बुरहानपुर मध्य प्रदेश: जब भी बात निर्वाचन कार्य की होती है तो चाहे मतदाता सूची का काम हो चाहे घर घर जाकर मतदाताओं के वेरिफिकेशन का काम हो हर काम में शिक्षा विभाग को इस तरह लगा दिया जाता है कि मानो शिक्षा विभाग नाकारा हो वहां के कर्मचारी अधिकारी खाली बैठे हों। और जब शिक्षकों की ड्यूटी निर्वाचन के कार्यों में लगा दी जाती है तो निसंदेह स्कूल में शिक्षक नहीं पहुंच पाते और छात्रों की शिक्षा प्रभावित होती है ऐसा ही एक मामला आया है। मध्य प्रदेश की बुरहानपुर से जहां एसआईआर में शिक्षकों की ड्यूटी लगा देने के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
बुरहानपुर जिला प्रशासन के आदेश के चलते प्राथमिक हिंदी/मराठी स्कूल क्रमांक 1 में सिर्फ इसलिए तालाबंदी हो गई की वहां के सारे शिक्षकों की ड्यूटी निर्वाचन कार्य में लगा दी। और शिक्षकों ने भी स्कूल में नोटिस बोर्ड पर लिख दिया कि आगामी आदेश तक स्कूल बंद रहेगा। सभी शिक्षक निर्वाचन कार्य में गए। और स्कूल में ताला बंद कर दिया। यह मामला हैरान करता है और कहीं न कहीं हमारे देश के सिस्टम पर बड़ा सवाल करता है के चुनाव जरूरी हैं या शिक्षा क्या शिक्षा को ताक पर रखकर निर्वाचन कार्य कराया जाना उचित है?
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शिक्षिका द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को यह सूचना दी है कि निर्वाचन कार्य में ड्यूटी होने से शाला बंद की जाती है। ज्ञात हो यह मामला सरकारी प्राथमिक हिंदी/मराठी स्कूल क्रमांक 1 का है, जहां केवल दो शिक्षक है और दोनों निर्वाचन कार्य में ड्यूटी पर लगा दी गई है। यह एक स्कूल का मामला तो अभी उजागर हुआ है लेकिन पूरे मध्यप्रदेश में इस समय तमाम जिलों के शिक्षा विभाग के कर्मचारी और शिक्षक एसआईआर के काम में लगे हुए हैं और कहीं न कहीं ऐसे स्कूलों की संख्या अन्य जिलों में भी हो सकती है जहां स्कूल एसआईआर के काम के चलते बंद करने खड़े हो यदि बंद नहीं भी किए गए हों तो संदेह बच्चों की शिक्षा तो प्रभावित हो ही रही होगी। अब सवाल यह है कि बच्चे को कौन पढ़ाएगा, क्या टीचर सिर्फ निर्वाचन ड्यूटी के लिए है। जो भी हो अधिकारी इस पर क्या निर्णय लेते है यह समय बताएगा।
