जबलपुर मध्य प्रदेश: न्यायालय में न्याय का पहिया इतना धीमा चलता है कि कई बार न केवल पीड़ित बल्कि न्यायाधीश भी परेशान रहते हैं। तमाम न्यायविद भी इस पर कई बार चिंता व्यक्त कर चुके हैं। देश के तमाम अदालतों में हजारों लाखों के स्पेंडिंग है और यह पेंडेंसी कम हो इसको लेकर तमाम प्रयास किए जाते रहे हैं। अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court: 4.82 लाख मामले पेंडिंग, निपटारे के लिए लिया ऐतिहासिक फैसला) ने लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की पहल पर पहली बार 10 जजों की विशेष बेंच गठित की है, जो पिछले शनिवार 20 सितंबर से सुनवाई कर रही है। यह बेंच न केवल सामान्य कार्यदिवसों में बल्कि गर्मी और सर्दी की छुट्टियों में भी काम करेगी। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा के निर्देश पर जमानती मामलों के लिए विशेष रोस्टर भी शनिवार से लागू किया गया है।
- मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में इस समय लगभग 4.82 लाख मामले लंबित-
- 0 से 10 साल पुराने 1,34,524 आपराधिक केस
- 11 से 25 साल पुराने 59,424 केस
- 25 साल से अधिक पुराने 2,507 केस अब भी पेंडिंग.
- केवल जमानत याचिकाओं के करीब 3,000 केस महीनों से लंबित.
- भोपाल, इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में स्वीकृत 53 न्यायाधीश पदों में केवल 43 कार्यरत.
- अनुमान है कि यह स्पेशल बेंच सालभर में 30 से 50 हजार मामलों का निपटारा कर सकती है.
- प्रत्येक जज के सामने औसतन 100 केस पेश होंगे.
- बार एसोसिएशन को उम्मीद—एक हफ्ते में सभी जमानती मामलों का निराकरण संभव.
- 31 दिसंबर तक 50 छुट्टियां, बावजूद इसके शनिवार को सुनवाई कर लंबित मामलों को निपटाने की तैयारी.
- चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा के निर्देश पर विशेष रोस्टर जारी।

31 दिसंबर तक करीब 50 छुट्टियां पड़ रही हैं। दशहरा, दीपावली और अन्य त्योहारों के चलते छुट्टियां ज्यादा हैं। इतनी सारी छुट्टियां भी तमाम फैसलों के निपटाने में एक बड़ी बाधा हैं इसके बावजूद शनिवार को सुनवाई जारी रखकर लंबित मामलों को निपटाने का प्रयास किया जाएगा। शनिवार से बनने वाली इन विशेष बेंचों में प्रत्येक जज के सामने औसतन 100 केस पेश किए जाएंगे। बार एसोसिएशन को उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर सभी लंबित जमानती मामलों का निराकरण हो जाएगा और इसके बाद नए मामलों की सुनवाई निर्बाध रूप से हो सकेगी। MP High Court: 4.82 लाख मामले पेंडिंग, निपटारे के लिए लिया ऐतिहासिक फैसला
निसंदेह यह एक प्रशंसनीय कदम है और यदि इस पर ठीक से अमल होता है तो न्यायालय में पेंडिंग मामलों की संख्या में कमी आएगी। साथ ही न्याय के नैसर्गिक सिद्धांत का भी क्रियान्वयन हो सकेगा। शनिवार को भी सौ केस पेश किए जाने से कुछ केसों की पेंडिंग में कमी आएगी।यदि यह प्रयोग सफल होता है तो संभावना है के आगे इस तरह के और कई फैसले भी लिए जा सकते हैं ताकि पेंडिंग केस का भार कम हो सके।
