ग्वालियर मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश में बच्चों को स्कूल में दिया जाने वाला मध्यान भोजन हमेशा चर्चाओं का विषय रहता है। कई बार मध्यान भोजन की गुणवत्ता खराब होने के चलते शिकायतें प्राप्त होती हैं और कई बार घटिया मध्यान भोजन मीडिया में भी सुर्खियों में रहता है। अभी हाल ही में श्योपुर में कागज पर मध्यान भोजन परोसते जाने का मामला गर्माया था। और ग्वालियर में भी मध्यान्ह भोजन सम्बन्धित तमाम गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। इन सबको देखते हुए अब प्रशासन ने मध्यान भोजन की गुणवत्ता को सुधारने के लिए कमर कस ली है।
जिले के सभी विकासखंडों के विभिन्न स्कूलों में बुधवार को एक साथ अलग-अलग अधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण कर मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता परखी गई। जिले के सभी सरकारी स्कूलों के बच्चों को गुणवत्तायुक्त मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने के लिये कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर यह निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान शिक्षकों को निर्देश दिए गए कि बच्चों को मध्यान्ह भोजन परोसने से पहले शिक्षकगण निर्धारित मेन्यू के तहत तैयार कराए गए मध्यान्ह भोजन को चखकर गुणवत्ता परखें। साथ ही विद्यालय में हर दिन सेम्पल टिफिन 24 घंटे की अवधि के लिये अवश्य रखें।
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कलेक्टर चौहान के निर्देश पर विकासखंड स्त्रोत समन्वयक मुरार, घाटीगाँव, डबरा व भितरवार एवं ग्वालियर शहरी क्षेत्र के स्त्रोत समन्वयकों एवं जन शिक्षकों द्वारा विभिन्न स्कूलों में अचानक पहुँचकर मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता परखी। फिलहाल तो कहीं से कोई बड़ी खामी देखने को नहीं मिली है। और भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक दिखाई दी लेकिन यदि इसी तरह से यह गुणवत्ता परखने का सिलसिला लगातार जारी रहा तो निश्चित ही मध्यान भोजन में दिए जाने वाले खाद्य सामग्री की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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