Indore fire tragedy a lesson; इंदौर के बंगाली चौराहे के पास स्थित एक कॉलोनी में बुधवार भोर में भीषण हादसा हो गया। एक मकान में इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। इस हादसे में आठ लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि 3 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। पुगलिया परिवार के घर के बाहर देर रात इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग पर लगी हुई थी। सुबह करीब 4 बजे चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे कार में आग लग गई। आग तेजी से फैलते हुए घर तक पहुंच गई और अंदर रखे गैस सिलिंडरों को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने के बाद घर में रखे सिलिंडरों में धमाके शुरू हो गए। पुलिस के अनुसार एक के बाद एक चार सिलेंडर फटे, जिससे मकान का एक हिस्सा ढह गया।
इस घटना के बाद हर कोई अचंभित है, हैरान है और हर व्यक्ति के मन में यह सवाल उठ रहा है कि इस भयावह हादसे का कारण क्या रहा होगा? तो आइए हम उन कारणों की भी गहन जांच करते हैं और साथ में यह उपाय ढूंढने का भी प्रयास करते हैं कि आने वाले समय में आपके घर में ऐसे हादसे न हो। हकीकत यह है कि हादसा जब होगा तो होगा ही, लेकिन यदि आपके कुछ उपाय मजबूत हो तो हादसा इतना भयावह न हो।इसे रोकने का प्रयास तो किया ही जा सकता है क्योंकि इस घटना में कई ऐसी छोटी लापरवाही सामने आई है जिसकी वजह से यह हादसा हुआ है या इस हादसे की प्रचंडता बढ़ी है।
जिस तरह की खबरें सामने आ रही हैं, वह बताती हैं कि बुगलिया परिवार ने अपनी इलेक्ट्रिक कार टाटा पंच रात में चार्जिंग के लिए लगाई थी और रात को चार्जिंग पर कार लगा के सो गए थे। यह एक प्रकार की लापरवाही है। रात में कार फुल चार्ज होने के बाद ओवरहीटिंग के चलते शॉर्ट सर्किट हो सकता है। कभी भी इस तरह से अपने इलेक्ट्रिक वाहन को रात में चार्ज पर लगाकर न सोएं। यह लापरवाही जिस तरह उगलिया परिवार के लिए जानलेवा साबित हुई है, उसी तरह आपके किसी परिवार के लिए भी जानलेवा साबित हो सकें। कार को या इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज पर लगाकर नहीं छोड़ना है। यह सावधानी आपको किसी भी दुर्घटना से बचा सकती है।
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इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज करते समय जिस सॉकेट का और बोर्ड का प्रयोग किया गया था, संभवतः वह अच्छी हालत में नहीं था। वहां शॉर्ट सर्किट होने से तुरंत मेन मीटर पर आग पहुंच गई थी, जो पूरे मोहल्ले की सप्लाई वाले खंभे तक पहुंची। यह घटना साफ बताती है कि कहीं न कहीं इलेक्ट्रिक कार को जहां चार्जिंग के लिए लगाया गया था, वह बिल्कुल मेन लाइन के और मीटर के नजदीक था और वहां पर प्लग सॉकेट एयरलाइन सही हालत में नहीं थी। यदि आप के घर में कोई इलेक्ट्रिक सप्लाई या प्वाइंट खराब है तो उन्हें तुरंत सही करवा लें। यदि वहां से चिनगारी निकलने की कोई भी घटना हो रही हो तो उसे हल्के में ना लें।
इस पूरी घटना में एक बात यह भी निकल कर आई है कि फुगलिया परिवार जिस मकान में रह रहा था उसमें उन्होंने डिजिटल लॉक लगाए हुए थे।शॉर्ट सर्किट के बाद जब पावर सप्लाई बंद हुई तो डिजिटल लॉक ने काम करना बंद कर दिया और यही कारण रहा कि घर के लोग सुबह चार बजे आग की घटना देखकर जाग तो गए, लेकिन उन्हें घर से बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला।उनकी यह छोटी सी सुविधा, जिसमें उन्होंने डिजिटल लॉक प्रयोग किए थे, वह उनके लिए जानलेवा साबित हुई। यह घटना बताती है कि यदि घर में मैनुअल लॉक होते तो घर के लोग उन्हें खोलकर तुरंत बाहर निकल सकते थे। ज्यादा तकनीक के भरोसे रहना भी आपके लिए जानलेवा हो सकता है।
