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शासकीय कार्यालयों में महिला सुरक्षा ताक पर, सुप्रीम कोर्ट का ICC गठन का आदेश बेअसर

दिसंबर 2024 में, सुप्रीम कोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से निपटने के लिए सभी सरकारी विभागों और उपक्रमों में आंतरिक परिवाद समिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि 10 से अधिक कर्मचारी वाले प्रत्येक प्रतिष्ठान में चाहे वह शासकीय हो या निजी एक ICC का गठन किया जाना चाहिए। 

ग्वालियर मध्य प्रदेश: सुप्रीम कोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से निपटने के लिए POSH अधिनियम 2013 के तहत सभी प्रतिष्ठानों में आंतरिक परिवाद समिति (ICC) स्थापित करने का आदेश दिया है, विशेष रूप से 10 से अधिक कर्मचारियों वाले संगठनों के लिए, क्योंकि यह पिछले विशाखा निर्णयों और POSH अधिनियम के कार्यान्वयन में कमियों को दूर करता है, जिसमें दिसंबर 2024 में दिए गए निर्देश शामिल हैं। इस तरह की आंतरिक परिवाद समिति हर शासकीय व निजी संस्थान में गठित की जानी थी लेकिन आदेश कई फाइलों में दब गया और आज भी तमाम विभाग में महिलाओं की सुरक्षा ताक पर है। जब द इंगलेज पोस्ट ने ग्वालियर के तमाम विभागों के आंतरिक परिवाद समिति के बारे में खोजबीन की तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। 

ग्वालियर में दस से ज्यादा कर्मचारियों वाले निजी और शासकीय विभागों को जोड़ें तो इनकी संख्या सैकड़ों में नहीं हजारों में होगी। केवल शासकीय विभाग की बात करें तो भी इस तरह के कार्यालय सौ से अधिक होंगे। और सबसे बड़ी हैरान करने वाली बात यह है कि तमाम ऐसे शासकीय विभाग हैं जिन्होंने अभी तक आंतरिक परिवाद समिति का गठन ही नहीं किया है और महिलाओं की सुरक्षा संबंधित सुप्रीम कोर्ट के इतने गंभीर आदेश पर मध्यप्रदेश शासन लापरवाही करता हुआ नजर आ रहा है। [The Ingles Post Exclusive] ग्वालियर में अभी भी लगभग तीन दर्जन ऐसे शासकीय विभाग हैं जिनके बारे में हमें जानकारी मिली है कि वहां आंतरिक परिवाद समिति का गठन नहीं हुआ है।

कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा संबंधित सुप्रीम कोर्ट के इतने महत्वपूर्ण आदेश की इतनी बदतर हालत ग्वालियर में उस समय हैं जब ग्वालियर की मुखिया कलेक्टर स्वयं एक महिला हैं। द इंगलेज पोस्ट ने जानकारी प्राप्त की है कि ग्वालियर कलेक्ट्रेट कार्यालय में संचालित भी कई विभागों में आंतरिक परिवार समिति का गठन अभी तक नहीं किया गया है। कलेक्ट्रेट कार्यालय में संचालित खाद्य सुरक्षा विभाग अभी तक आंतरिक परिवार समिति का गठन नहीं कर पाया है। यहां पर कार्य करने वाली महिलाएं असुरक्षित माहौल में कार्य कर रही हैं। यदि उनके साथ संबंधित पुरुष कर्मचारी कुछ गलत व्यवहार करते हैं तो उसकी सुनवाई के लिए अभी तक यहां पर आंतरिक परिवाद समिति का गठन नहीं किया गया है।

