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भाजपा सांसद और एनडीए के उम्मीदवार ओम बिरला लोकसभा के अध्यक्ष चुने गए।

भाजपा सांसद और एनडीए के उम्मीदवार ओम बिरला लोकसभा के अध्यक्ष चुने गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा। केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह समेत कई दिग्गजों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। विपक्ष की ओर से के. सुरेश के नाम का प्रस्ताव रखा गया।

प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब ने सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाते हुए प्रस्ताव को सभी के सामने रखा और इसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इसके बाद प्रोटेम स्पीकर ने ओम बिरला को लोकसभा अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू बिरला को अध्यक्षीय आसन तक लेकर गए। इस दौरान ओम बिरला से हाथ मिलाने के बाद पीएम मोदी और राहुल गांधी ने एक-दूसरे से भी हाथ मिलाया।जब बिरला ने अध्यक्षीय आसन ग्रहण किया तो पीएम मोदी, राहुल गांधी और रिजिजू ने उन्हें बधाई और शुभकामना दी। पांचवीं बार ऐसा होगा कि कोई अध्यक्ष एक लोकसभा से अधिक कार्यकाल तक इस पद पर आसीन रहेगा।इससे पहले कांग्रेस नेता बलराम जाखड़ एकमात्र ऐसे पीठासीन अधिकारी रहे, जिन्होंने सातवीं और आठवीं लोकसभा में दो कार्यकाल पूरे किए हैं।

मुस्लिम महिला का भाजपा को वोट देना पड़ा महंगा, पति ने दिया तलाक

मध्य प्रदेश में तलाक का एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है, जिसमें  एक युवक ने अपनी पत्नी को सिर्फ इसलिए तलाक दे दिया, क्योंकि उसने लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट दे दिया। भाजपा की सदस्यता लेकर उसने प्रचार भी किया था। संभवतः यह पूरे देश में ऐसा पहला मामला है जब केवल अपने मताधिकार का प्रयोग अपने पसंद की पार्टी के लिए करने पर किसी महिला को तलाक दे दिया गया हो! 

तीन तलाक कहकर तोड़ दिया रिश्ता 

मामला मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले का है जहां रॉयल चौक में रहने वाली महिला ने पुलिस से शिकायत दर्ज कराई है। उसने पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का आरोप भी लगाया है। साथ ही बताया, प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव से प्रभावित होकर मैंने भाजपा की सदस्यता ली थी। लोकसभा चुनाव में बीजेपी का प्राचर किया और वोट भी दिया, लेकिन यह बात परिवार के लोगों को इतनी नागवार गुजरी कि मारपीट करते हुए पति ने तीन तलाक कहकर रिश्ता तोड़ लिया। 

य़ह रहीं विवाद की एक और बजह 

महिला इशरात ने विवाद की वजह बताते हुए कहा, पति की छह बहनें हैं, जो पारिवारिक मुद्दे पर कुछ ज्यादा ही इंटरफेयर करती हैं। चार बहनों का दखल कुछ ज्यादा ही रहता है। तलाक को लेकर वह मुझे पहले भी नोटिस दे चुके हैं। बाद में घर से निकाल दिया।  इस महिला की शादी अब्दुल आशिफ मंसूरी से हुई थी। शादी के बाद से दोनों अच्छे से रह रहे थे, लेकिन बाद में पति दहेज के लिए परेशान करने लगा। पति की प्रताड़ना से तंग आकर महिला मायके चली गई। बताया कि पति मायके से पांच लाख लाने का दबाव बना रहा था। 

पुलिस ने किया केस दर्ज 


महिला की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने अब्दुल आशिफ मंसूरी सहित परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ धारा 498 ए, 294, 34, दहेज अधिनियम की धारा 3/4 और मुस्लिम महिला ( विवाह पर अधिकार का संरक्षण ) अधिनियम की धारा 2019 की धारा 4 के तहत केस दर्ज किया है।

