ग्वालियर मध्य प्रदेश: रविवार को गोली का मंदिर क्षेत्र में सांची दुग्ध संघ के पास एक चलती हुई कार में आग लग जाती है। आग लगने के दौरान कार में एक महिला और बच्चा बैठा हुआ था। गनीमत रही के चालक ने सूझबूझ से दोनों सवारियों को बाहर निकाल लिया और आग के फैलने से पहले सभी लोग सकुशल बच गए। हालांकि कुछ ही देर में कार धूँ-धूकर जलने लगी। और पूरी तरह जलकर खाक हो गई। लेकिन चलती कार में लगी आग की इस घटना ने परिवहन विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है क्योंकि जो जानकारी निकलकर आ रही है उसके अनुसार न तो इस कार का बीमा था और न ही फिटनेस। फिटनेस और बीमा खत्म होने के बावजूद इस कार को सड़क पर चलने की अघोषित अनुमति बैकडोर से परिवहन विभाग के किस जिम्मेदार ने दी और अब उस पर क्या कार्रवाई बनती है यह भी एक बड़ा सवाल है।
जिस एसयूवी कार क्रमांक एमपी जीरो सेवन टीए टू टू फोर वन में आग लगी है।यह टैक्सी कोटे में संचालित थी।यह कार बिजली कंपनी में टैक्सी कोटे में लगी हुई थी।सबसे बड़ी बात की रविवार के दिन अवकाश होते हुए भी इस कार का संचालन हो रहा था। यहाँ बिजली कंपनी भी कटघरे में खड़ी नजर आ रही है। क्योंकि जिस कार को टैक्सीकोटे में किसी भी विभाग में लगाया जाता है उस कार के सभी दस्तावेज भी जांचे जाते हैं तो बिना फिटनेस और बीमा की कार बिजली कंपनी ने टैक्सी कोटे में कैसे लगा रखी थी? बिजली कंपनी के किन अधिकारियों की मिलीभगत से यह अनफिट कार टैक्सी कोटे में संचालित थी।यह सवाल भी खड़ा हो रहा है।
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इस पूरे मामले में एक बार फिर शहर में दौड़ रही अनफिट कारों का मामला गरमा दिया है और इन अनफिट कारों पर कार्यवाही न करने के चलते परिवहन विभाग को कटघरे में खड़ा किया है। यूं तो परिवहन विभाग बात करता है कि वह समय समय पर जांच करते हैं।अनफिट वाहनों पर कार्रवाई की जाती है। लेकिन यदि कार्रवाई की जाती है तो अनफिट वाहन शहर की सड़कों पर मौत बनकर क्यों दौड़ रहे हैं? जिस तरह गोले का मंदिर क्षेत्र में इस एसयूवी टैक्सी क्रमांक एमपी जीरो सेवन टी ए टू फोर वन में आग लगी है। ऐसी ही कोई और भी घटनाएं आगे हो सकती हैं। लगता है कि परिवहन विभाग सोता ही रहेगा और अनफिट वाहनों से जान का जोखिम इसी तरह बना रहेगा…
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