ग्वालियर मध्य प्रदेश: जिला शिक्षा विभाग ग्वालियर अपनी कार्यशैली को लेकर एक बार फिर चर्चाओं में हैं। शासन प्रशासन के तमाम आदेश और नियमों को ताक पर रखकर कई बार निजी स्कूल अपनी मनमानी करते नजर आते हैं और इसके बावजूद भी जिला शिक्षा विभाग इस तरह आंखें मूंदे बैठा रहता है कि मानो इन निजी स्कूलों को मौन सहमति दे रखी हो।ऐसा ही मामला श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल का है। जिसने सारे नियम कायदे ताक पर रखे हुए हैं और इसके बावजूद भी शिक्षा विभाग स्कूल पर किसी तरह की भी कार्रवाई करने में सक्षम नजर नहीं आ रहा है।
आपको बता दें कि भीषण गर्मी को देखते हुए ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर जिला शिक्षा विभाग ने सत्ताईस अप्रैल से तीस अप्रैल तक आठवीं कक्षा तक के स्कूल बंद किए जाने का आदेश जारी किया था, लेकिन इस आदेश को दरकिनार करते हुए श्री चेतन्य टेकने स्कूल आनंद नगर सत्ताईस अप्रैल को संचालित हो रहा था, जिसकी जानकारी तुरंत जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी को दी गई थी। इसके बाद हरिओम चतुर्वेदी ने खानापूर्ति के लिए एपीसी और बीआरसी को जांच के लिए स्कूल भेजा था। लेकिन आज तीस तारीख तक जांच का खेल जारी है और जिला शिक्षा विभाग स्कूल पर कार्रवाई से बचता नजर आ रहा है या कहें तो स्कूल को संरक्षण देता नजर आ रहा है।
आपको बता दें कि भीषण गर्मी को देखते हुए ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर जिला शिक्षा विभाग ने सत्ताईस अप्रैल से तीस अप्रैल तक आठवीं कक्षा तक के स्कूल बंद किए जाने का आदेश जारी किया था, लेकिन इस आदेश को दरकिनार करते हुए श्री चेतन्य टेकने स्कूल आनंद नगर सत्ताईस अप्रैल को संचालित हो रहा था, जिसकी जानकारी तुरंत जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी को दी गई थी। इसके बाद हरिओम चतुर्वेदी ने खानापूर्ति के लिए एपीसी और बीआरसी को जांच के लिए स्कूल भेजा था। लेकिन आज तीस तारीख तक जांच का खेल जारी है और जिला शिक्षा विभाग स्कूल पर कार्रवाई से बचता नजर आ रहा है या कहें तो स्कूल को संरक्षण देता नजर आ रहा है।

जिला शिक्षा अधिकारी से आज जब इस बारे में जानकारी लेनी चाहिए तो दिन में कई बार उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने के बावजूद उन्होंने फोन नहीं उठाया। इस वजह से यह जानकारी नहीं मिल सकी कि श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल पर की गई जांच का क्या निष्कर्ष निकला और शिक्षा विभाग स्कूल पर क्या कार्रवाई कर रहा है। आपको बता दें कि स्कूल की जांच की प्रथम रिपोर्ट को नकारने की बात जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने अट्ठाईस अप्रैल को हमसे मोबाइल पर चर्चा के दौरान की थी और साथ में उन्होंने यह भी कहा था कि जाँच में उन्हें स्वयं संतोषजनक बिंदु नहीं नहीं दिखा रहे हैं, इसलिए उन्होंने जांच के लिए टीम को भेजा है। अट्ठाईस अप्रैल को जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी कार्रवाई को लेकर काफी सकारात्मक नजर आ रहे थे। और जिस तरह के वीडियो हमने उन्हें भेजे थे उससे वे सहमत थे कि स्कूल संचालित हुआ है और छोटे छात्रों की कक्षाएं लगी हैं।