CM मोहन यादव ने लिया बड़ा फैसला।अब सभी मंत्रियों को खुद भरना पड़ेगा इनकम टैक्स

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़ा फैसला लिया है. मोहन सरकार ये फैसला उनके मंत्रियों की जेब पर भारी पड़ सकता है. दरअसल, अब मध्य प्रदेश के मंत्री अपना इनकम टैक्स खुद भरेंगे. आज कैबिनेट में सभी मंत्रियों की सहमति से ये फैसला लिया गया है. दरअसल सीएम मोहन यादव ने 52 साल पुराने फैसले को बदल दिया, जिसमें माननीयों के टैक्स सरकार भरती थी, लेकिन मोहन यादव ने इतिहास बदलते हुए कैबिनेट की बैठक में सर्व सहमति ये निर्णय लिया गया कि अब मंत्री खुद अपने टैक्स भरेंगे.
अब मध्य प्रदेश के सब मंत्री अपना इनकम टैक्स खुद भरेंगे. अभी तक सरकार मंत्रियों का इनकम टैक्स भरती थी. इस फैसले के बाद शासन पर कोई वित्तीय भार नहीं आएगा. मध्य प्रदेश के वित्तीय स्थिति के लिए ये राहत भरा फैसला साबित हो सकता है.

CM मोहन ने बदला 52 साल पुराना फैसला

CM मोहन यादव ने मंत्रियों के इनकम टैक्स भरने को लेकर 52 साल पुराना नियम पलट दिया है. दरअसल, साल 1972 में मंत्रियों का इनकम टैक्स सरकार द्वारा भरने का नियम बनाया गया था, जिसे 52 साल बाद बदला जा रहा है. माना जा रहा है कि मोहन सरकार के इस फैसले से सरकार को फायदा हो सकता है.

कलेक्टर बनी मसीहा,  पीड़ित मजदूरों को जालिम ठेकेदार से दिलाए मेहनत के 4.65 लाख 

ऐसे कई मामले रोज घटित होते हैं जहां मजदूरों को उनकी हक की मजदूरी दिए बिना ही बेइज्जत करके भगा दिया जाता है है कि ऐसा छोटा मोटा मामला न होते हुए यदि रेलवे के बडे काम को लेने वाले किसी ठेकेदार ने महीनों काम कराकर और मजदूरों को बिना मजदूरी किए भगा दिया हो तो आप सोचिए। ऐसे मजदूरों का मददगार कौन बनेगा करो? क्या उम्मीद इन मजदूरों की रह जाएगी क्योंकि इन मजदूरों को यह भी पता करता है कि रेलवे का इतना बड़ा ठेके लेने वाला ठेकेदार। कहीं न कहीं बड़ी रसूख भी रखता है इन सबके बावजूद ऐसे करो 24 मजदूरों को न्याय दिलाने का काम किया है। ग्वालियर की कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने 

एक आय कृपया जा सकता ह दरअसल प्रदेश के सीधी शहडोल कटनी व उमरिया जिले के श्रमिक एक ठेकेदार के अंतर्गत रेलवे का काम करने के लिए क्षेत्र में ग्वालियर आए हुए थे। 45 दिन की मजदूरी उनको ठेकेदार द्वारा नहीं दी गई थी। इन मजदूरों ने 20 जून को ग्वालियर कलेक्ट्रेट पहुंचकर। डॉक्टर रुचिका चौहान करो को अपनी व्यथा सुनाई थी करो और संवेदनशील कलेक्टर साहिबा ने तुरंत निराकरण करने के लिए मामले को गंभीरता से लेते हुए श्रम आयुक्त को टीम सहित कार्रवाई करने के लिए आदेशित किया। ठेकेदार ने भी रेलवे का काम कर रही नैना इन्फ्रा कंपनी करो। के मालिक सिंह यादव को समझाइश दी है जो है उत्तर प्रदेश के ललितपुर का रहने वाला है। श्रम आयुक्त है द्वारा शक्ति दिखाए जाने पर वो कलेक्टर साहिबा के अथक प्रयास से इन बेबस मजदूरों को न्याय मिला करो करो और उन्हें 45 दिन की मजदूरी है जिसकी कुल रकम। चार लाख पैंसठ हजार रुपए थी।वह तुरंत प्रदान की गई मजदूरी पाने वाले इन चौबीस मजदूरों में तेरा पुरुष और ग्यारह महिलाएं थीं 