हम आजकल सुरक्षा को देखते हुए ऐसे घर बनाते हैं जिसमें निकासी का कोई दूसरा रास्ता नहीं होता।ज्यादातर घरों में चारों तरफ से बड़ी बड़ी ग्रिल्स लगा दी जाती हैं।चोरी और सुरक्षा के मद्देनजर घर को इतना खुफिया बनाया जाता है कि कोई उसमें घुस न सके और यह जरूरी भी है, लेकिन घर के निर्माण के समय यह बात भी ध्यान रखना चाहिए कि कोई बाहर से अंदर न आए, लेकिन किसी विषम परिस्थिति में घर के अंदर से बाहर जाने के लिए वैकल्पिक रास्ते हो। घर के निर्माण के समय इस बात का ध्यान नहीं रखा जाता बगलिया। परिवार के इस घर में बालकनी भी पूरी तरह पैक थी और घर में एक मेन गेट के अलावा कोई और निकासी का रास्ता नहीं था। घर का अत्यधिक पैग्ड और सुरक्षित होना भी इस घटना में कहीं न कहीं अधिक मौत का कारण बना है।
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अभी हाल ही में ग्वालियर के बालाबाई के बाजार में लगी आग में आग भयंकर भड़की थी और कई घंटों तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका था, लेकिन इस दौरान छत के रास्ते से लोग निकलकर बगल के घर से सुरक्षित बच गए थे। ग्वालियर में जिस तरह से छत से बचकर निकलने का सुरक्षित विकल्प था, संभवतः पगलिया परिवार के घर में उनके छत से निकलने का भी विकल्प नहीं रहा होगा, जिसके चलते वे लोग घर में फंस गए। संभवतः यह प्रयास हमेशा होना चाहिए कि आपके घर से छत से अंदर आने का रास्ता सुरक्षित हो, लेकिन बाहर जाने का विकल्प हमेशा आपके परिवार के हर सदस्य के पहुंच में होना चाहिए ताकि विषम परिस्थितियों में वह छत के मार्ग से स्वयं का बचाव कर सके।
पगलिया परिवार के घर में जिस समय आग लगी वह सुबह का समय था, संभवतः यह कारण भी रहा होगा कि आग लगने के बाद काफी देर तक फैल गई होगी।उसके बाद पता चला होगा क्योंकि पुगलैया परिवार उसके आसपास के लोग गहरी नींद में सो रहे होंगे।घटना का सुबह के समय होना भी एक कारण हो सकता है जिसकी वजह से परिवार को पड़ोसियों की और प्रशासनिक मदद देर से मिली। क्योंकि घटना ऐसे समय होती है जब लोगों की निगाह में आ जाए तो लोगों की मदद से घटना की इंटेंसिटी को कम किया जा सकता है।
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यह जानकारी भी सामने आ रही है के पुगलिया परिवार के घर में कई गैस सिलेंडर रखे हुए थे।गैस सिलेंडर या इस तरह की तमाम चीजों का घर में होना जो आग को और विकराल कर सकते हैं।यह भी आज के समय में एक समस्या बन चुकी है।कई घरों में इस तरह का इंटीरियर और फर्नीचर लगाया जाता है जो तुरंत आग पकड़ लेता है या आग को और भड़काता है और घर में ऐसे तमाम अन्य साधन भी उपयोग किए जाते हैं जैसे एयर कंडीशनर एलपीजी सिलेंडर और अन्य जो आग को भड़काने का काम करते हैं। इस तरह की तमाम चीजें भी आजकल आग की घटनाओं में भयावह परिणाम दे रही हैं।प्रयास यह करना चाहिए कि घर के इंटीरियर के समय ऐसी सामग्री प्रयोग किया जाए जो फायर रजिस्टेंस हो।
इंदौर में पुगलिया परिवार के साथ हुई घटना दुखद है। एक साथ एक ही परिवार में आठ लोगों की मौत होना और तीन लोगों का गंभीर रूप से अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होना पूरे परिवार और रिश्तेदारों के लिए अत्यंत दुखद घटना है और उन्हें इस घटना से बाहर निकलने में महीनों लग जाएंगे, लेकिन यह घटना एक सबक हो सकती है।इस घटना को कुछ दिनों में भूलने के बजाय, इस घटना से यह सीख लेने की जरूरत है कि हम अपने घर को किस तरह इस तरह की विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार कर सकते हैं। हम अपने घर में ऐसे क्या परिवर्तन कर सकते हैं जिससे ऐसी कोई घटना न हो और हो भी तो उससे बचने के विकल्प हमारे पास हों।
