ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर के गोले का मंदिर क्षेत्र में नॉनवेज में चिकन और फिश बदल जाने को लेकर ग्राहक और दुकानदार में विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्ष थाने पहुंच गए और थाने पहुंचे तो मामला और गरमा गया।ग्राहक पक्ष के तरफ से आए हुए वकीलों ने जब कानून का पाठ पढ़ाने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें भी पुलिसिया डंडे से सबक दे दिया। चिकन और फिश का यह विवाद इतना बढ़ गया कि घंटों तक थाने में घमासान होता रहा। दोनों में से कोई पक्ष झुकने को तैयार नहीं था और ग्राहक ने तो पुलिस पे भी दुकानदार के पक्ष में होने का आरोप तक लगा दिया। ग्राहक पक्ष में वकील थे और जब पूरा बार असोसिएशन थाने पहुंच गया तो पुलिस के आला अधिकारियों को कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी सहित पांच पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच करना पड़ा।
घटना के दौरान थाने पहुंचे सत्यम भदौरिया ने मीडिया को बताया कि वह सोनू चौहान की दुकान पर मछली खाने गए थे। उन्होंने मछली का ऑर्डर दिया था लेकिन दुकानदार ने जबरदस्ती चिकन परोस दिया और बदल भी नहीं रहा था। इसके बाद दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया।जब सत्यम भदौरिया और उनके भाई जो पेशे से वकील हैं थाने पहुंचे तो थाने में दूसरा पक्ष भी पहुंच गया। थाने के अंदर भी दोनों पक्षों में जमकर घमासान हुआ और पुलिस ने भी कोई कमी कानून अपने हाथ में लेने में नहीं छोड़ी। ग्राहक पक्ष के लोगों को एक कमरे में बंद करके उनकी जमकर कुटाई कर दीवालों में वकील भी था इसलिए कुछ समय बाद ही उसकी सूचना पर बार असोसिएशन भी थाने पहुंच गया। 9 बजे शुरू हुआ विवाद रात के तीन बजे तक चलता रहा। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन पाठक ने द इंगलेज पोस्ट को बताया कि एसएसपी धर्मबीर सिंह ने थाना प्रभारी गोले का मंदिर हरेंद्र शर्मा सहित पांच लोगों को लाइन अटैच कर दिया है लेकिन हमारी मांग पांचों पर एफआईआर किए जाने की है।
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इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि जब दो पक्षों में विवाद के बाद पक्ष थाने पहुंचे थे तो पुलिस को सूझबूझ अपनाते हुए कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करनी थी। लेकिन पुलिस ने दुकानदार का पक्ष लेने का प्रयास किया जिसके चलते ग्राहक पक्ष आक्रोशित हो गया और उनके साथ में वकील होने की वजह से भी वह अपने हक और कानून का पाठ पुलिस थाने को पढ़ाने लगे। ऐसा बताया जा रहा है कि पुलिस को वकीलों द्वारा कानून की सीख दिया जाना नागवार गुजरा जिसके चलते कुछ पुलिसकर्मियों ने आपा खो दिया। इस पूरे मामले में गंभीर बात यह रही कि थाने में टीआई हरेंद्र शर्मा भी मौजूद थे। उनकी मौजूदगी में भी थाने में यह हालात बने रहे और इसे हल करने की बजाय वह भी मारपीट में शामिल हो गए।
एक दुकान पर मछली से मुर्गा बदलने का यह विवाद इतना बढ़ गया कि कई लोगों को मारपीट का शिकार होना पड़ा। दोनों पक्षों में कई लोगों को चोट आई और पुलिस ने स्थिति को सुधारने के बजाय और बिगाड़ दिया और अंत में पांच पुलिसकर्मियों को भी लाइन अटैच होना पड़ा। पवन पाठक का कहना है कि पुलिस की बर्बरता लगातार बढ़ती जा रही है और यदि वकील के साथ इस तरह व्यवहार पुलिस करती है तो इन थानों में आम आदमी के साथ क्या होता होगा साथ ही उन्होंने थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया। पवन पाठक का साफ कहना है कि वकीलों के साथ यह दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इन पुलिसकर्मियों पर एफआईआर की मांग की गई है। आला अधिकारियों ने दो दिन का समय मांगा है। यदि दो दिन में एफआईआर नहीं होती तो बार आगे की कार्रवाई के लिए विचार करेगा।
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