आपको बता दें ही की मजदूर बिना मजदूरी के बहुत परेशान थे। इनके खाने पीने पर भी संकट खड़ा हो गया था। यह देखते हुए कलेक्टर साहिबा ने इनके रहने की व्यवस्था बस स्टैंड स्थित रैन बसेरा में करा दी थी और साथ में इनके लिए भोजन पानी की व्यवस्था भी कराई गई थी 

इंदौर में लगाए जाएंगे 5 करोड़ पेड़, तापमान में आएगी 5 डिग्री गिरावट

कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में 5 करोड़ पेड़ लगवाने का आह्वान किया है, इससे शहर को गर्मी से राहत मिलेगी और तापमान में आएगी 5 डिग्री गिरावट आएगी ।

ज्यादातर महानगर धीरे धीरे कंक्रीट का जंगल बनते जारहे हैं और ऐसे ही कुछ हालात वर्तमान में इंदौर के भी हैं और यही कारण है कि इंदौर का तापमान भी लगातार बढ़ता जा रहा है जिस तरीके से दिल्ली में तापमान 50 डिग्री टेंपरेचर को बाहर कर गया यही हालत इंदौर के ना हो किसी उद्देश्य से कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर शहर में चारों तरफ 5 करोड़ पेड़ लगाने का अपहरण किया है उनका यह अनुमान है कि 5 करोड़ पेड़ लगाने से इंदौर शहर का तापमान 45 डिग्री कम हो जाएगा।

सुनिए क्या कहना है कैलाश विजय वर्गीय का

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नर्सिंग घोटाले में बड़ा खुलासा, बर्खास्त रजिस्ट्रार ने CMHO के माथे फोड़ा ठीकरा, बताई यह वजह

मध्य प्रदेश में हुए नर्सिंग घोटाले में बर्खास्त पूर्व रजिस्ट्रार चंद्रकला दिवगैया ने एक बड़ा खुलासा किया है। इस खुलासे ने मध्यप्रदेश के सिस्टम में घुली भ्रष्टाचार की कलई खोल कर रख दी है। नर्सिंग कॉलेजों को दी गई मान्यता में पूर्व रजिस्ट्रार ने तमाम जिलों के CMHO को भी दोषी ठहराया है। फर्जी अस्पतालों का यदि CMHO रजिस्ट्रेशन ही नहीं करते तो नर्सिंग कॉलेज वाले उसे अपना दिखाकर मान्यता कैसे लेते? इस बड़े सवाल का साथ चंद्रकला ने नर्सिंग स्कैम में बड़ा खुलासा किया है।

यह है CMHO के लिप्त होने की वजह

चंद्रकला ने बताया कि यदि अस्पतालों का निरीक्षण ठीक से किया गया होगा और उसका नियमों से रजिस्ट्रेशन होता तो आज ये नौबत नहीं आती, उन्होंने कहा कि हमारे पास तो नर्सिंग कॉलेज संचालक 100 बीएड का अस्पताल का सर्टिफिकेट लेकर आया तो हमने मान्यता दे दी। चंद्रकला ने कहा कि कॉलेज को मान्यता देने के लिए कॉलेज का खुद का 100 बिस्तर का अस्पताल होना जरूरी होता है हमने जब 2020- 21 में मान्यता दी तो यही नियम था, जब कॉलेज संचालक CMHO के दस्तखत वाला 100 बिस्तर के अस्पताल का सर्टिफिकेट से रहे हैं तो फिर हमारा क्या दोष? यदि CMHO ही फर्जी अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन नहीं करते तो आज ये हालात पैदा नहीं होते।

गटर की बदबू और नाले की गंदगी लबालब लेकर आया मानसून, जानिए क्यों?

