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RGPV का महाघोटाला; फर्जीवाड़े से ले ली NAAC A++ ग्रेड, ऐसे हुआ खुलासा

कोर्स कागजों पर दिखाकर और अन्य सम्बंध कालेजों की झूठी जानकारी देकर कूट रचित तरीके से नेक A++ ग्रेड हासिल कर ली। यदि इस गड़बड़झाला की गहराई में जाएं तो यह अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक अनियमितताओं को बढ़ाने में मदद करने वाला एक सुनियोजित एकेडमिक करप्शन है

भोपाल मध्य प्रदेश: अपने अजब गजब और गोलमूल कारनामों के लिए पूरे देश में कुख्यात हो चुकी मध्य प्रदेश में तकनीकी शिक्षा प्रदान करने वाली राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय आरजीपीबी ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आपको हैरान कर दे। अपनी झूठी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए आरजीपीबी ने नेक ए प्लस ग्रेड पाने के लिए ही घोटाला कर दिया। यह घोटाला इसलिए है क्योंकि बिना सुविधाओं के जब यह ग्रेड दी गई होगी तो देने वाले और लेने वालों के बीच में किस किस तरह का लेनदेन हुआ होगा यह आप बखूबी समझ सकते हैं।

नेक पीए टीम की एग्जिट रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने बी.टेक. स्तर पर अग्रिकल्चर टेक्नोलॉजी फायरसेफ्टी इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और एमबीए इंटरनेशनल बिज़नेस मैनेजमेंट जैसे कोर्स चलाने का कागजों में दावा किया जबकि उनके कैंपस में यह कोर्स संचालित ही नहीं होते। और यह कोर्स कागजों पर दिखाकर और अन्य सम्बंध कालेजों की झूठी जानकारी देकर कूट रचित तरीके से नेक A++ ग्रेड हासिल कर ली। यदि इस गड़बड़झाला की गहराई में जाएं तो यह अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक अनियमितताओं को बढ़ाने में मदद करने वाला एक सुनियोजित एकेडमिक करप्शन है। क्योंकि इसी ग्रेडिंग के आधार पर छात्रों का विश्वास जीता गया होगा और न जाने कितने छात्रों ने यहां प्रवेश लिया होगा और न जाने किस किस तरह की फंडिंग भी आरजीपीबी को हुई होगी!

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नेक पीयर टीम की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि इंटरनल क्वालिटी सेल कुलगुरी की अध्यक्षता में नियमित शैक्षणिक ऑडिट करता है जबकि हकीकत में आरजीपीवी में ऐसा कभी हुआ ही नहीं। इसके अलावा इस विश्वविद्यालय में एक कॉरपस फ़ण्ड बनाए जाने का भी जिक्र किया गया लेकिन अकाउंट शाखा के अनुसार ऐसा कोई अकाउंट ही नहीं है। इसके साथ ही आईसीटी इनेबल्ड टीचिंग और स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा होने का उल्लेख भी नेग ए ग्रेड पाने के लिए किया जबकि हकीकत में इस विश्वविद्यालय में तीन हजार छात्रों के लिए छह स्मार्ट क्लासरूम हैं और वो जो क्लासरूम है वे भी फंक्शनल नहीं है मतलब काम नहीं करते। विश्वविद्यालय में स्थापित नॉलेज रिसोर्स सेंटर छात्रों और फैकल्टी को रोजगार और व्यावसायिक अवसर देने का दावा करता है।रिपोर्ट में आई पी आर नीति का जिक्र है लेकिन यह नीति के आरसी बनने से पहले बनी थी और इसका वास्तविक लाभ किसी को मिला ही नहीं। 

इस पूरे मामले में RGPV तो दोषी है ही साथ में नेक की वह टीम भी दोषी है जिसने इन सब अनियमितताओं के बावजूद आरजीपी को नेक A++ ग्रेड प्रदान कर दी आरजीपीबी ने अपनी तरफ से गलत जानकारी दी और नेक टीम ने फिजिकल वेरिफिकेशन किए बगैर ही ग्रेड प्रदान कर दी। मतलब साफ है कि कुछ न कुछ हिडन अंडरस्टैंडिंग दोनों के बीच रही जिसके चलते यह कारनामा किया गया है। जिस आजीव परिसर के लिए नैक ग्रेड ली गई है। लेकिन उन्होंने इधर उधर की अतिरिक्त जानकारी लेकर भी ग्रेड पाने के लिए यह हथकंडा अपनाया और नेक की वेरिफिकेशन।टीम ने भी पूरी तरह सहयोग करते हुए बिना असेसमेंट किए सभी सुविधाओं को मानते हुए रिपोर्ट सबमिट कर दी।

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यह मध्य प्रदेश में हुए तमाम शिक्षा घोटालों की तरह ही एक शिक्षा महाकोटाला है।इसके यदि हम देखें तो अप्रत्यक्ष रूप से बहुत दीर्घकालिक और गहरे प्रभाव हैं।यह आर्थिक अनियमितता से भी बड़ा मामला इसलिए है क्योंकि सीधे तौर पर यहां पर आर्थिक अनियमितता नहीं की गई लेकिन स्तरहीन शिक्षा व्यवस्था होते हुए भी उसे उस स्तर का दिखाया गया जिससे कि आने वाले कई सालों तक छात्रों को गुमराह किया जा सके। इस तरह से अप्रत्यक्ष रूप से कहीं न कहीं यह एक बहुत बड़ी धोखाधड़ी का मामला है। अब देखना होगा कि इस मामले में दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है!

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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