ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर को स्वच्छता सर्वेक्षण में मिले अवॉर्ड को लेकर निगम परिषद में जमकर हंगामा हुआ। भाजपा पार्षदों ने इस अवार्ड को फर्जीवाड़े का अवार्ड बता दिया और कांग्रेस महापौर पर आरोप लगाये । वहीं कांग्रेस पार्षदों ने स्वच्छता सर्वेक्षण के मानक केंद्र सरकार के द्वारा बनाए गए हैं कहते हुए केंद्र सरकार पर ही आरोप लगा दिए। भाजपा पार्षदों का कहना था कि कुछ ही स्पॉट पर साफ सफाई कर। टीम को ले जाया गया। वहीं पर दिखाकर उस आधार पर नगर निगम ने स्वच्छ सर्वेक्षण में अवार्ड ले लिया है। ग्वालियर महापौर शोभा सिकरवार को पहले अपने शहर की स्थिति सुधारनी थी और जब उन्हें अवार्ड पर बुलाया गया तो वहां न जाते हुए अपने शहर पर ध्यान देना था।
ग्वालियर के जर्जर सड़कों, जलभराव, गंदे पेयजल और पूरी तरह फैल ड्रेनेज सिस्टम की हकीकत किसी से छुपी नहीं है। मध्य प्रदेश में जहाँ भाजपा सरकार है तो ग्वालियर निगम में कांग्रेस सत्ता में है। और ग्वालियर की बदतर हालत का दोष दोनों एक दूसरे पर मढते हैं। गुरुवार को आयोजित निगम परिषद की बैठक भाजपा पार्षदों ने नहीं चलने दी। परिषद में जमकर हंगामा हुआ। परिषद की पूरी कार्रवाई हंगामे की भेंट चढ़ गई और परिषद।को एक हफ्ते के लिए स्थगित करना पड़ा।

तमाम प्रस्तावों पर अमल न होने पर भाजपा पार्षद खासे नाराज़ नज़र आए। उनका कहना था कि महापौर उपस्थित नहीं हैं तो वह अपनी बात किसके सामने रखें। महापौर स्वच्छता सर्वेक्षण अवॉर्ड लेने दिल्ली चली गईं जबकि उन्हें पहले अपने शहर की हालत सुधारनी थी। यहां तक कि भाजपा पार्षदों ने स्वच्छ सर्वेक्षण में मिले अवार्ड को ही फर्जी बता दिया। कांग्रेस की तरफ से एमआईसी सदस्य अवधेश कौरव ने कहा की यदि अवार्ड फर्जी है तो सरकार दोषी क्योंकि स्वच्छ सर्वेक्षण के मानक केंद्र सरकार ने तैयार किए हैं। हंगामा इतना बडढा कि सभापति को परिषद एक हफ्ते के लिए स्थगित करनी पड़ी।
