहते पहुंच गया था और हालात को संभाल लिया। स्थिति को संभालने के लिए अब जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाग्या जारी कर दी है। 

ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने धारा 163 का आदेश जारी किया है जिसके अंतर्गत ग्वालियर जिले की सीमा में सार्वजनिक स्थल पर धरना प्रदर्शन रैली जुलूस चल समारोह आदि आयोजित नहीं किए जा सकेंगे और ऐसा करने से पूर्व सक्षम अधिकारी के समक्ष अनुमति के लिए आवेदन करना होगा और अनुमति मिलने की स्थिति में ही आप ऐसा कोई आयोजन कर सकेंगे। किसी भी धर्म संप्रदाय जाति अथवा समूह की भावनाओं को आहत करने वाले ऐसे कृत्यों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है जो कानून व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव डाल सकते हैं। धारा एक सौ तिरेसठ के तहत लगी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दंडनीय कार्रवाई की जाएगी।

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हालांकि ऐसा बताया जा रहा है कि ग्वालियर कलेक्टर ने यह आदेश आगामी नववर्ष गणतंत्र दिवस व अन्य धार्मिक सामाजिक व राजनीतिक कार्यक्रमों को ध्यान में रखकर शहर में शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया है। किसी अनुभाग में सार्वजनिक कार्यक्रम से पहले उस अनुविभाग के अधिकारी से अनुमति लेनी होगी और यदि कार्यक्रम अनुविभाग की सीमाओं से जुड़ा हुआ है तो फिर अपर जिला दंडाधिकारी से अनुमति प्राप्त करनी होगी तभी आप ऐसा कार्यक्रम कर सकेंगे। निषेधाज्ञा धारा एक सौ तिरेसठ का आदेश जारी करने के पीछे प्रशासन की मंशा शहर में शांति और सौहार्द बनाए रखने की है। 

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