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मानसून का नाम लेते ही चेहरे पर सुकुन और गर्मी से राहत मिलने का आभास होने लगता है लेकिन यह आभास बारिश होनेसे पहले तक ही सुहाना लगता है और जैसेही बारिश होने लगती है सुकून काआभास अचानक ही तमाम परेशानियों में बदल जाता है और एक आम नागरिक को अपने घर या ऑफिस से निकलते ही आभास होने लगता है कि मानसून जितना सुकून लेकर आया है उससे ज्यादा तो परेशानियां सामने आ गईहै। लेकिन यह परेशानियां मानसून निर्मित हैं या गैर जिम्मेदारों द्वारा थोपी गई है यह आप खुद निर्णय लें। 

रविवार शाम को चंद पाल की बारिश ने शहर की जनता को चांद तारे दिखा दिए और शहर में ऐसे कई क्षेत्र नजर आए जहां पर सड़क पानी से लबालब नजर आए। यह पानी आसपास के नालों और सीवर से तूफानलेकर सड़कों तक पहुंच रहा था। कई मुख्य मार्गों पर लोगों को अपनी गाड़ियां निकालने में परेशानी का सामना करना पड़ा गाड़ियों के पहिए पानी में डूबे हुए नजर आए। तो वही पैदल राहगीरभी गंदे पानी मैं होते हुए निकालने को मजबूर नजर आए। हालांकि नगरनिगम ने दावा किया था कि आगामीमानसून की तैयारी के लिए नल और चैंबर साफ कर दिए गए हैं लेकिन शहर में जो हकीकत नजर आई वह इसबात पर मोहर लगा रहे थे कि यह चैंबर और नाले केवल कागजों पर साफ किए गए हैं। 

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नगर निगम की इस मेहरबानी के चलते शहर के नागरिकों ने मानसून का स्वागत गंदे बदबूदार पानी को सहते हुए और गटर की गंदगी में चलते हुए किया। शहर के कई पॉश एरिया में भी सीवर ओवरफ्लो होते हुए नजर आए जो चीज सीख कर हकीकत बता रहे थे कि उनकी सफाई नहीं की गई है। कई गली मोहल्ले में नालियां जाम होने से उनका गंदा बदबूदार पानी सड़कों पर भरा हुआ नजर आया। इन सब हकीकत की वजह से शहर की जनता जी मानसून का इंतजार कर रही थी और जिस मानसून से वह सुकून चाह रही थी उसे मानसून की वजह से थोड़ी सी बारिश होते ही नागरिकों को मजबूरी बस मानसून का स्वागत गटर की बदबू और नाले के गंदे पानी से लबालब सड़कों को सह कर करना पड़ा। 

खता तो जनता की ही है जो सिंधिया कप आयोजकों की छवि धूमिल कर रहे हैं!

ग्वालियर के शंकरपुर क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग के फाइनल मैच के दौरान जो अफरा तफरी मची, उसने कई तरह की बहस की शुरुआत कर दी है। कुछ लोग इसे आयोजकों की अवस्था का कारण बता रहे हैं तो कुछ लोग इसे जनता का हुड़दंग बता रहे हैं। अब आप लोग पूरे घटनाक्रम से खुद ही अपना निर्णय लें कि मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग के फाइनल मैच के दौरान हुई अव्यवस्था पत्थर बाजी लाठी चार्ज की वजह क्या रही।

