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ग्वालियर अपराध में जल रहा है और ‘जीरो’ ‘भोंपू’ बजा रहा है!

मुरार में सोमवार को दोपहर दो बजे दिनदहाड़े हुई ताबड़तोड़ गोलीबारी की।घटना कई मामलों में पुलिस को चुनौती देती है। यह घटना मुरार थाने के पीछे महज चंद कदमों की दूरी पर हुई मतलब। बदमाशों में यह खौफ भी नहीं है

आज सुबह जब आप घर से निकलेंगे तो आपके मन में यही चिंता होगी कि क्या आप सुरक्षित अपने कार्यस्थल पर पहुंच पाएंगे और जहां कार्यस्थल पर बैठे होंगे।क्या वहां पर आप सुरक्षित रहेंगे और क्या शाम को अपने परिवार के पास सकुशल लौटकर आ पाएंगे। यह विचार केवल एक व्यापारी के मन में नहीं होगा बल्कि हर एक उस आम आदमी के मन में होगा जो घर से निकलता है। कोई न कोई छोटे बड़े काम करके शांतिपूर्वक अपने परिवार का गुजर बसर करता है। लेकिन शहर किस तरह से असुरक्षित है यह आप तमाम अखबारों की सुर्खियों में पढ़ सकते हैं। लगातार हो रही गोलीबारी। मारपीट लूट की घटनाएं साफ बता रही हैं कि शहर में कानून का राज नहीं बल्कि बेखौफ अपराधियों का राज हैं!

हाल ही में हुई कपिल यादव वाली घटना को ही देख लें। कपिल यादव अपराध करके खुलेआम शहर में ही घूम रहा था। बताया जा रहा है कि पुलिस ने उसको और उसके भाई अमन यादव को मेला ग्राउंड में पकड़ा। वहीं एसडीओपी कार्यालय में रखा। अमन यादव को मेले से पकड़ना बताया और कपिल यादव का शॉट एनकाउंटर किया गया लेकिन पुलिस की इस कार्रवाई के बाद बदमाशों में पुलिस का खौफ कतई पैदा नहीं हुआ बल्कि इसी कपिल यादव का भाई पुलिस की इस कार्रवाई से और ज्यादा बौखला जाता है और वह भी खुले आम मुरार क्षेत्र में दहशत फैलाने वाली एक घटना को अंजाम देता है। कपिल यादव की गिरफ्तारी के बाद उसके छोटे भाई अरविंद यादव ने अन्य बदमाशों के साथ मिलकर जिस तरह मुरार सर्राफा कारोबारी महावीर जैन और उसके बेटे को निशाना बनाकर दिनदहाड़े ताबड़तोड़ ग्यारह गोलियाँ चलाई। आधे घंटे तक फायरिंग करते रहे।वह साफ बताती है कि शहर में अपराधी बेखौफ हैं।

इस तरह की घटनाएं साफ साबित कर रही हैं कि शहर की कानून व्यवस्था को संभालने वाली पुलिस जीरो है और वह किसका भोंपू बजा रही है वह भी आप भली भांति समझ सकते हैं। यहाँ हमने शब्द नीरो की जगह जीरो और बांसुरी की जगह भोंपू इसलिए बदले हैं क्योंकि बांसुरी और नीरो की प्रतिष्ठा को वर्तमान व्यवस्था में घसीटा जाना उचित नहीं है। शहर में कानून व्यवस्था जीरो हो चुकी है इसलिए इसे जीरो कहा जाना ही उचित है और कानून व्यवस्था संभालने वाला पुलिस विभाग केवल अपने आकाओं का भोंपू बजाने में ही मस्त रहता है। आमजन की तकलीफों समस्याओं और सुरक्षा से शायद जिम्मेदारों ने किनारा कर लिया है। 

