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माँ से प्रेम या पागलपन; माँ की लाश के साथ बेटा बेटी ने बिताए 5 दिन, रुला देने वाली हकीकत

एक मां के अपने बच्चों के प्रति प्रेम की यह एक ऐसी हकीकत है जो कहीं न कहीं हर उस व्यक्ति की आंखें नम कर गई जो वहां उपस्थित था। और हो सकता है कि हर उस व्यक्ति की आंखें भी नम कर जाए जो इस हकीकत को सुने या देखें।

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर से एक ऐसी खबर निकलकर आ रही है जो न केवल आपको हैरान कर देगी लेकिन यह सोचने पर भी मजबूर कर देगी कि इसे माँ के प्रति बच्चों का प्रेम कहें या पागलपन। टोपी बाजार क्षेत्र में रहने वाले एक भदौरिया परिवार में माँ उर्मिला भदौरिया जो शिक्षा विभाग से रिटायर्ड क्लर्क है उसकी मौत हो जाती है।उसके एक बेटा है अखंड भदौरिया और बेटी है।ऋतु भदौरिया मां की मौत के बाद बेटा बेटी किसी को नहीं बताते कि उनकी मां मर गई है और न खुद यह मानने को तैयार होते कि उनकी माँ मर चुकी है।वह मां के शव के साथ ही रहते हैं उससे बात करते हैं उसे खाना खिलाने की कोशिश करते हैं। लेकिन पांच दिन बीत जाने पर जब पूरे क्षेत्र में बदबू फैलती है और लोग पुलिस को शिकायत करते हैं तब जाकर इस मामले का खुलासा होता है।

एक मां के अपने बच्चों के प्रति प्रेम की यह एक ऐसी हकीकत है जो कहीं न कहीं हर उस व्यक्ति की आंखें नम कर गई जो वहां उपस्थित था। और हो सकता है कि हर उस व्यक्ति की आंखें भी नम कर जाए जो इस हकीकत को सुने या देखें। कुछ लोग कह रहे हैं कि बेटा अखंड और बेटी रितु मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं जबकि जानकारी मिली है कि बेटा बी.टेक. और बेटी बीएससी कर चुके हैं। हालांकि रिश्तेदार दोनों को मानसिक कमजोर मानकर उनका मजाक उड़ाते थे और माँ को अपने बच्चों का यह मजाक पसंद नहीं था इसलिए माँ ने पूरे रिश्तेदारों और समाज से दूरी बना ली थी। उनका वह मकान ही उनकी दुनिया थी उसी में मार रहती और अपने पेंशन से आए पैसों से अपने बच्चों का पालन पोषण कर रही थी। मां को अपने बच्चों से इतना प्रेम था कि वह अपने बच्चों की देखभाल को ही बस अपनी दुनिया मानती थी।

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इस पूरी घटना में यह परिवार समाज से पूरी तरह कट चुका था।मोहल्ले में ज्यादा किसी के यहां आना जाना नहीं था।रिश्तेदारी में बातचीत नहीं थी बस यही कारण बने कि यह परिवार एकांकी हो गया।मां के लिए बच्चे सब कुछ थे तो बच्चों के लिए मां सब कुछ थी और जब मां की मौत हुई तो शायद बच्चे इसे स्वीकार नहीं कर सके और मां के साथ भी वहीं पर सो जाते लेकिन कहीं ना कहीं बच्चों के मन में मां के प्रति अता प्रेम साफ परिलक्षित होता है क्योंकि इतनी बदबू की सौ दो सौ मीटर दूरी तक लोग सहन नहीं कर पा रहे थे उस बदबू में मां के शव के साथ दोनों बच्चे रह रहे थे।शव में कीड़े पड़ चुके थे लेकिन न जाने क्यों दोनों बच्चे यह बात किसी से नहीं कह रहे थे।

ग्वालियर की टोपी बाज़ार के जालम सिंह के बाड़े में रहने वाली माँ उर्मिला भदौरिया। अपने पति को पहले ही खो चुकी थी पूरी जिंदगी नौकरी करके उन्होंने बच्चों को पाला बच्चों को पढ़ाया लिखा। बच्चों की मानसिक कमजोरी को हराया समाज के सामने डटकर खड़ी रही और अपने बच्चों की हिम्मत बनी रही लेकिन जब उनकी सांसे थमी तो एक भयावह मौत उनको देखने को मिली कि उनके शव का विधिवत अंतिम संस्कार नहीं हुआ। कुछ लोग इसे दोनों बच्चों का मां के प्रति प्रेम कह रहे हैं।तो कुछ लापरवाही कह रहे हैं तो कुछ अभी भी इसे दोनों के पागलपन की इंतहा बता रहे हैं। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के समय 50 m दूर ही भयंकर बदबू थी। सभी पुलिसकर्मी मास्क लगाकर घर में घुसे और कमरे का दश देखकर हर किसी की आंखें नम हो गई।

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यह घटना एक और तो एक माँ और उसके दो बच्चों की कहानी है लेकिन दूसरी ओर यह हमारे उस समाज की भी कहानी है जो तकनीक की दौड़ में सामाजिक समरसता के मामले में कंगाल हो चुका है। एक परिवार सबसे अलग थलग होकर एकांकी जीवन कई सालों से बिता रहा था लेकिन

कथित समाज जो आस पड़ोस रिश्तेदारों और पहचान वालों से मिलकर बनता है वह संवेदनशील हो चुका था उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि एकांकी जीवन जी रहा। यह परिवार अवसाद में चला जाएगा। इनकी मानसिक हालत और खराब हो जाएगी क्योंकि यदि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर है तो उसका साथ देकर उसके साथ घुल मिलकर उसको मजबूती प्रदान की जा सकती है।लेकिन इस पूरे मामले में यह हकीकत भी सामने आ रही है कि हमारा सामाजिक ढांचा पूरी तरह बिखर चुका है। क्योंकि रोज यदि अड़ोस पड़ोस का आना जाना इनके घर होता तो इस मां की मौत के बाद इसका अंत इतना दर्दनाक न होता?????

खबर का अगला भाग कुछ ही घंटों में…

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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