हम आपको बता दें कि रविवार को ग्वालियर के शंकरपुर क्रिकेट स्टेडियम पर मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग का फाइनल मैच भोपाल और जबलपुर ( टीम के साथ जानवरों के नाम नहीं लिख रहे हैं क्योंकि जानवरों जैसी प्रवृत्ति शायद नाम रखने से भी आती हो) के बीच खेला गया था। कोई भी मैच या इवेंट जनता की भीड़ के बिना सफल दिखाई नहीं देता और इस इवेंट को सफल बनाने के लिए भी पूरे शहर और आसपास के शहरों की जनता को फ्री एंट्री का प्रलोभन देकर बुलाया गया था। जितनी ज्यादा भीड़ होती उतना ही ज्यादा खेल के प्रायोजक खुश होते उतना ही ज्यादा खेल के आयोजकों को वाह वाही मिलती। इस क्रिकेट स्टेडियम की क्षमता 30000 दर्शकों की है और जानकारी के मुताबिक लगभग दुगने लोग स्टेडियम तक पहुंच गए थे। लेकिन एक जानकारी यह भी है की स्टेडियम के अंदर आधी सीट खाली पड़ी हुई थी। स्टेडियम के आठ गेट में से केवल एक गेट ही जनता की प्रवेश के लिए खोला गया था बाकी तीन गेट केवल वीआईपी के प्रवेश के लिए खोले गए थे। अब यह तो पढ़े-लिखे आयोजन ही बताएं कि एक गेट से 30000 दर्शकों का प्रवेश कैसे संभव है और यदि संभव है तो फिर इस स्टेडियम में आठ गेट बनाने की फिजूल खर्ची की ही क्यों गई है?

लेकिन खबरदार जो आयोजकों की व्यवस्था पर एक उंगली भी उठाई आयोजन मिलावटी दूध की तरह पाक साफ हैं असली दोष तो जनता का है। वह जनता जो कहीं भी भीड़ का हिस्सा बन जाती है। वह जनता जो फ्री एंट्री की लालच में कई किलोमीटर दूर भी पहुंच जाती है। वही जानता जो रविवार छुट्टी के दिन अपने बच्चों की खुशियों के लिए इतनी दूर पहुंची थी। वही जानता जिसमें अपने शहर में आयोजित इतने भव्य कार्यक्रम को लेकर हर्ष उल्लास था। वही जानता जो आयोजक राजा बाबू का दीदार करना चाहती थी। वही जनता जो स्वतंत्र भारत में भी अंग्रेजों वाली पुलिस की गुंडई झेलने के लिए पैदा होती है। वही जनता जो इस देश में सिस्टम की अवस्था का शिकार होने के लिए पैदा होती है। वही जनता जो व्यवस्था में लाठी खाने के बाद कुछ दिनों में ही सब कुछ भूल जाती है। वही जनता जो कल फिर एक भीड़ के रूप में निकलेगी और ऐसे ही आयोजकों के लिए ताली पीटेगी। दोष तो उन माताओं का है जो अपने मासूमोंको गोद मैं लेकरइस सपने के साथ वहां पहुंची कि उनके नोनीहाल भी ऐसे ही सफल खिलाड़ी बन पाएंगे!

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एक समय था जब रोम जल रहा था और नीरो बांसुरी बजा रहा था आज देश के भी यही हालात हैं जनता बाहर पिट रही है और राजा बाबू अंदर ताली बजा रहे हैं। जनता केवल यह भीड़ का हिस्सा बनने की आदत छोड़ दे तो आप देखेंगे कि इन वीवीआईपी राजा बाबू को तारे जमी पर नजर आने लगेंगे।

