ग्वालियर, मध्य प्रदेश: ट्रेन के जरिए शराब तस्करी का एक चौंकाने वाला और अनोखा मामला सामने आया है, जिसने न केवल पुलिस और आरपीएफ को हैरान कर दिया बल्कि यह भी साबित कर दिया कि शराब तस्कर कानून से बचने के लिए किस तरह नए-नए तरीके अपनाते हैं। यह मामला तब उजागर हुआ जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा धार्मिक नगरी में शराबबंदी लागू करने के आदेश के बाद एक शराब तस्कर ने बड़े पैमाने पर शराब सप्लाई करने का बेहद चालाक तरीका निकाला।
दतिया जिले के भांडेर का रहने बाला नावेद खान नामक यह तस्कर धार्मिक आस्था के लिए प्रसिद्ध माँ पीताम्बरा की नगरी दतिया में ट्रेन के जरिए शराब की तस्करी कर रहा था। खास बात यह थी कि वह अपनी अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ट्रेन की जनरल बोगी का इस्तेमाल करता था और शराब को ऐसे छिपाता था कि पहली नजर में किसी को शक न हो। नावेद खान शराब की बोतलें अनाज से भरे कट्टों के अंदर छिपाकर लाता था। ऊपर से कट्टा पूरी तरह गेहूं या चावल से भरा हुआ दिखता था, जबकि नीचे की परत में देशी शराब के क्वार्टर पैक किए गए होते थे।
इस मामले का खुलासा ग्वालियर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर हुआ। ऑपरेशन सतर्क के तहत आरपीएफ टीम ने प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्रियों और सामान की चेकिंग शुरू की। इसी दौरान नावेद खान को उसके कट्टों के साथ देखा गया। उसके हाव-भाव और ट्रेन के इंतजार में खड़े रहने के तरीके ने आरपीएफ जवानों को संदेहास्पद लगा। तलाशी लेने पर जो राज़ सामने आया, उसने सभी को चौंका दिया। कट्टे को जब खोला गया तो ऊपर से साफ-सुथरा अनाज दिखाई दिया, लेकिन जैसे ही अनाज की परत हटाई गई, नीचे देशी शराब के 299 क्वार्टर रखे मिले।

यह मात्रा किसी छोटी-मोटी तस्करी का मामला नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर सप्लाई का संकेत देती थी। यह भी अंदेशा है कि नावेद खान इस तरीके से लंबे समय से शराब की खेप दतिया और आस-पास के इलाकों में पहुंचा रहा था।आरपीएफ ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी नावेद खान को पकड़ लिया और उसके पास से बरामद शराब के साथ उसे आबकारी विभाग के हवाले कर दिया। अब आबकारी विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, कितने समय से यह अवैध धंधा चल रहा था, और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मुख्यमंत्री के आदेश के बाद धार्मिक नगरी में शराबबंदी लागू की गई थी, ताकि वहां की आस्था और संस्कृति पर कोई आंच न आए। लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया कि कानून के डर से बचने के लिए तस्कर न केवल खतरनाक बल्कि बेहद चालाक तरीके अपनाते हैं। अनाज के कट्टों में शराब छिपाना एक ऐसा तरीका था, जिसे बिना सघन जांच के पकड़ना मुश्किल था।
ऑपरेशन सतर्क की सफलता यह भी दिखाती है कि रेलवे और आरपीएफ मिलकर अगर सख्त निगरानी रखें, तो इस तरह की अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है। यह मामला रेलवे सुरक्षा बल के सतर्कता और तत्परता का उदाहरण है, जिसने न केवल एक बड़े तस्कर को पकड़ा बल्कि एक धार्मिक नगरी में अवैध शराब की सप्लाई को भी रोका। फिलहाल आरपीएफ पुलिस ने आरोपी युवक को आबकारी विभाग को सुपुर्द कर पूछताछ शुरू कर दी है।
