ग्वालियर मध्य प्रदेश: लंबे समय से ग्वालियर में सवर्ण और दलितों के बीच में टकराव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन के आधे अधूरे प्रयासों के चलते यह टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।अभी हाल ही में शिवपुरी में मंच से एक दलित नेता ने मनुस्मति जला दी और तमाम शब्द कहे और इसके बाद ग्वालियर में भी डॉ अंबेडकर की फोटो को जलाने की घटना हुई। शुक्रवार को भी दोपहर में एक युवा वकील ने अंबेडकर के पुतले को आकाशवाणी चौराहे पर जलाने का प्रयास किया और उसी समय दलित नेता भी वहां पहुंच गए। दलित और सवर्ण नेताओं के बीच टकराव की स्थिति बनी।हालांकि भारी पुलिस बल मौके पर समय रहते पहुंच गया था और हालात को संभाल लिया। स्थिति को संभालने के लिए अब जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाग्या जारी कर दी है।
ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने धारा 163 का आदेश जारी किया है जिसके अंतर्गत ग्वालियर जिले की सीमा में सार्वजनिक स्थल पर धरना प्रदर्शन रैली जुलूस चल समारोह आदि आयोजित नहीं किए जा सकेंगे और ऐसा करने से पूर्व सक्षम अधिकारी के समक्ष अनुमति के लिए आवेदन करना होगा और अनुमति मिलने की स्थिति में ही आप ऐसा कोई आयोजन कर सकेंगे। किसी भी धर्म संप्रदाय जाति अथवा समूह की भावनाओं को आहत करने वाले ऐसे कृत्यों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है जो कानून व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव डाल सकते हैं। धारा एक सौ तिरेसठ के तहत लगी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दंडनीय कार्रवाई की जाएगी।
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हालांकि ऐसा बताया जा रहा है कि ग्वालियर कलेक्टर ने यह आदेश आगामी नववर्ष गणतंत्र दिवस व अन्य धार्मिक सामाजिक व राजनीतिक कार्यक्रमों को ध्यान में रखकर शहर में शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया है। किसी अनुभाग में सार्वजनिक कार्यक्रम से पहले उस अनुविभाग के अधिकारी से अनुमति लेनी होगी और यदि कार्यक्रम अनुविभाग की सीमाओं से जुड़ा हुआ है तो फिर अपर जिला दंडाधिकारी से अनुमति प्राप्त करनी होगी तभी आप ऐसा कार्यक्रम कर सकेंगे। निषेधाज्ञा धारा एक सौ तिरेसठ का आदेश जारी करने के पीछे प्रशासन की मंशा शहर में शांति और सौहार्द बनाए रखने की है।
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