सेक्स पॉवर बढ़ाने की ऑनलाइन विज्ञापन से सावधान। ऐसे होती है ठगी

यदि आप गूगल पर सेक्स पावर बढ़ाने की दावों का विज्ञापन देखकर उन्हें खरीदने का मूड बना रहे हैं तो सावधान हो जाइए । यह विज्ञापन ठाकुर द्वारा प्रसारित किए गए हो सकते हैं जो सेक्स पावर बढ़ाने की चाहत रखने वालों को जाल में फसाने के लिए गूगल पर डाले गए हो। गुरुग्राम पुलिस ने एक ऐसे ऑनलाइन कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है जो सेक्स पावर बढ़ाने की हर्बल दवाइयां बेचने के लिए नाम पर ठगी कर रहे थे। इस कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने 4 लड़कियों सहित 11 साइबर ठगों को मौके से गिरफ्तार किया है।  पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल फोन, सिम कार्ड व 2 सीपीयू भी बरामद किए हैं। ऑनलाइन ठगी में हर्बल दवाइयां बेचने के नाम पर ठगी करने का यह अनोखा मामला है क्योंकि गूगल पर सेक्स पावर बढ़ाने की दवाइयां का विज्ञापन देखकर लोग तुरंत लालच में आ जाते हैं और आसानी से इन तो के चंगुल में फस जाते हैं जबकि यह ठग रुपया लेने के बाद कोई दवाई ग्राहक को नहीं भेजते हैं। 

ऐसे करते थे ठगी का कारोबार

गुरग्राम के सेक्टर 18 में स्थित एक मकान में छापेमारी करने पर पुलिस ने पाया कि आरोपी अवैध तरीके से हर्बल सेक्शुअल दवाइयां बेचने के लिए फोन पर बात कर रहे थे। वे हर्बल सेक्सुअल दवाइयां ऑनलाइन बेचने के नाम पर गूगल पर एड डालते थे।  जब लोग एड में दिए हुए नंबरों पर संपर्क करते थे तो ये ऑर्डर लेकर पैसे अलग-अलग बैंक खातों में डलवा लेते थे लेकिन सामान की डिलीवरी नहीं करते थे. इतना ही नहीं, यह ग्राहकों से जीएसटी चार्ज, पैकिंग चार्ज, कोरियर चार्ज के नाम पर क्यूआर कोड/यूपीआइ आईडी के माध्यम से पैसे लेते थे।

छोटे शहरों से भी हैं आरोपी 

जिन आरोपियों को इस कमरे से पकड़ा गया है उसमें कई ग्वालियर मुरैना जैसे छोटे शहरों से हैं जो नौकरी की तलाश में दिल्ली आए होंगे। ऐसा कई बार देखा जाता है कि कॉल सेंटर में नौकरी के नाम पर छोटे शहरों के योग युवा भी दिल्ली का रुख कर लेते हैं लेकिन कुछ लोगों की मजबूरी तो कुछ लोगों के शौक उन्हें इस तरह के ठगी के कॉल सेंटर हो के चंगुल में धकेल देते हैं। शिवम दुबे निवासी गांव जोडा जिला मुरैना, आदर्श कुमार सिंह निवासी अंबेडकर कॉलोनी वसंत विहार, दिल्ली, कुशल रोहिल्ला निवासी खेड़ला, गुरुग्राम, पियूष चौहान निवासी गांव बिजोरी जिला बदायूं यूपी, विवेक चोपड़ा निवासी एनआईटी फरीदाबाद, गुलशन कुमार निवासी गांव दहीबट्टा गोपालगंज, राजकुमार निवासी गांव डेरा महरौली दिल्ली, पूजा चौहान निवासी शिव कॉलोनी, झोटवाड़ा जयपुर, भावना निवासी भिवानी, अनामिका राजावत निवासी ग्वालियर, प्रिया शर्मा निवासी देव अपार्टमेंट महिपालपुर, दिल्ली कुछ ऐसे युवा हैं जिन्हें इस ठगी के धंधे में पकड़ा गया है।

पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 120-B के तहत मामला दर्ज किया है। इन आरोपियों से पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी पिछले करीब 1 साल से कॉल सेंटर के जरिये ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे. आरोपियों को 15 हजार रुपये की सैलरी तथा ठगी से मिली रकम का 5% हिस्सा भी इन्सेंटिव के रूम में दिया जाता था। यह गैंग अब तक करोड़ों की ठगी कर चुका है। सेक पॉवर की चाह में लोग आसानी से इनकी बातों में आ जाते थे। ज्यादातर ठगी का शिकार तो शर्म के मारे शिकायत तक नहीं करते थे। 

महिला कॉन्स्टेबल संग होटल में रंगरलियां मनाते पकड़ा डीएसपी, सीएम योगी ने DSP से बना दिया सिपाही

