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1600 कुत्तों को जहरीला इंजेक्शन देकर मारा, मामला सुनकर हर कोई हैरान

डिजिटल डेस्क हैदराबाद: आंध्र प्रदेश के जिन गांवों में कुत्ते दिन रात भौंक भोगकर लोगों को परेशान करते थे और साथ ही उनको चेतावनी भी देते थे उन गांव में अब एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है कि इन कुत्तों को जेहर देकर मार दिया गया है। आंध्र प्रदेश के छह जिलों के बारह से ज़्यादा गांव पूरी तरह से कुत्ताविहीन हो चुके हैं क्योंकि यहां पर अब तक सोलह सौ कुत्तों को मारे जाने का दावा किया जा रहा है। शुरूआत में एक हाथ गांव से इस तरह की घटना आई थी और मारे गए कुत्तों की संख्या कम थी लेकिन अब लगातार इस तरह के मामले बढ़ रहे हैं और कुत्तों से मुक्ति पाने के लिए कई गांवों में कुत्तों को मार दिया गया है।

आपको बता दें कि इस समय पूरे देश में ही कुत्तों के काटने से होने वाली घटनाओं को लेकर बहस छिड़ी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी मध्यस्थता कर के काटने के मामलों पर गंभीर टिप्पणी करते हुए निर्देशित किया है। कई जगह पर कुत्तों को रेबीज मुक्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं तो कई जगह कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाए जा रहे हैं जिससे कि आवारा कुत्तों से आम जन को सुरक्षित रखा जा सके। इन सभी के बीच हैदराबाद के इन जिलों में कुत्तों से सुरक्षा के लिए कुत्तों को ही मार देने का जो तरीका अपनाया गया है वह हैरान करने वाला है और इसकी चर्चा हर तरफ हो रही है।

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गाँव में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ रही थीं। इसे देखते हुए सरपंच चुनाव में यह मुद्दा बड़े रूप में उठने लगा और कई जनप्रतिनिधियों ने कुत्ता मुक्त गाँव बनाने का वादा तक अपने मतदाताओं को कर दिया और ऐसा वादा करने के बाद कई गाँव पूरी तरह से कुत्ताविहीन हो गए। वहाँ एक भी कुत्ता देखने को नहीं मिला और बाद में गाँव के बाहर ही सामूहिक क्रब मिली और यह देखा गया कि कुत्तों को मार कर वहाँ दफना दिया गया है। आंध्र प्रदेश में सरपंच चुनाव को देखते हुए कुत्ता मुक्त बनाने का जो यह तरीका अपनाया गया उसकी चर्चाएँ सब तरफ हो रही हैं।

क्रूरता निवारण सहायक स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के एक पदाधिकारी मुदावत प्रीति ने यह बताया कि जहरीले इंजेक्शन का दुरुपयोग इंसानों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है। पुलिस ने सभी कुत्तों के शव बरामद नहीं किए हैं जो बरामद किए हैं। वास्तविक संख्या से कम हैं इस संगठन ने राज्य सरकार से कुत्तों की हत्या के इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस घटना के बाद यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि नेता सरपंच का चुनाव जीतने के लिए कितने निर्दयी हो सकते हैं?

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कलेक्टरों की रिश्वतखोरी पर मंत्री जी की मुहर! अफसरशाही में भ्रष्टाचारी पर मंत्री जी का बयान चौंकाने वाला

भोपाल मध्य प्रदेश: आजकल मध्य प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा अपने बयानों को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। राजस्व मंत्री हैं। जिले में पटवारी से लेकर कलेक्टर तक राजस्व अधिकारी ही कहे जाते हैं और राजस्व अधिकारियों पर समय समय पर रिश्वतखोरी के आरोप लगते रहते हैं।लेकिन अब तो मंत्रीजी ने स्वयं मान लिया है कि उनके विभाग में रिश्वतखोरी चल रही है और छोटे मोटे अधिकारी नहीं।उन्होंने तो कलेक्टर के पैसे लेने की बात को भी स्वीकार लिया है। मंत्रीजी सरल सहज छवि के व्यक्ति हैं साफगोई से बात करते हैं लेकिन उनकी यह साफगोई शायद अब अफसरों को रास न आए।

राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा से जब कलेक्टरों के पैसे लेने वाले बयान पर प्रश्न किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि कहीं न कहीं थोड़ा बहुत तो हर जगह होता है लेकिन जो रिश्वत लेता है वह राष्ट्र दो ही है चाहे वह कोई भी हो मैं कहीं भी जाता हूँ गड़बड़ी पर कार्रवाई होती है कई बार कलेक्टर।पहले ही बोल देते हैं कि गलती सलती होगी तो ठीक कर लेंगे साहब। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा राजगढ़ में थे और मीडिया से रूबरू हो रहे थे और उस समय उन्होंने अफसरशाही में फैली रिश्वतखोरी को लेकर यह सनसनीखेज बयान दे डाला।

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राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने साफगोई से स्वीकार किया कि अफसरशाही में भ्रष्टाचार मौजूद हैं और इस पर सख्त कार्रवाई की जरूरत भी उन्होंने बताई। उनका साफ कहना है कि बेईमानी किसी पद से नहीं जुड़ी होती बल्कि व्यक्ति की आदत बन जाती है। चाहे किसी को मंत्री बना दिया जाए तहसीलदार बना दिया जाए या मजदूरी करने भेज दिया जाए बेईमान व्यक्ति अपनी आदत नहीं बदलता। साथ में मंत्री जी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने कई तहसीलदारों को निलंबित किया है क्योंकि उनके सामने इन तहसीलदारों की गंभीर शिकायतें आई थीं। 

राजस्व मंत्री ने आगे अपने ही विभाग के समस्त राजस्व अधिकारियों को कटघरे में कड़ा किया। उन्होंने कलेक्टर तक को नसीहत दे डाली। उनका कहना है कि कुछ कलेक्टर यह कहकर जिम्मेदारी टाल देते हैं कि थोड़ी बहुत गलती सुधार दी जाएगी लेकिन वे इस सोच के पक्ष में नहीं हैं। मंत्री जी ने अफसरों से ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति के साथ काम करने की अपील की है। खुद को उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि सादगी से जीवन जीते हैं और निजी लाभ लेने की सोच कभी नहीं रखते। मंत्री जी निश्चित ही सादगी जीते हैं लेकिन मंत्री जी के आसपास रहने वाले लोग भी।क्या इसी सादगी और ईमानदारी से अपना जीवन बिता रहे हैं और क्या मंत्रीजी ने जो नसीहत अपने राजस्व अधिकारियों को दी है उस पर कोई अधिकारी अमल करेगा? यह सवाल हमेशा उत्तर ढूंढता रहेगा…..

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माधव के मेला पर मोहन की वक्र दृष्टि, चमकता उज्जैन, उजड़ता ग्वालियर मेला

ग्वालियर व्यापार मेला जिसका पूरा नाम श्रीमंत कैलाशवासी माधवराव सिंधिया व्यापार मेला है। नाम यह इसलिए है क्योंकि यह मेला सिंधिया परिवार द्वारा ही शुरू किया गया। माधव राव सिंधिया प्रथम जिन्हें माधव महाराज के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपने शासन काल में क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए और पशुओं के क्रय विक्रय के लिए एक पशु मेले के रूप में इसकी शुरुआत सौ से भी अधिक वर्ष पूर्व 1905 में की थी। तब से वर्ष दर वर्ष यह मेला अपनी भव्यता की ओर बढ़ने लगा। और इस मेले को राष्ट्रीय पहचान देने का कार्य किया कैलाश वासी श्रीमंत माधव राव सिंधिया ने। जिन्होंने अन्य राज्यों के व्यापारियों को भी यहां आकर व्यापार करने के लिए आमंत्रित किया और साथ ही ग्वालियर व्यापार मेला में ऑटोमोबाइल सेक्टर के क्षेत्र में एक क्रान्तिकारी कदम उठाते हुए यहां से बेचे जाने वाली सभी वाहनों पर रोड टैक्स में पचास प्रतिशत का छूट ग्राहकों को लाभ के रूप में देने की शुरुआत की। इसके साथ ही ग्वालियर व्यापार मेला ने एक इतिहास रच दिया और वह देश का एकमात्र ऐसा मेला बन गया जहां इस तरह का लाभ वाहन खरीदने पर ग्राहकों को मिलता रहा।

