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सीएम ऑफिस कर्मचारी बनकर डिप्टी कलेक्टर से तीन लाख की ठगी

डिप्टी कलेक्टर अरविंद सिंह माहौर कुछ महीने पहले पूरे देश में सुर्खियों में थे क्योंकि यह एक मां बेटी को फोन पर धमका रहे थे जिसका वीडियो वायरल हुआ था और उसके बाद इन्हें निलंबित करके इन पर विभागीय जांच बिठा दी गई थी। और उसी मामले को रफा दफा करने की लालच में डिप्टी कलेक्टर साहब अब ठगों का शिकार बन गए।

ग्वालियर मध्य प्रदेश: जब भी कोई ठगी का शिकार शिकायत करने थाने पहुंचता है और थाने में पुलिसकर्मियों द्वारा उससे कहा जाता है कि क्या पढ़े लिखे नहीं हो?कैसे बातों में आ गए तो ऐसे आम ठगे हुए पीड़ित देख लें कि अब ठगी का शिकार सरकारी पदों पर रहने वाले बड़े बड़े शिक्षित अधिकारी भी होने लगे हैं। अभी कुछ दिन पहले हरियाणा के एक पूर्व आईजी का करोड़ों रुपए के ठगी का शिकार होने का मामला सुर्खियों में था जिसके बाद उन्होंने आत्महत्या तक कर ली थी।अब ग्वालियर में भी एक ऐसा ही ठगी का मामला सामने आ रहा है जहां एक एसडीएम को ठगी का शिकार बनाया गया है। हालांकि पीड़ित एसडीएम है इसके चलते तुरंत एफआईआर दर्ज करके कार्यवाही शुरू कर दी गई है।

मामला ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र का है जहां डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर रहते हैं। उनका कहना है कि एक ठग ने खुद को मुख्यमंत्री कार्यालय का कर्मचारी बताया और उनके ऊपर चल रही विभागीय जांच में सजा कम कराने का झांसा देकर उनसे अपने खातों में समय समय पर रकम लेते हुए कुल दो लाख पंचानबे हजार रुपए ठग लिए। आपको बता दें कि डिप्टी कलेक्टर अरविंद सिंह माहौर कुछ महीने पहले पूरे देश में सुर्खियों में थे क्योंकि यह एक मां बेटी को फोन पर धमका रहे थे जिसका वीडियो वायरल हुआ था और उसके बाद इन्हें निलंबित करके इन पर विभागीय जांच बिठा दी गई थी। और उसी मामले को रफा दफा करने की लालच में डिप्टी कलेक्टर साहब अब ठगों का शिकार बन गए।

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पूरे मामले में डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर का कहना है कि कुछ दिन पूर्व एक अनजान नंबर से उनके पास कॉल आया था जो उन्होंने रिसीव नहीं किया था और इसके बाद उनके कलेक्टर ने उन्हें कहा कि सीएम पोर्टल से उनके पास फ़ोन आ रहा है तो वह फ़ोन रिसीव क्यों नहीं कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने फ़ोन रिसीव किया जिस पर ट्रूकॉलर पर सीएम पोर्टल लिखा हुआ था।कॉल करने वाले ने खुद को सीएम ऑफिस का कर्मचारी बताया और विभागीय जांच की कार्रवाई में सजा कम करवाने का भरोसा दिलाया लेकिन इसके साथ इस काम के लिए पैसे की भी मांग की। डिप्टी कलेक्टर साहब तो मामले में फंसे ही हुए थे और उन्हें भी मामले को रफा दफा करके पाक साफ होने का लालच था। इसी लालच के चलते वह ठग के झांसे में आ गए। 

डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर का कहना है कि उन्नीस सितंबर से एक अक्टूबर के बीच उन्होंने इस ठग के खातों में कुल दो लाख 95 हजार रुपये जमा किए। इसके बाद भी यह ठग लगातार पैसों की मांग करता रहा।तब अरविंद माहौर को शक हुआ कि कहीं यह व्यक्ति उन्हें बेवकूफ तो नहीं बना रहा। यह देखते हुए उन्होंने अभी हाल ही में डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई ई एफआईआर माध्यम का उपयोग किया और एफआईआर दर्ज करा दी और अभी हाल ही में यह एफआईआर थाटीपुर थाने में कायमी के लिए पहुंची है। और जब डिप्टी कलेक्टर साहब थाने में एफआईआर पर हस्ताक्षर करने पहुंचे। तब इस मामले का खुलासा हुआ कि विभागीय जांच को रफा दफा करने की लालच में डिप्टी कलेक्टर साहब ठगी का शिकार हो चुके हैं। 

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Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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