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सीएमएचओ के कृपा पात्र मौत के अस्पताल,  जहां पहले होती है लूट फिर मिलेगी है मौत!

आर आर हॉस्पिटल में गुलाम नबी की मौत हुई है वह पिछले कई महीनों से मुख्य सड़क पर खुले आम बिना लाइसेंस के तमाम अनियमितताओं के साथ धड़ल्ले से संचालित था क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के रिश्वतखोरों का संरक्षण इस अस्पताल को प्राप्त था।

ग्वालियर मध्यप्रदेश: ग्वालियर के बाबा कपूर दरगाह निवासी 73 वर्षीय गुलाम नबी पैरों में दर्द को कमजोरी से परेशान था। बुजुर्ग बीमार को इलाज के लिए बड़ी उम्मीद से उसके परिवारजनों ने उसे अपने पास स्थित आरआर। हॉस्पिटल में भर्ती कराया गुलाम नबी 10। दिन तक अस्पताल में भर्ती रहा। गुलाम नबी के परिवार को जमकर लूटा गया अनाप शनाप पैसा वसूला गया और 10 दिन बाद गुलाम नबी की मौत हो गई। जिस आरआर हॉस्पिटल में गुलाम नबी की मौत हुई हॉस्पिटल पर संचालन के लिए वेद। लाइसेंस ही नहीं था लेकिन सीएमएचओ के संरक्षण में यह अवैध अस्पताल धड़ल्ले से संचालित था। जब सीएमएचओ की जिम्मेदारी होती है इस शहर में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलना चाहिए और इसके बावजूद भी यदि आपके शहर में बिना लाइसेंस के और अनियमितताओं से भरे हुए निजी अस्पताल चल रहे हों तो ऐसे अस्पतालों को सीएमएचओ का कृपा पात्र मौत का अस्पताल क्यों न कहें।

आपको बता दें कि जिस आर आर हॉस्पिटल में गुलाम नबी की मौत हुई है वह पिछले कई महीनों से मुख्य सड़क पर खुले आम बिना लाइसेंस के तमाम अनियमितताओं के साथ धड़ल्ले से संचालित था क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के रिश्वतखोरों का संरक्षण इस अस्पताल को प्राप्त था। गुलाम नबी की मौत के बाद अस्पताल के बारे में स्वास्थ्य विभाग स्वयं खुलासा कर रहा है। के 10 अप्रैल को आरआर हॉस्पिटल ने लाइसेंस के लिए आवेदन दिया था। लेकिन अस्पताल में तमाम खामियां थीं जिसके चलते पच्चीस मई को आवेदन वापस कर दिया था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को बंद करना मुनासिब नहीं समझा सब जानकारी स्वास्थ्य विभाग को होने के बावजूद खुले आम।यह अवैध अस्पताल धड़ल्ले से चलता रहा और मरीजों की जान की साथ खिलवाड़ करता रहा।

अब सवाल यह उठता है कि आप अपने क्षेत्र के जिस? निजी अस्पताल में इलाज के लिए जाएंगे। क्या वहां पर पर्याप्त सुविधाएं हैं? क्या वहाँ पर मरीज को इलाज मिलेगा या मौत? जिस तरह से अवैध रूप से संचालित आरआर। हॉस्पिटल पर चौबीस घंटे इमरजेंसी सेवाएं का बोर्ड लगा था लेकिन इमरजेंसी की कोई सुविधाएं और स्टाफ तक अस्पताल में नहीं था। स्टाफ के नाम पर अस्पताल केवल कुछ अशिक्षित कंपाउंडर और नर्स के भरोसे चल रहा था। यह केवल एक मात्र आरआरआर हॉस्पिटल नहीं है। इसी तरह के तमाम हॉस्पिटल शहर के कई क्षेत्रों में संचालित हैं जहाँ बाहर तमाम तरह की सुविधाओं का दावा किया जाता है जबकि अस्पताल में सुविधाओं का अभाव होता है। सबसे बड़ी बात रेगुलर रेगुले चेकिंग के दौरान स्वास्थ्य विभाग कर्मचारी यह सब

खामियाँ देखकर भी अपनी आँखें मूँद लेते हैं। और इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता स्वास्थ्य विभाग के इन जिम्मेदारों के आंखों पर रिश्वत का हरा चश्मा पहना दिया जाता हो!

गुलाम नबी जो दस दिन से आरआर अस्पताल में भर्ती थे, अस्पताल में ऑन कॉल आने वाले डॉक्टर संजीव थरेजा और डॉक्टर हितेंद्र यादव ने उनका ब्लड टेस्ट कराया था जिसमें गुलाम नबी को ब्लड कैंसर होने की पुष्टि हुई थी इतनी गंभीर बीमारी होने के बावजूद भी गुलाम नबी को किसी बड़े अस्पताल में भेजने के बजाय आरआर अस्पताल के डॉक्टर और संचालक गुलाम नबी के परिवार को लूटते रहे और उसका इलाज करते रहे। जबकि कैंसर के इलाज के लिए ना तो यह दोनों डॉक्टर योग्य थे उतना ही इस अस्पताल में पर्याप्त संसाधन थे। अब इतनी बड़ी लापरवाही को छुपाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जांच की चादर फैलाना शुरू कर दिया है। अस्पताल कैसे संचालित था इसकी जांच के साथ वहां पर ऑन। कॉल आने वाले दोनों डॉक्टर्स को भी नोटिस दे दिया है। 

आपको बता दें कि शहर के कई क्षेत्रों में ऐसे तमाम निजी अस्पताल संचालित हैं जहां मरीजों के लिए मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। प्रतिष्ठित स्टाफ नहीं है और डॉक्टर्स का। तो केवल बोर्ड पे नाम लिखा है वो यदा कदा। या केवल अस्पताल संचालक की कॉल पर वहां आते हैं। ऐसे तमाम अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लाइसेंस भी मिला हुआ है जहाँ इलाज के लिए मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। और अब जिस तरह से धड़ल्ले से चलने वाला आरआर अस्पताल सुर्खियों में आया है जहाँ स्वास्थ्य विभाग ने कागजों पर तो लाइसेंस नहीं दिया लेकिन अपनी मौन सहमति दे रखी थी जिसके चलते यह अस्पताल मरीजों के जान के साथ खिलवाड़ कर रहा था। ऐसे तमाम अन्य अस्पताल भी शहर में संचालित हो सकते हैं। इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। अब सवाल यह उठता है कि सीएमएचओ डॉ सचिन श्रीवास्तव क्या इस तरह के अस्पतालों पर अंकुश लगाने में कामयाब होंगे या गुलाम नबी के बाद ऐसे ही किसी न किसी मरीज की मौत होती रहेगी और यह मौत के अस्पताल धड़ल्ले से चलते रहेंगे?

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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