लेकिन दिग्विजय सिंह के शासन के अंत के साथ ही वर्ष दो हजार तीन से ग्वालियर मेले का संक्रमण काल भी शुरू हो गया। धीरे धीरे मेला सिकुड़ने लगा और मध्य प्रदेश में काबिज हुई भाजपा सरकार ने ग्वालियर मेला में वाहनों के क्रय विक्रय पर दी जाने वाली रोड टैक्स छूट को खत्म कर दिया।हर साल तमाम प्रयास किए गए लेकिन मध्यप्रदेश शासन ने इस मेले को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया मानो कि उनकी मंशा यही हो कि किसी भी तरीके से इस मेले को खत्म कर देना है इसका वैभव खत्म कर देना है। और यही कारण रहा कि जब तक भाजपा का शासन रहा तब तक ग्वालियर व्यापार मेला में यह छूट नहीं मिली और बीच में जैसे ही पन्द्रह महीने के लिए कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी इस मेले को वैभव दिलाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ग्वालियर मेला के उद्घाटन करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने यहां पचास पर्सेंट रोड टैक्स छूट वाहनों पर फिर से देने की घोषणा कर दी। और ग्वालियर व्यापार मेला ने फिर से नए कीर्तिमान स्थापित करना शुरू कर दिया। 

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इसके बाद मध्यप्रदेश में तख्ता पलट हुआ और भाजपा फिर से शासन में आ गई लेकिन इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया भी भाजपा में शामिल थे और जब आगे मेले का आयोजन हुआ तो ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयास से ग्वालियर मेला को हर साल रोड टैक्स में यह छूट फिर से मिलने लगी। पिछले विधानसभा चुनाव फिर से भाजपा के जीतने पर डॉ॰ मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया गया। डॉ मोहन यादव जब ग्वालियर मेला पहुंचे और उनको यह जानकारी मिली कि ग्वालियर मेला भव्य है उसकी एक ऐतिहासिक पहचान है और पूरे देश में उसे इस बात के लिए जाना जाता है कि वह एकमात्र ऐसा मेला है जहां वाहनों पर पचास पर्सेंट की रोड टैक्स छूट दी जाती है। तो उन्होंने ग्वालियर मेला को यह छूट दिए जाने के साथ साथ उज्जैन मेला को भी यह छूट देने की घोषणा कर दी। इस तरह उन्होंने जो पहचान ग्वालियर मेला की थी वही पहचान उज्जैन मेला को भी दिला दी। 

तभी से ऐसे कयास लगाए जाने लगे थे कि ग्वालियर व्यापार मेला जिसका पूरा नाम श्रीमंत कैलाशवासी माधव राव सिंधिया व्यापार मेला है को डॉक्टर मोहन यादव का ग्रहण लगने लगा और यह बात हर साल उस समय अब देखने को मिलती है जब ग्वालियर का मेला सज जाता है और ग्वालियर के ऑटोमोबाइल सेक्टर के व्यापारी वाहनों पर मिलने वाली रोड टैक्स छूट का इंतजार करते रहते हैं। आपको बता दें कि ग्वालियर का मेला बीस दिसंबर से शुरू होता है जबकि उसका उद्घाटन करते करते जनवरी आ जाती है। हालांकि इस वर्ष केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आगमन पर पच्चीस दिसंबर को ही मेले का उद्घाटन कर दिया गया था जबकि मेला की तैयारी अधूरी थी और वाहनों पर मिलने वाले टैक्स छूट की घोषणा भी नहीं हुई थी। 

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अभी हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट बैठक में ग्वालियर और उज्जैन मेला के लिए वाहनों पर रोड टैक्स के छूट की घोषणा एक साथ की गई है। लेकिन इस घोषणा में यह साफ नजर आ रहा है कि उज्जैन मेला आयोजित होने से पहले ही छूट की घोषणा से वहां सभी कार्य व्यवस्थित होंगे जबकि ग्वालियर व्यापार मेला में लगभग एक महीने तक व्यापारी संशय की स्थिति में रहे। यदि मेला उद्घाटन तिथि से भी लें जो 25 दिसंबर रही तो अब तक लगभग 19 दिन हो चुके हैं और इस घोषणा के बाद यह लागू भी दो दिन बाद होगी। इसका मतलब कि ग्वालियर मेला उद्घाटन के इक्कीस दिन बाद ग्वालियर में ऑटोमोबाइल विक्रेताओं को और इस क्षेत्र के ग्राहकों को वाहनों पर पचास पर्सेंट रोड टैक्स छूट का लाभ मिलेगा जबकि उज्जैन मेला में यह लाभ पहले दिन से ही मिलेगा। 