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अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि पहली जांच सही नहीं थी तो जिला शिक्षा विभाग की टीम ने किस दबाव में स्कूल के पक्ष में जांच रिपोर्ट पेश की? दूसरा सवाल यह भी उठ रहा है कि अभी तक दूसरी जांच की गई है या नहीं?तीसरा सवाल यह भी उठ रहा है कि जब जिला शिक्षा अधिकारी स्वयं इस जांच से संतुष्ट नहीं थे। तो उन्होंने जांच अधिकारियों को क्या कोई कारण बताओ नोटिस दिया या उनसे कोई स्पष्टीकरण मांगा? जिस तरह से जिला शिक्षा विभाग निजी स्कूल के रसूख के आगे दबता नजर आ रहा है, वह साफ बता रहा है कि जांच के नाम पर केवल टालमटोली का खेल चल रहा है।
यहां सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन ने ही स्कूल बंद किए जाने का आदेश जारी किया था और जिला शिक्षा विभाग अपने ही आदेश का पालन कराने में असफल साबित हुआ है।जब ऐसे आदेशों का पालन होना ही नहीं होता तो ऐसे आदेश निकाले क्यों जाते हैं? इस तरह से आदेशों की अवहेलना होने से कहीं ना कहीं जिला प्रशासन की किरकिरी होती है। साथ ही संबंधित स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावकों के मन में यह डर भी व्याप्त होता है कि स्कूल में कुछ भी गड़बड़ हो रहे लेकिन उसकी शिकायत शिक्षा विभाग या प्रशासन से करने का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि स्कूल का रसूख तो इतना है कि प्रशासन के आदेश की अवहेलना यह स्कूल खुलेआम करता है तो किसी आम अभिभावक की शिकायत से होगा ही क्या?
यहां सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन ने ही स्कूल बंद किए जाने का आदेश जारी किया था और जिला शिक्षा विभाग अपने ही आदेश का पालन कराने में असफल साबित हुआ है।जब ऐसे आदेशों का पालन होना ही नहीं होता तो ऐसे आदेश निकाले क्यों जाते हैं? इस तरह से आदेशों की अवहेलना होने से कहीं ना कहीं जिला प्रशासन की किरकिरी होती है। साथ ही संबंधित स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावकों के मन में यह डर भी व्याप्त होता है कि स्कूल में कुछ भी गड़बड़ हो रहे लेकिन उसकी शिकायत शिक्षा विभाग या प्रशासन से करने का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि स्कूल का रसूख तो इतना है कि प्रशासन के आदेश की अवहेलना यह स्कूल खुलेआम करता है तो किसी आम अभिभावक की शिकायत से होगा ही क्या?
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स्कूल बंद किए जाने के आदेश के बाद भी श्री चेतन्य टेक्नो स्कूल की संचालित कक्षाएं कहीं न कहीं शिक्षा विभाग को कठघरे में खड़ी कर रही हैं। शिक्षा विभाग के पास तमाम पुख्ता साक्ष्य भेजने के बावजूद भी शिक्षा विभाग जिस तरह कार्रवाई करने से बच रहा है, वह शिक्षा विभाग और इस निजी स्कूल के बीच में बड़ी सांठगांठ का संशय पैदा कर रहा है। साथ ही इस बात पर भी मुहर लगा रहा है कि जिला शिक्षा विभाग किसी न किसी प्रभाव या दबाव में निजी स्कूलों को संरक्षण देते रहते हैं, यही कारण है कि जिला प्रशासन के तमाम तावों के बावजूद कई स्कूल ऊंची कीमत पर स्कूल की किताबें और कॉपियां बेच लेते हैं और शिक्षा विभाग खामोशी से सब कुछ देखता रहता है। संभवतः आम अभिभावकों को भी शिक्षा विभाग और निजी स्कूल के इस साठगांठ का पता होता है, इसलिए ज्यादातर अभिभावक शिकायत तक नहीं करते हैं और संभवतः ऐसा ही चेतन्या टेक्नो स्कूल के मामले में भी हुआ है कि धूप में अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए मजबूर अभिभावकों में से ज्यादातर स्कूल के रसूख के आगे और शिक्षा विभाग की मिलीभगत के चलते खामोश हैं। शिक्षा विभाग की निष्पक्ष जांच के इंतजार में…
