ग्वालियर मध्य प्रदेश: ऑनलाइन गेम की लत किस तरह से बच्चों को अपराधी बना रही है? इसके तमाम उदाहरण समय समय पर सामने आते रहते हैं।कई बार तो इस तरह की घटनाएं भी सामने आयी हैं कि ऑनलाइन गेम के चलते कर्ज में डूब जाने के कारण बच्चों ने घर में चोरियां की हों या स्वयं की जीवनलीला समाप्त कर ली हो। ऐसे तमाम मामलों के बाद अब ग्वालियर से भी एक चौंकाने वाला मामला निकलकर सामने आ रहा है। जहां एक युवक ने ऑनलाइन गेम की लत के कारण अपने ही परिचित युवती के घर पर चोरी की और चोरी भी कोई छोटी मोटी नहीं। पांच लाख से अधिक रुपये के सोने के जेवर और नकद चुरा लिए।
ग्वालियर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र के डीडी नगर में रहने वाली सपना जादौन अपनी ननद शिवानी भदौरिया के साथ कमरे में सो रही थी। रात में अचानक दूसरे कमरे से आवाजें आने लगी। सपना चिल्लाई और दोनों ने जागकर दूसरे कमरे की ओर जाकर देखा तो उन्हें वहाँ पर दो युवक चोरी का सामान लेकर भागते हुए नजर आए। भागते समय शिवानी ने एक युवक को पहचान लिया। वह युवक शिवानी के साथ ही उसकी कोचिंग पर पड़ने वाला लड़का पीयूष शर्मा था। पहले तो शिवानी हैरान हो गई कि पीयूष उसके घर इतनी रात में क्या कर रहा है और जब दोनों वापस लौटकर कमरे में आये तो उनको बक्से का ताला टूटा मिला और सोने के तमाम जेवर और 1.6 लाख रुपए वहां से गायब थे। नकद और सोने की कीमत कुल 5.6 लाख रुपए है जो दोस्त ही चुरा ले गया।
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सपना जादौन ने शिवानी किसीनाथ के बाद महाराजपुरा थाने में इस मामले की शिकायत दर्ज की। थाना प्रभारी यशवंत गोयल ने एक टीम गठित की और मामले की जांच कर आरोपियों को पकड़ने के लिए तमाम टीमें लगा दी। पुलिस को सूचना मिली की आरोपी कैंसर पहाड़िया के पास देखे गए हैं। पुलिस ने घेराबंदी करके उन्नीस साल के युवक पीयूष शर्मा और उसके साथी इक्कीस साल के सचिन जाटव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दोनों चोरों के पास से चोरी की गई पूरी नकद रकम और सोने के कुछ आभूषण जब्त कर लिए हैं। जब पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की तो चोरी के कारण सुनकर पुलिस भी हैरान हो गई।
महाराजपुरा थाना प्रभारी यशवंत गोयल ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उनको ऑनलाइन गेम खेलने की आदत है। ऑनलाइन गेम में वह काफी रकम गंवा चुके हैं। उन्होंने नुकसान के भरवाई के लिए कर्ज भी ले रखा है। अब कर्जदारों का दबाव बढ़ रहा था उनके पास कर्ज चुकाने का कोई रास्ता नहीं था।ऑनलाइन गेम की आदत के चलते वह कर्ज में डूब चुके थे और उन्होंने इससे बचने के लिए चोरी का रास्ता चुना। उनको लगा कि वह चोरी की गई सामान को बेचकर कर्ज चुका देंगे और आगे गेम में भी पैसा लगा पाएंगे। ऑनलाइन गेम के चलते युवकों को चोर बनाने का यह हैरान करने वाला मामला। एक बार फिर यह सवाल खड़े कर रहा है कि हमारी सरकार ऑनलाइन गेम जैसे जुए पर बैन क्यों नहीं लगा रही है? कब तक हमारे बच्चे और युवा इस गेम के चलते अपना जीवन बर्बाद करते रहेंगे?
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