डॉ मोहन यादव ने पहले तो उज्जैन मेला को भी यह छूट देकर ग्वालियर मेला की जो एकमात्र पहचान थी उसे छील दिया और अब हर वर्ष उनकी कैबिनेट द्वारा यहां दी जाने वाली छूट में लेट लतीफी जिस तरह से की जाती है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि वह ग्वालियर मेला का महत्व कम करके उज्जैन मेला।का महत्व बढ़ाना चाहते हैं। ग्वालियर के व्यापारियों और यहां के नागरिकों को इस बात से कोई गुरेज नहीं होगा कि उज्जैन मेला भी आगे बढ़े लेकिन जिस तरह से ग्वालियर मेला पर सरकार की वक्र दृष्टि है और यहां का मेला घोषणाओं की लेट लतीफी से अपना वैभव खो रहा है।वह कहीं न कहीं एक चिंता का विषय है। ज्योतिरादित्य सिंधिया केन्द्र में मंत्री हैं और उनका अपना एक प्रभाव और दबाव है जिसके चलते देर से ही सही लेकिन ग्वालियर मेला के लिए रोड टैक्स छूट की घोषणा हो जाती है। अन्यथा तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश में भाजपा सरकार ने पहले जिस तरह से मेले को लगभग खत्म सा कर दिया था अभी भी शायद उनका यही प्रयास रहता है और डॉक्टर मोहन यादव जिस तरह से हर साल इस छूट में लेट लतीफी करते हैं। वह साफ बताता है कि मुख्यमंत्री का ध्यान ग्वालियर मेले को दरकिनार करते हुए उज्जैन मेले पर अधिक है। 

संपादक गजेंद्र इंगले द्वारा विशेष आलेख

गर्लफ्रेंड को ले गया होटल, सेक्स के बाद हत्या का हैरान करने वाला मामला

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: गाजियाबाद में एक प्रेमी ने होटल में प्रेमिका की हत्या कर दी। इसके बाद रातभर शव के पास बैठा रहा। इसके बाद सुबह जब वह कमरे से भागने की फिराक में था तो होटल स्टाफ ने रोक लिया और पुलिस को मामले की सूचना दे दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान सेवा नगर, नंदग्राम निवासी प्रवीण कुमार के रूप में हुई है। जबकि मृत महिला की पहचान कोटगांव कॉलोनी निवासी 35 साल की आरती के रूप में हुई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी प्रवीण और मृतक आरती तीन साल से रिलेशन में थे। वह एक-दूसरे से प्यार करते थे।

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पुलिस सूत्रों का कहना है कि घटना दस जनवरी की रात की है। प्रवीण आरती को लेकर गाजियाबाद के एक होटल में पहुंचा था, जहां उसने एक कमरा बुक कराया और आरती के साथ रात में वहीं रुका था। इस दौरान आरती और प्रवीण ने होटल के कमरे में साथ बैठकर शराब पी। इसी बीच किसी बात को लेकर दोनों के बीच झगड़ा हो गया। यह झगड़ा इतना बढ़ा कि प्रवीण ने आरती का मुंह और गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद रातभर आरती के शव के पास बैठा रहा। पुलिस ने जब प्रवीण का मेडिकल कराया तो उसके चेहरे पर खरोंच के निशान मिले। इससे पता चलता है कि मौत से पहले आरती ने बचने का पूरा प्रयास किया था।

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टीचर्स के लिए गुड न्यूज; बढ़ेगी सैलरी मिलेगा ढाई साल का एरियर भी

