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10 साल से दबा एआरटीओ भर्ती घोटाला एक बार फिर सवालों के घेरे में

एआरटीओ भर्ती प्रक्रिया के मामले में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि ए आरटीओ के 13 पदों के लिए भेजी गई मांग को विभाग ने गलती से दूसरी बार भेज दिया था और इस गलती के बाद इसे सुधारने की बजाय भुला दिया गया। विभाग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

ग्वालियर मध्य प्रदेश: अपनी गर्व झाले और नियमबद्ध कारनामों के लिए पहचान रखने वाले मध्यप्रदेश परिवहन विभाग का एक कारनामा एक बार फिर सुर्खियों में हालांकि मामला दस साल पुराना है और काफी लंबे समय से दबाए रखा गया था लेकिन अब कैग ने अपनी रिपोर्ट में इस अनियमितता पर सवाल उठाए हैं। मामला दो हजार चौदह में एआरटीओ की तेरह पदों पर भर्ती से जुड़ा हुआ है। जब इन तेरह पदों पर एक बार की जगह दो बार भर्ती कर दी गई और कुल छब्बीस अभ्यर्थियों को सेलेक्ट किया गया लेकिन जब दूसरी बार भर्ती किए गए तेरह एआरटीओ को पोस्टिंग नहीं मिली और वह कोर्ट पहुंचे तब मामले का खुलासा हुआ।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग की रिपोर्ट में परिवहन विभाग की एआरटीओ भर्ती प्रक्रिया के मामले में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि ए आरटीओ के 13 पदों के लिए भेजी गई मांग को विभाग ने गलती से दूसरी बार भेज दिया था और इस गलती के बाद इसे सुधारने की बजाय भुला दिया गया। विभाग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इस वजह से तेरह पदों के लिए कुल छब्बीस अभ्यर्थियों का चयन हो गया और बाद में चयनित तेरह अभ्यर्थियों को पोस्टिंग नहीं मिल पाई।

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कैग की रिपोर्ट में बताया गया है की दो हजार चौदह में तेरह पदों के लिए मांग भेजी थी जिस पर परीक्षा कराकर अगस्त दो हजार सोलह में तेरह अभ्यर्थियों के भर्ती की अनुशंसा की गई और दिसंबर दो हजार सोलह में उन्हें नियुक्तियां दे दी गई लेकिन दो हजार चौदह सितंबर में इन्हीं पदों के लिए फिर से मांग भेजी थी जिस पर फिर से परीक्षा दिसंबर दो हजार चौदह में आयोजित हुई और तेरह अभ्यर्थियों के भर्ती की अनुशंसा फिर से कर दी गई। इस गड़बड़ का पता चलने के बाद विभाग ने दस साल तक मामला दबाए रखा। जब दूसरे सूची के अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिली तो मामला न्यायालय पहुंचा और शासन ने पदोन्नति के उन्नीस पदों में से समायोजन कर इन तेरह अभ्यर्थियों में से नौ अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी।

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केग की रिपोर्ट में बताया गया है यह एक गंभीर चूक है। यह आंतरिक नियंत्रण की विफलता है और इसमें जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है। यह मामला परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है जहां एक ही पदों पर दो बार भर्ती प्रक्रिया कर दी गई। साथ ही परिवहन विभाग के अधिकारियों ने इस गड़बड़ को सुधारने की बजाय दस साल तक दबाकर रखा। हालांकि इस मामले में अभी तक किसी दोषी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है जबकि शासन को पूरी तरह से इस मामले की जानकारी है।अब देखना होगा कि कैग रिपोर्ट के बाद इस मामले में दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है?

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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