ग्वालियर मध्य प्रदेश: अभी हाल ही में मध्यप्रदेश की डॉ मोहन यादव सरकार ने दो वर्ष पूर्ण किए हैं और दो वर्ष पूर्ण करने पर जगह जगह जाकर सरकार की उपलब्धियां भुनाने जी हां गिनाने नहीं भुनाने की जिम्मेदारी अलग अलग मंत्रियों को सौंपी गई है और ग्वालियर में यह जिम्मेदारी यहां के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट को दी गई जो सिंधिया समर्थक हैं और ज्यादातर ज्योतिरादित्य सिंधिया के ग्वालियर आगमन पर ही नजर आते हैं। लेकिन इस बार उन पर दोहरी जिम्मेदारी थी ज्योतिरादि सिंधिया के नेतृत्व में समीक्षा बैठक की भी व्यवस्था देखनी थी और अगले ही दिन प्रदेश की डॉ मोहन यादव सरकार की उपलब्धियां भी पत्रकारों को गिनानी थी। और उपलब्धियां गिनाने के साथ साथ सपने दिखाने का काम भी तुलसी सिलावट ने कर दिया।
जब वह प्रदेश सरकार की उपलब्धियां गिना रहे थे तो कुछ पत्रकारों ने ग्वालियर के विकास के बारे में पूछ लिया। पत्रकारों का कहना था कि इंदौर भोपाल में तो मेट्रो तक चलने लगी लेकिन ग्वालियर में सड़कों के बदहाल हालत किसी से छुपी नहीं है। इस पर तुलसी सिलावट मंच से यह कहते हुए नजर आए कि इंदौर भोपाल के बाद ग्वालियर में भी मेट्रो चलेगी लेकिन कब चलेगी कैसे चलेगी?सरकार की इसकी क्या योजना है? क्या कोई डीपीआर तैयार हुई है इस पर उन्होंने कोई ज्यादा बात नहीं की। साफ नजर आ रहा था कि सरकार की उपलब्धियां गिनाते गिनाते उपलब्धियों में मंत्री जीत न खो गए कि वह डे ड्रीमिंग करने लगे और डे ड्रीमिंग ही पत्रकारों को बताने लगे।
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ग्वालियर के वर्तमान हालात देखकर मेट्रो की सुविधा यहां एक दूर की कौड़ी नजर आती है क्योंकि हालात यह है कि यहां की सड़कें बद से बदतर हैं जहां लोग अपने निजी वाहन भी बड़ी मुश्किल से चला पाते हैं और दूसरा ग्वालियर के तमाम बड़े शहरों में ग्वालियर ही एकमात्र ऐसा शहर है जो सालों से सिटी बस के लिए तरस रहा है। यहाँ समय समय पर सिटी बस के संचालन की तमाम कवायद की गई हैं लेकिन एक भी हकीकत में यहां के नागरिकों को सिटी ट्रांसपोर्टेशन के नाम पर सिटी बस मुहैया नहीं करा पाई। हालात ये हैं कि शहर में हर दो सौ पाँच सौ मीटर की दूरी पर आपको सिटी बस स्टॉप नजर आता है लेकिन दूर दूर तक कहीं सिटी बसें नजर नहीं आती और यदि कुछ नजर आता है तो केवल फाइलों में सिटी बस की धूल फांकती योजनाएं और मंच से नेताओं की बड़ी बड़ी बातें।
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