भोपाल मध्य प्रदेश: इस मकर संक्रांति पर सबसे बड़ी गुड न्यूज मध्य प्रदेश के उन शिक्षकों के लिए आ रही है जो प्राइमरी और मिडिल स्कूल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने शिक्षकों के चौथे क्रमोन्नति का लाभ देने का खाका तैयार कर लिया है और इसका फैसला भी ले लिया गया है। इस फैसले का फायदा उन शिक्षकों को होगा जिन्होंने 35 साल की नौकरी पूरी कर ली है। पूरे प्रदेश में ऐसे करीब एक लाख बाईस हजार के लगभग शिक्षक हैं जिन्हें यह लाभ मिलेगा।सैलरी में तो बढ़ोतरी होगी ही साथ में प्रदेश सरकार ने ढाई साल का एरियर महंगाई भत्ता देने की घोषणा भी कर दी है। प्रदेश सरकार क्या यह फैसला मकर संक्रांति पर शिक्षकों के परिवार में खुशियां लाने वाला है।

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आपको बता दें कि लंबे समय से इस फैसले का इंतजार हो रहा था।प्रदेश सरकार ने पांच साल के अंतराल के बाद यह निर्णय लिया है। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी 35 साल की सेवा पूरी करने पर प्राचार्य और व्याख्याताओं को चौथा क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ दिया था। तभी से सहायक शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षक भी चौथे क्रमोन्नति वेतनमान की मांग कर थे। लंबे इंतजार के बाद कई शिक्षक मायूस भी हो चुके थे लेकिन इसी बीच प्रदेश सरकार ने मकर संक्रांति पर उनके लिए इस खुशखबरी का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना को मंजूरी दे दी गई है।इसके लिए 322.34 करोड़ रुपए भी स्वीकृत किए गए हैं। 

जिन शिक्षकों की पैंतीस साल की सेवा जुलाई दो हजार तेईस से पहले पूरी हो चुकी है उन्हें तब से अब तक का पूरा बकाया एरियर मिलेगा।उन्हें एक लाख बीस हजार से एक लाख अस्सी हजार रुपए तक मिलने की संभावना बताई जा रही है।इसी तरह जिनकी पैंतीस साल की सेवा दो हजार तेईस से दो हजार छब्बीस के पी पूरी होगी उन्हें पूरी सेवा अवधि होने की तारीख से एरियर मिलेगा। वेतन में जो वृद्धि की गई है यह वेतन वृद्धि एक जुलाई दो हजार तेईस से लागू मानी जाएगी। जो शिक्षक इस अवधि में रिटायर हो चुके हैं उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा या नहीं।इसमें स्थिति साफ नहीं की गई है लेकिन यदि उन्हें इस एरियर का लाभ नहीं भी मिलता है तो संभवतः उन्हें पेंशन में इसका लाभ दिया जा सकता है। 

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हर डॉग बाइट से मौत और चोट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बड़े जुर्माने का कर दिया ऐलान

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट: लगातार चल रहे स्टी डॉग्स के विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट लगातार सख्त फैसले दे रहा है।एक बार फिर डॉग बाइट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में अपना फैसला सुनाया है। आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकारों को चेतावनी दी है। शीर्ष अदालत ने एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों के खराब क्रियान्वयन पर केंद्र और राज्यों को फटकार लगाई। साथ ही, कुत्तों के हमलों से जीवनभर असर पड़ने की स्थिति में डॉग फीडर्स की भी जिम्मेदारी तय करने की बात कही।

आवारा कुत्तों के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकारों को कड़ी चेतावनी दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि कुत्ते के काटने की हर घटना और इससे होने वाली हर एक मौत के मामले में संबंधित राज्य पर भारी-भरकम मुआवजा लगाया जा सकता है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों में कुत्तों के हमले से किसी व्यक्ति पर ‘जीवनभर का असर’ पड़ता है, ऐसे मामलो में डॉग फीडर्स जो सड़क पर घूमते कुत्तों को खाना खिलाते हैं उनकी भी जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कड़े शब्दों में कहा है कि हर डॉग बाइट और हर मौत के लिए हम राज्यों पर भारी मुआवजा तय करेंगे, क्योंकि उन्होंने जरूरी इंतजाम नहीं किए। साथ ही डॉग फीडर्स की भी जिम्मेदारी होगी। अगर आप उन्हें खाना खिला रहे हैं, तो उन्हें अपने घर रखें। उन्हें खुले में घूमकर लोगों को काटने और उन पर हमला करने की इजाजत क्यों दी जाए? कुत्ते के काटने का असर जीवनभर रहता है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्होंने एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों को लागू करने में पूरी तरह नाकामी दिखाई है। पीठ ने कहा कि यह समस्या दशकों से चली आ रही है और केंद्र व राज्यों की विफलता के कारण यह कई गुना बढ़ चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने चेताया कि हर उस पुरुष, महिला और बच्चे की मौत के लिए, जिसकी जान कुत्ते के काटने से गई है, जिम्मेदार सरकार पर भारी मुआवजा लगाया जाएगा।