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक पुलिस अफसर को अनुशासनहीनता की कठोर सजा दी है। वर्ष 2021 में कानपुर के एक होटल में एक महिला सिपाही के साथ पकड़े जाने वाले एक पुलिस उपाधीक्षक (DSP) रैंक के अधिकारी को अब कॉन्स्टेबल बना दिया गया है। उसे कॉन्स्टेबल बनाकर नई पोस्टिंग भी दे दी गई है।

अपने पुलिस करियर में डिमोशन का का यह तमगा पाने वाले अधिकारी का नाम कृपा शंकर कनौजिया है। पुलिस महकमे ने कृपा शंकर कनौजिया के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उन्हें उनके भर्ती वाले पद पर वापस भेजा है। कनौजिया उत्तर प्रदेश पुलिस में कॉन्स्टेबल के रूप में भर्ती हुए थे और उन्हें दोबारा वही तैनाती दे दी गई है।

अब आपको बताते हैं कि योगी सरकार को यह कार्रवाई करनी क्यों पड़ी हुआ यूं कि यह डीएसपी साथ थोड़े रंगीन मिजाज हैं और इनको अपने अधीन काम करने वाली महिला पुलिस कर्मी भी इनकी हवस के लिए नजर आती है। रंगरलिया बनाने के लिए यह सब एक महिला सिपाही को एक होटल में लेकर लेकिन इस बार उनको यह कारनामा भारी पड़ गया और उनको रंगे हाथों पकड़ लिया गया।

कृपा शंकर कनौजिया के विरुद्ध यह कार्रवाई शनिवार (22 जून, 2024) को की गई है। उनके खिलाफ 2021 से ही विभागीय जाँच प्रचलित थी। जिसके पूरे होने के बाद यह एक्शन लिया गया है। उनके खिलाफ की गई कार्रवाई के पीछे उनका 2021 का एक कारनामा है।

दरअसल, वर्ष 2021 में कनौजिया उन्नाव जिले के बीघापुर थाने में तैनात थे। यहाँ वह DSP रैंक पर थे। वह इस थाने से पारिवारिक काम का कारण बता कर छुट्टी लेकर निकले थे। इसके बाद उनका फोन बंद आने लगा था। उनकी पत्नी ने उनके थाने में फोन करके जानकारी दी थी कि वह घर पर नहीं पहुँचे। कनौजिया की पत्नी ने इसके बाद उन्नाव के एसपी से इस मामले की शिकायत की थी। कनौजिया की तलाश के लिए उनके नम्बर को सर्विलांस पर लगाया गया था। इससे मिले जानकारी के अनुसार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें कानपुर में एक होटल में पाया था। यहाँ वह एक महिला कॉन्स्टेबल के साथ मौजूद थे। उनकी पत्नी ने जब अपने आशिक मिजाज पतिदेव डीएसपी साहब को रंगे हाथों रंगरलिया मनाते हुए पकड़ा तो काफी हंगामा काटा था। महिला कॉन्स्टेबल के साथ पाए जाने के बाद कनौजिया के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई चालू कर दी गई थी। उनके खिलाफ हुई जाँच के बाद उनके खिलाफ प्रतिकूल कार्रवाई की गई और उन्हें उनके कॉन्स्टेबल पर भेज दिया गया।

कुल मिलाकर डीएसपी साहब को रंगरलिया मनाना बहुत महंगा पड़ गया एक तो अपनी पत्नी की आंखों में ही वह गिर गए और अपना परिवार ही बर्बाद कर लिया और दूसरा अपने सारे स्टार होकर अब वह एक आम सिपाही बनकर रह गए हैं अब उन्हें वेतन और सुविधाएं एक आम सिपाही के तरह ही मिलेंगे लेकिन जहां पर भी वह रहेंगे उनके साथी सिपाही अब उनको सैल्यूट करने के बजाय कुछ अलग ही निगाह से देखेंगे।