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ऐसे तमाम अन्य विभाग भी हैं और ऐसे विभागों की कुल संख्या लगभग तीन दर्जन है इनमें स्वास्थ्य विभाग का भी नाम है जहां महिला कर्मचारियों की संख्या अत्यधिक है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में अभी तक आंतरिक परिवाद समिति का गठन नहीं किया गया है। इसी तरह आबकारी विभाग में भी अभी तक आंतरिक परिवाद समिति का गठन नहीं किया गया है जबकि यहां पर भी तमाम महिला कर्मचारी पुरुष कर्मचारियों के साथ में कार्य करते हैं लेकिन इसके बावजूद महिला सुरक्षा से संबंधित इतने महत्वपूर्ण निर्णय को यहां पर ताक पर रख दिया गया है। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली हकीकत यह है कि इन तमाम विभागों को महिला बाल विकास विभाग द्वारा कई बार आंतरिक परिवाद समिति के गठन के लिए नोटिस दिया जा चुका है। इसके बावजूद भी यहां इसका गठन नहीं हुआ है। [द इंग्लेज पोस्ट की एक्सक्लूसिव खबर] महिला बाल विकास विभाग भी जिस तरह से इस गंभीर मामले में लचर और सुस्त रवैया अपना रहा है वह साफ दिखाता है कि न तो सरकार के अन्य विभाग आंतरिक परिवाद समिति के गठन के लिए गंभीर हैं और न ही महिला बाल विकास विभाग भी इस मामले में सख्ती दिखा रहा है जबकि कोर्ट के आदेशानुसार जिस कार्यालय में भी आंतरिक परिवार समिति नहीं गठित की गई हो उस पर पचास हजार रुपये के जुर्माना लगाने का प्रावधान तक है। हैरान करने वाली बात है कि समितियों के गठन न होने के बावजूद अभी तक महिला बाल विकास विभाग ने एक भी विभाग पर यह जुर्माना नहीं लगाया है।

आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का महत्व:

  • 1997 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) के लिए दिशानिर्देश स्थापित करने वाले विशाखा और अन्य बनाम राजस्थान राज्य मामले में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया था।  POSH यह अधिनियम विशाखा दिशानिर्देशों को कानूनी रूप देता है, जिसमें कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों को संभालने के लिए एक आन्तरिक परिवाद समिति (ICC) का गठन करना अनिवार्य है। दिसंबर 2024 में, सुप्रीम कोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से निपटने के लिए सभी सरकारी विभागों और उपक्रमों में आंतरिक परिवाद समिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि 10 से अधिक कर्मचारी वाले प्रत्येक प्रतिष्ठान में चाहे वह शासकीय हो या निजी एक ICC का गठन किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी कार्यान्वयन में खामियों को “परेशान करने वाला” बताया, खासकर छोटी फर्मों और क्षेत्रीय कार्यालयों में, और इस वर्ष के शुरुआत में और भी बाध्यकारी निर्देश जारी किए, जो 1997 के विशाखा दिशानिर्देशों पर आधारित हैं। ऐसे सभी सरकारी हों या निजी कार्यालयों और संस्थानों में आईसीसी का गठन किया जाना सुनिश्चित किया गया था जहां दस से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं। 

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  • नेतृत्व एक महिला द्वारा किया जाएगा। समिति में पांच सदस्य रहेंगे। समिति में कम से कम आधी संख्या में महिलाएँ शामिल होंगी। समिति में कम से कम एक पुरुष सदस्य होना भी अनिवार्य है। यह समिति महिलाओं के उत्पीड़न संबंधी मामलों का निराकरण करती है। शिकायत दस्तावेज़ी रूप में होनी चाहिए और घटना घटने के 60 दिनों के भीतर दर्ज की जानी चाहिए। शिकायत की 6 प्रतियाँ, सहायक दस्तावेज़ और गवाहों के नाम और पते प्रस्तुत करने होंगे। शिकायतकर्ता शिकायत दर्ज करने के 5 दिनों के भीतर समिति से मिलना चाहता है। 

हालांकि हमें यह जानकारी भी प्राप्त हुई है कि कुछ गिने चुने निजी संस्थानों और निजी स्कूलों ने आंतरिक परिवार समिति का गठन किया है लेकिन ऐसे निजी संस्थानों की संख्या भी काफी बड़ी है जिनको अभी तक इस परिवार समिति के गठन की जानकारी तक नहीं है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि जिन शासकीय विभागों को महिला बाल विकास विभाग ने नोटिस जारी किए हैं उन्होंने भी अब तक समिति का गठन नहीं किया है और इसमें जो तीन दर्जन के लगभग विभाग हैं उसमें स्वास्थ्य आबकारी और खाद्य सुरक्षा जैसे बड़े विभाग भी शामिल हैं। जहां एक और प्रदेश सरकार महिला सुरक्षा के बड़े दावे करती है वहीं महिला सुरक्षा से संबंधित इतने बड़े नियम को लागू कराने में सरकार असफल नजर आ रही है और सरकार के दावों की पोल आंतरिक परिवार समिति के गठन न होने की यह हकीकत खोल रही है।

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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