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नंबर वन स्मार्ट सिटी इंदौर में दूषित पानी से 8 की मौत, विकास की खाल में विनाश उजागर

भागीरथपुरा क्षेत्र का मंजर ऐसा था जैसे कोई महामारी फैल गई हो। और जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम हमेशा की तरह वही था कि आम मरे तो मरे हम तो किसी माननीय के चप्पल चाट कर कुर्सी पर बैठने वाले लोग हैं हमारा कोई क्या उखाड़ लेगा।

इंदौर मध्य प्रदेश: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में टंकी से सप्लाई किए जाने वाले पानी के पीने से आठ लोगों की मौत हो गई। यह कोई छोटी घटना नहीं है क्योंकि यह कोई गांव नहीं है यह कोई पिछड़ा शहर नहीं है। बल्कि यह घटना देश के नंबर वन स्वच्छतम शहर स्मार्ट सिटी इंदौर की है और इसी स्मार्ट को वाटर प्लस का तमगा भी हासिल है। वाटर प्लस का मतलब अपशिष्ट जल प्रबंधन श्रेष्ठ श्रेणी का है। इस सबके बावजूद भागीरथ पूरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से नागरिक गंदा पानी सप्लाई होने की शिकायत कर रहे थे। सोमवार को हालात इतने बिगड़ गए पानी में दूषित तत्व इतने बढ़ गए कि सैकड़ों लोगों को उल्टी दस्त डायरिया होने के चलते अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।कई लोगों की हालत गंभीर हो गई और आठ लोगों की मौत हो गई और हमेशा की तरह आम जन की मौत पर प्रशासन ने जागने का काम शुरू कर दिया।

माँ अमला ऐसे ही खबरों की सुर्खियां बना प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दे डाले। कलेक्टर शिवम वर्मा ने तुरंत कार्यवाही के मरहम से मामले को शांत करने के लिए 3 अधिकारियों पर कार्रवाई कर दी जिसमें शालिग्राम शीतोले जोनल अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। योगेश जोशी सहायक यंत्री को निलंबित कर दिया गया और उपयंत्री शुभम श्रीवास्तव की तो सेवाएं ही समाप्त कर दी गई। यकीन यह सब हुआ सैकड़ों लोगों के बीमार होने के बाद आठ लोगों की मौत के बाद लेकिन क्या इन दोषियों पर इन मौतों के चलते कोई एफआईआर दर्ज हुई इस बारे में किसी जिम्मेदार के पास कोई जवाब नहीं है जबकि होना तो यह चाहिए कि जो लोग मंच पर खड़े होकर नंबर वन स्मार्ट सिटी का तमगा।लेते हुए ठहाके मारते हैं चाहे वह निगम आयुक्त हो चाहे वह स्मार्ट सिटी सीईओ हो चाहे इंदौर के महापौर हो इन सब पर भी कार्यवाही होनी चाहिए क्योंकि जवाबदेही तो इनकी भी बनती है जो कागजों पर प्रफुल्लित होती स्मार्ट।सिटी को देखते रहे जिसमें शहर के आम नागरिक स्वच्छ जल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी मोहताज हैं।

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भागीरथपुरा क्षेत्र का मंजर ऐसा था जैसे कोई महामारी फैल गई हो। और जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम हमेशा की तरह वही था कि आम मरे तो मरे हम तो किसी माननीय के चप्पल चाट कर कुर्सी पर बैठने वाले लोग हैं हमारा कोई क्या उखाड़ लेगा। क्योंकि दूषित पानी के बाद पिछले कई दिनों से लोग बीमार हो रहे थे पहली मौत 26 दिसंबर को हो चुकी थी। इसके बाद भी अधिकारी लापरवाह रहे।सोमवार को जब सैकड़ों लोग डायरिया का शिकार हुए और चौंतीस की हालत तो इतनी बिगड़ गई कि वह अस्पताल में भर्ती हो गए। इसके बाद कहीं जाकर जिम्मेदारों के बीच खलबली मची। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भागीरथपुरा क्षेत्र में सर्वे किया तो पता चला कि लगभग सभी घरों में उल्टी दस्त के मरीज हैं। निगम ने दूषित पानी की वजह जानने के लिए क्षेत्र की वॉटर सप्लाई लाइन की जांच की तो पता चला कि जिस मुख्य लाइन में पूरे भागीरथपुरा में पानी वितरित होता है उसी के ऊपर सार्वजनिक शौचालय बना हुआ है। मुख्य लाइन फूटने की वजह से देने सीधे उसमें मिलकर नागरिकों के घर तक पहुंच रहा था और इसी वजह से लोग बीमार हो रहे थे। 

नगर निगम के सर्वे में सामने आई यह खामी साहब बता रही हैं कि नंबर वन स्मार्ट सिटी में भी किस तरह की बद इंतजामी हैं जहां वाटर सप्लाई लाइन के ऊपर ही सार्वजनिक शौचालय बना दिया गया और वाटर सप्लाई लाइन लीक होती रही हो।इतने दिनों के लीख में उसे सुधारने के लिए भी जिम्मेदारों के पास व्यवस्था नहीं थी। यह वही जिम्मेदार हैं जिन्होंने स्मार्ट सिटी की फाइलों में कागजों के घोड़े दौड़ाए होंगे। पानी की सप्लाई के बेहतरीन इंतजामात के कसीदे लिख दिए होंगे। लेकिन हकीकत में भागीरथपुरा की वाटर सप्लाई लाइन लोगों को मौत पिला रही थी। सवाल यह भी उठ रहा है कि पूरे इंदौर में ऐसे कितने भागीरथपुरा क्षेत्र के वॉटर लीकेज होंगे और इसे कितने स्थान होंगे जहां से दूषित पानी लोगों के घर तक पहुंच रहा होगा लेकिन इस बारे में जिम्मेदारों के पास कोई आंकड़ा नहीं है। 

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इतना बड़ा मामला हुआ है तो उस पर अब राजनीति भी होगी। कांग्रेस इसे मुद्दा भी बनाएगी और मुद्दा क्यों न बनाए? क्योंकि इस पूरे मामले में हम आपको एक चौंकाने वाला खुलासा कर देते हैं भागीरथपुरा वह क्षेत्र है जिसका एक बड़ा हिस्सा कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र में आता है और कैलाश विजयवर्गीय वर्तमान में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री हैं और उनके नगरीय विकास मंत्री रहते हुए इंदौर का कैसा विकास हुआ है यह घटना चीख चीख कर उसके सबूत दे रही है। डबल और ट्रिपल इंजन की हामी भरने वाली सरकार किस तरह बद इंतजामी पर मंच से ठहाके मारती है और उनके चेले नीचे बैठे ताली पीटते हैं और स्मार्ट सिटी के नाम पर ऐसे शहर बना दिए जाते हैं जिसमें जनता को शुद्ध पानी तक पीने को न मिले। यह एक घटना केवल इंदौर तक सीमित नहीं है। यह सवाल खड़े कर रही हैं उन समस्त सौ स्मार्ट सिटी के व्यवस्था पर कि स्मार्ट सिटी के नाम पर अरमुखर्व रुपया भ्रष्टाचारियों की जेब में पहुंचा दिया गया है और इन शहरों के नागरिक आज भी मूलभूत सुविधाओं के नाम पर दूषित पेयजल पीने को मजबूर हैं। भागीरथपुरा तो शुरुआत हो सकता है कि अगला नंबर आपके शहर का हो….

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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