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मुरार में सोमवार को दोपहर दो बजे दिनदहाड़े हुई ताबड़तोड़ गोलीबारी की।घटना कई मामलों में पुलिस को चुनौती देती है। यह घटना मुरार थाने के पीछे महज चंद कदमों की दूरी पर हुई मतलब। बदमाशों में यह खौफ भी नहीं है कि थाने से इतनी वारदात को अंजाम देने में उन्हें खतरा हो सकता है। मतलब साफ है कि उनमें पुलिस का किसी तरह का खौफ नहीं है। दूसरा पुलिसिया व्यवस्था पर इसलिए भी बड़ा सवाल खड़ा होता है क्योंकि यह बदमाश बिना नंबर प्लेट की अपाचे लेकर वारदात को अंजाम देने के लिए हथियार लेकर घूम रहे हैं। लेकिन किसी चौराहे पर लगी कोई पुलिस चेकिंग के दौरान इन्हें नहीं पकड़ा जा सका। जबकि इस समय शहर के तमाम प्वाइंट्स पर पुलिस लगातार आम आदमियों के वाहन चेक कर चालानी कार्रवाई कर रही है। 

यह एक मात्र घटना नहीं है जिसकी वजह से हम शहर की कानून व्यवस्था को “0” बता रहे हैं। पिछले कुछ समय की घटनाओं पर नजर डालें तो लगातार लूट हत्या और गोलीबारी की घटनाएं हो रही हैं। हर बड़ी वारदात के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल रहता है।आमजन डरे हुए रहते हैं। हालांकि कुछ मामलों में वारदात के बाद अपराधियों को पकड़कर उनका जुलूस निकालकर पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाने का ऐतिहासिक काम भी किया है। लेकिन इसके बावजूद पुलिस का सिस्टम फेल नजर आता है क्योंकि किसी भी वारदात से पहले पुलिस को इस तरह की तैयारी का इनपुट क्यों नहीं मिल रहा कपिल यादव की गिरफ्तारी के बाद उसके अन्य साथी इस तरह की घटना को अंजाम दे सकते हैं। इस सोच के साथ अन्य साथियों पर नजर क्यों नहीं रखी गई। जो आदतन अपराधी हैं उनकी गतिविधियों को पकड़ पाने में पुलिस का तंत्र क्यों कामयाब नहीं हो रहा है?

मुरार सर्राफा कारोबारी पर दिनदहाड़े हुई गोलीबारी की वारदात के बाद मुरार के व्यापारियों में जमकर आक्रोश देखने को मिला। व्यापारियों ने सड़क पर पुलिस और पुलिस कप्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। व्यापारियों का साफ कहना है कि पुलिस का खौफ अपराधियों में बचा ही नहीं है। मध्य प्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी कैलाश मखवाना का यह निर्देश है कि जब कोई बदमाश जमानत पर छूटे तो उनके जमानत निरस्त करने के लिए आवेदन लगाया जाये। हिस्ट्रीशीटर बदमाशों की गतिविधियों पर नजर रखे जाने के भी निर्देश हैं। हर महीने दो कॉम्बिंग गश्त के बावजूद भी इन बदमाशों की गतिविधियों को पुलिस नहीं पकड़ सकी। यह साफ बताती है कि कागजों पर कॉम्बिंग गश्त चल रही है। लेकिन इस मामले में जमानत पर छूटने के बाद बदमाशों ने खुलकर दहशत फैलाना शुरू कर दिया। 

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मध्य प्रदेश चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष डॉ प्रवीण अग्रवाल का कहना है कि आपराधिक घटनाएं लगातार हो रही हैं जो इस बात का प्रमाण है कि अपराधियों में पुलिस का भय खत्म हो गया है। अपराधी भय में है मध्य प्रदेश की पुलिस को उत्तर प्रदेश की पुलिस की तरह कार्रवाई करने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश पुलिस की इस तरह प्रशंसा करते हुए उन्होंने ग्वालियर पुलिस को कटघरे में खड़ा किया है। ऐसे ही तमाम व्यापारी हैं जो खुलेआम हुई गोलीबारी की वारदात के बाद पुलिस के कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते नजर आए। व्यापारी ही नहीं शहर के तमाम समाजसेवी और बुद्धिजीवी भी कह रहे हैं कि शहर में कानून व्यवस्था पूरी तरह से फेल हो चुकी है। ग्वालियर अपराध में जल रहा है और जीरो भोंपू बजा रहे हैं। 

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