तीन जजों की विशेष पीठ- जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया ने कहा कि आवारा कुत्तों के बच्चों और बुजुर्गों पर हमलों के कई वीडियो मौजूद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने डॉग लवर्स और डॉग फीडर्स से तीखा सवाल किया, ‘क्या आपकी भावनाएं सिर्फ कुत्तों के लिए हैं, इंसानों के लिए नहीं?’ शीर्ष अदालत विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें डॉग लवर्स द्वारा पहले के आदेशों में संशोधन और सख्त अनुपालन की मांग की गई है। 

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टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर, 5 हजार करोड़ की लागत से होगा तैयार

भोपाल मध्य प्रदेश: अगर आप टाइगर लवर्स हैं तो यह खबर जरा ध्यान से सुन लीजिए। मध्य प्रदेश में करीब पांच हजार करोड़ रुपये की लागत से 625 किलोमीटर लंबा टाइगर टूरिज्म कारिडोर विकसित करने की तैयारी है। यह कारिडोर पेंच टाइगर रिजर्व से कान्हा, कान्हा से बांधवगढ़ और बांधवगढ़ से पन्ना टाइगर रिजर्व को आधुनिक सड़कों के माध्यम से जोड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को जारी संदेश में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न सिर्फ पर्यटन, बल्कि प्रदेश की समग्र आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति देगी।

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आपको बता दें कि मध्य प्रदेश देश का सबसे अधिक बाघों वाला राज्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों को एक सुव्यवस्थित कारिडोर से जोड़ने का निर्णय लिया गया है, जिसे “टाइगर टूरिज्म कारिडोर” नाम दिया गया है। इस कारिडोर के विकसित होने से पर्यटकों को पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना जैसे प्रमुख टाइगर रिजर्व तक सुगम, सुरक्षित और तेज यात्रा सुविधा मिलेगी। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह कारिडोर पड़ोसी राज्यों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा।

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ग्वालियर के खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी, स्पोर्ट कांप्लेक्स में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर से राष्ट्रीय एवं अंतरर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो सकें इसके लिए कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने खेल की सुविधाओं को बढ़ाने के निर्देश नगर निगम को दिए हैं। यह निर्देश कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान ने गत रात्रि एकलव्य खेल परिसर स्पोटर्स कॉम्प्लेक्स का अवलोकन करते हुए दिए। निरीक्षण के दौरान नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय मौजूद थे। अवलोकन में कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने निर्देश दिए कि ग्वालियर में बेहतर खिलाड़ी तैयार हो सकें इसके लिए जिन सुविधाओं की अवश्यकता हो उनके प्रस्ताव बनाकर तैयार करें। इन प्रस्ताव को केंद्र एवं प्रदेश सरकार को भेजा जाएंगा ताकि वहां से खेल को प्रोत्साहित करने वाले योजनाओं से ग्वालियर में बेहतर संसाधन तैयार किए जा सकें।

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शहर में खेल सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण एवं खिलाडियों को बेहतर आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने नगर निगम द्वारा संचालित स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने उपलब्ध खेल सुविधाओं, मैदानों, प्रशिक्षण व्यवस्थाओं तथा आवश्यक सुधार कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। कलेक्टर रुचिका चौहान ने नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि नगर में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए ठोस और व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि ग्वालियर के युवाओं और उभरते खिलाडियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता है तो उन्हें आधुनिक एवं समुचित खेल संसाधन उपलब्ध कराने की ।

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कलेक्टर ने नगर निगम को निर्देशित किया कि शहर में नए स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स के निर्माण, बैडमिंटन कोर्ट, स्विमिंग पूल, इंडोर एवं आउटडोर खेल सुविधाओं के विकास तथा विभिन्न खेल विधाओं के विस्तार के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। इस कार्ययोजना में खेल परिसरों का उन्नयन, नई सुविधाओं की स्थापना, प्रशिक्षण एवं कोचिंग व्यवस्था, तथा दीर्घकालीन रखरखाव की रूपरेखा को भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि तैयार किए गए प्रस्तावों को मध्य प्रदेश शासन एवं भारत सरकार को भेजा जाएगा, ताकि राज्य एवं केंद्र की खेल प्रोत्साहन योजनाओं के तहत आवश्यक संसाधन की पूर्ति की जा सकें। उन्होंने कहाकि खेल न केवल शारीरिक एवं मानसिक विकास का माध्यम हैं, बल्कि युवाओं को अनुशासन, टीम भावना और नेतृत्व के गुण भी सिखाते हैं। अवलोकन के अवसर पर नगर निगम के वरिष्ठ आधकारी एवं खेल विभाग से संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने कलेक्टर रुचिका चौहान को बताया कि निगम के माध्यम से खेलों के प्रोत्साहन के लिये कई आयोजन किए जाते हैं। इसके साथ ही स्विमिंग पूल एवं अन्य खेलों की सुविधायें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। निगम के सहयोग से अन्य सुविधाओं के लिये प्रस्ताव तैयार किए जायेंगे।

स्कूलों पर ठंड का लॉकडाउन, प्रशासन का स्कूल बंद का आदेश

ग्वालियर मध्य प्रदेश: अत्यधिक ठंड व शीत लहर को ध्यान में रखकर जिले के सभी शासकीय व अशासकीय स्कूलों में 9 व 10 जनवरी को कक्षा 5 वीं तक के बच्चों के लिये स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है। साथ ही 6 से 12 वी कक्षा तक के लिए स्कूल का समय 10.30 से 3 बजे तक निर्धारित किया गया है। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने यह आदेश जारी किया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि यह आदेश अत्यधिक ठंड की वजह से बच्चों के स्वास्थ्य, सुविधा, सुरक्षा एवं आवागमन को ध्यान में रखकर जारी किया गया है। यह आदेश ग्वालियर जिले में संचालित एमपी बोर्ड, सीबीएसई व आईसीएसई से संबद्ध सभी शासकीय एवं अशासकीय व शासन से मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा।

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बांग्लादेश का जलाया झंडा मारे जूते। हिंदू महासभा ने क्यों किया विरोध जानिए

ग्वालियर मध्य प्रदेश: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और हिंदुओं की हत्या का विरोध अब भारत में तेज होता जा रहा है। भारत का यह विरोध क्रिकेट में तो देखने को मिला है।अब जगह जगह सड़कों पर भी प्रदर्शन होने लगा।है।अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने ग्वालियर में कूट पुल के नजदीक बांग्लादेश के विरोध में प्रदर्शन किया और बांग्लादेश के विरोध में जमकर नारेबाजी भी की।

बांग्लादेश का विरोध करते समय हिंदू महासभा के कार्यकर्ता काफी आक्रोशित नजर आए।उन्होंने बांग्लादेश के नक्शे और झंडे को अपने पैरों से कुचला जूते मारे और इसके बाद उनमें आग लगा दी। इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करने वाले हिंदू महासभा के अध्यक्ष जयबीर भारद्वाज का कहना है कि हिंदुओं की हत्या को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।वह बांग्लादेश के विरोध में लगातार प्रदर्शन करते रहेंगे और साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से बांग्लादेश को दुनिया के नक्शे से मिटा देने तक की मांग कर डाली।

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इस विरोध प्रदर्शन के अंत में हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश में मारे गए हिंदुओं की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। हिन्दू महासभा के अध्यक्ष जयवीर भारद्वाज के साथ अन्य कार्यकर्ता भी इस विरोध प्रदर्शन में मौजूद रहे। आपको बता दें कि बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है और हिंदुओं की हत्या हो रही है। भारत में रहने वाले हिंदू हमेशा से बांग्लादेशी हिंदुओं के सुरक्षा की मांग उठाते रहे हैं।

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